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Essay on Omicron in hindi

Essay on Omicron in hindi :

Introduction :

“जीवन एक साइकिल की सवारी करने जैसा है अपना संतुलन बनाए रखने के लिए, आपको चलते रहना होगा।” अल्बर्ट आइंस्टीन की उपरोक्त पंक्ति पूरी तरह से कोविड-19 की वर्तमान स्थिति को प्रकट करती है। कोविड-19 की दूसरी लहर ने हमें बहुत कुछ सिखाया है और इसके प्रभाव को भुलाया नहीं जा सकता। हाल ही में अफ्रीका में कोविड-19 के एक नए प्रकार का पता चला है जिसे ओमिक्रॉन कहा जाता है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा “वेरिएंट ऑफ़ कंसर्न” के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ओमिक्रॉन को विश्व स्तर पर प्रमुख रूप से डेल्टा प्लस के साथ-साथ कोविड-19 वेरिएंट की सबसे अधिक घातक श्रेणी में रखा गया है।

  • इस संस्करण (वेरिएंट) में बड़ी संख्या में उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) होते हैं। यह गंभीर चिंता का कारण हैं क्योंकि ये नए संस्करण टीके से प्राप्त प्रतिरक्षा से बचने में शक्षम हैं।
  • वर्तमान टीके डेल्टा वेरिएंट के साथ साथ ओमिक्रॉन से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक हैं। ओमिक्रॉन बड़ी चिंता का कारण इसलिए है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में म्यूटेशन होता हैं जिससे इसकी संप्रेषणीयता में वृद्धि हुई है।
  • भारत में टीकाकरण अभियान ने गति पकड़ ली है। 40 प्रतिशत से अधिक भारतीयों को पूरी तरह से टीका लगाया गया है और 80 प्रतिशत से अधिक लोगो ने कम से कम पहली डोज़ ले ली है।
  • हमें इस नए संस्करण से खुद को बचाने के लिए टीका लगवाना चाहिए। टीके के कारण वायरस के संचलन में कमी आती हैं, नए म्यूटेशन की संभावना भी कम हो जाती हैं । अन्य सुरक्षात्मक उपायों के साथ टीकाकरण से हम इस खतरे को और कम कर सकते है और इस वायरस को फैलने से रोका जा सकता है।
  • इन सुरक्षात्मक उपायों में अच्छी तरह से फिट होने वाला मास्क पहनना, शारीरिक दूरी बनाए रखना, इनडोर स्थानों के वेंटिलेशन में सुधार करना, भीड़-भाड़ वाली और बंद जगहों पर जाने से बचना, नियमित रूप से हाथ साफ करना और छीकते वक़्त टिश्यू या रुमाल का इस्तेमाल करना आदि शामिल है।

Conclusion :

सरकार टीकाकरण के लिए निरंतर विभिन्न कदम उठा रही है, जिसमें पात्र समूहों के लिए बूस्टर खुराक सहित सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों को लक्षित करना शामिल है। इसके अलावा सीमित स्थानों पर भीड़ और लोगों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए सामाजिक उपाय किये जा रहे है। हमें विश्व स्वास्थ्य संगठन और सरकार द्वारा जारी किए गए कोविड -19 मानदंडों का भी पालन करना चाहिए ताकि हम जल्द से जल्द इस वायरस की श्रृंखला को तोड़ सकें क्योंकि हमारे बुजुर्ग कहते है न की “रोकथाम इलाज से बेहतर है।”

कोरोना महामारी में जीवन पर निबंध – Essay on Life during covid-19 in hindi

Introduction :

कोरोना महामारी ने हमारे दैनिक जीवन को पूरी बदल कर रख दिया है। इस महामारी के कारण लाखो लोग बुरी तरह से प्रभावित हुए है, जो या तो बीमार हैं या इस बीमारी के फैलने के कारण मारे जा रहे हैं। इस वायरल संक्रमण के सबसे आम लक्षण बुखार, सर्दी, खांसी, हड्डियों में दर्द और सांस लेने में समस्या है। यह, पहली बार लोगों को प्रभावित करने वाला एक नया वायरल रोग होने के कारण, अभी तक इसकी वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसलिए अतिरिक्त सावधानी बरतने पर जोर दिया जाना बहुत जरुरी है, जैसे कि स्वच्छता, नियमित रूप से हाथ धोना, सामाजिक दूरी और मास्क पहनना आदि।

विभिन्न उद्योग और व्यापारिक क्षेत्र इस महामारी के कारण प्रभावित हुए हैं जिनमें फार्मास्यूटिकल्स उद्योग, बिजली क्षेत्र और पर्यटन शामिल हैं। यह वायरस नागरिकों के दैनिक जीवन के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी भारी प्रभाव डाल रहा है। एक देश से दूसरे देश की यात्रा करने पर प्रतिबंध है। यात्रा के दौरान, कोरोना मामलों की संख्या बढ़ते हुए देखी गयी है जब परीक्षण किया गया, खासकर जब वे अंतरराष्ट्रीय दौरे से लौट रहे हों।

  • कोरोना वायरस ने भारत की शिक्षा को प्रभावित किया है। फिलहाल मार्च महीने से लॉकडाउन की वजह से विद्यालय बंद कर दिए गए है। सरकार ने अस्थायी रूप से स्कूलों और कॉलेजों को बंद कर दिया।
  • शिक्षा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण समय है क्यों कि इस अवधि के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। इसके साथ बोर्ड परीक्षाओं और नर्सरी स्कूल प्रवेश इत्यादि सब रुक गए है।
  • शिक्षा संस्थानों के बंद होने का कारण दुनिया भर में लगभग 600  मिलियन शिक्षार्थियों को प्रभावित करने की आशंका जातायी जा रही है।
  • ऑनलाइन क्लासेस के ज़रिये विद्यार्थी इस प्रकार के अनोखे शिक्षा प्रणाली को समझ पाए है।
  • लॉकडाउन के दुष्प्रभाव को ऑनलाइन शिक्षा पद्धति से कम कर दिया है।
  • केंद्र सरकार ने शिक्षा प्रणाली को विकसित करने हेतु पहले साल की तुलना में इस साल व्यय अधिक किया है ताकि कोरोना संकटकाल के नकारात्मक प्रभाव शिक्षा पर न पड़े। सीबीएसई ने विशेष टोल फ्री नंबर लागू किया है जिसके माध्यम से विद्यार्थी घर पर रहकर अधिकारयों से मदद ले सकते है।

बारहवीं कक्षा के विषय संबंधित पुस्तकें ऑनलाइन जारी की गयी है ताकि बच्चो की शिक्षा में बिलकुल बाधा न आये। लॉक डाउन में कुछ बच्चे शिक्षा को लेकर ज़्यादा गंभीर नहीं रहे, वह सोशल मीडिया में चैट मोबाइल में गेम्स खेलते है और अपने कीमती समय को बर्बाद कर रहे थे। अभी माता -पिता की यह जिम्मेदारी है कि लॉकडाउन में भी बच्चे घर पर अनुशासन का पालन करे और ऑनलाइन शिक्षा को गम्भीरतापूर्वक ले और खाली समय में ऑनलाइन एनिमेटेड शिक्षा संबंधित वीडियोस और विभिन्न ऑनलाइन वर्कशीट्स के प्रश्नो को हल करें।

  • कोविड-19 की महामारी ने आज समूचे विश्व की अर्थव्यवस्था, शैक्षिक व्यवस्था तथा सामाजिक स्तर को अत्यंत प्रभावित किया है।
  • कोरोना वायरस ने पुरे विश्व केशक्तिशाली देशों को घुटनो पर लाकर रख दिया है। सारे देश मिलकर कोरोना वायरस से मुक्ति पाने में जुटी है और डॉक्टर्स ,नर्सेज एकजुट होकर लड़ रहे है। उनकी जितनी भी सराहना की जाए कम होगी।
  • नरेंद्र मोदी जी ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कठोर कदम उठाये है जो हमारे देश की भलाई के लिए है और हम सभी को एक भारतीय होने के नाते इस कठोर समय में उनका साथ देना चाहिए ताकि हम देश को रोगमुक्त कर सके। ऐसा करने पर जल्द ही ज़िन्दगी फिर से वापस पटरी पर आ जाएगी। कोरोना वायरस के खिलाफ यह महायुद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक हम इस वायरस को जड़ से ख़त्म ने करे।
  • एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग हो या फिर लैब में लोगों की जांच, सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए कई तरह की तैयारी की है। इसके अलावा किसी भी तरह की अफवाह से बचने, खुद की सुरक्षा के लिए कुछ निर्देश जारी किए हैं जिससे कि कोरोना वायरस से निपटा जा सकता है।

Conclusion :

कोरोनावायरस से बचाव के लिए वर्तमान में कोवैक्सीन तथा कोवीशील्ड नामक दो टीके लगाए जाना शुरू हो चुके है। एक्सपर्ट्स के अनुसार दोनों ही टीके सुरक्षित है। इस वैक्सीन की दो डोज निश्चित समय के अंतराल पर दी जाती है। अभी यह वैक्सीन आयु के अनुसार देश में लगाई जा रही है।लॉकडाउन ने प्रवासी श्रमिकों को भी प्रभावित किया है, जिनमें से कई उद्योगों को बंद करने के कारण अपनी नौकरी खो चुके हैं और सरकार ने प्रवासियों के लिए राहत उपायों की घोषणा भी की ताकि वे अपने अपने घर वापस लौट सके। सभी सरकारें, स्वास्थ्य संगठन और अन्य प्राधिकरण लगातार कोरोना से प्रभावित मामलों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। डॉक्टर और सम्बंधित अधिकारी इन दिनों स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता को बनाए रखने में बहुत कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

कोरोना वायरस का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

Introduction :

कोरोनावायरस (COVID-19) एक संक्रामक रोग है जो कोरोनावायरस के कारण होता है। इसकी शुरुआत पहली बार दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से हुई। डब्ल्यूएचओ ने 30 जनवरी को कोरोनवायरस को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। कोरोनावायरस न केवल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है बल्कि दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर रहा है। विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, व्यापार के मामले में, चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। विश्व के निर्यात का 13% और आयात का 11% केवल चीन से होता है।

दुनिया के कई उद्योग अपने कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। पुरे विश्व में खरीदी जाने वाली लगभग एक तिहाई मशीनरी चीन से आती है, इसलिए कोरोनवायरस ने वैश्विक आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। चीन में कई कारखाने अब बंद हो गए हैं, निर्भर कंपनियों के लिए उत्पादन भी बंद हो गया है। उत्पादन में मंदी के कारण खपत में भी गिरावट आई है और इस तरह से दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है। कोरोनोवायरस फैलने के कारण लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण पर्यटन उद्योग को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कोरोना वायरस का आयात पर प्रभाव

  • इस वायरस से हवाई यात्रा, शेयर बाज़ार, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं सहित लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
  • यह वायरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है।
  • इन दो अर्थव्यवस्थाओं, जिन्हें वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में जाना जाता है, संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है।
  • निवेशकों के बाज़ारों से बाहर निकलने के कारण शेयर बाज़ार सूचकांक में लगातार गिरावट आई है। लोग बड़ी राशि को अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र यथा- ‘सरकारी बाॅण्ड’ में लगा रहे हैं जिससे कीमतों में तेज़ी तथा उत्पादकता में कमी देखी गई है।
  • अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब अनुभव हाल ही में कोरोना वायरस के कारण महसूस किया गया, ध्यातव्य है कि अमेरिकी बाज़ार में 12% से अधिक की गिरावट आई है।
  • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि जो निवेशक ऐसे संकट के समय सामान्यत: स्वर्ण में निवेश करते हैं, इस संकट के समय उन्होंने इसका भी बहिष्कार कर दिया जिससे सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, तथा लोगों ने सरकारी गारंटी युक्त ‘ट्रेज़री बिल’ (Treasury Bills) में अधिक निवेश करना उचित समझा।
  • Apple, Nvidia, Adidas जैसी कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ये चीन के आपूर्तिकर्त्ताओं पर निर्भर हैं, इन्हें भविष्य में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव

  • भारत जब अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में इस वायरस का केवल सतही प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा ऐसे कठिन समय में समस्या का समाधान मात्र ‘एयर लिफ्टिंग’ से संभव नहीं है।
  • यह समस्या न केवल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करेगी, अपितु यह भारत के फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।
  • निर्यात, जिसे अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है, इसमें वैश्विक मंदी की स्थिति में और गिरावट देखी जा सकती है, साथ ही निवेश में भी गिरावट आ सकती है।
  • भारतीय कंपनियाँ चीन आधारित ‘वैश्विक आपूर्ति शृंखला’ में शामिल प्रमुख भागीदार नहीं हैं, अत: भारतीय कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित नहीं होंगी।
  • दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जो कि वृहद् अर्थव्यवस्था और उच्च मुद्रास्फीति के चलते अच्छी खबर है।
  • भारत सरकार को लगातार विकास की गति का अवलोकन करने की आवश्यकता है, साथ ही चीन पर निर्भर भारतीय उद्योगों को आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करनी चाहिये।
  • कोरोना वायरस जैसी बीमारी की पहचान, प्रभाव, प्रसार एवं रोकथाम पर चर्चा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जानी चाहिये ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।

Conclusion :

वायरस जनित यह संकट किसी अन्य वित्तीय संकट से बिलकुल अलग है। अन्य वित्तीय संकटों का समाधान समय-परीक्षणित उपायों जैसे- दर में कटौती, बेल-आउट पैकेज (विशेष वित्तीय प्रोत्साहन) आदि से किया जा सकता है, परंतु वायरस जनित संकट का समाधान इन वित्तीय उपायों द्वारा किया जाना संभव नहीं है। ऑटोमोबाइल उद्योग पहले ही आर्थिक मंदी के कारण संकट में है और अब माल और सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन में कमी आ रही है। चीन से आपूर्ति में रुकावट के कारण वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है। यद्यपि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कोरोनोवायरस के सटीक प्रभाव को निर्धारित करना मुश्किल है, फिर भी यह स्पष्ट है कि यह प्रभाव लंबे समय तक रहेगा।

अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का प्रभाव पर निबंध

Introduction :

कोरोना वायरस एक प्रकार का वायरस है जो मानव और अन्य स्तनधारियों के श्वसन पथ को प्रभावित करता है। ये सामान्य सर्दी, निमोनिया और अन्य श्वसन लक्षणों से जुड़े हैं। कोरोना वायरस दुनिया भर में बीमारी बन गया है और दुनिया के सभी देश इसका सामना कर रहे हैं। जिसके कारण दुनिया की आबादी अपने घर के अंदर रहने को मजबूर है। कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण देश में 53% तक व्यवसाय प्रभावित हुए है।

कोरोना वायरस का प्रकोप सबसे पहले 31 दिसंबर, 2019 को चीन के वुहान में पड़ा। विश्व स्वास्थ्य संगठन इसको रोकने के उपायों के बारे में देशों को सलाह देने के लिए वैश्विक विशेषज्ञों, सरकारों और अन्य स्वास्थ्य संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है। व्यापार के मामले में, चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। चीन विश्व के कुल निर्यात का 13% और आयात का 11% हिस्सेदार है।

इसका असर भारतीय उद्योग पर पड़ेगा। भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक आयात चीन से करीब 45% है। दुनिया भर में भारत से खरीदी जाने वाली लगभग एक तिहाई मशीनरी चीन से आती है और लगभग 90% मोबाइल फोन चीन से आते हैं। इसलिए, हम कह सकते हैं कि कोरोनावायरस के मौजूदा प्रकोप के कारण, चीन पर आयात निर्भरता का भारतीय उद्योग पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। देश भर में बड़ी संख्या में किसानों को भी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

  • इस वायरस से हवाई यात्रा, शेयर बाज़ार, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं सहित लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
  • यह वायरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है।
  • इन दो अर्थव्यवस्थाओं, जिन्हें वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में जाना जाता है, संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है।
  • निवेशकों के बाज़ारों से बाहर निकलने के कारण शेयर बाज़ार सूचकांक में लगातार गिरावट आई है। लोग बड़ी राशि को अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र यथा- ‘सरकारी बाॅण्ड’ में लगा रहे हैं जिससे कीमतों में तेज़ी तथा उत्पादकता में कमी देखी गई है।
  • अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब अनुभव हाल ही में कोरोना वायरस के कारण महसूस किया गया, ध्यातव्य है कि अमेरिकी बाज़ार में 12% से अधिक की गिरावट आई है।
  • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि जो निवेशक ऐसे संकट के समय सामान्यत: स्वर्ण में निवेश करते हैं, इस संकट के समय उन्होंने इसका भी बहिष्कार कर दिया जिससे सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, तथा लोगों ने सरकारी गारंटी युक्त ‘ट्रेज़री बिल’ (Treasury Bills) में अधिक निवेश करना उचित समझा।
  • Apple, Nvidia, Adidas जैसी कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ये चीन के आपूर्तिकर्त्ताओं पर निर्भर हैं, इन्हें भविष्य में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव

  • भारत जब अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में इस वायरस का केवल सतही प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा ऐसे कठिन समय में समस्या का समाधान मात्र ‘एयर लिफ्टिंग’ से संभव नहीं है।
  • यह समस्या न केवल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करेगी, अपितु यह भारत के फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।
  • निर्यात, जिसे अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है, इसमें वैश्विक मंदी की स्थिति में और गिरावट देखी जा सकती है, साथ ही निवेश में भी गिरावट आ सकती है।
  • भारतीय कंपनियाँ चीन आधारित ‘वैश्विक आपूर्ति शृंखला’ में शामिल प्रमुख भागीदार नहीं हैं, अत: भारतीय कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित नहीं होंगी।
  • दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जो कि वृहद् अर्थव्यवस्था और उच्च मुद्रास्फीति के चलते अच्छी खबर है।
  • भारत सरकार को लगातार विकास की गति का अवलोकन करने की आवश्यकता है, साथ ही चीन पर निर्भर भारतीय उद्योगों को आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करनी चाहिये।
  • कोरोना वायरस जैसी बीमारी की पहचान, प्रभाव, प्रसार एवं रोकथाम पर चर्चा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जानी चाहिये ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।
  • वायरस जनित यह संकट किसी अन्य वित्तीय संकट से बिलकुल अलग है। अन्य वित्तीय संकटों का समाधान समय-परीक्षणित उपायों जैसे- दर में कटौती, बेल-आउट पैकेज (विशेष वित्तीय प्रोत्साहन) आदि से किया जा सकता है, परंतु वायरस जनित संकट का समाधान इन वित्तीय उपायों द्वारा किया जाना संभव नहीं है।

Conclusion :

ऑटोमोबाइल उद्योग पहले ही आर्थिक मंदी के कारण संकट में है और अब माल और सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन में कमी आ रही है। होटल और एयरलाइंस जैसे विभिन्न व्यवसाय अपने कर्मचारियों का वेतन काट रहे हैं और छंटनी भी कर रहे हैं। भारत में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों ने अस्थायी रूप से काम को निलंबित कर दिया है। चीन से आपूर्ति में रुकावट के कारण वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है। यद्यपि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कोरोनोवायरस के सटीक प्रभाव को निर्धारित करना मुश्किल है, फिर भी यह स्पष्ट है कि यह प्रभाव लंबे समय तक रहेगा। विश्व बैंक और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने 2021 के लिए भारत की वृद्धि को कम कर दिया है, हालांकि, वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत के लिए जीडीपी विकास दर का आकलन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष  ने 1.9% बताया है जो जी -20 देशों में सबसे अधिक है।

भारत में COVID-19 का सामाजिक प्रभाव पर निबंध

Introduction :

कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी एक वैश्विक समस्या बन चुकी है और इस बीमारी का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार ने 24 मार्च, 2020 को देश में लॉकडाउन लागू किया। सरकार ने कोरोनोवायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में सफलता का दावा किया है, जिसमें कहा गया है कि यदि राष्ट्रव्यापी तालाबंदी नहीं की गई होती तो यहाँ COVID-19 मामलों की संख्या अधिक होती। COVID-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन में हमारे खानपान से लेकर हमारी कार्यशैली बदल चुकी है जिसके कारण शारीरिक गतिविधियो में कमी आयी है जिसके कारण मोटापा, मधुमेह और हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा दिया है।

कोरोना वायरस की वजह से कारोबार ठप्प पड़ गए हैं, कई देशों में अंतरराष्ट्रीय यात्राएं रद्द कर दी गई हैं, होटल-रेस्त्रां तो बंद कर दिए गए हैं, कई कंपनियां ख़ासतौर पर, आईटी सेक्टर की कंपनियों ने लोगों को वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की सुविधा दे रही हैं। दुनिया भर के क्षेत्रों में इस महामारी का प्रभाव दिखाई दे रहा है, लेकिन भारत में कमज़ोर वर्गों, महिलाओं और बच्चों पर इसका प्रभाव सबसे अधिक हुआ है। लॉकडाउन के परिणामस्वरूप, समाज के कमजोर वर्ग के बीच कुपोषण की संभावना बढ़ गयी है।

भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने हाल ही में COVID-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई में सरकार की पहल के रूप में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्ना योजना (PMGKAY) के तहत 12.96 लाख मीट्रिक टन अनाज आवंटित किया। प्रवासी श्रमिकों का मुद्दा इस महामारी का सबसे प्रमुख मुद्दा रहा, जहाँ लाखों लोग बेरोजगार हो गए और बिना पैसे, भोजन और आश्रय के अपने अपने घरो तक पैदल जाने को मजबूर हुए हलाकि सरकार ने बाद में उनके वापस लौटने की व्यवस्था भी कराई।

शिक्षा के क्षेत्र में

  • अप्रैल माह के अंत में जब विश्व के अधिकांश देशों में लॉकडाउन लागू किया गया तो विद्यालयों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था, जिसके कारण विश्व के लगभग 90 प्रतिशत छात्रों की शिक्षा बाधित हुई थी और विश्व के लगभग 1.5 बिलियन से अधिक स्कूली छात्र प्रभावित हुए थे।
  • कोरोना वायरस के कारण शिक्षा में आई इस बाधा का सबसे अधिक प्रभाव गरीब छात्रों पर देखने को मिला है और अधिकांश छात्र ऑनलाइन शिक्षा के माध्यमों का उपयोग नहीं कर सकते हैं, इसके कारण कई छात्रों विशेषतः छात्राओं के वापस स्कूल न जाने की संभावना बढ़ गई है।
  • नवंबर 2020 तक 30 देशों के 572 मिलियन छात्र इस महामारी के कारण प्रभावित हुए हैं, जो कि दुनिया भर में नामांकित छात्रों का 33% है।

लैंगिक हिंसा में वृद्धि

  • लॉकडाउन और स्कूल बंद होने से बच्चों के विरुद्ध लैंगिक हिंसा की स्थिति भी काफी खराब हुई है। कई देशों ने घरेलू हिंसा और लैंगिक हिंसा के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।
  • जहाँ एक ओर बच्चों के विरुद्ध अपराध के मामलों में वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर अधिकांश देशों में बच्चों एवं महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा की रोकथाम से संबंधित सेवाएँ भी बाधित हुई हैं।

आर्थिक प्रभाव

  • वैश्विक स्तर महामारी के कारण वर्ष 2020 में बहुआयामी गरीबी में रहने वाले बच्चों की संख्या में 15% तक बढ़ोतरी हुई है और इसमें अतिरिक्त 150 मिलियन बच्चे शामिल हो गए हैं।
  • बहुआयामी गरीबी के निर्धारण में लोगों द्वारा दैनिक जीवन में अनुभव किये जाने वाले सभी अभावों/कमी जैसे- खराब स्वास्थ्य, शिक्षा की कमी, निम्न जीवन स्तर, कार्य की खराब गुणवत्ता, हिंसा का खतरा आदि को समाहित किया जाता है। 
  • महामारी का दूसरा सामाजिक प्रभाव ‘नस्लभेदी प्रभाव’ का उत्पन्न होना है। जैसा कि हमें मालूम है इस बीमारी की शुरुआत चीन से हुई है इसलिए चीनी नागरिकों को आगामी कुछ वर्षो तक इस महामारी के चलते जाना-पहचाना जा सकता है।
  • भारत में तो नॉर्थ ईस्ट के भारतीयों पर पहले से ही चीनी, नेपाली, चिंकी-पिंकी, मोमोज़ जैसी नस्लभेदी टिप्पणियां होती रही हैं। अब इस क्रम में कोरोना का नाम भी जुड़ना तय है, जिसे एक सामाजिक समस्या के रूप में देखा जाना चाहिए। 

इस सम्बन्ध में उपाय

  • सभी देशों की सरकारों को डिजिटल डिवाइड को कम करके यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिये कि सभी बच्चों को सीखने के समान अवसर प्राप्त हों और किसी भी छात्र के सीखने की क्षमता प्रभावित न हो।
  • सभी की पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित की जानी चाहिये और जिन देशों में टीकाकरण अभियान प्रभावित हुए हैं उन्हें फिर से शुरू किया जाना चाहिये।
  • बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाना चाहिये और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और लैंगिक हिंसा जैसे मुद्दों को संबोधित किया जाना चाहिये।

Conclusion :

सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता आदि तक बच्चों की पहुँच को बढ़ाने का प्रयास किया जाए और पर्यावरणीय अवमूल्यन तथा जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को संबोधित किया जाए। बाल गरीबी की दर में कमी करने का प्रयास किया जाए और बच्चों की स्थिति में समावेशी सुधार सुनिश्चित किया जाए। सरकार को समस्याओं के समाधान को खोजने का प्रयास करना चाहिए ताकि ऐसी समस्याएँ दोबारा पैदा न हो। इस वायरस से लड़ने के लिए सभी व्यक्तियों, सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों को एकसाथ मिलकर योजना बनाकर सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।

पर्यावरण पर कोरोना वायरस का सकारात्मक प्रभाव पर निबंध

Introduction :

कोरोना वायरस दुनिया भर में महामारी बन चुका है और सभी देश इसका सामना कर रहे हैं। जिसके कारण सभी देशो के लोग अपने घरो के अंदर रहने को मजबूर है। कोरोना वायरस के कारण देश में व्यावसायिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोरोनोवायरस ने दुनिया भर में बहुत सारे लोगों का जीवन ले चूका है। कोरोनोवायरस के प्रसार को रोकने के लिए, विभिन्न देशों की सरकारें इसके प्रसार को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठा रही हैं। जहां तक हमारे पर्यावरण का सवाल है, इसपर कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे है। अब धुएँ का उत्सर्जन कम हो गया है जिसके परिणामस्वरूप आसमान स्वच्छ हो गया है।

यही नहीं, सड़को पर वाहनों का उपयोग भी कम हुआ है, जिसके कारण  CO2 गैसों का उत्सर्जन भी काम हुआ है। और अन्य गैसे, जैसे नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी पर्यावरण में सीमित हो पाया है। यह इंगित करता है कि हवा अधिक शुद्ध हो गई है और हम शुद्ध हवा में सांस ले सकते हैं। कोरोनावायरस से निपटने के लिए, कंपनियों ने श्रमिकों को घर से काम करने के लिए कहा है। इससे सड़क पर वाहन कम हो गए हैं। इसके अलावा, प्लास्टिक की खपत भी कम हो गई है क्योंकि अब लोग डिस्पोजेबल ग्लास का प्रयोग चाय या कॉफी के लिए नहीं कर रहे है।

पर्यावरण को फायदा

  • भारत में कई राज्यों से उन नदियों के अचानक साफ हो जाने की ख़बरें आ रही हैं जिनके प्रदूषण को दूर करने के असफल प्रयास दशकों से चल रहे हैं. दिल्ली की जीवनदायिनी यमुना नदी के बारे में भी ऐसी ही ख़बरें आ रही हैं.
  • पिछले दिनों सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें आईं जिन्हें डालने वालों ने दावा किया कि दिल्ली में जिस यमुना का पानी काला और झाग भरा हुआ करता था, उसी यमुना में आज कल साफ पानी बह रहा है. 
  • झील नगरी नैनीताल समेत भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल सभी में झीलों का पानी न केवल पारदर्शी और निर्मल दिखाई दे रहा है, बल्कि इन झीलों की खूबसूरती भी बढ़ गई है.
  • पिछले कई साल से झील के जलस्तर में जो गिरावट दिखती थी, वह भी इस बार नहीं दिख रही. पर्यावरणीय तौर पर इस कारण हवा भी इतनी शुद्ध है कि शहरों से पहाड़ों की चोटियां साफ दिख रही हैं.
  • उत्तराखंड स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के निदेशक के अनुसार हिमालय की धवल चोटियां साफ दिखने लगी हैं. लॉकडाउन के कारण वायुमंडल में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिला है. इससे पहले कभी उत्तर भारत के ऊपरी क्षेत्र में वायु प्रदूषण का इतना कम स्तर देखने को नहीं मिला.

लॉकडाउन के बाद 27 मार्च से कुछ इलाकों में रूक-रूक के बारिश हो रही है. इससे हवा में मौजूद एयरोसॉल नीचे आ गए. यह लिक्विड और सॉलिड से बने ऐसे सूक्ष्म कण हैं, जिनके कारण फेफड़ों और हार्ट को नुकसान होता है. एयरोसॉल की वजह से ही विजिबिलिटी घटती है. जिन शहरों की एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI ख़तरे के निशान से ऊपर होते थे. वहां आसमान गहरा नीला दिखने लगा है. न तो सड़कों पर वाहन चल रहे हैं और न ही आसमां में हवाई जहाज. बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों जैसे अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी गिरावट आई है. इससे वातावरण में डस्ट पार्टिकल न के बराबर हैं और कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन भी सामान्य से बहुत अधिक नीचे आ गया है. इस तरह की हवा मनुष्यों के लिए बेहद लाभदायक है. अगर देखा जाये तो झारखंड के भी शहरों में इस लॉकडाउन का प्रभाव दिखा रहा है.

  • झारखण्ड की राजधानी रांची के कुछ जगहों में मोर देखे जाने की भी सूचना है. रूक रूक के बारिश भी हो रही है. लोग एयर कंडीशनर और कूलर का भी इस्तेमाल नहीं के बराबर कर रहे हैं जो की इस गर्मी के मौसम में एक आश्चर्य घटना है.
  • ध्वनि प्रदूषण भी अभूतपूर्व ढंग से कम हो गया है. तापमान ज्य़ादा होने पे भी उतनी गर्मी नहीं लग रही है जितनी पिछले साल थी.
  • बता दें कि कई महीनों से झारखंड में वाहन प्रदूषण के खिलाफ़ जांच अभियान चलाया जा रहा था. जगह-जगह दोपहिये एवं चार पहिये वाहन, मिनी बस और टेंपो समेत विभिन्न कॉमर्शियल वाहनों के प्रदूषण स्तर को चेक किया जा रहा था और निर्धारित मात्रा से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जा रही थी.
  • इसके बाद भी न तो वाहनों द्वारा छोड़े जा रहे प्रदूषणकारी गैसों की मात्रा कम हो रही थी और न ही वायु प्रदूषण में कमी आ रही थी. लेकिन, कोरोना के भय से सड़क पर चलने वाले वाहनों की संख्य़ा में आयी भारी गिरावट आने के कारण पिछले दो महीनों से से इसमें काफी सुधार दिखता है.
  • वाहनों की आवाजाही न होने से सड़कों से अब धूल के गुबार नहीं उठ रहे हैं. झारखंड का एयर क्वालिटी इंडेक्स वायु प्रदूषण के कम हो जाने से 50-40 के बीच आ गया है जो पिछले साल 150 से 250 तक रहता था.
  • ये हवा मनुष्य के स्वस्थ लिए फायदेमंद है. वायु और धूल प्रदूषण के काफी कम हो जाने से आसमन में रात को सारे तारे दिखा रहे हैं जो पहले नहीं दीखते थे. 
  • ध्वनि प्रदूषण तो इतना कम है की आपकी आवाज दूर तक सुनाई दे रही है. चिड़ियों का चहचहाना सुबह से ही शुरू हो जा रहा है.कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कहा की रात दो बजे भी चिड़ियों की आवाज़ सुनाई दे रही है ख़ासकर कोयल और बुलबुल की. कुछ ऐसी भी चिड़ियाँ नज़र आ रही हैं जो पहले कम दिखती थीं. 

Conclusion :

इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में, जहाँ हम सभी व्यस्त जीवन जी रहे है, हमें हमारी गतिविधियों के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में भी सोचना चाहिए  हालाँकि, अब लॉकडाउन के कारण हम घर पर रहने को मजबूर हैं, हमारे पास अपनी गतिविधियों के बारे में सोचने और सुधार करने के लिए पर्याप्त समय मिल चूका है। इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता कि कोरोनोवायरस का मानव जाति पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। हालांकि, इसने पर्यावरण पर निश्चित रूप से  सकारात्मक प्रभाव डाले है।

कोविड 19 वैक्सीन पर निबंध

Introduction :

भारत सरकार ने एस्ट्रा-ज़ेनेका और भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोविशिल्ड और कोवाक्सिन नाम के कोविड -19 टीकों को मंजूरी दे दी है। इसे देखते हुए हमारे पीएम मोदी जी ने 16 जनवरी, 2021 को कोविड -19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत की, जो हर साल लाखों लोगों की जान बचा सकता है। यह पूरे देश में लागू होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके लिए कुल 3006 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं । हालाँकि भारत में सम्पूर्ण रूप से टीकाकरण करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इसके लिए कम से कम 30 से 40% लोगों का टीकाकरण करने की आवस्यकता होगी ।

  • वैक्सीन हमारे शरीर को किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है. वैक्सीन में किसी जीव के कुछ कमज़ोर या निष्क्रिय अंश होते हैं जो बीमारी का कारण बनते हैं.
  • ये शरीर के ‘इम्यून सिस्टम’ यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण की पहचान करने के लिए प्रेरित करते हैं और उनके ख़िलाफ़ शरीर में एंटीबॉडी बनाते हैं जो बाहरी हमले से लड़ने में हमारे शरीर की मदद करती हैं.
  • वैक्सीन लगने का नकारात्मक असर कम ही लोगों पर होता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके साइड इफ़ेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है.
  • हल्का बुख़ार या ख़ारिश होना, इससे सामान्य दुष्प्रभाव हैं. वैक्सीन लगने के कुछ वक़्त बाद ही हम उस बीमारी से लड़ने की इम्यूनिटी विकसित कर लेते हैं.
  • अमेरिका के सेंटर ऑफ़ डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि वैक्सीन बहुत ज़्यादा शक्तिशाली होती हैं क्योंकि ये अधिकांश दवाओं के विपरीत, किसी बीमारी का इलाज नहीं करतीं, बल्कि उन्हें होने से रोकती हैं.
  • भारत में दो टीके तैयार किए गए हैं. एक का नाम है कोविशील्ड जिसे एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने इसका उत्पादन किया और दूसरा टीका है भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया कोवैक्सीन.

रूस ने अपनी ही कोरोना वैक्सीन तैयार की है जिसका नाम है ‘स्पूतनिक-V’ और इसे वायरस के वर्ज़न में थोड़ बदलाव लाकर तैयार किया गया. इस वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल की अनुमति मिल चुकी है. मॉडर्ना वैक्सीन को भी भारत में इस्तेमाल की मंज़ूरी मिल चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि संक्रमण को रोकने के लिए कम से कम 65-70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगानी होगी, जिसका मतलब है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करना होगा. कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में न सिर्फ करोड़ों लोगों की सेहत को प्रभाव किया है बल्कि समाज के सभी वर्गों में डिप्रेशन, तनाव का कारण भी बनी है. कोविड वैक्सीन लगवाने से एक स्पष्ट और आश्चर्यजनक फायदा मिलता है. ये आपको गंभीर रूप से बीमारी या वायरस की चपेट में आने पर मौत से बचाती है ये अपने आप में खुद हैरतअंगज फायदा है.

  • शोधकर्ताओं का कहना है कि टीकाकरण करानेवाले लोगों को मानसिक स्वास्थ्य मेंमहत्वपूर्ण सुधार का भी अनुभव हो सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि वैक्सीन संभावित तौर पर मानसिक स्वास्थ्य को फायदा पहुंचा सकती है.
  • प्लोस पत्रिका में प्रकाशित रिसर्च का मकसद ये मूल्यांकन करना था कि वैक्सीन का पहला डोज लगवाने से मानसिक परेशानी में कम समय के लिए क्या प्रभाव पड़ते हैं.
  • शोधकर्ताओं ने 8 हजार व्यस्को के मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण रिसर्च के तौर पर 1 मार्च 2020 और 31 मार्च 2021 के बीच किया. रिसर्च में टीकाकरण से संक्षिप्त समय के लिए सीधे प्रभाव का खुलासा हुआ.
  • महत्वपूर्ण बात ये है कि रिसर्च ने टीकाकरण कराने के सरकारात्मक प्रभाव में इजाफा किया. शोधकर्ताओं ने बताया कि हम प्रमाणित करते हैं कि कैसे दिमागी सेहत की परेशानी टीकाकरण करानेवाले और वैक्सीन नहीं लगवानेवालों के बीच अलग हो गई.
  • आर्थिक अनिश्चितता और कोविड-19 से जुड़ी सेहत के जोखिम के बीच तुलना करने पर हमें दिमागी सेहत पर टीकाकरण के कम समय के प्रभाव मालूम हुए. 
  • कोविड-19 वैक्सीन से स्वास्थ्य के जोखिम को कम करने, आर्थिक और सामाजिक नतीजे सुधारने की उम्मीद की जाती है, जिसके बाद दिमागी सेहत के लिए संभावित लाभ होंगे.  डॉक्टर एचके महाजन ने कहा, “कोरोना महामारी ने रोजगार, आय और सेहत समेत लोगों की जिंदगी के कई पहलुओं को प्रभावित किया है.
  • इस वायरल बीमारी के मानसिक पहलू मनोवैज्ञानिक तनाव, चिंता, डिप्रेशन, सामाजिक अलगाव और खुदकुशी के विचार तक सीमित नहीं हैं.” उन्होंने आगे बताया, “बड़े पैमाने पर टीकाकरण ने हर्ड इम्यूनिटी बढ़ाने, लोगों के बीच चिंता कम करने में बड़ा योगदान दिया.
  • उसने आजीविका गंवाने वालों की दोबारा रोजगार के पहलू को भी बढ़ाया. टीकाकरण के गंभीर संक्रमण से सुरक्षा पर जागरुकता फैलने से लोग कोरोना से पहले की स्थिति में धीरे-धीरे लौट रहे हैं. इस तरह ये दिमागी सेहत के मुद्दे जैसे चिंता, डिप्रेशन दूर करने में मदद कर रहा है.”

Conclusion :

वैक्सीन को चरणबद्ध तरीके से लोगो को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके पहले चरण में, सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों का टीकारण किया जाएगा। क्योंकि वे उन लोगों के निकट संपर्क में होते हैं जो कोविड -19 से संक्रमित हैं। फिर इसे पुलिस, सशस्त्र बलों, नगरपालिका कर्मचारियों और अन्य विभागीय कर्मचारियों को प्रदान किया जाएगा। तीसरे चरण में, 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग और वे लोग जिन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप है या जिन्होंने अंग प्रत्यारोपण कराया है, ऐसे लोगो का टीकाकरण किया जाएगा।

उसके बाद, स्वस्थ वयस्कों, किशोरों और बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। केंद्र सरकार स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम कर्मियों पर टीकाकरण का खर्च खुद से वहन करेगी । टीकाकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, सरकार ने CoWIN नामक एक एप्लिकेशन भी विकसित की है, जो कोविड -19 वैक्सीन लाभार्थियों के लिए  वैक्सीन स्टॉक, भंडारण और व्यक्तिगत ट्रैकिंग की सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करने में मददगार साबित हो रही है। कोविड -19 के लिए टीकाकरण भारत में स्वैच्छिक है। यह लोगों को इस बीमारी से बचाने का एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। टीके हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ काम करके बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं।

कोविड 19 वैक्सीन पर निबंध

Introduction :

भारत सरकार ने एस्ट्रा-ज़ेनेका और भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोविशिल्ड और कोवाक्सिन नाम के कोविड -19 टीकों को मंजूरी दे दी है। इसे देखते हुए हमारे पीएम मोदी जी ने 16 जनवरी, 2021 को कोविड -19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत की, जो हर साल लाखों लोगों की जान बचा सकता है। यह पूरे देश में लागू होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके लिए कुल 3006 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं । हालाँकि भारत में सम्पूर्ण रूप से टीकाकरण करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इसके लिए कम से कम 30 से 40% लोगों का टीकाकरण करने की आवस्यकता होगी ।

  • वैक्सीन हमारे शरीर को किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है. वैक्सीन में किसी जीव के कुछ कमज़ोर या निष्क्रिय अंश होते हैं जो बीमारी का कारण बनते हैं. 
  • ये शरीर के ‘इम्यून सिस्टम’ यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण की पहचान करने के लिए प्रेरित करते हैं और उनके ख़िलाफ़ शरीर में एंटीबॉडी बनाते हैं जो बाहरी हमले से लड़ने में हमारे शरीर की मदद करती हैं.
  • वैक्सीन लगने का नकारात्मक असर कम ही लोगों पर होता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके साइड इफ़ेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है. हल्का बुख़ार या ख़ारिश होना, इससे सामान्य दुष्प्रभाव हैं. वैक्सीन लगने के कुछ वक़्त बाद ही हम उस बीमारी से लड़ने की इम्यूनिटी विकसित कर लेते हैं.
  • अमेरिका के सेंटर ऑफ़ डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि वैक्सीन बहुत ज़्यादा शक्तिशाली होती हैं क्योंकि ये अधिकांश दवाओं के विपरीत, किसी बीमारी का इलाज नहीं करतीं, बल्कि उन्हें होने से रोकती हैं.
  • भारत में दो टीके तैयार किए गए हैं. एक का नाम है कोविशील्ड जिसे एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने इसका उत्पादन किया और दूसरा टीका है भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया कोवैक्सीन.
  • रूस ने अपनी ही कोरोना वैक्सीन तैयार की है जिसका नाम है ‘स्पूतनिक-V’ और इसे वायरस के वर्ज़न में थोड़ बदलाव लाकर तैयार किया गया. इस वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल की अनुमति मिल चुकी है. 
  • मॉडर्ना वैक्सीन को भी भारत में इस्तेमाल की मंज़ूरी मिल चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि संक्रमण को रोकने के लिए कम से कम 65-70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगानी होगी, जिसका मतलब है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करना होगा.

कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में न सिर्फ करोड़ों लोगों की सेहत को प्रभाव किया है बल्कि समाज के सभी वर्गों में डिप्रेशन, तनाव का कारण भी बनी है. कोविड वैक्सीन लगवाने से एक स्पष्ट और आश्चर्यजनक फायदा मिलता है. ये आपको गंभीर रूप से बीमारी या वायरस की चपेट में आने पर मौत से बचाती है ये अपने आप में खुद हैरतअंगज फायदा है. शोधकर्ताओं का कहना है कि टीकाकरण करानेवाले लोगों को मानसिक स्वास्थ्य मेंमहत्वपूर्ण सुधार का भी अनुभव हो सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि वैक्सीन संभावित तौर पर मानसिक स्वास्थ्य को फायदा पहुंचा सकती है.

  • प्लोस पत्रिका में प्रकाशित रिसर्च का मकसद ये मूल्यांकन करना था कि वैक्सीन का पहला डोज लगवाने से मानसिक परेशानी में कम समय के लिए क्या प्रभाव पड़ते हैं. 
  • शोधकर्ताओं ने 8 हजार व्यस्को के मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण रिसर्च के तौर पर 1 मार्च 2020 और 31 मार्च 2021 के बीच किया. रिसर्च में टीकाकरण से संक्षिप्त समय के लिए सीधे प्रभाव का खुलासा हुआ.
  • महत्वपूर्ण बात ये है कि रिसर्च ने टीकाकरण कराने के सरकारात्मक प्रभाव में इजाफा किया. शोधकर्ताओं ने बताया कि हम प्रमाणित करते हैं कि कैसे दिमागी सेहत की परेशानी टीकाकरण करानेवाले और वैक्सीन नहीं लगवानेवालों के बीच अलग हो गई. 
  • आर्थिक अनिश्चितता और कोविड-19 से जुड़ी सेहत के जोखिम के बीच तुलना करने पर हमें दिमागी सेहत पर टीकाकरण के कम समय के प्रभाव मालूम हुए. 
  • कोविड-19 वैक्सीन से स्वास्थ्य के जोखिम को कम करने, आर्थिक और सामाजिक नतीजे सुधारने की उम्मीद की जाती है, जिसके बाद दिमागी सेहत के लिए संभावित लाभ होंगे.  डॉक्टर एचके महाजन ने कहा, “कोरोना महामारी ने रोजगार, आय और सेहत समेत लोगों की जिंदगी के कई पहलुओं को प्रभावित किया है.
  • इस वायरल बीमारी के मानसिक पहलू मनोवैज्ञानिक तनाव, चिंता, डिप्रेशन, सामाजिक अलगाव और खुदकुशी के विचार तक सीमित नहीं हैं.” उन्होंने आगे बताया, “बड़े पैमाने पर टीकाकरण ने हर्ड इम्यूनिटी बढ़ाने, लोगों के बीच चिंता कम करने में बड़ा योगदान दिया.
  • उसने आजीविका गंवाने वालों की दोबारा रोजगार के पहलू को भी बढ़ाया. टीकाकरण के गंभीर संक्रमण से सुरक्षा पर जागरुकता फैलने से लोग कोरोना से पहले की स्थिति में धीरे-धीरे लौट रहे हैं. इस तरह ये दिमागी सेहत के मुद्दे जैसे चिंता, डिप्रेशन दूर करने में मदद कर रहा है.”

Conclusion :

वैक्सीन को चरणबद्ध तरीके से लोगो को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके पहले चरण में, सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों का टीकारण किया जाएगा। क्योंकि वे उन लोगों के निकट संपर्क में होते हैं जो कोविड -19 से संक्रमित हैं। फिर इसे पुलिस, सशस्त्र बलों, नगरपालिका कर्मचारियों और अन्य विभागीय कर्मचारियों को प्रदान किया जाएगा। तीसरे चरण में, 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग और वे लोग जिन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप है या जिन्होंने अंग प्रत्यारोपण कराया है, ऐसे लोगो का टीकाकरण किया जाएगा। 

उसके बाद, स्वस्थ वयस्कों, किशोरों और बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। केंद्र सरकार स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम कर्मियों पर टीकाकरण का खर्च खुद से वहन करेगी । टीकाकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, सरकार ने CoWIN नामक एक एप्लिकेशन भी विकसित की है, जो कोविड -19 वैक्सीन लाभार्थियों के लिए  वैक्सीन स्टॉक, भंडारण और व्यक्तिगत ट्रैकिंग की सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करने में मददगार साबित हो रही है। कोविड -19 के लिए टीकाकरण भारत में स्वैच्छिक है। यह लोगों को इस बीमारी से बचाने का एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। टीके हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ काम करके बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं।

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समाज के प्रति युवाओं की भूमिका पर निबंध – Essay on Importance of youth in society in hindi

समाज के प्रति युवाओं की भूमिका पर निबंध – Short essay on Importance of youth in society in hindi

Introduction :

युवाओं को प्रत्येक देश की सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति माना जाता है क्योंकि उनकी बुद्धिमता और कड़ी मेहनत देश को सफलता और समृद्धि की राह पर ले जाती है। जैसा कि प्रत्येक नागरिक का राष्ट्र के प्रति कुछ उत्तरदायित्व होता है, वैसे ही युवाओं का भी है। प्रत्येक राष्ट्र के निर्माण में इनका बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान होता हैं। युवा एक ऐसे व्यक्ति को कहते है जिसकी उम्र 15 से 30 वर्ष के बीच में होती है। चूंकि युवा हर समाज की रीढ़ होते हैं और इसलिए वे समाज के भविष्य का निर्धारण करते हैं।

  • ऐसा इसलिए है, क्योंकि अन्य सभी आयु वर्ग जैसे कि बच्चे, किशोर, मध्यम आयु वर्ग और वरिष्ठ नागरिक युवाओं पर भरोसा करते हैं और उनसे बहुत उम्मीदें रखते हैं। 
  • यह युवाओं को आज के समाज में एक महत्वपूर्ण आयु वर्ग बनाता है और समाज का भविष्य अधिकतर उनपर ही निर्भर करता है।
  • समाज में युवाओं पर अत्यधिक निर्भरता के कारण, हम सभी युवाओं की हमारे परिवारों, समुदायों और देश के भविष्य के प्रति बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ है।
  • युवा अपने नेतृत्व, नवाचार और विकास कौशल द्वारा समाज की वर्तमान स्थिति को नवीनीकृत कर सकते हैं। युवाओं से देश की वर्तमान तकनीक, शिक्षा प्रणाली और राजनीति में बदलाव लाने की उम्मीद की जाती है।
  • उनपर समाज में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का भी उत्तरदायित्व है। यही कारण है कि देश के विकास के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी की अत्यधिक आवश्यकता होती है।

Conclusion : 

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किस क्षेत्र में प्रगति करना चाहते हैं क्योंकि हर जगह युवाओं की आवश्यकता है। हमारे युवाओं को अपनी आंतरिक शक्तियों और समाज में उनकी भूमिका के बारे में पता होना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर किसी को खुद को योग्य साबित करने के लिए समान मौका मिल सके। युवाओं के पास एक अलग दृष्टिकोण है जो पुरानी पीढ़ियों के पास नहीं था जिसके द्वारा वे हमारे देश में विकाश और समृद्धि ला सकते है।

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समाज के प्रति युवाओं की भूमिका पर निबंध (Long essay on Importance of youth in society in hindi)

Introduction :

युवाओं को प्रत्येक देश की सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति माना जाता है क्योंकि उनकी बुद्धिमता और कड़ी मेहनत देश को सफलता और समृद्धि की राह पर ले जाती है। जैसा कि प्रत्येक नागरिक का राष्ट्र के प्रति कुछ उत्तरदायित्व होता है, वैसे ही युवाओं का भी है। प्रत्येक राष्ट्र के निर्माण में इनका बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान होता हैं। युवा एक ऐसे व्यक्ति को कहते है जिसकी उम्र 15 से 30 वर्ष के बीच में होती है। चूंकि युवा हर समाज की रीढ़ होते हैं और इसलिए वे समाज के भविष्य का निर्धारण करते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अन्य सभी आयु वर्ग जैसे कि बच्चे, किशोर, मध्यम आयु वर्ग और वरिष्ठ नागरिक युवाओं पर भरोसा करते हैं और उनसे बहुत उम्मीदें रखते हैं।

समाज में युवाओं पर अत्यधिक निर्भरता के कारण, हम सभी युवाओं की हमारे परिवारों, समुदायों और देश के भविष्य के प्रति बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ है। युवा अपने नेतृत्व, नवाचार और विकास कौशल द्वारा समाज की वर्तमान स्थिति को नवीनीकृत कर सकते हैं। युवाओं से देश की वर्तमान तकनीक, शिक्षा प्रणाली और राजनीति में बदलाव लाने की उम्मीद की जाती है। उनपर समाज में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का भी उत्तरदायित्व है। यही कारण है कि देश के विकास के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी की अत्यधिक आवश्यकता होती है।

  • हमारे राष्ट्र के लिए कई परिवर्तन, विकास, समृद्धि और सम्मान लाने में युवा सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं। इस सबका मुख्य उद्देश्य उन्हें एक सकारात्मक दिशा में प्रशिक्षित करना है।
  • युवा पीढ़ी के उत्थान के लिए कई संगठन काम कर रहे हैं क्योंकि वे बड़े होकर राष्ट्र निर्माण में सहायक बनेंगे। गरीब और विकासशील देश अभी भी युवाओं के समुचित विकास और शिक्षण में पिछड़े हुए हैं।
  • एक बच्चे के रूप में प्रत्येक व्यक्ति, अपने जीवन में कुछ बनने का सपने देखता है, बच्चा अपनी शिक्षा पूरी करता है और कुछ हासिल करने के लिए कुछ कौशल प्राप्त करता है।
  • युवाओं में त्वरित शिक्षा, रचनात्मकता, कौशल होता है। वे हमारे समाज और राष्ट्र में परिवर्तन लाने की शक्ति रखते हैं।
  • युवा उस चिंगारी के साथ बड़ा होता है, जो कुछ भी कर सकता है।
  • समाज में कई नकारात्मक कुरीतियाँ और कार्य किए जाते हैं। युवाओं में समाज परिवर्तन और लिंग तथा सामाजिक समानता की अवधारणा को लाने की क्षमता है।
  • समाज में व्याप्त कई मुद्दों पर काम करके युवा दूसरों के लिए एक आदर्श बन सकते हैं।

युवा की भूमिका –

  • युवाओं को राष्ट्र की आवाज माना जाता है। युवा राष्ट्र के लिए कच्चे माल या संसाधन की तरह होते हैं। जिस तरह के आकार में वे हैं, उनके उसी तरीके से उभरने की संभावना होती है।
  • राष्ट्र द्वारा विभिन्न अवसरों और सशक्त युवा प्रक्रियाओं को अपनाया जाना चाहिए, जो युवाओं को विभिन्न धाराओं और क्षेत्रों में करियर बनाने में सक्षम बनाएगा।
  • युवा लक्ष्यहीन, भ्रमित और दिशाहीन होते हैं और इसलिए वे मार्गदर्शन और समर्थन के अधीन होते हैं, ताकि वे सफल होने के लिए अपना सही मार्ग प्रशस्त कर सकें।
  • युवा हमेशा अपने जीवन में कई असफलताओं का सामना करते हैं और हर बार ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि एक पूर्ण अंत है, लेकिन वो फिर से कुछ नए लक्ष्य के साथ खोज करने के लिए एक नए दृष्टिकोण के साथ उठता है।
  • एक युवा मन प्रतिभा और रचनात्मकता से भरा हुआ है। यदि वे किसी मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते हैं, तो परिवर्तन लाने में सफल होते हैं।

भारत में युवाओं की प्रमुख समस्याएं –

  • कई युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान नहीं की जाती है; यहां तक ​​कि कई लोग गरीबी और बेरोजगारी तथा अनपढ़ अभिभावकों के वजह से स्कूलों नहीं जा पाते हैं। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बच्चे को स्कूल जाने और उच्च शिक्षा हासिल करने का मौका मिले।
  • बालिका शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि देश में कई ऐसे हिस्से हैं जहां लड़कियां स्कूल जाने और पढ़ाई से वंचित है। लेकिन युवा, लड़के और लड़कियों दोनों का गठन करते हैं। जब समाज का एक वर्ग उपेक्षित हो, तो समग्र विकास कैसे हो सकता है?
  • अधिकांश युवाओं को गलत दिशा में खींच लिया गया है; उन्हें अपने जीवन और करियर को नष्ट करने से रोका जाना चाहिए।
  • कई युवाओं में कौशल की कमी देखी गयी है, और इसलिए सरकार को युवाओं के लिए कुछ कौशल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि वे आगे एक या उससे अधिक अवसरों से लाभान्वित हो सकें।
  • भारत में अधिकांश लोग गांवों में रहते हैं, इसलिए शिक्षा और अवसरों की सभी सुविधाओं तक उनकी उचित पहुंच नहीं है।
  • कुछ युवाओं द्वारा वित्तीय संकट और सामाजिक असमानता की समस्या होती है।
  • ऐसे कई बच्चे हैं जो प्रतिभा के साथ पैदा हुए हैं, लेकिन अपर्याप्त संसाधनों के चलते, वे अपनी प्रतिभा के साथ आगे नहीं बढ़ सके।
  • उनमें से कई को पारिवारिक आवश्यकताओं के कारण पैसा कमाने के लिए अपनी प्रतिभा से हटकर अन्य काम करना पड़ता है, लेकिन उन्हें उस काम से प्यार नहीं है जो वे कर रहे हैं।
  • बेरोजगारी की समस्या युवाओं की सबसे बड़ी समस्या है।
  • जन्मजात प्रतिभा वाले कुछ बच्चे होते हैं, लेकिन संसाधन की कमी या उचित प्रशिक्षण नहीं होने के कारण, वे अपनी आशा और प्रतिभा भी खो देते हैं।
  • इस प्रकार, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बच्चे को उचित शिक्षा की सुविधा प्रदान की जाए। प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए। युवाओं को कई अवसर प्रदान किया जाना चाहिए। उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और राजनीतिक मामलों में समान रूप से भाग लेना चाहिए।
  • कुशल समूहों को काम प्रदान करने के लिए कई रोजगार योजनाएं चलानी चाहिए।

Conclusion :

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किस क्षेत्र में प्रगति करना चाहते हैं क्योंकि हर जगह युवाओं की आवश्यकता है। हमारे युवाओं को अपनी आंतरिक शक्तियों और समाज में उनकी भूमिका के बारे में पता होना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर किसी को खुद को योग्य साबित करने के लिए समान मौका मिल सके। युवाओं के पास एक अलग दृष्टिकोण है जो पुरानी पीढ़ियों के पास नहीं था जिसके द्वारा वे हमारे देश में विकाश और समृद्धि ला सकते है।

भारत में सांस्कृतिक विविधता पर निबंध

Introduction :

भारतीय संस्कृति विविध है और विभिन्न रीति-रिवाजों, विचारों और सामाजिक मान्यताओं से युक्त है। भारत में विभिन्न संस्कृतियां और समुदाय हैं जो अपने भोजन, कपड़ों, भाषाओं और परंपराओं में भिन्न हैं। भारतीय संस्कृति दुनिया की अन्य संस्कृतियों में सबसे पुरानी और प्रसिद्ध है। भारतीय साहित्य में भी विभिन्न समुदायों, परंपराओं, रीति-रिवाजों और धर्मों का मेल है। भारतीय संस्कृति की विविधता दुनिया भर में प्रसिद्ध है। भारत बहु-सांस्कृतिक और बहु-पारंपरिक त्योहारों का एक वैश्विक केंद्र है यहां पर हर धर्म के त्यौहार मनाये जाते है जैसे की दशहरा, होली, दिवाली, क्रिसमस, रमज़ान, गुरु नानक जयंती, गणेश चतुर्थी आदि । 

यहां पर हर एक त्योहार का अपना-अपना सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व है और प्रत्येक त्योहार अलग-अलग रीति-रिवाजों और परंपराओं के साथ मनाये जाते है। भारत में तीन राष्ट्रीय त्योहार – गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती भी बड़े जोश और उत्साह के साथ मनाए जाते हैं ।भारत में, ईश्वर प्रत्येक व्यक्ति के दिल में बसते है। भारतीय विभिन्न प्रार्थनाओं, धार्मिक विश्वासों और नैतिक मूल्यों में विश्वास करते हैं। हिंदू परंपरा में, सभी लोग गायों, नीम, बरगद और पीपल के पेड़ की पूजा करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। भारत में नदियों की भी पूजा की जाती है और उनका धार्मिक महत्व हैं। भारत में गंगा, यमुना गोदावरी, ब्रम्हपुत्र, नर्मदा और ताप्ती जैसी कई नदियो की पूजा की जाती हैं।

  • भारत में सदैव राजनैतिक एकता रही। राष्ट्र व सम्राट, महाराजाधिराज जैसी उपाधियां, दिग्विजय और अश्वमेध व राजसूय यज्ञ भारत की जाग्रत राजनैतिक एकता के द्योतक रहे हैं । महाकाव्यकाल, मौर्यकाल, गुप्तकाल और उसके बाद मुगलकाल में भी सम्पूर्ण भारत एक शक्तिशाली राजनैतिक इकाई रहा ।
  • यही कारण है कि देश के भीतर छोटे-मोटे विवाद, बड़े-बड़े युद्ध और व्यापक उथल-पुथल के बाद भी राजनैतिक एकता का सूत्र खण्डित नहीं हुआ । साम्प्रदायिकता, भाषावाद, क्षेत्रीयता और ऐसे ही अन्य तत्व उभरे और अन्तर्राष्ट्रीय शक्तियों ने उनकी सहायता से देश की राष्ट्रीय एकता को खण्डित करने का प्रयास किया, किन्तु वे कभी भी सफल नहीं हो पाये ।
  • जब देश के भीतर युद्ध, अराजकता और अस्थिरता की आंधी चल रही थी तब भी कोटि-कोटि जनता के मन और मस्तिष्क से राजनैतिक एकता की सूक्ष्म, किन्तु सुदृढ़ कल्पना एक क्षण के लिए भी ओझल नहीं हो पाई । इतिहास साक्षी है कि राजनैतिक एकता वाले देश पर विदेशी शक्तियां कभी भी निष्कंटक शासन नहीं चला पाई।
  • भारतीय संस्कृति का एक शक्तिशाली पक्ष इसकी धार्मिक एकता है । भारत के सभी धर्मों और सम्प्रदायों मे बाह्य विभिन्नता भले ही हो, किन्तु उन सबकी आत्माओं का स्रोत एक ही है । मोक्ष, निर्वाण अथवा कैवल्य एक ही गन्तव्य के पृथक-पृथक नाम हैं । भारतीय धर्मों में कर्मकाण्डों की विविधता भले ही हो किन्तु उनकी मूल भावना में पूर्ण सादृश्यता है ।
  • इसी धार्मिक एकता एवं धर्म की विशद कल्पना ने देश को व्यापक दृष्टिकोण दिया जिसमें लोगों के अभ्यन्तर को समेटने और जोड़ने की असीम शक्ति है । नानक, तुलसी, बुद्ध, महावीर सभी के लिए अभिनन्दनीय हैं । देश के मन्दिरों, मस्जिदों और गुरुद्वारों के समक्ष सब नतमस्तक होते है; तीर्थों और चारों धामों के प्रति जन-जन की आस्था इसी सांस्कृतिक एकता का मूल तत्व है ।
  • भारत की एकता का सबसे सुदृढ़ स्तम्भ इसकी संस्कृति है। रहन-सहन, खान-पान, वेश-भूषा और त्योहारों-उत्सवों की विविधता के पीछे सांस्कृतिक समरसता का तत्व दृष्टिगोचर होता है । संस्कारों (जन्म, विवाह, मृत्यु के समय अन्तिम संस्कार आदि) के एक ही प्रतिमान सर्वत्र विद्यमान हैं । सामाजिक नैतिकता और सदाचार के सूत्रों के प्रति समान आस्था के दर्शन होते हैं ।
  • मनुष्य जीवन पुरुष, स्त्रियों और लड़कों-लड़कियों के लिए आचरण, व्यवहार, शिष्टाचार, नैतिकता और जीवन-दर्शन की अविचल एकरूपता देश की सांस्कृतिक एकता का सुदृढ़ आधार है । भाषाओं के बीच पारस्परिक सम्बन्ध व आदान-प्रदान, साहित्य के मूल तत्वों, स्थायी मूल्यों और ललित कलाओं की मौलिक सृजनशील प्रेरणाएं सब हमारी सांस्कृतिक एकता की मौलिक एकता का प्रमाण है । सब ‘सत्यं’ ‘शिवं’ और ‘सुन्दरं’ की अभिव्यक्ति का माध्यम है ।
  • भारत की गहरी और आधारभूत एकता देखने की कम और अनुभव करने की वस्तु अधिक है । देश सबको प्यारा है । इसकी धरती, नदियों, पहाड़ों, हरे-भरे खेतों, लोक-गीतों, लोक-रीतियों और जीवन-दर्शन के प्रति लोगों में कितना अपनापन, कितना प्यार-अनुराग और कितना भावनात्मक लगाव है इसकी कल्पना नहीं की जा सकती । किसी भारतीय को इनके सम्बन्ध में कोई अपवाद सहय नहीं होगा क्योंकि ये सब उसके अपने है ।
  • भारत में इतनी विविधताओं के बावजूद एक अत्यन्त टिकाऊ और सुदृढ़ एकता की धारा प्रवाहित हो रही है इस सम्बन्ध में सभी भारतीयों के अनुभव एवं अहसास के बाद किसी बाह्य प्रमाण या प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं हैं । लेकिन फिर भी यहां बी॰ए॰ स्मिथ जैसे सुविख्यात इतिहासवेत्ता के कथन का हवाला देना अप्रासंगिक न होगा । उसने कहा कि भारत में ऐसी गहरी आधारभूत और दृढ़ एकता है, जो रंग, भाषा, वेष-भूषा, रहन-सहन की शैलियों और जातियों की अनेकताओं के बावजूद सर्वत्र विद्यमान है।
  • भारत को भौगोलिक दृष्टिकोण से कई क्षेत्रों में विभक्त किया जा सकता है, परन्तु सम्पूर्ण देश भारतवर्ष के नाम से विख्यात है । इस विशाल देश के अन्दर न तो ऐसी पर्वतमालाएँ है और न ही ऐसी सरिताएँ या सघन बन, जिन्हें पार न किया जा सके । इसके अतिरिक्त, उत्तर में हिमालय की विशाल पर्वतमाला तथा दक्षिण में समुद्र ने सारे भारत में एक विशेष प्रकार की ऋतु पद्धति बना दी है ।
  • ग्रीष्म ऋतु में जो भाप बादल बनकर उठती है, बह हिमालय की चोटियों पर बर्फ के रूप में जम जाती है और गर्मियों में पिघलकर नदियों की धाराएँ बनकर वापस समुद्र में चली जाती है । सनातन काल से समुद्र और हिमालय में एक-दूसरे पर पानी फेंकने का यह अद्‌भुत खेल चल रहा है । एक निश्चित क्रम के अनुसार ऋतुएँ परिवर्तित होती हैं एवं यह ऋतु चक्र सपने देश में एक जैसा है ।

Conclusion :

भारत में सदैव अनेक राज्य विद्यमान रहे है, परन्तु भारत के सभी महत्वाकांक्षी सम्राटों का ध्येय सम्पूर्ण भारत पर अपना एकछत्र साम्राज्य स्थापित करने का रहा है एवं इसी ध्येय से राजसूय वाजपेय, अश्वमेध आदि यश किए जाते थे तथा सम्राट स्वयं को राजाधिराज व चक्रवर्ती आदि उपाधियों से विभूषित कर इस अनुभूति को व्यक्त करते थे कि वास्तव में भारत का विस्तृत भूखण्ड राजनीतिक तौर पर एक है । भारत अमरनाथ मंदिर, बद्रीनाथ, हरिद्वार, वैष्णो देवी और वाराणसी जैसे कई पवित्र और धार्मिक स्थलों का घर है, जो देश के उत्तरी भाग में स्थित हैं। हालांकि, दक्षिणी क्षेत्र में, रामेश्वरम और सबरीमाला मंदिर का बहुत अधिक महत्व है। इस प्रकार, हम कह सकते हैं कि भारत परंपराओं और आधुनिक संस्कृति से भरा हुआ है। लोगों को अपनी इच्छानुसार किसी भी धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

विविधता मे एकता

Introduction :

भारत एक ऐसा देश है जिसने “विविधता मे एकता” की सच्चाई को सही साबित किया है। बिना किसी परेशानी के कई वर्षों से विभिन्न धर्म और जाति के लोगों ने एक साथ रह कर दिखाया है। भारत विश्व का एक प्रसिद्ध और बड़ा देश है जहाँ विभिन्न धर्म जैसे हिन्दू, मुस्लिम, बौद्ध, सिक्ख, जैन, ईसाई और पारसी आदि के एक साथ रहते हैं। यहाँ अलग-अलग जीवन-शैली के लोग एकसाथ रहते हैं। वो अलग आस्था, धर्म और विश्वास से संबंध रखते हैं। इन भिन्नताओं के बावजूद भी वो भाईचारे और मानवता के संबंध के साथ रहते हैं।

“विविधता में एकता” भारत की एक अलग विशेषता है जो इसे पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध करती है। अपनी रीति-रिवाज़ और विश्वास का अनुसरण करने के द्वारा सभी धर्मों के लोग अलग तरीकों से पूजा-पाठ करते हैं। भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिये प्रसिद्ध है जो कि विभिन्न धर्मों के ही लोगों के कारण है। अपने हित और विश्वास के आधार पर लोग विभिन्न जीवन-शैली को बढ़ावा देते हैं।

विविधता में एकता का महत्व –

  • “विविधता में एकता” लोगों की कार्यस्थल, संगठन और समुदाय में मनोबल को बढ़ाता है।
  • ये लोगों के बीच में दल भावना, रिश्ते, समूह कार्य को बढ़ाने में मदद करता है इसकी वजह से प्रदर्शन, कार्यकुशलता, उत्पादकता और जीवन शैली में सुधार आता है।
  • बुरी परिस्थिति में भी ये प्रभावशाली संवाद बनाता है।
  • सामाजिक परेशानियों से लोगों को दूर रखता है और मुश्किलों से लड़ने में आसानी से मदद करता है।
  • मानव रिश्तों में अच्छा सुधार लाता है तथा सभी के मानव अधिकारों की रक्षा करता है।
  • भारत में “विविधता में एकता” पर्यटन के स्रोत उपलब्ध कराता है। पूरी दुनिया से अधिक यात्रियों और पर्यटकों को विभिन्न संस्कृति, परंपरा, भोजन, धर्म और परिधान के लोग आकर्षित करते हैं।
  • कई तरीकों में असमान होने के बावजूद भी देश के लोगों के बीच राष्ट्रीय एकीकरण की आदत को ये बढ़ावा देता है।
  • भारत की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत और समृद्ध बनाने के साथ ही ये देश के संपन्न विरासत को महत्व देता है।
  • विभिन्न फसलों के द्वारा कृषि के क्षेत्र में संपन्न बनाने में ये मदद करता है जिससे अर्थव्यवस्था में वृद्धि होती है।
  • देश के लिये विभिन्न क्षेत्रों में कौशल और उन्नत पेशेवरों के साधन है।
  • “विविधता में एकता” समाज के लगभग सभी पहलुओं में पूरे देश में मजबूती और संपन्नता का साधन बनता है। अपनी रीति-रिवाज़ और विश्वास का अनुसरण करने के द्वारा सभी धर्मों के लोग अलग तरीकों से पूजा-पाठ करते हैं बुनियादी एकरुपता के अस्तित्व को प्रदर्शित करता है।
  • “विविधता में एकता” विभिन्न असमानताओं की अपनी सोच से परे लोगों के बीच भाईचारे और समरसता की भावना को बढ़ावा देता है।
  • भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिये प्रसिद्ध है जो कि विभिन्न धर्मों के लोगों के कारण है। अपने हित और विश्वास के आधार पर विभिन्न जीवन-शैली को अलग-अलग संस्कृति के लोग बढ़ावा देते हैं। ये दुबारा से विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में जैसे संगीत, कला, नाटक, नृत्य (शास्त्रिय, फोक आदि), नाट्यशाला, मूर्तिकला आदि में वृद्धि को बढ़ावा देते हैं। लोगों की आध्यात्मिक परंपरा उन्हें एक-दूसरे के लिये अधिक धर्मनिष्ठ बनाती है।
  • सभी भारतीय धार्मिक लेख लोगों की आध्यात्मिक समझ का महान साधन है। लगभग सभी धर्मों में ऋषि, महर्षि, योगी, पुजारी, फादर आदि होते हैं जो अपने धर्मग्रंथों के अनुसार अपनी आध्यात्मिक परंपरा का अनुसरण करते हैं।
  • भारत में हिन्दी मातृ-भाषा है हालाँकि अलग-अलग धर्म और क्षेत्र (जैसे इंग्लिश, ऊर्दू, संस्कृत, पंजाबी, बंगाली, उड़िया आदि) के लोगों के द्वारा कई दूसरी बोली और भाषाएँ बोली जाती है; हालाँकि सभी महान भारत के नागरिक होने पर गर्व महसूस करते हैं।
  • भारत की “विविधता में एकता” खास है जिसके लिये ये पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। ये भारत में बड़े स्तर पर पर्यटन को आकर्षित करता है।
  • एक भारतीय होने के नाते, हम सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिये और किसी भी कीमत पर इसकी अनोखी विशेषता को कायम रखने की कोशिश करनी है। यहाँ “विविधता में एकता” वास्तविक खुशहाली होने के साथ ही वर्तमान तथा भविष्य की प्रगति के लिये रास्ता है।
  • भारत को एक स्वतंत्र देश बनाने के लिये भारत के सभी धर्मों के लोगों के द्वारा चलाये गये स्वतंत्रता आंदोलन को हम कभी नहीं भूल सकते है। भारत में “विविधता में एकता” का स्वतंत्रता के लिये संघर्ष बेहतरीन उदाहरण है।
  • भारत में “विविधता में एकता” सभी को एक कड़ा संदेश देता है कि बिना एकता के कुछ भी नहीं है। प्यार और समरसता के साथ रहना जीवन के वास्तविक सार को उपलब्ध कराता है। भारत में “विविधता में एकता” दिखाती है कि हम सभी एक भगवान के द्वारा पैदा, परवरिश और पोषित किये गये हैं।

Conclusion :

भारत एक ऐसा देश है जिसने “विविधता मे एकता” की सच्चाई को सही साबित किया है। बिना किसी परेशानी के कई वर्षों से विभिन्न धर्म और जाति के लोगों ने एक साथ रह कर दिखाया है। भारत ऊँचे पहाड़ों, घाटियों, महासागरों, प्रसिद्ध नदियों, धारा, जंगल, रेगिस्तान, प्राचीन संस्कृति और परंपराएँ और सबसे खास “विविधता में एकता” से सजा हुआ देश है। ये दुबारा से विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में जैसे संगीत, कला, नाटक, नृत्य, नाट्यशाला, मूर्तिकला आदि में वृद्धि को बढ़ावा देते हैं। लोगों की आध्यात्मिक परंपरा उन्हें एक-दूसरे के लिये अधिक धर्मनिष्ठ बनाती है। भारत की “विविधता में एकता” खास है जिसके लिये ये पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। ये भारत में बड़े स्तर पर पर्यटन को आकर्षित करता है। एक भारतीय होने के नाते, हम सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिये और किसी भी कीमत पर इसकी अनोखी विशेषता को कायम रखने की कोशिश करनी चाहिये । यहाँ “विविधता में एकता” वास्तविक खुशहाली होने के साथ ही वर्तमान तथा भविष्य की प्रगति के लिये रास्ता है।

शिक्षा का अधिकार पर निबंध

Introduction :

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शिक्षा का बड़ा महत्व हैं,शिक्षा को जीवन का आधार माना गया हैं। किसी भी देश के आधुनिक या विकसित होने का प्रमाण उस देश के नागरिकों के शिक्षा स्तर पर निर्भर करता हैं। आधुनिक समय में शिक्षा को ही किसी राष्ट्र या समाज की प्रगति का सूचक समझा जाता हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम संसद का एक अधिनियम है जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 ए के तहत भारत में 6 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए नि: शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के महत्व का वर्णन करता है। यह अधिनियम 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ। इस अधिनियम की खास बात यह है कि गरीब परिवार के वे बच्चे, जो प्राथमिक शिक्षा से वंचित हैं, के लिए निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान रखा गया है ।

शिक्षा के अधिकार के साथ बच्चों एवं युवाओं का विकास होता है तथा राष्ट्र शक्तिशाली एवं समृद्ध बनता है । यह उत्तरदायी एवं सक्रिय नागरिक बनाने में भी सहायक है । इसमें देश के सभी लोगों, अभिभावकों एवं शिक्षकों का भी सहयोग आवश्यक है । इस कानून के लागू करने पर आने वाले खर्च केंद्र (55 प्रतिशत) और राज्य सरकार (45 प्रतिशत) मिलकर उठाएंगे।

  • आज विश्व के सभी राष्ट्रों द्वारा भारतीय युवाओं की प्रतिमा का मुक्त कण्ठ से गुणगान किया जाना इसका प्रमाण है । बावजूद इसके सम्पूर्ण राष्ट्र की शिक्षा को आधार मानकर विश्लेषण किया जाए तो अभी भी भारत शिक्षा के क्षेत्र में विकसित राष्ट्रों की तुलना में काफी पीछे है ।
  • वर्तमान में भारतीय शिक्षा दर अनुमानतः 74% है, जो वैश्विक स्तर पर बहुत कम है । तब इस अनुपात में और वृद्धि करने के लिए बुद्धिजीवियों ने अपने-अपने सुझाव दिए ।
  • उन सभी के सुझावों पर गौर अते हुए भारत सरकर ने शिक्षा को अनिवार्य रूप से लागू करने हेतु शिक्षा का अधिकार कानून (RTE Act) बनाकर पूरे देश में समान रूप से प्रस्तुत कर दिया ।
  • ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’, 1 अप्रैल, 2010 से सम्पूर्ण भारत में लागू कर दिया गया । इसका प्रमुख उद्देश्य है- वर्ष आयु तक के सभी बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य, गुणवतायुक्त शिक्षा को सुनिश्चित करना । इस अधिनियम को सर्व शिक्षा अभियान तथा वर्ष 2005 के विधेयक का ही संशोधित रूप कहा जाए, तो समीचीन ही होगा ।
  • क्षेत्रीय सरकारों, अधिकारियों तथा अभिभावकों का यह दायित्व है कि वे बच्चे को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा दिलाने का प्रबन्ध करें । इस कार्य हेतु वित्तीय प्रबन्धन का पूर्ण दायित्व केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा मिश्रित रूप से उठाया जाएगा । कोई भी बच्चा किसी समय विद्यालय में प्रवेश पाने को स्वतन्त्र है ।
  • आयु प्रमाण-पत्र न होने के बावजूद, बच्चा विद्यालय में प्रवेश ले सकता है । बच्चों की आवश्यकता का ध्यान रखते हुए पुस्तकालय, खेल के मैदान, स्वच्छ व मजबूत विद्यालय कक्ष, इमारत आदि का प्रबन्ध राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा ।
  • शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार हेतु 35 छात्रों पर एक शिक्षक का प्रावधान किया गया है तथा साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि ग्रामीण ब शहरी किसी भी क्षेत्र में यह अनुपात प्रभावित न हो। 
  • इसके साथ ही अध्यापन की गुणवत्ता हेतु केवल प्रशिक्षित अध्यापकों को ही नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है जो अप्रशिक्षित अध्यापक, प्राचीन समय से अध्यापनरत हैं, उन्हें सीमित अवधि में अध्यापक-प्रशिक्षण पूर्ण करने का आदेश पारित किया गया है, अन्यथा उन्हें पद-मुक्त किया जा सकता हे।

इसके अतिरिक्त निम्न कार्यों का पूर्ण रूप से निषेध है –

  • छात्रों को शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना देना ।
  • प्रवेश के दौरान छात्रों से कोई लिखित परीक्षा लेना ।
  • छात्रों या उनके अभिभावकों से किसी प्रकार का शुल्क लेना।
  • छात्रों को ट्‌यूशन पढ़ने के लिए बाध्य करना ।
  • बिना मान्यता प्राप्ति के विद्यालय का संचालन करना ।
  • इसी प्रकार निजी विद्यालयों में भी कक्षा 1 से प्रवेश के समय आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के छात्रों हेतु 25% आरक्षण का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है ।
  • इस अधिनियम को प्रभावी बनाने का उत्तरदायित्व केन्द्र ब राज्य सरकार दोनों का है, जिसका वित्तीय बहन भी दोनों संयुक्त रूप से करेंगे ।
  • इस अधिनियम के अनुसार, वित्तीय बहन का दायित्व सर्वप्रथम राज्य सरकार को सौंपा गया था, परन्तु राज्य सरकार ने अपनी विवशता का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया तथा केन्द्र सरकार से मदद का अनुरोध किया, तदुपरान्त केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा

65:36 अनुपात के तहत वित्तीय प्रबन्धन का विभाजन किया गया । उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह अनुपात 90:10 है।

केन्द्र सरकार के दायित्व –

(i) बच्चों का चहुँमुखी विकास ।

(ii) संवैधानिक मूल्यों का विकास ।

(iii) जहाँ तक हो सके, मातृभाषा में शिक्षण दिया जाए ।

(iv) बच्चों के मानसिक बिकास के अनुरूप, उनका नियमित विश्लेषण । (धारा-29 के अन्तर्गत)

(v) बच्चों को भयमुक्त माहौल प्रदान कराना तथा अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का विकास करना ।

राज्य सरकार के दायित्व-

(i) वह प्रत्येक बच्चे को नि:शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगी ।

(ii) अपने क्षेत्र के 14 वर्ष आयु तक के बच्चों का पूर्ण रिकॉर्ड रखेगी ।

(iii) शैक्षणिक कलेण्डर का निर्धारण करेगी (धारा-9 के अन्तर्गत)।

Conclusion :

सर्व शिक्षा अभियान द्वारा पारित लक्ष्य वर्ष 2010 तक पूर्ण न हो पाया था, इसके अतिरिक्त यह अधिनियम भी लागू कर दिया गया । अतः यह कहना समीचीन ही होगा कि इस अधिनियम में सर्व शिक्षा अभियान के सभी नियम समाहित है । अधिनियम शिक्षा को 6 से 14 वर्ष की आयु के बीच हर बच्चे का मौलिक अधिकार बनाता है। अब भारत में 74% आबादी साक्षर है जिसमें पुरुषों में 80% और महिला 65% शामिल हैं। यह शिक्षा का मौलिक अधिकार 6 से 14 वर्षो के बालक-बालिकाओं के लिए निशुल्क और गुणवतापूर्ण शिक्षा की सहायता से उन्हें समान रूप से शिक्षा और रोजगार के समान अवसरों की उपलब्धता सुनिश्चित करवाएगा, इससे हमारा भारत शिक्षित और विकसित बनेगा।

पीएम स्वनिधि योजना पर निबंध

Introduction :

हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना को शुरू करने का फैसला लिया गया | इस योजना के अंतर्गत  देश के रेहड़ी और सड़क विक्रेताओं को अपना खुद का काम नए सिरे से शुरू करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 10000 रूपये तक का लोन मुहैया कराया जायेगा | इस स्वनिधि योजना को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्म निर्भर निधि के नाम से भी जाना जाता है |

इस लोन को समय पर चुकाने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को 7 फीसद का वार्षिक ब्याज सब्सिडी के तौर पर उनके अकाउंट में सरकार की ओर से ट्रांसफर किया जाएगा। देश के जो इच्छुक लाभार्थी इस योजना का लाभ उठाना चाहते है तो उन्हें इस योजना के तहत आवेदन करना होगा |  स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में वेंडर, हॉकर, ठेले वाले, रेहड़ी वाले, ठेली फलवाले आदि सहित 50 लाख से अधिक लोगों को योजना से लाभ प्रदान किया जायेगा | स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि के अंतर्गत रेहड़ी पटरी वालो को अपना काम दोबारा से शुरू करने के लिए सरकार द्वारा लोन मुहैया कराया गया है |

  • इस योजना के तहत छोटे दुकानदार 10,000 रुपए तक के ऋण के लिये आवेदन कर सकेंगे।
  • ऋण प्राप्त करने के लिये आवेदकों को किसी प्रकार की ज़मानत या कोलैट्रल (Collateral) की आवश्यकता नहीं होगी।
  • इस योजना के तहत प्राप्त हुई पूंजी को चुकाने के लिये एक वर्ष का समय दिया जाएगा, विक्रेता इस अवधि के दौरान मासिक किश्तों के माध्यम से ऋण का भुगतान कर सकेंगे।
  • साथ ही इस योजना के तहत यदि लाभार्थी लिये गए ऋण पर भुगतान समय से या निर्धारित तिथि से पहले ही करते हैं तो उन्हें 7% (वार्षिक) की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जो ‘प्रत्यक्ष लाभ अंतरण’ (Direct Benefit Transfer- DBT) के माध्यम से 6 माह के अंतराल पर सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाएगी।
  • पीएम स्वनिधि के तहत निर्धारित तिथि से पहले ऋण के पूर्ण भुगतान पर कोई ज़ुर्माना नहीं लागू होगा।
  • इस योजना के तहत ऋण जारी करने की प्रक्रिया जुलाई माह से शुरू की जाएगी।
  • इस योजना के लिये सरकार द्वारा 5,000 करोड़ रुपए की राशि मंज़ूर की गई है, यह योजना मार्च 2022 तक लागू रहेगी।
  • यह पहली बार है जब सूक्ष्म-वित्त संस्थानों (Micro finance Institutions(MFI), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (Non Banking Financial Company- (NBFC), स्वयं सहायता समूह (Self Help Group-SHG),  बैंकों को शहरी क्षेत्र की गरीब आबादी से जुड़ी किसी योजना में शामिल किया गया है।
  • इन संस्थानों को ज़मीनी स्तर पर उनकी उपस्थिति और छोटे व्यापारियों व शहरों की गरीब आबादी के साथ निकटता के कारण इस योजना में शामिल किया गया है।

तकनीकी का प्रयोग और पारदर्शिता –

  • इस योजना के प्रभावी वितरण और इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने के लियेवेब पोर्टल और मोबाइल एप युक्त एक डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकास किया जा रहा है।
  • यह प्लेटफॉर्म क्रेडिट प्रबंधन के लिये वेब पोर्टल और मोबाइल एप कोभारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के ‘उद्यम मित्र’ पोर्टल से तथा ब्याज सब्सिडी के स्वचालित प्रबंधन हेतु MoHUA के ‘पैसा पोर्टल’ (PAiSA Portal) से जोड़ेगा।  
  • इस योजना के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रो और पृष्ठभूमि के 50 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ प्राप्त होगा।
  • इस योजना को विशेष रूप से छोटे दुकानदारों (ठेले और रेहड़ी-पटरी वाले) के लिये तैयार किया गया है, इस योजना के माध्यम से छोटे व्यापारी COVID-19 के कारण प्रभावित हुए अपने व्यापार को पुनः शुरू कर सकेंगे।
  • इस योजना के माध्यम से सरकार द्वारा छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
  • इसके तहत ऋण चुकाने के लिये डिजिटल भुगतान करने वाले लाभार्थियों को हर माह कैश-बैक प्रदान कर उन्हें अधिक-से-अधिक डिजिटल बैंकिंग अपनाने के लिये प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • इस योजना के ज़रिये रेहड़ी पटरी वालो को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जायगा तथा गरीब लोगो की स्थिति में सुधार होगा |
  • इस योजना के तहत MoHUA द्वारा जून माह में पूरे देश में राज्य सरकारों, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के राज्य कार्यालय, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम, शहरी स्थानीय निकायों, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी निधि ट्रस्ट और अन्य हितधारकों के सहयोग से क्षमता विकास और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी।
  • COVID-19 महामारी के कारण देश की औद्योगिक इकाइयों और संगठित क्षेत्र के अन्य व्यवसायों के अतिरिक्त असंगठित क्षेत्र और छोटे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है।
  • देश में बड़े पैमाने पर असंगठित क्षेत्र के प्रमाणिक आँकड़े उपलब्ध न होने से इससे जुड़े लोगों को सहायता पहुँचाना एक बड़ी चुनौती रही है। साथ ही इस क्षेत्र के लिये किसी विशेष आर्थिक तंत्र के अभाव में छोटे व्यापारियों को स्थानीय कर्ज़दारों से महँगी दरों पर ऋण लेना पड़ता है। 

Conclusion :

पीएम स्वनिधियोजना के माध्यम से छोटे व्यापारियों को आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध करा कर ऐसे लोगों को COVID-19 के कारण हुए नुकसान से उबरने में सहायता प्रदान की जा सकेगी।  इस योजना के अंतर्गत 2 जुलाई 2020 को ऋण देने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 1.54 लाख से अधिक सड़क विक्रेताओं ने ऋण के लिए आवेदन किया है जिनमे से, 48,000 से अधिक को इस योजना के तहत ऋण स्वीकृत किया जा चूका है। यह प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए लोगों की क्षमता को बढ़ाने और कोरोना संकट के समय कारोबार को नए सिरे से खड़ा कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देंगे।

 

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