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essay on importance of games and sports in 1000 words

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Essay on Importance Of Games & Sports in Hindi

वर्तमान समय में खेल और खेलों का महत्व पर हिन्दी में निबंध | Essay on Importance Of Games & Sports in Hindi

Introduction :

“सफलता वहीं है जहां तैयारी और अवसर मिलते हैं।” यह कथन खेल के महत्व को दर्शाता है क्योंकि तैयारी को अवसर मिलने पर सफलता मिल जाती है। खेल हमारे दैनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे हमें स्वस्थ रखने के लिए एक अच्छा व्यायाम साबित होते हैं। सुखी और सफल जीवन के लिए शारीरिक और मानसिक फिटनेस बेहद जरूरी है। शारीरिक रूप से कमजोर होने पर व्यक्ति कभी भी मानसिक रूप से मजबूत नहीं हो सकता। इसलिए सभी को अपनी सेहत पर पूरा ध्यान देना चाहिए। जब भी हम अपनी दिनचर्या से ऊब जाते हैं, तो खेल हमें खुशी और आनंद की अनुभूति कराते हैं।

  • हॉकी, फुटबॉल और क्रिकेट जैसे खेलों से हमारे भीतर सहयोग और टीम भावना का विकास होता है। टेबल टेनिस और बैडमिंटन जैसे खेलों में बहुत अधिक ध्यान और हाथ एवं आँख के समन्वय की आवश्यकता होती है जो शारीरिक व्यायाम के अलावा एक तरह का मानसिक व्यायाम भी है। टोक्यो ओलंपिक में हम पहले ही अपने देश का शानदार प्रदर्शन देख चुके हैं।
  • इसमें हमने सात पदक जीते और पदक तालिका में 48वां स्थान हासिल किया। नीरज चोपड़ा की जबरदस्त परफॉर्मेंस ने सभी को हैरान कर दिया है। पैरालंपिक श्रेणी में भारत ने 19 पदक हासिल किए हैं जिसमें पांच स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य पदक शामिल हैं।
  • हमारी सरकार ने वर्तमान समय में खेल और फिटनेस के महत्व को दर्शाते हुए ‘खेलो इंडिया यूथ गेम्स’ और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसे खेलों को बढ़ावा देने के लिए कई पहल शुरू की हैं। इसके अलावा खेल संस्कृति और अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए राज्यो में आपसी टूर्नामेंट आयोजित किए जाते हैं।
  • स्कूलों में खेल के रूप में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और फिटनेस उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि समग्र विकास के लिए शिक्षा। नीरज चोपड़ा, विराट कोहली और साइना नेहवाल जैसे लोग अधिक से अधिक लोगों को खेल खेलने और शौक के अलावा इसे एक पेशे के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
  • ओडिशा में पहला खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम खेला गया। हालांकि, भारत जो चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, उसे इस क्षेत्र में और अधिक एक्सपोजर की जरूरत है।

 Conclusion :

लड़कियों को भी और समर्थन की जरूरत है ताकि वे भी पीटी उषा और मैरी कॉम की तरह हमारे देश को गौरवान्वित कर सकें। हमारी नई शिक्षा नीति में भी खेलों के लिए अवसर प्रदान किये गए है और इसे स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। केंद्र और राज्य सरकारों को एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए और इस क्षेत्र में बेहतर अवसर देने का प्रयास करना चाहिए ताकि लोग खेल को करियर विकल्प के रूप में चुन सकें और हमारे देश को गौरवान्वित कर सकें।

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समाज के प्रति युवाओं की भूमिका पर निबंध

Introduction :

युवाओं को प्रत्येक देश की सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति माना जाता है क्योंकि उनकी बुद्धिमता और कड़ी मेहनत देश को सफलता और समृद्धि की राह पर ले जाती है। जैसा कि प्रत्येक नागरिक का राष्ट्र के प्रति कुछ उत्तरदायित्व होता है, वैसे ही युवाओं का भी है। प्रत्येक राष्ट्र के निर्माण में इनका बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान होता हैं। युवा एक ऐसे व्यक्ति को कहते है जिसकी उम्र 15 से 30 वर्ष के बीच में होती है। चूंकि युवा हर समाज की रीढ़ होते हैं और इसलिए वे समाज के भविष्य का निर्धारण करते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अन्य सभी आयु वर्ग जैसे कि बच्चे, किशोर, मध्यम आयु वर्ग और वरिष्ठ नागरिक युवाओं पर भरोसा करते हैं और उनसे बहुत उम्मीदें रखते हैं।

समाज में युवाओं पर अत्यधिक निर्भरता के कारण, हम सभी युवाओं की हमारे परिवारों, समुदायों और देश के भविष्य के प्रति बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ है। युवा अपने नेतृत्व, नवाचार और विकास कौशल द्वारा समाज की वर्तमान स्थिति को नवीनीकृत कर सकते हैं। युवाओं से देश की वर्तमान तकनीक, शिक्षा प्रणाली और राजनीति में बदलाव लाने की उम्मीद की जाती है।

उनपर समाज में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का भी उत्तरदायित्व है। यही कारण है कि देश के विकास के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी की अत्यधिक आवश्यकता होती है।

  • हमारे राष्ट्र के लिए कई परिवर्तन, विकास, समृद्धि और सम्मान लाने में युवा सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं। इस सबका मुख्य उद्देश्य उन्हें एक सकारात्मक दिशा में प्रशिक्षित करना है।
  • युवा पीढ़ी के उत्थान के लिए कई संगठन काम कर रहे हैं क्योंकि वे बड़े होकर राष्ट्र निर्माण में सहायक बनेंगे। गरीब और विकासशील देश अभी भी युवाओं के समुचित विकास और शिक्षण में पिछड़े हुए हैं।
  • एक बच्चे के रूप में प्रत्येक व्यक्ति, अपने जीवन में कुछ बनने का सपने देखता है, बच्चा अपनी शिक्षा पूरी करता है और कुछ हासिल करने के लिए कुछ कौशल प्राप्त करता है।
  • युवाओं में त्वरित शिक्षा, रचनात्मकता, कौशल होता है। वे हमारे समाज और राष्ट्र में परिवर्तन लाने की शक्ति रखते हैं।
  • युवा उस चिंगारी के साथ बड़ा होता है, जो कुछ भी कर सकता है।
  • समाज में कई नकारात्मक कुरीतियाँ और कार्य किए जाते हैं। युवाओं में समाज परिवर्तन और लिंग तथा सामाजिक समानता की अवधारणा को लाने की क्षमता है।
  • समाज में व्याप्त कई मुद्दों पर काम करके युवा दूसरों के लिए एक आदर्श बन सकते हैं।

युवा की भूमिका

  • युवाओं को राष्ट्र की आवाज माना जाता है। युवा राष्ट्र के लिए कच्चे माल या संसाधन की तरह होते हैं। जिस तरह के आकार में वे हैं, उनके उसी तरीके से उभरने की संभावना होती है।
  • राष्ट्र द्वारा विभिन्न अवसरों और सशक्त युवा प्रक्रियाओं को अपनाया जाना चाहिए, जो युवाओं को विभिन्न धाराओं और क्षेत्रों में करियर बनाने में सक्षम बनाएगा।
  • युवा लक्ष्यहीन, भ्रमित और दिशाहीन होते हैं और इसलिए वे मार्गदर्शन और समर्थन के अधीन होते हैं, ताकि वे सफल होने के लिए अपना सही मार्ग प्रशस्त कर सकें।
  • युवा हमेशा अपने जीवन में कई असफलताओं का सामना करते हैं और हर बार ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि एक पूर्ण अंत है, लेकिन वो फिर से कुछ नए लक्ष्य के साथ खोज करने के लिए एक नए दृष्टिकोण के साथ उठता है।
  • एक युवा मन प्रतिभा और रचनात्मकता से भरा हुआ है। यदि वे किसी मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते हैं, तो परिवर्तन लाने में सफल होते हैं।

भारत में युवाओं की प्रमुख समस्याएं

  • कई युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान नहीं की जाती है; यहां तक ​​कि कई लोग गरीबी और बेरोजगारी तथा अनपढ़ अभिभावकों के वजह से स्कूलों नहीं जा पाते हैं। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बच्चे को स्कूल जाने और उच्च शिक्षा हासिल करने का मौका मिले।
  • बालिका शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि देश में कई ऐसे हिस्से हैं जहां लड़कियां स्कूल जाने और पढ़ाई से वंचित है। लेकिन युवा, लड़के और लड़कियों दोनों का गठन करते हैं। जब समाज का एक वर्ग उपेक्षित हो, तो समग्र विकास कैसे हो सकता है?
  • अधिकांश युवाओं को गलत दिशा में खींच लिया गया है; उन्हें अपने जीवन और करियर को नष्ट करने से रोका जाना चाहिए।
  • कई युवाओं में कौशल की कमी देखी गयी है, और इसलिए सरकार को युवाओं के लिए कुछ कौशल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि वे आगे एक या उससे अधिक अवसरों से लाभान्वित हो सकें।
  • भारत में अधिकांश लोग गांवों में रहते हैं, इसलिए शिक्षा और अवसरों की सभी सुविधाओं तक उनकी उचित पहुंच नहीं है।
  • कुछ युवाओं द्वारा वित्तीय संकट और सामाजिक असमानता की समस्या होती है।
  • ऐसे कई बच्चे हैं जो प्रतिभा के साथ पैदा हुए हैं, लेकिन अपर्याप्त संसाधनों के चलते, वे अपनी प्रतिभा के साथ आगे नहीं बढ़ सके।
  • उनमें से कई को पारिवारिक आवश्यकताओं के कारण पैसा कमाने के लिए अपनी प्रतिभा से हटकर अन्य काम करना पड़ता है, लेकिन उन्हें उस काम से प्यार नहीं है जो वे कर रहे हैं।
  • बेरोजगारी की समस्या युवाओं की सबसे बड़ी समस्या है।
  • जन्मजात प्रतिभा वाले कुछ बच्चे होते हैं, लेकिन संसाधन की कमी या उचित प्रशिक्षण नहीं होने के कारण, वे अपनी आशा और प्रतिभा भी खो देते हैं।
  • इस प्रकार, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बच्चे को उचित शिक्षा की सुविधा प्रदान की जाए। प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए। युवाओं को कई अवसर प्रदान किया जाना चाहिए। उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और राजनीतिक मामलों में समान रूप से भाग लेना चाहिए।
  • कुशल समूहों को काम प्रदान करने के लिए कई रोजगार योजनाएं चलानी चाहिए।

Conclusion :

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किस क्षेत्र में प्रगति करना चाहते हैं क्योंकि हर जगह युवाओं की आवश्यकता है। हमारे युवाओं को अपनी आंतरिक शक्तियों और समाज में उनकी भूमिका के बारे में पता होना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर किसी को खुद को योग्य साबित करने के लिए समान मौका मिल सके। युवाओं के पास एक अलग दृष्टिकोण है जो पुरानी पीढ़ियों के पास नहीं था जिसके द्वारा वे हमारे देश में विकाश और समृद्धि ला सकते है।

फिट इंडिया मूवमेंट पर निबंध

Introduction :

भारत के लोगों के में फिटनेस और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए, प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती और राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 29 अगस्त, 2019 को फिट इंडिया मूवमेंट का शुभारंभ किया। फिट इंडिया मूवमेंट का उद्देश्य भारतीयों को स्वस्थ और फिट जीवन शैली के लिए फिटनेस गतिविधियों और खेल को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रधानमंत्री ने फिट इंडिया पर अपने भाषण के दौरान कहा कि फिटनेस केवल एक शब्द नहीं है बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का एक तरीका है।

हमारा राष्ट्र केवल तभी फिट होगा जब इसके प्रत्येक नागरिक फिट होगे। उन्होंने कहा, “मैं आपको फिट देखना चाहता हूं और आपको फिटनेस के प्रति जागरूक करना चाहता हूं और हम एक साथ फिट इंडिया के लक्ष्य को पूरा करेंगे ।” इस आंदोलन का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ भविष्य के लिए अधिक सक्रिय जीवन शैली के लिए प्रोत्साहित करना है। लोगों को नियमित रूप से व्यायाम करने, मनोरंजक खेल खेलने और फिट रहने के लिए योग करने के लिए कहा गया।

  • बदलते समय के साथ-साथ भारत के लोगों के जीवन स्तर पर भी बड़ा बदलाव आया है।लोगों का रहन-सहन, खान-पान व जीवन जीने के तौर तरीके पहले जैसे नहीं रहे।
  • असमय भोजन,जंक फ़ूड,शाररिक व्यायाम न करना या अन्य वजहों से कई बीमारियें हो रही हैं।जिसने बड़े,बुजुर्गों व युवाओं को ही नहीं,यहां तक कि छोटे-छोटे बच्चों को भी अपनी की चपेट में ले लिया हैं।
  • आजकल छोटे-छोटे बच्चों को भी डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर,दिल की बीमारी व मोटापे आदि की शिकायत हो रही है।लेकिन इनमें से कई बीमारियों को हम अपने जीवन में छोटे-छोटे बदलाव कर दूर कर सकते हैं।

भारत में बढ़ती बीमारियों

वैश्विक स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार-

  • विकसित देशों में गैर-संक्रामक बीमारियां औसतन 55 वर्ष की उम्र में लोगों में देखी जा रही हैं।जबकि भारत में यह अधिकतर 45 वर्ष की उम्र में ही नागरिकों को अपनी चपेट में ले रही हैं।
  • भारत में दिल के रोगियों की संख्या लगभग 5.45 करोड़ हैं।जबकि 13.5 करोड़ लोग मोटापे का शिकार है।
  • भारत में हर 10 में से एक व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित है।जबकि हर पांचवें व्यक्ति को हाइपरटेंशन की समस्या है।इस वक्त देश में 24.5% पुरुष तथा 20% महिलाएं हाइपरटेंशन का शिकार हैं।और भारत में लगभग 1.63 करोड़  मौतों हाइपरटेंशन की वजह से होती है।
  • भारत में पिछले दो दशकों में दो तिहाई गैर-संक्रामक रोग के मरीज बढ़े हैं।1990 में देश में कुल मौतों से 37.09% गैर संक्रामक रोगों से हो रही थी।लेकिन आज यह 62% तक पहुंच गई है।
  • भारत में कुल आबादी का लगभग 10% आबादी मानसिक रोगी है।यानि किसी ने किसी मानसिक परेशानी की गिरिफ्त में है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने फिट इंडिया अभियान (Fit India Movement) को शुरू करते हुए लोगों को स्वस्थ व फिट रहने के कुछ मन्त्र दिये, जैसे

  • बॉडी फिट है तो माइंड हिट।
  • फिटनेस एक शब्द नहीं, बल्कि स्वस्थ और समृद्ध जीवन की एक जरूरी शर्त है।
  • इसमें जीरो इन्वेस्टमेंट(Investment) है।लेकिन Return असीमित है।
  • जो लोग सफल है उनका एक ही मंत्र है फिटनेस पर उनका फोकस।
  • सफलता और फिटनेस का रिश्ता भी एक दूसरे से जुड़ा है।खेल,फिल्म, हर क्षेत्र के हीरो फिट रहते हैं।
  • किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए मानसिक और शारीरिक फिटनेस का होना जरूरी है
  • शरीर के लिए लिफ्ट या एस्केलेटर्स के बजाय बल्कि सीढ़ी का उपयोग करना सही होता है।लेकिन यह तभी हो पाएगा जब आप फिट हैं।
  • किसी भी क्षेत्र के व्यक्ति को मेंटल और फिजिकल तौर पर फिट होना जरूरी है।चाहे बोर्डरूम हो या बॉलीवुड।जो फिट है वह आसमान छूता है।
  • आज Lifestyle Diseases, Lifestyle Disorder की वजह से हैं।लेकिन Lifestyle Disorder को हम Lifestyle में बदलाव करके ठीक कर सकते हैं।
  • कुछ दशक पहले तक एक सामान्य व्यक्ति 8-10 किलोमीटर तक पैदल चल ही लेता था।कुछ ना कुछ फिटनेस के लिए करता ही था।लेकिन आज नई टेक्नोलॉजी की वजह से नए साधन बाजार में आए और व्यक्ति का पैदल चलना काफी कम हो गया।
  • भारत सरकार Fit India Movement को सफल बनाने के लिए कई विभागों के साथ मिलकर काम करेंगी।इनमें खेल मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय आदि प्रमुख हैं। 

Conclusion :

फिट इंडिया अभियान का मुख्य मकसद स्वास्थ्य के प्रति देश के लोगों को जागरूक करना है।इसीलिए इस अभियान को भी सरकार स्वच्छता अभियान की ही तरह आगे बढ़ाएगी। अधिकांश रोगों का मूल कारण जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां हैं और ऐसी कई बीमारियां हैं जिन्हें हमारी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके दूर किया जा सकता है। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने पहले ही अपने अभियानों के साथ स्वस्थ और फिट राष्ट्र के लिए मार्ग प्रशस्त करने का लक्ष्य रखा है। फिट इंडिया मूवमेंट को देश के हर कोने तक पहुंचना चाहिए। हमें इस आंदोलन की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए और फिट इंडिया को सफल बनाने का प्रयास करना चाहिए।

सोशल मीडिया की भूमिका पर निबंध

Introduction :

आज के दौर में सोशल मीडिया जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है, सोशल मीडिया वह जगह है जहां हमे किसी भी चीज के बारे में जानने, पढ़ने, समझने और बोलने का मौंका मिलता हैं। सोशल मीडिया का प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति पर पड़ता है। सोशल मीडिया के बिना हमारे जीवन की कल्पना करना मुश्किल है, परन्तु इसके अत्यधिक उपयोग के वजह से हमे इसकी कीमत भी चुकानी पड़ती हैं। सोशल मीडिया समाज के सामाजिक विकास में अपना योगदान देता है और कई व्यवसायों को बढ़ाने में भी मदद करता है। हम आसानी से सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी और समाचार प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी सामाजिक कारण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग एक अच्छा साधन है।

सोशल मीडिया लोगों में निराशा और चिंता पैदा करने वाला एक कारक भी है। ये बच्चों में खराब मानसिक विकास का भी कारण बनता जा रहा है। सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग निद्रा को प्रभावित करता हैं। सोशल मीडिया को अच्छा या बुरा कहने के बजाय, हमें अपने लाभ के लिए इसका उपयोग करने के तरीके को खोजना चाहिए। सोशल मीडिया जागरूकता फैलाने और अपराध से लड़ने में एजेंसियों तथा सरकार की मदद कर सकता है।

सोशल मीडिया का महत्व –

  • व्याख्यानो का सीधा प्रसारण:आजकल कई प्रोफेसर अपने व्याख्यान के लिए स्काइप, ट्विटर और अन्य स्थानों पर लाइव वीडियो चैट आयोजित कर रहे हैं। यह छात्रों के साथ-साथ शिक्षक को भी घर बैठे किसी चीज को सीखने और साझा करने में सहायता करता है। सोशल मीडिया की मदद से शिक्षा को आसान और सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
  • सहयोग का बढ़ता आदान-प्रदान:चूंकि हम दिन के किसी भी समय सोशल मीडिया का उपयोग कर सकते है और कक्षा के बाद शिक्षक से प्रश्नों का समर्थन और समाधान ले सकते हैं। यह अभ्यास शिक्षक को अपने छात्रों के विकास के और अधिक बारीकी को समझने में भी मदद करता है।
  • शिक्षा कार्यो में आसानी:कई शिक्षक महसूस करते हैं कि सोशल मीडिया का उपयोग उनके कामों को आसान बनाता है। यह शिक्षक को अपनी क्षमताओं कौशल और ज्ञान का विस्तार और पता लगाने में भी सहायता करता है।
  • अधिक अनुशासान:सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आयोजित कक्षाएं अधिक अनुशासित और संरचित होती हैं क्योंकि वे जानते हैं कि हर कोई इसे देख रहा होता है।
  • शिक्षा में मददगार:सोशल मीडिया छात्रों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई गयी कई शिक्षण सामाग्री के माध्यम से उनके ज्ञान को बढ़ाने में मदद करता है। सोशल मीडिया के माध्यम से छात्र वीडियो और चित्र देख सकते हैं, समीक्षाओं की जांच कर सकते हैं और लाइव प्रक्रियाओं को देखते हुए तत्काल अपने संदेह को दूर कर सकते हैं।
  • न केवल छात्र, बल्कि शिक्षक भी इन उपकरणों और शिक्षण सहायता का उपयोग करके अपने व्याख्यान को और अधिक रोचक बना सकते हैं।
  • शिक्षण ब्लॉग और लेखन:छात्र प्रसिद्ध शिक्षकों, प्रोफेसरों और विचारकों द्वारा ब्लॉग, आर्टिकल और लेखन पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं। इस तरह अच्छी सामग्री व्यापक दर्शकों तक पहुंच सकती है।

सोशल मीडिया के फायदे

  • सोशल मीडिया वास्तव में कई फायदे पहुंचाता है, हम सोशल मीडिया का उपयोग समाज के विकास के लिए भी कर सकते है। हमने पिछले कुछ वर्षों में सूचना और सामग्री का विस्फोट देखा है और हम सोशल मीडिया के ताकत से इंकार नहीं कर सकते है।
  • समाज में महत्वपूर्ण कारणों तथा जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया का व्यापक रूप से उपयोग किया जा सकता है। सोशल मीडिया एनजीओ और अन्य सामाजिक कल्याण समितियों द्वारा चलाए जा रहे कई महान कार्यों में भी मदद कर सकता है।
  • सोशल मीडिया जागरूकता फैलाने और अपराध से लड़ने में अन्य एजेंसियों तथा सरकार की मदद कर सकता है। कई व्यवसायों में सोशल मीडिया का उपयोग प्रचार और बिक्री के लिए एक मजबूत उपकरण के रुप में किया जा सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से कई समुदाय बनाये जाते है जो हमारे समाज के विकास के लिए आवश्यक होते हैं।

सोशल मीडिया के नुकसान

  • साइबर बुलिंग: कई बच्चे साइबर बुलिंग के शिकार बने हैं जिसके कारण उन्हें काफी नुकसान हुआ है।
  • हैकिंग: व्यक्तिगत डेटा का नुकसान जो सुरक्षा समस्याओं का कारण बन सकता है तथा आइडेंटिटी और बैंक विवरण चोरी जैसे अपराध, जो किसी भी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • बुरी आदते: सोशल मीडिया का लंबे समय तक उपयोग, युवाओं में इसके लत का कारण बन सकता है। बुरी आदतो के कारण महत्वपूर्ण चीजों जैसे अध्ययन आदि में ध्यान खोना हो सकता है। लोग इससे प्रभावित हो जाते हैं तथा समाज से अलग हो जाते हैं और अपने निजी जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • घोटाले: कई शिकारी, कमजोर उपयोगकर्ताओं की तलाश में रहते हैं ताकि वे घोटाले कर और उनसे लाभ कमा सके।
  • रिश्ते में धोखाधड़ी: हनीट्रैप्स और अश्लील एमएमएस सबसे ज्यादा ऑनलाइन धोखाधड़ी का कारण हैं। लोगो को इस तरह के झूठे प्रेम-प्रंसगो में फंसाकर धोखा दिया जाता है।
  • स्वास्थ्य समस्याएं: सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है। अक्सर लोग इसके अत्यधिक उपयोग के बाद आलसी, वसा, आंखों में जलन और खुजली, दृष्टि के नुकसान और तनाव आदि का अनुभव करते हैं।
  • सामाजिक और पारिवारिक जीवन का नुकसान: सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण लोग परिवार तथा समाज से दुर, फोन जैसे उपकरणों में व्यस्थ हो जाते है।

दुनिया भर में लाखों लोग है जो कि सोशल मीडिया का उपयोग प्रतिदिन करते हैं। इसके सकारात्मक और नकारात्मक पहलूओं का एक मिश्रित उल्लेख दिया गया है। इसमें बहुत सारी ऐसी चीजे है जो हमे सहायता प्रदान करने में महत्वपुर्ण है, तो कुछ ऐसी चीजे भी है जो हमें नुकसान पहुंचा सकती है। कई व्यवसायों में सोशल मीडिया का उपयोग प्रचार और बिक्री के लिए एक मजबूत उपकरण के रुप में किया जा सकता है। सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं में कोई संदेह नहीं है लेकिन उपयोगकर्ताओं को सोशल नेटवर्किंग के उपयोग पर अपने विवेकाधिकार का उपयोग करना चाहिए। यदि सोशल मीडिया का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो ये मानव जाति के लिए वरदान साबित हो सकता है।

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