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essay on mental health

Essays

मानसिक स्वास्थ्य पर निबंध (Mental Health essay in Hindi)

मानसिक स्वास्थ्य पर निबंध (essay on Mental Health in Hindi)

Introduction :

गांधी जी ने एक बार कहा था, ” स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है सोना और चांदी नहीं”। यह कथन हमारे जीवन में स्वास्थ्य के महत्व को इंगित करता है। लोग आमतौर पर अपने शारीरिक स्वस्थ पर अधिक ध्यान देते हैं और मानसिक फिटनेस को अनदेखा करते हैं। लेकिन यह भी सत्य है कि मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य। हम अपने विकसित मस्तिष्क के कारण अपने जीवन को नियंत्रित कर पाते हैं। इसलिए, बेहतर प्रदर्शन और परिणाम के लिए हमारे शरीर और दिमाग को फिट और स्वस्थ रखना हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है आक्रामकता, नकारात्मक सोच, निराशा और भय ऐसे कारक हैं जो हमारे फिटनेस स्तर पर बहुत प्रभाव डालते हैं। मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति हमेशा अच्छे मूड में होता है और आसानी से संकट और ख़राब स्थितियों को आसानी से व्यवस्थित कर सकता है। 

मानसिक फिटनेस महसूस करने और सोच की सकारात्मकता को दर्शाता है जो जीवन का आनंद लेने की हमारी क्षमता में सुधार करता है। आजकल फिटनेस शब्द का इस्तेमाल मनोवैज्ञानिकों, स्कूलों, संगठनों और सामान्य लोगो द्वारा तार्किक सोच और तर्क क्षमता को दर्शाने के लिए किया जा रहा है। उसी तरह मानसिक इलनेस स्वास्थ्य की अस्थिरता है, जिसमें सोच और व्यवहार में अप्रत्याशित परिवर्तन आता हैं। तनाव या अन्य घटनाओं के कारण मानसिक बीमारी हो सकती है। यह आनुवंशिक कारकों, सामाजिक तनाव और खराब शारीरिक स्वास्थ्य से भी उत्पन्न हो सकती  है।

  • शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य का निकट संबंध है और यह निस्संदेह रूप से सिद्ध हो चुका है कि अवसाद के कारण हृदय और रक्तवाहिकीय रोग होते हैं।
  • मानसिक विकार व्यक्ति के स्वास्थ्य-संबंधी बर्तावों जैसे, समझदारी से भोजन करने, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, सुरक्षित यौन व्यवहार, मद्य और धूम्रपान, चिकित्सकीय उपचारों का पालन करने आदि को प्रभावित करते हैं और इस तरह शारीरिक रोग के जोख़िम को बढ़ाते हैं।
  • मानसिक अस्वस्थता के कारण सामाजिक समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं जैसे, बेरोजगार, बिखरे हुए परिवार, गरीबी, नशीले पदार्थों का दुर्व्यसन और संबंधित अपराध।
  • मानसिक अस्वस्थता रोगनिरोधक क्रियाशीलता के ह्रास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • अवसाद से ग्रस्त चिकित्सकीय रोगियों का हश्र बिना अवसाद से ग्रस्त रोगियों से अधिक बुरा होता है।
  • लंबे चलने वाले रोग जैसे, मधुमेह, कैंसर,हृदय रोग अवसाद के जोखिम को बढ़ाते हैं।
  • कोई व्यक्ति जो शारीरिक रूप से अयोग्य है वह अपने परिवार की देखभाल नहीं कर सकता है। इसी तरह कोई व्यक्ति मानसिक तनाव का सामना कर रहा है और अपनी भावनाओं को संभालने में अक्षम है तो वह परिवार के साथ अच्छे रिश्तों का निर्माण और उनको बढ़ावा नहीं दे सकता है।
  • यह कहना बिल्कुल सही है कि एक शारीरिक रूप से अयोग्य व्यक्ति ठीक से काम नहीं कर सकता। कुशलतापूर्वक काम करने के लिए अच्छा मानसिक स्वास्थ्य बहुत आवश्यक है। काम पर पकड़ बनाने के लिए अच्छे सामाजिक और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य का आनंद लेना चाहिए।
  • ख़राब शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी अध्ययन में एक बाधा है। अच्छी तरह से अध्ययन करने के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के अलावा अच्छा संज्ञानात्मक स्वास्थ्य बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
  • हमारा मानसिक स्वास्थ्य मूल रूप से, जिस तरह से हम महसूस करते हैं, अलग-अलग परिस्थितियों में सोचते हैं और स्थिति को नियंत्रित करते हैं, आदि को प्रभावित करता है। मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शारीरिक स्वास्थ्य को बरकरार रखना महत्वपूर्ण है।
  • सामाजिक स्वास्थ्य समाज में अपने दोस्तों, पड़ोसियों, रिश्तेदारों और अन्य लोगों के साथ पारस्परिक संबंधों को संवारने और बनाए रखने की क्षमता रखता है। यह उचित रूप से कार्य करने और विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों के अनुकूल होने के लिए किसी व्यक्ति की क्षमता को दर्शाता है।
  • जब एक व्यक्ति का मस्तिष्क सभी मानसिक प्रक्रियाओं को कुशलता से निष्पादित करता है तो उसे अच्छे संज्ञानात्मक स्वास्थ्य का आनंद लेना कहा जाता है। प्रक्रियाओं और क्रियाकलापों में नई बातें, अच्छे निर्णय, अपनी बात और मजबूत संवाद करने के लिए भाषा का कुशल उपयोग करना शामिल है।
  • आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बरकरार रखने से एक व्यक्ति अधिक सकारात्मक, जुझारू और सुलझा हुआ बनता है।
  • स्वास्थ्य का मतलब केवल आपकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य नहीं है बल्कि इसके बारे में ऊपर बताए गए विभिन्न तत्व भी इसमें शामिल हैं। जहाँ अच्छा शारीरिक स्वास्थ्य एक स्वस्थ जीवन के लिए आधार है वहीँ आपको एक स्वस्थ्य जीवन का आनंद लेने के लिए अन्य सभी स्वास्थ्य घटकों को बनाए रखना आवश्यक है।

Conclusion :

जीवन में हर कदम पर प्रतिस्पर्धा होती है। प्रत्येक व्यक्ति दूसरे की बराबरी करना चाहता है चाहे वह स्कूल या कॉलेज स्तर पर हो या जीवन में स्वास्थ्य शैली को बनाए रखनी की हो। लोगों को इस तथ्य को पहचानना चाहिए कि स्वास्थ्य पहले है। हम यह सब तभी कर सकते हैं जब हम स्वस्थ होते हैं और जीवन के अन्य पहलुओं पर बेहतर काम करते हैं। सरकार को देश की भलाई के लिए अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ भी प्रदान करनी चाहिए।

मानसिक बीमारी का इलाज़ संभव है। हम सकारात्मक सोच और अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर इस बीमारी को दूर कर सकते हैं। नियमित व्यायाम जैसे कि सुबह की सैर, योग और ध्यान मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए बेहतरीन औषधि साबित हुए हैं। अच्छा भोजन और पर्याप्त नींद लेना भी बहुत जरूरी है। तनावमुक्त और निरोगी जीवन के लिए अच्छा मानसिक स्वास्थ्य बहुत जरूरी है, क्योंकि हम सभी को अपने -अपने जीवन में बड़ी सफलताएं हासिल करनी है जिसके लिए अच्छे मानसिक स्वास्थ्य की बहुत जरूरत होती है।

योग का महत्व 

Introduction :

योग दुनिया में सबसे लोकप्रिय अभ्यास है, जिसकी शुरुआत भारत में योगियों द्वारा की गई । यह एक व्यायाम है जिसे हम अपने शरीर को संतुलित करके करते हैं। यह जीवन भर स्वस्थ रहने का सबसे अच्छा और सुरक्षित तरीका भी माना जाता है। यह हमारे शरीर के साथ-साथ मन पर भी नियंत्रण रखने में हमारी मदद करता है। यह हमें तनाव और चिंता से मुक्त करने का एक असरदार तरीका है। यह एक दवा की तरह है, जो हमारे शरीर के अंगों के कार्यों करने के ढंग को नियमित करके हमें विभिन्न बीमारियों से बचाने का कार्य करता है तथा हमारे शरीर को मजबूत बनाता है और हमें स्वस्थ रहने में मदत करता है। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है जब लोगों को योग के लाभों के बारे में जागरूक किया जाता है।

यह केवल एक शारीरिक क्रिया ही नहीं है, क्योंकि यह हमें मानसिक, भावनात्मक और आत्मिक विचारों पर नियंत्रण करने के योग्य भी बनाता है। यह हमारे मस्तिष्क को तेज करता है, बौद्धिक स्तर को सुधारता है और उच्च स्तर की एकाग्रता में मदद करता है। यदि हम नियमित रूप से अभ्यास करते हैं तो हम योग से आत्म-अनुशासन और आत्म-जागरूकता विकसित कर सकते हैं।

  • योग एक कला है जो हमारे शरीर, मन और आत्मा को एक साथ जोड़ता है और हमें मजबूत और शांतिपूर्ण बनाता है। योग आवश्यक है क्योंकि यह हमें फिट रखता है, तनाव को कम करने में मदद करता है और समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखता है और एक स्वस्थ मन ही अच्छी तरह से ध्यान केंद्रित करने में सहायता कर सकता है।
  • योग आंतरिक शांति प्राप्त करने और तनाव तथा अन्य समस्याओं के खिलाफ लड़ाई में मदद करता है। योग एक व्यक्ति में शांति के स्तर को बढ़ाता है और उसके आत्मविश्वास को और अधिक बढ़ाने तथा उसे खुश रहने में मदद करता है।
  • एक स्वस्थ व्यक्ति एक अस्वस्थ व्यक्ति की तुलना में अधिक काम कर सकता है। आजकल जीवन बहुत तनावपूर्ण है और हमारे आसपास बहुत प्रदूषण है। यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण है। सिर्फ 10-20 मिनट का योग हर दिन आपके स्वास्थ्य को अच्छा रहने में मदद कर सकता है। बेहतर स्वास्थ्य का मतलब बेहतर जीवन है।
  • आजकल लोग आलसी, थके हुए या नींद की कमी महसूस करते हैं जिसके कारण वे अपने जीवन में अधिकतर मौज-मस्ती से चूक जाते हैं और अपने काम को सही ढंग से पूरा करने में सक्षम नहीं हैं।
  • सक्रियता होने के नाते आप अपने आसपास होने वाली चीजों के बारे में अधिक जागरूक रहते हैं और अपने काम को अधिक कुशलतापूर्वक और जल्दी से पूरा कर पाते हैं यह सब करने का एक तरीका नियमित रूप से योग का अभ्यास करना है।
  • लोग आजकल कई प्रकार के दर्द से ग्रस्त हैं। वे पैर की उंगलियों को छूने या नीचे की ओर झुकने के दौरान कठिनाइयों का सामना करते हैं। योग का नियमित अभ्यास इन सभी प्रकार के दर्द से राहत में मदद करता है। योग करने से इन सभी चीजों का प्रभाव कुछ दिनों में कम होता देखा जा सकता है।
  • योग आपके दिल को स्वस्थ बनाने में मदद करता है और यह आपके शरीर और नसों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाकर अधिक कुशलता से काम करता है। यह आपके शरीर को ऑक्सीजन युक्त रखने में मदद करता है।
  • योग आपके शरीर को शांत करने और आराम करने में मदद करता है जिसका मतलब तनाव का कम होना है और आप अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर सकते है।
  • यही कारण है कि बच्चों और किशोरों को योग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है क्योंकि यह उनकी पढ़ाई में बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
  • योग को आसान तक सीमित होने की वजह से आंशिक रूप से ही समझा जाता है, लेकिन लोगों को शरीर, मन और सांस को एकजुट करने में योग के लाभों का एहसास नहीं है। किसी भी आयु वर्ग और किसी भी शरीर के आकार के व्यक्ति द्वारा योग का चयन और इसका अभ्यास किया जा सकता है।
  • यह किसी के लिए भी शुरू करना संभव है। आकार और फिटनेस स्तर से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि योग में विभिन्न लोगों के अनुसार प्रत्येक आसन के लिए संशोधन मौजूद हैं।

योग के फायदे –

  • मांसपेशियों के लचीलेपन में सुधार
  • शरीर के आसन और एलाइनमेंट को ठीक करता है
  • बेहतर पाचन तंत्र प्रदान करता है
  • आंतरिक अंग मजबूत करता है
  • अस्थमा का इलाज करता है
  • मधुमेह का इलाज करता है
  • दिल संबंधी समस्याओं का इलाज करने में मदद करता है
  • त्वचा के चमकने में मदद करता है
  • शक्ति और सहनशक्ति को बढ़ावा देता है
  • एकाग्रता में सुधार
  • मन और विचार नियंत्रण में मदद करता है
  • चिंता, तनाव और अवसाद पर काबू पाने के लिए मन शांत रखता है
  • तनाव कम करने में मदद करता है
  • रक्त परिसंचरण और मांसपेशियों के विश्राम में मदद करता है

कोई भी व्यक्ति योग का अभ्यास कर सकता है चाहे वह किसी भी उम्र का हो या जिस भी धर्म का पालन करता हो। जब हम योग को अपने जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा  बनाते हैं और हर दिन इसका अभ्यास करते हैं तो यह हम सभी के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है। स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने के लिए सभी को इसका अभ्यास जरूर करना चाहिए।

मोबाइल एडिक्शन

Introduction :

मोबाइल की लत आजकल हमारे समाज में एक चिंता का विषय बन चूका है। मोबाइल फोन की लत पड़ना जितना आसान है, इससे छुटकारा पाना उतना ही मुश्किल। दुनिया भर में लाखो लोग मोबाइल फोन के आदी हो चुके हैं। मोबाइल फ़ोन हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चूका है, इसके आभाव में हमारे अनेकों काम रुक जाते हैं। जब कोई व्यक्ति खुद को अपने मोबाइल से दूर नहीं रख पाता, इस स्थिति को मोबाइल की लत कहते हैं। मोबाइल फोन का आविष्कार हमें सशक्त बनाने के लिए किया गया था, लेकिन अब यह हम पर हावी होने लगा है। इसके माध्यम से हम दुनिया भर में किसी से भी बात कर सकते है। यह हमें उन सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने में सक्षम बनाता है जिनकी हमें आवश्यकता है और मनोरंजन का एक बड़ा स्रोत भी है। स्मार्ट फोन हमें गेम खेलने, पढाई करने और ऑनलाइन शॉपिंग करने में सक्षम बनाता हैं।

यह हमें फिल्में देखने, फ़ोटो खींचने, संगीत सुनने, इंटरनेट पर सर्फ करने और विभिन्न अन्य गतिविधियों का आनंद लेने में सक्षम बनाता है। अत्यधिक उपयोगिता के कारण हमें इसकी लत लगती जा रही है जो हमारे लिए हानिकारक हो सकता है। मोबाइल की लत कई गंभीर समस्याओं का मुख्य कारण बन सकती है, जैसे व्यक्ति में चिड़चीड़ापन का होना, हमेशा सिर दर्द की समस्या, नेत्र संबंधित समस्या, अनिंद्रा व मोबाइल के हानिकार रेडिएशन से कई अन्य तरह के रोग भी हो सकते हैं। मोबाइल की लत का एक और संकेत समय की हानि है। वह व्यक्ति जो मोबाइल फोन का आदी है, उसको समय का पता ही नहीं रहता। वह अपना कोई भी कार्य समय पर समाप्त नहीं कर पता। मोबाइल फोन की आदत से छुटकारा पाना मुश्किल हो सकता है लेकिन असंभव नहीं।

  • अपनो से जोड़ना’ कहां मोबाइल की परिभाषा के रूप में पढ़ा जाता था। आज अपनों से दूरी का मुख्य कारण मोबाइल है। व्यक्ति एक रूम में एक साथ होने के बाद भी पास बैठे लोगों में अपनी कोई रुचि नहीं दिखाता और अपने-अपने मोबाइल के स्क्रीन स्क्रोल करता रहता है। इससे आपसी संबंध कमज़ोर होते हैं।
  • मोबाइल के लगातार इस्तेमाल से उससे निकलने वाली हानिकारक रेडिएशन से हमें हृदय संबंधी रोग हो सकते है। इसके अलावां आँखों के रौशनी पर भी गहरा असर पड़ता है। साथ ही सिर दर्द, नींद न आना, चिड़चीड़ापन, याददाश्त का कमज़ोर होना अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं हो सकते हैं।
  • बेशक टेकनॉलजी के माध्यम से हम विकास की ओर बढ़ पाते है, जिसमें मोबाइल फ़ोन मुख्य भूमिका निभाता है। क्योंकि सबके पास पढ़ाई के लिए लैपटॉप या कम्पूटर नहीं हो सकता पर मोबाइल होता है। जिसकी मदद से वह अपने संदेह दूर कर सकते हैं पर मोबाइल की लत में आज लोग घंटों अपना किमती समय मोबाइल को दे देते हैं। जिससे उनका ध्यान पढ़ाई पर नहीं लगता है। अपने व्यवसाय में वह अपना पूर्ण योगदान नहीं दे पाते हैं।
  • खुद में ही खोए रहते हैं और खुद से दूर होते चले जाते हैं। हम पढ़ाने वाले समय पर भी खुद से झुठ बोलकर मोबाइल पर पढ़ाई करने के बहाने ढुंढ़ते हैं।
  • मोबाइल के न मिलने पर या खो जाने पर हम सभी परेशान हो जाते है पर बहुत अधिक चिंता का होनानोमोफोबीया कहलाता हैं। इसमें मोबाइल के न होने पर व्यक्ति असहज महसूस करता है तथा उसे बहुत अधिक घबराहट होने लगता है। विश्व भर में किए गए शोध से पता चला है, नोमोफोबिया की शिकायत तेजी से बढ़ती जा रही है। मोबाइल फ़ोन को बहुत अधिक चलाने से यह बीमारी हो सकती है।
  • नोमोफोबिया में संबंधित व्यक्ति को मोबाइल चोरी होने या गिर जाने के सपनें आते हैं, इससे वह घबराहट में नींद से उठ जाता हैं। ऐसा दिन भर मोबाइल की चिंता करने के वजह से होता है।
  • हम सभी अपने किमती सामानों के न मिलने पर घबरा जाते हैं, पर नोमोफोबीया में व्यक्ति का मोबाइल खो जाने पर वह इतना घबरा जाता है की उसे पैंनिक अटैक आ सकते हैं।
  • नोमोफोबिया का अर्थ नो मोबाइल फोबिया है, इसमें व्यक्ति किसी भी स्थिति में मोबाइल को स्वयं से दूर नहीं कर सकता। वह जहां कहीं भी जाता है मोबाइल लेकर हीं जाना पसंद करता है। सोने पर भी वह अपने समीप ही मोबाइल को रख कर सोता है।
  • नोमोफोबिया में बार-बार व्यक्ति को कॉल आने का आभास होता है, उसे लगता है मोबाइल की रिंग जैसे बज रही हो।
  • यह कुछ लक्षण है, जिससे मालुम चलता है व्यक्ति नोमोफोबिया का शिकार हो चुँका है, अतः सही समय पर इससे छुटकारा पाने के लिए उचित कदम उठाना चाहिए।
  • मोबाइल की लत ने व्यक्ति को अपने अधीन कर लिया है। गैजेट हमारे उपयोग के लिए है पर यहां गैजेट्स हमारा उपयोग कर रहे हैं। व्यक्ति को मोबाइल की ऐसी लत है की वह पास बैठे लोगों से बात करने के स्थान पर सोशल मीडिया पर मित्रों से लगा रहता है।
  • इससे उसके अपनों से आपसी संबंध कमज़ोर होते चले जाते है। साथ ही व्यकि के जीवन की विभिन्न पहलुओं को भी यह लत प्रभावित करता है जैसे स्वास्थ्य, आजीविका (career), अध्ययन आदि।
  • मोबाइल में अनेक ऐसे एप्लिकेशन हैं जिससे व्यक्ति पूरा-पूरा दिन दोस्तों से बाते करते रह सकते हैं, जैसे- वॉट्सएप, फेशबुक, इन्टाग्राम आदि। इसके वजह से बच्चे पढ़ाई में समय नहीं देते, बड़े अपने काम पर ध्यान नहीं देते हैं।
  • मोबाइल फ़ोन के हद से ज्यादा उपयोग से हम अनेक तरह के रोगों के चपेट में आ सकते हैं जैसे- आँखों का कमज़ोर होना, सिर दर्द, कम सुनाई देना, तनाव, अनिंद्रा आदि।
  • मोबाइल में सब कुछ आसानी से मिल जाने के वजह से हमारी याद करने की क्षमता कम होती जा रही है।

Conclusion :

मोबाइल की लत में पड़ा व्यक्ति सुबह उठने के बाद सबसे पहले मोबाइल चैक करता है, जब तक नींद न आ जाए मोबाइल उपयोग करता है तथा सोने के बाद भी अपने सिरहानें उसे रख कर सोता है। बेशक इस उपकरण से ज्यादा महत्वपूर्ण लोग आपके जीवन में हैं, उन्हें महत्व देना चाहिए।मोबाइल की लत से समय का दुरोपयोग होता है, समय से न सोना, समय से न उठना हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। मोबाइल में आज अनेक तरह के गेम्स बच्चों को मिल जाते हैं, इसके फलस्वरूप बच्चें बाहर खेले जाने वाले खेल से कटते जा रहे हैं।

हम सोशल मीडिया, टेक्सटिंग, गेमिंग या वीडियो देखने जैसी मोबाइल गतिविधियों के लिए एक समय निर्धारित कर सकते हैं ताकि अपने अन्य कार्य समय पर कर पाए। हम पेंटिंग, नृत्य, इनडोर या आउटडोर गेम खेलने जैसी अन्य मनोरंजक गतिविधियों में भी संलग्न हो सकते हैं। अगर हम उचित प्रयास करे तो धीरे- धीरे इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। अगर हम इसका सहीं प्रकार से उपयोग करते है तो यह हमारा काम आसान कर देता है और अगर हमे इसकी लत लग जाये तो यह हमारा ही उपयोग करने लगाता है।

वर्क फ्रॉम होम 

Introduction :

‘वर्क फ्रॉम होम’ कार्य करने का एक आधुनिक तरीका है, जहां कंपनी या फर्म के कर्मचारी अपने घर से ही अपना काम कर सकते हैं। घर से काम करने से कर्मचारियों के साथ-साथ कंपनियों के प्रबन्धको को भी आसानी रहती है क्योंकि पूरा काम समय पर बड़ी आसानी से समाप्त किया जा सकता है। कोरोना महामारी के खतरे को देखते हुए दुनिया भर की कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम की नीति अपनाई। भारत के लिए यह भले ही नई बात हो, लेकिन दुनिया के अन्य देशों में यह चलन पहले से ही मौजूद था। ‘वर्क फ्रॉम होम’ ने कई व्यावसायो और कंपनियों के लिए काम करने की नई संभावनाओं की राहे खोल दी है। कई कम्पनियाँ इसके माध्यम से अपने व्यापार मॉडल में सुधार कर रही है और साथ ही इसका फायदा उनके कर्मचारियों को भी मिल रहा है।

यदि कोई कर्मचारी स्वास्थ संबंधित समस्याओं का सामना कर रहा हैं, तो ‘वर्क फ्रॉम होम उनके लिए एक अच्छा उपाय साबित हो सकता है। यही कारण है कि आजकल, अधिकांश आईटी और अन्य संबंधित कंपनियां अपने कर्मचारियों को यह विकल्प दे रही हैं। लेकिन वर्क फ्रॉम होम हर किसी की क्षमता और व्यक्तित्व के लिए उपयुक्त नहीं है। कुछ कर्मचारी कार्यालय के वातावरण में काम करना पसंद करते हैं।

  • कोरोना वाय़रस संक्रमण के खतरे को देखते हुए दुनिया भर की कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम की नीति अपनाई है. भारत के कॉरपोरेट कल्चर के लिए यह भले ही नई बात है और आपदा के दौर में अपनाई गई व्यवस्था है, लेकिन दुनिया के अन्य देशों में यह चलन पहले से ही है.
  • कई कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से काम करने (वर्क फ्रॉम होम) की सुविधा दी है. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि ‘कम्युनिटी ट्रांसमिशन’ को रोका जा सके.
  • हालांकि घर से काम करने वाले अधिकतर लोग अब नई मुश्किलों से जूझ रहे हैं. कई लोग मानसिक तनाव और दबाव झेल रहे हैं. इसकी कई वजहें हैं.
  • कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए किये गए लॉकडाउन की वजह से ज्यादातर कंपनियों ने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का विकल्प दे दिया है. घर से काम करने के कारण कुछ लोग आलस्य महसूस करने लगे हैं. कुछ लोगों का मानना है कि घर पर काम करने के कारण अक्सर उनके गर्दन और कंधों में दर्द रहने लगा है.
  • नेशनल करियर सर्विस ने कहा है कि वर्क फ्रॉम होम को सफल बनाने के लिए जरूरी है आप हर दिन के काम की पूरी लिस्ट बनाएं और उसे शाम में चेक करें कि आपने सारे काम पूरे कर लिए हैं या नहीं. दूसरी बात यह है कि घर पर आप ऑफिस जैसा माहौल बनायें.
  • वर्क फ्रॉम होम के दौरान आप अपने काम के समय को लेकर स्पष्ट रहें. जैसे आप ऑफिस जाने के बाद एक निर्धारित समय तक काम करते हैं, वैसे ही आप घर से भी निर्धारित समय में ही काम करें. आप उस काम के बीच में ना डिस्टर्ब हों, ना कोई और काम करें. इसके साथ ही नेशनल करियर सर्विस ने कहा है कि ऑफिस के समय में केवल ऑफिस का काम करें.
  • अपने घर से काम करते समय भी आपको अपने सहकर्मियों के साथ संपर्क में रहना चाहिए. दूसरी बात यह है कि ऑफिस के कामकाज से संबंधित बातचीत करने के लिए आप डिजिटल संचार माध्यम का उपयोग करें. आप ईमेल कर सकते हैं, आप फोन कर सकते हैं, आप चैट कर सकते हैं या वीडियो कॉल कर सकते हैं. 
  • घर से ग्रॉसरी का सामान खरीदने के लिए बाहर निकलें तो साथ में सैनिटाइजर जरूर रखें. वजह यह है कि ग्रॉसरी शॉप या सुपरमार्केट में कई चीजों को छूना पड़ सकता है. कार्ट, काउंटर, शेल्‍फ वगैरह को छूने पर हाथों पर सैनिटाइजर जरूर लगाएं
  • जरूरी नहीं है कि आप सर्जिकल मास्‍क ही पहनें. हेल्‍थकेयर प्रोफेशनल्‍स को इनकी ज्‍यादा जरूरत होती है. घर पर कपड़े से बने मास्‍क भी आपकी सुरक्षा करने में मददगार होते हैं. आवश्‍यक वस्‍तुएं खरीदने के लिए बाहर निकलें तो मास्‍क जरूर पहन लें.
  • हफ्तेभर की ग्रॉसरी खरीदना पर्याप्‍त है. सरकार ने भरोसा दिया है कि वह आवश्‍यक वस्‍तुओं की आपूर्ति में बाधा नहीं आने देगी. इस दौरान प्रोटीनयुक्‍त खाना खाने की सलाह दी जाती है क्‍योंकि यह इम्‍यूनिटी को बढ़ाता है और सेहतमंद होता है.

Conclusion :

ज्‍यादातर दुकानों के सामने अब दुकानदारों ने गोले खींच दिए हैं. ऐसा सोशल डिस्‍टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी को बनाए रखने के लिए किया गया है. ग्रॉसरी खरीदते वक्‍त एक-दूसरे से छह फीट की दूरी बनाकर रखना सही है. जितना संभव हो डिजिटल पेमेंट का इस्‍तेमाल करें. यह न केवल संक्रमण के खतरे को कम करता है, बल्कि कैश बचाने में भी मदद करता है. इसके चलते लॉकडाउन में छोटी-छोटी अवधियों में आपको एटीएम नहीं भागना पड़ता है. ग्रॉसरी खरीदकर घर वापस लौटने पर 20 सेकेंड तक अपने हाथों को साबुन से धुलना नहीं भूलें इसकी वजह यह है कि ज्यादातर मोबाइल ‘हाई-टच सरफेस’ माने जाते हैं. यहां हम ऐसी बातें बता रहे हैं जिनका ध्यान आपको स्मार्टफोन और लैपटॉप सहित गैजेट्स को साफ करते वक्त रखना है.

वर्क फ्रॉम होम करते हुए शुरुआती समय में कई बार काफी थकान महसूस होती है और काम नीरस लगने लगता है। वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारीयो के कार्य की निगरानी करने में भी कठिनाई होती है। कंपनियां कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं लेकिन बेहतर परिणाम के लिए कुछ नियम भी होने चाहिए ताकि घर से काम प्रभावी ढंग से और समय सीमा के भीतर हो सके। वर्क फ्रॉम होम रोमांचक और लाभदायक है, लेकिन काम में स्वतंत्रता से जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं।

कोरोना वायरस का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

Introduction :

कोरोनावायरस (COVID-19) एक संक्रामक रोग है जो कोरोनावायरस के कारण होता है। इसकी शुरुआत पहली बार दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से हुई। डब्ल्यूएचओ ने 30 जनवरी को कोरोनवायरस को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। कोरोनावायरस न केवल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है बल्कि दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर रहा है। विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, व्यापार के मामले में, चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। विश्व के निर्यात का 13% और आयात का 11% केवल चीन से होता है। दुनिया के कई उद्योग अपने कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। 

पुरे विश्व में खरीदी जाने वाली लगभग एक तिहाई मशीनरी चीन से आती है, इसलिए कोरोनवायरस ने वैश्विक आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।चीन में कई कारखाने अब बंद हो गए हैं, निर्भर कंपनियों के लिए उत्पादन भी बंद हो गया है। उत्पादन में मंदी के कारण खपत में भी गिरावट आई है और इस तरह से दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है। कोरोनोवायरस फैलने के कारण लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण पर्यटन उद्योग को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कोरोना वायरस का आयात पर प्रभाव –

  • इस वायरस से हवाई यात्रा, शेयर बाज़ार, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं सहित लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
  • यह वायरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है।
  • इन दो अर्थव्यवस्थाओं, जिन्हें वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में जाना जाता है, संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है।
  • निवेशकों के बाज़ारों से बाहर निकलने के कारण शेयर बाज़ार सूचकांक में लगातार गिरावट आई है। लोग बड़ी राशि को अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र यथा- ‘सरकारी बाॅण्ड’ में लगा रहे हैं जिससे कीमतों में तेज़ी तथा उत्पादकता में कमी देखी गई है।
  • अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब अनुभव हाल ही में कोरोना वायरस के कारण महसूस किया गया, ध्यातव्य है कि अमेरिकी बाज़ार में 12% से अधिक की गिरावट आई है।
  • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि जो निवेशक ऐसे संकट के समय सामान्यत: स्वर्ण में निवेश करते हैं, इस संकट के समय उन्होंने इसका भी बहिष्कार कर दिया जिससे सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, तथा लोगों ने सरकारी गारंटी युक्त ‘ट्रेज़री बिल’ (Treasury Bills) में अधिक निवेश करना उचित समझा।
  • Apple, Nvidia, Adidas जैसी कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ये चीन के आपूर्तिकर्त्ताओं पर निर्भर हैं, इन्हें भविष्य में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव –

  • भारत जब अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में इस वायरस का केवल सतही प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा ऐसे कठिन समय में समस्या का समाधान मात्र ‘एयर लिफ्टिंग’ से संभव नहीं है।
  • यह समस्या न केवल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करेगी, अपितु यह भारत के फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।
  • निर्यात, जिसे अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है, इसमें वैश्विक मंदी की स्थिति में और गिरावट देखी जा सकती है, साथ ही निवेश में भी गिरावट आ सकती है।
  • भारतीय कंपनियाँ चीन आधारित ‘वैश्विक आपूर्ति शृंखला’ में शामिल प्रमुख भागीदार नहीं हैं, अत: भारतीय कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित नहीं होंगी।
  • दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जो कि वृहद् अर्थव्यवस्था और उच्च मुद्रास्फीति के चलते अच्छी खबर है।
  • भारत सरकार को लगातार विकास की गति का अवलोकन करने की आवश्यकता है, साथ ही चीन पर निर्भर भारतीय उद्योगों को आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करनी चाहिये।
  • कोरोना वायरस जैसी बीमारी की पहचान, प्रभाव, प्रसार एवं रोकथाम पर चर्चा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जानी चाहिये ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।

Conclusion :

वायरस जनित यह संकट किसी अन्य वित्तीय संकट से बिलकुल अलग है। अन्य वित्तीय संकटों का समाधान समय-परीक्षणित उपायों जैसे- दर में कटौती, बेल-आउट पैकेज (विशेष वित्तीय प्रोत्साहन) आदि से किया जा सकता है, परंतु वायरस जनित संकट का समाधान इन वित्तीय उपायों द्वारा किया जाना संभव नहीं है। ऑटोमोबाइल उद्योग पहले ही आर्थिक मंदी के कारण संकट में है और अब माल और सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन में कमी आ रही है। चीन से आपूर्ति में रुकावट के कारण वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है। यद्यपि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कोरोनोवायरस के सटीक प्रभाव को निर्धारित करना मुश्किल है, फिर भी यह स्पष्ट है कि यह प्रभाव लंबे समय तक रहेगा।

भारत में बेरोजगारी की समस्या

Introduction :

बेरोजगारी भारत में एक अहम मुद्दा बनता जा रहा है  जब कोई व्यक्ति काम करने योग्य हो और काम करने की इच्छा भी रखे किन्तु उसे काम का अवसर प्राप्त न हो तो वह बेरोजगार कहलाता हैं। आज हमारे देश मे लाखो लोग बेरोजगार है। ऐसा इसलिए है क्योंकि नौकरियाँ सीमित हैं और नौकरी पाने वालो की संख्या असीमित। भारत में बेरोजगारी की स्थिति एक गंभीर सामाजिक समस्या है। शिक्षा का अभाव और रोजगार के अवसरों की कमी ऐसे कारक हैं जो बेरोज़गारी का प्रमुख कारण हैं। बेरोज़गारी न केवल देश के आर्थिक विकास में बाधा डालती है बल्कि व्यक्तिगत और पूरे समाज पर भी एक साथ कई तरह के नकारात्मक प्रभाव डालती है।

2011 की जनगणना के अनुसार युवा आबादी का 20 प्रतिशत जिसमें 4.7 करोड़ पुरूष और 2.6 करोड़ महिलाएं पूर्ण रूप से बेरोजागार हैं। यह युवा 25 से 29 वर्ष की आयु समूह से हैं। यही कारण है कि जब कोई सरकारी नौकरी निकलती है तो आवेदको की संख्या लाखों मे होती हैं। तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या भारत मे बेरोजगारी का प्रमुख कारण हैं। वर्तमान शिक्षा प्रणाली भी दोषपूर्ण है। बेरोजगारी को दूर करने में जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण आवश्यक है। जिस अनुपात में रोजगार से साधन बढ़ते है, उससे कई गुना जनसंख्या में वृद्धि हो  जाती है।

  • सबसे खराब स्थिति तो वह है जब पढ़े-लिखे युवकों को भी रोजगार नहीं मिलता शिक्षित युवकों की यह बेरोजगारी देश के लिए सर्वाधिक चिन्तनीय है, क्योंकि ऐसे युवक जिस तनाव और अवसाद से गुजरते हैं, उससे उनकी आशाएं टूट जाती हैं और वे गुमराह होकर उग्रवादी, आतंकवादी तक बन जाते हैं।
  • पंजाब, कश्मीर और असम के आतंकवादी संगठनों में कार्यरत उग्रवादियों में अधिकांश इसी प्रकार के शिक्षित बेरोजगार युवक हैं। बेरोजगारी देश की आर्थिक स्थिति को डाँवाडोल कर देती है। इससे राष्ट्रीय आय में कमी आती है, उत्पादन घट जाता है और देश में राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हो जाती है।
  • बेरोजगारी से क्रय शक्ति घट जाती है, जीवन स्तर गिर जाता है जिसका दुष्प्रभाव परिवार एवं बच्चों पर पड़ता है। बेरोजगारी मानसिक तनाव को जन्म देती है जिससे समाज एवं सरकार के प्रति कटुता के भाव जाग्रत होते हैं परिणामतः व्यक्ति का सोच नकारात्मक हो जाता है और वह समाज विरोधी एवं देश विरोधी कार्य करने में भी संकोच नहीं करता।

बेरोजगारी के कारण

  • भारत में बढ़ती हुई इस बेरोजगारी के प्रमुख कारणों में से एक है— तेजी से बढ़ती जनसंख्या। पिछले पाँच दशकों में देश की जनसंख्या लगभग चार गुनी हो गई है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 125 करोड को पार कर गई है।
  • यद्यपि सरकार ने विभिन्न योजनाओं के द्वारा रोजगार को अनेक नए अवसर सुलभ कराए हैं, तथापि जिस अनुपात में जनसंख्या वृद्धि हुई है उस अनुपात में रोजगार के अवसर सुलभ करा पाना सम्भव नहीं हो सका, परिणामतः बेरोजगारों की फौज बढ़ती गई।
  • प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में बेरोजगारों की वृद्धि हो रही है। बढ़ती हुई बेरोजगारी से प्रत्येक बुद्धि-सम्पन्न व्यक्ति चिन्तित है। हमारी शिक्षा पद्धति भी दोषपूर्ण है जो रोजगारपरक नहीं है।
  • कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से लाखों स्नातक प्रतिवर्ष निकलते हैं। किन्तु उनमें से कुछ ही रोजगार पाने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। उनकी डिग्री रोजी-रोटी को जुटा पाने में उनकी सहायता नहीं कर पाती।
  • वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति ने उद्योगों का मशीनीकरण कर दिया है परिणामतः आदमी के स्थान पर मशीन से काम लिया जाने लगा। मशीन आदमी की तुलना में अधिक कुशलता से एवं अधिक गुणवत्ता से कम कीमत पर कार्य सम्पन्न कर देती है, अतः स्वाभाविक रूप से आदमी को हटाकर मशीन से काम लिया जाने लगा।
  • फिर एक मशीन सैकड़ों श्रमिकों का काम अकेले ही कर देती है। परिणामतः औद्योगिक क्षेत्रों में बेकारी पनप गई। लघु उद्योग एवं कुटीर उद्योगों की खस्ता हालत ने भी बेरोजगारी में वृद्धि की है।

बेरोजगारी दूर करने के उपाय

भारत एक विकासशील राष्ट्र है, किन्तु आर्थिक संकट से घिरा हुआ है। उसके पास इतनी क्षमता भी नहीं है कि वह अपने संसाधनों से प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार सुलभ करा सके। ऐसी स्थिति में न तो यह कल्पना की जा सकती है है कि वह प्रत्येक व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता दे सकता है और न ही यह सम्भव है, किन्तु सरकार का यह कर्तव्य अवश्य है कि वह बेरोजगारी को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए। यद्यपि बेरोजगारी की समस्या भारत में सुरसा के मुख की तरह बढ़ती जा रही है फिर भी हर समस्या का निदान तो होता ही है।

  • भारत में वर्तमान में जनसंख्या वृद्धि 2.1% वार्षिक है जिसे रोकना अत्यावश्यक है। अब ‘हम दो हमारे दो’ का युग भी बीत चुका, अब तो ‘एक दम्पति एक सन्तान’ का नारा ही महत्वपूर्ण होगा, इसके लिए यदि सरकार को कड़ाई भी करनी पड़े तो वोट बैंक की चिन्ता किए बिना उसे इस ओर सख्ती करनी होगी। यह कठोरता भले ही किसी भी प्रकार की हो।
  • देश में आधारभूत उद्योगों के पर्याप्त विनियोग के पश्चात् उपभोग वस्तुओं से सम्बन्धित उद्योगों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इन उद्योगों में उत्पादन के साथ ही वितरण परिवहन, आदि में रोजगार उपलब्ध होंगे।
  • शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाना आवश्यक है। हमारी शिक्षा पद्धति भी दोषपूर्ण है जो रोजगारपरक नहीं है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से लाखों स्नातक प्रतिवर्ष निकलते हैं। किन्तु उनमें से कुछ ही रोजगार पाने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। उनकी डिग्री रोजी-रोटी को जुटा पाने में उनकी सहायता नहीं कर पाती।

Conclusion :

धन्धों का विकास गांवों में कृषि सहायक उद्योग-धन्धों का विकास किया जाना आवश्यक है। इससे क्रषक खाली समय में अनेक कार्य कर सकेंगे। बागवानी, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य अथवा मुर्गी पालन, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, आदि ऐसे ही धन्धे है। कुटीरोद्योग एवं लघु उद्योगों के विकास से ग्रामीण एवं शहरी दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सुलभ कराए जा सकते हैं।आज स्थिति यह है कि  एक ओर विशिष्ट प्रकार के दक्ष श्रमिक नहीं मिल रहे हैं तो दूसरे प्रकार के दक्ष श्रमिकों को कार्य नहीं मिल रहा है।

बेरोजगारी की दूर करने के सरकार द्वारा अनेक प्रयास किए गए है जिनमे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम, ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना आदि कार्यक्रम शामिल है। लेकिन अभी भी कुछ सख्त कदम उठाने बाकि है। बेरोजगारी को दूर करना देश का सबसे प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। नागरिकों को अधिक नौकरियों के निर्माण के साथ ही रोजगार के लिए सही कौशल प्राप्त करने के लिए प्रयास करना चाहिए।

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Essays

Essay on Mental Health

Essay on Mental health in english

Gandhi Ji once said, “It is the health that is real wealth and not pieces of gold and silver”. This statement indicates the importance of health in our life. People normally focus on their physical healthy and ignore the fitness of mind. But the fact is that mental health is as important as physical health. We can control our life due to our highly developed brain. So, it becomes very important for us to keep our body and mind fit and healthy for better performance and result.

  • There are many factors that have great impact on our fitness level such as depression, aggression, negative thinking, frustration and fear.
  • A mentally healthy person is always in a good mood and can easily manage situations of distress and depressions.
  • Mental fitness denotes having a positivity in feeling and thinking that improves our ability to enjoy life. It is a positive term and give up negative thoughts that come to our mind.
  • The term mental fitness is being used by psychologists, schools, organizations and the general population to denote logical thinking and reasoning ability.
  • In the same way the mental illness is the instability of one’s health, which includes changes in emotion, thinking and behaviour.
  • Mental illness can be caused due to stress or other incidents. It could also arise from genetic factors, social disadvantage and poor physical health. Mental illness is curable.

Conclusion :

We can overcome this illness with positive thinking and change in your lifestyle. Regular exercises such as morning walk, yoga, and meditation have proved to be great medicine for curing mental health. It is very important to have a good diet and enough sleep. We can prevent mental illness by taking care of ourself such as calming our mind by listening to music and taking care of our body.

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Mental health Vs Mobile Addiction in english

Introduction :

Mobile Addiction has become a growing concern in our society now-a-days. Mobile phone addiction is quite easy but it is difficult to recover from it. Many people around the world are addicted to mobile phones. It gives us the freedom to quickly connect with anyone around the world. It also enable us to find all sort of information that we need and is a great source of entertainment.

  • While mobile phones invention was done for empowering us, but it has now started dominating us. Smart phones enable us to engage in gaming, studying and online shopping.
  • It also allow us to watch movies, click pictures, listen to music, surf the internet and enjoy various other activities. Due to high utility it results can be very harmful for us.
  • Mobile addiction can become the main cause of many serious problems, such as headaches, weakening of eyesight, sleepiness, depression, social isolation, stress, aggressive behavior, financial problems and less professional development.
  • They simply scroll through the app to check the information that are online and engage in such other useless activities on their mobile phones.
  • They are so addicted to their mobile phones that they do not hesitate to check them while driving and even during an important meeting.
  • Another sign of mobile addiction is loss of time. A person who is accustomed to mobile phones loses a complete understanding of time. He is often late to work and delays important tasks.
  • Getting rid of this habit can be difficult but not impossible. We can set a schedule for common mobile activities such as social media, texting, gaming or watching videos.

Conclusion :

We can also engage in other recreational activities like Painting, dancing, playing indoor or outdoor games. With some efforts we can overcome this problem over time. Parents also need to avoid giving phones to their teenage children. As it’s time for them to focus on their studies and find out their interest in other useful activities.

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Mental health Vs Social Media Boon or Bane for Society

Introduction :

Social media is a very important and popular tool as it provides us many useful and user-friendly features. Social media platforms like Twitter, Facebook and Instagram are giving people a chance to connect with each other at any time and anywhere in the world.  The youngsters are one of the most dominant users of social media in these days. Social media can engage people constantly in some or other trending activities based on their choice. People have embraced social media so deeply that it has become an integral part of their lives now.

  • These platforms are being used not only by individuals but also by business houses, organizations and even by the governments for constant engagement with the masses.
  • If we look at the positive aspect of social media, we find a lot of advantages. The most important one is being a great tool for learning and educating. We can find all kind of information just in one click.
  • Students can enhance their learning on various topics using social media platforms like YouTube and Facebook. Now, we can attend live lectures just because of these social media platforms.
  • We can improve our social skills by sharing our knowledge and ideas with millions of people even if they are thousands of miles away from us.
  • Social media marketing has become one of the most significant tools that businesses and corporations are using these days to get exposure at the lowest cost.
  • These social media platforms help in attracting new customers and give them the information about the products which makes their brand more popular.
  • It also enables a business to get new information about their customers and improve their services. In spite of having many advantages, social media can also become the most dangerous tool for the society if used for destructive purposes. 
  • It is harmful as it invades our privacy. The sharing of personal information on social media can make children a target for hackers.
  • It also leads to cyberbullying which can affect their life to a great extent. Hence, the sharing on social media especially by children must be monitored carefully by the parents.
  • The next problem is the addiction of social media which is very common among the youth. The addiction of social media can destroy the academic life of students as they waste their most of time on social media instead of studying and learning.

Conclusion : 

The misuse of social media can also create communal rifts between people by sharing fake news on these platforms. Anxiety and depression is also a common disadvantage of social media. Social media is neither a boon nor a bane by itself, it is totally depends on how we use it. We must maintain a balance between our productive and unproductive activities. Excess use of anything is harmful and the same thing applies to social media too.

Mental health Vs Fake News on Social Media

Introduction :

Fake news is a kind of yellow journalism which comprises intentional misinformation distributed through broadcasting news media, or via Internet-based social media. Fake news is intentionally written in order to gain financial or political exaggerated, or false headlines for capturing the attention of the people. Everyone with an internet connection and a social media presence is now a content generator. Free internet service has provided access to everyone to post whatever they want and hence created a trend of fake news spreading like wildfire.

  • Everyone is in a hurry to like, share, comment instead of checking the authenticity of the news. It affects the spirit of common brotherhood and increases intolerance in the country.
  • Fake news results in harassment and threatening of innocent people and damages their reputations. It can also result in deaths. For example, the rumours about child-lifters and cattle thieves led to mob attacks and deaths across India.
  • Fake news could lead to mass protests, riots, and a breakdown in law and order. The special reserve forces or the army would have to be brought in to control the situation.
  • Fake news can start wars. It is unreasonable to put the blame on the social media platforms for the fake news menace. Because the platforms such as Facebook, WhatsApp etc. are not generating content, but by the users themselves & cannot hold them responsible.
  • Fake news creators are now using modern technology like Artificial Intelligence to create other forms of fake news. The result is called “Deep Fakes” and it employs audio and video formats, which appear more realistic and convincing.

Conclusion :

The Government needs to address the consumer end as well and adopt a collaborative way to tackle the menace of fake news. Security requirements should also consider the rights of millions of genuine users. An effective approach to deal with the fake news is to improve digital literacy i.e., the ability to identify real news from fake news. Government, media, and technology should work together to improve the overall digital literacy in India. The state police machinery should be strengthened to catch anyone responsible for spreading fake messages.

Mental health Vs Role of Social media in Democracy 

Introduction :

Media has played a significant role in establishing democracy throughout the world. Media is considered as Fourth Pillar in democratic countries and without a free media democratic system cannot exist. Indian media has traveled a long way, from the days of newspaper and radio to present-day age of Television and Social Media. News that was seen as medium to educate the people on issues that were of utmost important for the society.

  • Media plays a crucial role in shaping a healthy democracy. It is the backbone of a democracy. Media makes us aware of various social, political and economic activities happening around the world.
  • The role of media is to make the society aware of their democratic rights. It acts as the voice of millions of citizens, when government institutions become corrupt and authoritarian. 
  • Television and radio have made a significant achievement in educating rural illiterate masses in making them aware of all the events in their language.
  • The need for an independent and control-free press is really essential in a democracy like India.  media act as a chain between the government and the citizens of the country, people have faith in media as it has an impact on the audience. 
  • The media has undoubtedly evolved and become more active over the years. It is the media only who reminds politicians about their unfulfilled promises at the time of elections.
  • TV news channels excessive coverage during elections helps people, especially illiterates, in electing the right person to the power.

Conclution :

This reminder compels politicians to be upto their promises in order to remain in power. In the present-day youth is more interested in the fast-moving world of technology and social media. Thus, it becomes important for media to ensure that the information that they are broadcasting should not be biased. Media is like a watchdog in a democracy that keeps government active. From being just an informer it has become an integral part of our daily lives.

Mental health Vs WhatsApp New Privacy Policy

Introduction :

Social media is a boon for human civilization because it has brought the whole world together at one place where individuals can share their views and ideas and such interactions are beneficial for the people as it helps in increasing social skills. In today’s world, technology has made our life easier because with the help of technology we can learn new things and meet new people all over the world.

  • WhatsApp is one of the most important social applications which plays a major role in our daily life.
  • WhatsApp is facing a lot of criticism for its new privacy policy which says that it may share information of any of its users with Facebook and its partner companies. 
  • Since then there has been a huge rise in the dounloads of its alternative apps including Signal.
  • In response to global criticism, WhatsApp head Will Cathcart explained , with end-to-end encryption, they cannot see the users private chats or calls and neither can Facebook.
  • WhatsApp has also given users time till 8th of February 2021  to accept the new terms and conditions.
  • WhatsApp says it is collecting new information from users device such as Battery level, app version, browser information, mobile network, IP address and phone number etc.
  • It also declares that the data in some cases can be transferred to the USA or other parts where Facebook’s affiliate companies are based.
  • This new update has increased a lot of concern over the privacy of the people that use this application.

Conclusion :

Privacy experts have also criticised this new privacy policy. Indian users are more vulnerable as there is no any data protection law in India. If India had a data protection law, WhatsApp would not have been able to launch this new policy update. The government should also initiate some digital awareness programs to make the public aware of the importance of digital privacy in India.

Mental health Vs Social Media – Influencer of Fake News In India

Introduction :

Social media is a very important and popular tool as it provides us many useful and user-friendly features. Social media platforms like Twitter, Facebook and Instagram are giving people a chance to connect with each other at any time and anywhere in the world. The youngsters are one of the most dominant users of social media in these days. People have embraced social media so deeply that it has become an integral part of their lives now.

  • These platforms are being used not only by individuals but also by business houses, organizations and even by the governments for constant engagement with the masses.
  • If we look at the positive aspect of social media, we find a lot of advantages.  The most important one is being a great tool for learning and educating.
  • Students can enhance their learning on various topics using social media platforms like YouTube and Facebook. Now, we can attend live lectures just because of social media platforms.
  • We can improve our social skills by sharing our knowledge and ideas with millions of people even if they are thousands of miles away from us.
  • Social media marketing has become one of the most significant tools that businesses and corporations are using these days.
  • These social media platforms help in attracting new customers and give them the information about the products which makes their brand more popular. It also enables a business to get new information about their customers.
  • In spite of having many advantages, social media can also become the most dangerous tool for the society if used for destructive purposes. 
  • It is harmful as it invades our privacy. The sharing of personal information on social media can make children a target for hackers.
  • It also leads to cyberbullying which can affect their life to a great extent. Hence, the sharing on social media especially by children must be monitored carefully by the parents. The next problem is the addiction of social media which is very common among the youth.

Conclusion :

The addiction of social media can destroy the academic life of students as they waste their most of time on social media instead of studying and learning. Anxiety and depression is also a common disadvantage of social media. Social media is neither a boon nor a bane by itself, it is totally depends on how we use it. We must maintain a balance between our productive and unproductive activities. Excess use of anything is harmful and the same thing applies to social media too.

Mental health Vs Mob Lynching Growing Issues in India

Introduction :

The word ‘Mob Lynching’ is consist of two words i.e Mob and Lynching. Mob is a large crowd especially one that can easily become violent. If a crowd of people lynch someone who they believe is guilty of crime, they kill them without a legal trial. Thus mob lynching is a kind of killing by a crowd on the basis of some fake news or religious fanaticism. It has become a threat to our society now-a-days.

  • The main causes that lead to mob lynching is the absence of awareness and proper understanding among the masses. Fake news on social media platforms such as Whats App & Facebook also adds to this menace.
  • In such cases there always been some groups that intend to satisfy their hidden agenda against some other groups or community.
  • There is a deep gap of mistrust between the majority and minority communities, which always incites one to look at each other with suspicion and when used, they use the mob to avenge each other.
  • Anger prevalent in society also acts as a catalyst in it, irrespective of which form of anger, this anger can also be about the governance system, judicial system or security which eventually comes out as a rampaging mob.
  • Politics is also the main cause of violent mob, sometimes violence sponsored in the name of vote bank or violence in the name of religion, gives political parties a wide background for politics.
  • The incidents of mob lynching become very common since the Government imposed a ban on the sale and purchase of cattle for slaughter at animal markets across India in May 2017.
  • Though the Supreme Court, suspended the ban on the sale of cattle in its judgment in July 2017. The states where beef is the primary foods, there was a rise in attacks and dozens of innocent Muslims were killed. 

Conclusion :

Rumours about child lifters also ignited mob violence.  As the technology is proved to be boon for mankind but some people spread rumours and fake news leading to assault and death of people. Now, mob lynching has become a social menace, therefore the government should come with the law to deal with it. Strict actions should be taken against those group of people that leading to mob lynching so that innocent people may not be suffered and lost their lives. 

Mental health Vs Cyber Security Challenges in India

Introduction :

Cyber security is nothing but protecting data, networks and other information from unauthorized access, partially or fully destruction or change. Cyber security can play a very important role in our day to day life because we all have online presence. “It takes 20 years to build a reputation and few minutes of cyber incident to ruin it.” This statement presents a true picture about the same as we all are exposed to security threats and cyber attacks. In today’s world, many companies are developing different types of software to protect data.

  • Cyber security is crucial in present time as it not only helps to secure information but also our system from virus attacks.
  • It is also important because we have a huge user base i.e. after the United States and China, India has the highest number of internet users.
  • Cyber threats can be of two types 1) Cybercrime, it is usually against individuals or corporates and 2) Cyberwarfare, it is against a state or a country.
  • By using computer, internet, cellphone, other technical devices to commit a crime by any individual or a group is called cyber crime. Hackers use various software and codes to commit cyber crime.
  • Hacking has become one of the major issues in India. Hacking denotes an activity of identifying weaknesses in a computer or a network to exploit the security for accessing personal or private information.
  • Hackers often use a malware that usually appears in the form of codes and other software like worms, and adware.
  • It may gather sensitive information or gain access to private computer. As the cyber threats have great potential it can be said that the future battles will not be fought on land or air but by using cyber attacks.
  • For protecting us from the cyber attacks we can ensure our safety by using antivirus software and can also change our passwords time to time.
  • Many password management tools are available now that can be used to keep track of all the passwords. Keeping our software up to date is also a way to protect us against cyber attacks.
  • Cyber security is one of the biggest challenge due to today’s high internet penetration in our daily life. For enhancing the security of the communication and information technology, there is a need to develop a computer emergency response team.
  • Such team will help in collecting and analyzing the information on cyber incidents that will be used in forecasting and alerting the cyber security incidents.

Conclusion :

There should have sound cyber security strategies also for protecting the government organizations, the general public and the businesses. The government and other security agencies should spread awareness among the people regarding cyber security. People should also use proper antivirus software to protect their system from virus and malware attacks.

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Essays

मानसिक स्वास्थ्य पर निबंध – Essay on Mental Health in Hindi

मानसिक स्वास्थ्य पर निबंध (Short essay on Mental Health in Hindi)

Introduction :

गांधी जी ने एक बार कहा था, ” स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है सोना और चांदी नहीं”। यह कथन हमारे जीवन में स्वास्थ्य के महत्व को इंगित करता है। लोग आमतौर पर अपने शारीरिक स्वस्थ पर अधिक ध्यान देते हैं और मानसिक फिटनेस को अनदेखा करते हैं। लेकिन यह भी सत्य है कि मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य। हम अपने विकसित मस्तिष्क के कारण अपने जीवन को नियंत्रित कर पाते हैं। इसलिए, बेहतर प्रदर्शन और परिणाम के लिए हमारे शरीर और दिमाग को फिट और स्वस्थ रखना हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।

  • आक्रामकता, नकारात्मक सोच, निराशा और भय ऐसे कारक हैं जो हमारे फिटनेस स्तर पर बहुत प्रभाव डालते हैं। मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति हमेशा अच्छे मूड में होता है और आसानी से संकट और ख़राब स्थितियों को आसानी से व्यवस्थित कर सकता है।
  • मानसिक फिटनेस महसूस करने और सोच की सकारात्मकता को दर्शाता है जो जीवन का आनंद लेने की हमारी क्षमता में सुधार करता है। यह एक सकारात्मक शब्द है और हमारे दिमाग में आने वाले नकारात्मक विचारों को नष्ट कर देता है।
  • आजकल फिटनेस शब्द का इस्तेमाल मनोवैज्ञानिकों, स्कूलों, संगठनों और सामान्य लोगो द्वारा तार्किक सोच और तर्क क्षमता को दर्शाने के लिए किया जा रहा है। उसी तरह मानसिक इलनेस स्वास्थ्य की अस्थिरता है, जिसमें सोच और व्यवहार में अप्रत्याशित परिवर्तन आता हैं।
  • तनाव या अन्य घटनाओं के कारण मानसिक बीमारी हो सकती है। यह आनुवंशिक कारकों, सामाजिक तनाव और खराब शारीरिक स्वास्थ्य से भी उत्पन्न हो सकती  है।

Conclusion :

मानसिक बीमारी का इलाज़ संभव है। हम सकारात्मक सोच और अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर इस बीमारी को दूर कर सकते हैं। नियमित व्यायाम जैसे कि सुबह की सैर, योग और ध्यान मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए बेहतरीन औषधि साबित हुए हैं। तनावमुक्त और निरोगी जीवन के लिए अच्छा मानसिक स्वास्थ्य बहुत जरूरी है, क्योंकि हम सभी को अपने -अपने जीवन में बड़ी सफलताएं हासिल करनी है जिसके लिए अच्छे मानसिक स्वास्थ्य की बहुत जरूरत होती है। अच्छा भोजन और पर्याप्त नींद लेना भी बहुत जरूरी है। हम खुद की देखभाल करके अपने मानसिक स्वास्थ को बेहतर बना सकते हैं ।

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मानसिक स्वास्थ्य पर निबंध (Long essay on Mental Health in Hindi)

Introduction :

गांधी जी ने एक बार कहा था, ” स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है सोना और चांदी नहीं”। यह कथन हमारे जीवन में स्वास्थ्य के महत्व को इंगित करता है। लोग आमतौर पर अपने शारीरिक स्वस्थ पर अधिक ध्यान देते हैं और मानसिक फिटनेस को अनदेखा करते हैं। लेकिन यह भी सत्य है कि मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य। हम अपने विकसित मस्तिष्क के कारण अपने जीवन को नियंत्रित कर पाते हैं। इसलिए, बेहतर प्रदर्शन और परिणाम के लिए हमारे शरीर और दिमाग को फिट और स्वस्थ रखना हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है आक्रामकता, नकारात्मक सोच, निराशा और भय ऐसे कारक हैं जो हमारे फिटनेस स्तर पर बहुत प्रभाव डालते हैं। मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति हमेशा अच्छे मूड में होता है और आसानी से संकट और ख़राब स्थितियों को आसानी से व्यवस्थित कर सकता है। 

मानसिक फिटनेस महसूस करने और सोच की सकारात्मकता को दर्शाता है जो जीवन का आनंद लेने की हमारी क्षमता में सुधार करता है। आजकल फिटनेस शब्द का इस्तेमाल मनोवैज्ञानिकों, स्कूलों, संगठनों और सामान्य लोगो द्वारा तार्किक सोच और तर्क क्षमता को दर्शाने के लिए किया जा रहा है। उसी तरह मानसिक इलनेस स्वास्थ्य की अस्थिरता है, जिसमें सोच और व्यवहार में अप्रत्याशित परिवर्तन आता हैं। तनाव या अन्य घटनाओं के कारण मानसिक बीमारी हो सकती है। यह आनुवंशिक कारकों, सामाजिक तनाव और खराब शारीरिक स्वास्थ्य से भी उत्पन्न हो सकती  है।

  • शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य का निकट संबंध है और यह निस्संदेह रूप से सिद्ध हो चुका है कि अवसाद के कारण हृदय और रक्तवाहिकीय रोग होते हैं।
  • मानसिक विकार व्यक्ति के स्वास्थ्य-संबंधी बर्तावों जैसे, समझदारी से भोजन करने, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, सुरक्षित यौन व्यवहार, मद्य और धूम्रपान, चिकित्सकीय उपचारों का पालन करने आदि को प्रभावित करते हैं और इस तरह शारीरिक रोग के जोख़िम को बढ़ाते हैं।
  • मानसिक अस्वस्थता के कारण सामाजिक समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं जैसे, बेरोजगार, बिखरे हुए परिवार, गरीबी, नशीले पदार्थों का दुर्व्यसन और संबंधित अपराध।
  • मानसिक अस्वस्थता रोगनिरोधक क्रियाशीलता के ह्रास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • अवसाद से ग्रस्त चिकित्सकीय रोगियों का हश्र बिना अवसाद से ग्रस्त रोगियों से अधिक बुरा होता है।
  • लंबे चलने वाले रोग जैसे, मधुमेह, कैंसर,हृदय रोग अवसाद के जोखिम को बढ़ाते हैं।
  • कोई व्यक्ति जो शारीरिक रूप से अयोग्य है वह अपने परिवार की देखभाल नहीं कर सकता है। इसी तरह कोई व्यक्ति मानसिक तनाव का सामना कर रहा है और अपनी भावनाओं को संभालने में अक्षम है तो वह परिवार के साथ अच्छे रिश्तों का निर्माण और उनको बढ़ावा नहीं दे सकता है।
  • यह कहना बिल्कुल सही है कि एक शारीरिक रूप से अयोग्य व्यक्ति ठीक से काम नहीं कर सकता। कुशलतापूर्वक काम करने के लिए अच्छा मानसिक स्वास्थ्य बहुत आवश्यक है। काम पर पकड़ बनाने के लिए अच्छे सामाजिक और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य का आनंद लेना चाहिए।
  • ख़राब शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी अध्ययन में एक बाधा है। अच्छी तरह से अध्ययन करने के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के अलावा अच्छा संज्ञानात्मक स्वास्थ्य बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
  • हमारा मानसिक स्वास्थ्य मूल रूप से, जिस तरह से हम महसूस करते हैं, अलग-अलग परिस्थितियों में सोचते हैं और स्थिति को नियंत्रित करते हैं, आदि को प्रभावित करता है। मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शारीरिक स्वास्थ्य को बरकरार रखना महत्वपूर्ण है।
  • सामाजिक स्वास्थ्य समाज में अपने दोस्तों, पड़ोसियों, रिश्तेदारों और अन्य लोगों के साथ पारस्परिक संबंधों को संवारने और बनाए रखने की क्षमता रखता है। यह उचित रूप से कार्य करने और विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों के अनुकूल होने के लिए किसी व्यक्ति की क्षमता को दर्शाता है।
  • जब एक व्यक्ति का मस्तिष्क सभी मानसिक प्रक्रियाओं को कुशलता से निष्पादित करता है तो उसे अच्छे संज्ञानात्मक स्वास्थ्य का आनंद लेना कहा जाता है। प्रक्रियाओं और क्रियाकलापों में नई बातें, अच्छे निर्णय, अपनी बात और मजबूत संवाद करने के लिए भाषा का कुशल उपयोग करना शामिल है।
  • आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बरकरार रखने से एक व्यक्ति अधिक सकारात्मक, जुझारू और सुलझा हुआ बनता है।
  • स्वास्थ्य का मतलब केवल आपकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य नहीं है बल्कि इसके बारे में ऊपर बताए गए विभिन्न तत्व भी इसमें शामिल हैं। जहाँ अच्छा शारीरिक स्वास्थ्य एक स्वस्थ जीवन के लिए आधार है वहीँ आपको एक स्वस्थ्य जीवन का आनंद लेने के लिए अन्य सभी स्वास्थ्य घटकों को बनाए रखना आवश्यक है।

Conclusion :

जीवन में हर कदम पर प्रतिस्पर्धा होती है। प्रत्येक व्यक्ति दूसरे की बराबरी करना चाहता है चाहे वह स्कूल या कॉलेज स्तर पर हो या जीवन में स्वास्थ्य शैली को बनाए रखनी की हो। लोगों को इस तथ्य को पहचानना चाहिए कि स्वास्थ्य पहले है। हम यह सब तभी कर सकते हैं जब हम स्वस्थ होते हैं और जीवन के अन्य पहलुओं पर बेहतर काम करते हैं। सरकार को देश की भलाई के लिए अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ भी प्रदान करनी चाहिए।

मानसिक बीमारी का इलाज़ संभव है। हम सकारात्मक सोच और अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर इस बीमारी को दूर कर सकते हैं। नियमित व्यायाम जैसे कि सुबह की सैर, योग और ध्यान मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए बेहतरीन औषधि साबित हुए हैं। अच्छा भोजन और पर्याप्त नींद लेना भी बहुत जरूरी है। तनावमुक्त और निरोगी जीवन के लिए अच्छा मानसिक स्वास्थ्य बहुत जरूरी है, क्योंकि हम सभी को अपने -अपने जीवन में बड़ी सफलताएं हासिल करनी है जिसके लिए अच्छे मानसिक स्वास्थ्य की बहुत जरूरत होती है।

मोबाइल एडिक्शन

Introduction :

मोबाइल की लत आजकल हमारे समाज में एक चिंता का विषय बन चूका है। मोबाइल फोन की लत पड़ना जितना आसान है, इससे छुटकारा पाना उतना ही मुश्किल। दुनिया भर में लाखो लोग मोबाइल फोन के आदी हो चुके हैं। मोबाइल फ़ोन हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चूका है, इसके आभाव में हमारे अनेकों काम रुक जाते हैं। जब कोई व्यक्ति खुद को अपने मोबाइल से दूर नहीं रख पाता, इस स्थिति को मोबाइल की लत कहते हैं। मोबाइल फोन का आविष्कार हमें सशक्त बनाने के लिए किया गया था, लेकिन अब यह हम पर हावी होने लगा है। इसके माध्यम से हम दुनिया भर में किसी से भी बात कर सकते है। यह हमें उन सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने में सक्षम बनाता है जिनकी हमें आवश्यकता है और मनोरंजन का एक बड़ा स्रोत भी है। स्मार्ट फोन हमें गेम खेलने, पढाई करने और ऑनलाइन शॉपिंग करने में सक्षम बनाता हैं।

यह हमें फिल्में देखने, फ़ोटो खींचने, संगीत सुनने, इंटरनेट पर सर्फ करने और विभिन्न अन्य गतिविधियों का आनंद लेने में सक्षम बनाता है। अत्यधिक उपयोगिता के कारण हमें इसकी लत लगती जा रही है जो हमारे लिए हानिकारक हो सकता है। मोबाइल की लत कई गंभीर समस्याओं का मुख्य कारण बन सकती है, जैसे व्यक्ति में चिड़चीड़ापन का होना, हमेशा सिर दर्द की समस्या, नेत्र संबंधित समस्या, अनिंद्रा व मोबाइल के हानिकार रेडिएशन से कई अन्य तरह के रोग भी हो सकते हैं। मोबाइल की लत का एक और संकेत समय की हानि है। वह व्यक्ति जो मोबाइल फोन का आदी है, उसको समय का पता ही नहीं रहता। वह अपना कोई भी कार्य समय पर समाप्त नहीं कर पता। मोबाइल फोन की आदत से छुटकारा पाना मुश्किल हो सकता है लेकिन असंभव नहीं।

  • अपनो से जोड़ना’ कहां मोबाइल की परिभाषा के रूप में पढ़ा जाता था। आज अपनों से दूरी का मुख्य कारण मोबाइल है। व्यक्ति एक रूम में एक साथ होने के बाद भी पास बैठे लोगों में अपनी कोई रुचि नहीं दिखाता और अपने-अपने मोबाइल के स्क्रीन स्क्रोल करता रहता है। इससे आपसी संबंध कमज़ोर होते हैं।
  • मोबाइल के लगातार इस्तेमाल से उससे निकलने वाली हानिकारक रेडिएशन से हमें हृदय संबंधी रोग हो सकते है। इसके अलावां आँखों के रौशनी पर भी गहरा असर पड़ता है। साथ ही सिर दर्द, नींद न आना, चिड़चीड़ापन, याददाश्त का कमज़ोर होना अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं हो सकते हैं।
  • बेशक टेकनॉलजी के माध्यम से हम विकास की ओर बढ़ पाते है, जिसमें मोबाइल फ़ोन मुख्य भूमिका निभाता है। क्योंकि सबके पास पढ़ाई के लिए लैपटॉप या कम्पूटर नहीं हो सकता पर मोबाइल होता है। जिसकी मदद से वह अपने संदेह दूर कर सकते हैं पर मोबाइल की लत में आज लोग घंटों अपना किमती समय मोबाइल को दे देते हैं। जिससे उनका ध्यान पढ़ाई पर नहीं लगता है। अपने व्यवसाय में वह अपना पूर्ण योगदान नहीं दे पाते हैं।
  • खुद में ही खोए रहते हैं और खुद से दूर होते चले जाते हैं। हम पढ़ाने वाले समय पर भी खुद से झुठ बोलकर मोबाइल पर पढ़ाई करने के बहाने ढुंढ़ते हैं।
  • मोबाइल के न मिलने पर या खो जाने पर हम सभी परेशान हो जाते है पर बहुत अधिक चिंता का होनानोमोफोबीया कहलाता हैं। इसमें मोबाइल के न होने पर व्यक्ति असहज महसूस करता है तथा उसे बहुत अधिक घबराहट होने लगता है। विश्व भर में किए गए शोध से पता चला है, नोमोफोबिया की शिकायत तेजी से बढ़ती जा रही है। मोबाइल फ़ोन को बहुत अधिक चलाने से यह बीमारी हो सकती है।
  • नोमोफोबिया में संबंधित व्यक्ति को मोबाइल चोरी होने या गिर जाने के सपनें आते हैं, इससे वह घबराहट में नींद से उठ जाता हैं। ऐसा दिन भर मोबाइल की चिंता करने के वजह से होता है।
  • हम सभी अपने किमती सामानों के न मिलने पर घबरा जाते हैं, पर नोमोफोबीया में व्यक्ति का मोबाइल खो जाने पर वह इतना घबरा जाता है की उसे पैंनिक अटैक आ सकते हैं।
  • नोमोफोबिया का अर्थ नो मोबाइल फोबिया है, इसमें व्यक्ति किसी भी स्थिति में मोबाइल को स्वयं से दूर नहीं कर सकता। वह जहां कहीं भी जाता है मोबाइल लेकर हीं जाना पसंद करता है। सोने पर भी वह अपने समीप ही मोबाइल को रख कर सोता है।
  • नोमोफोबिया में बार-बार व्यक्ति को कॉल आने का आभास होता है, उसे लगता है मोबाइल की रिंग जैसे बज रही हो।
  • यह कुछ लक्षण है, जिससे मालुम चलता है व्यक्ति नोमोफोबिया का शिकार हो चुँका है, अतः सही समय पर इससे छुटकारा पाने के लिए उचित कदम उठाना चाहिए।
  • मोबाइल की लत ने व्यक्ति को अपने अधीन कर लिया है। गैजेट हमारे उपयोग के लिए है पर यहां गैजेट्स हमारा उपयोग कर रहे हैं। व्यक्ति को मोबाइल की ऐसी लत है की वह पास बैठे लोगों से बात करने के स्थान पर सोशल मीडिया पर मित्रों से लगा रहता है।
  • इससे उसके अपनों से आपसी संबंध कमज़ोर होते चले जाते है। साथ ही व्यकि के जीवन की विभिन्न पहलुओं को भी यह लत प्रभावित करता है जैसे स्वास्थ्य, आजीविका (career), अध्ययन आदि।
  • मोबाइल में अनेक ऐसे एप्लिकेशन हैं जिससे व्यक्ति पूरा-पूरा दिन दोस्तों से बाते करते रह सकते हैं, जैसे- वॉट्सएप, फेशबुक, इन्टाग्राम आदि। इसके वजह से बच्चे पढ़ाई में समय नहीं देते, बड़े अपने काम पर ध्यान नहीं देते हैं।
  • मोबाइल फ़ोन के हद से ज्यादा उपयोग से हम अनेक तरह के रोगों के चपेट में आ सकते हैं जैसे- आँखों का कमज़ोर होना, सिर दर्द, कम सुनाई देना, तनाव, अनिंद्रा आदि।
  • मोबाइल में सब कुछ आसानी से मिल जाने के वजह से हमारी याद करने की क्षमता कम होती जा रही है।

Conclusion :

मोबाइल की लत में पड़ा व्यक्ति सुबह उठने के बाद सबसे पहले मोबाइल चैक करता है, जब तक नींद न आ जाए मोबाइल उपयोग करता है तथा सोने के बाद भी अपने सिरहानें उसे रख कर सोता है। बेशक इस उपकरण से ज्यादा महत्वपूर्ण लोग आपके जीवन में हैं, उन्हें महत्व देना चाहिए।मोबाइल की लत से समय का दुरोपयोग होता है, समय से न सोना, समय से न उठना हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। मोबाइल में आज अनेक तरह के गेम्स बच्चों को मिल जाते हैं, इसके फलस्वरूप बच्चें बाहर खेले जाने वाले खेल से कटते जा रहे हैं।

हम सोशल मीडिया, टेक्सटिंग, गेमिंग या वीडियो देखने जैसी मोबाइल गतिविधियों के लिए एक समय निर्धारित कर सकते हैं ताकि अपने अन्य कार्य समय पर कर पाए। हम पेंटिंग, नृत्य, इनडोर या आउटडोर गेम खेलने जैसी अन्य मनोरंजक गतिविधियों में भी संलग्न हो सकते हैं। अगर हम उचित प्रयास करे तो धीरे- धीरे इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। अगर हम इसका सहीं प्रकार से उपयोग करते है तो यह हमारा काम आसान कर देता है और अगर हमे इसकी लत लग जाये तो यह हमारा ही उपयोग करने लगाता है।

वर्क फ्रॉम होम 

Introduction :

‘वर्क फ्रॉम होम’ कार्य करने का एक आधुनिक तरीका है, जहां कंपनी या फर्म के कर्मचारी अपने घर से ही अपना काम कर सकते हैं। घर से काम करने से कर्मचारियों के साथ-साथ कंपनियों के प्रबन्धको को भी आसानी रहती है क्योंकि पूरा काम समय पर बड़ी आसानी से समाप्त किया जा सकता है। कोरोना महामारी के खतरे को देखते हुए दुनिया भर की कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम की नीति अपनाई। भारत के लिए यह भले ही नई बात हो, लेकिन दुनिया के अन्य देशों में यह चलन पहले से ही मौजूद था। ‘वर्क फ्रॉम होम’ ने कई व्यावसायो और कंपनियों के लिए काम करने की नई संभावनाओं की राहे खोल दी है। कई कम्पनियाँ इसके माध्यम से अपने व्यापार मॉडल में सुधार कर रही है और साथ ही इसका फायदा उनके कर्मचारियों को भी मिल रहा है।

यदि कोई कर्मचारी स्वास्थ संबंधित समस्याओं का सामना कर रहा हैं, तो ‘वर्क फ्रॉम होम उनके लिए एक अच्छा उपाय साबित हो सकता है। यही कारण है कि आजकल, अधिकांश आईटी और अन्य संबंधित कंपनियां अपने कर्मचारियों को यह विकल्प दे रही हैं। लेकिन वर्क फ्रॉम होम हर किसी की क्षमता और व्यक्तित्व के लिए उपयुक्त नहीं है। कुछ कर्मचारी कार्यालय के वातावरण में काम करना पसंद करते हैं।

  • कोरोना वाय़रस संक्रमण के खतरे को देखते हुए दुनिया भर की कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम की नीति अपनाई है. भारत के कॉरपोरेट कल्चर के लिए यह भले ही नई बात है और आपदा के दौर में अपनाई गई व्यवस्था है, लेकिन दुनिया के अन्य देशों में यह चलन पहले से ही है.
  • कई कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से काम करने (वर्क फ्रॉम होम) की सुविधा दी है. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि ‘कम्युनिटी ट्रांसमिशन’ को रोका जा सके.
  • हालांकि घर से काम करने वाले अधिकतर लोग अब नई मुश्किलों से जूझ रहे हैं. कई लोग मानसिक तनाव और दबाव झेल रहे हैं. इसकी कई वजहें हैं.
  • कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए किये गए लॉकडाउन की वजह से ज्यादातर कंपनियों ने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का विकल्प दे दिया है. घर से काम करने के कारण कुछ लोग आलस्य महसूस करने लगे हैं. कुछ लोगों का मानना है कि घर पर काम करने के कारण अक्सर उनके गर्दन और कंधों में दर्द रहने लगा है.
  • नेशनल करियर सर्विस ने कहा है कि वर्क फ्रॉम होम को सफल बनाने के लिए जरूरी है आप हर दिन के काम की पूरी लिस्ट बनाएं और उसे शाम में चेक करें कि आपने सारे काम पूरे कर लिए हैं या नहीं. दूसरी बात यह है कि घर पर आप ऑफिस जैसा माहौल बनायें.
  • वर्क फ्रॉम होम के दौरान आप अपने काम के समय को लेकर स्पष्ट रहें. जैसे आप ऑफिस जाने के बाद एक निर्धारित समय तक काम करते हैं, वैसे ही आप घर से भी निर्धारित समय में ही काम करें. आप उस काम के बीच में ना डिस्टर्ब हों, ना कोई और काम करें. इसके साथ ही नेशनल करियर सर्विस ने कहा है कि ऑफिस के समय में केवल ऑफिस का काम करें.
  • अपने घर से काम करते समय भी आपको अपने सहकर्मियों के साथ संपर्क में रहना चाहिए. दूसरी बात यह है कि ऑफिस के कामकाज से संबंधित बातचीत करने के लिए आप डिजिटल संचार माध्यम का उपयोग करें. आप ईमेल कर सकते हैं, आप फोन कर सकते हैं, आप चैट कर सकते हैं या वीडियो कॉल कर सकते हैं. 
  • घर से ग्रॉसरी का सामान खरीदने के लिए बाहर निकलें तो साथ में सैनिटाइजर जरूर रखें. वजह यह है कि ग्रॉसरी शॉप या सुपरमार्केट में कई चीजों को छूना पड़ सकता है. कार्ट, काउंटर, शेल्‍फ वगैरह को छूने पर हाथों पर सैनिटाइजर जरूर लगाएं
  • जरूरी नहीं है कि आप सर्जिकल मास्‍क ही पहनें. हेल्‍थकेयर प्रोफेशनल्‍स को इनकी ज्‍यादा जरूरत होती है. घर पर कपड़े से बने मास्‍क भी आपकी सुरक्षा करने में मददगार होते हैं. आवश्‍यक वस्‍तुएं खरीदने के लिए बाहर निकलें तो मास्‍क जरूर पहन लें.
  • हफ्तेभर की ग्रॉसरी खरीदना पर्याप्‍त है. सरकार ने भरोसा दिया है कि वह आवश्‍यक वस्‍तुओं की आपूर्ति में बाधा नहीं आने देगी. इस दौरान प्रोटीनयुक्‍त खाना खाने की सलाह दी जाती है क्‍योंकि यह इम्‍यूनिटी को बढ़ाता है और सेहतमंद होता है.

Conclusion :

ज्‍यादातर दुकानों के सामने अब दुकानदारों ने गोले खींच दिए हैं. ऐसा सोशल डिस्‍टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी को बनाए रखने के लिए किया गया है. ग्रॉसरी खरीदते वक्‍त एक-दूसरे से छह फीट की दूरी बनाकर रखना सही है. जितना संभव हो डिजिटल पेमेंट का इस्‍तेमाल करें. यह न केवल संक्रमण के खतरे को कम करता है, बल्कि कैश बचाने में भी मदद करता है. इसके चलते लॉकडाउन में छोटी-छोटी अवधियों में आपको एटीएम नहीं भागना पड़ता है. ग्रॉसरी खरीदकर घर वापस लौटने पर 20 सेकेंड तक अपने हाथों को साबुन से धुलना नहीं भूलें इसकी वजह यह है कि ज्यादातर मोबाइल ‘हाई-टच सरफेस’ माने जाते हैं. यहां हम ऐसी बातें बता रहे हैं जिनका ध्यान आपको स्मार्टफोन और लैपटॉप सहित गैजेट्स को साफ करते वक्त रखना है.

वर्क फ्रॉम होम करते हुए शुरुआती समय में कई बार काफी थकान महसूस होती है और काम नीरस लगने लगता है। वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारीयो के कार्य की निगरानी करने में भी कठिनाई होती है। कंपनियां कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं लेकिन बेहतर परिणाम के लिए कुछ नियम भी होने चाहिए ताकि घर से काम प्रभावी ढंग से और समय सीमा के भीतर हो सके। वर्क फ्रॉम होम रोमांचक और लाभदायक है, लेकिन काम में स्वतंत्रता से जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं।

कोरोना वायरस का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

Introduction :

कोरोनावायरस (COVID-19) एक संक्रामक रोग है जो कोरोनावायरस के कारण होता है। इसकी शुरुआत पहली बार दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से हुई। डब्ल्यूएचओ ने 30 जनवरी को कोरोनवायरस को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। कोरोनावायरस न केवल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है बल्कि दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर रहा है। विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, व्यापार के मामले में, चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। विश्व के निर्यात का 13% और आयात का 11% केवल चीन से होता है। दुनिया के कई उद्योग अपने कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। 

पुरे विश्व में खरीदी जाने वाली लगभग एक तिहाई मशीनरी चीन से आती है, इसलिए कोरोनवायरस ने वैश्विक आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।चीन में कई कारखाने अब बंद हो गए हैं, निर्भर कंपनियों के लिए उत्पादन भी बंद हो गया है। उत्पादन में मंदी के कारण खपत में भी गिरावट आई है और इस तरह से दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है। कोरोनोवायरस फैलने के कारण लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण पर्यटन उद्योग को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कोरोना वायरस का आयात पर प्रभाव –

  • इस वायरस से हवाई यात्रा, शेयर बाज़ार, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं सहित लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
  • यह वायरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है।
  • इन दो अर्थव्यवस्थाओं, जिन्हें वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में जाना जाता है, संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है।
  • निवेशकों के बाज़ारों से बाहर निकलने के कारण शेयर बाज़ार सूचकांक में लगातार गिरावट आई है। लोग बड़ी राशि को अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र यथा- ‘सरकारी बाॅण्ड’ में लगा रहे हैं जिससे कीमतों में तेज़ी तथा उत्पादकता में कमी देखी गई है।
  • अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब अनुभव हाल ही में कोरोना वायरस के कारण महसूस किया गया, ध्यातव्य है कि अमेरिकी बाज़ार में 12% से अधिक की गिरावट आई है।
  • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि जो निवेशक ऐसे संकट के समय सामान्यत: स्वर्ण में निवेश करते हैं, इस संकट के समय उन्होंने इसका भी बहिष्कार कर दिया जिससे सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, तथा लोगों ने सरकारी गारंटी युक्त ‘ट्रेज़री बिल’ (Treasury Bills) में अधिक निवेश करना उचित समझा।
  • Apple, Nvidia, Adidas जैसी कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ये चीन के आपूर्तिकर्त्ताओं पर निर्भर हैं, इन्हें भविष्य में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव –

  • भारत जब अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में इस वायरस का केवल सतही प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा ऐसे कठिन समय में समस्या का समाधान मात्र ‘एयर लिफ्टिंग’ से संभव नहीं है।
  • यह समस्या न केवल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करेगी, अपितु यह भारत के फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।
  • निर्यात, जिसे अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है, इसमें वैश्विक मंदी की स्थिति में और गिरावट देखी जा सकती है, साथ ही निवेश में भी गिरावट आ सकती है।
  • भारतीय कंपनियाँ चीन आधारित ‘वैश्विक आपूर्ति शृंखला’ में शामिल प्रमुख भागीदार नहीं हैं, अत: भारतीय कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित नहीं होंगी।
  • दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जो कि वृहद् अर्थव्यवस्था और उच्च मुद्रास्फीति के चलते अच्छी खबर है।
  • भारत सरकार को लगातार विकास की गति का अवलोकन करने की आवश्यकता है, साथ ही चीन पर निर्भर भारतीय उद्योगों को आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करनी चाहिये।
  • कोरोना वायरस जैसी बीमारी की पहचान, प्रभाव, प्रसार एवं रोकथाम पर चर्चा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जानी चाहिये ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।

Conclusion :

वायरस जनित यह संकट किसी अन्य वित्तीय संकट से बिलकुल अलग है। अन्य वित्तीय संकटों का समाधान समय-परीक्षणित उपायों जैसे- दर में कटौती, बेल-आउट पैकेज (विशेष वित्तीय प्रोत्साहन) आदि से किया जा सकता है, परंतु वायरस जनित संकट का समाधान इन वित्तीय उपायों द्वारा किया जाना संभव नहीं है। ऑटोमोबाइल उद्योग पहले ही आर्थिक मंदी के कारण संकट में है और अब माल और सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन में कमी आ रही है। चीन से आपूर्ति में रुकावट के कारण वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है। यद्यपि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कोरोनोवायरस के सटीक प्रभाव को निर्धारित करना मुश्किल है, फिर भी यह स्पष्ट है कि यह प्रभाव लंबे समय तक रहेगा।

भारत में बेरोजगारी की समस्या

Introduction :

बेरोजगारी भारत में एक अहम मुद्दा बनता जा रहा है  जब कोई व्यक्ति काम करने योग्य हो और काम करने की इच्छा भी रखे किन्तु उसे काम का अवसर प्राप्त न हो तो वह बेरोजगार कहलाता हैं। आज हमारे देश मे लाखो लोग बेरोजगार है। ऐसा इसलिए है क्योंकि नौकरियाँ सीमित हैं और नौकरी पाने वालो की संख्या असीमित। भारत में बेरोजगारी की स्थिति एक गंभीर सामाजिक समस्या है। शिक्षा का अभाव और रोजगार के अवसरों की कमी ऐसे कारक हैं जो बेरोज़गारी का प्रमुख कारण हैं। बेरोज़गारी न केवल देश के आर्थिक विकास में बाधा डालती है बल्कि व्यक्तिगत और पूरे समाज पर भी एक साथ कई तरह के नकारात्मक प्रभाव डालती है।

2011 की जनगणना के अनुसार युवा आबादी का 20 प्रतिशत जिसमें 4.7 करोड़ पुरूष और 2.6 करोड़ महिलाएं पूर्ण रूप से बेरोजागार हैं। यह युवा 25 से 29 वर्ष की आयु समूह से हैं। यही कारण है कि जब कोई सरकारी नौकरी निकलती है तो आवेदको की संख्या लाखों मे होती हैं। तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या भारत मे बेरोजगारी का प्रमुख कारण हैं। वर्तमान शिक्षा प्रणाली भी दोषपूर्ण है। बेरोजगारी को दूर करने में जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण आवश्यक है। जिस अनुपात में रोजगार से साधन बढ़ते है, उससे कई गुना जनसंख्या में वृद्धि हो  जाती है।

  • सबसे खराब स्थिति तो वह है जब पढ़े-लिखे युवकों को भी रोजगार नहीं मिलता शिक्षित युवकों की यह बेरोजगारी देश के लिए सर्वाधिक चिन्तनीय है, क्योंकि ऐसे युवक जिस तनाव और अवसाद से गुजरते हैं, उससे उनकी आशाएं टूट जाती हैं और वे गुमराह होकर उग्रवादी, आतंकवादी तक बन जाते हैं।
  • पंजाब, कश्मीर और असम के आतंकवादी संगठनों में कार्यरत उग्रवादियों में अधिकांश इसी प्रकार के शिक्षित बेरोजगार युवक हैं। बेरोजगारी देश की आर्थिक स्थिति को डाँवाडोल कर देती है। इससे राष्ट्रीय आय में कमी आती है, उत्पादन घट जाता है और देश में राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हो जाती है।
  • बेरोजगारी से क्रय शक्ति घट जाती है, जीवन स्तर गिर जाता है जिसका दुष्प्रभाव परिवार एवं बच्चों पर पड़ता है। बेरोजगारी मानसिक तनाव को जन्म देती है जिससे समाज एवं सरकार के प्रति कटुता के भाव जाग्रत होते हैं परिणामतः व्यक्ति का सोच नकारात्मक हो जाता है और वह समाज विरोधी एवं देश विरोधी कार्य करने में भी संकोच नहीं करता।

बेरोजगारी के कारण

  • भारत में बढ़ती हुई इस बेरोजगारी के प्रमुख कारणों में से एक है— तेजी से बढ़ती जनसंख्या। पिछले पाँच दशकों में देश की जनसंख्या लगभग चार गुनी हो गई है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 125 करोड को पार कर गई है।
  • यद्यपि सरकार ने विभिन्न योजनाओं के द्वारा रोजगार को अनेक नए अवसर सुलभ कराए हैं, तथापि जिस अनुपात में जनसंख्या वृद्धि हुई है उस अनुपात में रोजगार के अवसर सुलभ करा पाना सम्भव नहीं हो सका, परिणामतः बेरोजगारों की फौज बढ़ती गई।
  • प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में बेरोजगारों की वृद्धि हो रही है। बढ़ती हुई बेरोजगारी से प्रत्येक बुद्धि-सम्पन्न व्यक्ति चिन्तित है। हमारी शिक्षा पद्धति भी दोषपूर्ण है जो रोजगारपरक नहीं है।
  • कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से लाखों स्नातक प्रतिवर्ष निकलते हैं। किन्तु उनमें से कुछ ही रोजगार पाने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। उनकी डिग्री रोजी-रोटी को जुटा पाने में उनकी सहायता नहीं कर पाती।
  • वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति ने उद्योगों का मशीनीकरण कर दिया है परिणामतः आदमी के स्थान पर मशीन से काम लिया जाने लगा। मशीन आदमी की तुलना में अधिक कुशलता से एवं अधिक गुणवत्ता से कम कीमत पर कार्य सम्पन्न कर देती है, अतः स्वाभाविक रूप से आदमी को हटाकर मशीन से काम लिया जाने लगा।
  • फिर एक मशीन सैकड़ों श्रमिकों का काम अकेले ही कर देती है। परिणामतः औद्योगिक क्षेत्रों में बेकारी पनप गई। लघु उद्योग एवं कुटीर उद्योगों की खस्ता हालत ने भी बेरोजगारी में वृद्धि की है।

बेरोजगारी दूर करने के उपाय

भारत एक विकासशील राष्ट्र है, किन्तु आर्थिक संकट से घिरा हुआ है। उसके पास इतनी क्षमता भी नहीं है कि वह अपने संसाधनों से प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार सुलभ करा सके। ऐसी स्थिति में न तो यह कल्पना की जा सकती है है कि वह प्रत्येक व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता दे सकता है और न ही यह सम्भव है, किन्तु सरकार का यह कर्तव्य अवश्य है कि वह बेरोजगारी को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए। यद्यपि बेरोजगारी की समस्या भारत में सुरसा के मुख की तरह बढ़ती जा रही है फिर भी हर समस्या का निदान तो होता ही है।

  • भारत में वर्तमान में जनसंख्या वृद्धि 2.1% वार्षिक है जिसे रोकना अत्यावश्यक है। अब ‘हम दो हमारे दो’ का युग भी बीत चुका, अब तो ‘एक दम्पति एक सन्तान’ का नारा ही महत्वपूर्ण होगा, इसके लिए यदि सरकार को कड़ाई भी करनी पड़े तो वोट बैंक की चिन्ता किए बिना उसे इस ओर सख्ती करनी होगी। यह कठोरता भले ही किसी भी प्रकार की हो।
  • देश में आधारभूत उद्योगों के पर्याप्त विनियोग के पश्चात् उपभोग वस्तुओं से सम्बन्धित उद्योगों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इन उद्योगों में उत्पादन के साथ ही वितरण परिवहन, आदि में रोजगार उपलब्ध होंगे।
  • शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाना आवश्यक है। हमारी शिक्षा पद्धति भी दोषपूर्ण है जो रोजगारपरक नहीं है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से लाखों स्नातक प्रतिवर्ष निकलते हैं। किन्तु उनमें से कुछ ही रोजगार पाने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। उनकी डिग्री रोजी-रोटी को जुटा पाने में उनकी सहायता नहीं कर पाती।

Conclusion :

धन्धों का विकास गांवों में कृषि सहायक उद्योग-धन्धों का विकास किया जाना आवश्यक है। इससे क्रषक खाली समय में अनेक कार्य कर सकेंगे। बागवानी, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य अथवा मुर्गी पालन, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, आदि ऐसे ही धन्धे है। कुटीरोद्योग एवं लघु उद्योगों के विकास से ग्रामीण एवं शहरी दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सुलभ कराए जा सकते हैं।आज स्थिति यह है कि  एक ओर विशिष्ट प्रकार के दक्ष श्रमिक नहीं मिल रहे हैं तो दूसरे प्रकार के दक्ष श्रमिकों को कार्य नहीं मिल रहा है।

बेरोजगारी की दूर करने के सरकार द्वारा अनेक प्रयास किए गए है जिनमे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम, ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना आदि कार्यक्रम शामिल है। लेकिन अभी भी कुछ सख्त कदम उठाने बाकि है। बेरोजगारी को दूर करना देश का सबसे प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। नागरिकों को अधिक नौकरियों के निर्माण के साथ ही रोजगार के लिए सही कौशल प्राप्त करने के लिए प्रयास करना चाहिए।

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