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नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी पर निबंध (essay on national recruitment agency in hindi)

Introduction :

भारत सरकार ने राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (एनआरए) नामक एक भर्ती एजेंसी के निर्माण को मंजूरी दी है। यह एक स्वतंत्र एजेंसी है जो विभिन्न सरकारी नौकरियों के लिए सामान्य प्रारंभिक परीक्षा आयोजित करायेगी । प्रारंभिक चरण में, यह एक सामान्य पात्रता परीक्षा (CET) आयोजित करेगा जिससे ग्रुप B और ग्रुप C पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। ये परीक्षाएँ अभी एसएससी, आरआरबी और आईबीपीएस द्वारा आयोजित की जा रही हैं। धीरे-धीरे सभी केंद्र सरकार की भर्ती एजेंसियों को एनआरए के शामिल कर दिया जाएगा । वर्तमान में, सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को विभिन्न पदों के लिए कई भर्ती एजेंसियों द्वारा आयोजित अलग-अलग परीक्षाओं के लिए उपस्थित होना पड़ता है।

लेकिन एनआरए के आगमन के बाद, यह पूरी प्रक्रिया छात्रों और एजेंसियों के लिए और आसान हो जाएगी। एनआरए शुरू में सीईटी परीक्षा आयोजित करेगा। सीईटी स्कोर के आधार पर उम्मीदवार संबंधित एजेंसी में रिक्त पदों के लिए आवेदन कर सकता है। सीईटी टेस्ट 3 स्तरों में आयोजित किया जाएगा और ये स्नातक, उच्च माध्यमिक और मैट्रिक स्तर के हैं। हालांकि, वर्तमान भर्ती एजेंसियां आईबीपीएस, आरआरबी और एसएससी यथावत रहेंगी। सीईटी स्तर पर किए गए परीक्षण के आधार पर, उम्मीदवारों का अंतिम चयन अलग-अलग विशेष परीक्षाओं द्वारा किया जाएगा जो टीयर 2 और टीयर 3 हैं जो संबंधित भर्ती एजेंसियों द्वारा आयोजित किए जाएंगे।

राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी की मुख्य विशेषताएं –

  • एक साल में कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) दो बार आयोजित किया जाएगा.
  • विभिन्न स्तरों पर रिक्तियों पर भर्ती की सुविधा के लिए, स्नातक स्तर, 12 वीं पास और 10 वीं पास वाले उम्‍मीदवारों के लिए अलग से सीईटी का संचालन किया जाएगा.
  • NRA के तहत, एक बड़ा बदलाव यह होगा कि सीईटी 12 प्रमुख भारतीय भाषाओं में आयोजित किया जाएगा. जैसा कि हम जानते हैं कि केंद्र सरकार की नौकरियों में भर्ती केवल अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं में होती है.
  • शुरुआत में CET तीन एजेंसियों के लिए कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सेलेक्शन भर्तियों को कवर करेंगे. इसका विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा.
  • वर्तमान में प्रचलित शहरी पूर्वाग्रह को दूर करने के लिए, CET पूरे भारत में लगभग 1000 केंद्रों में आयोजित की जाएगी. परीक्षा केंद्र देश के हर जिले में होगा. आकांक्षी जिलों में परीक्षा संरचना बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जिससे आगे चलकर उम्मीदवारों को अपने निवास स्थान के निकट परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचने में मदद मिलेगी.
  • – उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए, CET प्रथम स्तर की परीक्षा होगी और CET का स्कोर तीन वर्षों के लिए वैध होगा.
  • – NRA के तहत, CET ऊपरी आयु सीमा के अध्यधीन होगी उम्‍मीदवारों द्वारा सीईटी में भाग लेने के लिए अवसरों की संख्‍या पर कोई सीमा नहीं होगी. सरकार की मौजूदा नीति के अनुसार अजा/अजजा/अपिव तथा अन्‍य श्रेणियों के उम्‍मीदवारों को ऊपरी आयु-सीमा में छूट दी जाएगी.

राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी – छात्रों के लिए लाभ –

  • यह विभिन्न परीक्षाओं में उपस्थित होने की परेशानी को दूर करेगा.
  • यह वित्तीय बोझ को भी कम करेगा जो एकल परीक्षा शुल्क के माध्यम से कई परीक्षाओं में लगाया जाता है.
  • यह उम्मीदवारों के लिए यात्रा के समय, रहने की लागत इत्यादि को भी बचाएगा, क्योंकि परीक्षा हर जिले में आयोजित की जाएगी. यह अधिक महिला उम्मीदवारों को परीक्षा में उपस्थित होने या सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा.
  • आवेदकों को एकल पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकरण करना आवश्यक होगा.
  • – NRA के तहत परीक्षा की तारीखों में क्लैश होने के बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं होगी.

राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी से संस्थानों को लाभ –

  • यह उम्मीदवारों की प्रारंभिक या स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित करने की परेशानी को दूर करेगा.
  • यह भर्ती चक्र को भी काफी कम करेगा.
  • यह परीक्षा के पैटर्न में मानकीकरण (standardization) भी लाएगा.
  • यह विभिन्न भर्ती एजेंसियों की लागत को भी कम करेगा जिससे लगभग रु 600 करोड़ की बचत होने की उम्मीद है.

राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी की आवश्यकता –

  • वर्तमान में, सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को पात्रता के समान शर्तों वाले विभिन्न पदों के लिये अलग-अलग भर्ती एजेंसियों द्वारा संचालित भिन्न-भिन्न परीक्षाओं में सम्मिलित होना पड़ता है.
  • जिसके कारण उम्मीदवारों को अलग-अलग एजेंसियों के अलग-अलग शुल्क का भुगतान करना पड़ता है और साथ ही उम्मीदवारों को परीक्षा में हिस्सा लेने के लिये लंबी दूरी भी तय करनी पड़ती है, इससे उम्मीदवारों पर आर्थिक बोझ काफी हद तक बढ़ जाता है।
  • इसके अलावा अलग-अलग भर्ती परीक्षाएँ उम्मीदवारों के साथ-साथ परीक्षाओं का आयोजन करने वाली एजेंसियों पर भी कार्य के बोझ को बढ़ा देती हैं, जिसमें बार-बार होने वाला खर्च, सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा केंद्रों से संबंधित मुद्दे शामिल हैं।
  • आँकड़ों के अनुसार, भारत में प्रत्येक वर्ष लगभग 1.25 लाख सरकारी नौकरियों का विज्ञापन किया जाता है, जिनमें तकरीबन 2.5 करोड़ उम्मीदवार शामिल होते हैं।

Conclusion :

उम्मीदवारो का सीईटी परीक्षा का स्कोर, परिणाम की घोषणा की तारीख से तीन साल के लिए वैध होगा। सीईटी परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवार द्वारा किए जाने वाले प्रयासों की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं है। एनआरए समय की जरूरत है, क्योंकि उम्मीदवारों को अलग-अलग एजेंसियों द्वारा संचालित परीक्षाओं में सम्मिलित होना पड़ता है, जिसके कारण उनको इन एजेंसियों को कई बार शुल्क का भुगतान भी करना पड़ता है और साथ ही उम्मीदवारों को परीक्षा में हिस्सा लेने के लिये लंबी दूरी भी तय करनी पड़ती है, इससे उम्मीदवारों पर आर्थिक बोझ काफी अधिक बढ़ जाता है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर निबंध

Introduction :

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को देश की शिक्षा प्रणाली में समयनुसार उचित बदलाव करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी गई। यह नीति देश में स्कूल और उच्च शिक्षा प्रणालियों में परिवर्तनकारी सुधार लेन में बहुत मददगार साबित होगी। यह 21 वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है। नई नीति का उद्देश्य 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100% सकल नामांकन अनुपात (GER) के साथ पूर्व-माध्यमिक से माध्यमिक स्तर तक शिक्षा का सार्वभौमिकरण करना है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा कुछ नए बदलाव लाये गए है, जिसमें भारतीय उच्च शिक्षा को विदेशी विश्वविद्यालयों में बढ़ावा देना, चार-वर्षीय बहु-विषयक स्नातक कार्यक्रम के लिए कई निकास विकल्पों के साथ प्रस्तुत करना शामिल है। इस  नई नीति का उद्देश्य भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है। स्कूली शिक्षा में, इस नीति में पाठ्यक्रम को ओवरहाल करने, पाठ्यक्रम में कमी लाने और अनुभवात्मक शिक्षा पर जोर देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

स्कूल में वर्तमान 10 + 2 प्रणाली को एक नयी  5 + 3 + 3 + 4 पाठ्यक्रम प्रणाली से बदल दिया जाएगा। नई नीति के अनुसार, तीन साल की आंगनवाड़ी / प्री-स्कूलिंग के साथ 12 साल की स्कूली शिक्षा होगी। स्कूल और उच्च शिक्षा में, छात्रों के लिए एक विकल्प के रूप में संस्कृत को भी सभी स्तरों पर शामिल किया जाएगा। यह नीति औपचारिक स्कूली शिक्षा के दायरे में प्री-स्कूलिंग को शामिल करेगी ।

National Education Policy 2021 के विशेषताएं –

  • मानव संसाधन प्रबंधन मंत्रालय अब शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा।
  • National Education Policy के अंतर्गत शिक्षा का सार्वभौमीकरण किया जाएगा जिसमें मेडिकल और लॉ की पढ़ाई शामिल नहीं की गई है।
  • पहले 10+2 का पैटर्न फॉलो किया जाता था परंतु अब नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के अंतर्गत 5+3+3+4 का पैटर्न फॉलो किया जाएगा। जिसमें 12 साल की स्कूली शिक्षा होगी और 3 साल की प्री स्कूली शिक्षा होगी।
  • छठी कक्षा से व्यवसायिक परीक्षण इंटर्नशिप आरंभ कर दी जाएगी।
  • पांचवी कक्षा तक शिक्षा मातृभाषा या फिर क्षेत्रीय भाषा में प्रदान की जाएगी।
  • पहले साइंस, कॉमर्स तथा अर्ट स्ट्रीम होती थी। अब ऐसी कोई भी स्ट्रीम नहीं होगी। छात्र अपनी इच्छा अनुसार विषय चुन सकते हैं। छात्र फिजिक्स के साथ अकाउंट या फिर आर्ट्स का कोई सब्जेक्ट भी पढ़ सकते हैं।
  • छात्रों को छठी कक्षा से कोडिंग सिखाई जाएगी।
  • सभी स्कूल डिजिटल इक्विप्ड किए जाएंगे।
  • सभी प्रकार की इकॉन्टेंट को क्षेत्रीय भाषा में ट्रांसलेट किया जाएगा।
  • वर्चुअल लैब डिवेलप की जाएंगी।

नई शिक्षा नीति 2020 के सिद्धांत –

  • प्रत्येक बच्चे की क्षमता की पहचान एवं क्षमता का विकास करना
  • साक्षरता एवं संख्यामकता के ज्ञान को बच्चों के अंतर्गत विकसित करना
  • शिक्षा को लचीला बनाना
  • एक सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली में निवेश करना
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को विकसित करना
  • बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ना
  • उत्कृष्ट स्तर पर शोध करना
  • बच्चों को सुशासन सिखाना एवं सशक्तिकरण करना
  • शिक्षा नीति को पारदर्शी बनाना
  • तकनीकी यथासंभव उपयोग पर जोर
  • मूल्यांकन पर जोर देना
  • विभिन्न प्रकार की भाषाएं सिखाना
  • बच्चों की सोच को रचनात्मक एवं तार्किक करना

नई शिक्षा नीति 2020 के फायदे –

  • नई शिक्षा नीति शिक्षार्थियों के एकीकृत विकास पर केंद्रित है।
  • यह 10+2 सिस्टम को 5+3+3+4 संरचना के साथ बदल देता है, जिसमें 12 साल की स्कूली शिक्षा और 3 साल की प्री-स्कूलिंग होती है, इस प्रकार बच्चों को पहले चरण में स्कूली शिक्षा का अनुभव होता है।
  • परीक्षाएं केवल 3, 5 और 8वीं कक्षा में आयोजित की जाएंगी, अन्य कक्षाओं का परिणाम नियमित मूल्यांकन के तौर पर लिए जाएंगे। बोर्ड परीक्षा को भी आसान बनाया जाएगा और एक वर्ष में दो बार आयोजित किया जाएगा ताकि प्रत्येक बच्चे को दो मौका मिलें।
  • नीति में पाठ्यक्रम से बाहर निकलने के अधिक लचीलेपन के साथ स्नातक कार्यक्रमों के लिए एक बहु-अनुशासनात्मक और एकीकृत दृष्टिकोण की परिकल्पना की गई है।
  • राज्य और केंद्र सरकार दोनों शिक्षा के लिए जनता द्वारा अधिक से अधिक सार्वजनिक निवेश की दिशा में एक साथ काम करेंगे, और जल्द से जल्द जीडीपी को 6% तक बढ़ाएंगे।
  • नई शिक्षा नीति सीखने के लिए पुस्तकों का भोझ बढ़ाने के बजाय व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ाने पर ज्यादा केंद्रित है।
  • एनईपी यानी नई शिक्षा निति सामान्य बातचीत, समूह चर्चा और तर्क द्वारा बच्चों के विकास और उनके सीखने की अनुमति देता है।
  • एनटीए राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालयों के लिए एक आम प्रवेश परीक्षा आयोजित करेगा।
  • छात्रों को पाठ्यक्रम के विषयों के साथ-साथ सीखने की इच्छा रखने वाले पाठ्यक्रम का चयन करने की भी स्वतंत्रता होगी, इस तरह से कौशल विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
  • सरकार एनआरएफ (नेशनल रिसर्च फाउंडेशन) की स्थापना करके विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर अनुसंधान और नवाचारों के नए तरीके स्थापित करेगी।

नई शिक्षा नीति 2020 के नुकसान –

  • भाषा का कार्यान्वयन यानि क्षेत्रीय भाषाओं में जारी रखने के लिए 5वीं कक्षा तक पढ़ाना एक बड़ी समस्या हो सकती है। बच्चे को क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाया जाएगा और इसलिए अंग्रेजी भाषा के प्रति कम दृष्टिकोण होगा, जो 5वीं कक्षा पूरा करने के बाद आवश्यक है।
  • बच्चों को संरचनात्मक तरीके से सीखने के अधीन किया गया है, जिससे उनके छोटे दिमाग पर बोझ बढ़ सकता है।

Conclusion :

नेशनल एजुकेशन पालिसी का मुख्य उद्देश्य भारत मैं प्रदान की जाने वाली शिक्षा को वैश्विक स्तर पर लाना है। जिससे कि भारत एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बन सके। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के माध्यम से शिक्षा का सार्वभौमीकरण किया जाएगा। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2021 में सरकार के माध्यम से पुरानी एजुकेशन पॉलिसी में काफी सारे संशोधन किए हैं। जिससे कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा और बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर पाएंगे। मिड दे मील कार्यक्रम को प्री-स्कूल बच्चों तक बढ़ाया जाएगा। यह नीति यह भी प्रस्तावित करती है कि सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को 2040 तक बहु-विषयक बनने का लक्ष्य रखना होगा। यह नीति देश में रोजगार के अवसरो को बढ़ावा देगी और हमारी शैक्षिक प्रणाली को मौलिक रूप से बदल देगी।

शिक्षा में यात्रा का महत्व

Introduction :

“दुनिया एक किताब है, और जो लोग यात्रा नहीं करते वे केवल इसका एक पन्नाही पढ़ते हैं।” यह एक प्रसिद्ध कहावत है। यात्रा हमें किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज से अधिक सिखा सकती है। जब हम यात्रा करते हैं तो हम जिस देश की यात्रा करते हैं उसकी संस्कृति के बारे में सीखते हैं। यात्रा हमें एक सुखद अनुभव प्रदान करती हैं। ज्यादातर लोग, यात्रा के बाद, एक नए दृष्टिकोण, नए उत्साह और एक बेहतर दृढ़ संकल्प के साथ घर लौटते हैं। यात्रा के माध्यम से हमें  बहुत सी नई चीजों का ज्ञान प्राप्त होता है। हमें यात्रा से किसी विशेष समुदाय के लोगो के रहने के तरीके, सामाजिक जीवन, कृषि, पूजा, मान्यताओं, कला रूपों आदि के बारे में पता चलता है। 

छात्रों के लिए भी यात्रा का एक विशेष महत्व है। जब हम विभिन्न स्थानों पर जाते हैं, तो पाठ्यपुस्तकों में सीखी जाने वाली कई चीजें व्यावहारिक रूप से समझी जा सकती हैं। यात्रा एक व्यक्ति को उनके सभी साधारण सुखों और आराम से दूर, उनके आराम क्षेत्र से बाहर ले जाती है। यह हमें साहसी बनने, जीवन को पूर्ण रूप से जीने और समय का उपयोग करने के लिए नई चीजों की खोज करने और नए लोगों से मिलने के लिए मजबूर करता है। इसमें हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की क्षमता है।

  • शिक्षा किसी भी बड़ी पारिवारिक, सामाजिक और यहाँ तक कि राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं को भी हर करने की क्षमता प्रदान करती है। हम से कोई भी जीवन के हरेक पहलू में शिक्षा के महत्व को अनदेखा नहीं कर सकता। यह मस्तिष्क को सकारात्मक ओर मोड़ती है और सभी मानसिक और नकारात्मक विचारधाराओं को हटाती है।
  • यह लोगों की सोच को सकारात्मक विचार लाकर बदलती है और नकारात्मक विचारों को हटाती है। बचपन में ही हमारे माता-पिता हमारे मस्तिष्क को शिक्षा की ओर ले जाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्था में हमारा दाखिला कराकर हमें अच्छी शिक्षा प्रदान करने का हरसंभव प्रयास करते हैं।
  • यह हमें तकनीकी और उच्च कौशल वाले ज्ञान के साथ ही पूरे संसार में हमारे विचारों को विकसित करने की क्षमता प्रदान करती है। अपने कौशल और ज्ञान को बढ़ाने का सबसे अच्छे तरीके अखबारों को पढ़ना, टीवी पर ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों को देखना, अच्छे लेखकों की किताबें पढ़ना आदि हैं। शिक्षा हमें अधिक सभ्य और बेहतर शिक्षित बनाती है। यह समाज में बेहतर पद और नौकरी में कल्पना की गए पद को प्राप्त करने में हमारी मदद करती है।
  • आधुनिक तकनीकी संसार में शिक्षा मुख्य भूमिका को निभाती है। आजकल, शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए बहुत तरीके हैं। शिक्षा का पूरा तंत्र अब बदल दिया गया है। हम अब 12वीं कक्षा के बाद दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम (डिस्टेंस एजूकेशन) के माध्यम से भी नौकरी के साथ ही पढ़ाई भी कर सकते हैं।
  • शिक्षा बहुत महंगी नहीं है, कोई भी कम धन होने के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रख सकता है। दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से हम आसानी से किसी भी बड़े और प्रसिद्ध विश्वविद्यालय में बहुत कम शुल्क पर प्रवेश ले सकते हैं। अन्य छोटे संस्थान भी किसी विशेष क्षेत्र में कौशल को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
  • पहले, शिक्षा प्रणाली बहुत ही महंगी और कठिन थी, गरीब लोग 12वीं कक्षा के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम नहीं थे। समाज में लोगों के बीच बहुत अन्तर और असमानता थी। उच्च जाति के लोग, अच्छे से शिक्षा प्राप्त करते थे और निम्न जाति के लोगों को स्कूल या कालेज में शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति नहीं थी।
  • यद्यपि, अब शिक्षा की पूरी प्रक्रिया और विषय में बड़े स्तर पर परिवर्तन किए गए हैं। इस विषय में भारत सरकार के द्वारा सभी के लिए शिक्षा प्रणाली को सुगम और कम महंगी करने के लिए बहुत से नियम और कानून लागू किये गये हैं।
  • सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण, दूरस्थ शिक्षा प्रणाली ने उच्च शिक्षा को सस्ता और सुगम बनाया है, ताकि पिछड़े क्षेत्रों, गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए भविष्य में समान शिक्षा और सफलता प्राप्त करने के अवसर मिलें।
  • भलीभाँति शिक्षित व्यक्ति एक देश के मजबूत आधार स्तम्भ होते हैं और भविष्य में इसको आगे ले जाने में सहयोग करते हैं। इस तरह, शिक्षा वो उपकरण है, जो जीवन, समाज और राष्ट्र में सभी असंभव स्थितियों को संभव बनाती है।
  • शिक्षा हम सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक उपकरण है। हम जीवन में शिक्षा के इस उपकरण का प्रयोग करके कुछ भी अच्छा प्राप्त कर सकते हैं। शिक्षा का उच्च स्तर लोगों को सामाजिक और पारिवारिक आदर और एक अलग पहचान बनाने में मदद करता है।
  • शिक्षा का समय सभी के लिए सामाजिक और व्यक्तिगत रुप से बहुत महत्वपूर्ण समय होता है। यह एक व्यक्ति को जीवन में एक अलग स्तर और अच्छाई की भावना को विकसित करती है। शिक्षा किसी भी बड़ी पारिवारिक, सामाजिक और यहाँ तक कि राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं को भी हर करने की क्षमता प्रदान करती है।
  • हम से कोई भी जीवन के हरेक पहलू में शिक्षा के महत्व को अनदेखा नहीं कर सकता। यह मस्तिष्क को सकारात्मक ओर मोड़ती है और सभी मानसिक और नकारात्मक विचारधाराओं को हटाती है।

Conclusion :

शिक्षा लोगों के मस्तिष्क को बड़े स्तर पर विकसित करने का कार्य करती है तथा इसके साथ ही यह समाज में लोगों के बीच के सभी भेदभावों को हटाने में भी सहायता करती है। यह हमें अच्छा अध्ययन कर्ता बनने में मदद करती है और जीवन के हर पहलू को समझने के लिए सूझ-बूझ को विकसित करती है। यह सभी मानव अधिकारों, सामाजिक अधिकारों, देश के प्रति कर्तव्यों और दायित्वों को समझने में हमारी सहायता करती है। नैनीताल, दार्जिलिंग, पंचमढ़ी, ऊटी आदि स्थानों की यात्रा से हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत प्रभाव पड़ता है। यह हमारे मानसिक ज्ञान को बढ़ा देता है और हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, यात्रा हमारी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन उद्योग के विकास को भी बढ़ावा देती है। यात्रा किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए सही मनोरंजन है।

भारत में विज्ञान और तकनीकी विकास

Introduction :

भारत दुनिया में एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। एक तेजी से विकासशील राष्ट्र होने के नाते, देश विज्ञान और प्रौद्योगिकी के मामले में एक उज्ज्वल भविष्य हासिल करने के लिए बाधाओं के माध्यम से अपना रास्ता बना रहा है। भारतीय समाज प्रौद्योगिकी को अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन में स्वीकार करने के लिए काफी उत्सुक है। आधुनिक युग विज्ञान, प्रौद्योगिकी, ज्ञान और सूचना का युग है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए-नए आविष्कार किये जा रहे है, जिससे हमारा देश दुनिया भर में सुर्खियों में है। आधुनिक गैजेट जीवन के हर क्षेत्र में प्रयोग किए जा रहे हैं, जिससे जीवन आसान और कई समस्याएं हल हो जाती हैं।

आज प्रौद्योगिकी का विकास देश के लगभग सभी क्षेत्रों जैसे कि शिक्षा, बुनियादी ढाँचा, बिजली, विमानन, चिकित्सा, सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में बहुत तेजी से हो रहा है। वे अच्छी तरह से सुसज्जित हैं और राष्ट्र के लोगों को सुरक्षित करने के लिए कार्यरत हैं। लेकिन इस क्षेत्र में सन्तुस्टि के लिए कोई जगह नहीं है और हम अभी तक एक विकासशील देश बने हैं। कृषि के क्षेत्र में, हमारे वैज्ञानिक और तकनीकी शोधों ने हमें खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर होने में सक्षम बनाया है। रक्षा के क्षेत्र में भी हमारी उपलब्धियां काफी प्रशंसनीय रही हैं। पृथ्वी और नाग जैसी मिसाइलों का सफल उत्पादन हमारे वैज्ञानिकों की उच्च क्षमताओं और उपलब्धियों की गवाही देता है।

विज्ञान और तकनीकी का हमारे जीवन में प्रभाव –

  • जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हम विज्ञान और तकनीकी के समय में रह रहे हैं. हम सभी का जीवन वैज्ञानिक अविष्कारों और आधुनिक समय की तकनीकियों पर बहुत अधिक निर्भर है. विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने लोगों के जीवन को बड़े स्तर पर प्रभावित किया है इसने जीवन को आसान, सरल और तेज बना दिया है.
  • नए युग में, विज्ञान का विकास बैलगाड़ी के युग को समाप्त करके मोटर चलित वाहनों की प्रवृत्ति लाने के लिए बहुत अधिक आवश्यक हो गया है. विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधुनिकीकरण के हर पहलू को प्रत्येक राष्ट्र में लागू किया गया है.
  • जीवन के हर एक क्षेत्र को सही ढ़ंग से संचालित करने और लगभग सभी समस्याओं को सुलझाने के लिए आधुनिक उपकरणों की खोज की गई है.
  • इसे चिकित्सा, शिक्षा, बुनियादी ढांचा, उर्जा निर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में लागू किए बिना सभी लाभों को प्राप्त करना संभव नहीं था.
  • हमने अपने दैनिक जीवन में जो कुछ भी सुधार देखे हैं, वो सब केवल विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास के कारण है. देश के उचित विकास और वृद्धि के लिए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी का साथ-साथ चलना बहुत आवश्यक है.
  • गाँव अब कस्बों के रुप में और कस्बें शहरों के रुप में विकसित हो रहे हैं और इस प्रकार से अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में भी विकास हुआ है. हमारा देश भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी की दृष्टि से तेजी से विकास करता हुआ देश है.

विज्ञान और तकनीकी का जीवनशैली पर लागू होना –

  • विज्ञान और तकनीकी का लोगों के जीवन में लागू करना बहुत ही पुराना तरीका है, जो सिंधु घाटी सभ्यता के समय से प्रचलन में है. यह पाया गया है कि आग और पहिये की खोज करने के लिए लगभग पाँच अविष्कार किए गए थे. दोनों ही अविष्कारों को वर्तमान समय के सभी तकनीकी अविष्कारों का जनक कहा जाता है.
  • आग के अविष्कार के माध्यम से लोगों ने ऊर्जां की शक्ति के बारे में पहली बार जाना था. तभी से, लोगों में रुचि बढ़ी और उन्होंने जीवन-शैली को सरल और आसान बनाने के लिए बहुत से साधनों पर शोध के और अधिक कठिन प्रयास करने शुरु कर दिए
  • भारत प्राचीन समय से ही पूरे संसार में सबसे अधिक प्रसिद्ध देश है हालांकि, इसकी गुलामी के बाद, इसने अपनी पहचान और ताकत को खो दिया था. 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद, इसने भीड़ में अपनी खोई हुई ताकत और पहचान को दुबारा से प्राप्त करना शुरु कर दिया है.
  • वो विज्ञान और प्रौद्योगिकी ही थे, जिन्होंने पूरे विश्व में भारत को अपनी वास्तविक पहचान को प्रदान किया है. भारत अब विज्ञान और उन्नत तकनीकी के क्षेत्र में अपने नए अविष्कारों के माध्यम से तेजी से विकास करने वाला देश बन गया है. विज्ञान और तकनीकी आधुनिक लोगों की आवश्यकता और जरुरतों को पूरा करने के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
  • तकनीकी में उन्नति के कुछ उदाहरण, रेलवे प्रणाली की स्थापना, मैट्रो की स्थापना, रेलवे आरक्षण प्रणाली, इंटरनेट, सुपर कम्प्यूटर, मोबाइल, स्मार्ट फोन, लगभग सभी क्षेत्रों में लोगों की ऑलाइन पहुँच आदि है. भारत की सरकार बेहतर तकनीकी विकास के साथ ही देश में विकास के लिए अंतरिक्ष संगठन और कई शैक्षणिक संस्थाओं में अधिक अवसरों का निर्माण कर रही है.

Conclusion :

भारत के कुछ प्रसिद्ध वैज्ञानिक जिन्होंने भारत में विभिन्न क्षेत्रों में अपने उल्लेखनीय वैज्ञानिक शोध के माध्यम से तकनीकी उन्नति को संभव बना दिया उनमें से कुछ सर जे.सी. बोस, एस.एन. बोस, सी.वी. रमन, डॉ. होमी जे. भाभा, श्रीनिवास रामानुजन, परमाणु ऊर्जा के जनक डॉ. हर गोबिंद सिंह खुराना, विक्रम साराभाई आदि है. हम अपने स्वदेशी टैंकों के लिए आवश्यक नाइट-विज़न उपकरणों का निर्माण करने में सफल रहे हैं। प्रौद्योगिकी का उपयोग राष्ट्रीय विकास के लिए प्रभावी रूप से किया गया है और अभी तक इसके लाभ को जनता तक पहुंचाने के लिए बहुत कुछ हासिल किया जाना है।

शिक्षा का अधिकार पर निबंध

Introduction :

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शिक्षा का बड़ा महत्व हैं,शिक्षा को जीवन का आधार माना गया हैं। किसी भी देश के आधुनिक या विकसित होने का प्रमाण उस देश के नागरिकों के शिक्षा स्तर पर निर्भर करता हैं। आधुनिक समय में शिक्षा को ही किसी राष्ट्र या समाज की प्रगति का सूचक समझा जाता हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम संसद का एक अधिनियम है जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 ए के तहत भारत में 6 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए नि: शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के महत्व का वर्णन करता है। यह अधिनियम 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ। इस अधिनियम की खास बात यह है कि गरीब परिवार के वे बच्चे, जो प्राथमिक शिक्षा से वंचित हैं, के लिए निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान रखा गया है ।

शिक्षा के अधिकार के साथ बच्चों एवं युवाओं का विकास होता है तथा राष्ट्र शक्तिशाली एवं समृद्ध बनता है । यह उत्तरदायी एवं सक्रिय नागरिक बनाने में भी सहायक है । इसमें देश के सभी लोगों, अभिभावकों एवं शिक्षकों का भी सहयोग आवश्यक है । इस कानून के लागू करने पर आने वाले खर्च केंद्र (55 प्रतिशत) और राज्य सरकार (45 प्रतिशत) मिलकर उठाएंगे।

  • आज विश्व के सभी राष्ट्रों द्वारा भारतीय युवाओं की प्रतिमा का मुक्त कण्ठ से गुणगान किया जाना इसका प्रमाण है । बावजूद इसके सम्पूर्ण राष्ट्र की शिक्षा को आधार मानकर विश्लेषण किया जाए तो अभी भी भारत शिक्षा के क्षेत्र में विकसित राष्ट्रों की तुलना में काफी पीछे है ।
  • वर्तमान में भारतीय शिक्षा दर अनुमानतः 74% है, जो वैश्विक स्तर पर बहुत कम है । तब इस अनुपात में और वृद्धि करने के लिए बुद्धिजीवियों ने अपने-अपने सुझाव दिए ।
  • उन सभी के सुझावों पर गौर अते हुए भारत सरकर ने शिक्षा को अनिवार्य रूप से लागू करने हेतु शिक्षा का अधिकार कानून (RTE Act) बनाकर पूरे देश में समान रूप से प्रस्तुत कर दिया ।
  • ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’, 1 अप्रैल, 2010 से सम्पूर्ण भारत में लागू कर दिया गया । इसका प्रमुख उद्देश्य है- वर्ष आयु तक के सभी बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य, गुणवतायुक्त शिक्षा को सुनिश्चित करना । इस अधिनियम को सर्व शिक्षा अभियान तथा वर्ष 2005 के विधेयक का ही संशोधित रूप कहा जाए, तो समीचीन ही होगा ।
  • क्षेत्रीय सरकारों, अधिकारियों तथा अभिभावकों का यह दायित्व है कि वे बच्चे को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा दिलाने का प्रबन्ध करें । इस कार्य हेतु वित्तीय प्रबन्धन का पूर्ण दायित्व केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा मिश्रित रूप से उठाया जाएगा । कोई भी बच्चा किसी समय विद्यालय में प्रवेश पाने को स्वतन्त्र है ।
  • आयु प्रमाण-पत्र न होने के बावजूद, बच्चा विद्यालय में प्रवेश ले सकता है । बच्चों की आवश्यकता का ध्यान रखते हुए पुस्तकालय, खेल के मैदान, स्वच्छ व मजबूत विद्यालय कक्ष, इमारत आदि का प्रबन्ध राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा ।
  • शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार हेतु 35 छात्रों पर एक शिक्षक का प्रावधान किया गया है तथा साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि ग्रामीण ब शहरी किसी भी क्षेत्र में यह अनुपात प्रभावित न हो। 
  • इसके साथ ही अध्यापन की गुणवत्ता हेतु केवल प्रशिक्षित अध्यापकों को ही नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है जो अप्रशिक्षित अध्यापक, प्राचीन समय से अध्यापनरत हैं, उन्हें सीमित अवधि में अध्यापक-प्रशिक्षण पूर्ण करने का आदेश पारित किया गया है, अन्यथा उन्हें पद-मुक्त किया जा सकता हे।

इसके अतिरिक्त निम्न कार्यों का पूर्ण रूप से निषेध है –

  • छात्रों को शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना देना ।
  • प्रवेश के दौरान छात्रों से कोई लिखित परीक्षा लेना ।
  • छात्रों या उनके अभिभावकों से किसी प्रकार का शुल्क लेना।
  • छात्रों को ट्‌यूशन पढ़ने के लिए बाध्य करना ।
  • बिना मान्यता प्राप्ति के विद्यालय का संचालन करना ।
  • इसी प्रकार निजी विद्यालयों में भी कक्षा 1 से प्रवेश के समय आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के छात्रों हेतु 25% आरक्षण का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है ।
  • इस अधिनियम को प्रभावी बनाने का उत्तरदायित्व केन्द्र ब राज्य सरकार दोनों का है, जिसका वित्तीय बहन भी दोनों संयुक्त रूप से करेंगे ।
  • इस अधिनियम के अनुसार, वित्तीय बहन का दायित्व सर्वप्रथम राज्य सरकार को सौंपा गया था, परन्तु राज्य सरकार ने अपनी विवशता का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया तथा केन्द्र सरकार से मदद का अनुरोध किया, तदुपरान्त केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा

65:36 अनुपात के तहत वित्तीय प्रबन्धन का विभाजन किया गया । उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह अनुपात 90:10 है।

केन्द्र सरकार के दायित्व –

(i) बच्चों का चहुँमुखी विकास ।

(ii) संवैधानिक मूल्यों का विकास ।

(iii) जहाँ तक हो सके, मातृभाषा में शिक्षण दिया जाए ।

(iv) बच्चों के मानसिक बिकास के अनुरूप, उनका नियमित विश्लेषण । (धारा-29 के अन्तर्गत)

(v) बच्चों को भयमुक्त माहौल प्रदान कराना तथा अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का विकास करना ।

राज्य सरकार के दायित्व:

(i) वह प्रत्येक बच्चे को नि:शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगी ।

(ii) अपने क्षेत्र के 14 वर्ष आयु तक के बच्चों का पूर्ण रिकॉर्ड रखेगी ।

(iii) शैक्षणिक कलेण्डर का निर्धारण करेगी (धारा-9 के अन्तर्गत)।

Conclusion :

सर्व शिक्षा अभियान द्वारा पारित लक्ष्य वर्ष 2010 तक पूर्ण न हो पाया था, इसके अतिरिक्त यह अधिनियम भी लागू कर दिया गया । अतः यह कहना समीचीन ही होगा कि इस अधिनियम में सर्व शिक्षा अभियान के सभी नियम समाहित है । अधिनियम शिक्षा को 6 से 14 वर्ष की आयु के बीच हर बच्चे का मौलिक अधिकार बनाता है। अब भारत में 74% आबादी साक्षर है जिसमें पुरुषों में 80% और महिला 65% शामिल हैं। यह शिक्षा का मौलिक अधिकार 6 से 14 वर्षो के बालक-बालिकाओं के लिए निशुल्क और गुणवतापूर्ण शिक्षा की सहायता से उन्हें समान रूप से शिक्षा और रोजगार के समान अवसरों की उपलब्धता सुनिश्चित करवाएगा, इससे हमारा भारत शिक्षित और विकसित बनेगा।

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Abhilash Kumar

The author Abhilash Kumar

Abhilash Kumar is the founder of “Studyguru Pathshala” brand & its products, i.e. YouTube, Books, PDF eBooks etc. He is one of the most successful bloggers in India. He is the author of India’s the best seller “Descriptive Book”. As a social activist, he has distributed his books to millions of deprived and needy students.

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