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कोरोनावायरस पर निबंध हिंदी में

Essays

Essay/Nibandh topics in hindi for UPPSC Gic Lecturer

Essay/Nibandh topics in hindi for UPPSC Gic Lecturer

Format of the Essay :

  • Introduction / परिचय
  • Body / बॉडी
  • Conclusion / निष्कर्ष

Elements Of An Introduction :

  • Attention grabber, may begin with a quote / Quote के साथ शुरू करें
  • Provide Background Info / पृष्ठभूमि प्रदान करें
  • Outline the Structure /संरचना को रेखांकित करें
  • Limit the Scope / दायरा सीमित करें

Elements Of Body :

  • Evidence and support of the Topic /विषय का समर्थन
  • Least important to most important / कम महत्वपूर्ण से सबसे महत्वपूर्ण
  • Chronological order / कालानुक्रमिक
  • evidence to support your argument / तर्क का समर्थन
  • Example- relevant to your particular topic /उदाहरण- आपके विशेष विषय के प्रासंगिक

Elements Of Conclusion :

  • Wrap all of your arguments and points / सभी तर्कों को पूरा करें
  • Restate the main arguments in A simplified manner/सरलीकृत तरीके से Rewrite करें

Top 15 Most Imp Essay topics :

  1. भारत एवं सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान
  2. राष्ट्र के विकास में युवाओं की भूमिका
  3. नई शिक्षा नीति – संभावनाएँ और चुनौतियाँ
  4. भारत में प्राकृतिक आपदाओं से कैसे निपटें?
  5. भारत में ओमाइक्रोन कोविड -19 संस्करण
  6. मानव तस्करी: नैतिकता और मूल्यों की समस्या
  7. भारत में पश्चिमी संस्कृति का क्रेज
  8. ई-परिवहन – संभावनाएँ और चुनौतियाँ
  9. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और इंटरनेट
  10. भारत 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था संभावनाएं एवं चुनौतियां
  11. आज के समाज में सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण
  12. भारत में आरक्षण प्रणाली की संभावनाएं एवं समस्याएं
  13. यूनिवर्सल बेसिक इनकम बनाम सब्सिडी
  14. बढ़ते तनाव के मुद्दे और मानसिक स्वास्थ्य
  15. भारत में स्वास्थ्य सेवा – मुद्दे और चुनौतियाँ

Other Important Topics

  • प्रौढ़ शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन
  • विज्ञान बनाम धर्म का महत्व
  • कार्यस्थल पर लैंगिक भेदभाव
  • आज के जीवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग
  • नशीली दवाओं के उन्मूलन में छात्रों की भूमिका
  • महिला सशक्तिकरण- भारत को सशक्त बनाना
  • वरिष्ठ नागरिकों के प्रति हमारा कर्तव्य
  • मानव बनाम जलवायु परिवर्तन
  • आतंकवाद और उसके खतरे
  • भारत में अपराध दर में वृद्धि
  • बेरोजगारी बनाम अल्परोजगार
  • भारत में जल संकट
  • शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं

Other Important Topics

  • भारतीय शहरों का वायु प्रदूषण बनाम शहरीकरण
  • गोपनीयता का अधिकार और तकनीकी विकास
  • अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त करना
  • समाज पर काले धन का प्रभाव
  • भारत में तकनीकी प्रगति
  • एक देश एक चुनाव
  • भारत में भ्रष्टाचार
  • युवाओं पर मोबाइल की लत का प्रभाव
  • घर से काम – लाभ एवं हानि
  • सोशल मीडिया गुड एंड डार्क साइड
  • स्वस्थ जीवन शैली का महत्व
  • भारत में लड़कियां कितनी सुरक्षित हैं?
  • भारत में लैंगिक समानता
  • भारत में ई-शिक्षा का महत्व
  • मौन क्रोध का सर्वोत्तम उत्तर है
  • भारत में घरेलू पर्यटन के अवसर

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Essay On : भारत 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था: संभावनाएं एवं चुनौतियां

Introduction :

भारत ने 1991 में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये उदारीकरण की नीति को अपनाया, इसके अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिये खोल दिया गया और धीरे-धीरे भारत की अर्थव्यवस्था की गति तीव्र होती गई। भारत कुछ समय पूर्व ही विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। किंतु भारत के आकार और क्षमता के अनुपात को देखते हुए अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति की सराहना नहीं की जा सकती है। इस तथ्य को ध्यान में रखकर भारत के नीति निर्माताओं ने वर्ष 2024 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी अपने बजट भाषण के दौरान देश को साल 2024 तक ‘फाइव ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ की अर्थव्यवस्था बनाने की बात कही।

हालांकि बजट के पहले भी हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने कई कार्यक्रमों के दौरान इस लक्ष्य को हासिल करने की बात कही है। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत ने आज़ादी के बाद आर्थिक क्षेत्र में तीव्र वृद्धि नहीं की। इसका नतीजा यह रहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने में 55 सालों का समय लग गया, जबकि इसी दौरान चीन की अर्थव्यवस्था बड़ी तेज़ी से आगे बढ़ी। ऐसे में, आर्थिक क्षमता सीमित होने के चलते अक्सर देश के तमाम क्षेत्रों जैसे रेलवे, सामाजिक क्षेत्र, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर में ज़रूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हो पाए।

सरकार द्वारा उठाये गए मुख्य कदम

  • सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान देते हुए अकेले प्रधानमंत्री आवास योजना में ही 1.95 करोड़ आवासों के निर्माण का लक्ष्य तय किया। साथ ही,होम लोन के ब्याज भुगतान पर 1.5 लाख रुपए की अतिरिक्त कटौती को भी मंज़ूरी दी गई है। ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल के तहत निजी उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये कई एलान किए गए। इसके अलावा, विश्वस्तरीय संस्थानों के निर्माण और ‘खेलो भारत’ योजना के तहत खेल विश्वविद्यालयों की भीस्थापना की जा रही है। सरकार ने एक संप्रभु ऋण बाज़ार की स्थापना का भी ऐलान किया। इसके तहत सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार से कर्ज लेकर देश में निजी निवेश के लिए धन मुहैया करवाएगी। इस प्रकार ब्याज दर में कमी लाने में मदद मिलेगी।
  • इसके अलावा निजी पूंजी निर्माण में मदद करने के लिहाज से सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 70,000 करोड़ रुपए के नए पूंजी निवेश की योजना बनाई है। मौजूदा वक्त में निजी क्षेत्र कर्ज़ के दबाव और पूंजी की कमी की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में, पूंजी निर्माण के लिये सरकार को विदेशी पूंजी को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना होगा।
  • इसलिये सरकार कई क्षेत्रों खासकर बीमा, विमानन और एकल ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। एमएसएमई पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ सरकार ने श्रम सुधार की दिशा में भी कई कदम उठाए हैं। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बल देने के लिहाज से 44 श्रम कानूनों को मिलाकर चार संहिताओं के रूप में बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
  • 400 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले छोटे उद्यमों के लिये कॉर्पोरेट कर को घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार ने रेलवे के आधुनिकीकरण के लिये करीब 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश की ज़रूरत बताई है। इस तरह,रेलवे के संसाधनों में बढ़ोत्तरी के लिये सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) का प्रस्ताव किया गया है।

इस सम्बन्ध में मुख्य चुनौतियाँ

  • जलवायु परिवर्तन ने मॉनसून की रफ्तार को बिगाड़ रखा है जिसका असर भारतीय कृषि को भुगतान पड़ रहा है। साथ ही, भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले सेवा क्षेत्र में हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। भारत का ऊर्जा क्षेत्र मुश्किलों के दौर से गुज़र रहा है तथा इस क्षेत्र को संरचनात्मक स्तर पर सुधार की आवश्यकता है।
  • केंद्र को राज्य सरकारों के साथ मिलकर टैरिफ नीति में सुधार करने की ज़रूरत है ताकि उद्योगों एवं बड़े उपभोक्ताओं को इसका लाभ प्राप्त हो सके, साथ ही कृषि क्षेत्र एवं घरेलू उपभोक्ताओं के लिये टैरिफ की दरों में वृद्धि भी की जानी ज़रूरी है। कृषि क्षेत्र पहले से ही अधिक बिजली उपयोग के कारण सिंचाई संकट से जूझ रहा है। परिवहन के क्षेत्र में भारत में वैश्विक स्तर के इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है, साथ ही अभी भी ग्रामीण एवं दूरदराज़ के क्षेत्र कनेक्टिविटी से दूर हैं।
  • भारत का रेलवे विश्व के कुछ सबसे बड़े रेलवे मार्गों में शामिल है फिर भी इसमें सुधार की आवश्यकता है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि रेलवे के आधुनिकीकरण के लिये लगभग 50 लाख करोड़ रूपए के निवेश की आवश्यकता है। इसी प्रकार उच्च गुणवत्ता के सड़क मार्ग, बंदरगाहों की क्षमता में वृद्धि तथा इनको रेल एवं सड़क के ज़रिये देश के विभिन्न आर्थिक प्रतिष्ठानों से जोड़ना भी ज़रूरी है। इस प्रकार से भारत की परिवहन क्षमता में वृद्धि हो सकेगी जिससे अर्थव्यवस्था तीव्र गति से वृद्धि कर सकेगी।
  • भारत में टेलिकॉम सेक्टर भी कई समस्याओं से जूझ रह है। अन्य देश जहाँ 5G का उपयोग आरंभ कर चुके है भारत में अभी इसके लिये ज़रुरी प्रयास भी नहीं किये जा सके हैं। पहले ही TRAI एवं सरकार की स्पेक्ट्रम और इसकी बेस कीमतों की नीति के कारण टेलिकॉम सेक्टर संघर्ष कर रहा है। भारत नेट परियोजना जो भारत में स्थानीय स्तर तक इंटरनेट सेवा पहुँचाने के लिये आरंभ की गई थी, अभी भी पूर्ण नहीं हो सकी है।

Conclusion :

यह माना जा रहा है कि 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये भारत को GDP के लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि दर की आवश्यकता होगी। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था की गति धीमी हैं, साथ ही इस स्थिति में उच्च आर्थिक वृद्धि दर को प्राप्त करना एक कठिन लक्ष्य साबित हो सकता हैं। लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। लेकिन फिर भी 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना कोई असंभव बात नहीं है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, बेरोज़गारी, आर्थिक असमानता, महिलाओं की स्थिति, कुपोषण, जातिगत भेदभाव, गरीबी जैसे भी कई ज़रूरी मुद्दे हैं जिनको हल करना आवश्यक है। इन समस्याओं को दूर करके ही भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो सकेगा।

Essay On : भारत में धार्मिक सदभाव का महत्व

Introduction :

भारत एक बहु-धार्मिक, बहुभाषी और बहु-नस्लीय देश है और विविधताओं के बीच हमेशा संस्कृति की एकता से घिरा रहा है। यहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग साथ-साथ रहते हैं। भारत हमेशा से ही एकता का प्रतिक माना जाता रहा है एवं एकता ही मानव कल्याण का आधारभूत तत्व है, इसके बिना विश्व शांति का सपना साकार नहीं हो सकता।  भारत किसी धर्म की शिफारिश नहीं करता और न ही यहाँ का कोई राष्ट्रीय धर्म है। भारत उन नागरिकों का घर है जिनकी विभिन् धार्मिक मान्यताय हैं। धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत उन्हें बिना किसी प्रतिबंध के अपने धर्म का प्रचार और प्रसार करने की अनुमति देता है।

यहां धार्मिक विविधता एवं धार्मिक स्वतंत्रता को क़ानून तथा समाज दोनों द्वारा मान्यता प्रदान की गयी है। भारतीय सविधान के अनुच्छेद 25 से 28 में धार्मिक स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार के रूप में उल्लेखित किया गया है। भारत में प्रत्येक नागरिक को किसी भी धर्म को चुनने एवं उनका पालन करने की स्वतंत्रता है। भारत में विभिन्न धार्मिक संप्रदाय के लोग परस्पर मिलजुल कर रहते है जो हमारी सदभावना को दर्शाता है। भारत 1.3 अरब से अधिक लोगों का देश है, जिनमें से अधिकांश हिंदू हैं।  लेकिन हमारे देश में अल्पसंख्यकों की बड़ी आबादी भी है, जिसमें लगभग 21 करोड़ मुसलमान हैं, जो इसे इंडोनेशिया के बाद दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी बनाते वाला देश हैं।

  • यहां लाखों ईसाई, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोग भी हैं। हाल ही में, धार्मिक समुदायों के बीच संघर्ष काफी बढ़ गया है और इन धार्मिक संघर्षों में हजारों लोग मारे गए हैं। ऐसे में अगर आर्थिक स्थिति बिगड़ती है तो सांप्रदायिक मुद्दों का इस्तेमाल देश को बांटने के लिए किया जा सकता है।
  • कट्टरवाद से लड़ने में मीडिया ने सकारात्मक भूमिका निभाई है। लेकिन इस मुद्दे को शांत करने की प्रवृत्ति देखी जाती है। आजकल अखबारों पर ज्यादातर फोकस मनोरंजन, फैशन, व्यावसाय, फिल्मों, उपभोक्ता संस्कृति और खेल पर है।
  • राष्ट्रीय और स्थानीय समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनलों के प्रकाशकों और संपादकों के बीच एक रचनात्मक अभियान उन कहानियों को प्रकाशित करके उत्साह को बनाए रख सकता है जहां धार्मिक सदभाव और भाईचारे को दिखया गया हो। अंतर-धार्मिक आयोजनों की अधिक कवरेज कर के आपसी सहयोग की भावना का विकाश किया जा सकता है।
  • वर्तमान में प्रस्तावित कट्टरवाद विरोधी कानून को लागू करने की समस्याओं या स्कूलों और कॉलेजों के लिए एक अंतर-धार्मिक पाठ्यक्रम के निर्माण से संबंधित मुद्दों पर स्टोरी बनाई जा सकती हैं।
  • विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच प्रभावी संचार चैनलों के माध्यम से संघर्ष समाधान के सबसे महत्वपूर्ण तरीकों में से एक है ताकि अफवाहों को ख़त्म किया जा सके और समस्याओं को बड़ा होने से पहले हल किया जा सके। पुलिस, मीडिया, धार्मिक और सामुदायिक नेताओं के साथ संचार भी महत्वपूर्ण है।
  • स्कूलों और कॉलेजों में सक्रिय भूमिका निभाने और अंतर-धार्मिक शिक्षा शुरू करने का समय आ गया है जो पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देगा ।

Conclusion :

हम वैकल्पिक पाठ्यचर्या सामग्री बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, जो धार्मिक इतिहास के बारे में अधिक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सके, साथ ही सभी धार्मिक परंपराओं के सम्मान को बढ़ावा दे। प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के धर्म का पालन करने का अधिकार है और असहिष्णुता इस अधिकार के लिए खतरा है। समानता, स्वीकृति के साथ, सांप्रदायिक सद्भाव को शामिल करती है। हमें साम्प्रदायिक सद्भाव के महत्व को फैलाना चाहिए और सभी को जागरूक करना चाहिए। धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार हमारी रक्षा करता है, लेकिन साथ ही हमें विभिन्न धर्मों के प्रति सहिष्णुता और सम्मान का निर्माण करना चाहिए। हमारे देश के लिए सांप्रदायिक सद्भाव जरूरी है।

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