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essay on right to privacy in hindi

Essays

गोपनीयता का अधिकार और तकनीकी विकास पर हिन्दी में निबंध | Essay on Right to Privacy in hindi

गोपनीयता का अधिकार और तकनीकी विकास पर हिन्दी में निबंध | Essay on Right to Privacy in hindi :

Introduction :

इस नए इलेक्ट्रॉनिक युग में गोपनीयता हमारे समाज की सबसे प्रमुख समस्याओं में से एक है जो हमारी पूरी जिंदगी को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकती है। आज की दुनिया में हम अपनी व्यक्तिगत गतिविधियों के लिए इंटरनेट और सूचना प्रौद्योगिकी पर अत्यधिक निर्भर हो चुके हैं। वर्तमान में 825 मिलियन से अधिक लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं जो इंटरनेट पर अत्यधिक निर्भरता को दर्शाता है । समाज के प्रत्येक सदस्य की गोपनीयता का एक निश्चित स्तर होता है जो उसके जीवन का एक आंतरिक हिस्सा भी है और इसलिए इसे हमारी सरकार द्वारा सुरक्षित करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।

  • तेजी से तकनीकी विकास होने के कारण आज हम कुछ ही क्लिक में किसी भी प्रकार की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। हम फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बहुत सारी जानकारी साझा करते हैं।
  • हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले एप्लिकेशन (ऐप्स) हमारी व्यक्तिगत जानकारी जैसे हमारे कॉन्टैक्ट विवरण, फोन की जानकारी और हमारी लोकेशन का आसानी से पता लगा सकते हैं।
  • लेकिन हमें इस बात की जानकारी नहीं होती कि इन प्लेटफार्मों द्वारा इस जानकारी का उपयोग कैसे किया जा रहा है और इसलिए इस डेटा के दुरुपयोग होने की बड़ी संभावना है।
  • डेटा के अनुचित उपयोग के कारण साइबर अपराध, फेक न्यूज, सांप्रदायिक हिंसा के रूप में गंभीर परिणाम हो सकते हैं और यहां तक कि हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा भी हो सकता है।
  • हमने 2017 में आधार कार्ड एवं हाल ही में पेगासस के संदर्भ में ऐसे ही कई खतरों को देखा है। इस प्रकार के खतरों को देखते हुए, भारत में मजबूत डेटा संरक्षण कानून बनाकर लोगों की गोपनीयता को सुरक्षित रखने की आवश्यकता है।

 Conclusion :

यद्यपि हमारे संविधान के भाग 3 में ‘मौलिक अधिकार’ का प्रावधान है और अनुच्छेद 21 में ‘निजता का अधिकार’ भी शामिल है और सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 को लागु किया लेकिन ये वर्तमान स्थिति को देखते हुए पर्याप्त नहीं हैं। लोगों को इंटरनेट से सम्बंधित खतरों के बारे में जागरूक करने की जरुरत है और वे अपने डेटा को सुरक्षित रखने के लिए एंटीवायरस और बेहतर पासवर्ड का उपयोग करने जैसे उचित सुरक्षा उपायों का उपयोग कर सकते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम भी आयोजित करने की जरुरत है । “चूंकि तकनीकी विकास हमारे समाज के लिए एक वरदान है, लेकिन दूसरी ओर यह हमारी गोपनीयता और व्यक्तिगत जीवन को भी बड़े स्तर पर प्रभावित कर सकती है।”

व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर निबंध 

Introduction :

सोशल मीडिया मानव सभ्यता के लिए एक वरदान है क्योंकि इसने पूरी दुनिया को एक जगह पर एक साथ ला दिया है जहाँ व्यक्ति अपने विचारों को साझा कर सकते हैं। इसलिए यह प्रौद्योगिकी लोगों के लिए उपयोगी है और सामाजिक कौशल बढ़ाने में भी मदद करती है। आज की दुनिया में, प्रौद्योगिकी ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है क्योंकि तकनीक की मदद से हम नई चीजें सीख सकते हैं और नए लोगों से मिल सकते हैं।  व्हाट्सएप सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक ऍप्स में से एक है जो हमारे दैनिक जीवन में एक प्रमुख भूमिका निभाती है।

  • व्हाट्सएप को अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी के लिए बहुत आलोचना का सामना करना पड़ रहा है जिसमें कहा गया है कि वह अपने किसी भी उपयोगकर्ता की जानकारी फेसबुक और उसकी साझेदार कंपनियों के साथ साझा कर सकते है। 
  • तब से सिगनल एप्प सहित इसके वैकल्पिक ऐप के डाउनलोड में भारी वृद्धि हुई है। वैश्विक आलोचना के जवाब में, व्हाट्सएप के प्रमुख विल कैथकार्ट ने बताया की, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ, वे उपयोगकर्ताओं की निजी चैट या कॉल नहीं देख सकते हैं और न ही फेसबुक देख सकता हैं।
  • व्हाट्सएप ने नए नियम और शर्तों को स्वीकार करने के लिए उपयोगकर्ताओं को 8 फरवरी 2021 तक का समय दिया गया है।
  • व्हाट्सएप का कहना है कि वह उपयोगकर्ताओं के डिवाइस से नई जानकारी एकत्र कर रहा है जैसे बैटरी स्तर, ऐप वर्ज़न, ब्राउज़र जानकारी, मोबाइल नेटवर्क, आईपी एड्रेस और फोन नंबर आदि।
  • इस नई पालिसी के अन्तर्गत यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में डेटा को अमेरिका या अन्य हिस्सों में स्थानांतरित भी किया जाएगा जहां फेसबुक की सहयोगी कंपनियां हैं।

Conclusion :

इस नए अपडेट से इस एप्लिकेशन का उपयोग करने वाले लोगों की गोपनीयता पर बहुत अधिक चिंता बढ़ गई है। भारतीय उपयोगकर्ता अधिक असुरक्षित हैं क्योंकि भारत में कोई भी डेटा सुरक्षा कानून नहीं है। अगर भारत में डेटा सुरक्षा कानून होता, तो व्हाट्सएप इस नए पॉलिसी अपडेट को लॉन्च नहीं कर पाता। यही सही समय है जब सरकार को डिजिटल गोपनीयता के महत्व के बारे में जनता को जागरूक करने के लिए कुछ डिजिटल जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने चाहिए और इससे सम्बन्धित नए कानूनों को लागू करना चाहिए।

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व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर निबंध (Long essay on Whatsapp privacy policy in hindi)

Introduction :

सोशल मीडिया मानव सभ्यता के लिए एक वरदान है क्योंकि इसने पूरी दुनिया को एक जगह पर एक साथ ला दिया है जहाँ व्यक्ति अपने विचारों को साझा कर सकते हैं। आज की दुनिया में, प्रौद्योगिकी ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है क्योंकि तकनीक की मदद से हम नई चीजें सीख सकते हैं और नए लोगों से मिल सकते हैं। व्हाट्सएप सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक ऍप्स में से एक है जो हमारे दैनिक जीवन में एक प्रमुख भूमिका निभाती है। व्हाट्सएप को अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी के लिए बहुत आलोचना का सामना करना पड़ रहा है जिसमें कहा गया है कि वह अपने किसी भी उपयोगकर्ता की जानकारी फेसबुक और उसकी साझेदार कंपनियों के साथ साझा कर सकते है।

वैश्विक आलोचना के जवाब में, व्हाट्सएप के प्रमुख विल कैथकार्ट ने बताया की, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ, वे उपयोगकर्ताओं की निजी चैट या कॉल नहीं देख सकते हैं और न ही फेसबुक देख सकता हैं। व्हाट्सएप का कहना है कि वह उपयोगकर्ताओं के डिवाइस से नई जानकारी एकत्र कर रहा है जैसे बैटरी स्तर, ऐप वर्ज़न, ब्राउज़र जानकारी, मोबाइल नेटवर्क, आईपी एड्रेस और फोन नंबर आदि।

  • निजता नीति में किए गए बदलाव लागू करने के लिए 15 मई की समयसीमा तय की गई थी, लेकिन बाद में यह समयसीमा रद्द कर दी गई. कंपनी ने प्राइवेसी पॉलिसी को लागू करने की नई तारीख का एलान नहीं किया है.
  • पहले यह नई प्राइवेसी पॉलिसी 8 फरवरी से लागू होनी थी. तब भी विरोध हुआ था जिसके बाद इसे 15 मई तक के लिए टाल दिया था. अब फिर विवाद होने पर फिलहाल टाल दिया गया है. लेकिन कंपनी ने बयान में कहा है कि नई प्राइवेसी पॉलिसी को स्वीकार करने के लिए यूजर्स को रिमाइंडर भेजना जारी रहेगा. 
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 18 मई को व्हाट्सएप को एक पत्र लिखकर कहा कि सात दिन के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने पर कानून के अनुरूप जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
  • मंत्रालय ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया कि कई लोग दैनिक जीवन में संदेश भेजने के लिए व्हट्सएप पर निर्भर हैं ऐसे में कंपनी द्वारा अपनी स्थिति का लाभ उठाते हुए भारतीय उपयोगकर्ताओं पर ‘अनुचित शर्तें थोपना न केवल परेशान करने वाला है बल्कि गैर- जिम्मेदाराना रवैया है.’
  • व्हाट्सऐप के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी सरकार के साथ बातचीत करती रहेगी. उन्होंने कहा, “हमने पहले जो कहा है, दोबारा उसकी पुष्टि करते हैं कि ताजा अपडेट से किसी के भी व्यक्तिगत की प्राइवेसी पर असर नहीं पड़ता है. 
  • हम हर अवसर का इस्तेमाल यह स्पष्ट करने के लिए करेंगे कि हम किस तरह से लोगों के व्यक्तिगत संदेशों और निजी सूचना की सुरक्षा करते हैं.”
  • व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने बयान में कहा, “जहां नई सेवा शर्तें हासिल करने वाले ज्यादातर लोगों ने उन्हें स्वीकर कर लिया, हम इस बात की सराहना करते हैं कि कुछ लोगों को अब तक ऐसा करने का मौका नहीं मिला. 15 मई को कोई भी खाता बंद नहीं किया गया और भारत में किसी के भी फोन पर व्हाट्सएप ने काम करना बंद नहीं किया.”
  • व्हाट्सएप आपके डेटा को फेसबुक के साथ शेयर करेगा। जिसके लिए वो ग्रीन बटन के जरिये आपसे एग्री यानी इजाजत की मांग कर रहा है। फेसबुक ही व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी है। 
  • डेटा का मतलब है आपका फोन नंबर, आपके कांन्ट्रैक्ट्स और आपको व्हाट्सएप स्टेटस जैसी तमाम जानकारियां। ये डेटा व्हाट्सएप लेकर फेसबुक के साथ शेयर करना चाह रहा है। मतलब व्हाट्सएप आपकी कुछ चीजों की निगरानी करेगा और उसे थर्ड पार्टी के साथ शेयर भी करेगा।
  • व्हाट्सएप ये गौर करगेा कि आप कितनी देर आनलाइन रहते हैं, आनलाइन रहकर क्या करते हैं। कौन सा फोन इस्तेमाल करते हैं और किस तरह के कंटेट व्हाट्सएप पर पसंद करते हैं। क्या सबसे अधिक देखते हैं। 
  • सबसे अधिक जो कंटेट आप देखते होंगे वह बेसिक डेटा व्हाट्सएप थर्ड पार्टी यानी फेसबुक, इंस्टाग्राम को शेयर करेगा और फिर उसी से मिलता-जुलता कंटेट आपको दिखाया जाएगा। 
  • दरअसल, व्हाट्सएप पर भेजे गए मैसेज इंड टू इंड इंक्रिप्शन की मदद से स्कियोर होते हैं। मान लीजिए कि दो लोग हैं जिन्होंने एक दूसरे को भेजा हो। जैसे ही आप मैसेज भेजते हैं एक प्रोग्राम आपके मैसेज को एक जटिल कोड में बदल देता है। 
  • जिसे मैसेज भेजा गया है उसके फोन में वो कोड जाता है दोबारा मैसेज में बदल जाता है और जिसने वो मैसेज पढ़ा उसे समझ में आ जाता है कि सामने वाले ने मैसेज क्या भेजा।
  • इस दौरान कोई भी मैसेज कहीं भी स्टोर नहीं होता। व्हाट्सएप के विज्ञापन के अनुसार उनकी पाॅलिसी में बदलाव आपकी निजी चैट को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करते हैं। ये अपडेट सिर्फ बिजनेस अकाउंट से बात करने को लेकर है और वो भी वैकल्पिक है।
  • आप चाहे तो व्हाट्सएप पर किसी भी बिजनेस से बात न करे और अगर ऐसा करते हैं तो व्हाट्सएप इस बातचीत को फेसबुक से साझा कर सकता है। फिर इसे आपकी जानकारी से जोड़कर आपके हिसाब से विज्ञापन दिखा सकता है।
  • व्हाट्सएप का कहना है कि बाकी सारी चीजें पहले जैसी हैं। व्हाट्सएप ने ट्वीटर और विज्ञापन के जरिये ये बाते भी कहीं। व्हाट्सएप और फेसबुक न तो आपके प्राइवेट मैसेज देख सकता है न ही आपकी काॅल सुन सकते हैं। 
  • व्हाट्सएप इस बात का रिकाॅर्ड नहीं रखता कि आप किससे चैट या काॅल कर रहे हैं। आप व्हाट्सएप पर जो लोकेशन दूसरे के साथ साझा करते हैं उसे न तो व्हाट्सएप देख सकता है और न ही फेसबुक। व्हाट्सएप आपको फोन में मौजूद कांट्रैक्ट्स को फेसबुक के साथ शेयर नहीं करता है। व्हाट्सएप पर बने हुए ग्रुप प्राइवेट ही रहेंगे।

Conclusion :

इस नए अपडेट से इस एप्लिकेशन का उपयोग करने वाले लोगों की गोपनीयता पर बहुत अधिक चिंता बढ़ गई है। भारतीय उपयोगकर्ता अधिक असुरक्षित हैं क्योंकि भारत में कोई भी डेटा सुरक्षा कानून नहीं है। अगर भारत में डेटा सुरक्षा कानून होता, तो व्हाट्सएप इस नए पॉलिसी अपडेट को लॉन्च नहीं कर पाता। यही सही समय है जब सरकार को डिजिटल गोपनीयता के महत्व के बारे में जनता को जागरूक करने के लिए कुछ डिजिटल जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने चाहिए और इससे सम्बन्धित नए कानूनों को लागू करना चाहिए।

सोशल मीडिया की भूमिका

Introduction :

आज के दौर में सोशल मीडिया जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है, सोशल मीडिया वह जगह है जहां हमे किसी भी चीज के बारे में जानने, पढ़ने, समझने और बोलने का मौंका मिलता हैं। सोशल मीडिया का प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति पर पड़ता है। सोशल मीडिया के बिना हमारे जीवन की कल्पना करना मुश्किल है, परन्तु इसके अत्यधिक उपयोग के वजह से हमे इसकी कीमत भी चुकानी पड़ती हैं। सोशल मीडिया समाज के सामाजिक विकास में अपना योगदान देता है और कई व्यवसायों को बढ़ाने में भी मदद करता है। हम आसानी से सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी और समाचार प्राप्त कर सकते हैं।

किसी भी सामाजिक कारण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग एक अच्छा साधन है। सोशल मीडिया लोगों में निराशा और चिंता पैदा करने वाला एक कारक भी है। ये बच्चों में खराब मानसिक विकास का भी कारण बनता जा रहा है। सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग निद्रा को प्रभावित करता हैं। सोशल मीडिया को अच्छा या बुरा कहने के बजाय, हमें अपने लाभ के लिए इसका उपयोग करने के तरीके को खोजना चाहिए। सोशल मीडिया जागरूकता फैलाने और अपराध से लड़ने में एजेंसियों तथा सरकार की मदद कर सकता है।

सोशल मीडिया का महत्व –

  • व्याख्यानो का सीधा प्रसारण:आजकल कई प्रोफेसर अपने व्याख्यान के लिए स्काइप, ट्विटर और अन्य स्थानों पर लाइव वीडियो चैट आयोजित कर रहे हैं। यह छात्रों के साथ-साथ शिक्षक को भी घर बैठे किसी चीज को सीखने और साझा करने में सहायता करता है। सोशल मीडिया की मदद से शिक्षा को आसान और सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
  • सहयोग का बढ़ता आदान-प्रदान:चूंकि हम दिन के किसी भी समय सोशल मीडिया का उपयोग कर सकते है और कक्षा के बाद शिक्षक से प्रश्नों का समर्थन और समाधान ले सकते हैं। यह अभ्यास शिक्षक को अपने छात्रों के विकास के और अधिक बारीकी को समझने में भी मदद करता है।
  • शिक्षा कार्यो में आसानी:कई शिक्षक महसूस करते हैं कि सोशल मीडिया का उपयोग उनके कामों को आसान बनाता है। यह शिक्षक को अपनी क्षमताओं कौशल और ज्ञान का विस्तार और पता लगाने में भी सहायता करता है।
  • अधिक अनुशासान:सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आयोजित कक्षाएं अधिक अनुशासित और संरचित होती हैं क्योंकि वे जानते हैं कि हर कोई इसे देख रहा होता है।
  • शिक्षा में मददगार:सोशल मीडिया छात्रों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई गयी कई शिक्षण सामाग्री के माध्यम से उनके ज्ञान को बढ़ाने में मदद करता है। सोशल मीडिया के माध्यम से छात्र वीडियो और चित्र देख सकते हैं, समीक्षाओं की जांच कर सकते हैं और लाइव प्रक्रियाओं को देखते हुए तत्काल अपने संदेह को दूर कर सकते हैं।
  • न केवल छात्र, बल्कि शिक्षक भी इन उपकरणों और शिक्षण सहायता का उपयोग करके अपने व्याख्यान को और अधिक रोचक बना सकते हैं।
  • शिक्षण ब्लॉग और लेखन:छात्र प्रसिद्ध शिक्षकों, प्रोफेसरों और विचारकों द्वारा ब्लॉग, आर्टिकल और लेखन पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं। इस तरह अच्छी सामग्री व्यापक दर्शकों तक पहुंच सकती है।

सोशल मीडिया के फायदे –

  • सोशल मीडिया वास्तव में कई फायदे पहुंचाता है, हम सोशल मीडिया का उपयोग समाज के विकास के लिए भी कर सकते है। हमने पिछले कुछ वर्षों में सूचना और सामग्री का विस्फोट देखा है और हम सोशल मीडिया के ताकत से इंकार नहीं कर सकते है।
  • समाज में महत्वपूर्ण कारणों तथा जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया का व्यापक रूप से उपयोग किया जा सकता है। सोशल मीडिया एनजीओ और अन्य सामाजिक कल्याण समितियों द्वारा चलाए जा रहे कई महान कार्यों में भी मदद कर सकता है।
  • सोशल मीडिया जागरूकता फैलाने और अपराध से लड़ने में अन्य एजेंसियों तथा सरकार की मदद कर सकता है। कई व्यवसायों में सोशल मीडिया का उपयोग प्रचार और बिक्री के लिए एक मजबूत उपकरण के रुप में किया जा सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से कई समुदाय बनाये जाते है जो हमारे समाज के विकास के लिए आवश्यक होते हैं।

सोशल मीडिया के नुकसान –

  • साइबर बुलिंग: कई बच्चे साइबर बुलिंग के शिकार बने हैं जिसके कारण उन्हें काफी नुकसान हुआ है।
  • हैकिंग: व्यक्तिगत डेटा का नुकसान जो सुरक्षा समस्याओं का कारण बन सकता है तथा आइडेंटिटी और बैंक विवरण चोरी जैसे अपराध, जो किसी भी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • बुरी आदते: सोशल मीडिया का लंबे समय तक उपयोग, युवाओं में इसके लत का कारण बन सकता है। बुरी आदतो के कारण महत्वपूर्ण चीजों जैसे अध्ययन आदि में ध्यान खोना हो सकता है। लोग इससे प्रभावित हो जाते हैं तथा समाज से अलग हो जाते हैं और अपने निजी जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • घोटाले: कई शिकारी, कमजोर उपयोगकर्ताओं की तलाश में रहते हैं ताकि वे घोटाले कर और उनसे लाभ कमा सके।
  • रिश्ते में धोखाधड़ी: हनीट्रैप्स और अश्लील एमएमएस सबसे ज्यादा ऑनलाइन धोखाधड़ी का कारण हैं। लोगो को इस तरह के झूठे प्रेम-प्रंसगो में फंसाकर धोखा दिया जाता है।
  • स्वास्थ्य समस्याएं: सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है। अक्सर लोग इसके अत्यधिक उपयोग के बाद आलसी, वसा, आंखों में जलन और खुजली, दृष्टि के नुकसान और तनाव आदि का अनुभव करते हैं।
  • सामाजिक और पारिवारिक जीवन का नुकसान: सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण लोग परिवार तथा समाज से दुर, फोन जैसे उपकरणों में व्यस्थ हो जाते है।

Conclusion :

दुनिया भर में लाखों लोग है जो कि सोशल मीडिया का उपयोग प्रतिदिन करते हैं। इसके सकारात्मक और नकारात्मक पहलूओं का एक मिश्रित उल्लेख दिया गया है। इसमें बहुत सारी ऐसी चीजे है जो हमे सहायता प्रदान करने में महत्वपुर्ण है, तो कुछ ऐसी चीजे भी है जो हमें नुकसान पहुंचा सकती है। कई व्यवसायों में सोशल मीडिया का उपयोग प्रचार और बिक्री के लिए एक मजबूत उपकरण के रुप में किया जा सकता है। सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं में कोई संदेह नहीं है लेकिन उपयोगकर्ताओं को सोशल नेटवर्किंग के उपयोग पर अपने विवेकाधिकार का उपयोग करना चाहिए। यदि सोशल मीडिया का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो ये मानव जाति के लिए वरदान साबित हो सकता है।

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

Introduction :

मीडिया ने विश्वभर में लोकतंत्र की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लोकतांत्रिक देशों में मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है और मुक्त मीडिया के बिना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अस्तित्व ही नहीं हो सकता। भारतीय मीडिया ने समाचार पत्र और रेडियो के दौर से लेकर टेलीविजनऔर सोशल मीडिया के वर्तमान युग तक एक लंबा सफर तय किया है। मिडिया समाज के अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक पहुचाके उन्हें शिक्षित करने का एक माध्यम है । मीडिया एक स्वस्थ लोकतंत्र को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मीडिया हमें दुनिया भर में हो रही विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक गतिविधियों से अवगत कराता है।

मीडिया की भूमिका समाज को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। यह लाखों नागरिकों की आवाज़ के रूप में कार्य करता है, जब सरकारी संस्थान भ्रष्ट और सत्तावादी हो जाते हैं। टेलीविजन और रेडियो ने ग्रामीण जनता को उनकी भाषा में सभी घटनाओं से अवगत कराने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत जैसे लोकतंत्र में एक स्वतंत्र और नियंत्रण मुक्त प्रेस की आवश्यकता वास्तव में आवश्यक है। मीडिया सरकार और देश के नागरिकों के बीच एक श्रृंखला के रूप में कार्य करता है, लोगों को मीडिया पर विश्वास है और इसका दर्शकों पर प्रभाव पड़ता है।

सोशल मीडिया के सकारात्मक प्रभाव –

  • सोशल मीडिया दुनिया भर के लोगों से जुड़ने का एक महत्त्वपूर्ण साधन है और इसने विश्व में संचार को नया आयाम दिया है। 
  • सोशल मीडिया उन लोगों की आवाज़ बन सकता है जो समाज की मुख्य धारा से अलग हैं और जिनकी आवाज़ को दबाया जाता रहा है।
  • वर्तमान में सोशल मीडिया कई व्यवसायियों के लिये व्यवसाय के एक अच्छे साधन के रूप में कार्य कर रहा है।
  • सोशल मीडिया के साथ ही कई प्रकार के रोज़गार भी पैदा हुए हैं।
  • वर्तमान में आम नागरिकों के बीच जागरूकता फैलाने के लिये सोशल मीडिया का प्रयोग काफी व्यापक स्तर पर किया जा रहा है।
  • कई शोधों में सामने आया है कि दुनिया भर में अधिकांश लोग रोज़मर्रा की सूचनाएँ सोशल मीडिया के माध्यम से ही प्राप्त करते हैं।

सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव –

  • कई शोध बताते हैं कि यदि कोई सोशल मीडिया का आवश्यकता से अधिक प्रयोग किया जाए तो वह हमारे मस्तिष्क को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है और हमे डिप्रेशन की ओर ले जा सकता है। 
  • सोशल मीडिया साइबर-बुलिंग को बढ़ावा देता है।
  • यह फेक न्यूज़ और हेट स्पीच फैलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • सोशल मीडिया पर गोपनीयता की कमी होती है और कई बार आपका निजी डेटा चोरी होने का खतरा रहता है।
  • साइबर अपराधों जैसे- हैकिंग और फिशिंग आदि का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • आजकल सोशल मीडिया के माध्यम से धोखाधड़ी का चलन भी काफी बढ़ गया है, ये लोग ऐसे सोशल मीडिया उपयोगकर्त्ता की तलाश करते हैं जिन्हें आसानी से फँसाया जा सकता है।
  • सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रयोग हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है।

सोशल मीडिया और भारत  –

  • सोशल मीडिया ने समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को भी समाज की मुख्य धारा से जुड़ने और खुलकर अपने विचारों को अभिव्यक्त करने का अवसर दिया है।
  • आँकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भारत में तकरीबन 350 मिलियन सोशल मीडिया यूज़र हैं और अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2023 तक यह संख्या लगभग 447 मिलियन तक पहुँच जाएगी।
  • वर्ष 2019 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय उपयोगकर्त्ता औसतन 2.4 घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं।
  • इसी रिपोर्ट के मुताबिक फिलीपींस के उपयोगकर्त्ता सोशल मीडिया का सबसे अधिक (औसतन 4 घंटे) प्रयोग करते हैं, जबकि इस आधार पर जापान में सबसे कम (45 मिनट) सोशल मीडिया का प्रयोग होता है।
  • इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया अपनी आलोचनाओं के कारण भी चर्चा में रहता है। दरअसल, सोशल मीडिया की भूमिका सामाजिक समरसता को बिगाड़ने और सकारात्मक सोच की जगह समाज को बाँटने वाली सोच को बढ़ावा देने वाली हो गई है।
  • भारत में नीति निर्माताओं के समक्ष सोशल मीडिया के दुरुपयोग को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बन चुकी है एवं लोगों द्वारा इस ओर गंभीरता से विचार भी किया जा रहा है।

सोशल मीडिया और निजता का मुद्दा –

  • वर्तमान परिदृश्य भारत को डिजिटल सेवाओं के लिये एक नवीन डिजाइन तैयार करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं, जिसमें व्यक्तिगत और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों का समावेश हो।
  • निजता संरक्षण, डेटा संरक्षण से जुड़ा विषय है क्योंकि जब कोई व्यक्ति किसी डिजिटल पहचान द्वारा इंटरनेट माध्यम का प्रयोग करता है तो उस दौरान विभिन्न डाटाओं का संग्रह तैयार हो जाता है जिससे बड़ी आसानी से उपयोगकर्त्ता के निजी डाटा को प्राप्त किया जा सकता है।
  • अतः डेटा संरक्षण ढाँचे के डिज़ाइन में महत्त्वपूर्ण चुनौती डिजिटलीकरण के उपयोग से दीर्घकालिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना तथा इसके साथ ही गोपनीयता को बनाए रखना भी है।
  • भारत में प्रभावी डेटा संरक्षण के लिये डेटा नियामकों के पदानुक्रम और एक मजबूत नियामक ढाँचे की आवश्यकता होगी, जो जटिल डिजिटल सेटअप और आम सहमति के अलावा हमारे मूल अधिकारों की रक्षा कर सके।
  • पिछले वर्ष भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंध संस्थान ग्वालियर के अध्ययन में बताया गया कि भारत आने वाले 89 फीसदी पर्यटक सोशल मीडिया के ज़रिये ही भारत के बारे में जानकारियाँ प्राप्त करते हैं।
  • यहाँ तक कि इनमें से 18 फीसदी लोग तो भारत आने की योजना ही तब बनाते हैं जब सोशल मीडिया से प्राप्त सामग्री इनके मन में भारत की अच्छी तस्वीर पेश करती है।
  • सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को नया आयाम दिया है, आज प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी डर के सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार रख सकता है और उसे हज़ारों लोगों तक पहुँचा सकता है, परंतु सोशल मीडिया के दुरुपयोग ने इसे एक खतरनाक उपकरण के रूप में भी स्थापित कर दिया है तथा इसके विनियमन की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।

Conclusion :

अतः आवश्यक है कि निजता के अधिकार का उल्लंघन किये बिना सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिये सभी पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर नए विकल्पों की खोज की जाए, ताकि भविष्य में इसके संभावित दुष्प्रभावों से बचा जा सके। वर्तमान समय में युवाओं को प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया की तेजी से बढ़ती दुनिया में अधिक रुचि है। इस प्रकार, मीडिया के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो जाता है कि वे जो सूचना प्रसारित कर रहे हैं, वह पक्षपाती न हो। मीडिया लोकतंत्र में एक वाचडॉग की तरह है जो सरकार को सक्रिय रखता है और यह हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गया है।

फेक न्यूज़ पर निबंध

Introduction :

भारत में फेक न्यूज की समस्या लगातार बढ़ रही है। फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल गलत और झूठी सूचनाएं फैलाने के लिए तेज़ी से हो रहा है। फेक न्यूज की समस्या इसलिए भी जटिल होती जा रही है क्योंकि देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अभी भारत की 27 फीसदी लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं। चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोग भारत में हैं। दुनिया भर में व्हाट्सएप के मासिक एक अरब से ज्यादा सक्रिय यूजर्स में से 16 करोड़ भारत में हैं। वहीं फेसबुक इस्तेमाल करने वाले भारतीयों की तादाद 14.8 करोड़ और ट्विटर अकाउंट्स की तादाद 2.2 करोड़ है।

यह सामान्य भाईचारे की भावना को प्रभावित करता है और देश में असहिष्णुता को बढ़ाता है। फेक न्यूज़ से निर्दोष लोगों का उत्पीड़न और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है। इससे मौतें भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, बच्चों और पशु चोरों के बारे में अफवाहें पूरे भारत में भीड़ के हमलों और मौतों का कारण बनती रही है। फेक न्यूज़ के खतरे के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दोषारोपण करना अनुचित है। क्योंकि फेसबुक, व्हाट्सएप इत्यादि जैसे प्लेटफॉर्म कंटेंट नहीं बना रहे हैं, लेकिन उपयोगकर्ताओं द्वारा स्वयं को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। फेक न्यूज़ से निपटने के लिए एक प्रभावी दृष्टिकोण डिजिटल साक्षरता में सुधार करना है यानी फेक न्यूज़ से वास्तविक न्यूज़ की पहचान करने की क्षमता को बढ़ाना।

फेक न्यूज़ को बढ़ावा देने वाले कारक –

  • हमारे समाज में कुछ ऐसे अराजक तत्व है जो इस तरह के कामो को बढ़ावा देते है उनका काम यही होता है की समाज का माहौल ख़राब हो |
  • हम ये नहीं कह सकते हैं की इस तरह की न्यूज़ को सिर्फ सोशल मीडिया ही फैला रहे है क्योकि हमे पता होना चाहिए की ऐसी खबरे सोशल मीडिया नहीं फैलाती और ना ही इस तरह की खबरे बनाती है ये काम तो हम जैसे लोग बनाते और फैलाते हैं |
  • इस तरह के कारक पर हमे उचित कार्यवाही करनी चाहिए क्योकि सारे दोष सोशल मीडिया को ही नहीं दे सकते है वैसे बही अब पहले की तुलना में सोशल मीडिया बहुत ही ज्यादा सख्त हो गया है जो भी इस तरह की एक्टिविटी करता है यूज़ तुरंत बैन कर दिया जाता है |
  • पहले समय में अखबारों में लिमिटेड खबरे आती थी तो फेक न्यूज़ का कोई मतलब नहीं होता था लेकिन जब से इन्टरनेट आया तब से खबरे आग की तरह फ़ैल रही है और इस तरह की खबरे फैलाने वालो को बढ़ावा मिल रहा है |

फेक न्यूज़ के फैलने से होने वाले नुकसान –

  • फेक न्यूज़ के फैलने से समाज और पूरे देश में अशांति का माहौल होता है |
  • इसके कारण कुछ ऐसे खबरे फैलाने वालो को बढ़ावा मिलता है |
  • हमारे समाज और देश की छवि ख़राब होती है |
  • कुछ ऐसे अराजक तत्व होते है जो समाज में अराजकता फैलाते हैं वे इस तरह की फेक न्यूज़ का ही सहारा लेते हैं |
  • समाज में जितने भी दंगे, हुडदंग या फिर भय का माहौल होता है उन सभी का कारण फेक न्यूज़ ही होता है |
  • जिसके खिलाफ इस तरह की खबरे फैलाई जाती हैं उनकी छवि भी खराब होती है
  • इससे लोग सिर्फ फेक न्यूज़ पर ही ध्यान देते है उन्हें लगता है ही यही सही खबर है क्योकि फेक न्यूज़ फैलाने वाले खबरों को तोड़ मरोड़ कर पेश करते हैं |
  • अगर एक दिन में 100 न्यूज़ आती हैं तो उसमे से आधी न्यूज़ फेक ही होती है
  • कभी कभी इस तरह की खबरों की कीमत एक इमानदार इंसान को चुकानी पड़ती है |
  • कभी कभी फेक न्यूज़ के फैक्ट को चेक करने का प्रमाण भी नहीं मिल पाता है जिसके चलते लोग यूज़ ही सच मानने लगते हैं |

फेक न्यूज़ को फैलने से रोकने के लिए उपाय –

  • फेक न्यूज़ से निपटने के लिए इस तरह के प्रभावी डिजिटल साक्षरता में सुधार करने की जरूरत है जिससे की ये पता चल सके की फेक न्यूज़ कौन सी है और वास्तविक न्यूज़ कौन सी है वैसे भी हमारा देश डिजिटल इंडिया की ओर बहुत तेजी से बढ़ रहा है और नयी तकनिकी को अपना रहा है |
  • भारत में डिजिटल साक्षरता में सुधार करने के लिए सरकार, मीडिया और संस्थानों को मिलकर काम करना चाहिए |
  • सरकार को सोशल मीडिया में फैलने वाले किसी भी फेक न्यूज़ पर काबू पाने के लिए प्रभावी ढंग से अपनी रणनीति बनाने की जरूरत है और इस तरह की न्यूज़ सोशल मीडिया में फैलाने वालो को कड़ी कार्यवाही करने की जरूरत है |

Conclusion :

सरकार को इस तरह के खबरों के सोर्स पर पैनी नजरे रखनी चाहिए और इनके गिरोह का पर्दाफाश करना चाहिए और इस तरह की खबरों को कोई भी न्यूज़, अखबार या फिर सोशल मीडिया बिना पुष्टि के नहीं पब्लिश नहीं करना चाहिए अगर हम पहले से ही अलर्ट रहेंगे तो इसकी नौबत ही नहीं आएगी | भारत में डिजिटल साक्षरता में सुधार के लिए सरकार, मीडिया और प्रौद्योगिकी को मिलकर काम करना चाहिए। सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज़ को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नीतियों को बनाने जरूरत है। फेक न्यूज़  को फैलाने के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को पकड़ने के लिए राज्य पुलिस तंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए।

निजता का अधिकार

Introduction :

मनुष्य की ज़रूरतें सबसे प्राथमिक ज़रूरतों जैसे कि भोजन, कपड़े और आश्रय से लेकर माध्यमिक ज़रूरतों जैसे शिक्षा, काम और मनोरंजन और आगे की ज़रूरतों जैसे मनोरंजन, भोजन, अवकाश, यात्रा, आदि से शुरू होती हैं। यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि इन सभी जरूरतों और इच्छाओ (wants) में गोपनीयता कहाँ है ? किसी भी सभ्य समाज में गोपनीयता की एक बुनियादी डिग्री एक प्राथमिक आवश्यकता है। जैसे-जैसे गोपनीयता की डिग्री बढ़ती है, यह एक माध्यमिक जरूरत और आगे एक इच्छा में विकसित हो जाती है। निजता का अधिकार नागरिकों की निजता के अधिकार को लेकरकर यह सुनिश्चित करता है की सभी समान रूप से संरक्षित हो और अमीर और गरीब के लिए समान न्याय और अधिकार हो।

 आधार के लिए भारत के निवासियों के व्यक्तिगत डेटा के संग्रह की आवश्यकता होती है, और इसके परिणामस्वरूप चूक होने की संभावना को लेकर विवाद पैदा हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें बायोमेट्रिक विवरण जैसे कि आईरिस स्कैनिंग और फिंगर प्रिंट के संग्रह की आवश्यकता होती है जो अनिवार्य रूप से महत्वपूर्ण विवरण हैं और इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। साइबर स्पेस एक संवेदनशील स्थान है और यहाँ खतरे की संभावना अधिक है हालांकि, आधार अपने आप में एक सुविचारित कार्यक्रम है ताकि वित्तीय समावेशन सुनिश्चित किया जा सके।

निजता का महत्त्व –

  • निजता वह अधिकार है जो किसी व्यक्ति की स्वायतता और गरिमा की रक्षा के लिये ज़रूरी है। वास्तव में यह कई अन्य महत्त्वपूर्ण अधिकारों की आधारशिला है।
  • दरअसल निजता का अधिकार हमारे लिये एक आवरण की तरह है, जो हमारे जीवन में होने वाले अनावश्यक और अनुचित हस्तक्षेप से हमें बचाता है।
  • यह हमें अवगत कराता है कि हमारी सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक हैसियत क्या है और हम स्वयं को दुनिया से किस हद तक बाँटना चाहते हैं।
  • वह निजता ही है जो हमें यह निर्णित करने का अधिकार देती है कि हमारे शरीर पर किसका अधिकार है?
  • आधुनिक समाज में निजता का महत्त्व और भी बढ़ जाता है। फ्रांस की क्रांति के बाद समूची दुनिया से निरंकुश राजतंत्र की विदाई शुरू हो गई और समानता, मानवता और आधुनिकता के सार्वभौमिक सिद्धांतों पर आधारित लोकतंत्र ने पैर पसारना शुरू कर दिया।
  • अब राज्य लोगों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ चलाने लगे तो यह प्रश्न प्रासंगिक हो उठा कि जिस गरिमा के भाव के साथ जीने का आनंद लोकतंत्र के माध्यम से मिला उसे निजता के हनन द्वारा छिना क्यों जा रहा है?
  • तकनीक और अधिकारों के बीच हमेशा से टकराव होते आया है और 21वीं शताब्दी में तो तकनीकी विकास अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच चुका है। ऐसे में निजता को राज्य की नीतियों और तकनीकी उन्नयन की दोहरी मार झेलनी पड़ी।
  • आज हम सभी स्मार्टफोंस का प्रयोग करते हैं। चाहे एपल का आईओएस हो या गूगल का एंड्राइड या फिर कोई अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम, जब हम कोई भी एप डाउनलोड करते हैं, तो यह हमारे फ़ोन के कॉन्टेक्ट, गैलरी और स्टोरेज़ आदि के प्रयोग की इज़ाज़त मांगता है और इसके बाद ही वह एप डाउनलोड किया जा सकता है।
  • ऐसे में यह खतरा है कि यदि किसी गैर-अधिकृत व्यक्ति ने उस एप के डाटाबेस में सेंध लगा दी तो उपयोगकर्ताओं की निजता खतरे में पड़ सकती है।
  • तकनीक के माध्यम से निजता में दखल, राज्य की दखलंदाज़ी से कम गंभीर है। हम ऐसा इसलिये कह रहे हैं क्योंकि तकनीक का उपयोग करना हमारी इच्छा पर निर्भर है, किन्तु राज्य प्रायः निजता के उल्लंघन में लोगों की इच्छा की परवाह नहीं करता।
  • आधार का मामला इसका जीता जागता उदाहरण है। जब पहली बार आधार का क्रियान्वयन आरंभ किया गया तो कहा यह गया कि यह सभी भारतीयों को एक विशेष पहचान संख्या देने के उद्देश्य से लाई गई है। जल्द ही मनरेगा सहित कई बड़ी योजनाओं में बेनिफिट ट्रान्सफर के लिये आधार अनिवार्य कर दिया गया।
  • यहाँ तक कि आधार पर किसी भी प्रकार के विचार-विमर्श से किनारा करते हुए इसे मनी बिल यानी धन विधेयक के तौर पर संसद में पारित कर दिया गया। इन सभी बातों से पता चलता है कि निजता जो कि लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने के लिये आवश्यक है, गंभीर खतरे में है।

गोपनीयता का उल्लंघन –

  • सोशल मीडिया चैनलों और साइटों पर गोपनीयता भंग होने के अधिक मामले देखे जा सकते हैं, जिसमें साइबर अपराधियों द्वारा व्यक्ति के जीवन को नष्ट करने वाले जघन्य अपराध करने के लिए लोगों की व्यक्तिगत जानकारी और डेटा को हैक किया जाता है।
  • कई हैकर्स हमारे सोशल मीडिया और बैंकिंग खातों में घुस जाते हैं और लीक हुई जानकारी के जरिए पैसा कमाने के लिए संवेदनशील डेटा चुरा लेते हैं।
  • इतना ही नहीं, बल्कि कई अन्य क्षेत्र भी हैं जो गोपनीयता के उल्लंघन से पीड़ित हैं। इसलिए, यह एक प्रमुख चिंता का विषय है और सरकार को इससे निपटना चाहिए।

इंटरनेट के उपयोग के साथ, इस युग में, फेसबुक और ट्यूटर जैसे सामाजिक नेटवर्क सामाजिक संपर्क के नए रूपों को चला रहे हैं और उपलब्धता ने गोपनीयता संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है। इसके लिए सरकार को साइबर सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करना चाहिए और कानून के माध्यम से आश्वासन देना चाहिए कि निजता के अधिकार का उल्लंघन  न हो और निजी जानकारी को निजी रखा जाये।

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Essays

Essay on Right to Privacy in India

Essay on Right to Privacy in India

Introduction :

The needs of human beings start from the most primary needs such as food, clothing and shelter to secondary needs such as education, work and recreation and further on to wants such as entertainment, good food, leisure travel, etc. The question that must be asked is where does privacy fit into all these needs and wants? A basic degree of privacy is a primary need in any civilized society. As the degree of privacy increases, it evolves into a secondary need and further to a want. Right to Privacy refers to respecting and ensuring the privacy of the individual.

  • The Supreme Court has cut straight to the heart of the issue in the Aadhaar petitions. On behalf of all Indian citizens, it asks the current government to address the most basic questions in a democracy governed by the law.
  • what are the privacy rights of its citizens and are they protected equally, with the same justice for the rich and the poor alike?
  • The right to privacy suggests that it is completely the choice of an individual that which parts of his life he chooses to disclose to the society.
  • Nobody has the right to interfere in someone’s life without his permission. Every individual has his private family and professional life and only he has the sole right to disclose it to others.
  • Technological developments have greatly impacted the privacy of the people. Security and anti-terrorism are the hot topics for global governments that consider the privacy of individuals as a hindrance in their missions to fight terrorism.
  • As a result, intelligence services are granted full rights to breach the security and privacy of the people thus ultimately prying into the life of people.
  • Aadhar initiative requires collection of personal data from residents of India, and this has resulted in controversy regarding its potential to be missed.
  • This is so because it requires collection of biometric details like iris scanning and finger prints which are essentially crucial details and could be misused.
  • Cyber space is a vulnerable space and is prone to threat & cyber security architecture is also not very strong in India. However, Aadhar in itself is a well-intentioned program so as to plug leakages and ensure financial inclusion.

Conclusion :

This will lead to better targeting of subsidies. With the use of the internet, in this age, social networks such as Facebook and Twitter are driving new forms of social interaction and the availability has raised privacy concerns. Towards this the government must strengthen cyber security system and assure by means of legislation that private details would be maintained private against violation of right to privacy.

Essay on Right to Privacy Vs WhatsApp New Privacy Policy

Introduction :

Social media is a boon for human civilization because it has brought the whole world together at one place where individuals can share their views and ideas and such interactions are beneficial for the people as it helps in increasing social skills. In today’s world, technology has made our life easier because with the help of technology we can learn new things and meet new people all over the world.

  • WhatsApp is one of the most important social applications which plays a major role in our daily life. WhatsApp is facing a lot of criticism for its new privacy policy which says that it may share information of any of its users with Facebook and its partner companies. 
  • Since then there has been a huge rise in the dounloads of its alternative apps including Signal. In response to global criticism, WhatsApp head Will Cathcart explained , with end-to-end encryption, they cannot see the users private chats or calls and neither can Facebook.
  • WhatsApp has also given users time till 8th of February 2021  to accept the new terms and conditions. WhatsApp says it is collecting new information from users device such as Battery level, app version, browser information, mobile network, IP address and phone number etc.
  • It also declares that the data in some cases can be transferred to the USA or other parts where Facebook’s affiliate companies are based.
  • This new update has increased a lot of concern over the privacy of the people that use this application.

Conclusion :

Privacy experts have also criticised this new privacy policy. Indian users are more vulnerable as there is no any data protection law in India. If India had a data protection law, WhatsApp would not have been able to launch this new policy update. The government should also initiate some digital awareness programs to make the public aware of the importance of digital privacy in India.

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