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Essay on role of youth in making india corruption free

Essay on role of youth in making india corruption free

Introduction :

“The youth of a nation is the trustees of prosperity.” These lines of Benjamin Franklin truly justifies that youth are the backbone of a country for its development. No country can expect its better future if it is filled with crime and corruption. Corruption has now spread deep into the society and has become very strong due to its many roots. There are many forms of corruption such as bribery, black-marketing, deliberately increasing the price, selling expensive by bringing cheap goods etc. Corruption can be of different types which is spread in every field like education, sports, politics.

  • Due to corruption, a person does not understand his responsibilities. Corruption can happen in many ways like theft, dishonesty, misuse of public property, unnecessary waste of time, exploitation, scam etc.
  • Recently, corruption was at its peak during lockdown period and people are forced to face it.
  • Corruption is the problem of all developing countries, the main reason for corruption is the flexible laws of the country.
  • Most of the corrupt are acquitted on the basis of money, the criminal is not afraid of punishment.
  • Greed and dissatisfaction is a disorder that makes a person fall down a lot. There is always a strong desire to increase one’s wealth in the mind of a person.
  • Due to the flexibility of our constitution, there is not much fear of punishment among the criminals. Therefore, there is a need to make strict laws against corruption.

Conclusion :

Although Central Vigilance Commission (CVC), Lokpal and Lokayukts are there for surveillance. Moreover, there are many laws in India like The Prevention of Corruption Act (POCA), 1988 and The Prevention of Money laundering Act, 2002 to curb the corruption but without passionate involvement of youth in fighting against corruption, we can’t get rid of it permanently. Youth has willpower and energy to aware others and also has knowledge of social media to make people together against all types of corrupt activities. Youth can also take an oath that they won’t get involve themselves in corruption in future. Just like a small lamp can remove the darkness of the entire room, a single honest person can remove the corruption from the society to a great extent.

Corruption essay in english for students :

Introduction :

Corruption is the misuse of public property, position, power and authority for fulfilling the selfish purposes to gain personal satisfactions. Corruption is the misuse of authority for personal gain of an individual or group. It is the unfair use of public power for some private advantages by breaking some rules and regulations made by government. Now a day, it has been spread deeply in the society and has become very strong because of its lots of roots. It is like a cancer which once generated cannot be ended without medicine.

  • Corruption is of different types which has been spread in every filed like education, sports, games, politics, etc. Because of the corruption, one does not understand his responsibilities at work place.
  • Corruptions are like theft, dishonesty, wastage of public property, wastage of time unnecessarily, exploitation, scams, scandals, etc are the various types of corruption. (Corruption essay in english)
  • It has made its roots in both developing and well developed countries. We need to remove corruption from our society and country in order to get real freedom from the slavery. 
  • We have forgotten the real responsibility of being a human just because of the money. We need to understand that money is not everything and it is not a stable thing.
  • We cannot keep it forever to us, it can only give us greediness and corruption. We should give importance to the value based life and not money based life.
  • It is true that we need lot of money to live a common life however it is not true that just for our selfishness and greediness; we should play someone’s life or money in some unfair ways.  (Essay on Corruption in India)
  • India is a famous country for its democracy but it is corruption which disturbs its democratic system. Politicians are highly responsible for all type of corruption in the country.

Conclusion :

We chose our leaders by having lots of expectations to them to lead our country in the right direction. We should select very honest and trustworthy leaders to lead our India just like our earlier Indian leaders such as Lal Bahadur Shastri, Sardar Vallabh Bhai Patel, etc. Only such political leaders can reduce and finally end the corruption from India. Youths of the country should also need to be aware of all the reasons of corruption and get together to solve it.  (corruption essay in english easy words)

 

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Essay on Omicron in hindi

Essay on Omicron in hindi :

Introduction :

“जीवन एक साइकिल की सवारी करने जैसा है अपना संतुलन बनाए रखने के लिए, आपको चलते रहना होगा।” अल्बर्ट आइंस्टीन की उपरोक्त पंक्ति पूरी तरह से कोविड-19 की वर्तमान स्थिति को प्रकट करती है। कोविड-19 की दूसरी लहर ने हमें बहुत कुछ सिखाया है और इसके प्रभाव को भुलाया नहीं जा सकता। हाल ही में अफ्रीका में कोविड-19 के एक नए प्रकार का पता चला है जिसे ओमिक्रॉन कहा जाता है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा “वेरिएंट ऑफ़ कंसर्न” के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ओमिक्रॉन को विश्व स्तर पर प्रमुख रूप से डेल्टा प्लस के साथ-साथ कोविड-19 वेरिएंट की सबसे अधिक घातक श्रेणी में रखा गया है।

  • इस संस्करण (वेरिएंट) में बड़ी संख्या में उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) होते हैं। यह गंभीर चिंता का कारण हैं क्योंकि ये नए संस्करण टीके से प्राप्त प्रतिरक्षा से बचने में शक्षम हैं।
  • वर्तमान टीके डेल्टा वेरिएंट के साथ साथ ओमिक्रॉन से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक हैं। ओमिक्रॉन बड़ी चिंता का कारण इसलिए है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में म्यूटेशन होता हैं जिससे इसकी संप्रेषणीयता में वृद्धि हुई है।
  • भारत में टीकाकरण अभियान ने गति पकड़ ली है। 40 प्रतिशत से अधिक भारतीयों को पूरी तरह से टीका लगाया गया है और 80 प्रतिशत से अधिक लोगो ने कम से कम पहली डोज़ ले ली है।
  • हमें इस नए संस्करण से खुद को बचाने के लिए टीका लगवाना चाहिए। टीके के कारण वायरस के संचलन में कमी आती हैं, नए म्यूटेशन की संभावना भी कम हो जाती हैं । अन्य सुरक्षात्मक उपायों के साथ टीकाकरण से हम इस खतरे को और कम कर सकते है और इस वायरस को फैलने से रोका जा सकता है।
  • इन सुरक्षात्मक उपायों में अच्छी तरह से फिट होने वाला मास्क पहनना, शारीरिक दूरी बनाए रखना, इनडोर स्थानों के वेंटिलेशन में सुधार करना, भीड़-भाड़ वाली और बंद जगहों पर जाने से बचना, नियमित रूप से हाथ साफ करना और छीकते वक़्त टिश्यू या रुमाल का इस्तेमाल करना आदि शामिल है।

Conclusion :

सरकार टीकाकरण के लिए निरंतर विभिन्न कदम उठा रही है, जिसमें पात्र समूहों के लिए बूस्टर खुराक सहित सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों को लक्षित करना शामिल है। इसके अलावा सीमित स्थानों पर भीड़ और लोगों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए सामाजिक उपाय किये जा रहे है। हमें विश्व स्वास्थ्य संगठन और सरकार द्वारा जारी किए गए कोविड -19 मानदंडों का भी पालन करना चाहिए ताकि हम जल्द से जल्द इस वायरस की श्रृंखला को तोड़ सकें क्योंकि हमारे बुजुर्ग कहते है न की “रोकथाम इलाज से बेहतर है।”

कोरोना महामारी में जीवन पर निबंध – Essay on Life during covid-19 in hindi

Introduction :

कोरोना महामारी ने हमारे दैनिक जीवन को पूरी बदल कर रख दिया है। इस महामारी के कारण लाखो लोग बुरी तरह से प्रभावित हुए है, जो या तो बीमार हैं या इस बीमारी के फैलने के कारण मारे जा रहे हैं। इस वायरल संक्रमण के सबसे आम लक्षण बुखार, सर्दी, खांसी, हड्डियों में दर्द और सांस लेने में समस्या है। यह, पहली बार लोगों को प्रभावित करने वाला एक नया वायरल रोग होने के कारण, अभी तक इसकी वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसलिए अतिरिक्त सावधानी बरतने पर जोर दिया जाना बहुत जरुरी है, जैसे कि स्वच्छता, नियमित रूप से हाथ धोना, सामाजिक दूरी और मास्क पहनना आदि।

विभिन्न उद्योग और व्यापारिक क्षेत्र इस महामारी के कारण प्रभावित हुए हैं जिनमें फार्मास्यूटिकल्स उद्योग, बिजली क्षेत्र और पर्यटन शामिल हैं। यह वायरस नागरिकों के दैनिक जीवन के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी भारी प्रभाव डाल रहा है। एक देश से दूसरे देश की यात्रा करने पर प्रतिबंध है। यात्रा के दौरान, कोरोना मामलों की संख्या बढ़ते हुए देखी गयी है जब परीक्षण किया गया, खासकर जब वे अंतरराष्ट्रीय दौरे से लौट रहे हों।

  • कोरोना वायरस ने भारत की शिक्षा को प्रभावित किया है। फिलहाल मार्च महीने से लॉकडाउन की वजह से विद्यालय बंद कर दिए गए है। सरकार ने अस्थायी रूप से स्कूलों और कॉलेजों को बंद कर दिया।
  • शिक्षा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण समय है क्यों कि इस अवधि के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। इसके साथ बोर्ड परीक्षाओं और नर्सरी स्कूल प्रवेश इत्यादि सब रुक गए है।
  • शिक्षा संस्थानों के बंद होने का कारण दुनिया भर में लगभग 600  मिलियन शिक्षार्थियों को प्रभावित करने की आशंका जातायी जा रही है।
  • ऑनलाइन क्लासेस के ज़रिये विद्यार्थी इस प्रकार के अनोखे शिक्षा प्रणाली को समझ पाए है।
  • लॉकडाउन के दुष्प्रभाव को ऑनलाइन शिक्षा पद्धति से कम कर दिया है।
  • केंद्र सरकार ने शिक्षा प्रणाली को विकसित करने हेतु पहले साल की तुलना में इस साल व्यय अधिक किया है ताकि कोरोना संकटकाल के नकारात्मक प्रभाव शिक्षा पर न पड़े। सीबीएसई ने विशेष टोल फ्री नंबर लागू किया है जिसके माध्यम से विद्यार्थी घर पर रहकर अधिकारयों से मदद ले सकते है।

बारहवीं कक्षा के विषय संबंधित पुस्तकें ऑनलाइन जारी की गयी है ताकि बच्चो की शिक्षा में बिलकुल बाधा न आये। लॉक डाउन में कुछ बच्चे शिक्षा को लेकर ज़्यादा गंभीर नहीं रहे, वह सोशल मीडिया में चैट मोबाइल में गेम्स खेलते है और अपने कीमती समय को बर्बाद कर रहे थे। अभी माता -पिता की यह जिम्मेदारी है कि लॉकडाउन में भी बच्चे घर पर अनुशासन का पालन करे और ऑनलाइन शिक्षा को गम्भीरतापूर्वक ले और खाली समय में ऑनलाइन एनिमेटेड शिक्षा संबंधित वीडियोस और विभिन्न ऑनलाइन वर्कशीट्स के प्रश्नो को हल करें।

  • कोविड-19 की महामारी ने आज समूचे विश्व की अर्थव्यवस्था, शैक्षिक व्यवस्था तथा सामाजिक स्तर को अत्यंत प्रभावित किया है।
  • कोरोना वायरस ने पुरे विश्व केशक्तिशाली देशों को घुटनो पर लाकर रख दिया है। सारे देश मिलकर कोरोना वायरस से मुक्ति पाने में जुटी है और डॉक्टर्स ,नर्सेज एकजुट होकर लड़ रहे है। उनकी जितनी भी सराहना की जाए कम होगी।
  • नरेंद्र मोदी जी ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कठोर कदम उठाये है जो हमारे देश की भलाई के लिए है और हम सभी को एक भारतीय होने के नाते इस कठोर समय में उनका साथ देना चाहिए ताकि हम देश को रोगमुक्त कर सके। ऐसा करने पर जल्द ही ज़िन्दगी फिर से वापस पटरी पर आ जाएगी। कोरोना वायरस के खिलाफ यह महायुद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक हम इस वायरस को जड़ से ख़त्म ने करे।
  • एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग हो या फिर लैब में लोगों की जांच, सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए कई तरह की तैयारी की है। इसके अलावा किसी भी तरह की अफवाह से बचने, खुद की सुरक्षा के लिए कुछ निर्देश जारी किए हैं जिससे कि कोरोना वायरस से निपटा जा सकता है।

Conclusion :

कोरोनावायरस से बचाव के लिए वर्तमान में कोवैक्सीन तथा कोवीशील्ड नामक दो टीके लगाए जाना शुरू हो चुके है। एक्सपर्ट्स के अनुसार दोनों ही टीके सुरक्षित है। इस वैक्सीन की दो डोज निश्चित समय के अंतराल पर दी जाती है। अभी यह वैक्सीन आयु के अनुसार देश में लगाई जा रही है।लॉकडाउन ने प्रवासी श्रमिकों को भी प्रभावित किया है, जिनमें से कई उद्योगों को बंद करने के कारण अपनी नौकरी खो चुके हैं और सरकार ने प्रवासियों के लिए राहत उपायों की घोषणा भी की ताकि वे अपने अपने घर वापस लौट सके। सभी सरकारें, स्वास्थ्य संगठन और अन्य प्राधिकरण लगातार कोरोना से प्रभावित मामलों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। डॉक्टर और सम्बंधित अधिकारी इन दिनों स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता को बनाए रखने में बहुत कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

कोरोना वायरस का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

Introduction :

कोरोनावायरस (COVID-19) एक संक्रामक रोग है जो कोरोनावायरस के कारण होता है। इसकी शुरुआत पहली बार दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से हुई। डब्ल्यूएचओ ने 30 जनवरी को कोरोनवायरस को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। कोरोनावायरस न केवल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है बल्कि दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर रहा है। विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, व्यापार के मामले में, चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। विश्व के निर्यात का 13% और आयात का 11% केवल चीन से होता है।

दुनिया के कई उद्योग अपने कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। पुरे विश्व में खरीदी जाने वाली लगभग एक तिहाई मशीनरी चीन से आती है, इसलिए कोरोनवायरस ने वैश्विक आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। चीन में कई कारखाने अब बंद हो गए हैं, निर्भर कंपनियों के लिए उत्पादन भी बंद हो गया है। उत्पादन में मंदी के कारण खपत में भी गिरावट आई है और इस तरह से दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है। कोरोनोवायरस फैलने के कारण लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण पर्यटन उद्योग को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कोरोना वायरस का आयात पर प्रभाव

  • इस वायरस से हवाई यात्रा, शेयर बाज़ार, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं सहित लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
  • यह वायरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है।
  • इन दो अर्थव्यवस्थाओं, जिन्हें वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में जाना जाता है, संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है।
  • निवेशकों के बाज़ारों से बाहर निकलने के कारण शेयर बाज़ार सूचकांक में लगातार गिरावट आई है। लोग बड़ी राशि को अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र यथा- ‘सरकारी बाॅण्ड’ में लगा रहे हैं जिससे कीमतों में तेज़ी तथा उत्पादकता में कमी देखी गई है।
  • अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब अनुभव हाल ही में कोरोना वायरस के कारण महसूस किया गया, ध्यातव्य है कि अमेरिकी बाज़ार में 12% से अधिक की गिरावट आई है।
  • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि जो निवेशक ऐसे संकट के समय सामान्यत: स्वर्ण में निवेश करते हैं, इस संकट के समय उन्होंने इसका भी बहिष्कार कर दिया जिससे सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, तथा लोगों ने सरकारी गारंटी युक्त ‘ट्रेज़री बिल’ (Treasury Bills) में अधिक निवेश करना उचित समझा।
  • Apple, Nvidia, Adidas जैसी कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ये चीन के आपूर्तिकर्त्ताओं पर निर्भर हैं, इन्हें भविष्य में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव

  • भारत जब अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में इस वायरस का केवल सतही प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा ऐसे कठिन समय में समस्या का समाधान मात्र ‘एयर लिफ्टिंग’ से संभव नहीं है।
  • यह समस्या न केवल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करेगी, अपितु यह भारत के फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।
  • निर्यात, जिसे अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है, इसमें वैश्विक मंदी की स्थिति में और गिरावट देखी जा सकती है, साथ ही निवेश में भी गिरावट आ सकती है।
  • भारतीय कंपनियाँ चीन आधारित ‘वैश्विक आपूर्ति शृंखला’ में शामिल प्रमुख भागीदार नहीं हैं, अत: भारतीय कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित नहीं होंगी।
  • दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जो कि वृहद् अर्थव्यवस्था और उच्च मुद्रास्फीति के चलते अच्छी खबर है।
  • भारत सरकार को लगातार विकास की गति का अवलोकन करने की आवश्यकता है, साथ ही चीन पर निर्भर भारतीय उद्योगों को आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करनी चाहिये।
  • कोरोना वायरस जैसी बीमारी की पहचान, प्रभाव, प्रसार एवं रोकथाम पर चर्चा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जानी चाहिये ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।

Conclusion :

वायरस जनित यह संकट किसी अन्य वित्तीय संकट से बिलकुल अलग है। अन्य वित्तीय संकटों का समाधान समय-परीक्षणित उपायों जैसे- दर में कटौती, बेल-आउट पैकेज (विशेष वित्तीय प्रोत्साहन) आदि से किया जा सकता है, परंतु वायरस जनित संकट का समाधान इन वित्तीय उपायों द्वारा किया जाना संभव नहीं है। ऑटोमोबाइल उद्योग पहले ही आर्थिक मंदी के कारण संकट में है और अब माल और सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन में कमी आ रही है। चीन से आपूर्ति में रुकावट के कारण वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है। यद्यपि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कोरोनोवायरस के सटीक प्रभाव को निर्धारित करना मुश्किल है, फिर भी यह स्पष्ट है कि यह प्रभाव लंबे समय तक रहेगा।

अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का प्रभाव पर निबंध

Introduction :

कोरोना वायरस एक प्रकार का वायरस है जो मानव और अन्य स्तनधारियों के श्वसन पथ को प्रभावित करता है। ये सामान्य सर्दी, निमोनिया और अन्य श्वसन लक्षणों से जुड़े हैं। कोरोना वायरस दुनिया भर में बीमारी बन गया है और दुनिया के सभी देश इसका सामना कर रहे हैं। जिसके कारण दुनिया की आबादी अपने घर के अंदर रहने को मजबूर है। कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण देश में 53% तक व्यवसाय प्रभावित हुए है।

कोरोना वायरस का प्रकोप सबसे पहले 31 दिसंबर, 2019 को चीन के वुहान में पड़ा। विश्व स्वास्थ्य संगठन इसको रोकने के उपायों के बारे में देशों को सलाह देने के लिए वैश्विक विशेषज्ञों, सरकारों और अन्य स्वास्थ्य संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है। व्यापार के मामले में, चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। चीन विश्व के कुल निर्यात का 13% और आयात का 11% हिस्सेदार है।

इसका असर भारतीय उद्योग पर पड़ेगा। भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक आयात चीन से करीब 45% है। दुनिया भर में भारत से खरीदी जाने वाली लगभग एक तिहाई मशीनरी चीन से आती है और लगभग 90% मोबाइल फोन चीन से आते हैं। इसलिए, हम कह सकते हैं कि कोरोनावायरस के मौजूदा प्रकोप के कारण, चीन पर आयात निर्भरता का भारतीय उद्योग पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। देश भर में बड़ी संख्या में किसानों को भी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

  • इस वायरस से हवाई यात्रा, शेयर बाज़ार, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं सहित लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
  • यह वायरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है।
  • इन दो अर्थव्यवस्थाओं, जिन्हें वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में जाना जाता है, संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है।
  • निवेशकों के बाज़ारों से बाहर निकलने के कारण शेयर बाज़ार सूचकांक में लगातार गिरावट आई है। लोग बड़ी राशि को अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र यथा- ‘सरकारी बाॅण्ड’ में लगा रहे हैं जिससे कीमतों में तेज़ी तथा उत्पादकता में कमी देखी गई है।
  • अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब अनुभव हाल ही में कोरोना वायरस के कारण महसूस किया गया, ध्यातव्य है कि अमेरिकी बाज़ार में 12% से अधिक की गिरावट आई है।
  • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि जो निवेशक ऐसे संकट के समय सामान्यत: स्वर्ण में निवेश करते हैं, इस संकट के समय उन्होंने इसका भी बहिष्कार कर दिया जिससे सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, तथा लोगों ने सरकारी गारंटी युक्त ‘ट्रेज़री बिल’ (Treasury Bills) में अधिक निवेश करना उचित समझा।
  • Apple, Nvidia, Adidas जैसी कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ये चीन के आपूर्तिकर्त्ताओं पर निर्भर हैं, इन्हें भविष्य में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव

  • भारत जब अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में इस वायरस का केवल सतही प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा ऐसे कठिन समय में समस्या का समाधान मात्र ‘एयर लिफ्टिंग’ से संभव नहीं है।
  • यह समस्या न केवल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करेगी, अपितु यह भारत के फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।
  • निर्यात, जिसे अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है, इसमें वैश्विक मंदी की स्थिति में और गिरावट देखी जा सकती है, साथ ही निवेश में भी गिरावट आ सकती है।
  • भारतीय कंपनियाँ चीन आधारित ‘वैश्विक आपूर्ति शृंखला’ में शामिल प्रमुख भागीदार नहीं हैं, अत: भारतीय कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित नहीं होंगी।
  • दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जो कि वृहद् अर्थव्यवस्था और उच्च मुद्रास्फीति के चलते अच्छी खबर है।
  • भारत सरकार को लगातार विकास की गति का अवलोकन करने की आवश्यकता है, साथ ही चीन पर निर्भर भारतीय उद्योगों को आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करनी चाहिये।
  • कोरोना वायरस जैसी बीमारी की पहचान, प्रभाव, प्रसार एवं रोकथाम पर चर्चा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जानी चाहिये ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।
  • वायरस जनित यह संकट किसी अन्य वित्तीय संकट से बिलकुल अलग है। अन्य वित्तीय संकटों का समाधान समय-परीक्षणित उपायों जैसे- दर में कटौती, बेल-आउट पैकेज (विशेष वित्तीय प्रोत्साहन) आदि से किया जा सकता है, परंतु वायरस जनित संकट का समाधान इन वित्तीय उपायों द्वारा किया जाना संभव नहीं है।

Conclusion :

ऑटोमोबाइल उद्योग पहले ही आर्थिक मंदी के कारण संकट में है और अब माल और सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन में कमी आ रही है। होटल और एयरलाइंस जैसे विभिन्न व्यवसाय अपने कर्मचारियों का वेतन काट रहे हैं और छंटनी भी कर रहे हैं। भारत में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों ने अस्थायी रूप से काम को निलंबित कर दिया है। चीन से आपूर्ति में रुकावट के कारण वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है। यद्यपि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कोरोनोवायरस के सटीक प्रभाव को निर्धारित करना मुश्किल है, फिर भी यह स्पष्ट है कि यह प्रभाव लंबे समय तक रहेगा। विश्व बैंक और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने 2021 के लिए भारत की वृद्धि को कम कर दिया है, हालांकि, वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत के लिए जीडीपी विकास दर का आकलन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष  ने 1.9% बताया है जो जी -20 देशों में सबसे अधिक है।

भारत में COVID-19 का सामाजिक प्रभाव पर निबंध

Introduction :

कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी एक वैश्विक समस्या बन चुकी है और इस बीमारी का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार ने 24 मार्च, 2020 को देश में लॉकडाउन लागू किया। सरकार ने कोरोनोवायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में सफलता का दावा किया है, जिसमें कहा गया है कि यदि राष्ट्रव्यापी तालाबंदी नहीं की गई होती तो यहाँ COVID-19 मामलों की संख्या अधिक होती। COVID-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन में हमारे खानपान से लेकर हमारी कार्यशैली बदल चुकी है जिसके कारण शारीरिक गतिविधियो में कमी आयी है जिसके कारण मोटापा, मधुमेह और हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा दिया है।

कोरोना वायरस की वजह से कारोबार ठप्प पड़ गए हैं, कई देशों में अंतरराष्ट्रीय यात्राएं रद्द कर दी गई हैं, होटल-रेस्त्रां तो बंद कर दिए गए हैं, कई कंपनियां ख़ासतौर पर, आईटी सेक्टर की कंपनियों ने लोगों को वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की सुविधा दे रही हैं। दुनिया भर के क्षेत्रों में इस महामारी का प्रभाव दिखाई दे रहा है, लेकिन भारत में कमज़ोर वर्गों, महिलाओं और बच्चों पर इसका प्रभाव सबसे अधिक हुआ है। लॉकडाउन के परिणामस्वरूप, समाज के कमजोर वर्ग के बीच कुपोषण की संभावना बढ़ गयी है।

भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने हाल ही में COVID-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई में सरकार की पहल के रूप में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्ना योजना (PMGKAY) के तहत 12.96 लाख मीट्रिक टन अनाज आवंटित किया। प्रवासी श्रमिकों का मुद्दा इस महामारी का सबसे प्रमुख मुद्दा रहा, जहाँ लाखों लोग बेरोजगार हो गए और बिना पैसे, भोजन और आश्रय के अपने अपने घरो तक पैदल जाने को मजबूर हुए हलाकि सरकार ने बाद में उनके वापस लौटने की व्यवस्था भी कराई।

शिक्षा के क्षेत्र में

  • अप्रैल माह के अंत में जब विश्व के अधिकांश देशों में लॉकडाउन लागू किया गया तो विद्यालयों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था, जिसके कारण विश्व के लगभग 90 प्रतिशत छात्रों की शिक्षा बाधित हुई थी और विश्व के लगभग 1.5 बिलियन से अधिक स्कूली छात्र प्रभावित हुए थे।
  • कोरोना वायरस के कारण शिक्षा में आई इस बाधा का सबसे अधिक प्रभाव गरीब छात्रों पर देखने को मिला है और अधिकांश छात्र ऑनलाइन शिक्षा के माध्यमों का उपयोग नहीं कर सकते हैं, इसके कारण कई छात्रों विशेषतः छात्राओं के वापस स्कूल न जाने की संभावना बढ़ गई है।
  • नवंबर 2020 तक 30 देशों के 572 मिलियन छात्र इस महामारी के कारण प्रभावित हुए हैं, जो कि दुनिया भर में नामांकित छात्रों का 33% है।

लैंगिक हिंसा में वृद्धि

  • लॉकडाउन और स्कूल बंद होने से बच्चों के विरुद्ध लैंगिक हिंसा की स्थिति भी काफी खराब हुई है। कई देशों ने घरेलू हिंसा और लैंगिक हिंसा के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।
  • जहाँ एक ओर बच्चों के विरुद्ध अपराध के मामलों में वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर अधिकांश देशों में बच्चों एवं महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा की रोकथाम से संबंधित सेवाएँ भी बाधित हुई हैं।

आर्थिक प्रभाव

  • वैश्विक स्तर महामारी के कारण वर्ष 2020 में बहुआयामी गरीबी में रहने वाले बच्चों की संख्या में 15% तक बढ़ोतरी हुई है और इसमें अतिरिक्त 150 मिलियन बच्चे शामिल हो गए हैं।
  • बहुआयामी गरीबी के निर्धारण में लोगों द्वारा दैनिक जीवन में अनुभव किये जाने वाले सभी अभावों/कमी जैसे- खराब स्वास्थ्य, शिक्षा की कमी, निम्न जीवन स्तर, कार्य की खराब गुणवत्ता, हिंसा का खतरा आदि को समाहित किया जाता है। 
  • महामारी का दूसरा सामाजिक प्रभाव ‘नस्लभेदी प्रभाव’ का उत्पन्न होना है। जैसा कि हमें मालूम है इस बीमारी की शुरुआत चीन से हुई है इसलिए चीनी नागरिकों को आगामी कुछ वर्षो तक इस महामारी के चलते जाना-पहचाना जा सकता है।
  • भारत में तो नॉर्थ ईस्ट के भारतीयों पर पहले से ही चीनी, नेपाली, चिंकी-पिंकी, मोमोज़ जैसी नस्लभेदी टिप्पणियां होती रही हैं। अब इस क्रम में कोरोना का नाम भी जुड़ना तय है, जिसे एक सामाजिक समस्या के रूप में देखा जाना चाहिए। 

इस सम्बन्ध में उपाय

  • सभी देशों की सरकारों को डिजिटल डिवाइड को कम करके यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिये कि सभी बच्चों को सीखने के समान अवसर प्राप्त हों और किसी भी छात्र के सीखने की क्षमता प्रभावित न हो।
  • सभी की पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित की जानी चाहिये और जिन देशों में टीकाकरण अभियान प्रभावित हुए हैं उन्हें फिर से शुरू किया जाना चाहिये।
  • बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाना चाहिये और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और लैंगिक हिंसा जैसे मुद्दों को संबोधित किया जाना चाहिये।

Conclusion :

सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता आदि तक बच्चों की पहुँच को बढ़ाने का प्रयास किया जाए और पर्यावरणीय अवमूल्यन तथा जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को संबोधित किया जाए। बाल गरीबी की दर में कमी करने का प्रयास किया जाए और बच्चों की स्थिति में समावेशी सुधार सुनिश्चित किया जाए। सरकार को समस्याओं के समाधान को खोजने का प्रयास करना चाहिए ताकि ऐसी समस्याएँ दोबारा पैदा न हो। इस वायरस से लड़ने के लिए सभी व्यक्तियों, सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों को एकसाथ मिलकर योजना बनाकर सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।

पर्यावरण पर कोरोना वायरस का सकारात्मक प्रभाव पर निबंध

Introduction :

कोरोना वायरस दुनिया भर में महामारी बन चुका है और सभी देश इसका सामना कर रहे हैं। जिसके कारण सभी देशो के लोग अपने घरो के अंदर रहने को मजबूर है। कोरोना वायरस के कारण देश में व्यावसायिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोरोनोवायरस ने दुनिया भर में बहुत सारे लोगों का जीवन ले चूका है। कोरोनोवायरस के प्रसार को रोकने के लिए, विभिन्न देशों की सरकारें इसके प्रसार को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठा रही हैं। जहां तक हमारे पर्यावरण का सवाल है, इसपर कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे है। अब धुएँ का उत्सर्जन कम हो गया है जिसके परिणामस्वरूप आसमान स्वच्छ हो गया है।

यही नहीं, सड़को पर वाहनों का उपयोग भी कम हुआ है, जिसके कारण  CO2 गैसों का उत्सर्जन भी काम हुआ है। और अन्य गैसे, जैसे नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी पर्यावरण में सीमित हो पाया है। यह इंगित करता है कि हवा अधिक शुद्ध हो गई है और हम शुद्ध हवा में सांस ले सकते हैं। कोरोनावायरस से निपटने के लिए, कंपनियों ने श्रमिकों को घर से काम करने के लिए कहा है। इससे सड़क पर वाहन कम हो गए हैं। इसके अलावा, प्लास्टिक की खपत भी कम हो गई है क्योंकि अब लोग डिस्पोजेबल ग्लास का प्रयोग चाय या कॉफी के लिए नहीं कर रहे है।

पर्यावरण को फायदा

  • भारत में कई राज्यों से उन नदियों के अचानक साफ हो जाने की ख़बरें आ रही हैं जिनके प्रदूषण को दूर करने के असफल प्रयास दशकों से चल रहे हैं. दिल्ली की जीवनदायिनी यमुना नदी के बारे में भी ऐसी ही ख़बरें आ रही हैं.
  • पिछले दिनों सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें आईं जिन्हें डालने वालों ने दावा किया कि दिल्ली में जिस यमुना का पानी काला और झाग भरा हुआ करता था, उसी यमुना में आज कल साफ पानी बह रहा है. 
  • झील नगरी नैनीताल समेत भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल सभी में झीलों का पानी न केवल पारदर्शी और निर्मल दिखाई दे रहा है, बल्कि इन झीलों की खूबसूरती भी बढ़ गई है.
  • पिछले कई साल से झील के जलस्तर में जो गिरावट दिखती थी, वह भी इस बार नहीं दिख रही. पर्यावरणीय तौर पर इस कारण हवा भी इतनी शुद्ध है कि शहरों से पहाड़ों की चोटियां साफ दिख रही हैं.
  • उत्तराखंड स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के निदेशक के अनुसार हिमालय की धवल चोटियां साफ दिखने लगी हैं. लॉकडाउन के कारण वायुमंडल में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिला है. इससे पहले कभी उत्तर भारत के ऊपरी क्षेत्र में वायु प्रदूषण का इतना कम स्तर देखने को नहीं मिला.

लॉकडाउन के बाद 27 मार्च से कुछ इलाकों में रूक-रूक के बारिश हो रही है. इससे हवा में मौजूद एयरोसॉल नीचे आ गए. यह लिक्विड और सॉलिड से बने ऐसे सूक्ष्म कण हैं, जिनके कारण फेफड़ों और हार्ट को नुकसान होता है. एयरोसॉल की वजह से ही विजिबिलिटी घटती है. जिन शहरों की एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI ख़तरे के निशान से ऊपर होते थे. वहां आसमान गहरा नीला दिखने लगा है. न तो सड़कों पर वाहन चल रहे हैं और न ही आसमां में हवाई जहाज. बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों जैसे अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी गिरावट आई है. इससे वातावरण में डस्ट पार्टिकल न के बराबर हैं और कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन भी सामान्य से बहुत अधिक नीचे आ गया है. इस तरह की हवा मनुष्यों के लिए बेहद लाभदायक है. अगर देखा जाये तो झारखंड के भी शहरों में इस लॉकडाउन का प्रभाव दिखा रहा है.

  • झारखण्ड की राजधानी रांची के कुछ जगहों में मोर देखे जाने की भी सूचना है. रूक रूक के बारिश भी हो रही है. लोग एयर कंडीशनर और कूलर का भी इस्तेमाल नहीं के बराबर कर रहे हैं जो की इस गर्मी के मौसम में एक आश्चर्य घटना है.
  • ध्वनि प्रदूषण भी अभूतपूर्व ढंग से कम हो गया है. तापमान ज्य़ादा होने पे भी उतनी गर्मी नहीं लग रही है जितनी पिछले साल थी.
  • बता दें कि कई महीनों से झारखंड में वाहन प्रदूषण के खिलाफ़ जांच अभियान चलाया जा रहा था. जगह-जगह दोपहिये एवं चार पहिये वाहन, मिनी बस और टेंपो समेत विभिन्न कॉमर्शियल वाहनों के प्रदूषण स्तर को चेक किया जा रहा था और निर्धारित मात्रा से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जा रही थी.
  • इसके बाद भी न तो वाहनों द्वारा छोड़े जा रहे प्रदूषणकारी गैसों की मात्रा कम हो रही थी और न ही वायु प्रदूषण में कमी आ रही थी. लेकिन, कोरोना के भय से सड़क पर चलने वाले वाहनों की संख्य़ा में आयी भारी गिरावट आने के कारण पिछले दो महीनों से से इसमें काफी सुधार दिखता है.
  • वाहनों की आवाजाही न होने से सड़कों से अब धूल के गुबार नहीं उठ रहे हैं. झारखंड का एयर क्वालिटी इंडेक्स वायु प्रदूषण के कम हो जाने से 50-40 के बीच आ गया है जो पिछले साल 150 से 250 तक रहता था.
  • ये हवा मनुष्य के स्वस्थ लिए फायदेमंद है. वायु और धूल प्रदूषण के काफी कम हो जाने से आसमन में रात को सारे तारे दिखा रहे हैं जो पहले नहीं दीखते थे. 
  • ध्वनि प्रदूषण तो इतना कम है की आपकी आवाज दूर तक सुनाई दे रही है. चिड़ियों का चहचहाना सुबह से ही शुरू हो जा रहा है.कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कहा की रात दो बजे भी चिड़ियों की आवाज़ सुनाई दे रही है ख़ासकर कोयल और बुलबुल की. कुछ ऐसी भी चिड़ियाँ नज़र आ रही हैं जो पहले कम दिखती थीं. 

Conclusion :

इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में, जहाँ हम सभी व्यस्त जीवन जी रहे है, हमें हमारी गतिविधियों के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में भी सोचना चाहिए  हालाँकि, अब लॉकडाउन के कारण हम घर पर रहने को मजबूर हैं, हमारे पास अपनी गतिविधियों के बारे में सोचने और सुधार करने के लिए पर्याप्त समय मिल चूका है। इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता कि कोरोनोवायरस का मानव जाति पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। हालांकि, इसने पर्यावरण पर निश्चित रूप से  सकारात्मक प्रभाव डाले है।

कोविड 19 वैक्सीन पर निबंध

Introduction :

भारत सरकार ने एस्ट्रा-ज़ेनेका और भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोविशिल्ड और कोवाक्सिन नाम के कोविड -19 टीकों को मंजूरी दे दी है। इसे देखते हुए हमारे पीएम मोदी जी ने 16 जनवरी, 2021 को कोविड -19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत की, जो हर साल लाखों लोगों की जान बचा सकता है। यह पूरे देश में लागू होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके लिए कुल 3006 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं । हालाँकि भारत में सम्पूर्ण रूप से टीकाकरण करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इसके लिए कम से कम 30 से 40% लोगों का टीकाकरण करने की आवस्यकता होगी ।

  • वैक्सीन हमारे शरीर को किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है. वैक्सीन में किसी जीव के कुछ कमज़ोर या निष्क्रिय अंश होते हैं जो बीमारी का कारण बनते हैं.
  • ये शरीर के ‘इम्यून सिस्टम’ यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण की पहचान करने के लिए प्रेरित करते हैं और उनके ख़िलाफ़ शरीर में एंटीबॉडी बनाते हैं जो बाहरी हमले से लड़ने में हमारे शरीर की मदद करती हैं.
  • वैक्सीन लगने का नकारात्मक असर कम ही लोगों पर होता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके साइड इफ़ेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है.
  • हल्का बुख़ार या ख़ारिश होना, इससे सामान्य दुष्प्रभाव हैं. वैक्सीन लगने के कुछ वक़्त बाद ही हम उस बीमारी से लड़ने की इम्यूनिटी विकसित कर लेते हैं.
  • अमेरिका के सेंटर ऑफ़ डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि वैक्सीन बहुत ज़्यादा शक्तिशाली होती हैं क्योंकि ये अधिकांश दवाओं के विपरीत, किसी बीमारी का इलाज नहीं करतीं, बल्कि उन्हें होने से रोकती हैं.
  • भारत में दो टीके तैयार किए गए हैं. एक का नाम है कोविशील्ड जिसे एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने इसका उत्पादन किया और दूसरा टीका है भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया कोवैक्सीन.

रूस ने अपनी ही कोरोना वैक्सीन तैयार की है जिसका नाम है ‘स्पूतनिक-V’ और इसे वायरस के वर्ज़न में थोड़ बदलाव लाकर तैयार किया गया. इस वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल की अनुमति मिल चुकी है. मॉडर्ना वैक्सीन को भी भारत में इस्तेमाल की मंज़ूरी मिल चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि संक्रमण को रोकने के लिए कम से कम 65-70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगानी होगी, जिसका मतलब है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करना होगा. कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में न सिर्फ करोड़ों लोगों की सेहत को प्रभाव किया है बल्कि समाज के सभी वर्गों में डिप्रेशन, तनाव का कारण भी बनी है. कोविड वैक्सीन लगवाने से एक स्पष्ट और आश्चर्यजनक फायदा मिलता है. ये आपको गंभीर रूप से बीमारी या वायरस की चपेट में आने पर मौत से बचाती है ये अपने आप में खुद हैरतअंगज फायदा है.

  • शोधकर्ताओं का कहना है कि टीकाकरण करानेवाले लोगों को मानसिक स्वास्थ्य मेंमहत्वपूर्ण सुधार का भी अनुभव हो सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि वैक्सीन संभावित तौर पर मानसिक स्वास्थ्य को फायदा पहुंचा सकती है.
  • प्लोस पत्रिका में प्रकाशित रिसर्च का मकसद ये मूल्यांकन करना था कि वैक्सीन का पहला डोज लगवाने से मानसिक परेशानी में कम समय के लिए क्या प्रभाव पड़ते हैं.
  • शोधकर्ताओं ने 8 हजार व्यस्को के मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण रिसर्च के तौर पर 1 मार्च 2020 और 31 मार्च 2021 के बीच किया. रिसर्च में टीकाकरण से संक्षिप्त समय के लिए सीधे प्रभाव का खुलासा हुआ.
  • महत्वपूर्ण बात ये है कि रिसर्च ने टीकाकरण कराने के सरकारात्मक प्रभाव में इजाफा किया. शोधकर्ताओं ने बताया कि हम प्रमाणित करते हैं कि कैसे दिमागी सेहत की परेशानी टीकाकरण करानेवाले और वैक्सीन नहीं लगवानेवालों के बीच अलग हो गई.
  • आर्थिक अनिश्चितता और कोविड-19 से जुड़ी सेहत के जोखिम के बीच तुलना करने पर हमें दिमागी सेहत पर टीकाकरण के कम समय के प्रभाव मालूम हुए. 
  • कोविड-19 वैक्सीन से स्वास्थ्य के जोखिम को कम करने, आर्थिक और सामाजिक नतीजे सुधारने की उम्मीद की जाती है, जिसके बाद दिमागी सेहत के लिए संभावित लाभ होंगे.  डॉक्टर एचके महाजन ने कहा, “कोरोना महामारी ने रोजगार, आय और सेहत समेत लोगों की जिंदगी के कई पहलुओं को प्रभावित किया है.
  • इस वायरल बीमारी के मानसिक पहलू मनोवैज्ञानिक तनाव, चिंता, डिप्रेशन, सामाजिक अलगाव और खुदकुशी के विचार तक सीमित नहीं हैं.” उन्होंने आगे बताया, “बड़े पैमाने पर टीकाकरण ने हर्ड इम्यूनिटी बढ़ाने, लोगों के बीच चिंता कम करने में बड़ा योगदान दिया.
  • उसने आजीविका गंवाने वालों की दोबारा रोजगार के पहलू को भी बढ़ाया. टीकाकरण के गंभीर संक्रमण से सुरक्षा पर जागरुकता फैलने से लोग कोरोना से पहले की स्थिति में धीरे-धीरे लौट रहे हैं. इस तरह ये दिमागी सेहत के मुद्दे जैसे चिंता, डिप्रेशन दूर करने में मदद कर रहा है.”

Conclusion :

वैक्सीन को चरणबद्ध तरीके से लोगो को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके पहले चरण में, सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों का टीकारण किया जाएगा। क्योंकि वे उन लोगों के निकट संपर्क में होते हैं जो कोविड -19 से संक्रमित हैं। फिर इसे पुलिस, सशस्त्र बलों, नगरपालिका कर्मचारियों और अन्य विभागीय कर्मचारियों को प्रदान किया जाएगा। तीसरे चरण में, 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग और वे लोग जिन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप है या जिन्होंने अंग प्रत्यारोपण कराया है, ऐसे लोगो का टीकाकरण किया जाएगा।

उसके बाद, स्वस्थ वयस्कों, किशोरों और बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। केंद्र सरकार स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम कर्मियों पर टीकाकरण का खर्च खुद से वहन करेगी । टीकाकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, सरकार ने CoWIN नामक एक एप्लिकेशन भी विकसित की है, जो कोविड -19 वैक्सीन लाभार्थियों के लिए  वैक्सीन स्टॉक, भंडारण और व्यक्तिगत ट्रैकिंग की सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करने में मददगार साबित हो रही है। कोविड -19 के लिए टीकाकरण भारत में स्वैच्छिक है। यह लोगों को इस बीमारी से बचाने का एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। टीके हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ काम करके बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं।

कोविड 19 वैक्सीन पर निबंध

Introduction :

भारत सरकार ने एस्ट्रा-ज़ेनेका और भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोविशिल्ड और कोवाक्सिन नाम के कोविड -19 टीकों को मंजूरी दे दी है। इसे देखते हुए हमारे पीएम मोदी जी ने 16 जनवरी, 2021 को कोविड -19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत की, जो हर साल लाखों लोगों की जान बचा सकता है। यह पूरे देश में लागू होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके लिए कुल 3006 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं । हालाँकि भारत में सम्पूर्ण रूप से टीकाकरण करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इसके लिए कम से कम 30 से 40% लोगों का टीकाकरण करने की आवस्यकता होगी ।

  • वैक्सीन हमारे शरीर को किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है. वैक्सीन में किसी जीव के कुछ कमज़ोर या निष्क्रिय अंश होते हैं जो बीमारी का कारण बनते हैं. 
  • ये शरीर के ‘इम्यून सिस्टम’ यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण की पहचान करने के लिए प्रेरित करते हैं और उनके ख़िलाफ़ शरीर में एंटीबॉडी बनाते हैं जो बाहरी हमले से लड़ने में हमारे शरीर की मदद करती हैं.
  • वैक्सीन लगने का नकारात्मक असर कम ही लोगों पर होता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके साइड इफ़ेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है. हल्का बुख़ार या ख़ारिश होना, इससे सामान्य दुष्प्रभाव हैं. वैक्सीन लगने के कुछ वक़्त बाद ही हम उस बीमारी से लड़ने की इम्यूनिटी विकसित कर लेते हैं.
  • अमेरिका के सेंटर ऑफ़ डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि वैक्सीन बहुत ज़्यादा शक्तिशाली होती हैं क्योंकि ये अधिकांश दवाओं के विपरीत, किसी बीमारी का इलाज नहीं करतीं, बल्कि उन्हें होने से रोकती हैं.
  • भारत में दो टीके तैयार किए गए हैं. एक का नाम है कोविशील्ड जिसे एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने इसका उत्पादन किया और दूसरा टीका है भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया कोवैक्सीन.
  • रूस ने अपनी ही कोरोना वैक्सीन तैयार की है जिसका नाम है ‘स्पूतनिक-V’ और इसे वायरस के वर्ज़न में थोड़ बदलाव लाकर तैयार किया गया. इस वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल की अनुमति मिल चुकी है. 
  • मॉडर्ना वैक्सीन को भी भारत में इस्तेमाल की मंज़ूरी मिल चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि संक्रमण को रोकने के लिए कम से कम 65-70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगानी होगी, जिसका मतलब है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करना होगा.

कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में न सिर्फ करोड़ों लोगों की सेहत को प्रभाव किया है बल्कि समाज के सभी वर्गों में डिप्रेशन, तनाव का कारण भी बनी है. कोविड वैक्सीन लगवाने से एक स्पष्ट और आश्चर्यजनक फायदा मिलता है. ये आपको गंभीर रूप से बीमारी या वायरस की चपेट में आने पर मौत से बचाती है ये अपने आप में खुद हैरतअंगज फायदा है. शोधकर्ताओं का कहना है कि टीकाकरण करानेवाले लोगों को मानसिक स्वास्थ्य मेंमहत्वपूर्ण सुधार का भी अनुभव हो सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि वैक्सीन संभावित तौर पर मानसिक स्वास्थ्य को फायदा पहुंचा सकती है.

  • प्लोस पत्रिका में प्रकाशित रिसर्च का मकसद ये मूल्यांकन करना था कि वैक्सीन का पहला डोज लगवाने से मानसिक परेशानी में कम समय के लिए क्या प्रभाव पड़ते हैं. 
  • शोधकर्ताओं ने 8 हजार व्यस्को के मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण रिसर्च के तौर पर 1 मार्च 2020 और 31 मार्च 2021 के बीच किया. रिसर्च में टीकाकरण से संक्षिप्त समय के लिए सीधे प्रभाव का खुलासा हुआ.
  • महत्वपूर्ण बात ये है कि रिसर्च ने टीकाकरण कराने के सरकारात्मक प्रभाव में इजाफा किया. शोधकर्ताओं ने बताया कि हम प्रमाणित करते हैं कि कैसे दिमागी सेहत की परेशानी टीकाकरण करानेवाले और वैक्सीन नहीं लगवानेवालों के बीच अलग हो गई. 
  • आर्थिक अनिश्चितता और कोविड-19 से जुड़ी सेहत के जोखिम के बीच तुलना करने पर हमें दिमागी सेहत पर टीकाकरण के कम समय के प्रभाव मालूम हुए. 
  • कोविड-19 वैक्सीन से स्वास्थ्य के जोखिम को कम करने, आर्थिक और सामाजिक नतीजे सुधारने की उम्मीद की जाती है, जिसके बाद दिमागी सेहत के लिए संभावित लाभ होंगे.  डॉक्टर एचके महाजन ने कहा, “कोरोना महामारी ने रोजगार, आय और सेहत समेत लोगों की जिंदगी के कई पहलुओं को प्रभावित किया है.
  • इस वायरल बीमारी के मानसिक पहलू मनोवैज्ञानिक तनाव, चिंता, डिप्रेशन, सामाजिक अलगाव और खुदकुशी के विचार तक सीमित नहीं हैं.” उन्होंने आगे बताया, “बड़े पैमाने पर टीकाकरण ने हर्ड इम्यूनिटी बढ़ाने, लोगों के बीच चिंता कम करने में बड़ा योगदान दिया.
  • उसने आजीविका गंवाने वालों की दोबारा रोजगार के पहलू को भी बढ़ाया. टीकाकरण के गंभीर संक्रमण से सुरक्षा पर जागरुकता फैलने से लोग कोरोना से पहले की स्थिति में धीरे-धीरे लौट रहे हैं. इस तरह ये दिमागी सेहत के मुद्दे जैसे चिंता, डिप्रेशन दूर करने में मदद कर रहा है.”

Conclusion :

वैक्सीन को चरणबद्ध तरीके से लोगो को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके पहले चरण में, सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों का टीकारण किया जाएगा। क्योंकि वे उन लोगों के निकट संपर्क में होते हैं जो कोविड -19 से संक्रमित हैं। फिर इसे पुलिस, सशस्त्र बलों, नगरपालिका कर्मचारियों और अन्य विभागीय कर्मचारियों को प्रदान किया जाएगा। तीसरे चरण में, 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग और वे लोग जिन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप है या जिन्होंने अंग प्रत्यारोपण कराया है, ऐसे लोगो का टीकाकरण किया जाएगा। 

उसके बाद, स्वस्थ वयस्कों, किशोरों और बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। केंद्र सरकार स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम कर्मियों पर टीकाकरण का खर्च खुद से वहन करेगी । टीकाकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, सरकार ने CoWIN नामक एक एप्लिकेशन भी विकसित की है, जो कोविड -19 वैक्सीन लाभार्थियों के लिए  वैक्सीन स्टॉक, भंडारण और व्यक्तिगत ट्रैकिंग की सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करने में मददगार साबित हो रही है। कोविड -19 के लिए टीकाकरण भारत में स्वैच्छिक है। यह लोगों को इस बीमारी से बचाने का एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। टीके हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ काम करके बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं।

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Essays

Essay on Omicron in english

Essay on Omicron : Covid-19 New Variant :

Introduction :

“Life is like riding a bicycle to keep your balance, you must keep moving.” The above line of Albert Einstien fully relates to the present situation of Covid-19. The second wave of Covid-19 has taught us many lessons and its impact cannot be forgotton. Recently a new variant of Covid-19 detected in Southern Africa and it is called Omicron. It has been categorized as “variant of concern” by the World Health Organization (WHO). Omicron is placed in the most-troubling category of Covid-19 variants, along with the globally-dominant Delta plus.

  • This variant has a large number of mutations. Some of them are cause for serious concern because they may allow the new variant to evade immunity obtained from a vaccine.
  • Current vaccines offer protection against Omicron variant, including Delta. Omicron is of great concern as it has a large number of mutations that has increased transmissibility of this varient.
  • In India, the immunisation campaign has gained momentum. More than 40 percent of Indian have been fully vaccinated and more than 80 percent have received at least one dose.
  • We should get vaccinated to protect ourself from this new variant. Vaccines also reduce virus circulation, reducing the chances for a new mutation that could hit us even harder.
  • Combining vaccination with other protective measures further reduce the risk of exposure and prevent ourselves from passing the virus on to others.
  • These protective measures can be wearing a well-fitting mask, maintaining physical distance, improving ventilation of indoor spaces, avoiding crowded, confined and closed places, regularly cleaning hands and sneezing into a tissue.

Conclusion :

Government is also taking various steps continuing to vaccinate, targeting those most at risk, including with booster doses for eligible groups. Apart from that putting in place social measures to prevent crowding and people gathering in confined places. We should also follow the Covid-19 norms which have been issued by WHO and our Government so that we can break the chain of this virus as early as possible because “Prevention is better than cure.”

Essay on Is India Ready For Covid 19 third Wave

Introduction :

“We think we are done with the pandemic, but the pandemic is not done with us.” Said by Gitanjali Pai which goes well with Covid-19 third wave. The way we are treating covid-19, it would not take long to spread covid-19 third wave. As it is much more than a health crisis, it is an economic, psychological and social crisis. The year of 2020 proved to be a nightmare for the entire world. The SARS-Cov-2 virus entered in our country in January, 2020 and in March 2020, the government has declared lockdown in India. Somehow, we managed to come out of the covid-19 first wave.

  • It again strike our nation in its mutant form and thus covid-19 second wave emerged. Now, epidemiologists and various scientist predicted that covid-19 third wave is going to hit our nation in October, 2021.
  • Our nation get shattered by Covid’s second wave. Lack of oxygen supply, hospital beds, medical care and medicines claimed lives of lakhs of people till now.
  • To tackle this deadly virus, we have to work on the following 5 sectors i.e. 1) Vaccination 2) Coordination with private health care sector 3) Inclusion of medical staff 4) Mass awareness and 5) Mass production of Vaccine.
  • In the budget 2021, the government allocated Rs 2.23 lakh crores to the health care sector, which was 137% increase in funds as compared to 2020, but still the second wave of the corona virus was seriously devastating.
  • The nation is however, no way prepared for the covid’s third wave. India lost 2.6 trillion USD from 2020 to 2021, and any longer lockdown or restrictions can be financially harsh for people and especially for the poor.
  • People may die of hunger and poverty instead of corona virus. In case, the nation decides not to impose any lockdown against the third wave, may be even more destructive.
  • It is because of the fact that the problems of oxygen cylinders, requirement of enough beds, side effects of the drugs etc.
  • have not been solved yet. Instead, in may 2021, we experienced a sudden surge in the cases of Black fungus which seriously affects the eye and the nervous system.
  • This disease was a side effect of being on ventilated beds for long or using oxygen concentrator in which tap water is used. There may be even more side effects if the covid’s third wave hits India any sooner.

Conclusion :

People should follow the covid-19 guidelines and government also need to take effective steps against the people breaking these guidelines. Hence, we can say that India is very less prepared for the covid-19 third wave. However, we must trust the technology and the doctors to fight against the upcoming wave. We should also use mark and sanitizer for avoiding covid-19 infection. With increased medical staff, vaccines and medical facilities like oxygen, medicines we can definitely handle the third wave of covid-19 efficiently and effectively.

Essay on Healthcare in India – Major Issues & Challenges

Introduction :

“Health is like money, we will never have a true idea of its value until we lost” is a very significant statement of Josh Billings. According to Webster dictionary, efforts made to maintain or restore physical, mental or emotional well-being especially by trained professionals are known as healthcare services. As per Lancet India ranked 145th among 195 countries in healthcare access & quality”. This index is a mirror that reflects the dire situation of India’s outdated healthcare services in India. The COVID-19 outbreak pushed the limits of the healthcare industry.

  • In an attempt to fill the gaps in the sector, Finance Minister Nirmala Sitharaman announced health and well-being to be one of the six pillars of Union Budget 2021 and also allocated Rs 2,83,846 lakh crore for the healthcare and wellness sector.
  • Marking the importance of Health, World Health Day is celebrated on April 7 every year by the World health organization (WHO) to create awareness among people about health and cleanliness Issues.
  • India’s healthcare scenario has seen both positive and negative achievements. The country has been successful in eradicating polio, reducing epidemics caused by tropical diseases and controlled HIV to a large extent.
  • However, it still faces a huge economic burden due to NCDs (Non Communicable Diseases), struggles to balance
    accessibility, affordability and quality of healthcare.
  • Expenditure on public health funding has been consistently low in India approximately 1.3% of GDP. Private healthcare is expensive and unavailable which leaves public healthcare facilities as the only available option but it has limited scope.
  • Recent news that reported deaths of COVID-19 patients due to lack of hospital beds and oxygen supplies indicate the worse situation of common people amid the pandemic.
  • The availability of government beds is abysmally low in India about 0.55 beds per 1000 population. No single authority responsible for public health that monitors and enforce compliance of the health standards.

Conclusion :

Government of India (GOI) created National Health Agency under NITI Aayog to act as nodal agency for surveillance, information gathering, enforcement of health statistics and maintain health database. The government has already launched Ayushman Bharat Yojna (PM-JAY) and National Medical commission Act, 2019 for poor people and economically weaker section of the society. To strengthen healthcare delivery, policy makers and pharma companies need to devise strategies that can change the present situation. Health is wealth and shouldn’t be treated as a destination. One should understand that preservation of health is better than the cure of a disease.

Healthcare in India – Major Issues & Challenges essay

Introduction :

“Health is like money, we will never have a true idea of its value until we lost” –Josh Billings. Health refers to the physical and mental state of a human being. To stay healthy is not an option but a necessity of life. Still, many people often take Health for granted. The COVID-19 outbreak pushed the limits of the healthcare industry in India. In an attempt to fill the gaps in the sector, Finance Minister Nirmala Sitharaman announced health and well-being to be one of the six pillars of Union Budget 2021 and also allocated Rs 2,83,846 lakh crore for the healthcare and wellness sector.

  • Marking the importance of Health, World Health Day is celebrated on April 7 every year by the World health organisation(WHO) to create awareness among people about health and cleanliness.
  • Issues India’s healthcare scenario has seen both positive and negative achievements. The country has been successful in eradicating polio, reducing epidemics caused by tropical diseases and controlled HIV to a large extent.
  • However, it still faces a huge economic burden due to NCDs (Non Communicable Diseases), struggles to balance
    accessibility, affordability and quality and is unable to hike public health budgets.
  • Expenditure on public health funding has been consistently low in India(approximately 1.3% of GDP). Massive rural healthcare availability gap despite the 71% of the country being predominantly rural.
  • Private healthcare is expensive and unavailable which leaves public healthcare facilities as the only available option but it has limited scope.
  • Therefore rural communities rely on untrained health workers who remain as the only option of medical support.
  • Our healthcare system evolved in a very disorganised manner, in a way that the private sector and the health systems have grown by default and not by design.

Issues and Challenges 

● The availability of government beds is abysmally low in India(0.55 beds per 1000 population), and an epidemic like coronavirus can very quickly complicate the problem even further.

● Sheer number of skilled doctors hinders efficacy of the desired quality of health services.

● No single authority responsible for public health that monitors and enforce compliance of the health standards.

Conclusion :

One of the clearest lessons the pandemic has taught us is the consequences of neglecting our health systems. Henceforth to strengthen healthcare delivery and improve business prospects, policy makers, and pharma companies need to devise
strategies that transform a spark into a sustainable fire. Health is Wealth and shouldn’t be treated as a destination. One should understand that preservation of health is easier than the cure of a disease

Healthcare in India – Major issues and challenges essay in english

Introduction :

According to Webster dictionary, efforts made to maintain or restore physical, mental, or emotional well-being especially by trained and licensed professionals are known as healthcare services. ”India ranked 145th among 195 countries in healthcare access, quality” : Lancet. This index is a mirror that reflects the dire situation of India’s outdated healthcare services.

Challenges before Nationa Healthcare System(NHS):

Lack of effective primary healthcare services (PHS) foremost need for any country that has villege population as a big share and these PHS are confined mainly to maternary and child care.

 Non- professionnal and semiskilled healthcare providers are becoming as avoidable gap to say that the people get adequate and complete services.

 Only 1.3% of GDP was allocated to Healthcare services which indicates inadiquate funding.

 There is no single authority that is empowered to authorize , survellience and information dissemation all over india.

 Recent poignant news articles that reported deaths of COVID-19 patients due to lack of hospital beds and oxygen supplies indicate the situation of common indian amidst a pandemic.

 Awareness about Non communicable diseases and preventive measures before any epidemic is nearly on the ground level for many of us.

What measures we can suggest to get out this peril?

 PHS needed to tranformed into health wellness centres to equip them with all first class service at affordable prices.
 Corporate social responsibility fund must be utilised to avail high-end medical care.
 Swasth bharath jan andolan in the lines of swatch bharath must be promoted.
 Without power and finance dissemation, co-operative federalism has no meaning, that is center and state government must work in tendom.
 India needs atleast 2.5% of GDP for healthcare : Nationa Health Policy , 2017.

Conclusion :

Government of India(GOI) created National Health Agency under NITI Aayog to act as nodal agency for survellience, information gathering , enforcement of health statastics and maintain health database. The passing of amendments to the Medical Termination of Pregnancy Act in India recently is a step forward in recogninizing the health rights of woman. The once in a century pandemic reminded us the need for robust Medical Infrastructural Network. GOI launched PM jan arogya yojana, National Medical commission act, 2019and PM janaushadhi Pariyojana in the hope that no one should be left behind on basis his economical standards because, “ Universal coverage, not medical technology , is the foundation of any health care system.” — Richard Lamm

Essay on Is India Ready For Covid 19 third Wave Vs Essay on Bioterrorism – A Threat To Global Security

Introduction :

Bioterrorism is a type of terrorism which involves intentional release of microorganisms such as viruses, bacteria, fungi, or other toxins to cause illness or death among humans, plants, and livestock and to terrorize the civilian population. These agents are generally found in nature and are altered or mutated in laboratory to be used as a weapon for mass destruction. This type of terrorism can easily be disseminated to cause widespread fear and panic beyond the actual damage. It can be spread through air, water or food.

  • During World War-I and II Japan and Germany embarked on a large scale programs to develop biological weapons using fatal mustard gas.
  • Bacillus Anthracis, the bacteria that causes anthrax, is one of the most likely agents to be used in a biological attack.
  • The Center for Disease Control and Prevention (CDC) ranks the biological agents and diseases that have the potential to be used as weapons into three categories.
  • These are (1) Category A: High-priority agents. Example: Plague, Ebola virus, Anthrax. (2) Category B : Moderate-priority agents having low mortality rate. Example: Brucellosis, Q fever (3) Category C : Low-priority agents.
  • These are emerging pathogens. Example: Hantavirus, Nipah Virus, SARS, Yellow fever virus. For restricting the development and use of biological weapons, a convention was signed at Geneva, popularly known as ‘Geneva Protocol 1925’.
  • But this convention was failed to address the production, storage, testing, and transfer of these weapons. After seeing the upcoming crisis, Biological Weapon Convention (BWC) came into force on March 26, 1975.
  • At present it has 183 member states. India is also a member state of this convention. BWC is formed to restrict the development, production, acquisition, transfer, stockpiling and use of biological weapons.
  • It was the first multilateral disarmament treaty which bans the entire categories of weapons of mass destruction. The UN Secretary General said he sees an increasing risk of bioterrorism attacks aimed at creating a pandemic similar to that of coronavirus.

Conclusion :

In India, National Disaster Response Force (NDRF) is a specialised force constituted under the Ministry of Home Affairs to deal with chemical, biological, radiological and nuclear attacks. Since bioterrorism attacks are unpredictable, early detection, containment, treatment and communication are crucial steps for appropriate response against it. Co-operation with friendly nations and the robust surveillance system have to maintain and construction of clinical labs should be done to fight against these issues in India.

Essay on Is India Ready For Covid 19 third Wave Vs Descriptive Essay on Bioterrorism – A Threat To Global Security

Introduction :

“Innovation is a good thing. The human condition – put aside bioterrorism and a few footnotes – is improving because of innovation.” — Bill Gates — Were you aware that intelligence agencies proclaimed that the Novel-coronavirus
might have begun from the Wuhan lab in China?. This was conspired when researchers couldn’t figure out how bat viruses could mutate to attack humans.

  • Bioterrorism is the release of microorganisms such as viruses, bacteria, fungi, or other toxins deliberately to cause illness or death among humans, plants, and livestock to terrorize the civilian population.
  • Deadly pathogens are the ‘next big thing’ in terror and it’s going to be a defense problem. Bioterrorism aims to create casualties, terror, societal disruption.
  • The goal of the terrorists,non-state actors is to make their civilian targets feel as if their government cannot protect them.
  • During World War-I,II Japan and Germany embarked on a large scale program to develop biological weapons using fatal mustard gas.
  • Bacillus anthracis, the bacteria that causes anthrax, is one of the most likely agents to be used in a biological attack.

Why are bioweapons considered as perfect weapons of terror ?

  • Can be spread through air, water,food,aerosol sprays or by mail on infected
    envelopes.
  • Lethal pathogens are readily accessible.
  • Highly difficult to detect.

Classification of Biological Agents :

The Center for Disease Control and Prevention(CDC) ranks the biological agents and diseases that have the potential to be used as weapons into three categories. These are:
● Category A: High-priority agents. Example: Plague, Ebola virus, Anthrax.
● Category B : Moderate-priority agents having low mortality rate. Example: Brucellosis, Q fever
● Category C : Low-priority agents. These are emerging pathogens. Example: Hantavirus, Nipah Virus, SARS, Yellow fever virus.

During the Shanghai Cooperation Organisation’s (SCO’s) first military medicine conference, Defence Minister of India Rajnath Singh said that bioterrorism is a real threat in today’s time and the Armed Forces medical services should be at the forefront of combating the menace.

The UN Secretary General said he sees an increasing risk of bioterrorism attacks aimed at creating a pandemic similar to that of coronavirus.

Conclusion :

In India, National Disaster Response Force(NDRF) is a specialised force constituted under the Ministry of Home Affairs(MHA) to deal with chemical, biological, radiological and nuclear(CBRN) attacks. As time goes, the weapons have been shifted from swords to malicious biological weapons. Since bioterrorism attacks are unpredictable, early detection, containment, treatment and communication are crucial for appropriate response against it. Strengthening the Biological and Toxin Weapons Convention (BTWC) of 1972 is a necessity of time to deal with bioterrorism firmly.

Essay on Is India Ready For Covid 19 third Wave Vs Internal Security of India in english

Introduction :

Internal security is the security that lies within the borders of a country. It ensures the maintenance of peace, law & order and protection of sovereignty within territory of a country. Internal security is different from external security. External security is considered as the security against aggression by a foreign country. Maintaining the external security is the responsibility of the armed forces of the country such as the Indian Army, Indian Navy and Indian Air Force in India.

  • While internal security comes under the purview of the police, which can also be supported by the Central Armed Police Forces (CAPF) as per the requirement.
  • In India, the internal security matters are governed by Ministry of Home Affairs (MHA). If we look at the past, India’s internal security problems have multiplied because of linguistic riots, inter-state disputes and ethnic tensions.
  • Our country was forced to redefine its inter state boundaries due to linguistic riots in 1956. After that, the rise of Naxalism was also seen as a threat to internal security in India.
  • At the time of independence, our country was under-developed. The country adopted the equitable and inclusive growth model for growth and development.
  • This situation was exploited by various people or groups to pose a very dangerous challenge to the country’s internal security in the form of Naxalism and Left-Wing Extremism.
  • Cyber security is the latest challenge that our country is facing these days. We could be the target of a cyberwar which can harm our security at any time.
  • The growth in the use of internet has also shown that social media could play a vital role in spreading fake news and violence and thus can become a threat to our internal security. 
  • Border management is also important in reducing the threats to our internal security. A weak border management can result in infiltration of terrorists, illegal immigrants and smuggling of items like arms, drugs and counterfeit currency.

Conclusion : 

In the Global Terrorism Index 2020, India has been ranked at 8th place in the list of countries most affected by terrorism. India continues to deal with terrorist activity on different fronts like terrorism related to territorial disputes in J&K and secessionist movement in Assam. India needs to implement all of its national powers in a coordinated manner to address its security issues and this will happen only when we give national level importance to internal security in India.

Essay on Covid 19 vaccine in english

Introduction :

The Government of India has approved the Covid-19 vaccines developed by Astra-Zeneca and Bharat Biotech named Covishield and Covaxin respectively. Seeing this our PM Modi has launched the COVID-19 vaccination drive on 16th January, 2021 which can save millions of lives every year. This is the world’s largest vaccination program covering the entire country. During the launch of this drive a total of 3006 sites in all States and UTs have been virtually connected.

  • Although India don’t need to vaccinate its entire population, it just have to vaccinate at least 30 to 40% of the people.
  • It is estimated that a minimum of 1 billion doses of Covid-19 vaccines will be required for full immunization.
  • The vaccine has introduced in phrased manner. In first phrase, the vaccine is provided to healthcare workers like doctors, nurses and other medical staff both in government and private sectors.
  • Because they treat and are in close contact with those who are infected with Covid-19. Then it will be provided to police, armed forces, municipal workers and other departmental staffs.
  • In third phase, people above 50 years of age and those patient who have diabetes, hypertension and organ transplant will get the vaccine. After that, the vaccine will be given to healthy adults, teenagers and children.

Conclusion :

The central government is incurring the cost for vaccinating the core healthcare and frontier workers. For further vaccination process, the government has also developed an application named CoWIN, which will help provide real time information of vaccine stocks, storage and individualized tracking of beneficiaries for COVID-19 vaccine. The Vaccination for Covid-19 is voluntary in India. It is a safe and effective way of protecting people against this disease. Vaccines reduce risks of getting diseases by working with our body’s immune system.

 

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COVID- 19 : Changing Social Norms in India :

Introduction :

The world is facing the biggest crisis in the form of coronavirus pandemic. Almost every country has been affected by the COVID-19. Over 115 million people had been affected by COVID-19 and about 2.54 million people had died worldwide.  And indirectly billions of people have been suffering from the impact of this pandemic. As vaccines are being available now but still, the emphasis is on taking extensive precautions such as regularly washing of hands, social distancing and wearing of masks.

  • India has successfully controlled the transmission of COVID-19 by its well coordinated efforts.
  • India’s progress in pharmaceuticals and mass public awareness with the help of digital systems indeed helped in controlling the spread of this disease.
  • There are still many ways by which the COVID-19 can affect our economy, of which the disruption of supply chains is the major challenge.
  • Job loss is on the rise along with the slowdown in manufacturing and services activities in India.  
  • Millions of agricultural workers, regularly facing high levels of uncertainty, poverty, malnutrition and poor health, and suffer from a lack of safety and labour protection.
  • With low and irregular incomes and lack of social support, many of them are forced to continue working, often in unsafe conditions.
  • Further, when experiencing income losses, they may resort to negative coping strategies, such as distress sale of assets, taking loans or child labour. The lockdown has also impacted migrant workers in many ways.
  • Several of whom lost their jobs due to shutting of industries and were outside their native places wanting to get back.
  • Since then, the government has announced relief measures for them, and made arrangements like running special trains and buses to help them to return to their native places.
  • At the same time, many countries undertake new reforms to strengthen the digital economy and e-commerce not only to manage the Covid-19 pandemic but also to facilitate trade & commence.

Conclusion :

COVID-19 crisis also opens the doors of opportunities in India as we witness better healthcare both in management and facilities. New social norms have been introduced like social distancing, wearing masks, maintaining hygiene for protecting us against the Covid-19. People who are ill with Covid-19 need doses of new vaccine, which save their lives and speed up recovery. Healthcare professional should be appreciated as instead of a lot of difficulties they do their best to maintain the quality of healthcare services.

 

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Essays

भ्रष्टाचार पर निबंध Essay on Curruption in hindi

भ्रष्टाचार पर निबंध (Essay on Curruption in hindi)

Introduction :

जब कोई व्यक्ति न्याय व्यवस्था के नियमों के विरूद्ध जाकर अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए सार्वजनिक संपत्ति, स्थिति, शक्ति और अधिकार का दुरुपयोग करने लगता है तो वह व्यक्ति भ्रष्टाचारी कहलाता है। आज भारत जैसे देश में भ्रष्टाचार अपनी जड़े तेज़ी से फैला रहा है।

भ्रष्टाचार अब समाज की गहराई में फैल गया है और इसकी बहुत सारी जड़ों के होने के कारण बहुत मजबूत हो गया है। यह एक कैंसर की तरह है जो एक बार उत्पन्न होने पर दवा के बिना समाप्त नहीं किया जा सकता। भ्रष्टाचार के कई रूप है जैसे रिश्वत, काला-बाजार, जान-बूझकर दाम बढ़ाना, पैसा लेकर काम करना, सस्ता सामान लाकर महंगा बेचना आदि।

भ्रष्टाचार विभिन्न प्रकार का हो सकता है जो शिक्षा, खेल, राजनीति जैसे हर क्षेत्र में फैला हुआ है। भ्रष्टाचार के कारण व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझ पाता है। भ्रष्टाचार कई तरह से हो सकता है जैसे चोरी, बेईमानी, सार्वजनिक संपत्ति का दुरूपयोग, अनावश्यक रूप से समय की बर्बादी, शोषण, घोटाला आदि।

  • इसने विकासशील और विकसित दोनों देशों में अपनी जड़ें जमा ली हैं। हमें गुलामी से वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए अपने समाज और देश से भ्रष्टाचार को दूर करने की आवश्यकता है।
  • हम पैसो के कारण अपनी असली ज़िम्मेदारी को भूल गए हैं। हमें यह समझने की जरूरत है कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता, हम इसे हमेशा के लिए नहीं रख सकते, यह हमें केवल लालच और भ्रष्टाचार दे सकता है। यह सच है कि जीवन जीने के लिए हमें धन की आवश्यकता होती है, लेकिन यह सच नहीं है कि सिर्फ अपने स्वार्थ और लालच के लिए हम किसी के जीवन से खेले और उसका दुरूपयोग करे।
  • भ्रष्टाचार का रोग सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में इस तरह से फैल गया है कि आम आदमी को अपना कार्य करवाने के लिए बड़े अफसर नेताओं को घूस देनी ही पड़ती है।
  • भारत अपने लोकतंत्र के लिए प्रसिद्ध है लेकिन यह भ्रष्टाचार है जो इसकी लोकतांत्रिक प्रणाली को बर्बाद कर रहा है। सरकार द्वारा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कोई सख्त नियम नहीं बनाए जाने के कारण भ्रष्ट लोगों के हौसले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं जिसके कारण वर्तमान में घोटालों की संख्या बढ़ गई है।

भ्रष्टाचार के कारण

  • देश का लचीला कानून – भ्रष्टाचार विकासशील देश की समस्या है, यहां भ्रष्टाचार होने का प्रमुख कारण देश का लचीला कानून है। पैसे के दम पर ज्यादातर भ्रष्टाचारी बाइज्जत बरी हो जाते हैं, अपराधी को दण्ड का भय नहीं होता है।
  • व्यक्ति का लोभी स्वभाव – लालच और असंतुष्टि एक ऐसा विकार है जो व्यक्ति को बहुत अधिक नीचे गिरने पर विवश कर देता है। व्यक्ति के मस्तिष्क में सदैव अपने धन को बढ़ाने की प्रबल इच्छा उत्पन्न होती है।
  • आदत – आदत व्यक्ति के व्यक्तित्व में बहुत गहरा प्रभाव डालता है। एक मिलिट्री रिटायर्ड ऑफिसर रिटायरमेंट के बाद भी अपने ट्रेनिंग के दौरान प्राप्त किए अनुशासन को जीवन भर वहन करता है। उसी प्रकार देश में व्याप्त भ्रष्टाचार की वजह से लोगों को भ्रष्टाचार की आदत पड़ गई है।
  • मनसा – व्यक्ति के दृढ़ निश्चय कर लेने पर कोई भी कार्य कर पाना असंभव नहीं होता वैसे ही भ्रष्टाचार होने का एक प्रमुख कारण व्यक्ति की मनसा (इच्छा) भी है।

भ्रष्टाचार के विभिन्न प्रकार

  • रिश्वत की लेन-देन –सरकारी काम करने के लिए कार्यालय में चपरासी (प्यून) से लेकर उच्च अधिकारी तक आपसे पैसे लेते हैं। इस काम के लिए उन्हें सरकार से वेतन प्राप्त होता है वह वहां हमारी मदद के लिए हैं। इसके साथ ही देश के नागरिक भी अपना काम जल्दी कराने के लिए उन्हे पैसे देते हैं अतः यह भ्रष्टाचार है।
  • चुनाव में धांधली –देश के राजनेताओं द्वारा चुनाव में सरेआम लोगों को पैसे, ज़मीन, अनेक उपहार तथा मादक पदार्थ बांटे जाते हैं। यह चुनावी धान्धली असल में भ्रष्टाचार है।
  • भाई-भतीजावाद –अपने पद और शक्ति का गलत उपयोग कर लोग भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देते हैं। वह अपने किसी प्रिय जन को उस पद का कार्यभार दे देते हैं जिसके वह लायक नहीं हैं। ऐसे में योग्य व्यक्ति का हक उससे छिन जाता है।
  • नागरिकों द्वारा टैक्स चोरी –नागरिकों द्वारा टैक्स भुगतान करने हेतु प्रत्येक देश में एक निर्धारित पैमाना तय किया गया है। पर कुछ व्यक्ति सरकार को अपने आय का सही विवरण नहीं देते और टैक्स की चोरी करते हैं। यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में अंकित है।
  • शिक्षा तथा खेल में घूसखोरी –शिक्षा तथा खेल के क्षेत्र में घूस लेकर लोग मेधावी व योग्य उम्मीदवार को सीटें नहीं देते बल्कि जो उन्हें घूस दे, उन्हें दे देते हैं।

भ्रष्टाचार के उपाय

  • भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कानून – हमारे संविधान के लचीलेपन के वजह से अपराधी में दण्ड का बहुत अधिक भय नहीं रह गया है। अतः भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून बनाने की आवश्यकता है।
  • कानून की प्रक्रिया में समय का सदुपयोग – कानूनी प्रक्रिया में बहुत अधिक समय नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। इससे भ्रष्टाचारी को बल मिलता है।
  • लोकपाल कानून की आवश्यकता – लोकपाल भ्रष्टाचार से जुड़े शिकायतों को सुनने का कार्य करता है। अतः देश में फैले भ्रष्टाचार को दूर करने हेतु लोकपाल कानून बनाना आवश्यक है।

Conclusion : 

इसके अतिरिक्त लोगों में जागरूकता फैला कर, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बना और लोगों का सरकार तथा न्याय व्यवस्था के प्रति मानसिकता में परिवर्तन कर व सही उम्मीदवार को चुनाव जिता कर भ्रष्टाचार रोका जा सकता है। भ्रष्टाचार का कैंसर हमारे देश के स्वास्थ्य को नष्ट कर रहा है। यह आतंकवाद से भी बड़ा खतरा बना हुआ है। देश के युवाओं को भ्रष्टाचार के सभी कारणों से अवगत होना चाहिए और इसे हल करने के लिए एकजुट होना चाहिए। अगर हमें भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करना है तो राजनेताओं, सरकारी तंत्र और जनता को साथ मिलकर इसके खिलाफ लड़ना होगा तभी हम अपने देश को भ्रष्टाचार से बचा सकते हैं।

भ्रष्टाचार पर निबंध – Short Essay on corruption in hindi for students :

Introduction :

जब कोई व्यक्ति न्याय व्यवस्था के नियमों के विरूद्ध जाकर अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए सार्वजनिक संपत्ति, स्थिति, शक्ति और अधिकार का दुरुपयोग करने लगता है तो वह व्यक्ति भ्रष्टाचारी कहलाता है। आज भारत जैसे देश में भ्रष्टाचार अपनी जड़े तेज़ी से फैला रहा है। भ्रष्टाचार अब समाज की गहराई में फैल गया है और इसकी बहुत सारी जड़ों के होने के कारण बहुत मजबूत हो गया है। यह एक कैंसर की तरह है जो एक बार उत्पन्न होने पर दवा के बिना समाप्त नहीं किया जा सकता।

भ्रष्टाचार के कई रूप है जैसे रिश्वत, काला-बाजार, जान-बूझकर दाम बढ़ाना, पैसा लेकर काम करना, सस्ता सामान लाकर महंगा बेचना आदि। भ्रष्टाचार विभिन्न प्रकार का हो सकता है जो शिक्षा, खेल, राजनीति जैसे हर क्षेत्र में फैला हुआ है। 

  • भ्रष्टाचार के कारण व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझ पाता है। भ्रष्टाचार कई तरह से हो सकता है जैसे चोरी, बेईमानी, सार्वजनिक संपत्ति का दुरूपयोग, अनावश्यक रूप से समय की बर्बादी, शोषण, घोटाला आदि। (भ्रष्टाचार पर निबंध)
  • इसने विकासशील और विकसित दोनों देशों में अपनी जड़ें जमा ली हैं। हमें गुलामी से वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए अपने समाज और देश से भ्रष्टाचार को दूर करने की आवश्यकता है। हम पैसो के कारण अपनी असली ज़िम्मेदारी को भूल गए हैं।
  • हमें यह समझने की जरूरत है कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता, हम इसे हमेशा के लिए नहीं रख सकते, यह हमें केवल लालच और भ्रष्टाचार दे सकता है। यह सच है कि जीवन जीने के लिए हमें धन की आवश्यकता होती है।
  • लेकिन यह सच नहीं है कि सिर्फ अपने स्वार्थ और लालच के लिए हम किसी के जीवन से खेले और उसका दुरूपयोग करे।
  • भ्रष्टाचार का रोग सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में इस तरह से फैल गया है कि आम आदमी को अपना कार्य करवाने के लिए बड़े अफसर नेताओं को घूस देनी ही पड़ती है। भारत अपने लोकतंत्र के लिए प्रसिद्ध है लेकिन यह भ्रष्टाचार है जो इसकी लोकतांत्रिक प्रणाली को बर्बाद कर रहा है। (Essay on corruption in hindi)

Conclusion :

सरकार द्वारा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कोई सख्त नियम नहीं बनाए जाने के कारण भ्रष्ट लोगों के हौसले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं जिसके कारण वर्तमान में घोटालों की संख्या बढ़ गई है। भ्रष्टाचार का कैंसर हमारे देश के स्वास्थ्य को नष्ट कर रहा है। यह आतंकवाद से भी बड़ा खतरा बना हुआ है। देश के युवाओं को भ्रष्टाचार के सभी कारणों से अवगत होना चाहिए और इसे हल करने के लिए एकजुट होना चाहिए।

अगर हमें भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करना है तो राजनेताओं, सरकारी तंत्र और जनता को साथ मिलकर इसके खिलाफ लड़ना होगा तभी हम अपने देश को भ्रष्टाचार से बचा सकते हैं।

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भ्रष्टाचार के कारण ( Causes of corruption in India)

  • देश का लचीला कानून 
  • व्यक्ति का लोभी स्वभाव 
  • आदत – आदत व्यक्ति के व्यक्तित्व में बहुत गहरा प्रभाव डालती है। उसी प्रकार देश में व्याप्त भ्रष्टाचार की वजह से लोगों को भ्रष्टाचार की आदत पड़ चुकी है।
  • मनसा -व्यक्ति के दृढ़ निश्चय कर लेने पर कोई भी कार्य कर पाना असंभव नहीं होता वैसे ही भ्रष्टाचार होने का एक प्रमुख कारण व्यक्ति की मनसा भी है।

भ्रष्टाचार के विभिन्न प्रकार (Types of corruption in India)

  • रिश्वत की लेन-देन 
  • चुनाव में धांधली 
  • भाई-भतीजावाद 
  • नागरिकों द्वारा टैक्स चोरी
  • शिक्षा तथा खेल में घूसखोरी 

भ्रष्टाचार के उपाय (How to curb corruption)

  • भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कानून
  • कानून की प्रक्रिया में समय का सदुपयोग 
  • लोकपाल कानून की आवश्यकता
  • सरकारी कर्मचारियों को अच्छा वेतन
  • दफ्तरों में लोगों की कमी न हो
  • सभी कार्यालय में कैमरा लगाया जाये
  • भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) बिल
  • भ्रष्टाचार का विरोध करें

भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकार द्वारा उठाए गए कदम (Steps taken by Government to remove corruption)

  • डिजिटलीकरण 
  • नौकरी से निष्कासित 
  • चुनाव में सुधार 
  • गैरकानूनी संस्थानों तथा दुकानों पर ताला 

भ्रष्टाचार : सतर्क भारत समृद्ध भारत पर निबंध – Satark bharat samridh bharat essay in hindi :

Introduction :

नए भारत का निर्माण तब तक लगभग असंभव है जब तक इसमें भ्रष्टाचार का कैंसर है। लोगों और सरकार की सामूहिक इच्छा के बिना भ्रष्टाचार को खत्म करना असंभव है। जब कोई व्यक्ति न्याय व्यवस्था के नियमों के विरूद्ध जाकर अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए सार्वजनिक संपत्ति, स्थिति, शक्ति और अधिकार का दुरुपयोग करने लगता है तो वह व्यक्ति भ्रष्टाचारी कहलाता है। यद्यपि भ्रष्टाचार को एक बार में शून्य स्तर तक नहीं लाया जा सकता है लेकिन हम इसे कम करने का प्रयास कर सकते हैं। यह निगरानी और सतर्कता से सुनिश्चित किया जा सकता है। सतर्कता हमारे समाज में प्रबंधन कार्यों का एकअभिन्न अंग है।

  • सतर्कता की भूमिका संगठन को आंतरिक खतरों से बचाने के लिए है जो बाहरी खतरों की तुलना में सबसे अधिक ख़तरनाक हैं।
  • शिक्षा की मदद से हम भ्रष्टाचार को कम कर सकते हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार, सबसे कम भ्रष्ट राज्य केरेल है, क्योंकि इसमें साक्षरता की दर सभी राज्यों से अधिक है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि शिक्षा लोगों को प्रभावित कर सकती है।
  • अगर हम अपने भारत को समृद्ध बनाना चाहते हैं तो सभी को अपने अधिकारों के लिए आगे आना होगा। जैसा कि हम जानते हैं कि अगर हम अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर हो जाएं तो हम जो कुछ भी चाहते हैं वह हासिल कर सकते हैं।

आज व्यवसाय के हज़ारो विकल्प मौजूद हैं ज़रूरत है तो केवल सतर्कता और समझदारी से लाभ उठाने की ।  इसके लिये आवशयक है कि मौजूद विकल्पो और नितियो को जनता खुद सतर्क रहकर अपने हक़ मे लाभ का आनंद ले । भारत को स्वस्थ और समृद्ध बनाने के लिए निवेश नहीं बल्कि नवाचार सबसे बड़ी ताकत बन सकती हैं। हमे ज़रूरत है अपनी ताकत का मह्त्व समझकर उसका सही तरीके से उपयोग करने की।

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Essays

ssc chsl tier 2 expected essay topics

SSC CHSL 2021 Tier-2 Exam Pattern

SSC CHSL Tier -2 Paper Pattern
Topics Word – limit Maximum Marks Time Limit
Essay Writing 200 – 250 100 marks 60 Min
Application/Letter / Precis Writing 150 – 200

60 Min

SSC CHSL Tier 2 PYQ Paper (2019)

Essay Topic : 

“Freedom of Speech in India: Constitutional provisions and public debate“

Letter/Application Topic: 

“You are Suresh, House No. 323 Devnagar Delhi, a tribal activist living in Delhi. Write a letter to District Authority (SDM/Collector) Bastar, Chhattisgarh for the problems faced by the tribal community”.

SSC CHSL Tier 2 PYQ Paper (2018)

Essay Topic : 

“Population Control is the only solution to all our problems.”

Letter/Application Topic: 

“You are Shivani/ Shiv, resident of CGO Complex ,Lodhi Road, 110003. Write a letter to your younger brother Naman, apprising him of the harmful effects of the excessive use of cell phones.”.

SSC CHSL Tier 2 PYQ Paper (2015)

Essay Topic : 

“Write an essay on “Swacch Bharat Mission” in about 250 words.

Letter/Application Topic: 

“Write a letter in 200 words to Sports Secretary, Department of Sports, Government of India, giving your assessment about the performance of India in Rio Olympic games and suggestion on how can improve in next Olympic games.”

Essay Topics for SSC CHSL Tier 2 Descriptive Paper

  • Omicron Covid-19 variant in India
  • Role of the youth in Development of the Nation
  • New Education Policy – Prospects & Challenges
  • How to deal with natural disasters in India?
  • Importance of E – education in India
  • Silence is the best answer to anger
  • Importance of Science vs religion
  • Rise in crime rate in India
  • Universal basic income vs subsidy
  • Growing Stress Issues & Mental health 

List of next 10 topic

  • Healthcare in India – Issues & Challenges
  • Impact of Mobile Addiction on Youth
  • Work from Home – Pros & Cons
  • Social Media Good & Dark Side
  • Importance of Healthy Lifestyle
  • How Safe are girls in India?
  • Gender Equality in India
  • Unemployment Vs Underemployment
  • Usage of Artificial Intelligence in Today’s life
  • Role of Students in Eradication of Drugs

List of next 12 topic

  • Empowering Women Empowering India
  • Our Duties towards Senior Citizen
  • Man Vs Climate Change
  • Terrorism & its threats
  • Water Crisis in India
  • Education is the most powerful weapon which you can use to change the world
  • Air Pollution of Indian Cities Vs Urbanization
  • Abrogation of Article 370 & 35A
  • Impact of Black Money on Society
  • Technological Advancement in India
  • One Nation One Election
  • Corruption in India

Important Tips For Essay Writing : 

  • Choose the Topic you can describe easily
  • Use one or two quotations at proper places
  • Write in short paragraphs
  • Don’t repeat the same things
  • Stick to Word limit
  • Conclude as a whole

Essay Introduction : 

Introduce the topic precisely to grab attention of the reader

Dialogue, Quote, Summary in simple language of the topic

Essay Body : 

Describe in your topic –

  • Main Idea
  • Supportive Sentences
  • Pros & Cons
  • Challenges
  • Avoid biased Opinion

Essay Conclution : 

  • Sums up your overall idea
  • Provide final perspective
  • Try to be optimistic
  • Give Suggestions & Solutions

How to prepare Essay Writing for SSC CHSL Tier 2 Descriptive Exam ?

1) Essay Writing is nothing but how well you present your thoughts and ideas on a particular topic in a well-structured and good looking manner.

2) It requires imagination and good writing skills for writing an essay. Both these skills are essential as both these factors together will help you present a good essay in the best manner.

3) Gathering of thoughts on a particular topic will not help you if you are not able to present them effectively and efficienty.

4) Likewise, just good writing skills are no good if you are not able to think of innovative and relevant points for the given descriptive topic. Check out some important tips below to score well in the essay writing section of Descriptive Exam

Build a daily Reading Habit

Read any English Newspaper daily –

Reading the newspaper will not only strengthen your general knowledge but will give you ideas to be more specific and informative about the topic you asked.

Try to Grasp writing skills used in that Newspaper

** Start practicing by writing in small paragraphs Practice writing in essay or precis in your own words.
** Set a limit of words for yourself and write the essay within that word limit.

Use of Dictionary to look up the difficult words

** Note down Important Vocabulary
** Make use of the dictionary to check new words, its usage and meaning and also note down in your notebook separately.
** Always try 3-4 sentence making with the new word so that you do not forget to use the same in your exams as per the requirement.

Try writing at least one or two essays on daily basis

** You just need to pick at least one topic daily from the current news and Start practicing by writing in small paragraphs

** Try to write about the topic in your own words within the limit prescribed in your exam.
After writing the Essay, you can look for more essays on the topic you have chosen for yourself to get more ideas on the same and note down the important key points.

Tips to prepare Precis Writing for SSC CHSL Tier 2 Descriptive Exam

What is Precis Writing?

Precis writing is nothing but summarising a given passage in limited words, covering all the important aspects and details of the passage given.

“Precis denotes a brief, concise, clear and well connected abstract, summary of a given passage”.  Ability to produce a satisfactory precis is very important for many purposes in practical life. Government Officials & Businessman have no time to go through long and unnecessary details; thus a precis is a good tool for saving their valuable time.

So it is necessary for the officials working as secretary or as private secretary to have expertise in the art of precis writing. The candidates are required to write a precis of a given composition. Thus, the art of writing precis helps one to secure good marks in the examinations.

ESSENTIAL OF A GOOD PRECIS

One must keep the following points in mind while writing a precis

Conciseness

It is the soul of a good precis. The precis must not exceed onethird of the length of original passage.

Completeness

Precis must give a complete idea of the passage. The main idea of the original passage should be presented in the same order in precis writing.

Clarity

A precis should be clear and lucid, free from any ambiguity or obscurity. In an attempt to shorten the passage, you must take care that the sentences constructed by you are free from any error, like improper use of words.

Grammatical Accuracy

A precis must be free from grammatical errors, spelling and punctuation errors etc.

  • One-third of total paragraph
  • Own words
  • Clarity
  • Complete
  • Avoid mistakes
  • Single Paragraph
  • Rules for Good Precis Writing

For avoiding errors in writing a precis, follow a set of rules as given below

  • Read the passage carefully
  • Decide Theme of the Passage
  • Brevity and Clarity
  • Use Own Language
  • Accuracy of the Language
  • Avoid Direct Speech and Use Indirect Speech

Do’s and Don’ts

  • Start with basic idea
  • Include all the important keywords
  • Use easy vocabulary
  • Do not make assumptions
  • Avoid using abbreviations
  • Title can be underlined
  • Use Statistical data
  • Proper Tense usage

How to write Good Precis

There are many important components which make a good precis. For those who have just started their preparation for the upcoming exams, knowing the features of a good precis is extremely useful.

  • Should be a summary of the original paragraph
  • Covering all important keywords from the original paragraph
  • The details in the precis must match in that of paragraph
  • Use of linking words such as and, because, therefore, etc.
  • Should be precise and clear
  • Should be in your own words
  • Must be logically connected
  • Should have an appropriate title.
  • Don’t use any idiom of your own

Precis Writing (Example -1)

In today’s scenario, Mass media, specifically visual media, plays a pivotal role in creating an atmosphere of awareness in society. Media refers to different communication channels or ways through which knowledge and information is conveyed to the viewers or the readers. Visual media refers to the media that conveys knowledge and information to the viewers through their eyes; it includes television, cinema, posters etc. Whatever, is supplied through the visual media has instant and longer lasting effect on the minds of the viewers.

With rapid development of information and technology, the visual media, in the shape of cable TV, with multitudes of domestic and foreign channels has reached almost every house, playing a vital role in moulding public opinion in various ways. It plays a very crucial role in educating, and entertaining the masses. Cable TV has changed the means and modes of entertainment and education.

Sitting before a TV, one can pass and enjoy his free time listening to music, viewing movies, learning techniques of body building, hearing sermons of religious saints, learning about lives of wild animals, birds, water creatures, knowing about space and what not.

During the election period, one can know the electoral positions of political parties and their leaders, from all parts of the country and its impact on the election campaign and all facts of electioneering, just sitting before the TV.

Youngsters and teenage students are seen viewing the channels as per their likings; if some are viewing the music channels some are seen quenching their thirst for knowledge viewing channels like ‘Discovery’ or ‘National Geography’ or ‘History’ etc. The image on the small screen thus has a significant impression on all, more particularly on the gullible children and on the teens. The young mind takes the reel as real and thus is more often and more easily moulded and motivated by the visual media.

The present day fashion, hair dressing, sexual liberties, dating and awakening towards the right of youth, awareness among the women of their rights are because of the role visual media is playing in society. In a hysterical effort to excel others, some channels are showing such scenes and images which are of no importance or have an adverse effect on the minds of viewers.

Showing of sexual and rape cases, with minute details by the anchor and showing brutal scenes of murder, the channels have crossed the limit of ethics and morality. The TV coverage of massacre, creates feeling of hatred among communities and motivates others to wreak vengeance. Obsessed by the sole aim of making a fast buck the channels are competing with one another to stoop to any kind of absurdity, without considering even for a minute as to what effect such visuals have on society.  (460 Words)

Title:  Visual media Vs Indian Society

 

Precis :

Visual media plays an important role in creating awareness in society as it has a prolonged effect on the viewers. Advancement in technology has enabled visual media to penetrate in every house, so it can easily moulds public opinion. Cable TV has significantly affected the lifestyle of people. Methods of entertainment and passing leisure time have changed. During elections, one can know the latest status through TV. Youngsters and teenagers watch different channels as per their choices. They seem to be easily influenced by visual media. The present awareness towards fashion, sexual liberties, rights of youth and women are the result of the impact of visual media on society. Owing to unhealthy competition, TV channels are showing indecent and instigating scenes and programmes causing hatred and violence among the people, just for popularity and making money. They have no regard for ethics and morality and the effect of such visuals.

(150 words)

 

Precis Writing (Example-2)

When we survey our lives and efforts we soon observe that almost the whole of our actions and desires are bound up with the existence of other human beings. We notice that whole nature resembles that of the social animals. We eat food that others have produced, wear clothes that others have made, live in house knowledge and beliefs has been passed on to us by other people though the medium of a language which others have created. Without language and mental capacities, we would have been poor indeed comparable to higher animals.

We have, therefore, to admit that we owe our principal knowledge over the least to the fact of living in human society. The individual if left alone from birth would remain primitive and beast like in his thoughts and feelings to a degree that we can hardly imagine. The individual is what he is and has the significance that he has, not much in virtue of the individuality, but rather as a member of a great human community, which directs his material and spiritual existence from the cradle to grave.   (183 words)

Title:   Human being: A social animal

Precis :

Being a social animal, we are bound up with our actions and desires with others. Our food, clothes, residents and beliefs are interconnected. Without the use of languages created by others, we would have been mere an animal. If we had not been a social animal, we would have been primitive and beast like in thoughts and feelings. Thus, society plays a significant role in a person’s life.   (68 words)

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Essays

Uniform civil code (UCC) essay in english

Uniform civil code (UCC) essay in english 250 words :

Introduction : 

Uniform Civil Code is a proposal to have common set of governing laws for every citizen without taking into consideration the religion of people. It means that all the citizen of India will be govern by the same set of secular civil laws in matters of marriage, divorce, maintenance, adoption, inheritance etc. There shall be one law for all civil matters whether they are Hindu or Muslims. Article 44 of the constitution itself says that the state shall endeavour to secure for the citizens a Uniform Civil Code throughout the territory of India.

  • There should be no discrimination on the basis of their civil laws and everyone has to follow the Uniform Civil Code. 
  • It is an irony that a Hindu woman enjoy the complete right of being the single soulmate of her husband, Muslim women on the other hand don’t have this privilege.
  • They can get divorce very easily by uttering the word “Talaq” thrice to their wife. In Shah Bano Case (1985) a very poor Muslim women claimed maintenance after she was divorced. 
  • The Parliament passed the Muslim Women’s (Protection of Rights in Divorce) Act,1986 which nullified the decision of SC passed in Shah Bano’s case.

Conclusion :

It will pave the way for national integration and secularism. It will also promote gender equality, welfare of women and justice. It will simplify the cumbersome legal matters governed by personal laws. One must understand that Uniform Civil Code is not a weapon directed against any particular community. It is simply a code that puts all the citizens of India irrespective of their caste, religion or gender under one umbrella.

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Long Essay on Uniform civil code essay in english

Introduction :

Uniform Civil Code is a proposal to have common set of governing laws for every citizen without taking into consideration the religion of people. It means that all the citizen of India will be govern by the same set of secular civil laws in matters of marriage, divorce, maintenance, adoption, inheritance etc. There shall be one law for all civil matters whether they are Hindu or Muslims. Article 44 of the constitution itself says that the state shall endeavour to secure for the citizens a Uniform Civil Code throughout the territory of India. 

There should be no discrimination on the basis of their civil laws and everyone has to follow the Uniform Civil Code. 

It is an irony that a Hindu woman enjoy the complete right of being the single soulmate of her husband, Muslim women on the other hand don’t have this privilege.

They can get divorce very easily by uttering the word “Talaq” thrice to their wife. In Shah Bano Case (1985) a very poor Muslim women claimed maintenance after she was divorced. 

The Parliament passed the Muslim Women’s (Protection of Rights in Divorce) Act,1986 which nullified the decision of SC passed in Shah Bano’s case.

Conclusion :

It will pave the way for national integration and secularism. It will also promote gender equality, welfare of women and justice. It will simplify the cumbersome legal matters governed by personal laws. One must understand that Uniform Civil Code is not a weapon directed against any particular community. It is simply a code that puts all the citizens of India irrespective of their caste, religion or gender under one umbrella.

Important Facts about UCC 

  • The Uniform Civil Code (UCC) in India proposes to replace the personal laws  of each major religious community in the country with a common rules for every citizen.
  • The constitution has a provision for Uniform Civil Code in Article 44 as a Directive Principle of State Policy which tells that “The State shall endeavor to secure for the citizens a uniform civil code throughout the territory of India.”
  • A secular democratic republic like India should have a common civil and personal laws for its citizens irrespective of their religion, class, caste, gender etc.
  • It is generally seen that personal laws of almost all religions are discriminatory towards women. Men are usually granted upper preferential status in matters of succession and inheritance. Uniform civil code will bring both men and women at par.
  • All Indian citizens are equal before the law as the criminal laws and other civil laws (except personal laws) are same for all. With the implementation of Uniform Civil Code, all citizen will share the same set of personal laws.

Cons of Uniform Civil Code (UCC)

  • It is pragmatically tough to come up with a uniform set of rules for personal issues like marriage due to tremendous cultural diversity India across the religions, sects, castes, states 
  • Many communities, particularly minority communities perceive Uniform Civil Code as an encroachment on their rights to religious freedom. 
  • The constitution provides for the right to freedom of religion of one’s choice. With codification of uniform rules and its compulsion, the scope of the freedom of religion will be reduced.
  • The government should be sensitive and unbiased at each step while dealing with the majority and minority communities. Otherwise, it might turn out to be more disastrous in a form of communal violence.

Essay on Freedom of speech – Issues & Challenges to India

Introduction :

“The right to think is the beginning of freedom, and speech must be protected from the government because speech is beginning of thought” is a prominent statement of SC judge AM Kennedy. The constitution of India guarantees everyone the freedom of speech irrespective of caste, creed, gender or religion. Freedom of speech allows the people to express themselves, and share their views and opinions. As a result, the public and the media can comment on any political activity and also express their dissent towards anything that they think is not appropriate.

  • Different countries have different restrictions on their freedom of speech. Some countries do not allow this fundamental right at all for example North Korea.
  • There, the media or the public are not allowed to speak against the government. It is a punishable offence to criticize the government or the political parties there.
  • The freedom to practice of religion, the freedom to express love and affection, the freedom to express our opinions and dissenting views without hurting sentiments and causing violence is an essential part of Indian democracy.
  • Freedom of speech is not about our fundamental rights, it is actually a fundamental duty that every citizen should rightfully obey in order to save the essence of democracy.
  • The freedom of speech of a country can apparently be measured in terms of the freedom of the press of that country. A strong media reflects a strong, liberal and a healthy democratic system with an appetite to take criticisms and dissent in a positive manner.
  • Mostly governments are very hostile towards any form of dissent or criticism coming towards them and they try to stifle the voices that would have against them.
  • This can be very dangerous for any country for example, in India, there are more than 135 crore people and we can assured that not every person will have the same way of thinking.
  • All sides and perspective of the topic have to be considered before making a choice. A good democracy will involve all its members before formulating a policy.
  • But a bad one will blindside its critics and makes unilateral and authoritarian policies and force them to their citizens. At the same time, freedom of speech can’t be absolute.
  • No one can cause violence, hatred and tensions in the society in the name of freedom of speech. Freedom of speech should not lead to anarchy and chaos in a country.

Conclusion :

The government should maintain a balance between freedom of speech and maintaining law and order. To protect freedom of speech we can’t compromise on the law and order of a state and in the same way in order to maintain law and order we should not curtail the freedom of speech of the people. That’s why the constitution mentions in Article 19 (2), the conditions under which the Freedom of speech can be regulated and curtailed if those acts breach the socially accepted norms and put the dignity of the state at stake.

Essay on Freedom of speech – Issues & Challenges

Introduction :

“The right to think is the beginning of freedom, and speech must be protected from the government because speech is beginning of thought.” — SC judge Anthony M .Kennedy. Article 19 (1) (a) of the Indian constitution guarantees the citizens of the India , the right to freedom of speech and expression. There are some facets of Freedom of speech and expressions (FOSE). Some of these are freedom of press, commercial advertisements, government has no monopoly over Electronic media, Right to information and Publishing one’s opinions on digital society etc.

Why FOSE sometimes is considered as challenge to Public order?

Public order is defined as a state of prevailing of peace and tranquility in the society any act that affects the law and order or may lead to disturbance of harmony of society is considered as an issue in the interest of public order.

What did make the FOSE a buzz word recently?

– Supreme court of India upheld the petition that challenged the Internet shutdown in many places like Uttarpradesh, Assam specifically in Jammu and Kashmir in 2019 and 2020 after the promulgation of Citizenship Amendment Act, 2019.
– High court of Tripura also supported the freedom of expression of public officers on social media platforms.
– Power of the day again and again used sedition charges those who criticized the policies of government publically.

Challenges to India because of FOSE?

 In the scope of Security of the state any act that aggravate or encourage commission of violent crimes is considered as a violation of Indian penal code(IPC).
 Under Foreign Relation Act (FRA), 1932 any malicious propaganda that has intention to vitiate friendly relation with other nation is punishable , this does not include the country namely Pakistan.
 Though it is not clearly elaborated in IPC any speech that jeopardize the decency and morality is regarded as punishable offence.

Conclusion :

Unrestricted allegations against government of the day is spreading like a wild fire which needs continuous scrutiny and at the same time maintaining constitutional rights of the issues in public interest. The same constitution mentions, namely Article 19 (2), conditions under which the FOSE can be regulated and curtailed if those acts breach the barriers of socially well accepted norms and that put the dignity and reputation of the state at a stake. It would augur well if we use the rights within the perimeter put by Indian constitution with well sate of mind and discretion.

Long essay on Freedom of speech – Challenges to India

Introduction :

India constitution guarantees every Indian the freedom of speech  irrespective of gender (sex), caste, creed or religion. This is a fundamental freedom which is guaranteed and that defines the values of democracy in any nation. The freedom to practice of religion, the freedom to express love and affection, the freedom to express our opinions & thoughts and dissenting views without hurting sentiments and causing violence is an essential part of Indian democracy. Freedom of speech is not about our fundamental rights, it is actually a fundamental duty that every citizen should rightfully obey in order to save the essence of our democracy.

  • The kind of freedom of speech we find in many democratic countries like UK, USA, France or Germany is not seen in authoritarian governments like Malayasia, China or Syria and is failed democracies Pakisthan or Rwanda.
  • These governance systems are failed due to lack of freedom of speech in their countries. The freedom of speech of a country can apparently be measured in terms of the freedom of the press of that country.
  • A strong media reflects a strong, liberal and a healthy democratic system with an appetite to take criticisms and dissent in a positive manner.
  • Mostly some governments are very hostile towards any form of dissent of criticism coming towards them and they try to stifle the voices that would have against them.
  • This is a dangerous precedent for any country for example, in India, there are more than 135 crore people and we can rest assured that not every person will have the same way of thinking and the same way of opinion on a given topic.
  • The difference of opinions and respect we have for each other in a policy-making body is what makes us a true democracy. All sides and perspective of the topic have to be considered before making a choice.
  • A good democracy will involve all its members before formulating a policy but a bad one will blindside its critics and takes unilateral and authoritarian policies and force them to their citizens.
  • The sedition law, under section 124A of Indian Penal Code, says that if a person by words either by written or spoken brings hatred, contempt or excites tension towards a government or a person can be fined or jailed or both.
  • This law is never used in its spirit. British used to use this law to silence the freedom fighters of India and now the ruling parties of India use this to stifle the dissenters and is harming the democratic values of the country.
  • Inspite of various laws that protect the people of India in rightly fully exercising their freedom of expression in India. But while the laws stay, its implementation that are proving to be a big challenge for the authorities in India.
  • At the same time, freedom of speech and expression can’t be absolute. No one can cause violence, hatred, bigotry and tensions in the society in the name of freedom of speech.
  • This will harm the very reason why freedom of speech is allowed in the first place. Freedom of speech should not lead to anarchy and chaos in a country.

Conclusion :

When article 370 was abrogated in Kashmir, freedom of speech was stifled, not because the government wanted to stifle democratic values but to prevent the spread of fake news, put a curb on terrorism and any sorts of preventing communal tensions in the area. Governments around the world should maintain a balance between freedom of speech and maintaining law and order. To protect freedom of speech we can’t compromise on the law and order of a state and in the same way in order to maintain law and order we should not curtail the freedom of speech of the people.

Abrogation of Article 370 and 35a

Introduction :

The article 370 and 35A of the Indian constitution deals with the provision of certain special powers to the state of Jammu and Kashmir. It grants a ‘temporary’ autonomous status to the state of Jammu & Kashmir. After passing a statutory resolution on scrapping special status to Jammu and Kashmir, Article 370 was abrogated by Indian Government on 5th August 2019 and Rajya Sabha had passed a Reorganization Bill 2019 which had effectively bifurcated the state of Jammu and Kashmir into two Union Territories – Jammu and Kashmir and Ladakh.

  • As per the Article 370, the provisions of the constitution which apply to other states do not apply to Jammu and Kashmir until and unless the state legislative assembly of Jammu and Kashmir separately passes such provision except provisions related to defense, foreign affairs, finance, and communications.
  • The residents of the state of Jammu & Kashmir had a separate law and provisions related to Citizenship, Ownership of property, Fundamental rights, Directive Principle of State Policy and Fundamental Duties & these were not applicable to the state of Jammu and Kashmir.
  • After abrogation of article 370, Jammu and Kashmir is no longer enjoy special status and the laws of Indian Constitution are applicable to all residents of Jammu & Kashmir and Ladakh including provisions related to Citizenship, Ownership of property, Fundamental rights, Directive Principle of State Policy and Fundamental Duties. 
  • Article 35A has been abrogated and now Indian tricolour is National Flag for J&K and Ladhak also. Right to Information and Right to Education are now applicable to J&K & Ladhak union territories.
  • The Panchayats are now enjoying the same powers as in other states. With abrogation of Article 370, tenure of J&K state Assembly is now be of five years as in other parts of state which till now had a special status with a 6-year tenure.
  • The Union Territories (UTs) now have a Chief Minister and a Lt Governor and all financial bills will need to cleared by Lt Governor.
  • Indian Penal Code (IPC) had replaced Ranbir Penal Code (RPC) to deal with criminal matters. With addition of two new UTs, total number of union territories are now 8 i.e. J&K, Ladakh, Delhi, Puducherry, Diu and Daman & Dadra and Nagar Haveli, Chandigarh, Lakshadweep and Andaman and Nicobar Islands.

Conclusion :

Post the repeal of the Article 370, doors to private investment in J&K are opened, which helps in increasing the potential for development there. Increased investments also leads to increased job creation and further betterment of socio-economic infrastructure in the state. The Government is now able to provide better medical, education facilities to citizens of J&K and have better position to curb terrorism. The Opening of buying of lands bring in investments from private individuals and multinational companies and also give a boost to the local economy.

National Register of Citizens (NRC) Issues in India

Introduction :

The National Register of Citizens (NRC), is the list of Indian citizens in Assam. National Register of Citizens, 1951 is a register prepared after the conduct of the Census of 1951 in respect of each village, showing the houses in a serial order and indicating names of persons staying therein. It is being updated to weed out illegal immigration from Bangladesh and neighbouring regions.

  • Recently Assam released the final draft of the National Register of Citizens (NRC), which included 1.9 crore names out of a total applicant pool of 3.29 crore.
  • The political leaders have assured that everyone will be given a fair and patient hearing to prove their citizenship.
  • The Supreme Court recently issued a notice to the centre and the Election Commission of India on a plea seeking that the National Register of Citizens (NRC) be updated to include Tripura.
  • The final draft of the NRC in Assam was released, excluding four million residents of the state.
  • An updated NRC is likely to put an end to speculations about the actual number of illegal migrants in Assam in particular and the country in general.
  • It will provide a verified dataset to carry out meaningful debates and implement calibrated policy measures.
  • Though the draft provides a window for re-verification, due to large number of people being excluded from the list, it will be very difficult to physically verify all of them.
  • This draft of the NRC is however not final and people can still appeal against the non-inclusion of their names in the NRC.

Conclusion :

Several religious and linguistic minority groups are also opposing the NRC as discriminatory and undemocratic. The main purpose of NRC is to separate illegal immigrants from legitimate residents of Assam.  The immediate consequence of it is that several lakh individuals will lose their right to vote. The claims of those left out in the NRC must be heard carefully. There is a need for a robust mechanism of legal support for the four million who have to prove their citizenship to India with their limited means.

Internal Security Challenges in India

Introduction :

Internal security is the security that lies within the borders of a country. It ensures the maintenance of peace, law & order and protection of sovereignty within territory of a country. Internal security is different from external security. External security is considered as the security against aggression by a foreign country. Maintaining the external security is the responsibility of the armed forces of the country such as the Indian Army, Indian Navy and Indian Air Force in India.

  • While internal security comes under the purview of the police, which can also be supported by the Central Armed Police Forces (CAPF) as per the requirement.
  • In India, the internal security matters are governed by Ministry of Home Affairs (MHA). If we look at the past, India’s internal security problems have multiplied because of linguistic riots, inter-state disputes and ethnic tensions.
  • Our country was forced to redefine its inter state boundaries due to linguistic riots in 1956. After that, the rise of Naxalism was also seen as a threat to internal security in India.
  • At the time of independence, our country was under-developed. The country adopted the equitable and inclusive growth model for growth and development.
  • This situation was exploited by various people or groups to pose a very dangerous challenge to the country’s internal security in the form of Naxalism and Left-Wing Extremism.
  • Cyber security is the latest challenge that our country is facing these days. We could be the target of a cyberwar which can harm our security at any time.
  • The growth in the use of internet has also shown that social media could play a vital role in spreading fake news and violence and thus can become a threat to our internal security. 
  • Border management is also important in reducing the threats to our internal security. A weak border management can result in infiltration of terrorists, illegal immigrants and smuggling of items like arms, drugs and counterfeit currency.

Conclusion : 

In the Global Terrorism Index 2020, India has been ranked at 8th place in the list of countries most affected by terrorism. India continues to deal with terrorist activity on different fronts like terrorism related to territorial disputes in J&K and secessionist movement in Assam. India needs to implement all of its national powers in a coordinated manner to address its security issues and this will happen only when we give national level importance to internal security in India.

Cultural Diversity In India in english 

Introduction :

Indian culture is diverse and consist of various customs, ideas and social beliefs. India has different cultures and communities that differ in their food habits, cloths, languages, and traditions. It is the oldest and famous among the other cultures of the world. Indian literature is also a combination of various communities, traditions, customs, and religions. The diversity of Indian culture is well known worldwide. Cultural diversity is also seen in Indian Philosophy, art, music, and even Literature.

  • India is a global hub of multi-cultural and multi-traditional festivals like Dussehra, Holi, Diwali, Christmas, Ramazan, Guru Nanak Jayanti, Ganesh Chaturthi etc.
  • Each Indian festival tells its own cultural and national tale and is celebrated with different customs & traditions.
  • In India three National festivals are also celebrated with great zeal and enthusiasm, these are the Republic Day, Independence Day, and Gandhi Jayanti.
  • In India, God lives in the heart of every person. Indians hold different prayers, beliefs, and values. In the Hindu tradition, everyone worships and respects Cows, Neem tree, Banyan tree, and Peepal tree.
  • In India rivers are also worshiped and have great religious significance and sentiments. Rivers such as Ganga, Yamuna Godavari, Bramhaputra, Narmada, and Tapti occasionally worshiped in India.
  • The Joint family system is the prevailing system in India. In most cases, the family members consist of parents, children, children’s spouses, and offspring.
  • All of these family members live together under a single roof and the eldest male member is the head of the family.
  • Arranged marriages are also a part of Indian culture. Most Indians have their marriages planned by their parents. In almost all marriages in India, the bride’s family gives dowry to bridegroom.
  • Weddings are certainly festive occasions in Indian culture. There is involvement of decorations, clothing, music, dance, rituals in Indian weddings.
  • India is a home of many sacred and religious places like the Amarnath temple, Badrinath, Haridwar, Vaishno Devi and Varanasi, which are located in the northern part of the country.
  • However, in the southern region, Rameshwaram temple and Sabrimala temple have great significance. India celebrates a huge number of festivals.

Conclusion :

These festivals are very diverse because of multi-religious and multi-cultural societies in India. Indians greatly value festive occasions and the whole country joins in the celebrations irrespective of the differences. Thus, we can say that India is filled with traditions and modern culture. People have the freedom to practice any religion they want. This is why Indian culture is widespread across the world.

Responsibilities of a good citizen 

Introduction :

We are the citizen of India and have acquired citizenship by virtue of our birth. Being a good citizen requires a lot of training and efforts as every citizen has some duties and certain rights. We also have a right to take part in judicial, legal, political, religious and social affairs of the country. “Citizenship consists in the service of the country.” said by Pt. Jawaharlal Nehru, the first Prime Minister of India, this line explains that citizenship consists not merely in enjoying certain rights but also in discharging our duties towards the nation.   

  • A good citizen is always broad minded and ready to sacrifice his life for the sake of his country. He must love his country and also have firm and deep faith in laws of the land.
  • He must consider himself as an Indian first and anything else afterwards. He is ready even to shed his blood for the honour of his country.
  • A good citizen also respects the cultural heritage, the heroes, the sages and saints of his country. He must respect the race to which he belongs. He also raises the standard of living of his country by working hard honestly.
  • But he must also keep in mind the welfare of the state, the benefit of society and interests of the nation.
  • At the time of foreign attacks, he must be ready to shed his blood and hence, defense of the country is the supreme duty of a good citizen.
  • A good citizen must live in peace and harmony with his fellow citizens. He must respect the institutions of his country. A good citizen respects the laws of the state and should have no patience with criminals and anti-social elements.
  • Unity of the nation should be his topmost priority and should work for the unity of the country. A good citizen should have a spirit of co-operation, friendliness and devotion towards his family and society.

Conclusion : 

He must respect other faiths. He must not do anything that brings disgrace to his society or to his country. He always makes an effort to bring about desirable improvements in the existing educational and other institutions of his country. In this way, a good citizen always thinks about the welfare of the society and his country first.

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Responsibility of a good citizen in points – 

  • Be active in your community.
  • Be honest and trustworthy.
  • Follow rules and laws of the country.
  • Respect the rights of other citizens.
  • Be informed about the world around you.
  • Respect the property of other people.
  • Be compassionate and eagar to learn.
  • Take responsibility for your actions.
  • Be a good neighbor and fellow citizen.
  • Protect the environment & wildlife

Life in Covid-19 Pandemic

Introduction :

COVID-19 has affected our day to day life. This pandemic has affected thousands of peoples, who are either sick or are being killed due to the spread of this disease. The most common symptoms of this viral infection are fever, cold, cough, bone pain and breathing problems. This, being a new viral disease affecting people for the first time, vaccines are being available now but still, the emphasis is on taking extensive precautions such as extensive hygiene, regularly washing of hands, avoidance of face to face interaction, social distancing, and wearing of masks etc.

  • Identification of the disease at an early stage is vital to control the spread of the virus because it very rapidly spreads from person to person.
  • Most of the countries have slowed down their manufacturing of the products. The pandemic has been affecting the entire food system.
  • Trade restrictions and confinement measures have been preventing farmers from accessing markets, including for buying inputs and selling their produce, and agricultural workers from harvesting crops, thus disrupting domestic and international food supply chains and reducing access to healthy, safe and diverse diets.
  • The pandemic has impacted jobs and placed millions of livelihoods at risk. As common man lose jobs, fall ill and die, the food security and nutrition of millions of women and men are under threat, with those in low-income countries, particularly the most marginalized populations, which include small-scale farmers and indigenous peoples, being hardest hit.
  • The various industries and sectors are affected by the cause of this disease including the pharmaceuticals industry, power sector and tourism.
  • Millions of agricultural workers waged and self-employed, regularly face high levels of working poverty, malnutrition and poor health, and suffer from a lack of safety and labour protection.
  • With low and irregular incomes and lack of social support, many of them are forced to continue working, often in unsafe conditions, thus exposing themselves and their families to additional risks.
  • Further, when experiencing income losses, they may resort to negative coping strategies, such as distress sale of assets, taking loans or child labour.
  • Migrant agricultural workers are particularly vulnerable, because they face risks in their transport, working and living conditions and struggle to access support measures put in place by governments.
  • This virus creates drastic effects on the daily life of citizens, as well as on the global economy.
  • There are restrictions of travelling from one country to another country. During travelling, numbers of cases are identified positive when tested, especially when they are taking international visits.

Conclusion :

The lockdown has also impacted migrant workers, several of whom lost their jobs due to shutting of industries and were outside their native places wanting to get back.  Since then, the government has announced relief measures for migrants, and made arrangements to return to their native places. All governments, health organizations and other authorities are continuously focusing on identifying the cases affected by the COVID-19. Healthcare professional face lot of difficulties in maintaining the quality of healthcare in these days.

Importance of Youth in Society

Introduction :

Youth is considered as the greatest asset for a country as their intelligence and hard work will take the country on the path of success and prosperity. As every citizen has some responsibilities towards the nation, so the youth too. They are the building blocks of any nation. A youth is a person whose age is between 15 to 30 years without considering their gender. As the youth are the backbone of a society and hence they determine the future of any given society.

  • It is so, because of all other age groups like the kids, teenagers, middle aged and the senior citizens rely on the youth and they have a lot of expectations from them.
  • This makes the youth to be an important age group in today’s society and the future of society highly depends on them.
  • Due to high dependency on youth in society, we all have a very important role to play as the future of our families, communities and the country lies in our hands.
  • Youth can renew the current status of the society by their leadership, innovation and development skills.
  • Youth are expected to transform the current technology, education system and politics of the country.
  • They also have to maintain our rich cultural heritage and ethical values in the societies. This is why the development of a country requires active participation of the youth.  
  • It does not matter in which field we want to progress, either technical or sports, youth is required everywhere. Our youth must aware of their inner powers and the role they have to play in the society.
  • There are many ways in which we can help the youth of our country to achieve their true potential.
  • For that, the government must introduce programs that will help in fighting off issues like unemployment, poor education institutes and more to help them prosper without any hindrance.
  • Similarly, citizens must make sure to encourage our youth to do better in every field they want to excel.
  • When we constantly discourage our youth and don’t believe in them, they will lose their spark and start feeling dejected.

Conclusion :

We all must make sure that they should be given the wind beneath their wings to fly high instead of bringing them. We must make sure that everyone must be given equal chance to prove themselves worthy. The youth have a different outlook which the older generations don’t have. It is the responsibility of the youth to make our country rich and prosper.

Migrant Workers 

Introduction :

A migrant worker is a person who migrates within their home country or outside it for work. Migrant workers do not have the intention to stay permanently in the place where they work. The nationwide lockdown announced on March 24, has caused immense distress to migrant workers around the country. Thousands of migrant workers were walking across India to reunite with their families in their native places. Indian migrant workers during the COVID-19 pandemic have faced multiple hardships.

  • With the closure of factories and workplaces due to the lockdown, millions of migrant workers had to deal with the loss of income, food shortages and uncertainty. 
  • Thousands of them, began walking back home, with no means of transport due to the lockdown. In response, the Government took various measures to help them, and later arranged transport for them.
  • The major states like Maharashtra, Karnataka, Tamil Nadu, Gujarat, Andhra Pradesh, Telangana, Delhi and Kerala are trying to minimise the loss of labour and are prime states for ‘unlocking’ of economic activity.
  • According to the 2011 Census, there are 41 million interstate migrants in India who migrate to other states due to the lack of work opportunities in their home state.
  • Poorer, less educated, and from socially disadvantaged communities, survival draws these migrants to the cities. Meagre pay, extended working hours, and unsafe work conditions characterise their exploited labour.
  • Covid-19 renders most of them jobless in cities with crushing rents and no access to food or water. Without employment, city life is so burdensome that many risk returning to the safety of their villages, in some cases even at the cost of their lives. 
  • The disproportionate impact of state policy also breaches the right to equality under Article 14 of the Constitution and imposes a corresponding duty on the government to mitigate negative effects.
  • The government has also launched an employment scheme named ‘Garib Kalyan Rozgar Abhiyaan’ implementing on a mission mode in 125 days in 116 districts of six states – Bihar, Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, Rajasthan, Jharkhand and Odisha.
  • The scheme was launched after lakhs of migrant workers returned to their home states following loss of employment in urban areas due to the nationwide lockdown to combat the spread of COVID-19.
  • In the long term, India should work towards reducing migrant workers’ vulnerability by amending labour laws.
  • Such amendments should align migrant workers’ conditions with other unorganised sector workers, while also developing norms for food security, repatriation and wage safety in times of emergency. 

Conclusion :

While emergency solutions are urgent, they must pave the way to address more fundamental issues in migrant worker-dominated sectors. The government has already announced schemes like ‘One Nation One Ration Card’ to enable migrant workers and their family members to access PDS benefits from any Fair Price Shop in the country. But they also need cash for their day-to-day needs.

Reservation in India

Introduction :

Reservation in India is the process of setting aside a certain percentage of seats in government institutions for the members of backward and under-represented communities. Scheduled Castes (SCs), Scheduled Tribes (STs) and Other Backward Classes (OBCs) are the primary beneficiaries of the reservation policies under the constitution. The Modi government has tabled in Lok Sabha the bill seeking 10 per cent reservation for poor among the upper castes.

  • The concept was enshrined in the Constitution to allow the so-called deprived classes to come at par with the so-called privileged ones.
  • Initially, the reservation policy was only for 10 years after the independence to uplift the socially and under-privileged to stabilize them economically.
  • It has killed the spirit of brotherhood and healthy competition. Unfortunately, today, we stand divided widely into Hindu, Muslim, SC, ST, OBC with newer reservations coming up from different sections of society like Christians, Jats, Pandits, Tribal etc.
  • Reservations with the view of helping the deprived classes to gain a better footing and avail equal benefits of an independent and free nation was introduced in the system.  
  • Yet, the various governments till now have failed to truly uplift the backward sections of the society. The need of the hour is to remove evil.
  • Making education mandatory and free for all till the age of 15 is one good resolution that has been adopted. Other could be proposing reservation based on economic status and providing opportunities to students to earn while they study.
  • Reservation should be restricted only to the first generation bene­ficiaries. The candidates whose parents have already availed reservation fa­cilities in securing a job should not be given the facility again.
  • Concession of scholarship may be provided to SC, ST and OBC stu­dents securing more than the specified percentage of marks in high school and graduate courses for getting quality education in good in­stitutions.

Conclusion :

All these measures will benefit those who really deserve help. The policy of reservation has to be scientific and rational. In the given economic and political structure, caste or birth or family should not determine one’s life chances. Reservation should not be forsaken because, everyone wants that society should develop as a whole and everyone should reap the benefits of development.

Traffic Rules & Safety Reforms 

Introduction :

Traffic rules and regulations are formulated to regulate traffic, for the safety and convenience. They are very essential to ensure safety on road as well as their users. Some rules are formulated for specific types of users for example it is mandatory to slow down while approaching a zebra crossing is meant for the safety of pedestrians & wearing helmet while riding a bike is meant for safety of the rider. While following the traffic signals, there are a few things that one should keep in mind.

  • While stopping on a red light, one should make sure to stop well before the zebra crossing, even though the signal turned green, don’t accelerate instantly. 
  • A flashing red signal is a strict indication to stop, while a flashing orange light directs to proceed with caution. People’s reluctance to follow traffic rules could be attributed to various factors.
  • There is no organized road safety education in the Indian system. People disobeying traffic rules are seldom confronted, thus making them more reluctant. 
  • Road accidents are responsible for most fatalities in India. Numerous commendable steps have been taken by governments to improve road safety such as implementation of strict laws and huge penalties for not following these laws, launching of several new projects for expansion and proper maintenance of roads and sidewalks.
  • It also includes strict parameters to issue license, installation of traffic lights aided with cameras for absolute monitoring of especially cross-roads, launch of road safety awareness campaigns in schools, public gatherings or through social media, etc.
  • First aid awareness in case of emergence can be vital in some cases.  However, these efforts are not enough as neither laws nor technology can help that much, unless root level education and awareness is spread.
  • In conclusion, Road safety is not just for our own sake, but also for the sake of others. But now Post imposition of the Motor Vehicles (Amendment) Act, 2019 has increased the penalties for traffic rule violations.

Conclusion :

Under the amended Act, violations such as drunken driving at driving attract a fine of Rs 10,000. Penalty for driving without a license was increased from fine up to Rs 500 to fine of Rs 5,000. Not wearing a helmet while riding a two-wheeler can now lead to a fine Rs 1,000. Such reforms in our vehicle act must be welcomed by the citizens who really want the progress of the country. This will also reduce road accidents and ensure the safety of the road users.

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Essays

Essay on Life during covid-19 in hindi

कोरोना महामारी में जीवन पर निबंध – Essay on Life during covid-19 in hindi

Introduction :

कोरोना महामारी ने हमारे दैनिक जीवन को पूरी बदल कर रख दिया है। इस महामारी के कारण लाखो लोग बुरी तरह से प्रभावित हुए है, जो या तो बीमार हैं या इस बीमारी के फैलने के कारण मारे जा रहे हैं। इस वायरल संक्रमण के सबसे आम लक्षण बुखार, सर्दी, खांसी, हड्डियों में दर्द और सांस लेने में समस्या है। यह, पहली बार लोगों को प्रभावित करने वाला एक नया वायरल रोग होने के कारण, अभी तक इसकी वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसलिए अतिरिक्त सावधानी बरतने पर जोर दिया जाना बहुत जरुरी है, जैसे कि स्वच्छता, नियमित रूप से हाथ धोना, सामाजिक दूरी और मास्क पहनना आदि।

विभिन्न उद्योग और व्यापारिक क्षेत्र इस महामारी के कारण प्रभावित हुए हैं जिनमें फार्मास्यूटिकल्स उद्योग, बिजली क्षेत्र और पर्यटन शामिल हैं। यह वायरस नागरिकों के दैनिक जीवन के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी भारी प्रभाव डाल रहा है। एक देश से दूसरे देश की यात्रा करने पर प्रतिबंध है। यात्रा के दौरान, कोरोना मामलों की संख्या बढ़ते हुए देखी गयी है जब परीक्षण किया गया, खासकर जब वे अंतरराष्ट्रीय दौरे से लौट रहे हों।

  • कोरोना वायरस ने भारत की शिक्षा को प्रभावित किया है। फिलहाल मार्च महीने से लॉकडाउन की वजह से विद्यालय बंद कर दिए गए है। सरकार ने अस्थायी रूप से स्कूलों और कॉलेजों को बंद कर दिया।
  • शिक्षा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण समय है क्यों कि इस अवधि के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। इसके साथ बोर्ड परीक्षाओं और नर्सरी स्कूल प्रवेश इत्यादि सब रुक गए है।
  • शिक्षा संस्थानों के बंद होने का कारण दुनिया भर में लगभग 600  मिलियन शिक्षार्थियों को प्रभावित करने की आशंका जातायी जा रही है।
  • ऑनलाइन क्लासेस के ज़रिये विद्यार्थी इस प्रकार के अनोखे शिक्षा प्रणाली को समझ पाए है।
  • लॉकडाउन के दुष्प्रभाव को ऑनलाइन शिक्षा पद्धति से कम कर दिया है।
  • केंद्र सरकार ने शिक्षा प्रणाली को विकसित करने हेतु पहले साल की तुलना में इस साल व्यय अधिक किया है ताकि कोरोना संकटकाल के नकारात्मक प्रभाव शिक्षा पर न पड़े। सीबीएसई ने विशेष टोल फ्री नंबर लागू किया है जिसके माध्यम से विद्यार्थी घर पर रहकर अधिकारयों से मदद ले सकते है।

बारहवीं कक्षा के विषय संबंधित पुस्तकें ऑनलाइन जारी की गयी है ताकि बच्चो की शिक्षा में बिलकुल बाधा न आये। लॉक डाउन में कुछ बच्चे शिक्षा को लेकर ज़्यादा गंभीर नहीं रहे, वह सोशल मीडिया में चैट मोबाइल में गेम्स खेलते है और अपने कीमती समय को बर्बाद कर रहे थे। अभी माता -पिता की यह जिम्मेदारी है कि लॉकडाउन में भी बच्चे घर पर अनुशासन का पालन करे और ऑनलाइन शिक्षा को गम्भीरतापूर्वक ले और खाली समय में ऑनलाइन एनिमेटेड शिक्षा संबंधित वीडियोस और विभिन्न ऑनलाइन वर्कशीट्स के प्रश्नो को हल करें।

  • कोविड-19 की महामारी ने आज समूचे विश्व की अर्थव्यवस्था, शैक्षिक व्यवस्था तथा सामाजिक स्तर को अत्यंत प्रभावित किया है।
  • कोरोना वायरस ने पुरे विश्व केशक्तिशाली देशों को घुटनो पर लाकर रख दिया है। सारे देश मिलकर कोरोना वायरस से मुक्ति पाने में जुटी है और डॉक्टर्स ,नर्सेज एकजुट होकर लड़ रहे है। उनकी जितनी भी सराहना की जाए कम होगी।
  • नरेंद्र मोदी जी ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कठोर कदम उठाये है जो हमारे देश की भलाई के लिए है और हम सभी को एक भारतीय होने के नाते इस कठोर समय में उनका साथ देना चाहिए ताकि हम देश को रोगमुक्त कर सके। ऐसा करने पर जल्द ही ज़िन्दगी फिर से वापस पटरी पर आ जाएगी। कोरोना वायरस के खिलाफ यह महायुद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक हम इस वायरस को जड़ से ख़त्म ने करे।
  • एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग हो या फिर लैब में लोगों की जांच, सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए कई तरह की तैयारी की है। इसके अलावा किसी भी तरह की अफवाह से बचने, खुद की सुरक्षा के लिए कुछ निर्देश जारी किए हैं जिससे कि कोरोना वायरस से निपटा जा सकता है।

Conclusion :

कोरोनावायरस से बचाव के लिए वर्तमान में कोवैक्सीन तथा कोवीशील्ड नामक दो टीके लगाए जाना शुरू हो चुके है। एक्सपर्ट्स के अनुसार दोनों ही टीके सुरक्षित है। इस वैक्सीन की दो डोज निश्चित समय के अंतराल पर दी जाती है। अभी यह वैक्सीन आयु के अनुसार देश में लगाई जा रही है।लॉकडाउन ने प्रवासी श्रमिकों को भी प्रभावित किया है, जिनमें से कई उद्योगों को बंद करने के कारण अपनी नौकरी खो चुके हैं और सरकार ने प्रवासियों के लिए राहत उपायों की घोषणा भी की ताकि वे अपने अपने घर वापस लौट सके। सभी सरकारें, स्वास्थ्य संगठन और अन्य प्राधिकरण लगातार कोरोना से प्रभावित मामलों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। डॉक्टर और सम्बंधित अधिकारी इन दिनों स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता को बनाए रखने में बहुत कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

कोरोना वायरस का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

Introduction :

कोरोनावायरस (COVID-19) एक संक्रामक रोग है जो कोरोनावायरस के कारण होता है। इसकी शुरुआत पहली बार दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से हुई। डब्ल्यूएचओ ने 30 जनवरी को कोरोनवायरस को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। कोरोनावायरस न केवल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है बल्कि दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर रहा है। विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, व्यापार के मामले में, चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। विश्व के निर्यात का 13% और आयात का 11% केवल चीन से होता है।

दुनिया के कई उद्योग अपने कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। पुरे विश्व में खरीदी जाने वाली लगभग एक तिहाई मशीनरी चीन से आती है, इसलिए कोरोनवायरस ने वैश्विक आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। चीन में कई कारखाने अब बंद हो गए हैं, निर्भर कंपनियों के लिए उत्पादन भी बंद हो गया है। उत्पादन में मंदी के कारण खपत में भी गिरावट आई है और इस तरह से दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है। कोरोनोवायरस फैलने के कारण लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण पर्यटन उद्योग को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कोरोना वायरस का आयात पर प्रभाव

  • इस वायरस से हवाई यात्रा, शेयर बाज़ार, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं सहित लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
  • यह वायरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है।
  • इन दो अर्थव्यवस्थाओं, जिन्हें वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में जाना जाता है, संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है।
  • निवेशकों के बाज़ारों से बाहर निकलने के कारण शेयर बाज़ार सूचकांक में लगातार गिरावट आई है। लोग बड़ी राशि को अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र यथा- ‘सरकारी बाॅण्ड’ में लगा रहे हैं जिससे कीमतों में तेज़ी तथा उत्पादकता में कमी देखी गई है।
  • अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब अनुभव हाल ही में कोरोना वायरस के कारण महसूस किया गया, ध्यातव्य है कि अमेरिकी बाज़ार में 12% से अधिक की गिरावट आई है।
  • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि जो निवेशक ऐसे संकट के समय सामान्यत: स्वर्ण में निवेश करते हैं, इस संकट के समय उन्होंने इसका भी बहिष्कार कर दिया जिससे सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, तथा लोगों ने सरकारी गारंटी युक्त ‘ट्रेज़री बिल’ (Treasury Bills) में अधिक निवेश करना उचित समझा।
  • Apple, Nvidia, Adidas जैसी कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ये चीन के आपूर्तिकर्त्ताओं पर निर्भर हैं, इन्हें भविष्य में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव

  • भारत जब अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में इस वायरस का केवल सतही प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा ऐसे कठिन समय में समस्या का समाधान मात्र ‘एयर लिफ्टिंग’ से संभव नहीं है।
  • यह समस्या न केवल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करेगी, अपितु यह भारत के फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।
  • निर्यात, जिसे अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है, इसमें वैश्विक मंदी की स्थिति में और गिरावट देखी जा सकती है, साथ ही निवेश में भी गिरावट आ सकती है।
  • भारतीय कंपनियाँ चीन आधारित ‘वैश्विक आपूर्ति शृंखला’ में शामिल प्रमुख भागीदार नहीं हैं, अत: भारतीय कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित नहीं होंगी।
  • दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जो कि वृहद् अर्थव्यवस्था और उच्च मुद्रास्फीति के चलते अच्छी खबर है।
  • भारत सरकार को लगातार विकास की गति का अवलोकन करने की आवश्यकता है, साथ ही चीन पर निर्भर भारतीय उद्योगों को आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करनी चाहिये।
  • कोरोना वायरस जैसी बीमारी की पहचान, प्रभाव, प्रसार एवं रोकथाम पर चर्चा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जानी चाहिये ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।

Conclusion :

वायरस जनित यह संकट किसी अन्य वित्तीय संकट से बिलकुल अलग है। अन्य वित्तीय संकटों का समाधान समय-परीक्षणित उपायों जैसे- दर में कटौती, बेल-आउट पैकेज (विशेष वित्तीय प्रोत्साहन) आदि से किया जा सकता है, परंतु वायरस जनित संकट का समाधान इन वित्तीय उपायों द्वारा किया जाना संभव नहीं है। ऑटोमोबाइल उद्योग पहले ही आर्थिक मंदी के कारण संकट में है और अब माल और सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन में कमी आ रही है। चीन से आपूर्ति में रुकावट के कारण वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है। यद्यपि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कोरोनोवायरस के सटीक प्रभाव को निर्धारित करना मुश्किल है, फिर भी यह स्पष्ट है कि यह प्रभाव लंबे समय तक रहेगा।

अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का प्रभाव पर निबंध

Introduction :

कोरोना वायरस एक प्रकार का वायरस है जो मानव और अन्य स्तनधारियों के श्वसन पथ को प्रभावित करता है। ये सामान्य सर्दी, निमोनिया और अन्य श्वसन लक्षणों से जुड़े हैं। कोरोना वायरस दुनिया भर में बीमारी बन गया है और दुनिया के सभी देश इसका सामना कर रहे हैं। जिसके कारण दुनिया की आबादी अपने घर के अंदर रहने को मजबूर है। कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण देश में 53% तक व्यवसाय प्रभावित हुए है।

कोरोना वायरस का प्रकोप सबसे पहले 31 दिसंबर, 2019 को चीन के वुहान में पड़ा। विश्व स्वास्थ्य संगठन इसको रोकने के उपायों के बारे में देशों को सलाह देने के लिए वैश्विक विशेषज्ञों, सरकारों और अन्य स्वास्थ्य संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है। व्यापार के मामले में, चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। चीन विश्व के कुल निर्यात का 13% और आयात का 11% हिस्सेदार है।

इसका असर भारतीय उद्योग पर पड़ेगा। भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक आयात चीन से करीब 45% है। दुनिया भर में भारत से खरीदी जाने वाली लगभग एक तिहाई मशीनरी चीन से आती है और लगभग 90% मोबाइल फोन चीन से आते हैं। इसलिए, हम कह सकते हैं कि कोरोनावायरस के मौजूदा प्रकोप के कारण, चीन पर आयात निर्भरता का भारतीय उद्योग पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। देश भर में बड़ी संख्या में किसानों को भी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

  • इस वायरस से हवाई यात्रा, शेयर बाज़ार, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं सहित लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
  • यह वायरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है।
  • इन दो अर्थव्यवस्थाओं, जिन्हें वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में जाना जाता है, संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है।
  • निवेशकों के बाज़ारों से बाहर निकलने के कारण शेयर बाज़ार सूचकांक में लगातार गिरावट आई है। लोग बड़ी राशि को अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र यथा- ‘सरकारी बाॅण्ड’ में लगा रहे हैं जिससे कीमतों में तेज़ी तथा उत्पादकता में कमी देखी गई है।
  • अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब अनुभव हाल ही में कोरोना वायरस के कारण महसूस किया गया, ध्यातव्य है कि अमेरिकी बाज़ार में 12% से अधिक की गिरावट आई है।
  • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि जो निवेशक ऐसे संकट के समय सामान्यत: स्वर्ण में निवेश करते हैं, इस संकट के समय उन्होंने इसका भी बहिष्कार कर दिया जिससे सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, तथा लोगों ने सरकारी गारंटी युक्त ‘ट्रेज़री बिल’ (Treasury Bills) में अधिक निवेश करना उचित समझा।
  • Apple, Nvidia, Adidas जैसी कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ये चीन के आपूर्तिकर्त्ताओं पर निर्भर हैं, इन्हें भविष्य में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव

  • भारत जब अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में इस वायरस का केवल सतही प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा ऐसे कठिन समय में समस्या का समाधान मात्र ‘एयर लिफ्टिंग’ से संभव नहीं है।
  • यह समस्या न केवल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करेगी, अपितु यह भारत के फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।
  • निर्यात, जिसे अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है, इसमें वैश्विक मंदी की स्थिति में और गिरावट देखी जा सकती है, साथ ही निवेश में भी गिरावट आ सकती है।
  • भारतीय कंपनियाँ चीन आधारित ‘वैश्विक आपूर्ति शृंखला’ में शामिल प्रमुख भागीदार नहीं हैं, अत: भारतीय कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित नहीं होंगी।
  • दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जो कि वृहद् अर्थव्यवस्था और उच्च मुद्रास्फीति के चलते अच्छी खबर है।
  • भारत सरकार को लगातार विकास की गति का अवलोकन करने की आवश्यकता है, साथ ही चीन पर निर्भर भारतीय उद्योगों को आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करनी चाहिये।
  • कोरोना वायरस जैसी बीमारी की पहचान, प्रभाव, प्रसार एवं रोकथाम पर चर्चा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जानी चाहिये ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।
  • वायरस जनित यह संकट किसी अन्य वित्तीय संकट से बिलकुल अलग है। अन्य वित्तीय संकटों का समाधान समय-परीक्षणित उपायों जैसे- दर में कटौती, बेल-आउट पैकेज (विशेष वित्तीय प्रोत्साहन) आदि से किया जा सकता है, परंतु वायरस जनित संकट का समाधान इन वित्तीय उपायों द्वारा किया जाना संभव नहीं है।

Conclusion :

ऑटोमोबाइल उद्योग पहले ही आर्थिक मंदी के कारण संकट में है और अब माल और सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन में कमी आ रही है। होटल और एयरलाइंस जैसे विभिन्न व्यवसाय अपने कर्मचारियों का वेतन काट रहे हैं और छंटनी भी कर रहे हैं। भारत में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों ने अस्थायी रूप से काम को निलंबित कर दिया है। चीन से आपूर्ति में रुकावट के कारण वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है। यद्यपि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कोरोनोवायरस के सटीक प्रभाव को निर्धारित करना मुश्किल है, फिर भी यह स्पष्ट है कि यह प्रभाव लंबे समय तक रहेगा। विश्व बैंक और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने 2021 के लिए भारत की वृद्धि को कम कर दिया है, हालांकि, वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत के लिए जीडीपी विकास दर का आकलन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष  ने 1.9% बताया है जो जी -20 देशों में सबसे अधिक है।

भारत में COVID-19 का सामाजिक प्रभाव पर निबंध

Introduction :

कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी एक वैश्विक समस्या बन चुकी है और इस बीमारी का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार ने 24 मार्च, 2020 को देश में लॉकडाउन लागू किया। सरकार ने कोरोनोवायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में सफलता का दावा किया है, जिसमें कहा गया है कि यदि राष्ट्रव्यापी तालाबंदी नहीं की गई होती तो यहाँ COVID-19 मामलों की संख्या अधिक होती। COVID-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन में हमारे खानपान से लेकर हमारी कार्यशैली बदल चुकी है जिसके कारण शारीरिक गतिविधियो में कमी आयी है जिसके कारण मोटापा, मधुमेह और हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा दिया है।

कोरोना वायरस की वजह से कारोबार ठप्प पड़ गए हैं, कई देशों में अंतरराष्ट्रीय यात्राएं रद्द कर दी गई हैं, होटल-रेस्त्रां तो बंद कर दिए गए हैं, कई कंपनियां ख़ासतौर पर, आईटी सेक्टर की कंपनियों ने लोगों को वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की सुविधा दे रही हैं। दुनिया भर के क्षेत्रों में इस महामारी का प्रभाव दिखाई दे रहा है, लेकिन भारत में कमज़ोर वर्गों, महिलाओं और बच्चों पर इसका प्रभाव सबसे अधिक हुआ है। लॉकडाउन के परिणामस्वरूप, समाज के कमजोर वर्ग के बीच कुपोषण की संभावना बढ़ गयी है।

भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने हाल ही में COVID-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई में सरकार की पहल के रूप में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्ना योजना (PMGKAY) के तहत 12.96 लाख मीट्रिक टन अनाज आवंटित किया। प्रवासी श्रमिकों का मुद्दा इस महामारी का सबसे प्रमुख मुद्दा रहा, जहाँ लाखों लोग बेरोजगार हो गए और बिना पैसे, भोजन और आश्रय के अपने अपने घरो तक पैदल जाने को मजबूर हुए हलाकि सरकार ने बाद में उनके वापस लौटने की व्यवस्था भी कराई।

शिक्षा के क्षेत्र में

  • अप्रैल माह के अंत में जब विश्व के अधिकांश देशों में लॉकडाउन लागू किया गया तो विद्यालयों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था, जिसके कारण विश्व के लगभग 90 प्रतिशत छात्रों की शिक्षा बाधित हुई थी और विश्व के लगभग 1.5 बिलियन से अधिक स्कूली छात्र प्रभावित हुए थे।
  • कोरोना वायरस के कारण शिक्षा में आई इस बाधा का सबसे अधिक प्रभाव गरीब छात्रों पर देखने को मिला है और अधिकांश छात्र ऑनलाइन शिक्षा के माध्यमों का उपयोग नहीं कर सकते हैं, इसके कारण कई छात्रों विशेषतः छात्राओं के वापस स्कूल न जाने की संभावना बढ़ गई है।
  • नवंबर 2020 तक 30 देशों के 572 मिलियन छात्र इस महामारी के कारण प्रभावित हुए हैं, जो कि दुनिया भर में नामांकित छात्रों का 33% है।

लैंगिक हिंसा में वृद्धि

  • लॉकडाउन और स्कूल बंद होने से बच्चों के विरुद्ध लैंगिक हिंसा की स्थिति भी काफी खराब हुई है। कई देशों ने घरेलू हिंसा और लैंगिक हिंसा के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।
  • जहाँ एक ओर बच्चों के विरुद्ध अपराध के मामलों में वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर अधिकांश देशों में बच्चों एवं महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा की रोकथाम से संबंधित सेवाएँ भी बाधित हुई हैं।

आर्थिक प्रभाव

  • वैश्विक स्तर महामारी के कारण वर्ष 2020 में बहुआयामी गरीबी में रहने वाले बच्चों की संख्या में 15% तक बढ़ोतरी हुई है और इसमें अतिरिक्त 150 मिलियन बच्चे शामिल हो गए हैं।
  • बहुआयामी गरीबी के निर्धारण में लोगों द्वारा दैनिक जीवन में अनुभव किये जाने वाले सभी अभावों/कमी जैसे- खराब स्वास्थ्य, शिक्षा की कमी, निम्न जीवन स्तर, कार्य की खराब गुणवत्ता, हिंसा का खतरा आदि को समाहित किया जाता है। 
  • महामारी का दूसरा सामाजिक प्रभाव ‘नस्लभेदी प्रभाव’ का उत्पन्न होना है। जैसा कि हमें मालूम है इस बीमारी की शुरुआत चीन से हुई है इसलिए चीनी नागरिकों को आगामी कुछ वर्षो तक इस महामारी के चलते जाना-पहचाना जा सकता है।
  • भारत में तो नॉर्थ ईस्ट के भारतीयों पर पहले से ही चीनी, नेपाली, चिंकी-पिंकी, मोमोज़ जैसी नस्लभेदी टिप्पणियां होती रही हैं। अब इस क्रम में कोरोना का नाम भी जुड़ना तय है, जिसे एक सामाजिक समस्या के रूप में देखा जाना चाहिए। 

इस सम्बन्ध में उपाय

  • सभी देशों की सरकारों को डिजिटल डिवाइड को कम करके यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिये कि सभी बच्चों को सीखने के समान अवसर प्राप्त हों और किसी भी छात्र के सीखने की क्षमता प्रभावित न हो।
  • सभी की पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित की जानी चाहिये और जिन देशों में टीकाकरण अभियान प्रभावित हुए हैं उन्हें फिर से शुरू किया जाना चाहिये।
  • बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाना चाहिये और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और लैंगिक हिंसा जैसे मुद्दों को संबोधित किया जाना चाहिये।

Conclusion :

सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता आदि तक बच्चों की पहुँच को बढ़ाने का प्रयास किया जाए और पर्यावरणीय अवमूल्यन तथा जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को संबोधित किया जाए। बाल गरीबी की दर में कमी करने का प्रयास किया जाए और बच्चों की स्थिति में समावेशी सुधार सुनिश्चित किया जाए। सरकार को समस्याओं के समाधान को खोजने का प्रयास करना चाहिए ताकि ऐसी समस्याएँ दोबारा पैदा न हो। इस वायरस से लड़ने के लिए सभी व्यक्तियों, सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों को एकसाथ मिलकर योजना बनाकर सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।

पर्यावरण पर कोरोना वायरस का सकारात्मक प्रभाव पर निबंध

Introduction :

कोरोना वायरस दुनिया भर में महामारी बन चुका है और सभी देश इसका सामना कर रहे हैं। जिसके कारण सभी देशो के लोग अपने घरो के अंदर रहने को मजबूर है। कोरोना वायरस के कारण देश में व्यावसायिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोरोनोवायरस ने दुनिया भर में बहुत सारे लोगों का जीवन ले चूका है। कोरोनोवायरस के प्रसार को रोकने के लिए, विभिन्न देशों की सरकारें इसके प्रसार को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठा रही हैं। जहां तक हमारे पर्यावरण का सवाल है, इसपर कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे है। अब धुएँ का उत्सर्जन कम हो गया है जिसके परिणामस्वरूप आसमान स्वच्छ हो गया है।

यही नहीं, सड़को पर वाहनों का उपयोग भी कम हुआ है, जिसके कारण  CO2 गैसों का उत्सर्जन भी काम हुआ है। और अन्य गैसे, जैसे नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी पर्यावरण में सीमित हो पाया है। यह इंगित करता है कि हवा अधिक शुद्ध हो गई है और हम शुद्ध हवा में सांस ले सकते हैं। कोरोनावायरस से निपटने के लिए, कंपनियों ने श्रमिकों को घर से काम करने के लिए कहा है। इससे सड़क पर वाहन कम हो गए हैं। इसके अलावा, प्लास्टिक की खपत भी कम हो गई है क्योंकि अब लोग डिस्पोजेबल ग्लास का प्रयोग चाय या कॉफी के लिए नहीं कर रहे है।

पर्यावरण को फायदा

  • भारत में कई राज्यों से उन नदियों के अचानक साफ हो जाने की ख़बरें आ रही हैं जिनके प्रदूषण को दूर करने के असफल प्रयास दशकों से चल रहे हैं. दिल्ली की जीवनदायिनी यमुना नदी के बारे में भी ऐसी ही ख़बरें आ रही हैं.
  • पिछले दिनों सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें आईं जिन्हें डालने वालों ने दावा किया कि दिल्ली में जिस यमुना का पानी काला और झाग भरा हुआ करता था, उसी यमुना में आज कल साफ पानी बह रहा है. 
  • झील नगरी नैनीताल समेत भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल सभी में झीलों का पानी न केवल पारदर्शी और निर्मल दिखाई दे रहा है, बल्कि इन झीलों की खूबसूरती भी बढ़ गई है.
  • पिछले कई साल से झील के जलस्तर में जो गिरावट दिखती थी, वह भी इस बार नहीं दिख रही. पर्यावरणीय तौर पर इस कारण हवा भी इतनी शुद्ध है कि शहरों से पहाड़ों की चोटियां साफ दिख रही हैं.
  • उत्तराखंड स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के निदेशक के अनुसार हिमालय की धवल चोटियां साफ दिखने लगी हैं. लॉकडाउन के कारण वायुमंडल में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिला है. इससे पहले कभी उत्तर भारत के ऊपरी क्षेत्र में वायु प्रदूषण का इतना कम स्तर देखने को नहीं मिला.

लॉकडाउन के बाद 27 मार्च से कुछ इलाकों में रूक-रूक के बारिश हो रही है. इससे हवा में मौजूद एयरोसॉल नीचे आ गए. यह लिक्विड और सॉलिड से बने ऐसे सूक्ष्म कण हैं, जिनके कारण फेफड़ों और हार्ट को नुकसान होता है. एयरोसॉल की वजह से ही विजिबिलिटी घटती है. जिन शहरों की एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI ख़तरे के निशान से ऊपर होते थे. वहां आसमान गहरा नीला दिखने लगा है. न तो सड़कों पर वाहन चल रहे हैं और न ही आसमां में हवाई जहाज. बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों जैसे अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी गिरावट आई है. इससे वातावरण में डस्ट पार्टिकल न के बराबर हैं और कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन भी सामान्य से बहुत अधिक नीचे आ गया है. इस तरह की हवा मनुष्यों के लिए बेहद लाभदायक है. अगर देखा जाये तो झारखंड के भी शहरों में इस लॉकडाउन का प्रभाव दिखा रहा है.

  • झारखण्ड की राजधानी रांची के कुछ जगहों में मोर देखे जाने की भी सूचना है. रूक रूक के बारिश भी हो रही है. लोग एयर कंडीशनर और कूलर का भी इस्तेमाल नहीं के बराबर कर रहे हैं जो की इस गर्मी के मौसम में एक आश्चर्य घटना है.
  • ध्वनि प्रदूषण भी अभूतपूर्व ढंग से कम हो गया है. तापमान ज्य़ादा होने पे भी उतनी गर्मी नहीं लग रही है जितनी पिछले साल थी.
  • बता दें कि कई महीनों से झारखंड में वाहन प्रदूषण के खिलाफ़ जांच अभियान चलाया जा रहा था. जगह-जगह दोपहिये एवं चार पहिये वाहन, मिनी बस और टेंपो समेत विभिन्न कॉमर्शियल वाहनों के प्रदूषण स्तर को चेक किया जा रहा था और निर्धारित मात्रा से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जा रही थी.
  • इसके बाद भी न तो वाहनों द्वारा छोड़े जा रहे प्रदूषणकारी गैसों की मात्रा कम हो रही थी और न ही वायु प्रदूषण में कमी आ रही थी. लेकिन, कोरोना के भय से सड़क पर चलने वाले वाहनों की संख्य़ा में आयी भारी गिरावट आने के कारण पिछले दो महीनों से से इसमें काफी सुधार दिखता है.
  • वाहनों की आवाजाही न होने से सड़कों से अब धूल के गुबार नहीं उठ रहे हैं. झारखंड का एयर क्वालिटी इंडेक्स वायु प्रदूषण के कम हो जाने से 50-40 के बीच आ गया है जो पिछले साल 150 से 250 तक रहता था.
  • ये हवा मनुष्य के स्वस्थ लिए फायदेमंद है. वायु और धूल प्रदूषण के काफी कम हो जाने से आसमन में रात को सारे तारे दिखा रहे हैं जो पहले नहीं दीखते थे. 
  • ध्वनि प्रदूषण तो इतना कम है की आपकी आवाज दूर तक सुनाई दे रही है. चिड़ियों का चहचहाना सुबह से ही शुरू हो जा रहा है.कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कहा की रात दो बजे भी चिड़ियों की आवाज़ सुनाई दे रही है ख़ासकर कोयल और बुलबुल की. कुछ ऐसी भी चिड़ियाँ नज़र आ रही हैं जो पहले कम दिखती थीं. 

Conclusion :

इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में, जहाँ हम सभी व्यस्त जीवन जी रहे है, हमें हमारी गतिविधियों के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में भी सोचना चाहिए  हालाँकि, अब लॉकडाउन के कारण हम घर पर रहने को मजबूर हैं, हमारे पास अपनी गतिविधियों के बारे में सोचने और सुधार करने के लिए पर्याप्त समय मिल चूका है। इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता कि कोरोनोवायरस का मानव जाति पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। हालांकि, इसने पर्यावरण पर निश्चित रूप से  सकारात्मक प्रभाव डाले है।

कोविड 19 वैक्सीन पर निबंध

Introduction :

भारत सरकार ने एस्ट्रा-ज़ेनेका और भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोविशिल्ड और कोवाक्सिन नाम के कोविड -19 टीकों को मंजूरी दे दी है। इसे देखते हुए हमारे पीएम मोदी जी ने 16 जनवरी, 2021 को कोविड -19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत की, जो हर साल लाखों लोगों की जान बचा सकता है। यह पूरे देश में लागू होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके लिए कुल 3006 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं । हालाँकि भारत में सम्पूर्ण रूप से टीकाकरण करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इसके लिए कम से कम 30 से 40% लोगों का टीकाकरण करने की आवस्यकता होगी ।

  • वैक्सीन हमारे शरीर को किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है. वैक्सीन में किसी जीव के कुछ कमज़ोर या निष्क्रिय अंश होते हैं जो बीमारी का कारण बनते हैं.
  • ये शरीर के ‘इम्यून सिस्टम’ यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण की पहचान करने के लिए प्रेरित करते हैं और उनके ख़िलाफ़ शरीर में एंटीबॉडी बनाते हैं जो बाहरी हमले से लड़ने में हमारे शरीर की मदद करती हैं.
  • वैक्सीन लगने का नकारात्मक असर कम ही लोगों पर होता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके साइड इफ़ेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है.
  • हल्का बुख़ार या ख़ारिश होना, इससे सामान्य दुष्प्रभाव हैं. वैक्सीन लगने के कुछ वक़्त बाद ही हम उस बीमारी से लड़ने की इम्यूनिटी विकसित कर लेते हैं.
  • अमेरिका के सेंटर ऑफ़ डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि वैक्सीन बहुत ज़्यादा शक्तिशाली होती हैं क्योंकि ये अधिकांश दवाओं के विपरीत, किसी बीमारी का इलाज नहीं करतीं, बल्कि उन्हें होने से रोकती हैं.
  • भारत में दो टीके तैयार किए गए हैं. एक का नाम है कोविशील्ड जिसे एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने इसका उत्पादन किया और दूसरा टीका है भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया कोवैक्सीन.

रूस ने अपनी ही कोरोना वैक्सीन तैयार की है जिसका नाम है ‘स्पूतनिक-V’ और इसे वायरस के वर्ज़न में थोड़ बदलाव लाकर तैयार किया गया. इस वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल की अनुमति मिल चुकी है. मॉडर्ना वैक्सीन को भी भारत में इस्तेमाल की मंज़ूरी मिल चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि संक्रमण को रोकने के लिए कम से कम 65-70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगानी होगी, जिसका मतलब है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करना होगा. कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में न सिर्फ करोड़ों लोगों की सेहत को प्रभाव किया है बल्कि समाज के सभी वर्गों में डिप्रेशन, तनाव का कारण भी बनी है. कोविड वैक्सीन लगवाने से एक स्पष्ट और आश्चर्यजनक फायदा मिलता है. ये आपको गंभीर रूप से बीमारी या वायरस की चपेट में आने पर मौत से बचाती है ये अपने आप में खुद हैरतअंगज फायदा है.

  • शोधकर्ताओं का कहना है कि टीकाकरण करानेवाले लोगों को मानसिक स्वास्थ्य मेंमहत्वपूर्ण सुधार का भी अनुभव हो सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि वैक्सीन संभावित तौर पर मानसिक स्वास्थ्य को फायदा पहुंचा सकती है.
  • प्लोस पत्रिका में प्रकाशित रिसर्च का मकसद ये मूल्यांकन करना था कि वैक्सीन का पहला डोज लगवाने से मानसिक परेशानी में कम समय के लिए क्या प्रभाव पड़ते हैं.
  • शोधकर्ताओं ने 8 हजार व्यस्को के मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण रिसर्च के तौर पर 1 मार्च 2020 और 31 मार्च 2021 के बीच किया. रिसर्च में टीकाकरण से संक्षिप्त समय के लिए सीधे प्रभाव का खुलासा हुआ.
  • महत्वपूर्ण बात ये है कि रिसर्च ने टीकाकरण कराने के सरकारात्मक प्रभाव में इजाफा किया. शोधकर्ताओं ने बताया कि हम प्रमाणित करते हैं कि कैसे दिमागी सेहत की परेशानी टीकाकरण करानेवाले और वैक्सीन नहीं लगवानेवालों के बीच अलग हो गई.
  • आर्थिक अनिश्चितता और कोविड-19 से जुड़ी सेहत के जोखिम के बीच तुलना करने पर हमें दिमागी सेहत पर टीकाकरण के कम समय के प्रभाव मालूम हुए. 
  • कोविड-19 वैक्सीन से स्वास्थ्य के जोखिम को कम करने, आर्थिक और सामाजिक नतीजे सुधारने की उम्मीद की जाती है, जिसके बाद दिमागी सेहत के लिए संभावित लाभ होंगे.  डॉक्टर एचके महाजन ने कहा, “कोरोना महामारी ने रोजगार, आय और सेहत समेत लोगों की जिंदगी के कई पहलुओं को प्रभावित किया है.
  • इस वायरल बीमारी के मानसिक पहलू मनोवैज्ञानिक तनाव, चिंता, डिप्रेशन, सामाजिक अलगाव और खुदकुशी के विचार तक सीमित नहीं हैं.” उन्होंने आगे बताया, “बड़े पैमाने पर टीकाकरण ने हर्ड इम्यूनिटी बढ़ाने, लोगों के बीच चिंता कम करने में बड़ा योगदान दिया.
  • उसने आजीविका गंवाने वालों की दोबारा रोजगार के पहलू को भी बढ़ाया. टीकाकरण के गंभीर संक्रमण से सुरक्षा पर जागरुकता फैलने से लोग कोरोना से पहले की स्थिति में धीरे-धीरे लौट रहे हैं. इस तरह ये दिमागी सेहत के मुद्दे जैसे चिंता, डिप्रेशन दूर करने में मदद कर रहा है.”

Conclusion :

वैक्सीन को चरणबद्ध तरीके से लोगो को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके पहले चरण में, सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों का टीकारण किया जाएगा। क्योंकि वे उन लोगों के निकट संपर्क में होते हैं जो कोविड -19 से संक्रमित हैं। फिर इसे पुलिस, सशस्त्र बलों, नगरपालिका कर्मचारियों और अन्य विभागीय कर्मचारियों को प्रदान किया जाएगा। तीसरे चरण में, 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग और वे लोग जिन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप है या जिन्होंने अंग प्रत्यारोपण कराया है, ऐसे लोगो का टीकाकरण किया जाएगा।

उसके बाद, स्वस्थ वयस्कों, किशोरों और बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। केंद्र सरकार स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम कर्मियों पर टीकाकरण का खर्च खुद से वहन करेगी । टीकाकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, सरकार ने CoWIN नामक एक एप्लिकेशन भी विकसित की है, जो कोविड -19 वैक्सीन लाभार्थियों के लिए  वैक्सीन स्टॉक, भंडारण और व्यक्तिगत ट्रैकिंग की सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करने में मददगार साबित हो रही है। कोविड -19 के लिए टीकाकरण भारत में स्वैच्छिक है। यह लोगों को इस बीमारी से बचाने का एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। टीके हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ काम करके बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं।

कोविड 19 वैक्सीन पर निबंध

Introduction :

भारत सरकार ने एस्ट्रा-ज़ेनेका और भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोविशिल्ड और कोवाक्सिन नाम के कोविड -19 टीकों को मंजूरी दे दी है। इसे देखते हुए हमारे पीएम मोदी जी ने 16 जनवरी, 2021 को कोविड -19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत की, जो हर साल लाखों लोगों की जान बचा सकता है। यह पूरे देश में लागू होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके लिए कुल 3006 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं । हालाँकि भारत में सम्पूर्ण रूप से टीकाकरण करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इसके लिए कम से कम 30 से 40% लोगों का टीकाकरण करने की आवस्यकता होगी ।

  • वैक्सीन हमारे शरीर को किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है. वैक्सीन में किसी जीव के कुछ कमज़ोर या निष्क्रिय अंश होते हैं जो बीमारी का कारण बनते हैं. 
  • ये शरीर के ‘इम्यून सिस्टम’ यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण की पहचान करने के लिए प्रेरित करते हैं और उनके ख़िलाफ़ शरीर में एंटीबॉडी बनाते हैं जो बाहरी हमले से लड़ने में हमारे शरीर की मदद करती हैं.
  • वैक्सीन लगने का नकारात्मक असर कम ही लोगों पर होता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके साइड इफ़ेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है. हल्का बुख़ार या ख़ारिश होना, इससे सामान्य दुष्प्रभाव हैं. वैक्सीन लगने के कुछ वक़्त बाद ही हम उस बीमारी से लड़ने की इम्यूनिटी विकसित कर लेते हैं.
  • अमेरिका के सेंटर ऑफ़ डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि वैक्सीन बहुत ज़्यादा शक्तिशाली होती हैं क्योंकि ये अधिकांश दवाओं के विपरीत, किसी बीमारी का इलाज नहीं करतीं, बल्कि उन्हें होने से रोकती हैं.
  • भारत में दो टीके तैयार किए गए हैं. एक का नाम है कोविशील्ड जिसे एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने इसका उत्पादन किया और दूसरा टीका है भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया कोवैक्सीन.
  • रूस ने अपनी ही कोरोना वैक्सीन तैयार की है जिसका नाम है ‘स्पूतनिक-V’ और इसे वायरस के वर्ज़न में थोड़ बदलाव लाकर तैयार किया गया. इस वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल की अनुमति मिल चुकी है. 
  • मॉडर्ना वैक्सीन को भी भारत में इस्तेमाल की मंज़ूरी मिल चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि संक्रमण को रोकने के लिए कम से कम 65-70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगानी होगी, जिसका मतलब है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करना होगा.

कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में न सिर्फ करोड़ों लोगों की सेहत को प्रभाव किया है बल्कि समाज के सभी वर्गों में डिप्रेशन, तनाव का कारण भी बनी है. कोविड वैक्सीन लगवाने से एक स्पष्ट और आश्चर्यजनक फायदा मिलता है. ये आपको गंभीर रूप से बीमारी या वायरस की चपेट में आने पर मौत से बचाती है ये अपने आप में खुद हैरतअंगज फायदा है. शोधकर्ताओं का कहना है कि टीकाकरण करानेवाले लोगों को मानसिक स्वास्थ्य मेंमहत्वपूर्ण सुधार का भी अनुभव हो सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि वैक्सीन संभावित तौर पर मानसिक स्वास्थ्य को फायदा पहुंचा सकती है.

  • प्लोस पत्रिका में प्रकाशित रिसर्च का मकसद ये मूल्यांकन करना था कि वैक्सीन का पहला डोज लगवाने से मानसिक परेशानी में कम समय के लिए क्या प्रभाव पड़ते हैं. 
  • शोधकर्ताओं ने 8 हजार व्यस्को के मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण रिसर्च के तौर पर 1 मार्च 2020 और 31 मार्च 2021 के बीच किया. रिसर्च में टीकाकरण से संक्षिप्त समय के लिए सीधे प्रभाव का खुलासा हुआ.
  • महत्वपूर्ण बात ये है कि रिसर्च ने टीकाकरण कराने के सरकारात्मक प्रभाव में इजाफा किया. शोधकर्ताओं ने बताया कि हम प्रमाणित करते हैं कि कैसे दिमागी सेहत की परेशानी टीकाकरण करानेवाले और वैक्सीन नहीं लगवानेवालों के बीच अलग हो गई. 
  • आर्थिक अनिश्चितता और कोविड-19 से जुड़ी सेहत के जोखिम के बीच तुलना करने पर हमें दिमागी सेहत पर टीकाकरण के कम समय के प्रभाव मालूम हुए. 
  • कोविड-19 वैक्सीन से स्वास्थ्य के जोखिम को कम करने, आर्थिक और सामाजिक नतीजे सुधारने की उम्मीद की जाती है, जिसके बाद दिमागी सेहत के लिए संभावित लाभ होंगे.  डॉक्टर एचके महाजन ने कहा, “कोरोना महामारी ने रोजगार, आय और सेहत समेत लोगों की जिंदगी के कई पहलुओं को प्रभावित किया है.
  • इस वायरल बीमारी के मानसिक पहलू मनोवैज्ञानिक तनाव, चिंता, डिप्रेशन, सामाजिक अलगाव और खुदकुशी के विचार तक सीमित नहीं हैं.” उन्होंने आगे बताया, “बड़े पैमाने पर टीकाकरण ने हर्ड इम्यूनिटी बढ़ाने, लोगों के बीच चिंता कम करने में बड़ा योगदान दिया.
  • उसने आजीविका गंवाने वालों की दोबारा रोजगार के पहलू को भी बढ़ाया. टीकाकरण के गंभीर संक्रमण से सुरक्षा पर जागरुकता फैलने से लोग कोरोना से पहले की स्थिति में धीरे-धीरे लौट रहे हैं. इस तरह ये दिमागी सेहत के मुद्दे जैसे चिंता, डिप्रेशन दूर करने में मदद कर रहा है.”

Conclusion :

वैक्सीन को चरणबद्ध तरीके से लोगो को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके पहले चरण में, सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों का टीकारण किया जाएगा। क्योंकि वे उन लोगों के निकट संपर्क में होते हैं जो कोविड -19 से संक्रमित हैं। फिर इसे पुलिस, सशस्त्र बलों, नगरपालिका कर्मचारियों और अन्य विभागीय कर्मचारियों को प्रदान किया जाएगा। तीसरे चरण में, 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग और वे लोग जिन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप है या जिन्होंने अंग प्रत्यारोपण कराया है, ऐसे लोगो का टीकाकरण किया जाएगा। 

उसके बाद, स्वस्थ वयस्कों, किशोरों और बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। केंद्र सरकार स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम कर्मियों पर टीकाकरण का खर्च खुद से वहन करेगी । टीकाकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, सरकार ने CoWIN नामक एक एप्लिकेशन भी विकसित की है, जो कोविड -19 वैक्सीन लाभार्थियों के लिए  वैक्सीन स्टॉक, भंडारण और व्यक्तिगत ट्रैकिंग की सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करने में मददगार साबित हो रही है। कोविड -19 के लिए टीकाकरण भारत में स्वैच्छिक है। यह लोगों को इस बीमारी से बचाने का एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। टीके हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ काम करके बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं।

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Essays

Essay on Garib Kalyan Rojgar Abhiyan in hindi

गरीब कल्याण रोजगार अभियान पर निबंध (Essay on Garib Kalyan Rojgar Abhiyan in  hindi)

Introduction :

हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गरीब कल्याण रोज़गार अभियान की शुरुआत की, जो प्रवासी मजदूरों के लिए एक रोजगार योजना है, जिससे लॉकडाउन के दौरान शहरों से गांवों में लौटे मजदूरों की मदत होगी। इस अभियान को पांच राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में बिहार के तेलिहार गाँव से 20 जून, 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शुरू किया गया। इस योजना के तहत, देश के ग्रामीण हिस्सों में ग्रामीण नागरिकों, विशेषकर प्रवासी श्रमिकों के लिए आजीविका सहायता प्रदान करके देश के ग्रामीण हिस्सों में होने वाले आर्थिक प्रभाव को कम करना ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। 

केंद्र सरकार ने गरीब कल्याण रोज़गार अभियान के तहत लगभग 25 योजनाओं को एक साथ देश भर के 116 जिलों में लागू किया है तथा इस योजना के लिए 125 दिनों का लक्ष्य रखा गया है। पैकेजिंग और स्थानीय उत्पाद बनाने के लिए गांवों, कस्बों और छोटे शहरों के पास उद्योग समूह बनाए जाएंगे। फसलों को स्थानीय स्तर पर स्टोर करने के लिए 1 लाख करोड़ की लागत से कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

  • इस अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बिहार के खगड़िया ज़िले के ग्राम तेलिहार से की।
  • ‘गरीब कल्याण रोज़गार अभियान’ के अंतर्गत सरकार द्वारा लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपए का निवेश किया किया गया है।
  • यह 125 दिनों का अभियान होगा, जिसे मिशन मोड रूप में संचालित किया किया गया।
  • इस अभियान में छ: राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड तथा ओडिशा को शामिल किया गया है।
  • छ: ज़िलों के 25,000 से अधिक प्रवासी श्रमिकों के साथ कुल 116 ज़िलों को इस अभियान के लिये चुना गया है, जिसमें 27 आकांक्षी ज़िले (aspirational districts) भी शामिल हैं।
  • इस कार्यक्रम में शामिल छ: राज्यों के 116 ज़िलों के गाँव कॉमन सर्विस सेंटर (Common Service Centres) तथा ‘कृषि विज्ञान केंद्रों’ (Krishi Vigyan Kendras) के माध्यम से शामिल होंगे, जो कोरोना के कारण लागू शारीरिक दूरी के मानदंडों को भी ध्यान में रखा गया।
  • इस अभियान में 12 विभिन्न मंत्रालयों को समनवित किया जाएगा, जिसमें पंचायती राज, ग्रामीण विकास, सड़क परिवहन और राजमार्ग, खान, पेयजल और स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, नवीकरणीय ऊर्जा, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, सीमा सड़कें, दूरसंचार तथा कृषि मंत्रालय शामिल हैं।
  • इस अभियान को ऐसे समय में शुरू किया जा रहा है जब COVID-19 के प्रकोप के कारण लाखों प्रवासी मज़दूर गाँवों की तरफ लौट रहे हैं जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार की समस्या उत्पन्न हो रही है।
  • मनरेगा के तहत काम करने वाले परिवारों की संख्या भी मई 2020 में एक स्तर पर पहुँच गई है।
  • यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में ही प्रवासी श्रमिकों को रोज़गार प्रदान करने के साथ-साथ गाँवों के टिकाऊ बुनियादी ढाँचे का निर्माण करने में सहायक है।
  • यह अभियान प्रवासी श्रमिकों तथा ग्रामीण नागरिकों के सशक्तीकरण तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगा अर्थात् गाँवों में ही आजीविका के अवसरों को इस अभियान के माध्यम से विकसित किया है।
  • PMGKRA में 50000 करोड़ की लागत लगी है जिसकी उद्घोषणा भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सहाय पैकेज के दौरान की थी। इस अभियान के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा के 25,000 से अधिक अपने गाँव पलायन कर गए प्रवासी श्रमिकों के साथ कुल 116 जिलों को चुना गया है।

इस अभियान के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी है। फाइबर केबल बिछाने और इंटरनेट के प्रावधान को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है। यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का निर्माण करते हुए प्रवासी श्रमिकों के परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करेगा। प्रवासी श्रमिकों की वर्तमान स्थिति के अनुसार गरीब कल्याण योजना जैसी योजना की बहुत आवश्यकता है। हालांकि, कार्यक्रम की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि क्या इसका लाभ प्रवासी श्रमिकों तक समय पर पहुंच पायेगा या नहीं। सरकार को सभी प्रवासी मजदूरों का एक डेटाबेस भी बनाना चाहिए जो भविष्य में उनके लिए एक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना पर निबंध (pm kisan mandhan yojana essay in hindi)

Introduction : 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधान मंत्री किसान मानधन योजना का शुभारंभ 12 सितंबर 2019 को झारखंड के रांची में किया गया। इस योजना के तहत, छोटे और सीमांत किसानों को 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर 3,000 रुपये की न्यूनतम निश्चित पेंशन प्रदान की जाएगी। पीएम किसान मानधन योजना 18 से 40 वर्ष की आयु के किसानों के लिए है। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) द्वारा प्रबंधित पेंशन फंड के तहत पंजीकरण करके लाभार्थी PM-KMY योजना के सदस्य बन सकते है। इस प्रकार सदस्यों को केंद्र सरकार द्वारा समान योगदान के प्रावधान के साथ उनकी आयु के आधार पर पेंशन फंड में 55 से 200 रुपये के बीच मासिक योगदान करने की आवश्यकता होती है। 

यह योजना सभी छोटे और सीमांत किसानों के लिए लागू है। इस योजना के तहत उनके और केंद्र सरकार द्वारा किए जाने वाले योगदान का अनुपात 1: 1 है। पीएम किसान मानधन योजना के तहत सरकारी योगदान किसान द्वारा किए गए मासिक योगदान के बराबर है। छोटे और सीमांत किसान जो पहले से ही अन्य योजनाओं जैसे राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस), कर्मचारी राज्य बीमा निगम योजना, कर्मचारी कोष संगठन योजना आदि के तहत पंजीकृत हैं, पीएम किसान मानधन योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।

  • बेशक, कृषि के आधुनिकीकरण से किसानों के जीवन स्तर में बदलाव आया है, लेकिन लघु और सीमांत किसानों की बदहाली जस की तस कायम है।
  • साल दर साल होने वाली उनकी आत्महत्या की खबरें भी किसी से छिपी हुई नहीं हैं क्योंकि अधिक लागत और कम आय भारतीय कृषि से सम्बद्ध किसानों के लिए अभिशाप साबित हो रही है। जिसके कारण खेती-किसानी से लोगों की अभिरुचि घट रही है।
  • आलम यह है कि किसान व उनके बच्चे रोजगार की तलाश में शहरों की ओर भाग रहे हैं, जिससे न केवल हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और नीली क्रांति आदि के संजोए सपने तार तार हो रहे हैं.
  • यही वजह है कि कृषि को बढ़ावा देने के लिए और किसानों की आय दुगुना करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने अपनी दूसरी पारी की पहली कैबिनेट की बैठक में ही किसानों के लिए एक नई और आकर्षक पेंशन योजना की शुरुआत कर दी और उससे आम लोगों व गरीबों को भी जोड़ दिया है।

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना विशेषताएं –

  • केंद्र सरकार किसानों के हित में कई योजनाएं चला रही हैं. इसी में एक पीएम किसान मानधन योजना है, जिसके तहत 60 साल की उम्र के बाद पेंशन का प्रावधान है.
  • इस योजना में 18 साल से 40 साल तक की उम्र का कोई भी किसान भाग ले सकता है, जिसे उम्र के हिसाब से मंथली आंशदान करने पर 60 की उम्र के बाद 3000 रुपये मंथली या 36000 रुपये सालाना पेंशन मिलेगी. इसके लिए अंशदान 55 रुपये से 200 रुपये तक मंथली है. 
  • पीएम किसान मानधन में जितना योगदान किसान का होगा, उसी के बराबर योगदान सरकार भी पीएम किसान अकाउंट में करेगी. यानी अगर आपका योगदान 55 रुपये है तो सरकार भी 55 रुपये का योगदान करेगी. इस पेंशन कोष का प्रबंधन भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) कर रहा है.
  • इस योजना के तहत कम से कम 20 साल और अधिकतम 40 साल तक 55 रुपये से 200 रुपये तक मासिक अंशदान करना होगा, जो उनकी उम्र पर निर्भर है.
  • अगर 18 साल की उम्र में जुड़ते हैं तो मासिक अंशदान 55 रुपये या सालाना 660 रुपये होगा. वहीं अगर 40 की उम्र में जुड़ते हैं तो 200 रुपये महीना या 2400 रुपये सालाना योगदान करना होगा.
  • अगर कोई किसान बीच में स्कीम छोड़ना चाहता है तो उसका पैसा नहीं डूबेगा. उसके स्कीम छोड़ने तक जो पैसे जमा किए होंगे उस पर बैंकों के सेविंग अकाउंट के बराबर का ब्याज मिलेगा. अगर पॉलिसी होल्डर किसान की मौत हो गई, तो उसकी पत्नी को 50 फीसदी रकम मिलती रहेगी.
  • नेशनल पेंशन स्कीम, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) स्कीम, कर्मचारी भविष्य निधि स्कीम (EPFO) जैसी किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा स्कीम के दायरे में शामिल लघु और सीमांत किसानो को इस योजना का लाभ नहीं प्राप्त होगा.
  • अथवा वे किसान जिन्होंने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय दवारा संचालित प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना के लिए विकल्प चुना है. वे किसान जिन्होंने श्रम और रोजगार मंत्रालय दवारा संचालित प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मान-धन योजना के लिए विकल्प चुना है वे भी इस योजना से वंचित रहेंगे.

Conclusion :

लाभार्थी के साथ, स्पाउस भी इस योजना के लिए पात्र हैं और निधि में अलग-अलग योगदान देकर रु 3000 की अलग से पेंशन प्राप्त कर सकते हैं। यदि स्पाउस नहीं है, तो ब्याज के साथ कुल योगदान नामांकित व्यक्ति को भुगतान किया जाएगा। यदि किसान की सेवानिवृत्ति की तारीख के मृत्यु हो जाती है, तो स्पाउस को परिवार पेंशन के रूप में पेंशन का 50% भाग प्राप्त होगा। यह उम्मीद की जाती है कि कम से कम 10 करोड़ किसान अगले पांच वर्षों के भीतर इस योजना का लाभ प्राप्त करेंगे, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी पेंशन योजनाओं में से एक बना देगा।

गरीब कल्याण रोजगार अभियान पर निबंध

Introduction : 

हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गरीब कल्याण रोज़गार अभियान की शुरुआत की, जो प्रवासी मजदूरों के लिए एक रोजगार योजना है, जिससे लॉकडाउन के दौरान शहरों से गांवों में लौटे मजदूरों की मदत होगी। इस अभियान को पांच राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में बिहार के तेलिहार गाँव से 20 जून, 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शुरू किया गया। इस योजना के तहत, देश के ग्रामीण हिस्सों में ग्रामीण नागरिकों, विशेषकर प्रवासी श्रमिकों के लिए आजीविका सहायता प्रदान करके देश के ग्रामीण हिस्सों में होने वाले आर्थिक प्रभाव को कम करना ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। 

केंद्र सरकार ने गरीब कल्याण रोज़गार अभियान के तहत लगभग 25 योजनाओं को एक साथ देश भर के 116 जिलों में लागू किया है तथा इस योजना के लिए 125 दिनों का लक्ष्य रखा गया है। पैकेजिंग और स्थानीय उत्पाद बनाने के लिए गांवों, कस्बों और छोटे शहरों के पास उद्योग समूह बनाए जाएंगे। फसलों को स्थानीय स्तर पर स्टोर करने के लिए 1 लाख करोड़ की लागत से कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

  • इस अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बिहार के खगड़िया ज़िले के ग्राम तेलिहार से की।
  • ‘गरीब कल्याण रोज़गार अभियान’ के अंतर्गत सरकार द्वारा लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपए का निवेश किया किया गया है।
  • यह 125 दिनों का अभियान होगा, जिसे मिशन मोड रूप में संचालित किया किया गया।
  • इस अभियान में छ: राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड तथा ओडिशा को शामिल किया गया है।
  • छ: ज़िलों के 25,000 से अधिक प्रवासी श्रमिकों के साथ कुल 116 ज़िलों को इस अभियान के लिये चुना गया है, जिसमें 27 आकांक्षी ज़िले (aspirational districts) भी शामिल हैं।
  • इस कार्यक्रम में शामिल छ: राज्यों के 116 ज़िलों के गाँव कॉमन सर्विस सेंटर (Common Service Centres) तथा ‘कृषि विज्ञान केंद्रों’ (Krishi Vigyan Kendras) के माध्यम से शामिल होंगे, जो कोरोना के कारण लागू शारीरिक दूरी के मानदंडों को भी ध्यान में रखा गया।
  • इस अभियान में 12 विभिन्न मंत्रालयों को समनवित किया जाएगा, जिसमें पंचायती राज, ग्रामीण विकास, सड़क परिवहन और राजमार्ग, खान, पेयजल और स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, नवीकरणीय ऊर्जा, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, सीमा सड़कें, दूरसंचार तथा कृषि मंत्रालय शामिल हैं।
  • इस अभियान को ऐसे समय में शुरू किया जा रहा है जब COVID-19 के प्रकोप के कारण लाखों प्रवासी मज़दूर गाँवों की तरफ लौट रहे हैं जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार की समस्या उत्पन्न हो रही है।
  • मनरेगा के तहत काम करने वाले परिवारों की संख्या भी मई 2020 में एक स्तर पर पहुँच गई है।
  • यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में ही प्रवासी श्रमिकों को रोज़गार प्रदान करने के साथ-साथ गाँवों के टिकाऊ बुनियादी ढाँचे का निर्माण करने में सहायक है।
  • यह अभियान प्रवासी श्रमिकों तथा ग्रामीण नागरिकों के सशक्तीकरण तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगा अर्थात् गाँवों में ही आजीविका के अवसरों को इस अभियान के माध्यम से विकसित किया है।
  • PMGKRA में 50000 करोड़ की लागत लगी है जिसकी उद्घोषणा भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सहाय पैकेज के दौरान की थी। इस अभियान के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा के 25,000 से अधिक अपने गाँव पलायन कर गए प्रवासी श्रमिकों के साथ कुल 116 जिलों को चुना गया है।

Conclusion :

इस अभियान के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी है। फाइबर केबल बिछाने और इंटरनेट के प्रावधान को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है। यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का निर्माण करते हुए प्रवासी श्रमिकों के परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करेगा। प्रवासी श्रमिकों की वर्तमान स्थिति के अनुसार गरीब कल्याण योजना जैसी योजना की बहुत आवश्यकता है। हालांकि, कार्यक्रम की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि क्या इसका लाभ प्रवासी श्रमिकों तक समय पर पहुंच पायेगा या नहीं। सरकार को सभी प्रवासी मजदूरों का एक डेटाबेस भी बनाना चाहिए जो भविष्य में उनके लिए एक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

पीएम स्वनिधि योजना पर निबंध

Introduction : 

हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना को शुरू करने का फैसला लिया गया | इस योजना के अंतर्गत  देश के रेहड़ी और सड़क विक्रेताओं को अपना खुद का काम नए सिरे से शुरू करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 10000 रूपये तक का लोन मुहैया कराया जायेगा | इस स्वनिधि योजना को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्म निर्भर निधि के नाम से भी जाना जाता है | इस लोन को समय पर चुकाने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को 7 फीसद का वार्षिक ब्याज सब्सिडी के तौर पर उनके अकाउंट में सरकार की ओर से ट्रांसफर किया जाएगा। देश के जो इच्छुक लाभार्थी इस योजना का लाभ उठाना चाहते है तो उन्हें इस योजना के तहत आवेदन करना होगा |  

स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में वेंडर, हॉकर, ठेले वाले, रेहड़ी वाले, ठेली फलवाले आदि सहित 50 लाख से अधिक लोगों को योजना से लाभ प्रदान किया जायेगा | स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि के अंतर्गत रेहड़ी पटरी वालो को अपना काम दोबारा से शुरू करने के लिए सरकार द्वारा लोन मुहैया कराया गया है |

  • इस योजना के तहत छोटे दुकानदार 10,000 रुपए तक के ऋण के लिये आवेदन कर सकेंगे।
  • ऋण प्राप्त करने के लिये आवेदकों को किसी प्रकार की ज़मानत या कोलैट्रल (Collateral) की आवश्यकता नहीं होगी।
  • इस योजना के तहत प्राप्त हुई पूंजी को चुकाने के लिये एक वर्ष का समय दिया जाएगा, विक्रेता इस अवधि के दौरान मासिक किश्तों के माध्यम से ऋण का भुगतान कर सकेंगे।
  • साथ ही इस योजना के तहत यदि लाभार्थी लिये गए ऋण पर भुगतान समय से या निर्धारित तिथि से पहले ही करते हैं तो उन्हें 7% (वार्षिक) की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जो ‘प्रत्यक्ष लाभ अंतरण’ (Direct Benefit Transfer- DBT) के माध्यम से 6 माह के अंतराल पर सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाएगी।
  • पीएम स्वनिधि के तहत निर्धारित तिथि से पहले ऋण के पूर्ण भुगतान पर कोई ज़ुर्माना नहीं लागू होगा।
  • इस योजना के तहत ऋण जारी करने की प्रक्रिया जुलाई माह से शुरू की जाएगी।
  • इस योजना के लिये सरकार द्वारा 5,000 करोड़ रुपए की राशि मंज़ूर की गई है, यह योजना मार्च 2022 तक लागू रहेगी।
  • यह पहली बार है जब सूक्ष्म-वित्त संस्थानों (Micro finance Institutions(MFI), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (Non Banking Financial Company- (NBFC), स्वयं सहायता समूह (Self Help Group-SHG),  बैंकों को शहरी क्षेत्र की गरीब आबादी से जुड़ी किसी योजना में शामिल किया गया है।
  • इन संस्थानों को ज़मीनी स्तर पर उनकी उपस्थिति और छोटे व्यापारियों व शहरों की गरीब आबादी के साथ निकटता के कारण इस योजना में शामिल किया गया है।

तकनीकी का प्रयोग और पारदर्शिता –

  • इस योजना के प्रभावी वितरण और इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने के लियेवेब पोर्टल और मोबाइल एप युक्त एक डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकास किया जा रहा है।
  • यह प्लेटफॉर्म क्रेडिट प्रबंधन के लिये वेब पोर्टल और मोबाइल एप कोभारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के ‘उद्यम मित्र’ पोर्टल से तथा ब्याज सब्सिडी के स्वचालित प्रबंधन हेतु MoHUA के ‘पैसा पोर्टल’ (PAiSA Portal) से जोड़ेगा।  
  • इस योजना के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रो और पृष्ठभूमि के 50 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ प्राप्त होगा।
  • इस योजना को विशेष रूप से छोटे दुकानदारों (ठेले और रेहड़ी-पटरी वाले) के लिये तैयार किया गया है, इस योजना के माध्यम से छोटे व्यापारी COVID-19 के कारण प्रभावित हुए अपने व्यापार को पुनः शुरू कर सकेंगे।
  • इस योजना के माध्यम से सरकार द्वारा छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
  • इसके तहत ऋण चुकाने के लिये डिजिटल भुगतान करने वाले लाभार्थियों को हर माह कैश-बैक प्रदान कर उन्हें अधिक-से-अधिक डिजिटल बैंकिंग अपनाने के लिये प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • इस योजना के ज़रिये रेहड़ी पटरी वालो को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जायगा तथा गरीब लोगो की स्थिति में सुधार होगा |
  • इस योजना के तहत MoHUA द्वारा जून माह में पूरे देश में राज्य सरकारों, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के राज्य कार्यालय, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम, शहरी स्थानीय निकायों, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी निधि ट्रस्ट और अन्य हितधारकों के सहयोग से क्षमता विकास और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी।
  • COVID-19 महामारी के कारण देश की औद्योगिक इकाइयों और संगठित क्षेत्र के अन्य व्यवसायों के अतिरिक्त असंगठित क्षेत्र और छोटे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है।
  • देश में बड़े पैमाने पर असंगठित क्षेत्र के प्रमाणिक आँकड़े उपलब्ध न होने से इससे जुड़े लोगों को सहायता पहुँचाना एक बड़ी चुनौती रही है। साथ ही इस क्षेत्र के लिये किसी विशेष आर्थिक तंत्र के अभाव में छोटे व्यापारियों को स्थानीय कर्ज़दारों से महँगी दरों पर ऋण लेना पड़ता है। 

Conclusion :

पीएम स्वनिधियोजना के माध्यम से छोटे व्यापारियों को आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध करा कर ऐसे लोगों को COVID-19 के कारण हुए नुकसान से उबरने में सहायता प्रदान की जा सकेगी। इस योजना के अंतर्गत 2 जुलाई 2020 को ऋण देने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 1.54 लाख से अधिक सड़क विक्रेताओं ने ऋण के लिए आवेदन किया है जिनमे से, 48,000 से अधिक को इस योजना के तहत ऋण स्वीकृत किया जा चूका है। यह प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए लोगों की क्षमता को बढ़ाने और कोरोना संकट के समय कारोबार को नए सिरे से खड़ा कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देंगे।

प्रधान मंत्री जन धन योजना पर निबंध

Introduction : 

आजादी के बाद भी, भारत में बहुत से लोग बैंकिंग प्रणाली के भीतर नहीं लाए जा सके हैं, इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सम्माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधान मंत्री जन-धन योजना को 28 अगस्त, 2014 को शुरू किया, ताकि समाज के बैंक से अपरिचित खंड को मुख्य धारा बैंकिंग में लाया जा सके । यह योजना देश में प्रत्येक परिवार को बैंक खाता और बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए शुरू की गई ताकि व्यापक वित्तीय समावेशन किया जा सके । इस योजना के तहत 25 करोड़ से अधिक नए बैंक खाते खोल दिए गए । 

अधिकांश लोग, जिन्होंने अपने बैंक खाते खोले हैं वे पहले बैंकिंग प्रणाली की परिधि के बाहर थे। प्रधानमंत्री जन धन योजना के उद्घाटन के दिन ही एक करोड़ पचास लाख खाते खोले गये थे। इस योजना में 1 लाख रुपए का बीमा होगा जो विपत्ति के समय पर परिवार की बहुत मदद करेगा। इस योजना के तहत किसानों, आम जनता और अन्य ग्रामीण लोगों के लिए कृषि जैसे अन्य कारणों के लिए लोन लेना सरल हो जाएगा। भारत में नकद धन का कम प्रयोग होगा जिससे काले धन पर नियंत्रण लगेगा और सरकार का खर्च भी बच जाएगा इसके साथ-साथ आमदनी भी बढ़ेगी।

  • 28 अगस्त 2014 को भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा शुरुआत की गयी लोगों की मुद्रा बचत योजना है जन धन योजना। इसे प्रधानमंत्री जन धन योजना भी कहा जाता है जोकि वास्तव में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आम भारतीय लोगों के लिये कुछ अवसर बनाने के लिये लोगों की एक संपत्ति योजना है।
  • प्रधानमंत्री के द्वारा शुरु की गयी ये योजना गरीब लोगों को पैसा बचाने में सक्षम बनाती है। लाल किले पर राष्ट्र को संबोधित करने के दौरान 15 अगस्त 2015 को उन्होंने इस योजना के बारे में घोषणा की। हालांकि इसकी शुरुआत दो हफ्ते बाद हुई।
  • यहाँ रहने वाले लोगों को स्वतंत्र बनाना ही सही मायने में एक स्वतंत्र भारत बनाना है। भारत एक ऐसा देश है जो भ्रामीण क्षेत्रों में रहने लोगों की पिछड़ेपन की स्थिति के कारण अभी भी एक विकासशील देशों में गिना जाता है।
  • अनुचित शिक्षा, असमानता, सामाजिक भेदभाव और बहुत सारी सामाजिक मुद्दों की वजह से भारत में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की दर उच्च है।
  • ये बहुत जरुरी है कि पैसा बचाने की आदत के बारे में लोगों के बीच जागरुकता बढ़े जिससे भविष्य में कुछ बेहतर करने के लिये वो स्वतंत्र हों और उनके भीतर कुछ विश्वास बढ़े।
  • बचत किये गये पैसों की मदद से वो बुरे दिनों में बिना किसी के सहारे अपनी मदद कर सकते हैं। जब हरेक भारतीय लोगों के पास अपना बैंक खाता होगा तब वो पैसों की बचत के महत्व को ज्यादा अच्छे से समझ सकेंगे।
  • इस योजना के अनुसार, इस योजना के शुरुआत होने के पहले दिन ही लगभग 1 करोड़ बैंक खाते खोले गये। भारत में अंतिम स्तर तक विकास लाने के लिये मुद्रा बचत योजना बहुत जरुरी है जिसको ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में अपने बचत के बारे में अधिक सतर्क बनाने के द्वारा शुरुआत और प्राप्त किया जा सकता है।
  • खासतौर से, भारत के गरीब लोगों को खोले गये खातों के सभी लाभ को देने, बैंक खातों से उनको जोड़ने के लिये और पैसा बचत के लिये जन धन योजना स्कीम शुरु की गयी। भरतीय स्वतंत्रता दिवस से दो सप्ताह बाद 28 अगस्त को पीएम के द्वारा इस योजना की शुरुआत की गयी।
  • बैंक से उसके लाभ से सभी भारतीय नागरिकों को जोड़ने के लिये एक राष्ट्रीय चुनौती के रुप में इस खाता खोलने वाली और मुद्रा बचत योजना की शुरुआत की गयी थी।

Conclusion :

इस योजना को एक सफल योजना बनाने के लिये बहुत सारे कार्यक्रमों को लागू किया गया है। बैंक खातों के महत्व के बारे में जागरुक बनाने के साथ ही बैंक खाता खोलने के फायदे और प्रक्रिया के बारे में उनको समझाने और लोगों के दिमाग को इस ओर खींचने के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 60 हजार नामांकन कैंप लगाये गये। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण लोग भी वित्तीय सुविधाओं जैसे – इंश्योरेंस, वाहन लोन, गृह लोन, फसल बीमा आदि से जुड़ सकेंगे। प्रधान मंत्री जन धन योजना में सभी देशवासियो ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया, करोडो की तादात में अकाउंट खोले जा चुके है। अब हर व्यक्ति के पास अपना बैंक खाता होगा और वे पैसों की बचत के महत्व को और भी अच्छे से समझ सकेंगे।

प्रधान मंत्री आवास योजना

Introduction : 

सरकार ने 2022 तक ‘सभी के लिए आवास’ बनाने की दिशा में कुछ कदम उठाए हैं। प्रधान मंत्री आवास योजना ने हाल ही में मध्य आय वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर खंड और कम आय वाले समूह की आवास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने दायरे का विस्तार किया है । प्रधान मंत्री आवास योजना जून 2015 में लॉन्च की गई। सरकार ने पानी की सुविधा, स्वच्छता और बिजली की आपूर्ति के साथ सस्ती पक्का घरों के निर्माण की योजना बनाई है।

मूल रूप से यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और कम आय वाले समूह वर्गों में लोगों को कवर करने के लिए थी, लेकिन अब मध्य आय समूह को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य निजी डेवलपर्स के सहयोग से झोपड़पट्टी के निवासियों के लिए घरों का निर्माण करके झोपड़पट्टी के क्षेत्रों को बदलना है। यह नए निर्माण या मौजूदा घरों के नवीकरण के लिए उठाए गए ऋणों पर कमजोर और मध्यम आय वर्गों को क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी देने की योजना है। ₹6 और ₹12 लाख के बीच के ऋण के लिए 3 प्रतिशत से 6.5 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी की घोषणा की गई है।

  • लॉन्च: वर्ष 2022 तक ‘सभी के लिये आवास’ के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिये 1 अप्रैल, 2016 को पूर्ववर्ती इंदिरा आवास योजना (Indira Awaas Yojana-IAY) का पुनर्गठन कर उसे  प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) कर दिया गया था।
  • मंत्रालय:ग्रामीण विकास मंत्रालय।
  • उद्देश्य: मार्च 2022 तक सभी ग्रामीण परिवारों के आवासहीन और कच्चे तथा जीर्ण-शीर्ण घरों में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्के घर उपलब्ध कराना।
  • पूर्ण अनुदान सहायता प्रदान करके आवास इकाइयों के निर्माण और मौजूदा गैर-लाभकारी कच्चे घरों के उन्नयन में गरीबी रेखा (बीपीएल) से नीचे रह रहे ग्रामीण लोगों की मदद करना।
  • लाभार्थी:इसके लाभार्थियों में एससी/एसटी, मुक्त बंधुआ मज़दूर और गैर-एससी/एसटी श्रेणियाँ, विधवाओं या कार्रवाई में मारे गए रक्षाकर्मियों के परिजन, पूर्व सैनिक एवं अर्द्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त सदस्य, विकलांग व्यक्ति तथा अल्पसंख्यक शामिल हैं।
  • लाभार्थियों का चयन:तीन चरणों के माध्यम से लाभार्थियों का सत्यापन किया जाएगा जिसमें 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC), ग्राम सभा एवं जियो टैगिंग शामिल है।
  • साझा लागत:इस योजना की कुल लागत का बँटवारा केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच 60:40 के अनुपात में किया जाता है, जबकि पूर्वोत्तर तथा हिमालयी राज्यों के लिये यह राशि 90:10 के अनुपात में साझा की जाती है।
  • घर के न्यूनतम आकार को 20 वर्ग मीटर से 25 वर्ग मीटर (एक स्वच्छ रसोई घर सहित) तक बढ़ाया गया है।
  • इकाई सहायता मैदानी क्षेत्रों में 70,000 रुपए से बढ़ाकर 1.20 लाख रुपए तथा पर्वतीय राज्यों में 75,000 रुपए से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपए कर दी गई है।
  • शौचालय के निर्माण के लिये स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G), मनरेगाया वित्तपोषण के किसी अन्य स्रोत से तालमेल बिठाकर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
  • पाइप के ज़रिये पेयजल आपूर्ति, बिजली कनेक्शन, एलपीजी गैस कनेक्शन इत्यादि के लिये विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से भी प्रयास किया जाता है।
  • निर्माण लक्ष्य का केवल 55% पूरा हो चुका है।
  • ग्रामीण गरीबों के लिये बनाए जाने वाले 2.28 करोड़ घरों में से 1.27 करोड़ से कम घरों का कार्य जनवरी 2021 तक पूरा हो चुका था।
  • लगभग 85% लाभार्थियों के लिये धन स्वीकृत किया गया है।
  • इस योजना ने रोज़गार सृजन में मदद की है तथा कई राज्यों ने अपने प्रवासी मज़दूरों को लॉकडाउन के दौरान रोज़गार उपलब्ध कराया।

Conclusion :

आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और कम आय वाले समूह श्रेणी में जो 6 लाख रुपये तक का ऋण लेना चाहते हैं, उनके लिए 15 वर्षों के कार्यकाल के लिए 6.5 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी है। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी में किए गए किफायती आवास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। निचले और मध्यम आय वाले समूहों के लिए, प्रधान मंत्री आवास योजना ₹1 लाख से ₹2.3 लाख तक घर खरीदने की लागत को कम कर देगी।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना पर निबंध

Introduction : 

किसान भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन उनका जीवन दिन ब दिन और अधिक कठिन होता जा रहा है। किसानो की बिगड़ती हालत को देखते हुए सरकार ने “प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना” की शुरूआत की। यह योजना 1 दिसंबर, 2018 से प्रभावी हो गई है। इस योजना के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को एक सुनिश्चित आय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत देश भर में सभी किसान परिवारों को हर चार महीने में रु 2000 की तीन समान किस्तों में रु 6,000 की आय सहायता प्रदान की जाती है।

फंड सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता है। यह योजना नियमित रूप से किसानो को सुनिश्चित आय प्रदान करेगी। इस आय का उपयोग बीज, उर्वरक, उपकरण, श्रम और अन्य उभरती जरूरतों के लिए किया जा सकता है। लेकिन इस योजना की कुछ सीमाएँ भी हैं। इस योजना का का लक्ष्य छोटे और सीमांत किसानों को कवर करना है, भूमिहीन मजदूर और किरायेदार किसान इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते। कुछ राज्यों को छोड़कर, अन्य राज्यों में अभी भी भूमि रिकॉर्ड के लिए डेटाबेस नहीं बन पाए हैं।

  • इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने पीएम-किसान मोबाइल एप भी लॉन्च किया है।
  • इस एप का उद्देश्य योजना की पहुँच को और अधिक व्यापक बनाना है। इस एप के माध्यम से किसान अपने भुगतान की स्थिति जान सकते हैं, साथ ही योजना से संबंधित अन्य मापदंडों के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

पीएम-किसान योजना की मौजूदा स्थिति –

  • मौजूदा वित्तीय वर्ष के केंद्रीय बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के लिये 75,000 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है, जिसमें से 50,850 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है।
  • आँकड़ों के अनुसार, अब तक 8.45 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को इस योजना का लाभ पहुँचाया जा चुका है, जबकि इस योजना के तहत कवर किये जाने वाले लाभार्थियों की कुल संख्या 14 करोड़ है।
  • केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने घोषणा की है कि पीएम-किसान योजना के सभी लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card-KCC) प्रदान किया जाएगा, ताकि वे आसानी से बैंक से ऋण प्राप्त कर सकें।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना –

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 फरवरी, 2019 को लघु एवं सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी।
  • इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपए की दर से प्रत्यक्ष आय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
  • यह आय सहायता 2,000 रुपए की तीन समान किस्तों में लाभान्वित किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित की जाती है, ताकि संपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
  • आरंभ में यह योजना केवल लघु एवं सीमांत किसानों (2 हेक्टेयर से कम जोत वाले) के लिये ही शुरू की गई थी, किंतु 31 मई, 2019 को कैबिनेट द्वारा लिये गए निर्णय के उपरांत यह योजना देश भर के सभी किसानों हेतु लागू कर दी गई।
  • इस योजना का वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है। इस योजना पर अनुमानतः 75 हज़ार करोड़ रुपए का वार्षिक व्यय आएगा।

योजना का उद्देश्य –

  • इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य देश के लघु एवं सीमांत किसानों को प्रत्यक्ष आय संबंधी सहायता प्रदान करना है।
  • यह योजना लघु एवं सीमांत किसानों को उनकी निवेश एवं अन्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिये आय का एक निश्चित माध्यम प्रदान करती है।
  • योजना के माध्यम से लघु एवं सीमांत किसानों को साहूकारों तथा अनौपचारिक ऋणदाता के चंगुल से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

Conclusion :

देश में किसानों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता की यह योजना किसानों को एक आर्थिक आधार प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। हालाँकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के तहत दी जा रही सहायता राशि अपेक्षाकृत काफी कम है, किंतु हमें यह समझना होगा कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी निवेश संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिये एक आर्थिक आधार प्रदान करना है, ताकि वे फसल उत्पादन में नवीन तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीजों का प्रयोग कर उत्पादन में बढ़ोतरी कर सकें।

आवश्यक है कि योजना के मार्ग में स्थित विभिन्न बाधाओं को समाप्त कर इसे अधिक-से-अधिक किसानों के लिये लाभदायी बनाया जा सके। केंद्र सरकार को सार्वजनिक और निजी संस्थानों और बाजार एजेंसियों को उचित मूल्य पर कृषि क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करने की अनुमति देनी चाहिए एवं उसका लक्ष्य गरीबी कम करना, स्थायी खाद्य सुरक्षा और समावेशी विकास और किसानों की भलाई सुनिश्चित करना होना चाहिए। यह योजना न केवल गरीब किसान परिवारों को सुनिश्चित आय प्रदान करेगी, बल्कि उनकी उभरती जरूरतों को भी पूरा करेगी।

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महिला सुरक्षा पर निबंध – Women’s safety essay in hindi

महिला सुरक्षा पर निबंध – Essay on women’s safety in hindi

Introduction : 

महिलाओं की सुरक्षा यह एक महत्वपूर्ण विषय हैं | भारत अपनी महान परंपरा और संस्कृति के लिए दुनिया भर में सबसे प्रसिद्ध देश है जहां महिलाओं को सबसे सम्मानित स्थान दिया जाता है। भारतीय महिलाएं सभी क्षेत्रों में काम कर रही हैं, जैसे कि वैमानिकी, अंतरिक्ष, राजनीति, बैंक, स्कूल, खेल, व्यवसाय, सेना, पुलिस, लेकिन हम भारत में महिलाओं की स्थिति के नकारात्मक पहलू को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। हर दिन, हर मिनट कुछ महिलाओं को देश भर में विभिन्न स्थानों पर उत्पीड़न, छेड़छाड़, मारपीट जैसे अपराधों का सामना करना पड़ता है। 

आंकड़ों के अनुसार, यह पाया गया है कि भारत में हर 20 मिनट में एक महिला का बलात्कार होता है। भारत की राष्ट्रीय राजधानी में निर्भया सामूहिक बलात्कार एक भयानक घटना थी जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। भारत में महिला सुरक्षा के संबंध में स्थिति को सुधारने के लिए आत्मरक्षा तकनीक सबसे महत्वपूर्ण है जिसके लिए प्रत्येक महिला को अपनी सुरक्षा के लिए जागरूक होना चाहिए। उनके पास सभी आपातकालीन नंबर होने चाहिए ताकि वे तुरंत अपने परिवार के सदस्यों और पुलिस से संपर्क कर सकें।

  • भारत के बदलते युग के साथ-साथ नारी को लेकर सोच को भी काफी हद तक बदल गई है आज की नारी हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ चलकर काम कर रही है।
  • शिक्षित होकर अपने जीवन में नई ऊँचाइयों को पा रही है, फिर भी वह अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है, आज के युग में नारी सुरक्षा एक बड़ी समस्या बन चुका है, नारी सुरक्षा के कानून और कायदे होते हुए भी उस पे अत्याचार होते रहते हैं, वह अत्याचार घरेलू हिंसा, सामाजिक संस्थानों पर नारी शोषण, दहेज़ को लेकर कई प्रकार से परेशान किया जाता है।
  • आज वह पढ़ लिख कर शिक्षित तो बन गई है मगर फिर भी अपने हक और अपनी स्वतंत्रता के लिए उसे कई बार लड़ना पड़ता है सरकार के नियम और कानून होते हुए भी पुरुष प्रधान देश में वह कई बार लाचार बन जाती है।
  • आजकल तो नारी ना तो घर में सुरक्षित है ना ही बाहर सुरक्षित है ऐसे हालातों से नारी गुज़र रही है। उसपे बलात्कार जैसी घटनाएँ आए दिन बढ़ रही है देश के विकसित समाज के लिए यह घटनाएँ एक कलंक रूप में साबित हो रही है।
  • बलात्कार जैसी घटनाएँ देश और नारी दोनों के लिए एक सवाल रुक बन चुकी है। क्यों होती है ऐसी घटनाएँ ! क्यों नारी आज के जमाने में पूर्ण रूप में सुरक्षित रूप से नहीं रह पा रही है। आज की बदलती इस दौर में नारी का सुरक्षित रह पाना मुश्किल बन गया है।
  • नारी आज घर से बाहर निकलने से डर रही है, आज के समय में बलात्कार जैसी घटनाएँ काफी हद तक बढ़ गई है, नारी आज किसी भी क्षेत्र में अपने को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही है।
  • नारी को जो देश देवी के रूप में पूजा जाता था वहीं आज उसका चीर हरण कर रहा है। इसके पीछे का एक कारण इंटरनेट का दुरुपयोग भी माना जा रहा है। मोबाइल में सब कुछ देखने को मिल जाता है जिससे आज का युवा वर्ग सोचे समझे इसका अनुकरण भी कर लेता है।
  • जो आज के समाज और नारी दोनों के लिए ख़तरा रूप साबित हो रहा है उसके साथ साथ आज की फिल्में में दिखाई जाने वाली उत्तेजित दृश्य, सीरियल में भी आज देश आने वाले दृश्य भी बलात्कार जैसी वारदातों के लिए का रूप माना गया है। 
  • इन सब से बचने के लिए किसी भी नारी को अपनी सुरक्षा के लिए खुद तैयार होना पड़ेगा। हर जगह साकार या परिवार साथ नहीं रह सकता इसलिए आज के जमाने में नारी को अपनी रक्षा के लिए खुद ही मजबूत होना पड़ेगा अपनी अपनी सुरक्षा के लिए मिर्ची स्प्रे, कराटे जैसी चीजों को सीख कर आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा।
  • आज के विकसित और बदलते भारत के साथ नारी अपनी सुरक्षा खुद ही कर सकें ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए नारी को अपनी सुरक्षा को लेकर खुद ही तैयार होना पड़ेगा भारत सरकार नारी सुरक्षा को लेकर जागृत हे, और उसके लिए कड़े कानून और नियम के साथ-साथ सजा भी करता है।
  • महिलाएं घर की इज़्ज़त होती है। उनका सम्मान और रक्षा करना एक सच्चे नागरिक का कर्त्तव्य है। लोगो को समझना चाहिए अगर महिलाएं ना होती तो बच्चे भी ना होते और परिवार नहीं बनता।
  • हम जो भी है ,जिस मुकाम पर है उसके पीछे हमारी माँ का हाथ है। माँ , बहन इत्यादि सारे रिश्तो का सम्मान सिर्फ पुरुषो को करना चाहिए। सिर्फ कहने के लिए नहीं होने चाहिए।
  • गाँव के कुछ जगहों में महिलाओं पर दैनिक अत्याचार होते है। पति और सास -ससुर का बहु को मारना। उसको दहेज़ के लिए प्रताड़ित करना , यह सब शामिल है। वहां महिलाएं अपने ऊपर हो रहे जुल्मो के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाती है और सहती रहती है। यह बिलकुल गलत है।
  • निर्भया बलात्कार केस ने सम्पूर्ण देश को हिलाकर रख दिया था और नारियों की सुरक्षा के विषय में सोचने पर मज़बूर कर दिया था। इकीसवीं शताब्दी में आकर भी देश में लड़कियां सुरक्षित नहीं है। आये दिन दर्दनाक घटनाओ को सुनकर , मानवता शर्मसार हो रही है
  • आज कल सरकार पहले की तुलना में काफी जागरूक हुयी है। पुलिस वाले भी रात होने पर निगरानी करते है , कि सब कुछ ठीक है या नहीं। लड़कियों के सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर्स भी जारी किये गए है।

Conclusion : 

महिलाओं के खिलाफ होने वाले सभी प्रकार के अपराधों के लिए सुरक्षा कानूनों की एक सूची है लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। हमें इसके लिए केवल सरकार को दोष नहीं देना चाहिए क्योंकि महिला सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। महिला सुरक्षा की इस समस्या को समझने और हल करने की तत्काल आवश्यकता है ताकि वे भी अपने देश में पुरुषों की तरह समान रूप से विकसित और हमारे देश की तरक्की में अपना योगदान दे सकें।

महिला सशक्तिकरण पर निबंध

Introduction :

नारी सशक्तिकरण के नारे के साथ एक प्रश्न उठता है कि “क्या महिलाएँ सचमुच में मजबूत बनी है” और “क्या उसका लंबे समय का संघर्ष खत्म हो चुका है”। राष्ट्र के विकास में महिलाओं की सच्ची महत्ता और अधिकार के बारे में समाज में जागरुकता लाने के लिये मातृ दिवस, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आदि जैसे कई सारे कार्यक्रम सरकार द्वारा चलाये जा रहे और लागू किये गये है। महिलाओं को कई क्षेत्र में विकास की जरुरत है। ‘सशक्तिकरण’ से तात्पर्य किसी व्यक्ति की उस क्षमता से है जिससे उसमें ये योग्यता आ जाती है जिसमें वो अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सके। महिला सशक्तिकरण में भी हम उसी क्षमता की बात कर रहे है जहाँ महिलाएँ परिवार और समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने निर्णयों की निर्माता खुद हो।

अपनी निजी स्वतंत्रता और स्वयं के फैसले लेने के लिये महिलाओं को अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण है। वें देश और परिवार की आर्थिक स्थिति का प्रबंधन करने में पूरी तरह से सक्षम है। अत: महिलाओं के सशक्त होने से पूरा समाज अपने आप सशक्त हो जायेगा। भारत में, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये सबसे पहले समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों को मारने वाले उन सभी राक्षसी सोच को मारना जरुरी है जैसे दहेज प्रथा, अशिक्षा, यौन हिंसा, असमानता, भ्रूण हत्या, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा, वैश्यावृति और मानव तस्करी ।

  • पुरुष और महिला को बराबरी पर लाने के लिये महिला सशक्तिकरण में तेजी लाने की जरुरत है। सभी क्षेत्रों में महिलाओं का उत्थान राष्ट्र की प्राथमिकता में शामिल होना चाहिये। महिला और पुरुष के बीच की असमानता कई समस्याओं को जन्म देती है जो राष्ट्र के विकास में बड़ी बाधा के रुप में सामने आ सकती है।
  • ये महिलाओं का जन्मसिद्ध अधिकार है कि उन्हें समाज में पुरुषों के बराबर महत्व मिले। वास्तव में सशक्तिकरण को लाने के लिये महिलाओं को अपने अधिकारों से अवगत होना चाहिये। न केवल घरेलू और पारिवारिक जिम्मेदारियों बल्कि महिलाओं को हर क्षेत्रों में सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिये। उन्हें अपने आस-पास और देश में होने वाली घटनाओं को भी जानना चाहिये।
  • महिला सशक्तिकरण में ये ताकत है कि वो समाज और देश में बहुत कुछ बदल सकें। वो समाज में किसी समस्या को पुरुषों से बेहतर ढ़ंग से निपट सकती है। वो देश और परिवार के लिये अधिक जनसंख्या के नुकसान को अच्छी तरह से समझ सकती है।
  • अच्छे पारिवारिक योजना से वो देश और परिवार की आर्थिक स्थिति का प्रबंधन करने में पूरी तरह से सक्षम है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाएँ किसी भी प्रभावकारी हिंसा को संभालने में सक्षम है चाहे वो पारिवारिक हो या सामाजिक।
  • महिला सशक्तिकरण के द्वारा ये संभव है कि एक मजबूत अर्थव्यवस्था के महिला-पुरुष समानता वाले वाले देश को पुरुषवादी प्रभाव वाले देश से बदला जा सकता है। महिला सशक्तिकरण की मदद से बिना अधिक प्रयास किये परिवार के हर सदस्य का विकास आसानी से हो सकता है।
  • एक महिला परिवार में सभी चीजों के लिये बेहद जिम्मेदार मानी जाती है अत: वो सभी समस्याओं का समाधान अच्छी तरह से कर सकती है। महिलाओं के सशक्त होने से पूरा समाज अपने आप सशक्त हो जायेगा।
  • महिलाओं के लिये प्राचीन काल से समाज में चले आ रहे गलत और पुराने चलन को नये रिती-रिवाजों और परंपरा में ढ़ाल दिया गया था। भारतीय समाज में महिलाओं को सम्मान देने के लिये माँ, बहन, पुत्री, पत्नी के रुप में महिला देवियो को पूजने की परंपरा है लेकिन इसका ये कतई मतलब नहीं कि केवल महिलाओं को पूजने भर से देश के विकास की जरुरत पूरी हो जायेगी।
  • आज जरुरत है कि देश की आधी आबादी यानि महिलाओं का हर क्षेत्र में सशक्तिकरण किया जाए जो देश के विकास का आधार बनेंगी।
  • भारत एक प्रसिद्ध देश है जिसने ‘विविधता में एकता’ के मुहावरे को साबित किया है, जहाँ भारतीय समाज में विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग रहते है। महिलाओं को हर धर्म में एक अलग स्थान दिया गया है जो लोगों की आँखों को ढ़के हुए बड़े पर्दे के रुप में और कई वर्षों से आदर्श के रुप में महिलाओं के खिलाफ कई सारे गलत कार्यों (शारीरिक और मानसिक) को जारी रखने में मदद कर रहा है।
  • प्राचीन भारतीय समाज दूसरी भेदभावपूर्ण दस्तूरों के साथ सती प्रथा, नगर वधु व्यवस्था, दहेज प्रथा, यौन हिंसा, घरेलू हिंसा, गर्भ में बच्चियों की हत्या, पर्दा प्रथा, कार्य स्थल पर यौन शोषण, बाल मजदूरी, बाल विवाह तथा देवदासी प्रथा आदि परंपरा थी। इस तरह की कुप्रथा का कारण पितृसत्तामक समाज और पुरुष श्रेष्ठता मनोग्रन्थि है।
  • पुरुष पारिवारिक सदस्यों द्वारा सामाजिक राजनीतिक अधिकार (काम करने की आजादी, शिक्षा का अधिकार आदि) को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया। महिलाओं के खिलाफ कुछ बुरे चलन को खुले विचारों के लोगों और महान भारतीय लोगों द्वारा हटाया गया जिन्होंने महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण कार्यों के लिये अपनी आवाज उठायी।
  • राजा राम मोहन रॉय की लगातार कोशिशों की वजह से ही सती प्रथा को खत्म करने के लिये अंग्रेज मजबूर हुए। बाद में दूसरे भारतीय समाज सुधारकों (ईश्वर चंद्र विद्यासागर, आचार्य विनोभा भावे, स्वामी विवेकानंद आदि) ने भी महिला उत्थान के लिये अपनी आवाज उठायी और कड़ा संघर्ष किया। भारत में विधवाओं की स्थिति को सुधारने के लिये ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने अपने लगातार प्रयास से विधवा पुर्न विवाह अधिनियम 1856 की शुरुआत करवाई।
  • पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले लैंगिक असमानता और बुरी प्रथाओं को हटाने के लिये सरकार द्वारा कई सारे संवैधानिक और कानूनी अधिकार बनाए और लागू किये गये है।

Conclusion : 

हालाँकि ऐसे बड़े विषय को सुलझाने के लिये महिलाओं सहित सभी का लगातार सहयोग की जरुरत है। आधुनिक समाज महिलाओं के अधिकार को लेकर ज्यादा जागरुक है जिसका परिणाम हुआ कि कई सारे स्वयं-सेवी समूह और एनजीओ आदि इस दिशा में कार्य कर रहे है। महिलाएँ ज्यादा खुले दिमाग की होती है और सभी आयामों में अपने अधिकारों को पाने के लिये सामाजिक बंधनों को तोड़ रही है। हालाँकि अपराध इसके साथ-साथ चल रहा है। भारतीय समाज में सच में महिला सशक्तिकरण लाने के लिये महिलाओं के खिलाफ बुरी प्रथाओं के मुख्य कारणों को समझना और उन्हें हटाना होगा। जरुरत है कि हम महिलाओं के खिलाफ पुरानी सोच को बदले और संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों में भी बदलाव लाये।

बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ पर निबंध

Introduction :

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत भारतीय सरकार द्वारा 2015 के जनवरी महीने में हुई। इस योजना का मकसद भारतीय समाज में लड़कियों और महिलाओं के लिये कल्याणकारी कार्यों की कुशलता को बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के बीच जागरुकता उत्पन्न करने के लिये भी है। 22 जनवरी 2015 को भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सफलतापूर्वक इस योजना का आरंभ हुआ। इस योजना को सभी राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू करने के लिये एक राष्ट्रीय अभियान के द्वारा देश के 100 चुनिंदा शहरों में इस योजना को लागू किया गया । इस कार्यक्रम की शुरुआत करते समय प्रधनमंत्री ने कहा कि, भारतीय लोगों की ये सामान्य धारणा है कि लड़कियाँ अपने माता-पिता के बजाय पराया धन होती है।

अभिवावक सोचते है कि लड़के तो उनके अपने होते है जो बुढ़ापे में उनकी देखभाल करेंगे जबकि लड़कियाँ तो दूसरे घर जाकर अपने ससुराल वालों की सेवा करती हैं। लड़कियों या महिलाओं को कम महत्ता देने से धरती पर मानव समाज खतरे में पड़ सकता है क्योंकि अगर महिलाएँ नहीं तो जन्म नहीं। इसमें कुछ सकारात्मक पहलू ये है कि ये योजना लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराध और गलत प्रथाओं को हटाने के लिये एक बड़े कदम के रुप में साबित होगी।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के उद्देश्य –

  • इस अभियान के मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की सुरक्षा करना और कन्या भ्रूण हत्या को रोकना है। इसके अलावा बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना और उनके भविष्य को संवारना भी इसका उद्देश्य है। सरकार ने लिंग अनुपात में समानता लाने के लिए ये योजना शुरू की।
  • ताकि बालिकाएं दुनिया में सर उठकर जी पाएं और उनका जीवन स्तर भी ऊंचा उठे। इसका उद्देश्य बेटियों के अस्तित्व को बचाना एवं उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना भी है। शिक्षा के साथ-साथ बालिकाओं को अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ाना एवं उनकी इसमें भागीदारी को सुनिश्चित करना भी इसका मुख्य लक्ष्य है|
  • इस अभियान के द्वारा समाज में महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय और अत्याचार के विरूद्ध एक पहल हुई है। इससे बालक और बालिकाओं के बीच समानता का व्यवहार होगा। बेटियों को उनकी शिक्षा के लिए और साथ ही उनके विवाह के लिए भी सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी, जिससे उनके विवाह में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी।
  • इस योजना से बालिकाओं को उनके अधिकार प्राप्त होंगे जिनकी वे हकदार हैं साथ ही महिला सशक्तिकरण के लिए भी यह अभियान एक मजबूत कड़ी है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के कार्य –

  • हर थोड़े दिनों बाद हमें कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, महिलाओं पर शारीरिक और मानसिक अत्याचार जैसे अपराधों की खबर देखने और सुनने को मिलती है। जिसके लिए भारत देश की सरकार इन बालिकाओं को बचाने और उनके अच्छे भविष्य के लिए हर संभव कोशिश कर रही है और अलग अलग योजनाएं चला रही है|
  • बालिकाओं की देखभाल और परवरिश अच्छी हो इसके लिए कई तरह के नए नियम कानून भी लागू किये जा रहे हैं। इसके साथ ही पुराने नियम कानूनों को बदला भी जा रहा है|
  • इस योजना के तहत मुख्य रूप से लड़के एवं लड़कियों के लिंग अनुपात में ध्यान केन्द्रित किया गया है, ताकि महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव और सेक्स डेटरमिनेशन टेस्ट को रोका जा सके।
  • इस अभियान का संचालन तीन स्तर पर हो रहा है, राष्ट्रीय स्तर पर, राजकीय स्तर पर और जिला स्तर पर। इस योजना में माता पिता एक निश्चित धनराशि अपनी बेटी के बैंक खाते में जमा करवाते हैं और सरकार उस राशि पर लाभ प्रदान करती है ताकि वह धनराशि बालिका की उच्च शिक्षा में और विवाह में काम आए।
  • जिससे बेटियों को बोझ ना समझा जाए। सरकार इस अभियान के द्वारा बालिकाओं की सुरक्षा और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती है।
  • इस अभियान के शुरुआती दौर में सभी ने इसका स्वागत और समर्थन किया लेकिन फिर भी ये इतना सफल नहीं हो पाया जितना सोचा गया था। बालिकाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिए लोगों को जागरूक होना होगा और सभी को एकजुट होकर इस समस्या का समाधान करना होगा।
  • एक बच्ची दुनिया में आकर सबसे पहले बेटी बनती है। वे अपने माता पिता के लिए विपत्ति के समय में ढाल बनकर खड़ी रहती है। बालिका बन कर भाई की मदद करती है। बाद में धर्मपत्नी बनकर अपने पति और ससुराल वालों का हर अच्छी बुरी परिस्थिति में साथ निभाती है।
  • वह त्यागमूर्ति मां के रूप में अपने बच्चों पर सब कुछ कुर्बान कर जाती है और अपने बच्चों में अच्छे संस्कारों के बीज बोती है, जिससे वे आगे चलकर अच्छे इंसान बनें। सभी को बेटी और बेटों के साथ एक समान व्यवहार करना चाहिए।

Conclusion : 

उन्हें समान रूप से शिक्षा और जीवन स्तर देना चाहिए, समान अधिकार और प्यार – दुलार देना चाहिए, क्योंकि किसी भी देश के विकास के लिए बेटियां समान रूप से जिम्मेदार है। हम ये आशा करते हैं कि आने वाले दिनों में सामाजिक-आर्थिक कारणों की वजह से किसी भी लड़की को गर्भ में नहीं मारा जायेगा, अशिक्षित नहीं रहेंगी, असुरक्षित नहीं रहेंगी, अत: पूरे देश में लैंगिक भेदभाव को मिटाने के द्वारा बेटी-बचाओ बेटी-पढ़ाओ योजना का लक्ष्य लड़कियों को आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह से स्वतंत्र बनाने का है। लडकियों को लडकों के समान समझा जाना चाहिए और उन्हें सभी कार्यक्षेत्रों में समान अवसर प्रदान करने चाहिए।

शिक्षा का अधिकार पर निबंध

Introduction :

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शिक्षा का बड़ा महत्व हैं,शिक्षा को जीवन का आधार माना गया हैं। किसी भी देश के आधुनिक या विकसित होने का प्रमाण उस देश के नागरिकों के शिक्षा स्तर पर निर्भर करता हैं। आधुनिक समय में शिक्षा को ही किसी राष्ट्र या समाज की प्रगति का सूचक समझा जाता हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम संसद का एक अधिनियम है जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 ए के तहत भारत में 6 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए नि: शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के महत्व का वर्णन करता है। यह अधिनियम 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ। इस अधिनियम की खास बात यह है कि गरीब परिवार के वे बच्चे, जो प्राथमिक शिक्षा से वंचित हैं, के लिए निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान रखा गया है ।

शिक्षा के अधिकार के साथ बच्चों एवं युवाओं का विकास होता है तथा राष्ट्र शक्तिशाली एवं समृद्ध बनता है । यह उत्तरदायी एवं सक्रिय नागरिक बनाने में भी सहायक है । इसमें देश के सभी लोगों, अभिभावकों एवं शिक्षकों का भी सहयोग आवश्यक है । इस कानून के लागू करने पर आने वाले खर्च केंद्र (55 प्रतिशत) और राज्य सरकार (45 प्रतिशत) मिलकर उठाएंगे।

  • आज विश्व के सभी राष्ट्रों द्वारा भारतीय युवाओं की प्रतिमा का मुक्त कण्ठ से गुणगान किया जाना इसका प्रमाण है । बावजूद इसके सम्पूर्ण राष्ट्र की शिक्षा को आधार मानकर विश्लेषण किया जाए तो अभी भी भारत शिक्षा के क्षेत्र में विकसित राष्ट्रों की तुलना में काफी पीछे है ।
  • वर्तमान में भारतीय शिक्षा दर अनुमानतः 74% है, जो वैश्विक स्तर पर बहुत कम है । तब इस अनुपात में और वृद्धि करने के लिए बुद्धिजीवियों ने अपने-अपने सुझाव दिए ।
  • उन सभी के सुझावों पर गौर अते हुए भारत सरकर ने शिक्षा को अनिवार्य रूप से लागू करने हेतु शिक्षा का अधिकार कानून (RTE Act) बनाकर पूरे देश में समान रूप से प्रस्तुत कर दिया ।
  • ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’, 1 अप्रैल, 2010 से सम्पूर्ण भारत में लागू कर दिया गया । इसका प्रमुख उद्देश्य है- वर्ष आयु तक के सभी बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य, गुणवतायुक्त शिक्षा को सुनिश्चित करना । इस अधिनियम को सर्व शिक्षा अभियान तथा वर्ष 2005 के विधेयक का ही संशोधित रूप कहा जाए, तो समीचीन ही होगा ।
  • क्षेत्रीय सरकारों, अधिकारियों तथा अभिभावकों का यह दायित्व है कि वे बच्चे को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा दिलाने का प्रबन्ध करें । इस कार्य हेतु वित्तीय प्रबन्धन का पूर्ण दायित्व केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा मिश्रित रूप से उठाया जाएगा । कोई भी बच्चा किसी समय विद्यालय में प्रवेश पाने को स्वतन्त्र है ।
  • आयु प्रमाण-पत्र न होने के बावजूद, बच्चा विद्यालय में प्रवेश ले सकता है । बच्चों की आवश्यकता का ध्यान रखते हुए पुस्तकालय, खेल के मैदान, स्वच्छ व मजबूत विद्यालय कक्ष, इमारत आदि का प्रबन्ध राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा ।
  • शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार हेतु 35 छात्रों पर एक शिक्षक का प्रावधान किया गया है तथा साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि ग्रामीण ब शहरी किसी भी क्षेत्र में यह अनुपात प्रभावित न हो। 
  • इसके साथ ही अध्यापन की गुणवत्ता हेतु केवल प्रशिक्षित अध्यापकों को ही नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है जो अप्रशिक्षित अध्यापक, प्राचीन समय से अध्यापनरत हैं, उन्हें सीमित अवधि में अध्यापक-प्रशिक्षण पूर्ण करने का आदेश पारित किया गया है, अन्यथा उन्हें पद-मुक्त किया जा सकता हे।

इसके अतिरिक्त निम्न कार्यों का पूर्ण रूप से निषेध है –

  • छात्रों को शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना देना ।
  • प्रवेश के दौरान छात्रों से कोई लिखित परीक्षा लेना ।
  • छात्रों या उनके अभिभावकों से किसी प्रकार का शुल्क लेना।
  • छात्रों को ट्‌यूशन पढ़ने के लिए बाध्य करना ।
  • बिना मान्यता प्राप्ति के विद्यालय का संचालन करना ।
  • इसी प्रकार निजी विद्यालयों में भी कक्षा 1 से प्रवेश के समय आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के छात्रों हेतु 25% आरक्षण का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है ।
  • इस अधिनियम को प्रभावी बनाने का उत्तरदायित्व केन्द्र ब राज्य सरकार दोनों का है, जिसका वित्तीय बहन भी दोनों संयुक्त रूप से करेंगे ।
  • इस अधिनियम के अनुसार, वित्तीय बहन का दायित्व सर्वप्रथम राज्य सरकार को सौंपा गया था, परन्तु राज्य सरकार ने अपनी विवशता का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया तथा केन्द्र सरकार से मदद का अनुरोध किया, तदुपरान्त केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा 65:36 अनुपात के तहत वित्तीय प्रबन्धन का विभाजन किया गया । उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह अनुपात 90:10 है।

केन्द्र सरकार के दायित्व –

(i) बच्चों का चहुँमुखी विकास ।

(ii) संवैधानिक मूल्यों का विकास ।

(iii) जहाँ तक हो सके, मातृभाषा में शिक्षण दिया जाए ।

(iv) बच्चों के मानसिक बिकास के अनुरूप, उनका नियमित विश्लेषण । (धारा-29 के अन्तर्गत)

(v) बच्चों को भयमुक्त माहौल प्रदान कराना तथा अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का विकास करना ।

राज्य सरकार के दायित्व –

(i) वह प्रत्येक बच्चे को नि:शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगी ।

(ii) अपने क्षेत्र के 14 वर्ष आयु तक के बच्चों का पूर्ण रिकॉर्ड रखेगी ।

(iii) शैक्षणिक कलेण्डर का निर्धारण करेगी (धारा-9 के अन्तर्गत)।

सर्व शिक्षा अभियान द्वारा पारित लक्ष्य वर्ष 2010 तक पूर्ण न हो पाया था, इसके अतिरिक्त यह अधिनियम भी लागू कर दिया गया । अतः यह कहना समीचीन ही होगा कि इस अधिनियम में सर्व शिक्षा अभियान के सभी नियम समाहित है ।

Conclusion : 

अधिनियम शिक्षा को 6 से 14 वर्ष की आयु के बीच हर बच्चे का मौलिक अधिकार बनाता है। अब भारत में 74% आबादी साक्षर है जिसमें पुरुषों में 80% और महिला 65% शामिल हैं। यह शिक्षा का मौलिक अधिकार 6 से 14 वर्षो के बालक-बालिकाओं के लिए निशुल्क और गुणवतापूर्ण शिक्षा की सहायता से उन्हें समान रूप से शिक्षा और रोजगार के समान अवसरों की उपलब्धता सुनिश्चित करवाएगा, इससे हमारा भारत शिक्षित और विकसित बनेगा।

निजता का अधिकार पर निबंध

Introduction :

मनुष्य की ज़रूरतें सबसे प्राथमिक ज़रूरतों जैसे कि भोजन, कपड़े और आश्रय से लेकर माध्यमिक ज़रूरतों जैसे शिक्षा, काम और मनोरंजन और आगे की ज़रूरतों जैसे मनोरंजन, भोजन, अवकाश, यात्रा, आदि से शुरू होती हैं। यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि इन सभी जरूरतों और इच्छाओ (wants) में गोपनीयता कहाँ है ? किसी भी सभ्य समाज में गोपनीयता की एक बुनियादी डिग्री एक प्राथमिक आवश्यकता है। जैसे-जैसे गोपनीयता की डिग्री बढ़ती है, यह एक माध्यमिक जरूरत और आगे एक इच्छा में विकसित हो जाती है।

निजता का अधिकार नागरिकों की निजता के अधिकार को लेकरकर यह सुनिश्चित करता है की सभी समान रूप से संरक्षित हो और अमीर और गरीब के लिए समान न्याय और अधिकार हो। आधार के लिए भारत के निवासियों के व्यक्तिगत डेटा के संग्रह की आवश्यकता होती है, और इसके परिणामस्वरूप चूक होने की संभावना को लेकर विवाद पैदा हो सकता है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें बायोमेट्रिक विवरण जैसे कि आईरिस स्कैनिंग और फिंगर प्रिंट के संग्रह की आवश्यकता होती है जो अनिवार्य रूप से महत्वपूर्ण विवरण हैं और इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। साइबर स्पेस एक संवेदनशील स्थान है और यहाँ खतरे की संभावना अधिक है हालांकि, आधार अपने आप में एक सुविचारित कार्यक्रम है ताकि वित्तीय समावेशन सुनिश्चित किया जा सके।

निजता का महत्त्व

  • निजता वह अधिकार है जो किसी व्यक्ति की स्वायतता और गरिमा की रक्षा के लिये ज़रूरी है। वास्तव में यह कई अन्य महत्त्वपूर्ण अधिकारों की आधारशिला है।
  • दरअसल निजता का अधिकार हमारे लिये एक आवरण की तरह है, जो हमारे जीवन में होने वाले अनावश्यक और अनुचित हस्तक्षेप से हमें बचाता है।
  • यह हमें अवगत कराता है कि हमारी सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक हैसियत क्या है और हम स्वयं को दुनिया से किस हद तक बाँटना चाहते हैं।
  • वह निजता ही है जो हमें यह निर्णित करने का अधिकार देती है कि हमारे शरीर पर किसका अधिकार है?
  • आधुनिक समाज में निजता का महत्त्व और भी बढ़ जाता है। फ्रांस की क्रांति के बाद समूची दुनिया से निरंकुश राजतंत्र की विदाई शुरू हो गई और समानता, मानवता और आधुनिकता के सार्वभौमिक सिद्धांतों पर आधारित लोकतंत्र ने पैर पसारना शुरू कर दिया।
  • अब राज्य लोगों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ चलाने लगे तो यह प्रश्न प्रासंगिक हो उठा कि जिस गरिमा के भाव के साथ जीने का आनंद लोकतंत्र के माध्यम से मिला उसे निजता के हनन द्वारा छिना क्यों जा रहा है?
  • तकनीक और अधिकारों के बीच हमेशा से टकराव होते आया है और 21वीं शताब्दी में तो तकनीकी विकास अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच चुका है। ऐसे में निजता को राज्य की नीतियों और तकनीकी उन्नयन की दोहरी मार झेलनी पड़ी।
  • आज हम सभी स्मार्टफोंस का प्रयोग करते हैं। चाहे एपल का आईओएस हो या गूगल का एंड्राइड या फिर कोई अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम, जब हम कोई भी एप डाउनलोड करते हैं, तो यह हमारे फ़ोन के कॉन्टेक्ट, गैलरी और स्टोरेज़ आदि के प्रयोग की इज़ाज़त मांगता है और इसके बाद ही वह एप डाउनलोड किया जा सकता है।
  • ऐसे में यह खतरा है कि यदि किसी गैर-अधिकृत व्यक्ति ने उस एप के डाटाबेस में सेंध लगा दी तो उपयोगकर्ताओं की निजता खतरे में पड़ सकती है।
  • तकनीक के माध्यम से निजता में दखल, राज्य की दखलंदाज़ी से कम गंभीर है। हम ऐसा इसलिये कह रहे हैं क्योंकि तकनीक का उपयोग करना हमारी इच्छा पर निर्भर है, किन्तु राज्य प्रायः निजता के उल्लंघन में लोगों की इच्छा की परवाह नहीं करता।
  • आधार का मामला इसका जीता जागता उदाहरण है। जब पहली बार आधार का क्रियान्वयन आरंभ किया गया तो कहा यह गया कि यह सभी भारतीयों को एक विशेष पहचान संख्या देने के उद्देश्य से लाई गई है। जल्द ही मनरेगा सहित कई बड़ी योजनाओं में बेनिफिट ट्रान्सफर के लिये आधार अनिवार्य कर दिया गया।
  • यहाँ तक कि आधार पर किसी भी प्रकार के विचार-विमर्श से किनारा करते हुए इसे मनी बिल यानी धन विधेयक के तौर पर संसद में पारित कर दिया गया। इन सभी बातों से पता चलता है कि निजता जो कि लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने के लिये आवश्यक है, गंभीर खतरे में है।

गोपनीयता का उल्लंघन

  • सोशल मीडिया चैनलों और साइटों पर गोपनीयता भंग होने के अधिक मामले देखे जा सकते हैं, जिसमें साइबर अपराधियों द्वारा व्यक्ति के जीवन को नष्ट करने वाले जघन्य अपराध करने के लिए लोगों की व्यक्तिगत जानकारी और डेटा को हैक किया जाता है।
  • कई हैकर्स हमारे सोशल मीडिया और बैंकिंग खातों में घुस जाते हैं और लीक हुई जानकारी के जरिए पैसा कमाने के लिए संवेदनशील डेटा चुरा लेते हैं।
  • इतना ही नहीं, बल्कि कई अन्य क्षेत्र भी हैं जो गोपनीयता के उल्लंघन से पीड़ित हैं। इसलिए, यह एक प्रमुख चिंता का विषय है और सरकार को इससे निपटना चाहिए।

इंटरनेट के उपयोग के साथ, इस युग में, फेसबुक और ट्यूटर जैसे सामाजिक नेटवर्क सामाजिक संपर्क के नए रूपों को चला रहे हैं और उपलब्धता ने गोपनीयता संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है। इसके लिए सरकार को साइबर सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करना चाहिए और कानून के माध्यम से आश्वासन देना चाहिए कि निजता के अधिकार का उल्लंघन  न हो और निजी जानकारी को निजी रखा जाये।

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Essays

मानसिक स्वास्थ्य पर निबंध (Mental Health essay in Hindi)

मानसिक स्वास्थ्य पर निबंध (essay on Mental Health in Hindi)

Introduction :

गांधी जी ने एक बार कहा था, ” स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है सोना और चांदी नहीं”। यह कथन हमारे जीवन में स्वास्थ्य के महत्व को इंगित करता है। लोग आमतौर पर अपने शारीरिक स्वस्थ पर अधिक ध्यान देते हैं और मानसिक फिटनेस को अनदेखा करते हैं। लेकिन यह भी सत्य है कि मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य। हम अपने विकसित मस्तिष्क के कारण अपने जीवन को नियंत्रित कर पाते हैं। इसलिए, बेहतर प्रदर्शन और परिणाम के लिए हमारे शरीर और दिमाग को फिट और स्वस्थ रखना हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है आक्रामकता, नकारात्मक सोच, निराशा और भय ऐसे कारक हैं जो हमारे फिटनेस स्तर पर बहुत प्रभाव डालते हैं। मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति हमेशा अच्छे मूड में होता है और आसानी से संकट और ख़राब स्थितियों को आसानी से व्यवस्थित कर सकता है। 

मानसिक फिटनेस महसूस करने और सोच की सकारात्मकता को दर्शाता है जो जीवन का आनंद लेने की हमारी क्षमता में सुधार करता है। आजकल फिटनेस शब्द का इस्तेमाल मनोवैज्ञानिकों, स्कूलों, संगठनों और सामान्य लोगो द्वारा तार्किक सोच और तर्क क्षमता को दर्शाने के लिए किया जा रहा है। उसी तरह मानसिक इलनेस स्वास्थ्य की अस्थिरता है, जिसमें सोच और व्यवहार में अप्रत्याशित परिवर्तन आता हैं। तनाव या अन्य घटनाओं के कारण मानसिक बीमारी हो सकती है। यह आनुवंशिक कारकों, सामाजिक तनाव और खराब शारीरिक स्वास्थ्य से भी उत्पन्न हो सकती  है।

  • शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य का निकट संबंध है और यह निस्संदेह रूप से सिद्ध हो चुका है कि अवसाद के कारण हृदय और रक्तवाहिकीय रोग होते हैं।
  • मानसिक विकार व्यक्ति के स्वास्थ्य-संबंधी बर्तावों जैसे, समझदारी से भोजन करने, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, सुरक्षित यौन व्यवहार, मद्य और धूम्रपान, चिकित्सकीय उपचारों का पालन करने आदि को प्रभावित करते हैं और इस तरह शारीरिक रोग के जोख़िम को बढ़ाते हैं।
  • मानसिक अस्वस्थता के कारण सामाजिक समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं जैसे, बेरोजगार, बिखरे हुए परिवार, गरीबी, नशीले पदार्थों का दुर्व्यसन और संबंधित अपराध।
  • मानसिक अस्वस्थता रोगनिरोधक क्रियाशीलता के ह्रास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • अवसाद से ग्रस्त चिकित्सकीय रोगियों का हश्र बिना अवसाद से ग्रस्त रोगियों से अधिक बुरा होता है।
  • लंबे चलने वाले रोग जैसे, मधुमेह, कैंसर,हृदय रोग अवसाद के जोखिम को बढ़ाते हैं।
  • कोई व्यक्ति जो शारीरिक रूप से अयोग्य है वह अपने परिवार की देखभाल नहीं कर सकता है। इसी तरह कोई व्यक्ति मानसिक तनाव का सामना कर रहा है और अपनी भावनाओं को संभालने में अक्षम है तो वह परिवार के साथ अच्छे रिश्तों का निर्माण और उनको बढ़ावा नहीं दे सकता है।
  • यह कहना बिल्कुल सही है कि एक शारीरिक रूप से अयोग्य व्यक्ति ठीक से काम नहीं कर सकता। कुशलतापूर्वक काम करने के लिए अच्छा मानसिक स्वास्थ्य बहुत आवश्यक है। काम पर पकड़ बनाने के लिए अच्छे सामाजिक और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य का आनंद लेना चाहिए।
  • ख़राब शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी अध्ययन में एक बाधा है। अच्छी तरह से अध्ययन करने के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के अलावा अच्छा संज्ञानात्मक स्वास्थ्य बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
  • हमारा मानसिक स्वास्थ्य मूल रूप से, जिस तरह से हम महसूस करते हैं, अलग-अलग परिस्थितियों में सोचते हैं और स्थिति को नियंत्रित करते हैं, आदि को प्रभावित करता है। मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शारीरिक स्वास्थ्य को बरकरार रखना महत्वपूर्ण है।
  • सामाजिक स्वास्थ्य समाज में अपने दोस्तों, पड़ोसियों, रिश्तेदारों और अन्य लोगों के साथ पारस्परिक संबंधों को संवारने और बनाए रखने की क्षमता रखता है। यह उचित रूप से कार्य करने और विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों के अनुकूल होने के लिए किसी व्यक्ति की क्षमता को दर्शाता है।
  • जब एक व्यक्ति का मस्तिष्क सभी मानसिक प्रक्रियाओं को कुशलता से निष्पादित करता है तो उसे अच्छे संज्ञानात्मक स्वास्थ्य का आनंद लेना कहा जाता है। प्रक्रियाओं और क्रियाकलापों में नई बातें, अच्छे निर्णय, अपनी बात और मजबूत संवाद करने के लिए भाषा का कुशल उपयोग करना शामिल है।
  • आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बरकरार रखने से एक व्यक्ति अधिक सकारात्मक, जुझारू और सुलझा हुआ बनता है।
  • स्वास्थ्य का मतलब केवल आपकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य नहीं है बल्कि इसके बारे में ऊपर बताए गए विभिन्न तत्व भी इसमें शामिल हैं। जहाँ अच्छा शारीरिक स्वास्थ्य एक स्वस्थ जीवन के लिए आधार है वहीँ आपको एक स्वस्थ्य जीवन का आनंद लेने के लिए अन्य सभी स्वास्थ्य घटकों को बनाए रखना आवश्यक है।

Conclusion :

जीवन में हर कदम पर प्रतिस्पर्धा होती है। प्रत्येक व्यक्ति दूसरे की बराबरी करना चाहता है चाहे वह स्कूल या कॉलेज स्तर पर हो या जीवन में स्वास्थ्य शैली को बनाए रखनी की हो। लोगों को इस तथ्य को पहचानना चाहिए कि स्वास्थ्य पहले है। हम यह सब तभी कर सकते हैं जब हम स्वस्थ होते हैं और जीवन के अन्य पहलुओं पर बेहतर काम करते हैं। सरकार को देश की भलाई के लिए अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ भी प्रदान करनी चाहिए।

मानसिक बीमारी का इलाज़ संभव है। हम सकारात्मक सोच और अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर इस बीमारी को दूर कर सकते हैं। नियमित व्यायाम जैसे कि सुबह की सैर, योग और ध्यान मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए बेहतरीन औषधि साबित हुए हैं। अच्छा भोजन और पर्याप्त नींद लेना भी बहुत जरूरी है। तनावमुक्त और निरोगी जीवन के लिए अच्छा मानसिक स्वास्थ्य बहुत जरूरी है, क्योंकि हम सभी को अपने -अपने जीवन में बड़ी सफलताएं हासिल करनी है जिसके लिए अच्छे मानसिक स्वास्थ्य की बहुत जरूरत होती है।

योग का महत्व 

Introduction :

योग दुनिया में सबसे लोकप्रिय अभ्यास है, जिसकी शुरुआत भारत में योगियों द्वारा की गई । यह एक व्यायाम है जिसे हम अपने शरीर को संतुलित करके करते हैं। यह जीवन भर स्वस्थ रहने का सबसे अच्छा और सुरक्षित तरीका भी माना जाता है। यह हमारे शरीर के साथ-साथ मन पर भी नियंत्रण रखने में हमारी मदद करता है। यह हमें तनाव और चिंता से मुक्त करने का एक असरदार तरीका है। यह एक दवा की तरह है, जो हमारे शरीर के अंगों के कार्यों करने के ढंग को नियमित करके हमें विभिन्न बीमारियों से बचाने का कार्य करता है तथा हमारे शरीर को मजबूत बनाता है और हमें स्वस्थ रहने में मदत करता है। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है जब लोगों को योग के लाभों के बारे में जागरूक किया जाता है।

यह केवल एक शारीरिक क्रिया ही नहीं है, क्योंकि यह हमें मानसिक, भावनात्मक और आत्मिक विचारों पर नियंत्रण करने के योग्य भी बनाता है। यह हमारे मस्तिष्क को तेज करता है, बौद्धिक स्तर को सुधारता है और उच्च स्तर की एकाग्रता में मदद करता है। यदि हम नियमित रूप से अभ्यास करते हैं तो हम योग से आत्म-अनुशासन और आत्म-जागरूकता विकसित कर सकते हैं।

  • योग एक कला है जो हमारे शरीर, मन और आत्मा को एक साथ जोड़ता है और हमें मजबूत और शांतिपूर्ण बनाता है। योग आवश्यक है क्योंकि यह हमें फिट रखता है, तनाव को कम करने में मदद करता है और समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखता है और एक स्वस्थ मन ही अच्छी तरह से ध्यान केंद्रित करने में सहायता कर सकता है।
  • योग आंतरिक शांति प्राप्त करने और तनाव तथा अन्य समस्याओं के खिलाफ लड़ाई में मदद करता है। योग एक व्यक्ति में शांति के स्तर को बढ़ाता है और उसके आत्मविश्वास को और अधिक बढ़ाने तथा उसे खुश रहने में मदद करता है।
  • एक स्वस्थ व्यक्ति एक अस्वस्थ व्यक्ति की तुलना में अधिक काम कर सकता है। आजकल जीवन बहुत तनावपूर्ण है और हमारे आसपास बहुत प्रदूषण है। यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण है। सिर्फ 10-20 मिनट का योग हर दिन आपके स्वास्थ्य को अच्छा रहने में मदद कर सकता है। बेहतर स्वास्थ्य का मतलब बेहतर जीवन है।
  • आजकल लोग आलसी, थके हुए या नींद की कमी महसूस करते हैं जिसके कारण वे अपने जीवन में अधिकतर मौज-मस्ती से चूक जाते हैं और अपने काम को सही ढंग से पूरा करने में सक्षम नहीं हैं।
  • सक्रियता होने के नाते आप अपने आसपास होने वाली चीजों के बारे में अधिक जागरूक रहते हैं और अपने काम को अधिक कुशलतापूर्वक और जल्दी से पूरा कर पाते हैं यह सब करने का एक तरीका नियमित रूप से योग का अभ्यास करना है।
  • लोग आजकल कई प्रकार के दर्द से ग्रस्त हैं। वे पैर की उंगलियों को छूने या नीचे की ओर झुकने के दौरान कठिनाइयों का सामना करते हैं। योग का नियमित अभ्यास इन सभी प्रकार के दर्द से राहत में मदद करता है। योग करने से इन सभी चीजों का प्रभाव कुछ दिनों में कम होता देखा जा सकता है।
  • योग आपके दिल को स्वस्थ बनाने में मदद करता है और यह आपके शरीर और नसों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाकर अधिक कुशलता से काम करता है। यह आपके शरीर को ऑक्सीजन युक्त रखने में मदद करता है।
  • योग आपके शरीर को शांत करने और आराम करने में मदद करता है जिसका मतलब तनाव का कम होना है और आप अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर सकते है।
  • यही कारण है कि बच्चों और किशोरों को योग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है क्योंकि यह उनकी पढ़ाई में बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
  • योग को आसान तक सीमित होने की वजह से आंशिक रूप से ही समझा जाता है, लेकिन लोगों को शरीर, मन और सांस को एकजुट करने में योग के लाभों का एहसास नहीं है। किसी भी आयु वर्ग और किसी भी शरीर के आकार के व्यक्ति द्वारा योग का चयन और इसका अभ्यास किया जा सकता है।
  • यह किसी के लिए भी शुरू करना संभव है। आकार और फिटनेस स्तर से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि योग में विभिन्न लोगों के अनुसार प्रत्येक आसन के लिए संशोधन मौजूद हैं।

योग के फायदे –

  • मांसपेशियों के लचीलेपन में सुधार
  • शरीर के आसन और एलाइनमेंट को ठीक करता है
  • बेहतर पाचन तंत्र प्रदान करता है
  • आंतरिक अंग मजबूत करता है
  • अस्थमा का इलाज करता है
  • मधुमेह का इलाज करता है
  • दिल संबंधी समस्याओं का इलाज करने में मदद करता है
  • त्वचा के चमकने में मदद करता है
  • शक्ति और सहनशक्ति को बढ़ावा देता है
  • एकाग्रता में सुधार
  • मन और विचार नियंत्रण में मदद करता है
  • चिंता, तनाव और अवसाद पर काबू पाने के लिए मन शांत रखता है
  • तनाव कम करने में मदद करता है
  • रक्त परिसंचरण और मांसपेशियों के विश्राम में मदद करता है

कोई भी व्यक्ति योग का अभ्यास कर सकता है चाहे वह किसी भी उम्र का हो या जिस भी धर्म का पालन करता हो। जब हम योग को अपने जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा  बनाते हैं और हर दिन इसका अभ्यास करते हैं तो यह हम सभी के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है। स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने के लिए सभी को इसका अभ्यास जरूर करना चाहिए।

मोबाइल एडिक्शन

Introduction :

मोबाइल की लत आजकल हमारे समाज में एक चिंता का विषय बन चूका है। मोबाइल फोन की लत पड़ना जितना आसान है, इससे छुटकारा पाना उतना ही मुश्किल। दुनिया भर में लाखो लोग मोबाइल फोन के आदी हो चुके हैं। मोबाइल फ़ोन हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चूका है, इसके आभाव में हमारे अनेकों काम रुक जाते हैं। जब कोई व्यक्ति खुद को अपने मोबाइल से दूर नहीं रख पाता, इस स्थिति को मोबाइल की लत कहते हैं। मोबाइल फोन का आविष्कार हमें सशक्त बनाने के लिए किया गया था, लेकिन अब यह हम पर हावी होने लगा है। इसके माध्यम से हम दुनिया भर में किसी से भी बात कर सकते है। यह हमें उन सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने में सक्षम बनाता है जिनकी हमें आवश्यकता है और मनोरंजन का एक बड़ा स्रोत भी है। स्मार्ट फोन हमें गेम खेलने, पढाई करने और ऑनलाइन शॉपिंग करने में सक्षम बनाता हैं।

यह हमें फिल्में देखने, फ़ोटो खींचने, संगीत सुनने, इंटरनेट पर सर्फ करने और विभिन्न अन्य गतिविधियों का आनंद लेने में सक्षम बनाता है। अत्यधिक उपयोगिता के कारण हमें इसकी लत लगती जा रही है जो हमारे लिए हानिकारक हो सकता है। मोबाइल की लत कई गंभीर समस्याओं का मुख्य कारण बन सकती है, जैसे व्यक्ति में चिड़चीड़ापन का होना, हमेशा सिर दर्द की समस्या, नेत्र संबंधित समस्या, अनिंद्रा व मोबाइल के हानिकार रेडिएशन से कई अन्य तरह के रोग भी हो सकते हैं। मोबाइल की लत का एक और संकेत समय की हानि है। वह व्यक्ति जो मोबाइल फोन का आदी है, उसको समय का पता ही नहीं रहता। वह अपना कोई भी कार्य समय पर समाप्त नहीं कर पता। मोबाइल फोन की आदत से छुटकारा पाना मुश्किल हो सकता है लेकिन असंभव नहीं।

  • अपनो से जोड़ना’ कहां मोबाइल की परिभाषा के रूप में पढ़ा जाता था। आज अपनों से दूरी का मुख्य कारण मोबाइल है। व्यक्ति एक रूम में एक साथ होने के बाद भी पास बैठे लोगों में अपनी कोई रुचि नहीं दिखाता और अपने-अपने मोबाइल के स्क्रीन स्क्रोल करता रहता है। इससे आपसी संबंध कमज़ोर होते हैं।
  • मोबाइल के लगातार इस्तेमाल से उससे निकलने वाली हानिकारक रेडिएशन से हमें हृदय संबंधी रोग हो सकते है। इसके अलावां आँखों के रौशनी पर भी गहरा असर पड़ता है। साथ ही सिर दर्द, नींद न आना, चिड़चीड़ापन, याददाश्त का कमज़ोर होना अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं हो सकते हैं।
  • बेशक टेकनॉलजी के माध्यम से हम विकास की ओर बढ़ पाते है, जिसमें मोबाइल फ़ोन मुख्य भूमिका निभाता है। क्योंकि सबके पास पढ़ाई के लिए लैपटॉप या कम्पूटर नहीं हो सकता पर मोबाइल होता है। जिसकी मदद से वह अपने संदेह दूर कर सकते हैं पर मोबाइल की लत में आज लोग घंटों अपना किमती समय मोबाइल को दे देते हैं। जिससे उनका ध्यान पढ़ाई पर नहीं लगता है। अपने व्यवसाय में वह अपना पूर्ण योगदान नहीं दे पाते हैं।
  • खुद में ही खोए रहते हैं और खुद से दूर होते चले जाते हैं। हम पढ़ाने वाले समय पर भी खुद से झुठ बोलकर मोबाइल पर पढ़ाई करने के बहाने ढुंढ़ते हैं।
  • मोबाइल के न मिलने पर या खो जाने पर हम सभी परेशान हो जाते है पर बहुत अधिक चिंता का होनानोमोफोबीया कहलाता हैं। इसमें मोबाइल के न होने पर व्यक्ति असहज महसूस करता है तथा उसे बहुत अधिक घबराहट होने लगता है। विश्व भर में किए गए शोध से पता चला है, नोमोफोबिया की शिकायत तेजी से बढ़ती जा रही है। मोबाइल फ़ोन को बहुत अधिक चलाने से यह बीमारी हो सकती है।
  • नोमोफोबिया में संबंधित व्यक्ति को मोबाइल चोरी होने या गिर जाने के सपनें आते हैं, इससे वह घबराहट में नींद से उठ जाता हैं। ऐसा दिन भर मोबाइल की चिंता करने के वजह से होता है।
  • हम सभी अपने किमती सामानों के न मिलने पर घबरा जाते हैं, पर नोमोफोबीया में व्यक्ति का मोबाइल खो जाने पर वह इतना घबरा जाता है की उसे पैंनिक अटैक आ सकते हैं।
  • नोमोफोबिया का अर्थ नो मोबाइल फोबिया है, इसमें व्यक्ति किसी भी स्थिति में मोबाइल को स्वयं से दूर नहीं कर सकता। वह जहां कहीं भी जाता है मोबाइल लेकर हीं जाना पसंद करता है। सोने पर भी वह अपने समीप ही मोबाइल को रख कर सोता है।
  • नोमोफोबिया में बार-बार व्यक्ति को कॉल आने का आभास होता है, उसे लगता है मोबाइल की रिंग जैसे बज रही हो।
  • यह कुछ लक्षण है, जिससे मालुम चलता है व्यक्ति नोमोफोबिया का शिकार हो चुँका है, अतः सही समय पर इससे छुटकारा पाने के लिए उचित कदम उठाना चाहिए।
  • मोबाइल की लत ने व्यक्ति को अपने अधीन कर लिया है। गैजेट हमारे उपयोग के लिए है पर यहां गैजेट्स हमारा उपयोग कर रहे हैं। व्यक्ति को मोबाइल की ऐसी लत है की वह पास बैठे लोगों से बात करने के स्थान पर सोशल मीडिया पर मित्रों से लगा रहता है।
  • इससे उसके अपनों से आपसी संबंध कमज़ोर होते चले जाते है। साथ ही व्यकि के जीवन की विभिन्न पहलुओं को भी यह लत प्रभावित करता है जैसे स्वास्थ्य, आजीविका (career), अध्ययन आदि।
  • मोबाइल में अनेक ऐसे एप्लिकेशन हैं जिससे व्यक्ति पूरा-पूरा दिन दोस्तों से बाते करते रह सकते हैं, जैसे- वॉट्सएप, फेशबुक, इन्टाग्राम आदि। इसके वजह से बच्चे पढ़ाई में समय नहीं देते, बड़े अपने काम पर ध्यान नहीं देते हैं।
  • मोबाइल फ़ोन के हद से ज्यादा उपयोग से हम अनेक तरह के रोगों के चपेट में आ सकते हैं जैसे- आँखों का कमज़ोर होना, सिर दर्द, कम सुनाई देना, तनाव, अनिंद्रा आदि।
  • मोबाइल में सब कुछ आसानी से मिल जाने के वजह से हमारी याद करने की क्षमता कम होती जा रही है।

Conclusion :

मोबाइल की लत में पड़ा व्यक्ति सुबह उठने के बाद सबसे पहले मोबाइल चैक करता है, जब तक नींद न आ जाए मोबाइल उपयोग करता है तथा सोने के बाद भी अपने सिरहानें उसे रख कर सोता है। बेशक इस उपकरण से ज्यादा महत्वपूर्ण लोग आपके जीवन में हैं, उन्हें महत्व देना चाहिए।मोबाइल की लत से समय का दुरोपयोग होता है, समय से न सोना, समय से न उठना हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। मोबाइल में आज अनेक तरह के गेम्स बच्चों को मिल जाते हैं, इसके फलस्वरूप बच्चें बाहर खेले जाने वाले खेल से कटते जा रहे हैं।

हम सोशल मीडिया, टेक्सटिंग, गेमिंग या वीडियो देखने जैसी मोबाइल गतिविधियों के लिए एक समय निर्धारित कर सकते हैं ताकि अपने अन्य कार्य समय पर कर पाए। हम पेंटिंग, नृत्य, इनडोर या आउटडोर गेम खेलने जैसी अन्य मनोरंजक गतिविधियों में भी संलग्न हो सकते हैं। अगर हम उचित प्रयास करे तो धीरे- धीरे इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। अगर हम इसका सहीं प्रकार से उपयोग करते है तो यह हमारा काम आसान कर देता है और अगर हमे इसकी लत लग जाये तो यह हमारा ही उपयोग करने लगाता है।

वर्क फ्रॉम होम 

Introduction :

‘वर्क फ्रॉम होम’ कार्य करने का एक आधुनिक तरीका है, जहां कंपनी या फर्म के कर्मचारी अपने घर से ही अपना काम कर सकते हैं। घर से काम करने से कर्मचारियों के साथ-साथ कंपनियों के प्रबन्धको को भी आसानी रहती है क्योंकि पूरा काम समय पर बड़ी आसानी से समाप्त किया जा सकता है। कोरोना महामारी के खतरे को देखते हुए दुनिया भर की कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम की नीति अपनाई। भारत के लिए यह भले ही नई बात हो, लेकिन दुनिया के अन्य देशों में यह चलन पहले से ही मौजूद था। ‘वर्क फ्रॉम होम’ ने कई व्यावसायो और कंपनियों के लिए काम करने की नई संभावनाओं की राहे खोल दी है। कई कम्पनियाँ इसके माध्यम से अपने व्यापार मॉडल में सुधार कर रही है और साथ ही इसका फायदा उनके कर्मचारियों को भी मिल रहा है।

यदि कोई कर्मचारी स्वास्थ संबंधित समस्याओं का सामना कर रहा हैं, तो ‘वर्क फ्रॉम होम उनके लिए एक अच्छा उपाय साबित हो सकता है। यही कारण है कि आजकल, अधिकांश आईटी और अन्य संबंधित कंपनियां अपने कर्मचारियों को यह विकल्प दे रही हैं। लेकिन वर्क फ्रॉम होम हर किसी की क्षमता और व्यक्तित्व के लिए उपयुक्त नहीं है। कुछ कर्मचारी कार्यालय के वातावरण में काम करना पसंद करते हैं।

  • कोरोना वाय़रस संक्रमण के खतरे को देखते हुए दुनिया भर की कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम की नीति अपनाई है. भारत के कॉरपोरेट कल्चर के लिए यह भले ही नई बात है और आपदा के दौर में अपनाई गई व्यवस्था है, लेकिन दुनिया के अन्य देशों में यह चलन पहले से ही है.
  • कई कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से काम करने (वर्क फ्रॉम होम) की सुविधा दी है. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि ‘कम्युनिटी ट्रांसमिशन’ को रोका जा सके.
  • हालांकि घर से काम करने वाले अधिकतर लोग अब नई मुश्किलों से जूझ रहे हैं. कई लोग मानसिक तनाव और दबाव झेल रहे हैं. इसकी कई वजहें हैं.
  • कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए किये गए लॉकडाउन की वजह से ज्यादातर कंपनियों ने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का विकल्प दे दिया है. घर से काम करने के कारण कुछ लोग आलस्य महसूस करने लगे हैं. कुछ लोगों का मानना है कि घर पर काम करने के कारण अक्सर उनके गर्दन और कंधों में दर्द रहने लगा है.
  • नेशनल करियर सर्विस ने कहा है कि वर्क फ्रॉम होम को सफल बनाने के लिए जरूरी है आप हर दिन के काम की पूरी लिस्ट बनाएं और उसे शाम में चेक करें कि आपने सारे काम पूरे कर लिए हैं या नहीं. दूसरी बात यह है कि घर पर आप ऑफिस जैसा माहौल बनायें.
  • वर्क फ्रॉम होम के दौरान आप अपने काम के समय को लेकर स्पष्ट रहें. जैसे आप ऑफिस जाने के बाद एक निर्धारित समय तक काम करते हैं, वैसे ही आप घर से भी निर्धारित समय में ही काम करें. आप उस काम के बीच में ना डिस्टर्ब हों, ना कोई और काम करें. इसके साथ ही नेशनल करियर सर्विस ने कहा है कि ऑफिस के समय में केवल ऑफिस का काम करें.
  • अपने घर से काम करते समय भी आपको अपने सहकर्मियों के साथ संपर्क में रहना चाहिए. दूसरी बात यह है कि ऑफिस के कामकाज से संबंधित बातचीत करने के लिए आप डिजिटल संचार माध्यम का उपयोग करें. आप ईमेल कर सकते हैं, आप फोन कर सकते हैं, आप चैट कर सकते हैं या वीडियो कॉल कर सकते हैं. 
  • घर से ग्रॉसरी का सामान खरीदने के लिए बाहर निकलें तो साथ में सैनिटाइजर जरूर रखें. वजह यह है कि ग्रॉसरी शॉप या सुपरमार्केट में कई चीजों को छूना पड़ सकता है. कार्ट, काउंटर, शेल्‍फ वगैरह को छूने पर हाथों पर सैनिटाइजर जरूर लगाएं
  • जरूरी नहीं है कि आप सर्जिकल मास्‍क ही पहनें. हेल्‍थकेयर प्रोफेशनल्‍स को इनकी ज्‍यादा जरूरत होती है. घर पर कपड़े से बने मास्‍क भी आपकी सुरक्षा करने में मददगार होते हैं. आवश्‍यक वस्‍तुएं खरीदने के लिए बाहर निकलें तो मास्‍क जरूर पहन लें.
  • हफ्तेभर की ग्रॉसरी खरीदना पर्याप्‍त है. सरकार ने भरोसा दिया है कि वह आवश्‍यक वस्‍तुओं की आपूर्ति में बाधा नहीं आने देगी. इस दौरान प्रोटीनयुक्‍त खाना खाने की सलाह दी जाती है क्‍योंकि यह इम्‍यूनिटी को बढ़ाता है और सेहतमंद होता है.

Conclusion :

ज्‍यादातर दुकानों के सामने अब दुकानदारों ने गोले खींच दिए हैं. ऐसा सोशल डिस्‍टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी को बनाए रखने के लिए किया गया है. ग्रॉसरी खरीदते वक्‍त एक-दूसरे से छह फीट की दूरी बनाकर रखना सही है. जितना संभव हो डिजिटल पेमेंट का इस्‍तेमाल करें. यह न केवल संक्रमण के खतरे को कम करता है, बल्कि कैश बचाने में भी मदद करता है. इसके चलते लॉकडाउन में छोटी-छोटी अवधियों में आपको एटीएम नहीं भागना पड़ता है. ग्रॉसरी खरीदकर घर वापस लौटने पर 20 सेकेंड तक अपने हाथों को साबुन से धुलना नहीं भूलें इसकी वजह यह है कि ज्यादातर मोबाइल ‘हाई-टच सरफेस’ माने जाते हैं. यहां हम ऐसी बातें बता रहे हैं जिनका ध्यान आपको स्मार्टफोन और लैपटॉप सहित गैजेट्स को साफ करते वक्त रखना है.

वर्क फ्रॉम होम करते हुए शुरुआती समय में कई बार काफी थकान महसूस होती है और काम नीरस लगने लगता है। वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारीयो के कार्य की निगरानी करने में भी कठिनाई होती है। कंपनियां कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं लेकिन बेहतर परिणाम के लिए कुछ नियम भी होने चाहिए ताकि घर से काम प्रभावी ढंग से और समय सीमा के भीतर हो सके। वर्क फ्रॉम होम रोमांचक और लाभदायक है, लेकिन काम में स्वतंत्रता से जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं।

कोरोना वायरस का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

Introduction :

कोरोनावायरस (COVID-19) एक संक्रामक रोग है जो कोरोनावायरस के कारण होता है। इसकी शुरुआत पहली बार दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से हुई। डब्ल्यूएचओ ने 30 जनवरी को कोरोनवायरस को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। कोरोनावायरस न केवल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है बल्कि दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर रहा है। विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, व्यापार के मामले में, चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। विश्व के निर्यात का 13% और आयात का 11% केवल चीन से होता है। दुनिया के कई उद्योग अपने कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। 

पुरे विश्व में खरीदी जाने वाली लगभग एक तिहाई मशीनरी चीन से आती है, इसलिए कोरोनवायरस ने वैश्विक आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।चीन में कई कारखाने अब बंद हो गए हैं, निर्भर कंपनियों के लिए उत्पादन भी बंद हो गया है। उत्पादन में मंदी के कारण खपत में भी गिरावट आई है और इस तरह से दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है। कोरोनोवायरस फैलने के कारण लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण पर्यटन उद्योग को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कोरोना वायरस का आयात पर प्रभाव –

  • इस वायरस से हवाई यात्रा, शेयर बाज़ार, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं सहित लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
  • यह वायरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है।
  • इन दो अर्थव्यवस्थाओं, जिन्हें वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में जाना जाता है, संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है।
  • निवेशकों के बाज़ारों से बाहर निकलने के कारण शेयर बाज़ार सूचकांक में लगातार गिरावट आई है। लोग बड़ी राशि को अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र यथा- ‘सरकारी बाॅण्ड’ में लगा रहे हैं जिससे कीमतों में तेज़ी तथा उत्पादकता में कमी देखी गई है।
  • अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब अनुभव हाल ही में कोरोना वायरस के कारण महसूस किया गया, ध्यातव्य है कि अमेरिकी बाज़ार में 12% से अधिक की गिरावट आई है।
  • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि जो निवेशक ऐसे संकट के समय सामान्यत: स्वर्ण में निवेश करते हैं, इस संकट के समय उन्होंने इसका भी बहिष्कार कर दिया जिससे सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, तथा लोगों ने सरकारी गारंटी युक्त ‘ट्रेज़री बिल’ (Treasury Bills) में अधिक निवेश करना उचित समझा।
  • Apple, Nvidia, Adidas जैसी कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ये चीन के आपूर्तिकर्त्ताओं पर निर्भर हैं, इन्हें भविष्य में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव –

  • भारत जब अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में इस वायरस का केवल सतही प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा ऐसे कठिन समय में समस्या का समाधान मात्र ‘एयर लिफ्टिंग’ से संभव नहीं है।
  • यह समस्या न केवल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करेगी, अपितु यह भारत के फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।
  • निर्यात, जिसे अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है, इसमें वैश्विक मंदी की स्थिति में और गिरावट देखी जा सकती है, साथ ही निवेश में भी गिरावट आ सकती है।
  • भारतीय कंपनियाँ चीन आधारित ‘वैश्विक आपूर्ति शृंखला’ में शामिल प्रमुख भागीदार नहीं हैं, अत: भारतीय कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित नहीं होंगी।
  • दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जो कि वृहद् अर्थव्यवस्था और उच्च मुद्रास्फीति के चलते अच्छी खबर है।
  • भारत सरकार को लगातार विकास की गति का अवलोकन करने की आवश्यकता है, साथ ही चीन पर निर्भर भारतीय उद्योगों को आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करनी चाहिये।
  • कोरोना वायरस जैसी बीमारी की पहचान, प्रभाव, प्रसार एवं रोकथाम पर चर्चा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जानी चाहिये ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।

Conclusion :

वायरस जनित यह संकट किसी अन्य वित्तीय संकट से बिलकुल अलग है। अन्य वित्तीय संकटों का समाधान समय-परीक्षणित उपायों जैसे- दर में कटौती, बेल-आउट पैकेज (विशेष वित्तीय प्रोत्साहन) आदि से किया जा सकता है, परंतु वायरस जनित संकट का समाधान इन वित्तीय उपायों द्वारा किया जाना संभव नहीं है। ऑटोमोबाइल उद्योग पहले ही आर्थिक मंदी के कारण संकट में है और अब माल और सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन में कमी आ रही है। चीन से आपूर्ति में रुकावट के कारण वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है। यद्यपि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कोरोनोवायरस के सटीक प्रभाव को निर्धारित करना मुश्किल है, फिर भी यह स्पष्ट है कि यह प्रभाव लंबे समय तक रहेगा।

भारत में बेरोजगारी की समस्या

Introduction :

बेरोजगारी भारत में एक अहम मुद्दा बनता जा रहा है  जब कोई व्यक्ति काम करने योग्य हो और काम करने की इच्छा भी रखे किन्तु उसे काम का अवसर प्राप्त न हो तो वह बेरोजगार कहलाता हैं। आज हमारे देश मे लाखो लोग बेरोजगार है। ऐसा इसलिए है क्योंकि नौकरियाँ सीमित हैं और नौकरी पाने वालो की संख्या असीमित। भारत में बेरोजगारी की स्थिति एक गंभीर सामाजिक समस्या है। शिक्षा का अभाव और रोजगार के अवसरों की कमी ऐसे कारक हैं जो बेरोज़गारी का प्रमुख कारण हैं। बेरोज़गारी न केवल देश के आर्थिक विकास में बाधा डालती है बल्कि व्यक्तिगत और पूरे समाज पर भी एक साथ कई तरह के नकारात्मक प्रभाव डालती है।

2011 की जनगणना के अनुसार युवा आबादी का 20 प्रतिशत जिसमें 4.7 करोड़ पुरूष और 2.6 करोड़ महिलाएं पूर्ण रूप से बेरोजागार हैं। यह युवा 25 से 29 वर्ष की आयु समूह से हैं। यही कारण है कि जब कोई सरकारी नौकरी निकलती है तो आवेदको की संख्या लाखों मे होती हैं। तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या भारत मे बेरोजगारी का प्रमुख कारण हैं। वर्तमान शिक्षा प्रणाली भी दोषपूर्ण है। बेरोजगारी को दूर करने में जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण आवश्यक है। जिस अनुपात में रोजगार से साधन बढ़ते है, उससे कई गुना जनसंख्या में वृद्धि हो  जाती है।

  • सबसे खराब स्थिति तो वह है जब पढ़े-लिखे युवकों को भी रोजगार नहीं मिलता शिक्षित युवकों की यह बेरोजगारी देश के लिए सर्वाधिक चिन्तनीय है, क्योंकि ऐसे युवक जिस तनाव और अवसाद से गुजरते हैं, उससे उनकी आशाएं टूट जाती हैं और वे गुमराह होकर उग्रवादी, आतंकवादी तक बन जाते हैं।
  • पंजाब, कश्मीर और असम के आतंकवादी संगठनों में कार्यरत उग्रवादियों में अधिकांश इसी प्रकार के शिक्षित बेरोजगार युवक हैं। बेरोजगारी देश की आर्थिक स्थिति को डाँवाडोल कर देती है। इससे राष्ट्रीय आय में कमी आती है, उत्पादन घट जाता है और देश में राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हो जाती है।
  • बेरोजगारी से क्रय शक्ति घट जाती है, जीवन स्तर गिर जाता है जिसका दुष्प्रभाव परिवार एवं बच्चों पर पड़ता है। बेरोजगारी मानसिक तनाव को जन्म देती है जिससे समाज एवं सरकार के प्रति कटुता के भाव जाग्रत होते हैं परिणामतः व्यक्ति का सोच नकारात्मक हो जाता है और वह समाज विरोधी एवं देश विरोधी कार्य करने में भी संकोच नहीं करता।

बेरोजगारी के कारण

  • भारत में बढ़ती हुई इस बेरोजगारी के प्रमुख कारणों में से एक है— तेजी से बढ़ती जनसंख्या। पिछले पाँच दशकों में देश की जनसंख्या लगभग चार गुनी हो गई है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 125 करोड को पार कर गई है।
  • यद्यपि सरकार ने विभिन्न योजनाओं के द्वारा रोजगार को अनेक नए अवसर सुलभ कराए हैं, तथापि जिस अनुपात में जनसंख्या वृद्धि हुई है उस अनुपात में रोजगार के अवसर सुलभ करा पाना सम्भव नहीं हो सका, परिणामतः बेरोजगारों की फौज बढ़ती गई।
  • प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में बेरोजगारों की वृद्धि हो रही है। बढ़ती हुई बेरोजगारी से प्रत्येक बुद्धि-सम्पन्न व्यक्ति चिन्तित है। हमारी शिक्षा पद्धति भी दोषपूर्ण है जो रोजगारपरक नहीं है।
  • कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से लाखों स्नातक प्रतिवर्ष निकलते हैं। किन्तु उनमें से कुछ ही रोजगार पाने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। उनकी डिग्री रोजी-रोटी को जुटा पाने में उनकी सहायता नहीं कर पाती।
  • वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति ने उद्योगों का मशीनीकरण कर दिया है परिणामतः आदमी के स्थान पर मशीन से काम लिया जाने लगा। मशीन आदमी की तुलना में अधिक कुशलता से एवं अधिक गुणवत्ता से कम कीमत पर कार्य सम्पन्न कर देती है, अतः स्वाभाविक रूप से आदमी को हटाकर मशीन से काम लिया जाने लगा।
  • फिर एक मशीन सैकड़ों श्रमिकों का काम अकेले ही कर देती है। परिणामतः औद्योगिक क्षेत्रों में बेकारी पनप गई। लघु उद्योग एवं कुटीर उद्योगों की खस्ता हालत ने भी बेरोजगारी में वृद्धि की है।

बेरोजगारी दूर करने के उपाय

भारत एक विकासशील राष्ट्र है, किन्तु आर्थिक संकट से घिरा हुआ है। उसके पास इतनी क्षमता भी नहीं है कि वह अपने संसाधनों से प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार सुलभ करा सके। ऐसी स्थिति में न तो यह कल्पना की जा सकती है है कि वह प्रत्येक व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता दे सकता है और न ही यह सम्भव है, किन्तु सरकार का यह कर्तव्य अवश्य है कि वह बेरोजगारी को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए। यद्यपि बेरोजगारी की समस्या भारत में सुरसा के मुख की तरह बढ़ती जा रही है फिर भी हर समस्या का निदान तो होता ही है।

  • भारत में वर्तमान में जनसंख्या वृद्धि 2.1% वार्षिक है जिसे रोकना अत्यावश्यक है। अब ‘हम दो हमारे दो’ का युग भी बीत चुका, अब तो ‘एक दम्पति एक सन्तान’ का नारा ही महत्वपूर्ण होगा, इसके लिए यदि सरकार को कड़ाई भी करनी पड़े तो वोट बैंक की चिन्ता किए बिना उसे इस ओर सख्ती करनी होगी। यह कठोरता भले ही किसी भी प्रकार की हो।
  • देश में आधारभूत उद्योगों के पर्याप्त विनियोग के पश्चात् उपभोग वस्तुओं से सम्बन्धित उद्योगों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इन उद्योगों में उत्पादन के साथ ही वितरण परिवहन, आदि में रोजगार उपलब्ध होंगे।
  • शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाना आवश्यक है। हमारी शिक्षा पद्धति भी दोषपूर्ण है जो रोजगारपरक नहीं है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से लाखों स्नातक प्रतिवर्ष निकलते हैं। किन्तु उनमें से कुछ ही रोजगार पाने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। उनकी डिग्री रोजी-रोटी को जुटा पाने में उनकी सहायता नहीं कर पाती।

Conclusion :

धन्धों का विकास गांवों में कृषि सहायक उद्योग-धन्धों का विकास किया जाना आवश्यक है। इससे क्रषक खाली समय में अनेक कार्य कर सकेंगे। बागवानी, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य अथवा मुर्गी पालन, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, आदि ऐसे ही धन्धे है। कुटीरोद्योग एवं लघु उद्योगों के विकास से ग्रामीण एवं शहरी दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सुलभ कराए जा सकते हैं।आज स्थिति यह है कि  एक ओर विशिष्ट प्रकार के दक्ष श्रमिक नहीं मिल रहे हैं तो दूसरे प्रकार के दक्ष श्रमिकों को कार्य नहीं मिल रहा है।

बेरोजगारी की दूर करने के सरकार द्वारा अनेक प्रयास किए गए है जिनमे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम, ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना आदि कार्यक्रम शामिल है। लेकिन अभी भी कुछ सख्त कदम उठाने बाकि है। बेरोजगारी को दूर करना देश का सबसे प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। नागरिकों को अधिक नौकरियों के निर्माण के साथ ही रोजगार के लिए सही कौशल प्राप्त करने के लिए प्रयास करना चाहिए।

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