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मोबाइल एडिक्शन पर निबंध (essay on mobile addiction in hindi)

Introduction :

मोबाइल की लत आजकल हमारे समाज में एक चिंता का विषय बन चूका है। मोबाइल फोन की लत पड़ना जितना आसान है, इससे छुटकारा पाना उतना ही मुश्किल। दुनिया भर में लाखो लोग मोबाइल फोन के आदी हो चुके हैं। मोबाइल फ़ोन हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चूका है, इसके आभाव में हमारे अनेकों काम रुक जाते हैं। जब कोई व्यक्ति खुद को अपने मोबाइल से दूर नहीं रख पाता, इस स्थिति को मोबाइल की लत कहते हैं। मोबाइल फोन का आविष्कार हमें सशक्त बनाने के लिए किया गया था, लेकिन अब यह हम पर हावी होने लगा है।

इसके माध्यम से हम दुनिया भर में किसी से भी बात कर सकते है। यह हमें उन सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने में सक्षम बनाता है जिनकी हमें आवश्यकता है और मनोरंजन का एक बड़ा स्रोत भी है। स्मार्ट फोन हमें गेम खेलने, पढाई करने और ऑनलाइन शॉपिंग करने में सक्षम बनाता हैं। यह हमें फिल्में देखने, फ़ोटो खींचने, संगीत सुनने, इंटरनेट पर सर्फ करने और विभिन्न अन्य गतिविधियों का आनंद लेने में सक्षम बनाता है। अत्यधिक उपयोगिता के कारण हमें इसकी लत लगती जा रही है जो हमारे लिए हानिकारक हो सकता है।

मोबाइल की लत कई गंभीर समस्याओं का मुख्य कारण बन सकती है, जैसे व्यक्ति में चिड़चीड़ापन का होना, हमेशा सिर दर्द की समस्या, नेत्र संबंधित समस्या, अनिंद्रा व मोबाइल के हानिकार रेडिएशन से कई अन्य तरह के रोग भी हो सकते हैं। मोबाइल की लत का एक और संकेत समय की हानि है। वह व्यक्ति जो मोबाइल फोन का आदी है, उसको समय का पता ही नहीं रहता। वह अपना कोई भी कार्य समय पर समाप्त नहीं कर पता। मोबाइल फोन की आदत से छुटकारा पाना मुश्किल हो सकता है लेकिन असंभव नहीं।

  • अपनो से जोड़ना’ कहां मोबाइल की परिभाषा के रूप में पढ़ा जाता था। आज अपनों से दूरी का मुख्य कारण मोबाइल है। व्यक्ति एक रूम में एक साथ होने के बाद भी पास बैठे लोगों में अपनी कोई रुचि नहीं दिखाता और अपने-अपने मोबाइल के स्क्रीन स्क्रोल करता रहता है। इससे आपसी संबंध कमज़ोर होते हैं।
  • मोबाइल के लगातार इस्तेमाल से उससे निकलने वाली हानिकारक रेडिएशन से हमें हृदय संबंधी रोग हो सकते है। इसके अलावां आँखों के रौशनी पर भी गहरा असर पड़ता है। साथ ही सिर दर्द, नींद न आना, चिड़चीड़ापन, याददाश्त का कमज़ोर होना अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं हो सकते हैं।
  • बेशक टेकनॉलजी के माध्यम से हम विकास की ओर बढ़ पाते है, जिसमें मोबाइल फ़ोन मुख्य भूमिका निभाता है। क्योंकि सबके पास पढ़ाई के लिए लैपटॉप या कम्पूटर नहीं हो सकता पर मोबाइल होता है। जिसकी मदद से वह अपने संदेह दूर कर सकते हैं पर मोबाइल की लत में आज लोग घंटों अपना किमती समय मोबाइल को दे देते हैं। जिससे उनका ध्यान पढ़ाई पर नहीं लगता है। अपने व्यवसाय में वह अपना पूर्ण योगदान नहीं दे पाते हैं।
  • खुद में ही खोए रहते हैं और खुद से दूर होते चले जाते हैं। हम पढ़ाने वाले समय पर भी खुद से झुठ बोलकर मोबाइल पर पढ़ाई करने के बहाने ढुंढ़ते हैं।
  • मोबाइल के न मिलने पर या खो जाने पर हम सभी परेशान हो जाते है पर बहुत अधिक चिंता का होनानोमोफोबीया कहलाता हैं। इसमें मोबाइल के न होने पर व्यक्ति असहज महसूस करता है तथा उसे बहुत अधिक घबराहट होने लगता है। विश्व भर में किए गए शोध से पता चला है, नोमोफोबिया की शिकायत तेजी से बढ़ती जा रही है। मोबाइल फ़ोन को बहुत अधिक चलाने से यह बीमारी हो सकती है।
  • नोमोफोबिया में संबंधित व्यक्ति को मोबाइल चोरी होने या गिर जाने के सपनें आते हैं, इससे वह घबराहट में नींद से उठ जाता हैं। ऐसा दिन भर मोबाइल की चिंता करने के वजह से होता है।
  • हम सभी अपने किमती सामानों के न मिलने पर घबरा जाते हैं, पर नोमोफोबीया में व्यक्ति का मोबाइल खो जाने पर वह इतना घबरा जाता है की उसे पैंनिक अटैक आ सकते हैं।
  • नोमोफोबिया का अर्थ नो मोबाइल फोबिया है, इसमें व्यक्ति किसी भी स्थिति में मोबाइल को स्वयं से दूर नहीं कर सकता। वह जहां कहीं भी जाता है मोबाइल लेकर हीं जाना पसंद करता है। सोने पर भी वह अपने समीप ही मोबाइल को रख कर सोता है।
  • नोमोफोबिया में बार-बार व्यक्ति को कॉल आने का आभास होता है, उसे लगता है मोबाइल की रिंग जैसे बज रही हो।
  • यह कुछ लक्षण है, जिससे मालुम चलता है व्यक्ति नोमोफोबिया का शिकार हो चुँका है, अतः सही समय पर इससे छुटकारा पाने के लिए उचित कदम उठाना चाहिए।
  • मोबाइल की लत ने व्यक्ति को अपने अधीन कर लिया है। गैजेट हमारे उपयोग के लिए है पर यहां गैजेट्स हमारा उपयोग कर रहे हैं। व्यक्ति को मोबाइल की ऐसी लत है की वह पास बैठे लोगों से बात करने के स्थान पर सोशल मीडिया पर मित्रों से लगा रहता है।
  • इससे उसके अपनों से आपसी संबंध कमज़ोर होते चले जाते है। साथ ही व्यकि के जीवन की विभिन्न पहलुओं को भी यह लत प्रभावित करता है जैसे स्वास्थ्य, आजीविका (career), अध्ययन आदि।
  • मोबाइल में अनेक ऐसे एप्लिकेशन हैं जिससे व्यक्ति पूरा-पूरा दिन दोस्तों से बाते करते रह सकते हैं, जैसे- वॉट्सएप, फेशबुक, इन्टाग्राम आदि। इसके वजह से बच्चे पढ़ाई में समय नहीं देते, बड़े अपने काम पर ध्यान नहीं देते हैं।
  • मोबाइल फ़ोन के हद से ज्यादा उपयोग से हम अनेक तरह के रोगों के चपेट में आ सकते हैं जैसे- आँखों का कमज़ोर होना, सिर दर्द, कम सुनाई देना, तनाव, अनिंद्रा आदि।
  • मोबाइल में सब कुछ आसानी से मिल जाने के वजह से हमारी याद करने की क्षमता कम होती जा रही है।
  • मोबाइल की लत में पड़ा व्यक्ति सुबह उठने के बाद सबसे पहले मोबाइल चैक करता है, जब तक नींद न आ जाए मोबाइल उपयोग करता है तथा सोने के बाद भी अपने सिरहानें उसे रख कर सोता है। बेशक इस उपकरण से ज्यादा महत्वपूर्ण लोग आपके जीवन में हैं, उन्हें महत्व देना चाहिए।
  • मोबाइल की लत से समय का दुरोपयोग होता है, समय से न सोना, समय से न उठना हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है।
  • मोबाइल में आज अनेक तरह के गेम्स बच्चों को मिल जाते हैं, इसके फलस्वरूप बच्चें बाहर खेले जाने वाले खेल से कटते जा रहे हैं।

Conclusion :

हम सोशल मीडिया, टेक्सटिंग, गेमिंग या वीडियो देखने जैसी मोबाइल गतिविधियों के लिए एक समय निर्धारित कर सकते हैं ताकि अपने अन्य कार्य समय पर कर पाए। हम पेंटिंग, नृत्य, इनडोर या आउटडोर गेम खेलने जैसी अन्य मनोरंजक गतिविधियों में भी संलग्न हो सकते हैं। अगर हम उचित प्रयास करे तो धीरे- धीरे इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। अगर हम इसका सहीं प्रकार से उपयोग करते है तो यह हमारा काम आसान कर देता है और अगर हमे इसकी लत लग जाये तो यह हमारा ही उपयोग करने लगाता है।

सोशल मीडिया की भूमिका

Introduction :

आज के दौर में सोशल मीडिया जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है, सोशल मीडिया वह जगह है जहां हमे किसी भी चीज के बारे में जानने, पढ़ने, समझने और बोलने का मौंका मिलता हैं। सोशल मीडिया का प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति पर पड़ता है। सोशल मीडिया के बिना हमारे जीवन की कल्पना करना मुश्किल है, परन्तु इसके अत्यधिक उपयोग के वजह से हमे इसकी कीमत भी चुकानी पड़ती हैं। सोशल मीडिया समाज के सामाजिक विकास में अपना योगदान देता है और कई व्यवसायों को बढ़ाने में भी मदद करता है। हम आसानी से सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी और समाचार प्राप्त कर सकते हैं। 

किसी भी सामाजिक कारण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग एक अच्छा साधन है। सोशल मीडिया लोगों में निराशा और चिंता पैदा करने वाला एक कारक भी है। ये बच्चों में खराब मानसिक विकास का भी कारण बनता जा रहा है। सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग निद्रा को प्रभावित करता हैं। सोशल मीडिया को अच्छा या बुरा कहने के बजाय, हमें अपने लाभ के लिए इसका उपयोग करने के तरीके को खोजना चाहिए। सोशल मीडिया जागरूकता फैलाने और अपराध से लड़ने में एजेंसियों तथा सरकार की मदद कर सकता है।

सोशल मीडिया का महत्व –

  • व्याख्यानो का सीधा प्रसारण:आजकल कई प्रोफेसर अपने व्याख्यान के लिए स्काइप, ट्विटर और अन्य स्थानों पर लाइव वीडियो चैट आयोजित कर रहे हैं। यह छात्रों के साथ-साथ शिक्षक को भी घर बैठे किसी चीज को सीखने और साझा करने में सहायता करता है। सोशल मीडिया की मदद से शिक्षा को आसान और सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
  • सहयोग का बढ़ता आदान-प्रदान:चूंकि हम दिन के किसी भी समय सोशल मीडिया का उपयोग कर सकते है और कक्षा के बाद शिक्षक से प्रश्नों का समर्थन और समाधान ले सकते हैं। यह अभ्यास शिक्षक को अपने छात्रों के विकास के और अधिक बारीकी को समझने में भी मदद करता है।
  • शिक्षा कार्यो में आसानी:कई शिक्षक महसूस करते हैं कि सोशल मीडिया का उपयोग उनके कामों को आसान बनाता है। यह शिक्षक को अपनी क्षमताओं कौशल और ज्ञान का विस्तार और पता लगाने में भी सहायता करता है।
  • अधिक अनुशासान:सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आयोजित कक्षाएं अधिक अनुशासित और संरचित होती हैं क्योंकि वे जानते हैं कि हर कोई इसे देख रहा होता है।
  • शिक्षा में मददगार:सोशल मीडिया छात्रों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई गयी कई शिक्षण सामाग्री के माध्यम से उनके ज्ञान को बढ़ाने में मदद करता है। सोशल मीडिया के माध्यम से छात्र वीडियो और चित्र देख सकते हैं, समीक्षाओं की जांच कर सकते हैं और लाइव प्रक्रियाओं को देखते हुए तत्काल अपने संदेह को दूर कर सकते हैं।
  • न केवल छात्र, बल्कि शिक्षक भी इन उपकरणों और शिक्षण सहायता का उपयोग करके अपने व्याख्यान को और अधिक रोचक बना सकते हैं।
  • शिक्षण ब्लॉग और लेखन:छात्र प्रसिद्ध शिक्षकों, प्रोफेसरों और विचारकों द्वारा ब्लॉग, आर्टिकल और लेखन पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं। इस तरह अच्छी सामग्री व्यापक दर्शकों तक पहुंच सकती है।

सोशल मीडिया के फायदे –

  • सोशल मीडिया वास्तव में कई फायदे पहुंचाता है, हम सोशल मीडिया का उपयोग समाज के विकास के लिए भी कर सकते है। हमने पिछले कुछ वर्षों में सूचना और सामग्री का विस्फोट देखा है और हम सोशल मीडिया के ताकत से इंकार नहीं कर सकते है।
  • समाज में महत्वपूर्ण कारणों तथा जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया का व्यापक रूप से उपयोग किया जा सकता है। सोशल मीडिया एनजीओ और अन्य सामाजिक कल्याण समितियों द्वारा चलाए जा रहे कई महान कार्यों में भी मदद कर सकता है।
  • सोशल मीडिया जागरूकता फैलाने और अपराध से लड़ने में अन्य एजेंसियों तथा सरकार की मदद कर सकता है। कई व्यवसायों में सोशल मीडिया का उपयोग प्रचार और बिक्री के लिए एक मजबूत उपकरण के रुप में किया जा सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से कई समुदाय बनाये जाते है जो हमारे समाज के विकास के लिए आवश्यक होते हैं।

सोशल मीडिया के नुकसान –

  • साइबर बुलिंग: कई बच्चे साइबर बुलिंग के शिकार बने हैं जिसके कारण उन्हें काफी नुकसान हुआ है।
  • हैकिंग: व्यक्तिगत डेटा का नुकसान जो सुरक्षा समस्याओं का कारण बन सकता है तथा आइडेंटिटी और बैंक विवरण चोरी जैसे अपराध, जो किसी भी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • बुरी आदते: सोशल मीडिया का लंबे समय तक उपयोग, युवाओं में इसके लत का कारण बन सकता है। बुरी आदतो के कारण महत्वपूर्ण चीजों जैसे अध्ययन आदि में ध्यान खोना हो सकता है। लोग इससे प्रभावित हो जाते हैं तथा समाज से अलग हो जाते हैं और अपने निजी जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • घोटाले: कई शिकारी, कमजोर उपयोगकर्ताओं की तलाश में रहते हैं ताकि वे घोटाले कर और उनसे लाभ कमा सके।
  • रिश्ते में धोखाधड़ी: हनीट्रैप्स और अश्लील एमएमएस सबसे ज्यादा ऑनलाइन धोखाधड़ी का कारण हैं। लोगो को इस तरह के झूठे प्रेम-प्रंसगो में फंसाकर धोखा दिया जाता है।
  • स्वास्थ्य समस्याएं: सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है। अक्सर लोग इसके अत्यधिक उपयोग के बाद आलसी, वसा, आंखों में जलन और खुजली, दृष्टि के नुकसान और तनाव आदि का अनुभव करते हैं।
  • सामाजिक और पारिवारिक जीवन का नुकसान: सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण लोग परिवार तथा समाज से दुर, फोन जैसे उपकरणों में व्यस्थ हो जाते है।

Conclusion :

दुनिया भर में लाखों लोग है जो कि सोशल मीडिया का उपयोग प्रतिदिन करते हैं। इसके सकारात्मक और नकारात्मक पहलूओं का एक मिश्रित उल्लेख दिया गया है। इसमें बहुत सारी ऐसी चीजे है जो हमे सहायता प्रदान करने में महत्वपुर्ण है, तो कुछ ऐसी चीजे भी है जो हमें नुकसान पहुंचा सकती है। कई व्यवसायों में सोशल मीडिया का उपयोग प्रचार और बिक्री के लिए एक मजबूत उपकरण के रुप में किया जा सकता है। सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं में कोई संदेह नहीं है लेकिन उपयोगकर्ताओं को सोशल नेटवर्किंग के उपयोग पर अपने विवेकाधिकार का उपयोग करना चाहिए। यदि सोशल मीडिया का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो ये मानव जाति के लिए वरदान साबित हो सकता है।

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

Introduction :

मीडिया ने विश्वभर में लोकतंत्र की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लोकतांत्रिक देशों में मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है और मुक्त मीडिया के बिना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अस्तित्व ही नहीं हो सकता। भारतीय मीडिया ने समाचार पत्र और रेडियो के दौर से लेकर टेलीविजनऔर सोशल मीडिया के वर्तमान युग तक एक लंबा सफर तय किया है। मिडिया समाज के अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक पहुचाके उन्हें शिक्षित करने का एक माध्यम है । मीडिया एक स्वस्थ लोकतंत्र को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मीडिया हमें दुनिया भर में हो रही विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक गतिविधियों से अवगत कराता है। 

मीडिया की भूमिका समाज को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। यह लाखों नागरिकों की आवाज़ के रूप में कार्य करता है, जब सरकारी संस्थान भ्रष्ट और सत्तावादी हो जाते हैं। टेलीविजन और रेडियो ने ग्रामीण जनता को उनकी भाषा में सभी घटनाओं से अवगत कराने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत जैसे लोकतंत्र में एक स्वतंत्र और नियंत्रण मुक्त प्रेस की आवश्यकता वास्तव में आवश्यक है। मीडिया सरकार और देश के नागरिकों के बीच एक श्रृंखला के रूप में कार्य करता है, लोगों को मीडिया पर विश्वास है और इसका दर्शकों पर प्रभाव पड़ता है।

सोशल मीडिया के सकारात्मक प्रभाव –

  • सोशल मीडिया दुनिया भर के लोगों से जुड़ने का एक महत्त्वपूर्ण साधन है और इसने विश्व में संचार को नया आयाम दिया है। 
  • सोशल मीडिया उन लोगों की आवाज़ बन सकता है जो समाज की मुख्य धारा से अलग हैं और जिनकी आवाज़ को दबाया जाता रहा है।
  • वर्तमान में सोशल मीडिया कई व्यवसायियों के लिये व्यवसाय के एक अच्छे साधन के रूप में कार्य कर रहा है।
  • सोशल मीडिया के साथ ही कई प्रकार के रोज़गार भी पैदा हुए हैं।
  • वर्तमान में आम नागरिकों के बीच जागरूकता फैलाने के लिये सोशल मीडिया का प्रयोग काफी व्यापक स्तर पर किया जा रहा है।
  • कई शोधों में सामने आया है कि दुनिया भर में अधिकांश लोग रोज़मर्रा की सूचनाएँ सोशल मीडिया के माध्यम से ही प्राप्त करते हैं।

सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव –

  • कई शोध बताते हैं कि यदि कोई सोशल मीडिया का आवश्यकता से अधिक प्रयोग किया जाए तो वह हमारे मस्तिष्क को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है और हमे डिप्रेशन की ओर ले जा सकता है। 
  • सोशल मीडिया साइबर-बुलिंग को बढ़ावा देता है।
  • यह फेक न्यूज़ और हेट स्पीच फैलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • सोशल मीडिया पर गोपनीयता की कमी होती है और कई बार आपका निजी डेटा चोरी होने का खतरा रहता है।
  • साइबर अपराधों जैसे- हैकिंग और फिशिंग आदि का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • आजकल सोशल मीडिया के माध्यम से धोखाधड़ी का चलन भी काफी बढ़ गया है, ये लोग ऐसे सोशल मीडिया उपयोगकर्त्ता की तलाश करते हैं जिन्हें आसानी से फँसाया जा सकता है।
  • सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रयोग हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है।

सोशल मीडिया और भारत – 

  • सोशल मीडिया ने समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को भी समाज की मुख्य धारा से जुड़ने और खुलकर अपने विचारों को अभिव्यक्त करने का अवसर दिया है।
  • आँकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भारत में तकरीबन 350 मिलियन सोशल मीडिया यूज़र हैं और अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2023 तक यह संख्या लगभग 447 मिलियन तक पहुँच जाएगी।
  • वर्ष 2019 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय उपयोगकर्त्ता औसतन 2.4 घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं।
  • इसी रिपोर्ट के मुताबिक फिलीपींस के उपयोगकर्त्ता सोशल मीडिया का सबसे अधिक (औसतन 4 घंटे) प्रयोग करते हैं, जबकि इस आधार पर जापान में सबसे कम (45 मिनट) सोशल मीडिया का प्रयोग होता है।
  • इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया अपनी आलोचनाओं के कारण भी चर्चा में रहता है। दरअसल, सोशल मीडिया की भूमिका सामाजिक समरसता को बिगाड़ने और सकारात्मक सोच की जगह समाज को बाँटने वाली सोच को बढ़ावा देने वाली हो गई है।
  • भारत में नीति निर्माताओं के समक्ष सोशल मीडिया के दुरुपयोग को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बन चुकी है एवं लोगों द्वारा इस ओर गंभीरता से विचार भी किया जा रहा है।

सोशल मीडिया और निजता का मुद्दा –

  • वर्तमान परिदृश्य भारत को डिजिटल सेवाओं के लिये एक नवीन डिजाइन तैयार करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं, जिसमें व्यक्तिगत और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों का समावेश हो।
  • निजता संरक्षण, डेटा संरक्षण से जुड़ा विषय है क्योंकि जब कोई व्यक्ति किसी डिजिटल पहचान द्वारा इंटरनेट माध्यम का प्रयोग करता है तो उस दौरान विभिन्न डाटाओं का संग्रह तैयार हो जाता है जिससे बड़ी आसानी से उपयोगकर्त्ता के निजी डाटा को प्राप्त किया जा सकता है।
  • अतः डेटा संरक्षण ढाँचे के डिज़ाइन में महत्त्वपूर्ण चुनौती डिजिटलीकरण के उपयोग से दीर्घकालिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना तथा इसके साथ ही गोपनीयता को बनाए रखना भी है।
  • भारत में प्रभावी डेटा संरक्षण के लिये डेटा नियामकों के पदानुक्रम और एक मजबूत नियामक ढाँचे की आवश्यकता होगी, जो जटिल डिजिटल सेटअप और आम सहमति के अलावा हमारे मूल अधिकारों की रक्षा कर सके।
  • पिछले वर्ष भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंध संस्थान ग्वालियर के अध्ययन में बताया गया कि भारत आने वाले 89 फीसदी पर्यटक सोशल मीडिया के ज़रिये ही भारत के बारे में जानकारियाँ प्राप्त करते हैं।
  • यहाँ तक कि इनमें से 18 फीसदी लोग तो भारत आने की योजना ही तब बनाते हैं जब सोशल मीडिया से प्राप्त सामग्री इनके मन में भारत की अच्छी तस्वीर पेश करती है।
  • सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को नया आयाम दिया है, आज प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी डर के सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार रख सकता है और उसे हज़ारों लोगों तक पहुँचा सकता है, परंतु सोशल मीडिया के दुरुपयोग ने इसे एक खतरनाक उपकरण के रूप में भी स्थापित कर दिया है तथा इसके विनियमन की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।

Conclusion :

अतः आवश्यक है कि निजता के अधिकार का उल्लंघन किये बिना सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिये सभी पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर नए विकल्पों की खोज की जाए, ताकि भविष्य में इसके संभावित दुष्प्रभावों से बचा जा सके। वर्तमान समय में युवाओं को प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया की तेजी से बढ़ती दुनिया में अधिक रुचि है। इस प्रकार, मीडिया के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो जाता है कि वे जो सूचना प्रसारित कर रहे हैं, वह पक्षपाती न हो। मीडिया लोकतंत्र में एक वाचडॉग की तरह है जो सरकार को सक्रिय रखता है और यह हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गया है।

साइबर अपराध पर निबंध

Introduction :

तकनीकी रूप से संचालित समाज में, लोग जीवन को सरल बनाने के लिए विभिन्न उपकरणों का उपयोग करते आ रहे हैं। प्रौद्योगिकी की बढ़ती पहुंच और निरंतर उपयोग ने लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित किया है। इंटरनेट ने दुनिया के सभी लोगों और कंपनियों को तेजी, आसानी और आर्थिक रूप से जोड़ दिया है। इंटरनेट और कंप्यूटर ने कई खतरों और परेशानीओं को भी जन्म दिया है जिसका सामना आज हमें करना हैं, जो की हमारी सभ्यता और व्यवहार पर प्रभाव डालता हैं।

साइबर-अपराध एक अपराध है जिसमें कंप्यूटर का उपयोग अपराध की वस्तु के रूप में किया जाता है घृणा फैलाने वाले भाषणों, बाल पोर्नोग्राफी, व्यक्तिगत जानकारी या व्यावसायिक व्यापार रहस्य, बैंक धोखाधड़ी, पहचान की चोरी, क्रेडिट और डेबिट कार्ड की जानकारी से लेकर दुनिया भर में विभिन्न प्रकार के वायरस फैलाने तक का अपराध साइबर-अपराध में शामिल है। साइबर-अपराध में एक व्यक्ति, संगठित समूह या यहां तक कि एक देश द्वारा कंप्यूटर का उपयोग अपराध के हथियार के रूप में  किया जाता है। साइबर अपराध में सामान्य तौर पर विभिन्न प्रकार के वायरस  से कंप्यूटरों को हैक करना, फैलना और संक्रमित करना है।

साइबर अपराध – समाज के लिए खतरा –

  • साइबर अपराध एक आपराधिक कृत्य है जो इंटरनेट के माध्यम से कंप्यूटर के उपकरण या किसी अन्य स्मार्ट उपकरणों के रूप में इस्तेमाल करते हुए इस काम को अंजाम दिया जाता हैं।
  • हैकर या अपराधीयों के पास इस अपराध को करने के विभिन्न उद्देश्य होते हैं। वे किसी व्यक्ति, किसी संगठन या सरकार को भी नुकसान पहुंचाने के लिए ऐसा कर सकते हैं।
  • साइबर अपराध के कई उदाहरणों में धोखाधड़ी, पहचान की चोरी, साइबर स्टॉकिंग, सिस्टम को नष्ट करने के लिए वायरस जैसे मैलवेयर बनाना या भेजना या फिर पैसे कमाने के लिए डेटा चोरी करना, आदि शामिल हैं।
  • ऐसी गतिविधियों में शामिल लोग उन्हें पैसे कमाने का एक आसान तरीका मानते हैं। यहाँ तक कि बहुत से पढ़े-लिखे और ज्ञान से परिपूर्ण व्यक्ति भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल होते हैं।
  • अपने दिमाग को सकारात्मक तरीके से इस्तेमाल करने के बजाय वे साइबर अपराधिक गतिविधियों में खुद को नियुक्त करते हैं। दिन-प्रतिदिन यह हमारे समाज और राष्ट्र के लिए एक बड़ा खतरा बनते जा रहा है।

साइबर अपराधों का वर्गीकरण –

  • एक व्यक्ति के खिलाफ अपराध –किसी व्यक्ति के खिलाफ उसके क्रेडिट कार्ड की जानकारी, गोपनीय डेटा और स्पैम ईमेल भेजना, आदि अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध मुख्य रूप से पैसा कमाने के लिए किया जाता है।
  • एक संगठन के खिलाफ अपराध –यह अपराध एक फर्म, कंपनी या संगठन के खिलाफ किया जाता है ताकि डेटा तक अनधिकृत पहुंच प्राप्त हो सके। यह कंपनी के महत्वपूर्ण डेटा और कर्मचारी के विवरण को चुराने या फिर पैसे बनाने के लिए किया जाता है।
  • सरकार के खिलाफ अपराध – यह राष्ट्रीय डेटा और रिकॉर्ड तक पहुंच प्राप्त करके, राष्ट्र के खिलाफ अपराध करना होता है। यह अपराध मुख्य चिंता का विषय है क्योंकि इसका संबंध राष्ट्र के लोगों की सुरक्षा से है।

साइबर अपराध के प्रभाव –

  • यदि हम व्यक्तिगत स्तर पर चर्चा करते हैं, तो इससे प्रभावित लोग अभी भी नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ ने तो आत्महत्या करने तक का विकल्प चुन लिया। पैसे की हानि और कोई भी डेटा जो गोपनीय है, व्यक्ति को असहाय बना देता है और उसे जीवन के दर्दनाक स्थिति में छोड़ देता है।
  • संगठन के स्तर पर, कंपनी के डेटा को चोरी करने या मैलवेयर द्वारा सिस्टम को नष्ट करने से भारी नुकसान होता है और अपराधियों द्वारा यह कुछ इस तरह से सेट किया जाता है कि यह तब तक काम न करे जब तक कि अपराधी के नियम और शर्तें पूरी न हो जाएं।
  • इसकी वजह से कंपनियों को अधिक नुकसान होता है क्योंकि उनकी रणनीतियों और महत्वपूर्ण डेटा चोरी और लीक हो गए होते हैं।
  • यहाँ तक कि सरकार भी इस अपराध की शिकार है। राष्ट्र की संप्रभुता को खतरे में डालते हुए, सरकारी स्तर पर साइबर अपराध के परिणाम के रूप में कई गोपनीय डेटा लीक हो चुके है।
  • यह एक गंभीर मुद्दा है क्योंकि ऐसा हो सकता है कि राष्ट्र के लोगों के जीवन को खतरा और भय है। नुकसान आर्थिक स्तर पर भी हो सकता है। इन साइबर अपराधों के कारण राष्ट्र से कई लाख और करोड़ का नुकसान हुआ है।

साइबर अपराध जागरूकता –

  • साइबर अपराध के भयावह कार्यों से सुरक्षित रहने के लिए विभिन्न सुरक्षा उपायों का पालन किया जाना चाहिए।
  • मजबूत पासवर्ड का उपयोग किया जाना चाहिए। पासवर्ड जटिल होना चाहिए, जिसका अनुमान लगाना संभव नहीं हो।
  • सिस्टम को मैलवेयर से मुक्त रखने के लिए एंटीवायरस प्रोग्राम (सॉफ्टवेयर) का उपयोग करना चाहिए।
  • सिस्टम को लगातार अपडेट करें।
  • सतर्क रहें और अपने पहचान तथा महत्वपूर्ण जानकारी की चोरी से बचने के लिए खुद को स्मार्ट और एक्टिव बनायें।
  • अपने बच्चों को इंटरनेट के बारे में अवगत कराएं, ताकि वे किसी भी दुरुपयोग या उत्पीड़न के बारे में तुरंत अवगत करा सकें, अगर वे ऐसी किसी परिस्थिति से गुजर रहे हैं तो।
  • सोशल मीडिया पर गोपनीयता सेटिंग्स को बनाए रखें।

साइबर सुरक्षा के प्रकार –

  • नेटवर्क सिक्योरिटी –नेटवर्क को मैलवेयर द्वारा अटैक किए जाने से बचाता है और इसीलिए हमेशा सुरक्षित नेटवर्क का ही उपयोग करना चाहिए।
  • क्लाउड सुरक्षा –क्लाउड संसाधनों में डेटा की सुरक्षा के लिए साधन उपलब्ध कराये जाते हैं।
  • सूचना सुरक्षा –डेटा को अनधिकृत या अवैध पहुँच से बचाने में मदद करता है।
  • एंड-यूजर सिक्योरिटी – सिस्टम में किसी भी बाहरी डिवाइस को लगाने, किसी भी मेल या लिंक को खोलने के दौरान उपयोगकर्ता को सचेत रहना चाहिए।
  • एप्लीकेशन सिक्योरिटी –सिस्टम और सॉफ्टवेयर को किसी भी खतरे से मुक्त रखने में मदद करता है।

Conclusion :

हैकर्स इंटरनेट पर किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी जैसे कि उसका क्रेडिट कार्ड और बैंक खाता नंबर आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इस दुनिया में, गुण और दोष हर जगह साथ साथ हैं। हर वरदान के साथ एक अभिशाप भी आता है। हर आविष्कार के कई लाभों को उनके  दुरुपयोग से झुठलाया नहीं जा सकता इसलिए हमें अपनी जिंदगी और वेब दोनों में थोड़ा सतर्क होना होगा ताकि हम साइबर अपराध के चंगूल में न फॅसे इसी लिए कहा जाता है “रोकथाम इलाज से बेहतर है”

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Abhilash Kumar

The author Abhilash Kumar

Abhilash Kumar is the founder of “Studyguru Pathshala” brand & its products, i.e. YouTube, Books, PDF eBooks etc. He is one of the most successful bloggers in India. He is the author of India’s the best seller “Descriptive Book”. As a social activist, he has distributed his books to millions of deprived and needy students.

49 Comments

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