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Essay on India in Tokyo Olympics 2021 in Hindi

Essay on India in Tokyo Olympics 2021 in Hindi

Introduction :

“ओलंपिक खेलों में सबसे महत्वपूर्ण चीज जीतना नहीं बल्कि भाग लेना है” यह कथन दर्शाता है कि जीवन में जीतना ही सबकुछ नहीं होता बल्कि पूरी ताकत से लड़ना है। ओलंपिक दुनिया के बेहतरीन खेल आयोजनों में से एक है जो चार साल में एक बार आयोजित किया जाता है। इस साल ओलंपिक का आयोजन जापान के टोक्यो में हुआ । ओलंपिक खेलो के आयोजन से खिलाड़ियों को पुरे विश्व मेंअपनी प्रतिभा दिखाने और अपने देश को गौरवान्वित करने का अवसर मिलता है। यह वह मंच है जो दुनिया के विभिन्न देशों के बीच एकता को प्रोत्साहित करता है और भाईचारे को बढ़ावा देता है।

  • टोक्यो ओलंपिक का आयोजन 23 जुलाई से हुआ और 8 अगस्त 2021 को समाप्त हो गया। टोक्यो ओलंपिक में, भारत ने पिछले रियो ओलंपिक की तुलना में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है।
  • टोक्यो ओलंपिक में भारत ने सात पदक जीते हैं और पदक तालिका में 48वां स्थान हासिल किया है जो पिछले चार दशकों में कहीं बेहतर है।
  • भारत ने सात पदकों में से एक स्वर्ण हासिल किया जो भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने हासिल किया इसके अलावा दो रजत और चार कांस्य पदक भी हासिल हुए है।
  • पैरालंपिक श्रेणी में भारतीय एथलीटों ने उल्लेखनीय काम किया है। इस श्रेणी में भारत ने 19 पदक हासिल किए हैं जिसमें पांच स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य पदक शामिल हैं।
  • वैसे तो टोक्यो ओलंपिक में हमारे देश का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा, लेकिन और भी बेहतर हो सकता है अगर हमारे देश के संबंधित अधिकारी और युवा खेल के प्रति अपना नजरिया बदलें।
  • हमारे देश में क्रिकेट के प्रति लोगो का जुनून देखने लायक हैं पर अन्य खेलो के प्रति भी हमें ध्यान देने की जरुरत हैं। हलाकि भारत के खिलाडीयो ने कम संसाधनो के बावजूद भी अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन अगर इनपर बजट और बढ़ा दिया जाये तो इनके प्रदर्शन में और निखार आएगा,
  • जिससे आगामी प्रतियोगिताओ में इससे वे इससे भी ज्यादा पदक जीत सकेंगे। इसके अलावा भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप भी इस दिशा में प्रमुख कारण हैं इसलिए अब तक हमारे पास केवल 35 पदक ही हैं।

Conclusion :

वर्तमान समय में, सरकार खेलो इंडिया प्रोग्राम, फिट इंडिया और कम एंड प्ले स्कीम आदि जैसी विभिन्न योजनाओ के माध्यम से इस क्षेत्र में सराहनीय प्रयास कर रही है। लेकिन भारत की वर्तमान स्थिति को देखते हुए ये पर्याप्त नहीं है। सबसे पहले हमें खेल के प्रति अपना नजरिया बदलना होगा और इस क्षेत्र में सफलता पाने के लिए सही उम्र में सही प्रतिभा की पहचान करनी होगी। लोगों को खेल के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए सरकार को और अधिक योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करना चाहिए। इस सम्बन्ध में यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि “विश्वास ही सफलता की कुंजी है।” अगर हमे विश्वास हैं, तो हम कुछ भी हासिल कर सकते हैं !

फिट इंडिया मूवमेंट पर निबंध

Introduction :

भारत के लोगों के में फिटनेस और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए, प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती और राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 29 अगस्त, 2019 को फिट इंडिया मूवमेंट का शुभारंभ किया। फिट इंडिया मूवमेंट का उद्देश्य भारतीयों को स्वस्थ और फिट जीवन शैली के लिए फिटनेस गतिविधियों और खेल को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रधानमंत्री ने फिट इंडिया पर अपने भाषण के दौरान कहा कि फिटनेस केवल एक शब्द नहीं है बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का एक तरीका है।

हमारा राष्ट्र केवल तभी फिट होगा जब इसके प्रत्येक नागरिक फिट होगे। उन्होंने कहा, “मैं आपको फिट देखना चाहता हूं और आपको फिटनेस के प्रति जागरूक करना चाहता हूं और हम एक साथ फिट इंडिया के लक्ष्य को पूरा करेंगे ।” इस आंदोलन का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ भविष्य के लिए अधिक सक्रिय जीवन शैली के लिए प्रोत्साहित करना है। लोगों को नियमित रूप से व्यायाम करने, मनोरंजक खेल खेलने और फिट रहने के लिए योग करने के लिए कहा गया।

  • बदलते समय के साथ-साथ भारत के लोगों के जीवन स्तर पर भी बड़ा बदलाव आया है।लोगों का रहन-सहन, खान-पान व जीवन जीने के तौर तरीके पहले जैसे नहीं रहे।
  • असमय भोजन,जंक फ़ूड,शाररिक व्यायाम न करना या अन्य वजहों से कई बीमारियें हो रही हैं।जिसने बड़े,बुजुर्गों व युवाओं को ही नहीं,यहां तक कि छोटे-छोटे बच्चों को भी अपनी की चपेट में ले लिया हैं।
  • आजकल छोटे-छोटे बच्चों को भी डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर,दिल की बीमारी व मोटापे आदि की शिकायत हो रही है।लेकिन इनमें से कई बीमारियों को हम अपने जीवन में छोटे-छोटे बदलाव कर दूर कर सकते हैं।

वैश्विक स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार

  • विकसित देशों में गैर-संक्रामक बीमारियां औसतन 55 वर्ष की उम्र में लोगों में देखी जा रही हैं।जबकि भारत में यह अधिकतर 45 वर्ष की उम्र में ही नागरिकों को अपनी चपेट में ले रही हैं।
  • भारत में दिल के रोगियों की संख्या लगभग 5.45 करोड़ हैं।जबकि 13.5 करोड़ लोग मोटापे का शिकार है।
  • भारत में हर 10 में से एक व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित है।जबकि हर पांचवें व्यक्ति को हाइपरटेंशन की समस्या है।इस वक्त देश में 24.5% पुरुष तथा 20% महिलाएं हाइपरटेंशन का शिकार हैं।और भारत में लगभग 1.63 करोड़  मौतों हाइपरटेंशन की वजह से होती है।
  • भारत में पिछले दो दशकों में दो तिहाई गैर-संक्रामक रोग के मरीज बढ़े हैं।1990 में देश में कुल मौतों से 37.09% गैर संक्रामक रोगों से हो रही थी।लेकिन आज यह 62% तक पहुंच गई है।
  • भारत में कुल आबादी का लगभग 10% आबादी मानसिक रोगी है।यानि किसी ने किसी मानसिक परेशानी की गिरिफ्त में है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने फिट इंडिया अभियान (Fit India Movement) को शुरू करते हुए लोगों को स्वस्थ व फिट रहने के कुछ मन्त्र दिये, जैसे

  • बॉडी फिट है तो माइंड हिट।
  • फिटनेस एक शब्द नहीं, बल्कि स्वस्थ और समृद्ध जीवन की एक जरूरी शर्त है।
  • इसमें जीरो इन्वेस्टमेंट(Investment) है।लेकिन Return असीमित है।
  • जो लोग सफल है उनका एक ही मंत्र है फिटनेस पर उनका फोकस।
  • सफलता और फिटनेस का रिश्ता भी एक दूसरे से जुड़ा है।खेल,फिल्म, हर क्षेत्र के हीरो फिट रहते हैं।
  • किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए मानसिक और शारीरिक फिटनेस का होना जरूरी है
  • शरीर के लिए लिफ्ट या एस्केलेटर्स के बजाय बल्कि सीढ़ी का उपयोग करना सही होता है।लेकिन यह तभी हो पाएगा जब आप फिट हैं।
  • किसी भी क्षेत्र के व्यक्ति को मेंटल और फिजिकल तौर पर फिट होना जरूरी है।चाहे बोर्डरूम हो या बॉलीवुड।जो फिट है वह आसमान छूता है।
  • आज Lifestyle Diseases, Lifestyle Disorder की वजह से हैं।लेकिन Lifestyle Disorder को हम Lifestyle में बदलाव करके ठीक कर सकते हैं।
  • कुछ दशक पहले तक एक सामान्य व्यक्ति 8-10 किलोमीटर तक पैदल चल ही लेता था।कुछ ना कुछ फिटनेस के लिए करता ही था।लेकिन आज नई टेक्नोलॉजी की वजह से नए साधन बाजार में आए और व्यक्ति का पैदल चलना काफी कम हो गया।
  • भारत सरकार Fit India Movement को सफल बनाने के लिए कई विभागों के साथ मिलकर काम करेंगी।इनमें खेल मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय आदि प्रमुख हैं। 
  • फिट इंडिया अभियान का मुख्य मकसद स्वास्थ्य के प्रति देश के लोगों को जागरूक करना है।इसीलिए इस अभियान को भी सरकार स्वच्छता अभियान की ही तरह आगे बढ़ाएगी। 

Conclusion :

अधिकांश रोगों का मूल कारण जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां हैं और ऐसी कई बीमारियां हैं जिन्हें हमारी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके दूर किया जा सकता है। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने पहले ही अपने अभियानों के साथ स्वस्थ और फिट राष्ट्र के लिए मार्ग प्रशस्त करने का लक्ष्य रखा है। फिट इंडिया मूवमेंट को देश के हर कोने तक पहुंचना चाहिए। हमें इस आंदोलन की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए और फिट इंडिया को सफल बनाने का प्रयास करना चाहिए।

समाज के प्रति युवाओं की भूमिका पर निबंध

Introduction :

युवाओं को प्रत्येक देश की सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति माना जाता है क्योंकि उनकी बुद्धिमता और कड़ी मेहनत देश को सफलता और समृद्धि की राह पर ले जाती है। जैसा कि प्रत्येक नागरिक का राष्ट्र के प्रति कुछ उत्तरदायित्व होता है, वैसे ही युवाओं का भी है। प्रत्येक राष्ट्र के निर्माण में इनका बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान होता हैं। युवा एक ऐसे व्यक्ति को कहते है जिसकी उम्र 15 से 30 वर्ष के बीच में होती है। चूंकि युवा हर समाज की रीढ़ होते हैं और इसलिए वे समाज के भविष्य का निर्धारण करते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अन्य सभी आयु वर्ग जैसे कि बच्चे, किशोर, मध्यम आयु वर्ग और वरिष्ठ नागरिक युवाओं पर भरोसा करते हैं और उनसे बहुत उम्मीदें रखते हैं।

समाज में युवाओं पर अत्यधिक निर्भरता के कारण, हम सभी युवाओं की हमारे परिवारों, समुदायों और देश के भविष्य के प्रति बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ है। युवा अपने नेतृत्व, नवाचार और विकास कौशल द्वारा समाज की वर्तमान स्थिति को नवीनीकृत कर सकते हैं। युवाओं से देश की वर्तमान तकनीक, शिक्षा प्रणाली और राजनीति में बदलाव लाने की उम्मीद की जाती है। उनपर समाज में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का भी उत्तरदायित्व है। यही कारण है कि देश के विकास के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी की अत्यधिक आवश्यकता होती है।

  • हमारे राष्ट्र के लिए कई परिवर्तन, विकास, समृद्धि और सम्मान लाने में युवा सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं। इस सबका मुख्य उद्देश्य उन्हें एक सकारात्मक दिशा में प्रशिक्षित करना है।
  • युवा पीढ़ी के उत्थान के लिए कई संगठन काम कर रहे हैं क्योंकि वे बड़े होकर राष्ट्र निर्माण में सहायक बनेंगे। गरीब और विकासशील देश अभी भी युवाओं के समुचित विकास और शिक्षण में पिछड़े हुए हैं।
  • एक बच्चे के रूप में प्रत्येक व्यक्ति, अपने जीवन में कुछ बनने का सपने देखता है, बच्चा अपनी शिक्षा पूरी करता है और कुछ हासिल करने के लिए कुछ कौशल प्राप्त करता है।
  • युवाओं में त्वरित शिक्षा, रचनात्मकता, कौशल होता है। वे हमारे समाज और राष्ट्र में परिवर्तन लाने की शक्ति रखते हैं।
  • युवा उस चिंगारी के साथ बड़ा होता है, जो कुछ भी कर सकता है।
  • समाज में कई नकारात्मक कुरीतियाँ और कार्य किए जाते हैं। युवाओं में समाज परिवर्तन और लिंग तथा सामाजिक समानता की अवधारणा को लाने की क्षमता है।
  • समाज में व्याप्त कई मुद्दों पर काम करके युवा दूसरों के लिए एक आदर्श बन सकते हैं।

युवा की भूमिका

  • युवाओं को राष्ट्र की आवाज माना जाता है। युवा राष्ट्र के लिए कच्चे माल या संसाधन की तरह होते हैं। जिस तरह के आकार में वे हैं, उनके उसी तरीके से उभरने की संभावना होती है।
  • राष्ट्र द्वारा विभिन्न अवसरों और सशक्त युवा प्रक्रियाओं को अपनाया जाना चाहिए, जो युवाओं को विभिन्न धाराओं और क्षेत्रों में करियर बनाने में सक्षम बनाएगा।
  • युवा लक्ष्यहीन, भ्रमित और दिशाहीन होते हैं और इसलिए वे मार्गदर्शन और समर्थन के अधीन होते हैं, ताकि वे सफल होने के लिए अपना सही मार्ग प्रशस्त कर सकें।
  • युवा हमेशा अपने जीवन में कई असफलताओं का सामना करते हैं और हर बार ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि एक पूर्ण अंत है, लेकिन वो फिर से कुछ नए लक्ष्य के साथ खोज करने के लिए एक नए दृष्टिकोण के साथ उठता है।
  • एक युवा मन प्रतिभा और रचनात्मकता से भरा हुआ है। यदि वे किसी मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते हैं, तो परिवर्तन लाने में सफल होते हैं।

भारत में युवाओं की प्रमुख समस्याएं

  • कई युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान नहीं की जाती है; यहां तक ​​कि कई लोग गरीबी और बेरोजगारी तथा अनपढ़ अभिभावकों के वजह से स्कूलों नहीं जा पाते हैं। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बच्चे को स्कूल जाने और उच्च शिक्षा हासिल करने का मौका मिले।
  • बालिका शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि देश में कई ऐसे हिस्से हैं जहां लड़कियां स्कूल जाने और पढ़ाई से वंचित है। लेकिन युवा, लड़के और लड़कियों दोनों का गठन करते हैं। जब समाज का एक वर्ग उपेक्षित हो, तो समग्र विकास कैसे हो सकता है?
  • अधिकांश युवाओं को गलत दिशा में खींच लिया गया है; उन्हें अपने जीवन और करियर को नष्ट करने से रोका जाना चाहिए।
  • कई युवाओं में कौशल की कमी देखी गयी है, और इसलिए सरकार को युवाओं के लिए कुछ कौशल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि वे आगे एक या उससे अधिक अवसरों से लाभान्वित हो सकें।
  • भारत में अधिकांश लोग गांवों में रहते हैं, इसलिए शिक्षा और अवसरों की सभी सुविधाओं तक उनकी उचित पहुंच नहीं है।
  • कुछ युवाओं द्वारा वित्तीय संकट और सामाजिक असमानता की समस्या होती है।
  • ऐसे कई बच्चे हैं जो प्रतिभा के साथ पैदा हुए हैं, लेकिन अपर्याप्त संसाधनों के चलते, वे अपनी प्रतिभा के साथ आगे नहीं बढ़ सके।
  • उनमें से कई को पारिवारिक आवश्यकताओं के कारण पैसा कमाने के लिए अपनी प्रतिभा से हटकर अन्य काम करना पड़ता है, लेकिन उन्हें उस काम से प्यार नहीं है जो वे कर रहे हैं।
  • बेरोजगारी की समस्या युवाओं की सबसे बड़ी समस्या है।
  • जन्मजात प्रतिभा वाले कुछ बच्चे होते हैं, लेकिन संसाधन की कमी या उचित प्रशिक्षण नहीं होने के कारण, वे अपनी आशा और प्रतिभा भी खो देते हैं।
  • इस प्रकार, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बच्चे को उचित शिक्षा की सुविधा प्रदान की जाए। प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए। युवाओं को कई अवसर प्रदान किया जाना चाहिए। उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और राजनीतिक मामलों में समान रूप से भाग लेना चाहिए।
  • कुशल समूहों को काम प्रदान करने के लिए कई रोजगार योजनाएं चलानी चाहिए।

Conclusion :

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किस क्षेत्र में प्रगति करना चाहते हैं क्योंकि हर जगह युवाओं की आवश्यकता है। हमारे युवाओं को अपनी आंतरिक शक्तियों और समाज में उनकी भूमिका के बारे में पता होना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर किसी को खुद को योग्य साबित करने के लिए समान मौका मिल सके। युवाओं के पास एक अलग दृष्टिकोण है जो पुरानी पीढ़ियों के पास नहीं था जिसके द्वारा वे हमारे देश में विकाश और समृद्धि ला सकते है।

आत्मनिर्भर भारत पर निबंध

Introduction :

आपदा को अवसर में बदलने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की गयी। पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज देने की भी घोषणा की है जो कि भारत की जीडीपी का 10% है।  इस पैकेज का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में तरलता लाकर आत्मनिर्भर भारत मिशन के उद्देश्यों को पूरा करना है। इस योजना का उद्देश्य 130 करोड़ भारतवासियों को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि देश का हर नागरिक संकट की इस घड़ी में कदम से कदम मिलाकर चल सके और कोविड-19 की महामारी को हराने में अपना योगदान दे सके।

कोरोना वायरस के कारण पूरे देश के लॉक डाउन की स्थिति चल रही है जिसका सबसे ज्यादा बुरा असर देश के सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों , श्रमिकों ,मजदूरों और किसानो पर पड़ रहा है इन सभी नागरिको को लाभ पहुंचाने के लिए हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने देश के सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों, श्रमिकों ,मजदूरों और किसानो को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आर्थिक पैकेज का ऐलान कर दिया।

  • पूरे विश्व मे केवल भारत ही ऐसा देश है जहां सबसे अधिक प्राकृतिक संसाधन पाये जाते है, जो कि बिना किसी देश की मदद से जीवन से लेकर राष्ट्र निर्माण की वस्तुएं बना सकता है और आत्मनिर्भर के सपने को पूरा कर सकता है।
  • हालाकि भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सपना नया है। यह सपना महात्मा गांधी ने आजादी के बाद ही स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया था, पर गरीबी और भुखमरी के कारण उनका सपना साकार न हो सका।
  • करोना महामारी के कारण पिछले कई महीनों से सारा विश्व बन्द पड़ा है, जिसके कारण छोटे लोगों से लेकर पूंजीपतियों तक को भारी नुकसान और परेशानीयों का सामना करना पड रहा है।
  • खासतौर से हमारे छोटे और मध्यम वर्ग के परिवारों को कमाने खाने की समस्या काफी बढ़ गयी है। कोरोना महामारी के कारण किसी भी देश से सामानों का आदान-प्रदान बन्द है।
  • इसलिए मई के महीने मे तालाबन्दी के दौरान हमारे प्रधानमंत्री ने देश को आत्मनिर्भर बनने का आह्वाहन किया है। उन्होने “लोकल फॉर वोकल” का भी नारा दिया। जिसका अर्थ है कि लोकल मे बनी वस्तुओं का उपयोग और उनका प्रचार करना और एक पहचान के रुप मे आगे बढ़ना।
  • महामारी के दौरान ही चीन ने भारत के डोकलाम सीमा क्षेत्र मे कब्जा करने की कोशिश की, जिसमे भारत के लगभग 20 जवान शहीद हो गए। सीमा के इस विवाद मे भारत के सैनिकों की क्षति के कारण देश के हर कोने से चीनी सामान को बैन करने की माँग के साथ ही, चीनी सामानो को बन्द कर दिया गया और प्रधानमंत्री ने सारे देश को आत्मनिर्भर बनने का मंत्र दिया। उन्होने कहा कि आत्मनिर्भर बनकर घरेलु चीजों का इस्तेमाल करें ताकि हमारा राष्ट्र मजबूती के साथ खड़ा हो सके।
  • पिछले कुछ महीनों से विश्व कोरोना वायरस महामारी के कारण बन्द पड़ा है। इसके कारण सारे विश्व मे वित्तीय संकट के बादल छाएं है।
  • इसी कड़ी मे भारत ने खुद को आत्मनिर्भर बनाने और राष्ट्र को आगे ले जाने फैसला किया है। विश्व बन्दी के कारण सारे विश्व के उत्पादों पर भारी असर हुआ है, इसलिए भारत ने स्वयं को आत्मनिर्भर बनाकर देश की तरक्की पर अपना कदम आगे बढ़ाया है।

आत्मनिर्भर भारत फायदे

  • आत्मनिर्भर भारत से हमारे देश मे उद्योगों की संख्या मे वृद्धि होगी।
  • हमारे देश को और देशो से सहायता कम लेनी होगी।
  • हमारे देश मे रोजगार के अधिक अवसर पैदा होगें।
  • इससे देश मे बेरोजगारी के साथ-साथ गरीबी से मुक्ति मे सहायता मिलेगी।
  • भारत की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हो सकेगी।
  • आत्मनिर्भर बनने के साथ भारत चीजों का भंड़ारण काफी अधिक कर सकता है।
  • देश आगे चलकर अन्य देशों से आयात कम और निर्यात ज्यादा कर सकेगा।
  • आपदा की स्थिति मे भारत बाहरी देशों से मदद की मांग कम होगी।
  • देश मे स्वदेशी वस्तुओं का निर्माण कर देश की तरक्की को शीर्ष तक ले जाने मे सहायता मिलेगी।

आत्मनिर्भर भारत की घोषणा के तहत भारत के प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता के लिए पांच महत्वपूर्ण चीजे बाताई है।

  1. इंटेंट यानी इरादा करना।
  2. इन्क्लूजन या समावेश करना।
  3. निवेश या इन्वेस्टमेन्ट करना।
  4. इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी सार्वजनिक ढ़ाचे को मजबूत करना।
  5. नयी चीजों का खोज करना।
  • इस महामारी के दौरान कुछ हद तक हमने आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया है और बिना अन्य देश की मदद से इस महामारी से लड़ने के लिए हमने देश मे ही चीजों का निर्माण करना शुरु कर दिया है।
  • जहां हमने पीपीई किट, वेन्टिलेटर, सेनेटाइजर और के.एन-95 मास्क का निर्माण अपने देश मे ही शुरु कर दिया है। पहले यही चीजे हमे विदेशों से मंगानी पड़ती थी। इन सभी चीजों का निर्माण भारत मे करना ही आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ने का पहला कदम है। इनके उत्पादन से हमे अन्य देशों की मदद भी नही लेनी पड़ रही है, और भारत आत्मनिर्भरता की ओर आगे कदम बढ़ा रहा है।
  • आत्मनिर्भरता की ओर भारत ने पीपीई किट, वैन्टिलेटर इत्यादि चीजों को बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर  अपना पहला कदम बढ़ा दिया है और हमे भी इसमे अपना योगदान देकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करना होगा।
  • हमे ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने की आवश्यकता है। जिससे कि हम अपने देश को आत्मनिर्भर और अपने राष्ट्र को आगे बढ़ाने मे अपना योगदान कर सके।

Conclusion :

आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा देश के किसानों की आय को दोगुना करने और कोविड-19 की आपदा के मद्देनजर किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए एक बेहतर कदम है। यह मिशन हमारे देश को आयात निर्भरता में कमी करने एवं वैश्विक बाजारों में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के महत्व पर भी जोर देगा। इस अभियान के अंतर्गत देश के मजदूर श्रमिक किसान लघु उद्योग कुटीर उद्योग मध्यमवर्गीय उद्योग सभी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जो कि भारत के गरीब नागरिको की आजीविका का साधन है।

भारत में बेरोजगारी की समस्या

Introduction :

बेरोजगारी भारत में एक अहम मुद्दा बनता जा रहा है  जब कोई व्यक्ति काम करने योग्य हो और काम करने की इच्छा भी रखे किन्तु उसे काम का अवसर प्राप्त न हो तो वह बेरोजगार कहलाता हैं। आज हमारे देश मे लाखो लोग बेरोजगार है। ऐसा इसलिए है क्योंकि नौकरियाँ सीमित हैं और नौकरी पाने वालो की संख्या असीमित। भारत में बेरोजगारी की स्थिति एक गंभीर सामाजिक समस्या है। शिक्षा का अभाव और रोजगार के अवसरों की कमी ऐसे कारक हैं जो बेरोज़गारी का प्रमुख कारण हैं। बेरोज़गारी न केवल देश के आर्थिक विकास में बाधा डालती है बल्कि व्यक्तिगत और पूरे समाज पर भी एक साथ कई तरह के नकारात्मक प्रभाव डालती है।

2011 की जनगणना के अनुसार युवा आबादी का 20 प्रतिशत जिसमें 4.7 करोड़ पुरूष और 2.6 करोड़ महिलाएं पूर्ण रूप से बेरोजागार हैं। यह युवा 25 से 29 वर्ष की आयु समूह से हैं। यही कारण है कि जब कोई सरकारी नौकरी निकलती है तो आवेदको की संख्या लाखों मे होती हैं। तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या भारत मे बेरोजगारी का प्रमुख कारण हैं। वर्तमान शिक्षा प्रणाली भी दोषपूर्ण है। बेरोजगारी को दूर करने में जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण आवश्यक है। जिस अनुपात में रोजगार से साधन बढ़ते है, उससे कई गुना जनसंख्या में वृद्धि हो  जाती है।

  • सबसे खराब स्थिति तो वह है जब पढ़े-लिखे युवकों को भी रोजगार नहीं मिलता शिक्षित युवकों की यह बेरोजगारी देश के लिए सर्वाधिक चिन्तनीय है, क्योंकि ऐसे युवक जिस तनाव और अवसाद से गुजरते हैं, उससे उनकी आशाएं टूट जाती हैं और वे गुमराह होकर उग्रवादी, आतंकवादी तक बन जाते हैं।
  • पंजाब, कश्मीर और असम के आतंकवादी संगठनों में कार्यरत उग्रवादियों में अधिकांश इसी प्रकार के शिक्षित बेरोजगार युवक हैं। बेरोजगारी देश की आर्थिक स्थिति को डाँवाडोल कर देती है। इससे राष्ट्रीय आय में कमी आती है, उत्पादन घट जाता है और देश में राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हो जाती है।
  • बेरोजगारी से क्रय शक्ति घट जाती है, जीवन स्तर गिर जाता है जिसका दुष्प्रभाव परिवार एवं बच्चों पर पड़ता है। बेरोजगारी मानसिक तनाव को जन्म देती है जिससे समाज एवं सरकार के प्रति कटुता के भाव जाग्रत होते हैं परिणामतः व्यक्ति का सोच नकारात्मक हो जाता है और वह समाज विरोधी एवं देश विरोधी कार्य करने में भी संकोच नहीं करता।

बेरोजगारी के कारण

  • भारत में बढ़ती हुई इस बेरोजगारी के प्रमुख कारणों में से एक है— तेजी से बढ़ती जनसंख्या। पिछले पाँच दशकों में देश की जनसंख्या लगभग चार गुनी हो गई है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 125 करोड को पार कर गई है।
  • यद्यपि सरकार ने विभिन्न योजनाओं के द्वारा रोजगार को अनेक नए अवसर सुलभ कराए हैं, तथापि जिस अनुपात में जनसंख्या वृद्धि हुई है उस अनुपात में रोजगार के अवसर सुलभ करा पाना सम्भव नहीं हो सका, परिणामतः बेरोजगारों की फौज बढ़ती गई।
  • प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में बेरोजगारों की वृद्धि हो रही है। बढ़ती हुई बेरोजगारी से प्रत्येक बुद्धि-सम्पन्न व्यक्ति चिन्तित है। हमारी शिक्षा पद्धति भी दोषपूर्ण है जो रोजगारपरक नहीं है।
  • कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से लाखों स्नातक प्रतिवर्ष निकलते हैं। किन्तु उनमें से कुछ ही रोजगार पाने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। उनकी डिग्री रोजी-रोटी को जुटा पाने में उनकी सहायता नहीं कर पाती।
  • वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति ने उद्योगों का मशीनीकरण कर दिया है परिणामतः आदमी के स्थान पर मशीन से काम लिया जाने लगा। मशीन आदमी की तुलना में अधिक कुशलता से एवं अधिक गुणवत्ता से कम कीमत पर कार्य सम्पन्न कर देती है, अतः स्वाभाविक रूप से आदमी को हटाकर मशीन से काम लिया जाने लगा।
  • फिर एक मशीन सैकड़ों श्रमिकों का काम अकेले ही कर देती है। परिणामतः औद्योगिक क्षेत्रों में बेकारी पनप गई। लघु उद्योग एवं कुटीर उद्योगों की खस्ता हालत ने भी बेरोजगारी में वृद्धि की है।

बेरोजगारी दूर करने के उपाय

भारत एक विकासशील राष्ट्र है, किन्तु आर्थिक संकट से घिरा हुआ है। उसके पास इतनी क्षमता भी नहीं है कि वह अपने संसाधनों से प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार सुलभ करा सके। ऐसी स्थिति में न तो यह कल्पना की जा सकती है है कि वह प्रत्येक व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता दे सकता है और न ही यह सम्भव है, किन्तु सरकार का यह कर्तव्य अवश्य है कि वह बेरोजगारी को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए। यद्यपि बेरोजगारी की समस्या भारत में सुरसा के मुख की तरह बढ़ती जा रही है फिर भी हर समस्या का निदान तो होता ही है।

  • भारत में वर्तमान में जनसंख्या वृद्धि 2.1% वार्षिक है जिसे रोकना अत्यावश्यक है। अब ‘हम दो हमारे दो’ का युग भी बीत चुका, अब तो ‘एक दम्पति एक सन्तान’ का नारा ही महत्वपूर्ण होगा, इसके लिए यदि सरकार को कड़ाई भी करनी पड़े तो वोट बैंक की चिन्ता किए बिना उसे इस ओर सख्ती करनी होगी। यह कठोरता भले ही किसी भी प्रकार की हो।
  • देश में आधारभूत उद्योगों के पर्याप्त विनियोग के पश्चात् उपभोग वस्तुओं से सम्बन्धित उद्योगों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इन उद्योगों में उत्पादन के साथ ही वितरण परिवहन, आदि में रोजगार उपलब्ध होंगे।
  • शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाना आवश्यक है। हमारी शिक्षा पद्धति भी दोषपूर्ण है जो रोजगारपरक नहीं है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से लाखों स्नातक प्रतिवर्ष निकलते हैं। किन्तु उनमें से कुछ ही रोजगार पाने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। उनकी डिग्री रोजी-रोटी को जुटा पाने में उनकी सहायता नहीं कर पाती।
  • धन्धों का विकास गांवों में कृषि सहायक उद्योग-धन्धों का विकास किया जाना आवश्यक है। इससे क्रषक खाली समय में अनेक कार्य कर सकेंगे। बागवानी, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य अथवा मुर्गी पालन, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, आदि ऐसे ही धन्धे है।
  • कुटीरोद्योग एवं लघु उद्योगों के विकास से ग्रामीण एवं शहरी दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सुलभ कराए जा सकते हैं।
  • आज स्थिति यह है कि एक ओर विशिष्ट प्रकार के दक्ष श्रमिक नहीं मिल रहे हैं तो दूसरे प्रकार के दक्ष श्रमिकों को कार्य नहीं मिल रहा है।

Conclusion :

बेरोजगारी की दूर करने के सरकार द्वारा अनेक प्रयास किए गए है जिनमे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम, ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना आदि कार्यक्रम शामिल है। लेकिन अभी भी कुछ सख्त कदम उठाने बाकि है। बेरोजगारी को दूर करना देश का सबसे प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। नागरिकों को अधिक नौकरियों के निर्माण के साथ ही रोजगार के लिए सही कौशल प्राप्त करने के लिए प्रयास करना चाहिए।

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Abhilash Kumar

The author Abhilash Kumar

Abhilash Kumar is the founder of “Studyguru Pathshala” brand & its products, i.e. YouTube, Books, PDF eBooks etc. He is one of the most successful bloggers in India. He is the author of India’s the best seller “Descriptive Book”. As a social activist, he has distributed his books to millions of deprived and needy students.

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