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Complaint letter to shopkeeper against defected garments

Complaint letter to shopkeeper against defected garments

Question : You are Ravi/Meenakshi of Buxer Road, West Bengal- 208546. You have ordered some readymade garments from ‘Phenix Garments’ shop in your area and have found that they are unsatisfactory (for example: wrong colour or mis fit). Write a letter to the shopkeeper telling him what is wrong and asking him what he can do to put things right.

Buxer Road

West Bengal- 208546

8th Jan, 2022

The Shopkeeper

Phenix Garments

West Bengal

Subject: Complaint against the delivered garments which are not of fine quality.

Respected Sir,

This letter is with reference to the delivery of garments ordered to you dated Jan 3, 2022. I took the delivery of the garments yesterday from your warehouse.

I feel really sorry to say that the quality of the garments is not up to the mark. The quality of the fabric is low in comparison to the sample shown to us. Moreover, a few of the pieces are mis fit. I am highly worried about the garments delivered by you as most of them are not really well. Please acknowledge this letter as to what you can do to make the garments okay and put things right.

It would be my pleasure if you could provide me a fresh lot of garments in exchange of the delivered ones as we have not accepted that garments . Kindly take necessary actions in this regard and provide the fresh consignment as early as possible.

Thanking you

Yours faithfully

Ravi/Meenakshi

Hindi Question : आप बक्सर रोड, पश्चिम बंगाल- 208546 के रहने वाले रवि/मीनाक्षी हैं। आपने अपने क्षेत्र में ‘फीनिक्स गारमेंट्स’ की दुकान से कुछ रेडीमेड कपड़ों का ऑर्डर दिया है और पाया है कि वे असंतोषजनक हैं उदाहरण के लिए: गलत रंग या फिटिंग ठीक नहीं है। दुकानदार को एक पत्र लिखकर बताएं कि कपड़ों में क्या दिक्कत है और उससे पूछें कि वह इसको ठीक करने के लिए क्या कर सकते है।

बक्सर रोड

पश्चिम बंगाल- 208546

30 दिसंबर, 2021

दुकानदार महोदय

फेनिक्स गारमेंट्स

पश्चिम बंगाल

विषय: ख़राब गुणवत्ता वाले वस्त्रों के सम्बन्ध में शिकायत पत्र

आदरणीय महोदय,

यह पत्र 25 दिसंबर, 2021 को आपको ऑर्डर किए गए कपड़ों की डिलीवरी के संदर्भ में है। मुझे कल आपके गोदाम से कपड़ों की डिलीवरी मिली थी।

मुझे यह कहते हुए खेद हो रहा है कि आपके द्वारा भेजे गए कपड़ों की गुणवत्ता सही नहीं है। हमें दिखाए गए नमूने की तुलना में इन कपड़ों की गुणवत्ता में बहुत फर्क है। इसके अलावा, कुछ कपड़ो की फिटिंग भी सही नहीं हैं। मैं आपके द्वारा भेजे गए माल (कन्साइनमेंट) को लेकर बहुत चिंतित हूं क्योंकि उनमें से अधिकांश वास्तव में ठीक नहीं हैं।

कृपया इस पत्र को स्वीकार करें और इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करें और जल्द से जल्द नया कन्साइनमेंट उपलब्ध कराएं।

धन्यवाद

सादर

रवि/मीनाक्षी

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Essays

Essay on India in Tokyo Olympics 2021 in Hindi

Essay on India in Tokyo Olympics 2021 in Hindi

Introduction :

“ओलंपिक खेलों में सबसे महत्वपूर्ण चीज जीतना नहीं बल्कि भाग लेना है” यह कथन दर्शाता है कि जीवन में जीतना ही सबकुछ नहीं होता बल्कि पूरी ताकत से लड़ना है। ओलंपिक दुनिया के बेहतरीन खेल आयोजनों में से एक है जो चार साल में एक बार आयोजित किया जाता है। इस साल ओलंपिक का आयोजन जापान के टोक्यो में हुआ । ओलंपिक खेलो के आयोजन से खिलाड़ियों को पुरे विश्व मेंअपनी प्रतिभा दिखाने और अपने देश को गौरवान्वित करने का अवसर मिलता है। यह वह मंच है जो दुनिया के विभिन्न देशों के बीच एकता को प्रोत्साहित करता है और भाईचारे को बढ़ावा देता है।

  • टोक्यो ओलंपिक का आयोजन 23 जुलाई से हुआ और 8 अगस्त 2021 को समाप्त हो गया। टोक्यो ओलंपिक में, भारत ने पिछले रियो ओलंपिक की तुलना में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है।
  • टोक्यो ओलंपिक में भारत ने सात पदक जीते हैं और पदक तालिका में 48वां स्थान हासिल किया है जो पिछले चार दशकों में कहीं बेहतर है।
  • भारत ने सात पदकों में से एक स्वर्ण हासिल किया जो भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने हासिल किया इसके अलावा दो रजत और चार कांस्य पदक भी हासिल हुए है।
  • पैरालंपिक श्रेणी में भारतीय एथलीटों ने उल्लेखनीय काम किया है। इस श्रेणी में भारत ने 19 पदक हासिल किए हैं जिसमें पांच स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य पदक शामिल हैं।
  • वैसे तो टोक्यो ओलंपिक में हमारे देश का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा, लेकिन और भी बेहतर हो सकता है अगर हमारे देश के संबंधित अधिकारी और युवा खेल के प्रति अपना नजरिया बदलें।
  • हमारे देश में क्रिकेट के प्रति लोगो का जुनून देखने लायक हैं पर अन्य खेलो के प्रति भी हमें ध्यान देने की जरुरत हैं। हलाकि भारत के खिलाडीयो ने कम संसाधनो के बावजूद भी अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन अगर इनपर बजट और बढ़ा दिया जाये तो इनके प्रदर्शन में और निखार आएगा,
  • जिससे आगामी प्रतियोगिताओ में इससे वे इससे भी ज्यादा पदक जीत सकेंगे। इसके अलावा भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप भी इस दिशा में प्रमुख कारण हैं इसलिए अब तक हमारे पास केवल 35 पदक ही हैं।

Conclusion :

वर्तमान समय में, सरकार खेलो इंडिया प्रोग्राम, फिट इंडिया और कम एंड प्ले स्कीम आदि जैसी विभिन्न योजनाओ के माध्यम से इस क्षेत्र में सराहनीय प्रयास कर रही है। लेकिन भारत की वर्तमान स्थिति को देखते हुए ये पर्याप्त नहीं है। सबसे पहले हमें खेल के प्रति अपना नजरिया बदलना होगा और इस क्षेत्र में सफलता पाने के लिए सही उम्र में सही प्रतिभा की पहचान करनी होगी। लोगों को खेल के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए सरकार को और अधिक योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करना चाहिए। इस सम्बन्ध में यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि “विश्वास ही सफलता की कुंजी है।” अगर हमे विश्वास हैं, तो हम कुछ भी हासिल कर सकते हैं !

फिट इंडिया मूवमेंट पर निबंध

Introduction :

भारत के लोगों के में फिटनेस और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए, प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती और राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 29 अगस्त, 2019 को फिट इंडिया मूवमेंट का शुभारंभ किया। फिट इंडिया मूवमेंट का उद्देश्य भारतीयों को स्वस्थ और फिट जीवन शैली के लिए फिटनेस गतिविधियों और खेल को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रधानमंत्री ने फिट इंडिया पर अपने भाषण के दौरान कहा कि फिटनेस केवल एक शब्द नहीं है बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का एक तरीका है।

हमारा राष्ट्र केवल तभी फिट होगा जब इसके प्रत्येक नागरिक फिट होगे। उन्होंने कहा, “मैं आपको फिट देखना चाहता हूं और आपको फिटनेस के प्रति जागरूक करना चाहता हूं और हम एक साथ फिट इंडिया के लक्ष्य को पूरा करेंगे ।” इस आंदोलन का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ भविष्य के लिए अधिक सक्रिय जीवन शैली के लिए प्रोत्साहित करना है। लोगों को नियमित रूप से व्यायाम करने, मनोरंजक खेल खेलने और फिट रहने के लिए योग करने के लिए कहा गया।

  • बदलते समय के साथ-साथ भारत के लोगों के जीवन स्तर पर भी बड़ा बदलाव आया है।लोगों का रहन-सहन, खान-पान व जीवन जीने के तौर तरीके पहले जैसे नहीं रहे।
  • असमय भोजन,जंक फ़ूड,शाररिक व्यायाम न करना या अन्य वजहों से कई बीमारियें हो रही हैं।जिसने बड़े,बुजुर्गों व युवाओं को ही नहीं,यहां तक कि छोटे-छोटे बच्चों को भी अपनी की चपेट में ले लिया हैं।
  • आजकल छोटे-छोटे बच्चों को भी डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर,दिल की बीमारी व मोटापे आदि की शिकायत हो रही है।लेकिन इनमें से कई बीमारियों को हम अपने जीवन में छोटे-छोटे बदलाव कर दूर कर सकते हैं।

वैश्विक स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार

  • विकसित देशों में गैर-संक्रामक बीमारियां औसतन 55 वर्ष की उम्र में लोगों में देखी जा रही हैं।जबकि भारत में यह अधिकतर 45 वर्ष की उम्र में ही नागरिकों को अपनी चपेट में ले रही हैं।
  • भारत में दिल के रोगियों की संख्या लगभग 5.45 करोड़ हैं।जबकि 13.5 करोड़ लोग मोटापे का शिकार है।
  • भारत में हर 10 में से एक व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित है।जबकि हर पांचवें व्यक्ति को हाइपरटेंशन की समस्या है।इस वक्त देश में 24.5% पुरुष तथा 20% महिलाएं हाइपरटेंशन का शिकार हैं।और भारत में लगभग 1.63 करोड़  मौतों हाइपरटेंशन की वजह से होती है।
  • भारत में पिछले दो दशकों में दो तिहाई गैर-संक्रामक रोग के मरीज बढ़े हैं।1990 में देश में कुल मौतों से 37.09% गैर संक्रामक रोगों से हो रही थी।लेकिन आज यह 62% तक पहुंच गई है।
  • भारत में कुल आबादी का लगभग 10% आबादी मानसिक रोगी है।यानि किसी ने किसी मानसिक परेशानी की गिरिफ्त में है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने फिट इंडिया अभियान (Fit India Movement) को शुरू करते हुए लोगों को स्वस्थ व फिट रहने के कुछ मन्त्र दिये, जैसे

  • बॉडी फिट है तो माइंड हिट।
  • फिटनेस एक शब्द नहीं, बल्कि स्वस्थ और समृद्ध जीवन की एक जरूरी शर्त है।
  • इसमें जीरो इन्वेस्टमेंट(Investment) है।लेकिन Return असीमित है।
  • जो लोग सफल है उनका एक ही मंत्र है फिटनेस पर उनका फोकस।
  • सफलता और फिटनेस का रिश्ता भी एक दूसरे से जुड़ा है।खेल,फिल्म, हर क्षेत्र के हीरो फिट रहते हैं।
  • किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए मानसिक और शारीरिक फिटनेस का होना जरूरी है
  • शरीर के लिए लिफ्ट या एस्केलेटर्स के बजाय बल्कि सीढ़ी का उपयोग करना सही होता है।लेकिन यह तभी हो पाएगा जब आप फिट हैं।
  • किसी भी क्षेत्र के व्यक्ति को मेंटल और फिजिकल तौर पर फिट होना जरूरी है।चाहे बोर्डरूम हो या बॉलीवुड।जो फिट है वह आसमान छूता है।
  • आज Lifestyle Diseases, Lifestyle Disorder की वजह से हैं।लेकिन Lifestyle Disorder को हम Lifestyle में बदलाव करके ठीक कर सकते हैं।
  • कुछ दशक पहले तक एक सामान्य व्यक्ति 8-10 किलोमीटर तक पैदल चल ही लेता था।कुछ ना कुछ फिटनेस के लिए करता ही था।लेकिन आज नई टेक्नोलॉजी की वजह से नए साधन बाजार में आए और व्यक्ति का पैदल चलना काफी कम हो गया।
  • भारत सरकार Fit India Movement को सफल बनाने के लिए कई विभागों के साथ मिलकर काम करेंगी।इनमें खेल मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय आदि प्रमुख हैं। 
  • फिट इंडिया अभियान का मुख्य मकसद स्वास्थ्य के प्रति देश के लोगों को जागरूक करना है।इसीलिए इस अभियान को भी सरकार स्वच्छता अभियान की ही तरह आगे बढ़ाएगी। 

Conclusion :

अधिकांश रोगों का मूल कारण जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां हैं और ऐसी कई बीमारियां हैं जिन्हें हमारी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके दूर किया जा सकता है। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने पहले ही अपने अभियानों के साथ स्वस्थ और फिट राष्ट्र के लिए मार्ग प्रशस्त करने का लक्ष्य रखा है। फिट इंडिया मूवमेंट को देश के हर कोने तक पहुंचना चाहिए। हमें इस आंदोलन की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए और फिट इंडिया को सफल बनाने का प्रयास करना चाहिए।

समाज के प्रति युवाओं की भूमिका पर निबंध

Introduction :

युवाओं को प्रत्येक देश की सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति माना जाता है क्योंकि उनकी बुद्धिमता और कड़ी मेहनत देश को सफलता और समृद्धि की राह पर ले जाती है। जैसा कि प्रत्येक नागरिक का राष्ट्र के प्रति कुछ उत्तरदायित्व होता है, वैसे ही युवाओं का भी है। प्रत्येक राष्ट्र के निर्माण में इनका बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान होता हैं। युवा एक ऐसे व्यक्ति को कहते है जिसकी उम्र 15 से 30 वर्ष के बीच में होती है। चूंकि युवा हर समाज की रीढ़ होते हैं और इसलिए वे समाज के भविष्य का निर्धारण करते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अन्य सभी आयु वर्ग जैसे कि बच्चे, किशोर, मध्यम आयु वर्ग और वरिष्ठ नागरिक युवाओं पर भरोसा करते हैं और उनसे बहुत उम्मीदें रखते हैं।

समाज में युवाओं पर अत्यधिक निर्भरता के कारण, हम सभी युवाओं की हमारे परिवारों, समुदायों और देश के भविष्य के प्रति बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ है। युवा अपने नेतृत्व, नवाचार और विकास कौशल द्वारा समाज की वर्तमान स्थिति को नवीनीकृत कर सकते हैं। युवाओं से देश की वर्तमान तकनीक, शिक्षा प्रणाली और राजनीति में बदलाव लाने की उम्मीद की जाती है। उनपर समाज में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का भी उत्तरदायित्व है। यही कारण है कि देश के विकास के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी की अत्यधिक आवश्यकता होती है।

  • हमारे राष्ट्र के लिए कई परिवर्तन, विकास, समृद्धि और सम्मान लाने में युवा सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं। इस सबका मुख्य उद्देश्य उन्हें एक सकारात्मक दिशा में प्रशिक्षित करना है।
  • युवा पीढ़ी के उत्थान के लिए कई संगठन काम कर रहे हैं क्योंकि वे बड़े होकर राष्ट्र निर्माण में सहायक बनेंगे। गरीब और विकासशील देश अभी भी युवाओं के समुचित विकास और शिक्षण में पिछड़े हुए हैं।
  • एक बच्चे के रूप में प्रत्येक व्यक्ति, अपने जीवन में कुछ बनने का सपने देखता है, बच्चा अपनी शिक्षा पूरी करता है और कुछ हासिल करने के लिए कुछ कौशल प्राप्त करता है।
  • युवाओं में त्वरित शिक्षा, रचनात्मकता, कौशल होता है। वे हमारे समाज और राष्ट्र में परिवर्तन लाने की शक्ति रखते हैं।
  • युवा उस चिंगारी के साथ बड़ा होता है, जो कुछ भी कर सकता है।
  • समाज में कई नकारात्मक कुरीतियाँ और कार्य किए जाते हैं। युवाओं में समाज परिवर्तन और लिंग तथा सामाजिक समानता की अवधारणा को लाने की क्षमता है।
  • समाज में व्याप्त कई मुद्दों पर काम करके युवा दूसरों के लिए एक आदर्श बन सकते हैं।

युवा की भूमिका

  • युवाओं को राष्ट्र की आवाज माना जाता है। युवा राष्ट्र के लिए कच्चे माल या संसाधन की तरह होते हैं। जिस तरह के आकार में वे हैं, उनके उसी तरीके से उभरने की संभावना होती है।
  • राष्ट्र द्वारा विभिन्न अवसरों और सशक्त युवा प्रक्रियाओं को अपनाया जाना चाहिए, जो युवाओं को विभिन्न धाराओं और क्षेत्रों में करियर बनाने में सक्षम बनाएगा।
  • युवा लक्ष्यहीन, भ्रमित और दिशाहीन होते हैं और इसलिए वे मार्गदर्शन और समर्थन के अधीन होते हैं, ताकि वे सफल होने के लिए अपना सही मार्ग प्रशस्त कर सकें।
  • युवा हमेशा अपने जीवन में कई असफलताओं का सामना करते हैं और हर बार ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि एक पूर्ण अंत है, लेकिन वो फिर से कुछ नए लक्ष्य के साथ खोज करने के लिए एक नए दृष्टिकोण के साथ उठता है।
  • एक युवा मन प्रतिभा और रचनात्मकता से भरा हुआ है। यदि वे किसी मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते हैं, तो परिवर्तन लाने में सफल होते हैं।

भारत में युवाओं की प्रमुख समस्याएं

  • कई युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान नहीं की जाती है; यहां तक ​​कि कई लोग गरीबी और बेरोजगारी तथा अनपढ़ अभिभावकों के वजह से स्कूलों नहीं जा पाते हैं। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बच्चे को स्कूल जाने और उच्च शिक्षा हासिल करने का मौका मिले।
  • बालिका शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि देश में कई ऐसे हिस्से हैं जहां लड़कियां स्कूल जाने और पढ़ाई से वंचित है। लेकिन युवा, लड़के और लड़कियों दोनों का गठन करते हैं। जब समाज का एक वर्ग उपेक्षित हो, तो समग्र विकास कैसे हो सकता है?
  • अधिकांश युवाओं को गलत दिशा में खींच लिया गया है; उन्हें अपने जीवन और करियर को नष्ट करने से रोका जाना चाहिए।
  • कई युवाओं में कौशल की कमी देखी गयी है, और इसलिए सरकार को युवाओं के लिए कुछ कौशल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि वे आगे एक या उससे अधिक अवसरों से लाभान्वित हो सकें।
  • भारत में अधिकांश लोग गांवों में रहते हैं, इसलिए शिक्षा और अवसरों की सभी सुविधाओं तक उनकी उचित पहुंच नहीं है।
  • कुछ युवाओं द्वारा वित्तीय संकट और सामाजिक असमानता की समस्या होती है।
  • ऐसे कई बच्चे हैं जो प्रतिभा के साथ पैदा हुए हैं, लेकिन अपर्याप्त संसाधनों के चलते, वे अपनी प्रतिभा के साथ आगे नहीं बढ़ सके।
  • उनमें से कई को पारिवारिक आवश्यकताओं के कारण पैसा कमाने के लिए अपनी प्रतिभा से हटकर अन्य काम करना पड़ता है, लेकिन उन्हें उस काम से प्यार नहीं है जो वे कर रहे हैं।
  • बेरोजगारी की समस्या युवाओं की सबसे बड़ी समस्या है।
  • जन्मजात प्रतिभा वाले कुछ बच्चे होते हैं, लेकिन संसाधन की कमी या उचित प्रशिक्षण नहीं होने के कारण, वे अपनी आशा और प्रतिभा भी खो देते हैं।
  • इस प्रकार, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बच्चे को उचित शिक्षा की सुविधा प्रदान की जाए। प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए। युवाओं को कई अवसर प्रदान किया जाना चाहिए। उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और राजनीतिक मामलों में समान रूप से भाग लेना चाहिए।
  • कुशल समूहों को काम प्रदान करने के लिए कई रोजगार योजनाएं चलानी चाहिए।

Conclusion :

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किस क्षेत्र में प्रगति करना चाहते हैं क्योंकि हर जगह युवाओं की आवश्यकता है। हमारे युवाओं को अपनी आंतरिक शक्तियों और समाज में उनकी भूमिका के बारे में पता होना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर किसी को खुद को योग्य साबित करने के लिए समान मौका मिल सके। युवाओं के पास एक अलग दृष्टिकोण है जो पुरानी पीढ़ियों के पास नहीं था जिसके द्वारा वे हमारे देश में विकाश और समृद्धि ला सकते है।

आत्मनिर्भर भारत पर निबंध

Introduction :

आपदा को अवसर में बदलने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की गयी। पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज देने की भी घोषणा की है जो कि भारत की जीडीपी का 10% है।  इस पैकेज का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में तरलता लाकर आत्मनिर्भर भारत मिशन के उद्देश्यों को पूरा करना है। इस योजना का उद्देश्य 130 करोड़ भारतवासियों को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि देश का हर नागरिक संकट की इस घड़ी में कदम से कदम मिलाकर चल सके और कोविड-19 की महामारी को हराने में अपना योगदान दे सके।

कोरोना वायरस के कारण पूरे देश के लॉक डाउन की स्थिति चल रही है जिसका सबसे ज्यादा बुरा असर देश के सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों , श्रमिकों ,मजदूरों और किसानो पर पड़ रहा है इन सभी नागरिको को लाभ पहुंचाने के लिए हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने देश के सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों, श्रमिकों ,मजदूरों और किसानो को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आर्थिक पैकेज का ऐलान कर दिया।

  • पूरे विश्व मे केवल भारत ही ऐसा देश है जहां सबसे अधिक प्राकृतिक संसाधन पाये जाते है, जो कि बिना किसी देश की मदद से जीवन से लेकर राष्ट्र निर्माण की वस्तुएं बना सकता है और आत्मनिर्भर के सपने को पूरा कर सकता है।
  • हालाकि भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सपना नया है। यह सपना महात्मा गांधी ने आजादी के बाद ही स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया था, पर गरीबी और भुखमरी के कारण उनका सपना साकार न हो सका।
  • करोना महामारी के कारण पिछले कई महीनों से सारा विश्व बन्द पड़ा है, जिसके कारण छोटे लोगों से लेकर पूंजीपतियों तक को भारी नुकसान और परेशानीयों का सामना करना पड रहा है।
  • खासतौर से हमारे छोटे और मध्यम वर्ग के परिवारों को कमाने खाने की समस्या काफी बढ़ गयी है। कोरोना महामारी के कारण किसी भी देश से सामानों का आदान-प्रदान बन्द है।
  • इसलिए मई के महीने मे तालाबन्दी के दौरान हमारे प्रधानमंत्री ने देश को आत्मनिर्भर बनने का आह्वाहन किया है। उन्होने “लोकल फॉर वोकल” का भी नारा दिया। जिसका अर्थ है कि लोकल मे बनी वस्तुओं का उपयोग और उनका प्रचार करना और एक पहचान के रुप मे आगे बढ़ना।
  • महामारी के दौरान ही चीन ने भारत के डोकलाम सीमा क्षेत्र मे कब्जा करने की कोशिश की, जिसमे भारत के लगभग 20 जवान शहीद हो गए। सीमा के इस विवाद मे भारत के सैनिकों की क्षति के कारण देश के हर कोने से चीनी सामान को बैन करने की माँग के साथ ही, चीनी सामानो को बन्द कर दिया गया और प्रधानमंत्री ने सारे देश को आत्मनिर्भर बनने का मंत्र दिया। उन्होने कहा कि आत्मनिर्भर बनकर घरेलु चीजों का इस्तेमाल करें ताकि हमारा राष्ट्र मजबूती के साथ खड़ा हो सके।
  • पिछले कुछ महीनों से विश्व कोरोना वायरस महामारी के कारण बन्द पड़ा है। इसके कारण सारे विश्व मे वित्तीय संकट के बादल छाएं है।
  • इसी कड़ी मे भारत ने खुद को आत्मनिर्भर बनाने और राष्ट्र को आगे ले जाने फैसला किया है। विश्व बन्दी के कारण सारे विश्व के उत्पादों पर भारी असर हुआ है, इसलिए भारत ने स्वयं को आत्मनिर्भर बनाकर देश की तरक्की पर अपना कदम आगे बढ़ाया है।

आत्मनिर्भर भारत फायदे

  • आत्मनिर्भर भारत से हमारे देश मे उद्योगों की संख्या मे वृद्धि होगी।
  • हमारे देश को और देशो से सहायता कम लेनी होगी।
  • हमारे देश मे रोजगार के अधिक अवसर पैदा होगें।
  • इससे देश मे बेरोजगारी के साथ-साथ गरीबी से मुक्ति मे सहायता मिलेगी।
  • भारत की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हो सकेगी।
  • आत्मनिर्भर बनने के साथ भारत चीजों का भंड़ारण काफी अधिक कर सकता है।
  • देश आगे चलकर अन्य देशों से आयात कम और निर्यात ज्यादा कर सकेगा।
  • आपदा की स्थिति मे भारत बाहरी देशों से मदद की मांग कम होगी।
  • देश मे स्वदेशी वस्तुओं का निर्माण कर देश की तरक्की को शीर्ष तक ले जाने मे सहायता मिलेगी।

आत्मनिर्भर भारत की घोषणा के तहत भारत के प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता के लिए पांच महत्वपूर्ण चीजे बाताई है।

  1. इंटेंट यानी इरादा करना।
  2. इन्क्लूजन या समावेश करना।
  3. निवेश या इन्वेस्टमेन्ट करना।
  4. इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी सार्वजनिक ढ़ाचे को मजबूत करना।
  5. नयी चीजों का खोज करना।
  • इस महामारी के दौरान कुछ हद तक हमने आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया है और बिना अन्य देश की मदद से इस महामारी से लड़ने के लिए हमने देश मे ही चीजों का निर्माण करना शुरु कर दिया है।
  • जहां हमने पीपीई किट, वेन्टिलेटर, सेनेटाइजर और के.एन-95 मास्क का निर्माण अपने देश मे ही शुरु कर दिया है। पहले यही चीजे हमे विदेशों से मंगानी पड़ती थी। इन सभी चीजों का निर्माण भारत मे करना ही आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ने का पहला कदम है। इनके उत्पादन से हमे अन्य देशों की मदद भी नही लेनी पड़ रही है, और भारत आत्मनिर्भरता की ओर आगे कदम बढ़ा रहा है।
  • आत्मनिर्भरता की ओर भारत ने पीपीई किट, वैन्टिलेटर इत्यादि चीजों को बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर  अपना पहला कदम बढ़ा दिया है और हमे भी इसमे अपना योगदान देकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करना होगा।
  • हमे ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने की आवश्यकता है। जिससे कि हम अपने देश को आत्मनिर्भर और अपने राष्ट्र को आगे बढ़ाने मे अपना योगदान कर सके।

Conclusion :

आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा देश के किसानों की आय को दोगुना करने और कोविड-19 की आपदा के मद्देनजर किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए एक बेहतर कदम है। यह मिशन हमारे देश को आयात निर्भरता में कमी करने एवं वैश्विक बाजारों में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के महत्व पर भी जोर देगा। इस अभियान के अंतर्गत देश के मजदूर श्रमिक किसान लघु उद्योग कुटीर उद्योग मध्यमवर्गीय उद्योग सभी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जो कि भारत के गरीब नागरिको की आजीविका का साधन है।

भारत में बेरोजगारी की समस्या

Introduction :

बेरोजगारी भारत में एक अहम मुद्दा बनता जा रहा है  जब कोई व्यक्ति काम करने योग्य हो और काम करने की इच्छा भी रखे किन्तु उसे काम का अवसर प्राप्त न हो तो वह बेरोजगार कहलाता हैं। आज हमारे देश मे लाखो लोग बेरोजगार है। ऐसा इसलिए है क्योंकि नौकरियाँ सीमित हैं और नौकरी पाने वालो की संख्या असीमित। भारत में बेरोजगारी की स्थिति एक गंभीर सामाजिक समस्या है। शिक्षा का अभाव और रोजगार के अवसरों की कमी ऐसे कारक हैं जो बेरोज़गारी का प्रमुख कारण हैं। बेरोज़गारी न केवल देश के आर्थिक विकास में बाधा डालती है बल्कि व्यक्तिगत और पूरे समाज पर भी एक साथ कई तरह के नकारात्मक प्रभाव डालती है।

2011 की जनगणना के अनुसार युवा आबादी का 20 प्रतिशत जिसमें 4.7 करोड़ पुरूष और 2.6 करोड़ महिलाएं पूर्ण रूप से बेरोजागार हैं। यह युवा 25 से 29 वर्ष की आयु समूह से हैं। यही कारण है कि जब कोई सरकारी नौकरी निकलती है तो आवेदको की संख्या लाखों मे होती हैं। तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या भारत मे बेरोजगारी का प्रमुख कारण हैं। वर्तमान शिक्षा प्रणाली भी दोषपूर्ण है। बेरोजगारी को दूर करने में जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण आवश्यक है। जिस अनुपात में रोजगार से साधन बढ़ते है, उससे कई गुना जनसंख्या में वृद्धि हो  जाती है।

  • सबसे खराब स्थिति तो वह है जब पढ़े-लिखे युवकों को भी रोजगार नहीं मिलता शिक्षित युवकों की यह बेरोजगारी देश के लिए सर्वाधिक चिन्तनीय है, क्योंकि ऐसे युवक जिस तनाव और अवसाद से गुजरते हैं, उससे उनकी आशाएं टूट जाती हैं और वे गुमराह होकर उग्रवादी, आतंकवादी तक बन जाते हैं।
  • पंजाब, कश्मीर और असम के आतंकवादी संगठनों में कार्यरत उग्रवादियों में अधिकांश इसी प्रकार के शिक्षित बेरोजगार युवक हैं। बेरोजगारी देश की आर्थिक स्थिति को डाँवाडोल कर देती है। इससे राष्ट्रीय आय में कमी आती है, उत्पादन घट जाता है और देश में राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हो जाती है।
  • बेरोजगारी से क्रय शक्ति घट जाती है, जीवन स्तर गिर जाता है जिसका दुष्प्रभाव परिवार एवं बच्चों पर पड़ता है। बेरोजगारी मानसिक तनाव को जन्म देती है जिससे समाज एवं सरकार के प्रति कटुता के भाव जाग्रत होते हैं परिणामतः व्यक्ति का सोच नकारात्मक हो जाता है और वह समाज विरोधी एवं देश विरोधी कार्य करने में भी संकोच नहीं करता।

बेरोजगारी के कारण

  • भारत में बढ़ती हुई इस बेरोजगारी के प्रमुख कारणों में से एक है— तेजी से बढ़ती जनसंख्या। पिछले पाँच दशकों में देश की जनसंख्या लगभग चार गुनी हो गई है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 125 करोड को पार कर गई है।
  • यद्यपि सरकार ने विभिन्न योजनाओं के द्वारा रोजगार को अनेक नए अवसर सुलभ कराए हैं, तथापि जिस अनुपात में जनसंख्या वृद्धि हुई है उस अनुपात में रोजगार के अवसर सुलभ करा पाना सम्भव नहीं हो सका, परिणामतः बेरोजगारों की फौज बढ़ती गई।
  • प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में बेरोजगारों की वृद्धि हो रही है। बढ़ती हुई बेरोजगारी से प्रत्येक बुद्धि-सम्पन्न व्यक्ति चिन्तित है। हमारी शिक्षा पद्धति भी दोषपूर्ण है जो रोजगारपरक नहीं है।
  • कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से लाखों स्नातक प्रतिवर्ष निकलते हैं। किन्तु उनमें से कुछ ही रोजगार पाने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। उनकी डिग्री रोजी-रोटी को जुटा पाने में उनकी सहायता नहीं कर पाती।
  • वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति ने उद्योगों का मशीनीकरण कर दिया है परिणामतः आदमी के स्थान पर मशीन से काम लिया जाने लगा। मशीन आदमी की तुलना में अधिक कुशलता से एवं अधिक गुणवत्ता से कम कीमत पर कार्य सम्पन्न कर देती है, अतः स्वाभाविक रूप से आदमी को हटाकर मशीन से काम लिया जाने लगा।
  • फिर एक मशीन सैकड़ों श्रमिकों का काम अकेले ही कर देती है। परिणामतः औद्योगिक क्षेत्रों में बेकारी पनप गई। लघु उद्योग एवं कुटीर उद्योगों की खस्ता हालत ने भी बेरोजगारी में वृद्धि की है।

बेरोजगारी दूर करने के उपाय

भारत एक विकासशील राष्ट्र है, किन्तु आर्थिक संकट से घिरा हुआ है। उसके पास इतनी क्षमता भी नहीं है कि वह अपने संसाधनों से प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार सुलभ करा सके। ऐसी स्थिति में न तो यह कल्पना की जा सकती है है कि वह प्रत्येक व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता दे सकता है और न ही यह सम्भव है, किन्तु सरकार का यह कर्तव्य अवश्य है कि वह बेरोजगारी को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए। यद्यपि बेरोजगारी की समस्या भारत में सुरसा के मुख की तरह बढ़ती जा रही है फिर भी हर समस्या का निदान तो होता ही है।

  • भारत में वर्तमान में जनसंख्या वृद्धि 2.1% वार्षिक है जिसे रोकना अत्यावश्यक है। अब ‘हम दो हमारे दो’ का युग भी बीत चुका, अब तो ‘एक दम्पति एक सन्तान’ का नारा ही महत्वपूर्ण होगा, इसके लिए यदि सरकार को कड़ाई भी करनी पड़े तो वोट बैंक की चिन्ता किए बिना उसे इस ओर सख्ती करनी होगी। यह कठोरता भले ही किसी भी प्रकार की हो।
  • देश में आधारभूत उद्योगों के पर्याप्त विनियोग के पश्चात् उपभोग वस्तुओं से सम्बन्धित उद्योगों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इन उद्योगों में उत्पादन के साथ ही वितरण परिवहन, आदि में रोजगार उपलब्ध होंगे।
  • शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाना आवश्यक है। हमारी शिक्षा पद्धति भी दोषपूर्ण है जो रोजगारपरक नहीं है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से लाखों स्नातक प्रतिवर्ष निकलते हैं। किन्तु उनमें से कुछ ही रोजगार पाने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। उनकी डिग्री रोजी-रोटी को जुटा पाने में उनकी सहायता नहीं कर पाती।
  • धन्धों का विकास गांवों में कृषि सहायक उद्योग-धन्धों का विकास किया जाना आवश्यक है। इससे क्रषक खाली समय में अनेक कार्य कर सकेंगे। बागवानी, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य अथवा मुर्गी पालन, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, आदि ऐसे ही धन्धे है।
  • कुटीरोद्योग एवं लघु उद्योगों के विकास से ग्रामीण एवं शहरी दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सुलभ कराए जा सकते हैं।
  • आज स्थिति यह है कि एक ओर विशिष्ट प्रकार के दक्ष श्रमिक नहीं मिल रहे हैं तो दूसरे प्रकार के दक्ष श्रमिकों को कार्य नहीं मिल रहा है।

Conclusion :

बेरोजगारी की दूर करने के सरकार द्वारा अनेक प्रयास किए गए है जिनमे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम, ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना आदि कार्यक्रम शामिल है। लेकिन अभी भी कुछ सख्त कदम उठाने बाकि है। बेरोजगारी को दूर करना देश का सबसे प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। नागरिकों को अधिक नौकरियों के निर्माण के साथ ही रोजगार के लिए सही कौशल प्राप्त करने के लिए प्रयास करना चाहिए।

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Essays

Essay on India in Tokyo Olympics 2021

Essay on India in Tokyo Olympics 2021

Introduction :

“The most important thing in the Olympic Games is not winning but taking part”. This statement signifies that the essential thing in life is not conquering but fighting well. Olympic is one of the finest sport events in the world which  is organize once in four years. This year the Olympic held in Tokyo in Japan. Every Olympic event provides opportunities to the players to show their talent to the world and make their nation proud. It is the platform which encourage unity and promote brotherhood among different nations of the world.

  • Tokyo Olympic began from 23rd July and ended on 8th August 2021. In Tokyo Olympic, India has performed quite well as compare to the previous Rio Olympic.
  • In Tokyo Olympic India has grabbed seven medals and secured 48th rank in medal tally which is far better in last four decades.
  • In seven medals there is one gold which is secured by Javelin thrower Neeraj Chopra. Two silver medals and four bronze medals.
  • In Paralympic category Indian athletes have done remarkable job. In this category India has secured 19 medal which consist of five Gold, eight Silver and six Bronze medals.
  • Although, the performance of our country in Tokyo Olympics is quite well but it can be much better if the concerned authorities and the youth of our country change their outlook towards sports.
  • We are fully obsessed with the cricket and don’t  give attention to any other sports.
  • Apart from that there is a lack of proper infrastructure, funds are not sufficient to meet the expenses, food and nutrition are key problems faced by our athletes in these days.
  • Corruption and political interference play a major role towards India’s low medal count that’s why till now we only have 35 medals.

Conclusion :

Presently, the government is doing well in this field by taking various initiatives like Khelo India Programme, Fit India and Come & Play Scheme etc. But it is not enough as compared to the present situation in India. First of all we need to change our attitude towards sports and identify the right talent at the right age to get success in this field. Government should implement more schemes and programmes to aware and realize the people about its importance. It is true that “ Belief is the key to success.” If we believe, we can achieve!

Essay on Fit India Movement – A step towards healthiness

Introduction :

To promote fitness and health among the people of India, Prime Minister Narnedra Modi, launched Fit India Movement on August 29, 2019, which is also the National Sports Day and marks the birth anniversary of famous Indian hockey legend, Major Dhyan Chand. The Fit India Movement aims to encourage Indians to include fitness activities and sports in their daily lives to pave way for a healthy and fit lifestyle. India is a country full of youth, so if the youth here takes right direction, then something constructive can be done, to be successful in life, it is very important that all those young people of our country both from body and mind Be healthy.

  • It is clear from the reports of the World Health Organization and the Ministry of Health of the Government of India that the number of diseases in the country is increasing at a rapid pace.
  • The Prime Minister during his speech on Fit India said that fitness is not just a word but a way to lead a healthy life. A nation will only become fit when each citizen becomes fit.
  • He also said, “I want to see you fit and make you fitness conscious and we will together set the goals for Fit India and the country as a whole.”
  • The movement aims at encouraging people towards a more active lifestyle for a healthy future. People were asked to exercise regularly, play recreational sports and perform yoga to stay fit.
  • The root cause of most lifestyle diseases are lifestyle disorders and there are many diseases that can be overcome by making small changes in our lifestyle.
  • Lifestyle diseases like diabetes and hypertension are increasing in India. Foreign nations such as the US, UK, Germany, China and Australia have already set targets to pave way for healthier and fitter nations with their own campaigns. 

Conclusion :

Through the Fit India Movement, there is an effort to take this country to a new side, as people remain fit, their ability to work will increase even more and eventually our country will grow faster. Hence, Fit India should be seen as a household movement, a daily routine. Fit India Movement should reach each and every corner of the country. We should take the responsibility of the movement.

Essay on Strategy For New India at 75

Introduction :

New India @ 75 is a path breaking initiative which envisions how India should be in her 75th year of Independence and seeks to bring together all stakeholders including the industry, government, institutions, community groups and individuals to translate the vision into a reality. ‘Strategy for New India’ by NITI Aayog replaced five year plans with an aim to accelerate economic growth to 9 to 10% and to achieve UN sustainable development goals. The 41 Chapters under the documents have been merged under four sessions – Drivers, infrastructure, inclusion and governance.

  • India is on its way to celebrate its 75th independence day on 15th August 2022. The past 75 years took India from a poverty stricken, uneducated country to become one of the greatest pioneers in space technology & pharmaceuticals.
  • However, even after 75 years some issues are left out of fixing or are being handled in a careless manner. India is set to become a 5 trillion dollar economy by 2025 but its per capita income is among world’s lowest.
  • Half of the population is working in agriculture and allied activities but the income of farmers is extremely low to a point that they are forced to commit suicides.
  • India is 3rd largest economy in the world but its tax to GDP ratio is just half of the OECD countries. In addition to that, Infrastructure will play a huge role.
  • We are in dire need of private railways, Buses with IT enabled services to make our country a truly digital India. Also, India needs to include all its citizens into healthcare services via Ayushman Bharat Scheme, educating them via Sarv Shiksha Abhiyan, and provide them shelter via PM Awas Yojna.
  • Moreover, to make the above targets, we need strong and effective governance. The focus is to improve the policy environment so that the contribution of private investors and stakeholders can be diverted to mainstream to achieve the goals set out for new India 2022.
  • Alarming features such as Mining, River valley projects, infrastructure projects, tourism and agriculture are included in this strategy.
  • With all this we have to limit environmental damage, there is an urgent need to conserve non-forest ecosystems such as grassland, wetlands, mountains and deserts.
  • We need to learn from the many alternatives initiatives for food, water, energy etc, which shows the ways to more just and sustainable livelihoods and ways of living.

Conclusion :

Being one of the most populous country of the world, it is a little bit tough but not impossible to change. We need proper utilization of human capital in the direction of all round development of our country. Jan Bhagidari, balanced development, public private partnership lies at the core of the strategy for New India initiative. If the above problems are addressed and vision of ‘strategy for new India @ 75’ is fulfilled, India can truly evolve as a superpower.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs development at the cost of environment degradetion

Introduction :

“Environment is no one’s property to destroy, it is everyone’s responsibility to protect.” These words of Mohith Agadi reflects the irrational utilization of resources for development  activities without considering the environment. Development is a process that leads to positive change in physical, environmental, economic and social aspects of our life. Day by day the issue of environment is increasing as we are degrading our environment in the name of economic growth.

  • As a result we are facing serious repercussions like climate change, global warming, flood, cyclones and ozone layer depletion etc.
  • According to the world bank report higher level of economic growth imposed Rs 3.75 trillion worth of environment damage cost.
  • Rapid industrialization and urbanization are inevitable to bring economic development, to increase the per capita income and ease of living.
  • But these activities have caused negative environmental consequences such as pollution, disasters, forced migration, imbalanced weather phenomena etc.
  • More urbanization and higher industrial setups are being encroached on the forest land. Now-a-days micro plastics are contaminating the water resources very badly.
  • Subsequent use of private vehicle by each family member had supplemented their contribution to pollution.
  • According to environment performance index released by world economic forum, India ranks 168th out of 180 countries, which was the worst in the south Asian countries.
  • Water scarcity and extreme weather phenomena and the regular occurrence of floods and droughts could further strain the economy which is already reeling under pressure due to Covid-19.
  • Government has taken many initiatives to conserve the environment such as Biological diversity Act, 2002, Project Tiger 1972, World summit on sustainable development, Rio de janerio summit 1992, Project elephant 1992 etc.
  • At ground level, efforts made by people can further succeed these programmes. Moreover there should be the maximum recycling and reuse of water, improvement in energy efficient machines is the most effective measure in industries.

Conclusion :

Balancing economic development and environmental sustainable is the need of the hour, to bring this sustainable development in mainstream, united nations launched the 2030 Agenda for Sustainable Development Goals (SDGs). Countries must switch their development plans to the sustainable plans. Thus balancing economic development and environment protection requires a refocusing of economic activity not towards producing less but producing differently.

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Essay on Strategy For New India at 75 Vs Positive Effects of Coronavirus on Environment

Introduction :

Covid-19 virus has become worldwide disease and almost all nations of the world are facing it. Due to which population of the world is forced to live inside their home. Business activities in the country also affected due to corona virus. As we all know coronavirus has taken life of a lot of people all across the globe. To prevent the spread of COVD-19, governments of different nations are taking multiple steps to control the spread of this virus. As far as our environment is concerned, it is enjoying the positive impact of this virus.

  • Today, when the production of almost everything is slowed down and factories are not as active as they used to be, the emission of smoke is also reduced which has resulted in clear sky.
  • Not only this, the use of vehicles on road is reduced. All this have contributed towards lowered CO2-emissions. The emission of nitrogen dioxide has also reduced.
  • This indicates that air has become more pure and we can breathe in pure air. With the increase in number of flights, not only the air traffic increases but the quality of air also getting worse, but now the scenario is changed.
  • To reduce the risk of coronavirus, companies have asked workers to work from home. This has reduced vehicles on road. In addition to this, the consumption of plastic has also reduced as people no longer have tea or coffee in disposable glasses.

Conclusion :

In this competitive era where we have to follow a hectic schedule, we have never had thought about the way we are treating the environment. However, now due to lockdown we are forced to stay at home, we have ample time to think on our actions. The coronavirus has had catastrophic impacts on mankind however, it has surely given the environment a chance to self-heal and restore its beauty again.

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Essay on Strategy For New India at 75 Vs Positive Impact of Coronavirus (covid-19) on Environment :

Introduction :

Corona virus has become worldwide disease and all nations of the world are facing it. Due to which population of the world is forced to live inside their home. Business activities in the country also affected due to corona virus. As we all know coronavirus has taken life of a lot of people all across the globe. To prevent the spread of COVD-19, governments of different nations are taking multiple steps to control the spread of this virus.

  • As far as our environment is concerned, it is enjoying the positive impact of this virus.
  • Before the start of the COVID-19 pandemic, the air around us had been deemed very toxic to breathe in due to the amount of greenhouse gases that had been emitted over the centuries.
  • The Earth faced rising temperatures, which in turn led to the melting of glaciers and rising of sea levels. Environmental degradation was happening fast due to the depletion of resources such as air, water and soil. But after the coronavirus lockdown commenced, there have been slight changes in the environment. 
  • After the lockdown was put in place in many countries, there was lesser travelling done by people, whether it be by their own cars, or by trains and flights.
  • Even industries were closed down and not allowed to function. This in turn led to the pollution in the air dropping significantly, as there was a marked decline in nitrous oxide emission.
  • Again where fish is concerned, the lockdown has seen a decline in fishing, which means that the fish biomass will increase after over-fishing almost depleted it.
  • Apart from that, animals have been spotted moving about freely where once they would not dare to go. Even sea turtles have been spotted returning to areas they once avoided to lay their eggs, all due to the lack human interference.
  • Today, when the production of almost everything is on halt and factories are no longer as active as they used to be, the emission of smoke has lessened which has resulted in clear sky.
  • Not only this, the use of vehicles on road is reduced. All this have contributed towards lowered CO2-emissions. The emission of nitrogen dioxide has also reduced.
  • Plants are growing better because there is cleaner air and water, and because yet again there is no human interference.
  • With everything at a standstill, plants are allowed to thrive and grow and produce more coverage and oxygen.
  • Less litter also means lesser clogging of river systems, which is good in the long run for the environment.
  • To combat coronavirus, companies have asked workers to work from home.
  • This has reduced vehicles on road. In addition to this, the consumption of plastic has also reduced as people no longer have tea or coffee in disposable glasses. 

Conclusion :

In this competitive era where we have to follow a hectic schedule, we have never had thought about the way we are treating the environment. However, now due to lockdown we are forced to stay at home, we have ample time to think on our actions. There is no denying the fact that coronavirus has had catastrophic impacts on mankind. However, it has surely given the environment a chance to self-heal and restore its beauty.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Save Water – Saving the future generations

Introduction :

Water is the primary requirement for all the living beings. Human beings and all other animals cannot survive for a day without water. Plants also need water in order to grow and survive as well. Water is used in cleaning our clothes and utensils, wash, cultivating crops, cooking food items, and many other activities. We know that almost three-fourths part of the earth is water but all this water is not suitable for use, only 2% of those water is usable and so it is very necessary to save water. 

  • With the increasing population the water available is inadequate to meet the needs of the people. When summer is quite severe a large reservoir of water shrinks to a pool.
  • Both human beings and animals suffer for want of water. If it rains it rains and rains and there is a flood. The cultivated crops under deep water rot and perish.
  • There are two extremes in India. The nation goes without water or there is heavy rain resulting in flood. Wastage of water needs to be controlled. 
  • We should identify the water wastage facts and try to save water as much as possible. Currently, the biggest problem related to global warming is a huge water depreciation on Earth.
  • This is mainly caused due to misuse of water happening at various places. In the current scenario, it is important to understand the formula for the conversation of water and thereby save water.
  • Because pure water resources are the primary sources for all our necessities. And when it becomes depreciated, it can lead to huge catastrophic conditions for human beings. 
  • There are many regions in the world that are facing extreme water scarcity due to decline of groundwater and scanty rainfalls. Also, in some areas, the groundwater is contaminated or it has been overused.
  • Thus, these factors have to lead to drought situations and in these areas it has lead to water scarcity. Furthermore, urbanization and industrialization have added to the problems where groundwater has been overused to fulfill the increasing demands of the population.
  • According to the WHO report, 1 out of people does not have access to safe drinking water. Seeing this, the water crisis in the future does seem inevitable.

Conclusion :

Also, it calls for an immediate action plan in order to conserve water so that precious resource can be saved for today as well for future generations. The ground water tables in most cities are falling at alarming rate. Another factor is water leakage. Delhi loses at least 30 per cent of its water due to leakages and Mumbai loses about 20 per cent of its water due to leakage. People who live in those areas where there is plenty of water available should understand the value of water and thus save water. People should understand the importance of water and thus wastage of water should be controlled.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Short Essay on Plastic ban in english for students :

Introduction :

Plastic, polymeric material that has the capability of being molded or shaped by the application of heat and pressure. Plastic Bags are used for various purposes. The most common use of these bags is to carry grocery items. These are easily available in the market and thus used extensively. However, disposing these bags is a big issue as these are non-biodegradable.

  • They have become a major cause of land pollution. Used plastic bags stay in the environment for years and contribute to land and water pollution.
  • Many countries have replaced plastic bags with paper bags or reusable cloth bags. The government of India has also banned the use of plastic bags in many states however the same has never been implemented properly.
  • We must understand that these have been banned for our good. Plastic bags cause health problems in human beings as well as animals.
  • Waste food and vegetable and fruit peels are usually thrown away in plastic bags. Animals often gulp pieces of plastic while having food. This causes various diseases in them.
  • The chemicals present in plastic bags contaminate the soil. They make the soil infertile and hinder the growth of plants.

Conclusion :

The government has put a ban on the use of plastic bags in many states of India but people continue to use these as these are still available in the market. The government must take strict measures to ensure these are not used. Thus, plastic bags are ruining our beautiful environment and have become a threat to our health. It is high time we must stop the use of plastic bags. This will go a long way in keeping our environment clean.

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Essay on Strategy For New India at 75 Vs Long essay on Plastic Ban for students

Introduction :

Plastic, polymeric material that has the capability of being molded or shaped by the application of heat and pressure. Plastic Bags are used for various purposes. The most common use of these bags is to carry grocery items. These are easily available in the market and thus used extensively. However, disposing these bags is a big issue as these are non-biodegradable. They have become a major cause of land pollution. Used plastic bags stay in the environment for years and contribute to land and water pollution.

  • Many countries have replaced plastic bags with paper bags or reusable cloth bags. The government of India has also banned the use of plastic bags in many states however the same has never been implemented properly.
  • We must understand that these have been banned for our good. Plastic bags cause health problems in human beings as well as animals.
  • Waste food and vegetable and fruit peels are usually thrown away in plastic bags. Animals often gulp pieces of plastic while having food. This causes various diseases in them.
  • The chemicals present in plastic bags contaminate the soil. They make the soil infertile and hinder the growth of plants. Plastic bags have become the main cause of land pollution today.
  • The plastic bags entering into the water bodies are a major cause of water pollution. Hence we can conclude that these are deteriorating our environment in every possible way.
  • The production of plastic bags releases toxic chemicals. These are the main cause of serious illness. The polluted environment is a major reason for various diseases which are spreading easily in human beings.
  • Waste plastic bags are the main reason for trapping the drains and sewers, especially during rains. This can result in a flood-like situation and disrupt the normal life of people.
  • The government has put a ban on the use of plastic bags in many states of India but people continue to use these as these are still available in the market.
  • The government must take strict measures to ensure these are not used. Thus, plastic bags are ruining our beautiful environment and have become a threat to our health.
  • Although the Indian government has imposed a ban on the usage of plastic bags in many states. But people are still carrying these bags.

Conclusion :

Shopkeepers stop providing plastic bags for few days only in the beginning. It is time when we all must contribute our bit to make this ban a success. Thus we the educated lot of society must take it as our responsibility to stop using plastic bags. In this way, we can support the government in this campaign. It is high time we must stop the use of plastic bags. This will go a long way in keeping our environment clean.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Short Essay on Plastic pollution in english 250 words : 

Introduction :

Plastic is used for various purposes. The most common use of it is to carry grocery items in the form of bags. These are easily available in the market and thus used extensively. However, disposing these bags is a big issue as these are non-biodegradable. Plastic stay in the environment for years and contribute to land and water pollution. This is the reason why many countries have banned the use of plastic in the form of bags. These countries have replaced plastic bags with paper bags or reusable cloth bags.

  • The government of India has also banned the use of plastic bags in many states. We must understand that these have been banned for our good.
  • Every individual must take it has his responsibility to stop the use of plastic to make our environment cleaner. Plastic cause health problems in human beings as well as animals.
  • Waste food and vegetable and fruit peels are usually thrown away in plastic bags. Animals often gulp pieces of plastic while having food. This causes various diseases and illnesses in them.
  • Likewise, the marine creatures also tend to mistake the plastic pieces for food and eat them. People who have sea food can get infected if they have fishes suffering from illness.
  • The chemicals present in plastic bags contaminate the soil. They make the soil infertile and hinder the growth of plants. Plastic bags are mostly made of polypropylene which is produced from petroleum and natural gas.
  • These are both non-renewable fossil fuels and their extraction creates greenhouse gases that are the leading cause of global warming.

Conclusion :

The government has put a ban on the use of plastic bags in many states of India but people continue to use these as these are still available in the market. The government must take strict measures to ensure these are not used. Plastic is ruining our beautiful environment and have become a threat to our health. It is high time we must stop the use of plastic. It is not that difficult to keep a cloth bag with us while going the market. This will go a long way in keeping our environment clean.

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Essay on Strategy For New India at 75 Vs Long Essay on Plastic pollution in english in 400 words

Introduction :

Plastic pollution has become a major threat to our environment in today’s times and it is likely to make things worse in future.  Plastic pollution is damaging our environment rapidly. Waste plastic material is hard to dispose and contributes to major pollution on earth. This has become a cause of global concern. The increasing use of plastic bags, utensils and furniture, the amount of plastic waste has also gone up and so has the plastic pollution.

  • Plastic waste is entering the water bodies such as rivers, seas and even oceans and is polluting our water drastically. This water is then supplied at our places.
  • No matter how much we filter this water it can never get back to its pure form. The government of India has also banned the use of plastic bags in many states however the same has never been implemented properly.
  • Plastic bags cause health problems in human beings as well as animals. Waste food and vegetable and fruit peels are usually thrown away in plastic bags.
  • Animals often gulp pieces of plastic while having food. This causes various diseases in them. The government has put a ban on the use of plastic bags in many states of India but people continue to use these as these are still available in the market.
  • Plastic Pollution is affecting the whole earth, including mankind, wildlife and aquatic life. It is spreading like a disease. We all must realize the harmful impact it has on our lives so as to avoid it as soon as possible.
  • Plastic pollutes our water. Each year, tonnes of plastic are dumped into the ocean. As plastic does not dissolve, it remains in the water thereby hampering its purity. This means we won’t be left with clean water in the coming years.
  • We must take major steps to prevent it. We must use alternatives like cloth bags and paper bags instead of using plastic bags. If we are purchasing plastic, we must reuse it.

Conclusion :

We must avoid drinking bottled water which contributes largely to plastic pollution these days. The government must also take strict measures to ensure these are not used. It is of utmost importance to spread awareness about the harmful effects of plastic waste on our environment.  This can be done by way of television and radio and social media. This should help people understand the seriousness of the issue.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Disaster Management – Best Way The Protect Ourselves

Introduction :

Disaster refers to any occurrence that can cause damage, ecological disruption, loss of human life or deterioration of health & health services. Disaster management is a constant phenomenon of mitigating the impact of the disaster. Disaster management requires collected and coordinated efforts. A number of activities need to be undertaken in the event of disaster to reduce its intensity at the certain extent. The process of disaster management include coordination, command and control, arrangement for drinking water and food material, sanitation and maintenance of law and order.

  • The most vulnerable section in these disasters are the poor. Disaster management occupies an important place in this country’s policy framework as it is the poor and the under-privileged who are worst affected on account of calamities or disasters.
  • It is the need of the hour that it is necessary to mobilize them towards preparedness for any emergency. Quick and timely response is essential in providing immediate relief and rescue operations, to save human lives as soon as possible.
  • Each year, India faces a number of disasters like floods, earthquakes, tsunami, landslides, cyclones, droughts and more. When we look at the man-made disasters, India suffered the Bhopal Gas Tragedy as well as the plague in Gujarat.
  • To stop these incidents from happening again, we need to strengthen our disaster management techniques to prevent destructive damage.
  • Most importantly, one must understand that disaster management does not necessarily eliminate the threat completely but it decreases the impact of the disaster. It focuses on formulating specific plans to do so.
  • The National Disaster Management Authority (NDMA) in India is responsible for monitoring the disasters of the country. This organization runs a number of programs to mitigate the risks and increase the responsiveness.
  • Proper disaster management can be done when we make the citizens aware of the precautionary measures to take when they face emergency situations.
  • For instance, everyone must know we should hide under a bed or table whenever there is an earthquake. Thus, the NDMA needs to take more organized efforts to decrease the damage that disasters are causing.

Conclusion :

If all the citizens learn the basic ways to save themselves and if the government takes more responsive measures, we can surely save a lot of life and vegetation. India has set up many departments and organizations for disaster management. These Include National Disaster Management Authority, National Remote Sensing Centre, Central Water Commission, etc. Disaster management has great importance in recent times. To handle any unforeseen situation efficiently, we need to be well-equipped with latest technologies. It cannot avoid the outbreak of disaster, but can mitigate its impact to a large extent.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Clean India Movement – A step towards cleanliness

Introduction :

The father of the nation, Mahatma Gandhi had said that, “Sanitation is more important than Independence” during his time before the independence of India. He was well aware of the bad and unclean situation of the India. He had emphasized the people of India a lot about the cleanliness and sanitation as well as its implementation in the daily lives. After many years of independence of India, a most effective campaign of cleanliness is launched to call people for their active participation and complete the mission of cleanliness. For ensuring hygiene, waste management and sanitation across the nation a Swachh Bharat Mission is launched.

  • In order to fulfill the vision of Mahatma Gandhi and make India an ideal country all over the world, the Prime Minister of India has initiated a campaign called Swachh Bharat Abhiyan on the birthday of Mahatma Gandhi (2nd of October 2014).
  • People can make India clean in a number of ways. First of all, carrying a small poly-bag is a must. Most noteworthy, a recycled paper bag is the best.
  • Indians must certainly use it to throw trash in dustbins. Indians probably throw trash on the street because they dislike carrying it.
  • However, a recycled paper bag makes it easier to carry waste. Hence, Indians can carry this bag to the dustbin for waste disposal.
  • Segregating wastes is also very important. It is something which many Indians ignore. Most noteworthy, the segregation of waste at home should be in 3 separate bins.
  • These 3 bins are Biodegradable, Recyclable and Others. The waste management department should help in implementing this system.
  • Another notable way to clean India is the compost pit. Compost pit helps in the preparation of compost. To create compost pit at home, some items are required.
  • These items are kitchen wastes, leaves, grass, etc. Consequently, the microorganisms convert this organic matter into compost. Through this campaign the government of India would solve the sanitation problems by enhancing the waste management techniques.
  • Clean India movement is completely associated with the economic strength of the country. Community cleanliness drive is yet another brilliant way of making India clean.
  • It has a psychological benefit. This is because it is easier to do a thing when others are doing it. The birth date of the Mahatma Gandhi is targeted in both, the launch and completion of the mission.

Conclusion :

The basic goals behind launching the Swachh Bharat Mission are to make the country full of sanitation facilities as well as eliminate all the unhealthy practices of people in daily routines. Clean India would bring more tourists and enhance its economic condition. The Prime Minister of India has requested to every Indian to devote their 100 hours per year for the cleanliness in India which is very sufficient to make this country a clean country by 2019.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Swachh Bharat Abhiyan – Making India Clean & Healthy

Introduction :

Mahatma Gandhi had said before the independence of India that, “Sanitation is more important than Independence”. He was well aware of the bad and unclean situation of the India. He had emphasized the people a lot about the cleanliness. To fulfil his dream Swachh Bharat Abhiyan initiated by the Prime Minister, Narendra Modi on 2nd of October in 2014 on the 145th birth anniversary of the Mahatma Gandhi. Its primary goal is to make India open defecation-free by October 2, 2019, through the construction of at least 12 crore toilets across rural and urban households.

  • As of February 1, 2019, the government claims 9.2 crore toilets built in rural areas. Based on toilet construction, the govt has declared 28 states and UTs as Open Defecation Free.
  • But independent surveys show open defecation continues even in areas that the government has declared Open Defecation Free.
  • It is also found that 23% of people who own a toilet continue to defecate in the open, including people in Rajasthan and Madhya Pradesh, which have been declared open defecation- free states. 
  • The Mission’s objectives also include creating sustainable solid and liquid waste management systems, promoting social inclusion by improving sanitation for women and marginalized communities, and eradicating manual scavenging.
  • Side by side of the main Swachh Bharat Mission, the Indian government also launched the Clean India: Clean Schools campaign.
  • The aim of the campaign was to ensure separate toilets for boys and girls in schools, appropriate sanitary facilities for menstruating students, hand washing station that can cater to at least 10 students at the same time, availability of soaps etc.
  • Our school has all the sanitation equipment necessary to facilitate Clean India, Clean Schools campaign. We have hygienically secure toilets with handwashing facilities.
  • Our female classmates feel comfortable coming to school because of the measures taken to make the girls’ toilet modern and friendly. Our teachers make it a point to emphasise the benefits of personal hygiene.

Conclusion :

In its National Annual Rural Sanitation Survey 2017-18 (NARSS), the government claimed 77% rural households had access to toilets, of which 93.4% used them regularly. It also claimed 95.6% of the surveyed villages that had been declared ODF were indeed free of open defecation. In urban areas, the government’s target was to build 67 lakh urban toilets by October 2019. It claims it has already built 60 lakh household toilets by October 2018.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Delhi Pollution – Growing Issue In India

Introduction : 

Pollution is one of the major issues causing concern not only in India but across the world. Delhi, the national capital of the country, is being tagged as one of the most heavily polluted capital cities in the world. It is the world’s worst city in terms of air pollution, with an unhealthy air quality index for the majority of the year. Thus, today, one of the biggest threats to the welfare of the people of Delhi. There has been a huge rise in the vehicular population, in spite of the metro railways, aggravating traffic congestion and increasing air and noise pollution. 

  • There has also been a number of diesel vehicles plying on the roads, which are largely responsible for the air pollution. Citizens need to start the public transport more and more to reduce the pollution level in the city.
  • Government has ensured to increase the no. of buses and auto-rickshaws in the capital as well. Stubble burning in Punjab and Haryana in northwest India has been cited as a major cause of air pollution in Delhi
  • Particulate matter (PM) is basically a mixture of extremely small particles and liquid droplets like acids, chemicals, gas, water, metals, soil dust particles, etc. the measurement of which gives an idea of the pollution of a city.
  • There are mobile enforcement teams deployed at various locations for monitoring polluting vehicles. Citizens need to avoid all kinds of contact near construction sites.
  • These sites release gases which makes the air very harmful for eyes and for the respiratory system. The above measures are known by many of us yet the level of national capital remains at 11th in the ranking of WHO for the most polluted cities.
  • The practicing of the above measures is the need for hour and to live happier days with our loved one is we all demand. I whole heartedly appeal to every citizen to take steps to make pollution free capital, a pollution free India.

Conclusion :

 With a view to reducing vehicular pollution, there has been a ban imposed on the plying of more than 15 years old commercial or transport vehicles. Steps are taken to transform garbage into compost by developing new sanitary land-fill sites. It’s not that the Government is not taking steps to control pollution in Delhi, But we need proper and efficient implementation of plans and programmes and policies launched by the Government to make it successful.

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Essays

गोपनीयता का अधिकार और तकनीकी विकास पर हिन्दी में निबंध | Essay on Right to Privacy in hindi

गोपनीयता का अधिकार और तकनीकी विकास पर हिन्दी में निबंध | Essay on Right to Privacy in hindi :

Introduction :

इस नए इलेक्ट्रॉनिक युग में गोपनीयता हमारे समाज की सबसे प्रमुख समस्याओं में से एक है जो हमारी पूरी जिंदगी को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकती है। आज की दुनिया में हम अपनी व्यक्तिगत गतिविधियों के लिए इंटरनेट और सूचना प्रौद्योगिकी पर अत्यधिक निर्भर हो चुके हैं। वर्तमान में 825 मिलियन से अधिक लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं जो इंटरनेट पर अत्यधिक निर्भरता को दर्शाता है । समाज के प्रत्येक सदस्य की गोपनीयता का एक निश्चित स्तर होता है जो उसके जीवन का एक आंतरिक हिस्सा भी है और इसलिए इसे हमारी सरकार द्वारा सुरक्षित करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।

  • तेजी से तकनीकी विकास होने के कारण आज हम कुछ ही क्लिक में किसी भी प्रकार की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। हम फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बहुत सारी जानकारी साझा करते हैं।
  • हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले एप्लिकेशन (ऐप्स) हमारी व्यक्तिगत जानकारी जैसे हमारे कॉन्टैक्ट विवरण, फोन की जानकारी और हमारी लोकेशन का आसानी से पता लगा सकते हैं।
  • लेकिन हमें इस बात की जानकारी नहीं होती कि इन प्लेटफार्मों द्वारा इस जानकारी का उपयोग कैसे किया जा रहा है और इसलिए इस डेटा के दुरुपयोग होने की बड़ी संभावना है।
  • डेटा के अनुचित उपयोग के कारण साइबर अपराध, फेक न्यूज, सांप्रदायिक हिंसा के रूप में गंभीर परिणाम हो सकते हैं और यहां तक कि हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा भी हो सकता है।
  • हमने 2017 में आधार कार्ड एवं हाल ही में पेगासस के संदर्भ में ऐसे ही कई खतरों को देखा है। इस प्रकार के खतरों को देखते हुए, भारत में मजबूत डेटा संरक्षण कानून बनाकर लोगों की गोपनीयता को सुरक्षित रखने की आवश्यकता है।

 Conclusion :

यद्यपि हमारे संविधान के भाग 3 में ‘मौलिक अधिकार’ का प्रावधान है और अनुच्छेद 21 में ‘निजता का अधिकार’ भी शामिल है और सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 को लागु किया लेकिन ये वर्तमान स्थिति को देखते हुए पर्याप्त नहीं हैं। लोगों को इंटरनेट से सम्बंधित खतरों के बारे में जागरूक करने की जरुरत है और वे अपने डेटा को सुरक्षित रखने के लिए एंटीवायरस और बेहतर पासवर्ड का उपयोग करने जैसे उचित सुरक्षा उपायों का उपयोग कर सकते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम भी आयोजित करने की जरुरत है । “चूंकि तकनीकी विकास हमारे समाज के लिए एक वरदान है, लेकिन दूसरी ओर यह हमारी गोपनीयता और व्यक्तिगत जीवन को भी बड़े स्तर पर प्रभावित कर सकती है।”

व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर निबंध 

Introduction :

सोशल मीडिया मानव सभ्यता के लिए एक वरदान है क्योंकि इसने पूरी दुनिया को एक जगह पर एक साथ ला दिया है जहाँ व्यक्ति अपने विचारों को साझा कर सकते हैं। इसलिए यह प्रौद्योगिकी लोगों के लिए उपयोगी है और सामाजिक कौशल बढ़ाने में भी मदद करती है। आज की दुनिया में, प्रौद्योगिकी ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है क्योंकि तकनीक की मदद से हम नई चीजें सीख सकते हैं और नए लोगों से मिल सकते हैं।  व्हाट्सएप सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक ऍप्स में से एक है जो हमारे दैनिक जीवन में एक प्रमुख भूमिका निभाती है।

  • व्हाट्सएप को अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी के लिए बहुत आलोचना का सामना करना पड़ रहा है जिसमें कहा गया है कि वह अपने किसी भी उपयोगकर्ता की जानकारी फेसबुक और उसकी साझेदार कंपनियों के साथ साझा कर सकते है। 
  • तब से सिगनल एप्प सहित इसके वैकल्पिक ऐप के डाउनलोड में भारी वृद्धि हुई है। वैश्विक आलोचना के जवाब में, व्हाट्सएप के प्रमुख विल कैथकार्ट ने बताया की, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ, वे उपयोगकर्ताओं की निजी चैट या कॉल नहीं देख सकते हैं और न ही फेसबुक देख सकता हैं।
  • व्हाट्सएप ने नए नियम और शर्तों को स्वीकार करने के लिए उपयोगकर्ताओं को 8 फरवरी 2021 तक का समय दिया गया है।
  • व्हाट्सएप का कहना है कि वह उपयोगकर्ताओं के डिवाइस से नई जानकारी एकत्र कर रहा है जैसे बैटरी स्तर, ऐप वर्ज़न, ब्राउज़र जानकारी, मोबाइल नेटवर्क, आईपी एड्रेस और फोन नंबर आदि।
  • इस नई पालिसी के अन्तर्गत यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में डेटा को अमेरिका या अन्य हिस्सों में स्थानांतरित भी किया जाएगा जहां फेसबुक की सहयोगी कंपनियां हैं।

Conclusion :

इस नए अपडेट से इस एप्लिकेशन का उपयोग करने वाले लोगों की गोपनीयता पर बहुत अधिक चिंता बढ़ गई है। भारतीय उपयोगकर्ता अधिक असुरक्षित हैं क्योंकि भारत में कोई भी डेटा सुरक्षा कानून नहीं है। अगर भारत में डेटा सुरक्षा कानून होता, तो व्हाट्सएप इस नए पॉलिसी अपडेट को लॉन्च नहीं कर पाता। यही सही समय है जब सरकार को डिजिटल गोपनीयता के महत्व के बारे में जनता को जागरूक करने के लिए कुछ डिजिटल जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने चाहिए और इससे सम्बन्धित नए कानूनों को लागू करना चाहिए।

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व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर निबंध (Long essay on Whatsapp privacy policy in hindi)

Introduction :

सोशल मीडिया मानव सभ्यता के लिए एक वरदान है क्योंकि इसने पूरी दुनिया को एक जगह पर एक साथ ला दिया है जहाँ व्यक्ति अपने विचारों को साझा कर सकते हैं। आज की दुनिया में, प्रौद्योगिकी ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है क्योंकि तकनीक की मदद से हम नई चीजें सीख सकते हैं और नए लोगों से मिल सकते हैं। व्हाट्सएप सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक ऍप्स में से एक है जो हमारे दैनिक जीवन में एक प्रमुख भूमिका निभाती है। व्हाट्सएप को अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी के लिए बहुत आलोचना का सामना करना पड़ रहा है जिसमें कहा गया है कि वह अपने किसी भी उपयोगकर्ता की जानकारी फेसबुक और उसकी साझेदार कंपनियों के साथ साझा कर सकते है।

वैश्विक आलोचना के जवाब में, व्हाट्सएप के प्रमुख विल कैथकार्ट ने बताया की, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ, वे उपयोगकर्ताओं की निजी चैट या कॉल नहीं देख सकते हैं और न ही फेसबुक देख सकता हैं। व्हाट्सएप का कहना है कि वह उपयोगकर्ताओं के डिवाइस से नई जानकारी एकत्र कर रहा है जैसे बैटरी स्तर, ऐप वर्ज़न, ब्राउज़र जानकारी, मोबाइल नेटवर्क, आईपी एड्रेस और फोन नंबर आदि।

  • निजता नीति में किए गए बदलाव लागू करने के लिए 15 मई की समयसीमा तय की गई थी, लेकिन बाद में यह समयसीमा रद्द कर दी गई. कंपनी ने प्राइवेसी पॉलिसी को लागू करने की नई तारीख का एलान नहीं किया है.
  • पहले यह नई प्राइवेसी पॉलिसी 8 फरवरी से लागू होनी थी. तब भी विरोध हुआ था जिसके बाद इसे 15 मई तक के लिए टाल दिया था. अब फिर विवाद होने पर फिलहाल टाल दिया गया है. लेकिन कंपनी ने बयान में कहा है कि नई प्राइवेसी पॉलिसी को स्वीकार करने के लिए यूजर्स को रिमाइंडर भेजना जारी रहेगा. 
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 18 मई को व्हाट्सएप को एक पत्र लिखकर कहा कि सात दिन के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने पर कानून के अनुरूप जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
  • मंत्रालय ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया कि कई लोग दैनिक जीवन में संदेश भेजने के लिए व्हट्सएप पर निर्भर हैं ऐसे में कंपनी द्वारा अपनी स्थिति का लाभ उठाते हुए भारतीय उपयोगकर्ताओं पर ‘अनुचित शर्तें थोपना न केवल परेशान करने वाला है बल्कि गैर- जिम्मेदाराना रवैया है.’
  • व्हाट्सऐप के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी सरकार के साथ बातचीत करती रहेगी. उन्होंने कहा, “हमने पहले जो कहा है, दोबारा उसकी पुष्टि करते हैं कि ताजा अपडेट से किसी के भी व्यक्तिगत की प्राइवेसी पर असर नहीं पड़ता है. 
  • हम हर अवसर का इस्तेमाल यह स्पष्ट करने के लिए करेंगे कि हम किस तरह से लोगों के व्यक्तिगत संदेशों और निजी सूचना की सुरक्षा करते हैं.”
  • व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने बयान में कहा, “जहां नई सेवा शर्तें हासिल करने वाले ज्यादातर लोगों ने उन्हें स्वीकर कर लिया, हम इस बात की सराहना करते हैं कि कुछ लोगों को अब तक ऐसा करने का मौका नहीं मिला. 15 मई को कोई भी खाता बंद नहीं किया गया और भारत में किसी के भी फोन पर व्हाट्सएप ने काम करना बंद नहीं किया.”
  • व्हाट्सएप आपके डेटा को फेसबुक के साथ शेयर करेगा। जिसके लिए वो ग्रीन बटन के जरिये आपसे एग्री यानी इजाजत की मांग कर रहा है। फेसबुक ही व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी है। 
  • डेटा का मतलब है आपका फोन नंबर, आपके कांन्ट्रैक्ट्स और आपको व्हाट्सएप स्टेटस जैसी तमाम जानकारियां। ये डेटा व्हाट्सएप लेकर फेसबुक के साथ शेयर करना चाह रहा है। मतलब व्हाट्सएप आपकी कुछ चीजों की निगरानी करेगा और उसे थर्ड पार्टी के साथ शेयर भी करेगा।
  • व्हाट्सएप ये गौर करगेा कि आप कितनी देर आनलाइन रहते हैं, आनलाइन रहकर क्या करते हैं। कौन सा फोन इस्तेमाल करते हैं और किस तरह के कंटेट व्हाट्सएप पर पसंद करते हैं। क्या सबसे अधिक देखते हैं। 
  • सबसे अधिक जो कंटेट आप देखते होंगे वह बेसिक डेटा व्हाट्सएप थर्ड पार्टी यानी फेसबुक, इंस्टाग्राम को शेयर करेगा और फिर उसी से मिलता-जुलता कंटेट आपको दिखाया जाएगा। 
  • दरअसल, व्हाट्सएप पर भेजे गए मैसेज इंड टू इंड इंक्रिप्शन की मदद से स्कियोर होते हैं। मान लीजिए कि दो लोग हैं जिन्होंने एक दूसरे को भेजा हो। जैसे ही आप मैसेज भेजते हैं एक प्रोग्राम आपके मैसेज को एक जटिल कोड में बदल देता है। 
  • जिसे मैसेज भेजा गया है उसके फोन में वो कोड जाता है दोबारा मैसेज में बदल जाता है और जिसने वो मैसेज पढ़ा उसे समझ में आ जाता है कि सामने वाले ने मैसेज क्या भेजा।
  • इस दौरान कोई भी मैसेज कहीं भी स्टोर नहीं होता। व्हाट्सएप के विज्ञापन के अनुसार उनकी पाॅलिसी में बदलाव आपकी निजी चैट को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करते हैं। ये अपडेट सिर्फ बिजनेस अकाउंट से बात करने को लेकर है और वो भी वैकल्पिक है।
  • आप चाहे तो व्हाट्सएप पर किसी भी बिजनेस से बात न करे और अगर ऐसा करते हैं तो व्हाट्सएप इस बातचीत को फेसबुक से साझा कर सकता है। फिर इसे आपकी जानकारी से जोड़कर आपके हिसाब से विज्ञापन दिखा सकता है।
  • व्हाट्सएप का कहना है कि बाकी सारी चीजें पहले जैसी हैं। व्हाट्सएप ने ट्वीटर और विज्ञापन के जरिये ये बाते भी कहीं। व्हाट्सएप और फेसबुक न तो आपके प्राइवेट मैसेज देख सकता है न ही आपकी काॅल सुन सकते हैं। 
  • व्हाट्सएप इस बात का रिकाॅर्ड नहीं रखता कि आप किससे चैट या काॅल कर रहे हैं। आप व्हाट्सएप पर जो लोकेशन दूसरे के साथ साझा करते हैं उसे न तो व्हाट्सएप देख सकता है और न ही फेसबुक। व्हाट्सएप आपको फोन में मौजूद कांट्रैक्ट्स को फेसबुक के साथ शेयर नहीं करता है। व्हाट्सएप पर बने हुए ग्रुप प्राइवेट ही रहेंगे।

Conclusion :

इस नए अपडेट से इस एप्लिकेशन का उपयोग करने वाले लोगों की गोपनीयता पर बहुत अधिक चिंता बढ़ गई है। भारतीय उपयोगकर्ता अधिक असुरक्षित हैं क्योंकि भारत में कोई भी डेटा सुरक्षा कानून नहीं है। अगर भारत में डेटा सुरक्षा कानून होता, तो व्हाट्सएप इस नए पॉलिसी अपडेट को लॉन्च नहीं कर पाता। यही सही समय है जब सरकार को डिजिटल गोपनीयता के महत्व के बारे में जनता को जागरूक करने के लिए कुछ डिजिटल जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने चाहिए और इससे सम्बन्धित नए कानूनों को लागू करना चाहिए।

सोशल मीडिया की भूमिका

Introduction :

आज के दौर में सोशल मीडिया जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है, सोशल मीडिया वह जगह है जहां हमे किसी भी चीज के बारे में जानने, पढ़ने, समझने और बोलने का मौंका मिलता हैं। सोशल मीडिया का प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति पर पड़ता है। सोशल मीडिया के बिना हमारे जीवन की कल्पना करना मुश्किल है, परन्तु इसके अत्यधिक उपयोग के वजह से हमे इसकी कीमत भी चुकानी पड़ती हैं। सोशल मीडिया समाज के सामाजिक विकास में अपना योगदान देता है और कई व्यवसायों को बढ़ाने में भी मदद करता है। हम आसानी से सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी और समाचार प्राप्त कर सकते हैं।

किसी भी सामाजिक कारण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग एक अच्छा साधन है। सोशल मीडिया लोगों में निराशा और चिंता पैदा करने वाला एक कारक भी है। ये बच्चों में खराब मानसिक विकास का भी कारण बनता जा रहा है। सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग निद्रा को प्रभावित करता हैं। सोशल मीडिया को अच्छा या बुरा कहने के बजाय, हमें अपने लाभ के लिए इसका उपयोग करने के तरीके को खोजना चाहिए। सोशल मीडिया जागरूकता फैलाने और अपराध से लड़ने में एजेंसियों तथा सरकार की मदद कर सकता है।

सोशल मीडिया का महत्व –

  • व्याख्यानो का सीधा प्रसारण:आजकल कई प्रोफेसर अपने व्याख्यान के लिए स्काइप, ट्विटर और अन्य स्थानों पर लाइव वीडियो चैट आयोजित कर रहे हैं। यह छात्रों के साथ-साथ शिक्षक को भी घर बैठे किसी चीज को सीखने और साझा करने में सहायता करता है। सोशल मीडिया की मदद से शिक्षा को आसान और सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
  • सहयोग का बढ़ता आदान-प्रदान:चूंकि हम दिन के किसी भी समय सोशल मीडिया का उपयोग कर सकते है और कक्षा के बाद शिक्षक से प्रश्नों का समर्थन और समाधान ले सकते हैं। यह अभ्यास शिक्षक को अपने छात्रों के विकास के और अधिक बारीकी को समझने में भी मदद करता है।
  • शिक्षा कार्यो में आसानी:कई शिक्षक महसूस करते हैं कि सोशल मीडिया का उपयोग उनके कामों को आसान बनाता है। यह शिक्षक को अपनी क्षमताओं कौशल और ज्ञान का विस्तार और पता लगाने में भी सहायता करता है।
  • अधिक अनुशासान:सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आयोजित कक्षाएं अधिक अनुशासित और संरचित होती हैं क्योंकि वे जानते हैं कि हर कोई इसे देख रहा होता है।
  • शिक्षा में मददगार:सोशल मीडिया छात्रों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई गयी कई शिक्षण सामाग्री के माध्यम से उनके ज्ञान को बढ़ाने में मदद करता है। सोशल मीडिया के माध्यम से छात्र वीडियो और चित्र देख सकते हैं, समीक्षाओं की जांच कर सकते हैं और लाइव प्रक्रियाओं को देखते हुए तत्काल अपने संदेह को दूर कर सकते हैं।
  • न केवल छात्र, बल्कि शिक्षक भी इन उपकरणों और शिक्षण सहायता का उपयोग करके अपने व्याख्यान को और अधिक रोचक बना सकते हैं।
  • शिक्षण ब्लॉग और लेखन:छात्र प्रसिद्ध शिक्षकों, प्रोफेसरों और विचारकों द्वारा ब्लॉग, आर्टिकल और लेखन पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं। इस तरह अच्छी सामग्री व्यापक दर्शकों तक पहुंच सकती है।

सोशल मीडिया के फायदे –

  • सोशल मीडिया वास्तव में कई फायदे पहुंचाता है, हम सोशल मीडिया का उपयोग समाज के विकास के लिए भी कर सकते है। हमने पिछले कुछ वर्षों में सूचना और सामग्री का विस्फोट देखा है और हम सोशल मीडिया के ताकत से इंकार नहीं कर सकते है।
  • समाज में महत्वपूर्ण कारणों तथा जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया का व्यापक रूप से उपयोग किया जा सकता है। सोशल मीडिया एनजीओ और अन्य सामाजिक कल्याण समितियों द्वारा चलाए जा रहे कई महान कार्यों में भी मदद कर सकता है।
  • सोशल मीडिया जागरूकता फैलाने और अपराध से लड़ने में अन्य एजेंसियों तथा सरकार की मदद कर सकता है। कई व्यवसायों में सोशल मीडिया का उपयोग प्रचार और बिक्री के लिए एक मजबूत उपकरण के रुप में किया जा सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से कई समुदाय बनाये जाते है जो हमारे समाज के विकास के लिए आवश्यक होते हैं।

सोशल मीडिया के नुकसान –

  • साइबर बुलिंग: कई बच्चे साइबर बुलिंग के शिकार बने हैं जिसके कारण उन्हें काफी नुकसान हुआ है।
  • हैकिंग: व्यक्तिगत डेटा का नुकसान जो सुरक्षा समस्याओं का कारण बन सकता है तथा आइडेंटिटी और बैंक विवरण चोरी जैसे अपराध, जो किसी भी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • बुरी आदते: सोशल मीडिया का लंबे समय तक उपयोग, युवाओं में इसके लत का कारण बन सकता है। बुरी आदतो के कारण महत्वपूर्ण चीजों जैसे अध्ययन आदि में ध्यान खोना हो सकता है। लोग इससे प्रभावित हो जाते हैं तथा समाज से अलग हो जाते हैं और अपने निजी जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • घोटाले: कई शिकारी, कमजोर उपयोगकर्ताओं की तलाश में रहते हैं ताकि वे घोटाले कर और उनसे लाभ कमा सके।
  • रिश्ते में धोखाधड़ी: हनीट्रैप्स और अश्लील एमएमएस सबसे ज्यादा ऑनलाइन धोखाधड़ी का कारण हैं। लोगो को इस तरह के झूठे प्रेम-प्रंसगो में फंसाकर धोखा दिया जाता है।
  • स्वास्थ्य समस्याएं: सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है। अक्सर लोग इसके अत्यधिक उपयोग के बाद आलसी, वसा, आंखों में जलन और खुजली, दृष्टि के नुकसान और तनाव आदि का अनुभव करते हैं।
  • सामाजिक और पारिवारिक जीवन का नुकसान: सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण लोग परिवार तथा समाज से दुर, फोन जैसे उपकरणों में व्यस्थ हो जाते है।

Conclusion :

दुनिया भर में लाखों लोग है जो कि सोशल मीडिया का उपयोग प्रतिदिन करते हैं। इसके सकारात्मक और नकारात्मक पहलूओं का एक मिश्रित उल्लेख दिया गया है। इसमें बहुत सारी ऐसी चीजे है जो हमे सहायता प्रदान करने में महत्वपुर्ण है, तो कुछ ऐसी चीजे भी है जो हमें नुकसान पहुंचा सकती है। कई व्यवसायों में सोशल मीडिया का उपयोग प्रचार और बिक्री के लिए एक मजबूत उपकरण के रुप में किया जा सकता है। सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं में कोई संदेह नहीं है लेकिन उपयोगकर्ताओं को सोशल नेटवर्किंग के उपयोग पर अपने विवेकाधिकार का उपयोग करना चाहिए। यदि सोशल मीडिया का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो ये मानव जाति के लिए वरदान साबित हो सकता है।

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

Introduction :

मीडिया ने विश्वभर में लोकतंत्र की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लोकतांत्रिक देशों में मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है और मुक्त मीडिया के बिना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अस्तित्व ही नहीं हो सकता। भारतीय मीडिया ने समाचार पत्र और रेडियो के दौर से लेकर टेलीविजनऔर सोशल मीडिया के वर्तमान युग तक एक लंबा सफर तय किया है। मिडिया समाज के अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक पहुचाके उन्हें शिक्षित करने का एक माध्यम है । मीडिया एक स्वस्थ लोकतंत्र को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मीडिया हमें दुनिया भर में हो रही विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक गतिविधियों से अवगत कराता है।

मीडिया की भूमिका समाज को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। यह लाखों नागरिकों की आवाज़ के रूप में कार्य करता है, जब सरकारी संस्थान भ्रष्ट और सत्तावादी हो जाते हैं। टेलीविजन और रेडियो ने ग्रामीण जनता को उनकी भाषा में सभी घटनाओं से अवगत कराने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत जैसे लोकतंत्र में एक स्वतंत्र और नियंत्रण मुक्त प्रेस की आवश्यकता वास्तव में आवश्यक है। मीडिया सरकार और देश के नागरिकों के बीच एक श्रृंखला के रूप में कार्य करता है, लोगों को मीडिया पर विश्वास है और इसका दर्शकों पर प्रभाव पड़ता है।

सोशल मीडिया के सकारात्मक प्रभाव –

  • सोशल मीडिया दुनिया भर के लोगों से जुड़ने का एक महत्त्वपूर्ण साधन है और इसने विश्व में संचार को नया आयाम दिया है। 
  • सोशल मीडिया उन लोगों की आवाज़ बन सकता है जो समाज की मुख्य धारा से अलग हैं और जिनकी आवाज़ को दबाया जाता रहा है।
  • वर्तमान में सोशल मीडिया कई व्यवसायियों के लिये व्यवसाय के एक अच्छे साधन के रूप में कार्य कर रहा है।
  • सोशल मीडिया के साथ ही कई प्रकार के रोज़गार भी पैदा हुए हैं।
  • वर्तमान में आम नागरिकों के बीच जागरूकता फैलाने के लिये सोशल मीडिया का प्रयोग काफी व्यापक स्तर पर किया जा रहा है।
  • कई शोधों में सामने आया है कि दुनिया भर में अधिकांश लोग रोज़मर्रा की सूचनाएँ सोशल मीडिया के माध्यम से ही प्राप्त करते हैं।

सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव –

  • कई शोध बताते हैं कि यदि कोई सोशल मीडिया का आवश्यकता से अधिक प्रयोग किया जाए तो वह हमारे मस्तिष्क को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है और हमे डिप्रेशन की ओर ले जा सकता है। 
  • सोशल मीडिया साइबर-बुलिंग को बढ़ावा देता है।
  • यह फेक न्यूज़ और हेट स्पीच फैलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • सोशल मीडिया पर गोपनीयता की कमी होती है और कई बार आपका निजी डेटा चोरी होने का खतरा रहता है।
  • साइबर अपराधों जैसे- हैकिंग और फिशिंग आदि का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • आजकल सोशल मीडिया के माध्यम से धोखाधड़ी का चलन भी काफी बढ़ गया है, ये लोग ऐसे सोशल मीडिया उपयोगकर्त्ता की तलाश करते हैं जिन्हें आसानी से फँसाया जा सकता है।
  • सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रयोग हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है।

सोशल मीडिया और भारत  –

  • सोशल मीडिया ने समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को भी समाज की मुख्य धारा से जुड़ने और खुलकर अपने विचारों को अभिव्यक्त करने का अवसर दिया है।
  • आँकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भारत में तकरीबन 350 मिलियन सोशल मीडिया यूज़र हैं और अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2023 तक यह संख्या लगभग 447 मिलियन तक पहुँच जाएगी।
  • वर्ष 2019 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय उपयोगकर्त्ता औसतन 2.4 घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं।
  • इसी रिपोर्ट के मुताबिक फिलीपींस के उपयोगकर्त्ता सोशल मीडिया का सबसे अधिक (औसतन 4 घंटे) प्रयोग करते हैं, जबकि इस आधार पर जापान में सबसे कम (45 मिनट) सोशल मीडिया का प्रयोग होता है।
  • इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया अपनी आलोचनाओं के कारण भी चर्चा में रहता है। दरअसल, सोशल मीडिया की भूमिका सामाजिक समरसता को बिगाड़ने और सकारात्मक सोच की जगह समाज को बाँटने वाली सोच को बढ़ावा देने वाली हो गई है।
  • भारत में नीति निर्माताओं के समक्ष सोशल मीडिया के दुरुपयोग को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बन चुकी है एवं लोगों द्वारा इस ओर गंभीरता से विचार भी किया जा रहा है।

सोशल मीडिया और निजता का मुद्दा –

  • वर्तमान परिदृश्य भारत को डिजिटल सेवाओं के लिये एक नवीन डिजाइन तैयार करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं, जिसमें व्यक्तिगत और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों का समावेश हो।
  • निजता संरक्षण, डेटा संरक्षण से जुड़ा विषय है क्योंकि जब कोई व्यक्ति किसी डिजिटल पहचान द्वारा इंटरनेट माध्यम का प्रयोग करता है तो उस दौरान विभिन्न डाटाओं का संग्रह तैयार हो जाता है जिससे बड़ी आसानी से उपयोगकर्त्ता के निजी डाटा को प्राप्त किया जा सकता है।
  • अतः डेटा संरक्षण ढाँचे के डिज़ाइन में महत्त्वपूर्ण चुनौती डिजिटलीकरण के उपयोग से दीर्घकालिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना तथा इसके साथ ही गोपनीयता को बनाए रखना भी है।
  • भारत में प्रभावी डेटा संरक्षण के लिये डेटा नियामकों के पदानुक्रम और एक मजबूत नियामक ढाँचे की आवश्यकता होगी, जो जटिल डिजिटल सेटअप और आम सहमति के अलावा हमारे मूल अधिकारों की रक्षा कर सके।
  • पिछले वर्ष भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंध संस्थान ग्वालियर के अध्ययन में बताया गया कि भारत आने वाले 89 फीसदी पर्यटक सोशल मीडिया के ज़रिये ही भारत के बारे में जानकारियाँ प्राप्त करते हैं।
  • यहाँ तक कि इनमें से 18 फीसदी लोग तो भारत आने की योजना ही तब बनाते हैं जब सोशल मीडिया से प्राप्त सामग्री इनके मन में भारत की अच्छी तस्वीर पेश करती है।
  • सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को नया आयाम दिया है, आज प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी डर के सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार रख सकता है और उसे हज़ारों लोगों तक पहुँचा सकता है, परंतु सोशल मीडिया के दुरुपयोग ने इसे एक खतरनाक उपकरण के रूप में भी स्थापित कर दिया है तथा इसके विनियमन की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।

Conclusion :

अतः आवश्यक है कि निजता के अधिकार का उल्लंघन किये बिना सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिये सभी पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर नए विकल्पों की खोज की जाए, ताकि भविष्य में इसके संभावित दुष्प्रभावों से बचा जा सके। वर्तमान समय में युवाओं को प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया की तेजी से बढ़ती दुनिया में अधिक रुचि है। इस प्रकार, मीडिया के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो जाता है कि वे जो सूचना प्रसारित कर रहे हैं, वह पक्षपाती न हो। मीडिया लोकतंत्र में एक वाचडॉग की तरह है जो सरकार को सक्रिय रखता है और यह हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गया है।

फेक न्यूज़ पर निबंध

Introduction :

भारत में फेक न्यूज की समस्या लगातार बढ़ रही है। फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल गलत और झूठी सूचनाएं फैलाने के लिए तेज़ी से हो रहा है। फेक न्यूज की समस्या इसलिए भी जटिल होती जा रही है क्योंकि देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अभी भारत की 27 फीसदी लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं। चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोग भारत में हैं। दुनिया भर में व्हाट्सएप के मासिक एक अरब से ज्यादा सक्रिय यूजर्स में से 16 करोड़ भारत में हैं। वहीं फेसबुक इस्तेमाल करने वाले भारतीयों की तादाद 14.8 करोड़ और ट्विटर अकाउंट्स की तादाद 2.2 करोड़ है।

यह सामान्य भाईचारे की भावना को प्रभावित करता है और देश में असहिष्णुता को बढ़ाता है। फेक न्यूज़ से निर्दोष लोगों का उत्पीड़न और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है। इससे मौतें भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, बच्चों और पशु चोरों के बारे में अफवाहें पूरे भारत में भीड़ के हमलों और मौतों का कारण बनती रही है। फेक न्यूज़ के खतरे के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दोषारोपण करना अनुचित है। क्योंकि फेसबुक, व्हाट्सएप इत्यादि जैसे प्लेटफॉर्म कंटेंट नहीं बना रहे हैं, लेकिन उपयोगकर्ताओं द्वारा स्वयं को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। फेक न्यूज़ से निपटने के लिए एक प्रभावी दृष्टिकोण डिजिटल साक्षरता में सुधार करना है यानी फेक न्यूज़ से वास्तविक न्यूज़ की पहचान करने की क्षमता को बढ़ाना।

फेक न्यूज़ को बढ़ावा देने वाले कारक –

  • हमारे समाज में कुछ ऐसे अराजक तत्व है जो इस तरह के कामो को बढ़ावा देते है उनका काम यही होता है की समाज का माहौल ख़राब हो |
  • हम ये नहीं कह सकते हैं की इस तरह की न्यूज़ को सिर्फ सोशल मीडिया ही फैला रहे है क्योकि हमे पता होना चाहिए की ऐसी खबरे सोशल मीडिया नहीं फैलाती और ना ही इस तरह की खबरे बनाती है ये काम तो हम जैसे लोग बनाते और फैलाते हैं |
  • इस तरह के कारक पर हमे उचित कार्यवाही करनी चाहिए क्योकि सारे दोष सोशल मीडिया को ही नहीं दे सकते है वैसे बही अब पहले की तुलना में सोशल मीडिया बहुत ही ज्यादा सख्त हो गया है जो भी इस तरह की एक्टिविटी करता है यूज़ तुरंत बैन कर दिया जाता है |
  • पहले समय में अखबारों में लिमिटेड खबरे आती थी तो फेक न्यूज़ का कोई मतलब नहीं होता था लेकिन जब से इन्टरनेट आया तब से खबरे आग की तरह फ़ैल रही है और इस तरह की खबरे फैलाने वालो को बढ़ावा मिल रहा है |

फेक न्यूज़ के फैलने से होने वाले नुकसान –

  • फेक न्यूज़ के फैलने से समाज और पूरे देश में अशांति का माहौल होता है |
  • इसके कारण कुछ ऐसे खबरे फैलाने वालो को बढ़ावा मिलता है |
  • हमारे समाज और देश की छवि ख़राब होती है |
  • कुछ ऐसे अराजक तत्व होते है जो समाज में अराजकता फैलाते हैं वे इस तरह की फेक न्यूज़ का ही सहारा लेते हैं |
  • समाज में जितने भी दंगे, हुडदंग या फिर भय का माहौल होता है उन सभी का कारण फेक न्यूज़ ही होता है |
  • जिसके खिलाफ इस तरह की खबरे फैलाई जाती हैं उनकी छवि भी खराब होती है
  • इससे लोग सिर्फ फेक न्यूज़ पर ही ध्यान देते है उन्हें लगता है ही यही सही खबर है क्योकि फेक न्यूज़ फैलाने वाले खबरों को तोड़ मरोड़ कर पेश करते हैं |
  • अगर एक दिन में 100 न्यूज़ आती हैं तो उसमे से आधी न्यूज़ फेक ही होती है
  • कभी कभी इस तरह की खबरों की कीमत एक इमानदार इंसान को चुकानी पड़ती है |
  • कभी कभी फेक न्यूज़ के फैक्ट को चेक करने का प्रमाण भी नहीं मिल पाता है जिसके चलते लोग यूज़ ही सच मानने लगते हैं |

फेक न्यूज़ को फैलने से रोकने के लिए उपाय –

  • फेक न्यूज़ से निपटने के लिए इस तरह के प्रभावी डिजिटल साक्षरता में सुधार करने की जरूरत है जिससे की ये पता चल सके की फेक न्यूज़ कौन सी है और वास्तविक न्यूज़ कौन सी है वैसे भी हमारा देश डिजिटल इंडिया की ओर बहुत तेजी से बढ़ रहा है और नयी तकनिकी को अपना रहा है |
  • भारत में डिजिटल साक्षरता में सुधार करने के लिए सरकार, मीडिया और संस्थानों को मिलकर काम करना चाहिए |
  • सरकार को सोशल मीडिया में फैलने वाले किसी भी फेक न्यूज़ पर काबू पाने के लिए प्रभावी ढंग से अपनी रणनीति बनाने की जरूरत है और इस तरह की न्यूज़ सोशल मीडिया में फैलाने वालो को कड़ी कार्यवाही करने की जरूरत है |

Conclusion :

सरकार को इस तरह के खबरों के सोर्स पर पैनी नजरे रखनी चाहिए और इनके गिरोह का पर्दाफाश करना चाहिए और इस तरह की खबरों को कोई भी न्यूज़, अखबार या फिर सोशल मीडिया बिना पुष्टि के नहीं पब्लिश नहीं करना चाहिए अगर हम पहले से ही अलर्ट रहेंगे तो इसकी नौबत ही नहीं आएगी | भारत में डिजिटल साक्षरता में सुधार के लिए सरकार, मीडिया और प्रौद्योगिकी को मिलकर काम करना चाहिए। सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज़ को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नीतियों को बनाने जरूरत है। फेक न्यूज़  को फैलाने के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को पकड़ने के लिए राज्य पुलिस तंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए।

निजता का अधिकार

Introduction :

मनुष्य की ज़रूरतें सबसे प्राथमिक ज़रूरतों जैसे कि भोजन, कपड़े और आश्रय से लेकर माध्यमिक ज़रूरतों जैसे शिक्षा, काम और मनोरंजन और आगे की ज़रूरतों जैसे मनोरंजन, भोजन, अवकाश, यात्रा, आदि से शुरू होती हैं। यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि इन सभी जरूरतों और इच्छाओ (wants) में गोपनीयता कहाँ है ? किसी भी सभ्य समाज में गोपनीयता की एक बुनियादी डिग्री एक प्राथमिक आवश्यकता है। जैसे-जैसे गोपनीयता की डिग्री बढ़ती है, यह एक माध्यमिक जरूरत और आगे एक इच्छा में विकसित हो जाती है। निजता का अधिकार नागरिकों की निजता के अधिकार को लेकरकर यह सुनिश्चित करता है की सभी समान रूप से संरक्षित हो और अमीर और गरीब के लिए समान न्याय और अधिकार हो।

 आधार के लिए भारत के निवासियों के व्यक्तिगत डेटा के संग्रह की आवश्यकता होती है, और इसके परिणामस्वरूप चूक होने की संभावना को लेकर विवाद पैदा हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें बायोमेट्रिक विवरण जैसे कि आईरिस स्कैनिंग और फिंगर प्रिंट के संग्रह की आवश्यकता होती है जो अनिवार्य रूप से महत्वपूर्ण विवरण हैं और इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। साइबर स्पेस एक संवेदनशील स्थान है और यहाँ खतरे की संभावना अधिक है हालांकि, आधार अपने आप में एक सुविचारित कार्यक्रम है ताकि वित्तीय समावेशन सुनिश्चित किया जा सके।

निजता का महत्त्व –

  • निजता वह अधिकार है जो किसी व्यक्ति की स्वायतता और गरिमा की रक्षा के लिये ज़रूरी है। वास्तव में यह कई अन्य महत्त्वपूर्ण अधिकारों की आधारशिला है।
  • दरअसल निजता का अधिकार हमारे लिये एक आवरण की तरह है, जो हमारे जीवन में होने वाले अनावश्यक और अनुचित हस्तक्षेप से हमें बचाता है।
  • यह हमें अवगत कराता है कि हमारी सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक हैसियत क्या है और हम स्वयं को दुनिया से किस हद तक बाँटना चाहते हैं।
  • वह निजता ही है जो हमें यह निर्णित करने का अधिकार देती है कि हमारे शरीर पर किसका अधिकार है?
  • आधुनिक समाज में निजता का महत्त्व और भी बढ़ जाता है। फ्रांस की क्रांति के बाद समूची दुनिया से निरंकुश राजतंत्र की विदाई शुरू हो गई और समानता, मानवता और आधुनिकता के सार्वभौमिक सिद्धांतों पर आधारित लोकतंत्र ने पैर पसारना शुरू कर दिया।
  • अब राज्य लोगों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ चलाने लगे तो यह प्रश्न प्रासंगिक हो उठा कि जिस गरिमा के भाव के साथ जीने का आनंद लोकतंत्र के माध्यम से मिला उसे निजता के हनन द्वारा छिना क्यों जा रहा है?
  • तकनीक और अधिकारों के बीच हमेशा से टकराव होते आया है और 21वीं शताब्दी में तो तकनीकी विकास अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच चुका है। ऐसे में निजता को राज्य की नीतियों और तकनीकी उन्नयन की दोहरी मार झेलनी पड़ी।
  • आज हम सभी स्मार्टफोंस का प्रयोग करते हैं। चाहे एपल का आईओएस हो या गूगल का एंड्राइड या फिर कोई अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम, जब हम कोई भी एप डाउनलोड करते हैं, तो यह हमारे फ़ोन के कॉन्टेक्ट, गैलरी और स्टोरेज़ आदि के प्रयोग की इज़ाज़त मांगता है और इसके बाद ही वह एप डाउनलोड किया जा सकता है।
  • ऐसे में यह खतरा है कि यदि किसी गैर-अधिकृत व्यक्ति ने उस एप के डाटाबेस में सेंध लगा दी तो उपयोगकर्ताओं की निजता खतरे में पड़ सकती है।
  • तकनीक के माध्यम से निजता में दखल, राज्य की दखलंदाज़ी से कम गंभीर है। हम ऐसा इसलिये कह रहे हैं क्योंकि तकनीक का उपयोग करना हमारी इच्छा पर निर्भर है, किन्तु राज्य प्रायः निजता के उल्लंघन में लोगों की इच्छा की परवाह नहीं करता।
  • आधार का मामला इसका जीता जागता उदाहरण है। जब पहली बार आधार का क्रियान्वयन आरंभ किया गया तो कहा यह गया कि यह सभी भारतीयों को एक विशेष पहचान संख्या देने के उद्देश्य से लाई गई है। जल्द ही मनरेगा सहित कई बड़ी योजनाओं में बेनिफिट ट्रान्सफर के लिये आधार अनिवार्य कर दिया गया।
  • यहाँ तक कि आधार पर किसी भी प्रकार के विचार-विमर्श से किनारा करते हुए इसे मनी बिल यानी धन विधेयक के तौर पर संसद में पारित कर दिया गया। इन सभी बातों से पता चलता है कि निजता जो कि लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने के लिये आवश्यक है, गंभीर खतरे में है।

गोपनीयता का उल्लंघन –

  • सोशल मीडिया चैनलों और साइटों पर गोपनीयता भंग होने के अधिक मामले देखे जा सकते हैं, जिसमें साइबर अपराधियों द्वारा व्यक्ति के जीवन को नष्ट करने वाले जघन्य अपराध करने के लिए लोगों की व्यक्तिगत जानकारी और डेटा को हैक किया जाता है।
  • कई हैकर्स हमारे सोशल मीडिया और बैंकिंग खातों में घुस जाते हैं और लीक हुई जानकारी के जरिए पैसा कमाने के लिए संवेदनशील डेटा चुरा लेते हैं।
  • इतना ही नहीं, बल्कि कई अन्य क्षेत्र भी हैं जो गोपनीयता के उल्लंघन से पीड़ित हैं। इसलिए, यह एक प्रमुख चिंता का विषय है और सरकार को इससे निपटना चाहिए।

इंटरनेट के उपयोग के साथ, इस युग में, फेसबुक और ट्यूटर जैसे सामाजिक नेटवर्क सामाजिक संपर्क के नए रूपों को चला रहे हैं और उपलब्धता ने गोपनीयता संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है। इसके लिए सरकार को साइबर सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करना चाहिए और कानून के माध्यम से आश्वासन देना चाहिए कि निजता के अधिकार का उल्लंघन  न हो और निजी जानकारी को निजी रखा जाये।

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Essays

Essay on Right to Privacy & Technological Development

Essay on Right to Privacy & Technological Development :

Introduction :

”Privacy is one of the biggest problems in this new electronic age.” The above statement signifies the importance of privacy issues in this technology driven era. In today’s world we are highly dependent on internet and information technology for our personal and official activities. Currently more than 825 million people are using internet that shows the high dependency on internet which leads to privacy issues in India. Each member of the society has certain level of privacy which is an intrinsic part of his life and that’s why it should be protected by our government.

  • With the rapid technological advancement we have entered a new would where we can access anything in just a few clicks.
  • We also share a lot of information on social media plateforms like Facebook, WhatsApp and Instagram.
  • The applications (Apps) we use can access our personal information like our contact details, phone status and our location.
  • But we are not exactly aware how this information is being used by these plateforms and hence there is a great chance of misuse of this data. It can breach our privacy and
  • can cause serious repercussions in the form of cyber attacks, fake news, communal violence, hatred in society and even can be a threat to the internal security of our country.
  • We have also seen the issues related to Aadhar card in 2017 and recently Pagasues issues which is a spyware that leaks the details of the prominent personalities in India.
  • Thus, there is a need to strengthen the privacy of the people by enacting strong data protection laws in India.

Conclusion :

Although the Part 3 of our constitution provides ‘Fundamental Rights’ and Article 21 includes ‘Right to privacy’ and government has enacted Information Technology Act, 2000 but these are not enough with respect to present scenario. People should be aware of the threats involve on the internet and they can use the proper security measures like using antivirus and strong passwords to keep their data safe. Digital literacy programmes should also be organized to aware the people. “As technological development is a boon for our society but on the other hand it can also pose many serious harms to our privacy and personal life.”

Short essay on WhatsApp New Privacy Policy

Introduction :

Social media is a boon for human civilization because it has brought the whole world together at one place where individuals can share their views and ideas and such interactions are beneficial for the people as it helps in increasing social skills. In today’s world, technology has made our life easier because with the help of technology we can learn new things and meet new people all over the world.

  • WhatsApp is one of the most important social applications which plays a major role in our daily life. WhatsApp is facing a lot of criticism for its new privacy policy which says that it may share information of any of its users with Facebook and its partner companies. 
  • Since then there has been a huge rise in the dounloads of its alternative apps including Signal. In response to global criticism, WhatsApp head Will Cathcart explained , with end-to-end encryption, they cannot see the users private chats or calls and neither can Facebook.
  • WhatsApp has also given users time till 8th of February 2021  to accept the new terms and conditions. WhatsApp says it is collecting new information from users device such as Battery level, app version, browser information, mobile network, IP address and phone number etc.
  • It also declares that the data in some cases can be transferred to the USA or other parts where Facebook’s affiliate companies are based.
  • This new update has increased a lot of concern over the privacy of the people that use this application.

Conclusion :

Privacy experts have also criticised this new privacy policy. Indian users are more vulnerable as there is no any data protection law in India. If India had a data protection law, WhatsApp would not have been able to launch this new policy update. The government should also initiate some digital awareness programs to make the public aware of the importance of digital privacy in India.

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Essays

Essay on role of youth in making india corruption free

Essay on role of youth in making india corruption free

Introduction :

“The youth of a nation is the trustees of prosperity.” These lines of Benjamin Franklin truly justifies that youth are the backbone of a country for its development. No country can expect its better future if it is filled with crime and corruption. Corruption has now spread deep into the society and has become very strong due to its many roots. There are many forms of corruption such as bribery, black-marketing, deliberately increasing the price, selling expensive by bringing cheap goods etc. Corruption can be of different types which is spread in every field like education, sports, politics.

  • Due to corruption, a person does not understand his responsibilities. Corruption can happen in many ways like theft, dishonesty, misuse of public property, unnecessary waste of time, exploitation, scam etc.
  • Recently, corruption was at its peak during lockdown period and people are forced to face it.
  • Corruption is the problem of all developing countries, the main reason for corruption is the flexible laws of the country.
  • Most of the corrupt are acquitted on the basis of money, the criminal is not afraid of punishment.
  • Greed and dissatisfaction is a disorder that makes a person fall down a lot. There is always a strong desire to increase one’s wealth in the mind of a person.
  • Due to the flexibility of our constitution, there is not much fear of punishment among the criminals. Therefore, there is a need to make strict laws against corruption.

Conclusion :

Although Central Vigilance Commission (CVC), Lokpal and Lokayukts are there for surveillance. Moreover, there are many laws in India like The Prevention of Corruption Act (POCA), 1988 and The Prevention of Money laundering Act, 2002 to curb the corruption but without passionate involvement of youth in fighting against corruption, we can’t get rid of it permanently. Youth has willpower and energy to aware others and also has knowledge of social media to make people together against all types of corrupt activities. Youth can also take an oath that they won’t get involve themselves in corruption in future. Just like a small lamp can remove the darkness of the entire room, a single honest person can remove the corruption from the society to a great extent.

Corruption essay in english for students :

Introduction :

Corruption is the misuse of public property, position, power and authority for fulfilling the selfish purposes to gain personal satisfactions. Corruption is the misuse of authority for personal gain of an individual or group. It is the unfair use of public power for some private advantages by breaking some rules and regulations made by government. Now a day, it has been spread deeply in the society and has become very strong because of its lots of roots. It is like a cancer which once generated cannot be ended without medicine.

  • Corruption is of different types which has been spread in every filed like education, sports, games, politics, etc. Because of the corruption, one does not understand his responsibilities at work place.
  • Corruptions are like theft, dishonesty, wastage of public property, wastage of time unnecessarily, exploitation, scams, scandals, etc are the various types of corruption. (Corruption essay in english)
  • It has made its roots in both developing and well developed countries. We need to remove corruption from our society and country in order to get real freedom from the slavery. 
  • We have forgotten the real responsibility of being a human just because of the money. We need to understand that money is not everything and it is not a stable thing.
  • We cannot keep it forever to us, it can only give us greediness and corruption. We should give importance to the value based life and not money based life.
  • It is true that we need lot of money to live a common life however it is not true that just for our selfishness and greediness; we should play someone’s life or money in some unfair ways.  (Essay on Corruption in India)
  • India is a famous country for its democracy but it is corruption which disturbs its democratic system. Politicians are highly responsible for all type of corruption in the country.

Conclusion :

We chose our leaders by having lots of expectations to them to lead our country in the right direction. We should select very honest and trustworthy leaders to lead our India just like our earlier Indian leaders such as Lal Bahadur Shastri, Sardar Vallabh Bhai Patel, etc. Only such political leaders can reduce and finally end the corruption from India. Youths of the country should also need to be aware of all the reasons of corruption and get together to solve it.  (corruption essay in english easy words)

 

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Essays

Essay on Omicron in hindi

Essay on Omicron in hindi :

Introduction :

“जीवन एक साइकिल की सवारी करने जैसा है अपना संतुलन बनाए रखने के लिए, आपको चलते रहना होगा।” अल्बर्ट आइंस्टीन की उपरोक्त पंक्ति पूरी तरह से कोविड-19 की वर्तमान स्थिति को प्रकट करती है। कोविड-19 की दूसरी लहर ने हमें बहुत कुछ सिखाया है और इसके प्रभाव को भुलाया नहीं जा सकता। हाल ही में अफ्रीका में कोविड-19 के एक नए प्रकार का पता चला है जिसे ओमिक्रॉन कहा जाता है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा “वेरिएंट ऑफ़ कंसर्न” के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ओमिक्रॉन को विश्व स्तर पर प्रमुख रूप से डेल्टा प्लस के साथ-साथ कोविड-19 वेरिएंट की सबसे अधिक घातक श्रेणी में रखा गया है।

  • इस संस्करण (वेरिएंट) में बड़ी संख्या में उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) होते हैं। यह गंभीर चिंता का कारण हैं क्योंकि ये नए संस्करण टीके से प्राप्त प्रतिरक्षा से बचने में शक्षम हैं।
  • वर्तमान टीके डेल्टा वेरिएंट के साथ साथ ओमिक्रॉन से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक हैं। ओमिक्रॉन बड़ी चिंता का कारण इसलिए है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में म्यूटेशन होता हैं जिससे इसकी संप्रेषणीयता में वृद्धि हुई है।
  • भारत में टीकाकरण अभियान ने गति पकड़ ली है। 40 प्रतिशत से अधिक भारतीयों को पूरी तरह से टीका लगाया गया है और 80 प्रतिशत से अधिक लोगो ने कम से कम पहली डोज़ ले ली है।
  • हमें इस नए संस्करण से खुद को बचाने के लिए टीका लगवाना चाहिए। टीके के कारण वायरस के संचलन में कमी आती हैं, नए म्यूटेशन की संभावना भी कम हो जाती हैं । अन्य सुरक्षात्मक उपायों के साथ टीकाकरण से हम इस खतरे को और कम कर सकते है और इस वायरस को फैलने से रोका जा सकता है।
  • इन सुरक्षात्मक उपायों में अच्छी तरह से फिट होने वाला मास्क पहनना, शारीरिक दूरी बनाए रखना, इनडोर स्थानों के वेंटिलेशन में सुधार करना, भीड़-भाड़ वाली और बंद जगहों पर जाने से बचना, नियमित रूप से हाथ साफ करना और छीकते वक़्त टिश्यू या रुमाल का इस्तेमाल करना आदि शामिल है।

Conclusion :

सरकार टीकाकरण के लिए निरंतर विभिन्न कदम उठा रही है, जिसमें पात्र समूहों के लिए बूस्टर खुराक सहित सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों को लक्षित करना शामिल है। इसके अलावा सीमित स्थानों पर भीड़ और लोगों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए सामाजिक उपाय किये जा रहे है। हमें विश्व स्वास्थ्य संगठन और सरकार द्वारा जारी किए गए कोविड -19 मानदंडों का भी पालन करना चाहिए ताकि हम जल्द से जल्द इस वायरस की श्रृंखला को तोड़ सकें क्योंकि हमारे बुजुर्ग कहते है न की “रोकथाम इलाज से बेहतर है।”

कोरोना महामारी में जीवन पर निबंध – Essay on Life during covid-19 in hindi

Introduction :

कोरोना महामारी ने हमारे दैनिक जीवन को पूरी बदल कर रख दिया है। इस महामारी के कारण लाखो लोग बुरी तरह से प्रभावित हुए है, जो या तो बीमार हैं या इस बीमारी के फैलने के कारण मारे जा रहे हैं। इस वायरल संक्रमण के सबसे आम लक्षण बुखार, सर्दी, खांसी, हड्डियों में दर्द और सांस लेने में समस्या है। यह, पहली बार लोगों को प्रभावित करने वाला एक नया वायरल रोग होने के कारण, अभी तक इसकी वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसलिए अतिरिक्त सावधानी बरतने पर जोर दिया जाना बहुत जरुरी है, जैसे कि स्वच्छता, नियमित रूप से हाथ धोना, सामाजिक दूरी और मास्क पहनना आदि।

विभिन्न उद्योग और व्यापारिक क्षेत्र इस महामारी के कारण प्रभावित हुए हैं जिनमें फार्मास्यूटिकल्स उद्योग, बिजली क्षेत्र और पर्यटन शामिल हैं। यह वायरस नागरिकों के दैनिक जीवन के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी भारी प्रभाव डाल रहा है। एक देश से दूसरे देश की यात्रा करने पर प्रतिबंध है। यात्रा के दौरान, कोरोना मामलों की संख्या बढ़ते हुए देखी गयी है जब परीक्षण किया गया, खासकर जब वे अंतरराष्ट्रीय दौरे से लौट रहे हों।

  • कोरोना वायरस ने भारत की शिक्षा को प्रभावित किया है। फिलहाल मार्च महीने से लॉकडाउन की वजह से विद्यालय बंद कर दिए गए है। सरकार ने अस्थायी रूप से स्कूलों और कॉलेजों को बंद कर दिया।
  • शिक्षा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण समय है क्यों कि इस अवधि के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। इसके साथ बोर्ड परीक्षाओं और नर्सरी स्कूल प्रवेश इत्यादि सब रुक गए है।
  • शिक्षा संस्थानों के बंद होने का कारण दुनिया भर में लगभग 600  मिलियन शिक्षार्थियों को प्रभावित करने की आशंका जातायी जा रही है।
  • ऑनलाइन क्लासेस के ज़रिये विद्यार्थी इस प्रकार के अनोखे शिक्षा प्रणाली को समझ पाए है।
  • लॉकडाउन के दुष्प्रभाव को ऑनलाइन शिक्षा पद्धति से कम कर दिया है।
  • केंद्र सरकार ने शिक्षा प्रणाली को विकसित करने हेतु पहले साल की तुलना में इस साल व्यय अधिक किया है ताकि कोरोना संकटकाल के नकारात्मक प्रभाव शिक्षा पर न पड़े। सीबीएसई ने विशेष टोल फ्री नंबर लागू किया है जिसके माध्यम से विद्यार्थी घर पर रहकर अधिकारयों से मदद ले सकते है।

बारहवीं कक्षा के विषय संबंधित पुस्तकें ऑनलाइन जारी की गयी है ताकि बच्चो की शिक्षा में बिलकुल बाधा न आये। लॉक डाउन में कुछ बच्चे शिक्षा को लेकर ज़्यादा गंभीर नहीं रहे, वह सोशल मीडिया में चैट मोबाइल में गेम्स खेलते है और अपने कीमती समय को बर्बाद कर रहे थे। अभी माता -पिता की यह जिम्मेदारी है कि लॉकडाउन में भी बच्चे घर पर अनुशासन का पालन करे और ऑनलाइन शिक्षा को गम्भीरतापूर्वक ले और खाली समय में ऑनलाइन एनिमेटेड शिक्षा संबंधित वीडियोस और विभिन्न ऑनलाइन वर्कशीट्स के प्रश्नो को हल करें।

  • कोविड-19 की महामारी ने आज समूचे विश्व की अर्थव्यवस्था, शैक्षिक व्यवस्था तथा सामाजिक स्तर को अत्यंत प्रभावित किया है।
  • कोरोना वायरस ने पुरे विश्व केशक्तिशाली देशों को घुटनो पर लाकर रख दिया है। सारे देश मिलकर कोरोना वायरस से मुक्ति पाने में जुटी है और डॉक्टर्स ,नर्सेज एकजुट होकर लड़ रहे है। उनकी जितनी भी सराहना की जाए कम होगी।
  • नरेंद्र मोदी जी ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कठोर कदम उठाये है जो हमारे देश की भलाई के लिए है और हम सभी को एक भारतीय होने के नाते इस कठोर समय में उनका साथ देना चाहिए ताकि हम देश को रोगमुक्त कर सके। ऐसा करने पर जल्द ही ज़िन्दगी फिर से वापस पटरी पर आ जाएगी। कोरोना वायरस के खिलाफ यह महायुद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक हम इस वायरस को जड़ से ख़त्म ने करे।
  • एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग हो या फिर लैब में लोगों की जांच, सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए कई तरह की तैयारी की है। इसके अलावा किसी भी तरह की अफवाह से बचने, खुद की सुरक्षा के लिए कुछ निर्देश जारी किए हैं जिससे कि कोरोना वायरस से निपटा जा सकता है।

Conclusion :

कोरोनावायरस से बचाव के लिए वर्तमान में कोवैक्सीन तथा कोवीशील्ड नामक दो टीके लगाए जाना शुरू हो चुके है। एक्सपर्ट्स के अनुसार दोनों ही टीके सुरक्षित है। इस वैक्सीन की दो डोज निश्चित समय के अंतराल पर दी जाती है। अभी यह वैक्सीन आयु के अनुसार देश में लगाई जा रही है।लॉकडाउन ने प्रवासी श्रमिकों को भी प्रभावित किया है, जिनमें से कई उद्योगों को बंद करने के कारण अपनी नौकरी खो चुके हैं और सरकार ने प्रवासियों के लिए राहत उपायों की घोषणा भी की ताकि वे अपने अपने घर वापस लौट सके। सभी सरकारें, स्वास्थ्य संगठन और अन्य प्राधिकरण लगातार कोरोना से प्रभावित मामलों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। डॉक्टर और सम्बंधित अधिकारी इन दिनों स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता को बनाए रखने में बहुत कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

कोरोना वायरस का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

Introduction :

कोरोनावायरस (COVID-19) एक संक्रामक रोग है जो कोरोनावायरस के कारण होता है। इसकी शुरुआत पहली बार दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से हुई। डब्ल्यूएचओ ने 30 जनवरी को कोरोनवायरस को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। कोरोनावायरस न केवल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है बल्कि दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर रहा है। विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, व्यापार के मामले में, चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। विश्व के निर्यात का 13% और आयात का 11% केवल चीन से होता है।

दुनिया के कई उद्योग अपने कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। पुरे विश्व में खरीदी जाने वाली लगभग एक तिहाई मशीनरी चीन से आती है, इसलिए कोरोनवायरस ने वैश्विक आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। चीन में कई कारखाने अब बंद हो गए हैं, निर्भर कंपनियों के लिए उत्पादन भी बंद हो गया है। उत्पादन में मंदी के कारण खपत में भी गिरावट आई है और इस तरह से दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है। कोरोनोवायरस फैलने के कारण लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण पर्यटन उद्योग को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कोरोना वायरस का आयात पर प्रभाव

  • इस वायरस से हवाई यात्रा, शेयर बाज़ार, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं सहित लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
  • यह वायरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है।
  • इन दो अर्थव्यवस्थाओं, जिन्हें वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में जाना जाता है, संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है।
  • निवेशकों के बाज़ारों से बाहर निकलने के कारण शेयर बाज़ार सूचकांक में लगातार गिरावट आई है। लोग बड़ी राशि को अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र यथा- ‘सरकारी बाॅण्ड’ में लगा रहे हैं जिससे कीमतों में तेज़ी तथा उत्पादकता में कमी देखी गई है।
  • अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब अनुभव हाल ही में कोरोना वायरस के कारण महसूस किया गया, ध्यातव्य है कि अमेरिकी बाज़ार में 12% से अधिक की गिरावट आई है।
  • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि जो निवेशक ऐसे संकट के समय सामान्यत: स्वर्ण में निवेश करते हैं, इस संकट के समय उन्होंने इसका भी बहिष्कार कर दिया जिससे सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, तथा लोगों ने सरकारी गारंटी युक्त ‘ट्रेज़री बिल’ (Treasury Bills) में अधिक निवेश करना उचित समझा।
  • Apple, Nvidia, Adidas जैसी कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ये चीन के आपूर्तिकर्त्ताओं पर निर्भर हैं, इन्हें भविष्य में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव

  • भारत जब अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में इस वायरस का केवल सतही प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा ऐसे कठिन समय में समस्या का समाधान मात्र ‘एयर लिफ्टिंग’ से संभव नहीं है।
  • यह समस्या न केवल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करेगी, अपितु यह भारत के फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।
  • निर्यात, जिसे अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है, इसमें वैश्विक मंदी की स्थिति में और गिरावट देखी जा सकती है, साथ ही निवेश में भी गिरावट आ सकती है।
  • भारतीय कंपनियाँ चीन आधारित ‘वैश्विक आपूर्ति शृंखला’ में शामिल प्रमुख भागीदार नहीं हैं, अत: भारतीय कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित नहीं होंगी।
  • दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जो कि वृहद् अर्थव्यवस्था और उच्च मुद्रास्फीति के चलते अच्छी खबर है।
  • भारत सरकार को लगातार विकास की गति का अवलोकन करने की आवश्यकता है, साथ ही चीन पर निर्भर भारतीय उद्योगों को आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करनी चाहिये।
  • कोरोना वायरस जैसी बीमारी की पहचान, प्रभाव, प्रसार एवं रोकथाम पर चर्चा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जानी चाहिये ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।

Conclusion :

वायरस जनित यह संकट किसी अन्य वित्तीय संकट से बिलकुल अलग है। अन्य वित्तीय संकटों का समाधान समय-परीक्षणित उपायों जैसे- दर में कटौती, बेल-आउट पैकेज (विशेष वित्तीय प्रोत्साहन) आदि से किया जा सकता है, परंतु वायरस जनित संकट का समाधान इन वित्तीय उपायों द्वारा किया जाना संभव नहीं है। ऑटोमोबाइल उद्योग पहले ही आर्थिक मंदी के कारण संकट में है और अब माल और सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन में कमी आ रही है। चीन से आपूर्ति में रुकावट के कारण वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है। यद्यपि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कोरोनोवायरस के सटीक प्रभाव को निर्धारित करना मुश्किल है, फिर भी यह स्पष्ट है कि यह प्रभाव लंबे समय तक रहेगा।

अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का प्रभाव पर निबंध

Introduction :

कोरोना वायरस एक प्रकार का वायरस है जो मानव और अन्य स्तनधारियों के श्वसन पथ को प्रभावित करता है। ये सामान्य सर्दी, निमोनिया और अन्य श्वसन लक्षणों से जुड़े हैं। कोरोना वायरस दुनिया भर में बीमारी बन गया है और दुनिया के सभी देश इसका सामना कर रहे हैं। जिसके कारण दुनिया की आबादी अपने घर के अंदर रहने को मजबूर है। कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण देश में 53% तक व्यवसाय प्रभावित हुए है।

कोरोना वायरस का प्रकोप सबसे पहले 31 दिसंबर, 2019 को चीन के वुहान में पड़ा। विश्व स्वास्थ्य संगठन इसको रोकने के उपायों के बारे में देशों को सलाह देने के लिए वैश्विक विशेषज्ञों, सरकारों और अन्य स्वास्थ्य संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है। व्यापार के मामले में, चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। चीन विश्व के कुल निर्यात का 13% और आयात का 11% हिस्सेदार है।

इसका असर भारतीय उद्योग पर पड़ेगा। भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक आयात चीन से करीब 45% है। दुनिया भर में भारत से खरीदी जाने वाली लगभग एक तिहाई मशीनरी चीन से आती है और लगभग 90% मोबाइल फोन चीन से आते हैं। इसलिए, हम कह सकते हैं कि कोरोनावायरस के मौजूदा प्रकोप के कारण, चीन पर आयात निर्भरता का भारतीय उद्योग पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। देश भर में बड़ी संख्या में किसानों को भी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

  • इस वायरस से हवाई यात्रा, शेयर बाज़ार, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं सहित लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
  • यह वायरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है।
  • इन दो अर्थव्यवस्थाओं, जिन्हें वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में जाना जाता है, संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है।
  • निवेशकों के बाज़ारों से बाहर निकलने के कारण शेयर बाज़ार सूचकांक में लगातार गिरावट आई है। लोग बड़ी राशि को अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र यथा- ‘सरकारी बाॅण्ड’ में लगा रहे हैं जिससे कीमतों में तेज़ी तथा उत्पादकता में कमी देखी गई है।
  • अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब अनुभव हाल ही में कोरोना वायरस के कारण महसूस किया गया, ध्यातव्य है कि अमेरिकी बाज़ार में 12% से अधिक की गिरावट आई है।
  • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि जो निवेशक ऐसे संकट के समय सामान्यत: स्वर्ण में निवेश करते हैं, इस संकट के समय उन्होंने इसका भी बहिष्कार कर दिया जिससे सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, तथा लोगों ने सरकारी गारंटी युक्त ‘ट्रेज़री बिल’ (Treasury Bills) में अधिक निवेश करना उचित समझा।
  • Apple, Nvidia, Adidas जैसी कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ये चीन के आपूर्तिकर्त्ताओं पर निर्भर हैं, इन्हें भविष्य में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव

  • भारत जब अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में इस वायरस का केवल सतही प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा ऐसे कठिन समय में समस्या का समाधान मात्र ‘एयर लिफ्टिंग’ से संभव नहीं है।
  • यह समस्या न केवल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करेगी, अपितु यह भारत के फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।
  • निर्यात, जिसे अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है, इसमें वैश्विक मंदी की स्थिति में और गिरावट देखी जा सकती है, साथ ही निवेश में भी गिरावट आ सकती है।
  • भारतीय कंपनियाँ चीन आधारित ‘वैश्विक आपूर्ति शृंखला’ में शामिल प्रमुख भागीदार नहीं हैं, अत: भारतीय कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित नहीं होंगी।
  • दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जो कि वृहद् अर्थव्यवस्था और उच्च मुद्रास्फीति के चलते अच्छी खबर है।
  • भारत सरकार को लगातार विकास की गति का अवलोकन करने की आवश्यकता है, साथ ही चीन पर निर्भर भारतीय उद्योगों को आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करनी चाहिये।
  • कोरोना वायरस जैसी बीमारी की पहचान, प्रभाव, प्रसार एवं रोकथाम पर चर्चा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जानी चाहिये ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।
  • वायरस जनित यह संकट किसी अन्य वित्तीय संकट से बिलकुल अलग है। अन्य वित्तीय संकटों का समाधान समय-परीक्षणित उपायों जैसे- दर में कटौती, बेल-आउट पैकेज (विशेष वित्तीय प्रोत्साहन) आदि से किया जा सकता है, परंतु वायरस जनित संकट का समाधान इन वित्तीय उपायों द्वारा किया जाना संभव नहीं है।

Conclusion :

ऑटोमोबाइल उद्योग पहले ही आर्थिक मंदी के कारण संकट में है और अब माल और सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन में कमी आ रही है। होटल और एयरलाइंस जैसे विभिन्न व्यवसाय अपने कर्मचारियों का वेतन काट रहे हैं और छंटनी भी कर रहे हैं। भारत में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों ने अस्थायी रूप से काम को निलंबित कर दिया है। चीन से आपूर्ति में रुकावट के कारण वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है। यद्यपि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कोरोनोवायरस के सटीक प्रभाव को निर्धारित करना मुश्किल है, फिर भी यह स्पष्ट है कि यह प्रभाव लंबे समय तक रहेगा। विश्व बैंक और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने 2021 के लिए भारत की वृद्धि को कम कर दिया है, हालांकि, वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत के लिए जीडीपी विकास दर का आकलन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष  ने 1.9% बताया है जो जी -20 देशों में सबसे अधिक है।

भारत में COVID-19 का सामाजिक प्रभाव पर निबंध

Introduction :

कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी एक वैश्विक समस्या बन चुकी है और इस बीमारी का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार ने 24 मार्च, 2020 को देश में लॉकडाउन लागू किया। सरकार ने कोरोनोवायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में सफलता का दावा किया है, जिसमें कहा गया है कि यदि राष्ट्रव्यापी तालाबंदी नहीं की गई होती तो यहाँ COVID-19 मामलों की संख्या अधिक होती। COVID-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन में हमारे खानपान से लेकर हमारी कार्यशैली बदल चुकी है जिसके कारण शारीरिक गतिविधियो में कमी आयी है जिसके कारण मोटापा, मधुमेह और हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा दिया है।

कोरोना वायरस की वजह से कारोबार ठप्प पड़ गए हैं, कई देशों में अंतरराष्ट्रीय यात्राएं रद्द कर दी गई हैं, होटल-रेस्त्रां तो बंद कर दिए गए हैं, कई कंपनियां ख़ासतौर पर, आईटी सेक्टर की कंपनियों ने लोगों को वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की सुविधा दे रही हैं। दुनिया भर के क्षेत्रों में इस महामारी का प्रभाव दिखाई दे रहा है, लेकिन भारत में कमज़ोर वर्गों, महिलाओं और बच्चों पर इसका प्रभाव सबसे अधिक हुआ है। लॉकडाउन के परिणामस्वरूप, समाज के कमजोर वर्ग के बीच कुपोषण की संभावना बढ़ गयी है।

भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने हाल ही में COVID-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई में सरकार की पहल के रूप में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्ना योजना (PMGKAY) के तहत 12.96 लाख मीट्रिक टन अनाज आवंटित किया। प्रवासी श्रमिकों का मुद्दा इस महामारी का सबसे प्रमुख मुद्दा रहा, जहाँ लाखों लोग बेरोजगार हो गए और बिना पैसे, भोजन और आश्रय के अपने अपने घरो तक पैदल जाने को मजबूर हुए हलाकि सरकार ने बाद में उनके वापस लौटने की व्यवस्था भी कराई।

शिक्षा के क्षेत्र में

  • अप्रैल माह के अंत में जब विश्व के अधिकांश देशों में लॉकडाउन लागू किया गया तो विद्यालयों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था, जिसके कारण विश्व के लगभग 90 प्रतिशत छात्रों की शिक्षा बाधित हुई थी और विश्व के लगभग 1.5 बिलियन से अधिक स्कूली छात्र प्रभावित हुए थे।
  • कोरोना वायरस के कारण शिक्षा में आई इस बाधा का सबसे अधिक प्रभाव गरीब छात्रों पर देखने को मिला है और अधिकांश छात्र ऑनलाइन शिक्षा के माध्यमों का उपयोग नहीं कर सकते हैं, इसके कारण कई छात्रों विशेषतः छात्राओं के वापस स्कूल न जाने की संभावना बढ़ गई है।
  • नवंबर 2020 तक 30 देशों के 572 मिलियन छात्र इस महामारी के कारण प्रभावित हुए हैं, जो कि दुनिया भर में नामांकित छात्रों का 33% है।

लैंगिक हिंसा में वृद्धि

  • लॉकडाउन और स्कूल बंद होने से बच्चों के विरुद्ध लैंगिक हिंसा की स्थिति भी काफी खराब हुई है। कई देशों ने घरेलू हिंसा और लैंगिक हिंसा के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।
  • जहाँ एक ओर बच्चों के विरुद्ध अपराध के मामलों में वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर अधिकांश देशों में बच्चों एवं महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा की रोकथाम से संबंधित सेवाएँ भी बाधित हुई हैं।

आर्थिक प्रभाव

  • वैश्विक स्तर महामारी के कारण वर्ष 2020 में बहुआयामी गरीबी में रहने वाले बच्चों की संख्या में 15% तक बढ़ोतरी हुई है और इसमें अतिरिक्त 150 मिलियन बच्चे शामिल हो गए हैं।
  • बहुआयामी गरीबी के निर्धारण में लोगों द्वारा दैनिक जीवन में अनुभव किये जाने वाले सभी अभावों/कमी जैसे- खराब स्वास्थ्य, शिक्षा की कमी, निम्न जीवन स्तर, कार्य की खराब गुणवत्ता, हिंसा का खतरा आदि को समाहित किया जाता है। 
  • महामारी का दूसरा सामाजिक प्रभाव ‘नस्लभेदी प्रभाव’ का उत्पन्न होना है। जैसा कि हमें मालूम है इस बीमारी की शुरुआत चीन से हुई है इसलिए चीनी नागरिकों को आगामी कुछ वर्षो तक इस महामारी के चलते जाना-पहचाना जा सकता है।
  • भारत में तो नॉर्थ ईस्ट के भारतीयों पर पहले से ही चीनी, नेपाली, चिंकी-पिंकी, मोमोज़ जैसी नस्लभेदी टिप्पणियां होती रही हैं। अब इस क्रम में कोरोना का नाम भी जुड़ना तय है, जिसे एक सामाजिक समस्या के रूप में देखा जाना चाहिए। 

इस सम्बन्ध में उपाय

  • सभी देशों की सरकारों को डिजिटल डिवाइड को कम करके यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिये कि सभी बच्चों को सीखने के समान अवसर प्राप्त हों और किसी भी छात्र के सीखने की क्षमता प्रभावित न हो।
  • सभी की पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित की जानी चाहिये और जिन देशों में टीकाकरण अभियान प्रभावित हुए हैं उन्हें फिर से शुरू किया जाना चाहिये।
  • बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाना चाहिये और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और लैंगिक हिंसा जैसे मुद्दों को संबोधित किया जाना चाहिये।

Conclusion :

सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता आदि तक बच्चों की पहुँच को बढ़ाने का प्रयास किया जाए और पर्यावरणीय अवमूल्यन तथा जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को संबोधित किया जाए। बाल गरीबी की दर में कमी करने का प्रयास किया जाए और बच्चों की स्थिति में समावेशी सुधार सुनिश्चित किया जाए। सरकार को समस्याओं के समाधान को खोजने का प्रयास करना चाहिए ताकि ऐसी समस्याएँ दोबारा पैदा न हो। इस वायरस से लड़ने के लिए सभी व्यक्तियों, सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों को एकसाथ मिलकर योजना बनाकर सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।

पर्यावरण पर कोरोना वायरस का सकारात्मक प्रभाव पर निबंध

Introduction :

कोरोना वायरस दुनिया भर में महामारी बन चुका है और सभी देश इसका सामना कर रहे हैं। जिसके कारण सभी देशो के लोग अपने घरो के अंदर रहने को मजबूर है। कोरोना वायरस के कारण देश में व्यावसायिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोरोनोवायरस ने दुनिया भर में बहुत सारे लोगों का जीवन ले चूका है। कोरोनोवायरस के प्रसार को रोकने के लिए, विभिन्न देशों की सरकारें इसके प्रसार को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठा रही हैं। जहां तक हमारे पर्यावरण का सवाल है, इसपर कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे है। अब धुएँ का उत्सर्जन कम हो गया है जिसके परिणामस्वरूप आसमान स्वच्छ हो गया है।

यही नहीं, सड़को पर वाहनों का उपयोग भी कम हुआ है, जिसके कारण  CO2 गैसों का उत्सर्जन भी काम हुआ है। और अन्य गैसे, जैसे नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी पर्यावरण में सीमित हो पाया है। यह इंगित करता है कि हवा अधिक शुद्ध हो गई है और हम शुद्ध हवा में सांस ले सकते हैं। कोरोनावायरस से निपटने के लिए, कंपनियों ने श्रमिकों को घर से काम करने के लिए कहा है। इससे सड़क पर वाहन कम हो गए हैं। इसके अलावा, प्लास्टिक की खपत भी कम हो गई है क्योंकि अब लोग डिस्पोजेबल ग्लास का प्रयोग चाय या कॉफी के लिए नहीं कर रहे है।

पर्यावरण को फायदा

  • भारत में कई राज्यों से उन नदियों के अचानक साफ हो जाने की ख़बरें आ रही हैं जिनके प्रदूषण को दूर करने के असफल प्रयास दशकों से चल रहे हैं. दिल्ली की जीवनदायिनी यमुना नदी के बारे में भी ऐसी ही ख़बरें आ रही हैं.
  • पिछले दिनों सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें आईं जिन्हें डालने वालों ने दावा किया कि दिल्ली में जिस यमुना का पानी काला और झाग भरा हुआ करता था, उसी यमुना में आज कल साफ पानी बह रहा है. 
  • झील नगरी नैनीताल समेत भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल सभी में झीलों का पानी न केवल पारदर्शी और निर्मल दिखाई दे रहा है, बल्कि इन झीलों की खूबसूरती भी बढ़ गई है.
  • पिछले कई साल से झील के जलस्तर में जो गिरावट दिखती थी, वह भी इस बार नहीं दिख रही. पर्यावरणीय तौर पर इस कारण हवा भी इतनी शुद्ध है कि शहरों से पहाड़ों की चोटियां साफ दिख रही हैं.
  • उत्तराखंड स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के निदेशक के अनुसार हिमालय की धवल चोटियां साफ दिखने लगी हैं. लॉकडाउन के कारण वायुमंडल में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिला है. इससे पहले कभी उत्तर भारत के ऊपरी क्षेत्र में वायु प्रदूषण का इतना कम स्तर देखने को नहीं मिला.

लॉकडाउन के बाद 27 मार्च से कुछ इलाकों में रूक-रूक के बारिश हो रही है. इससे हवा में मौजूद एयरोसॉल नीचे आ गए. यह लिक्विड और सॉलिड से बने ऐसे सूक्ष्म कण हैं, जिनके कारण फेफड़ों और हार्ट को नुकसान होता है. एयरोसॉल की वजह से ही विजिबिलिटी घटती है. जिन शहरों की एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI ख़तरे के निशान से ऊपर होते थे. वहां आसमान गहरा नीला दिखने लगा है. न तो सड़कों पर वाहन चल रहे हैं और न ही आसमां में हवाई जहाज. बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों जैसे अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी गिरावट आई है. इससे वातावरण में डस्ट पार्टिकल न के बराबर हैं और कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन भी सामान्य से बहुत अधिक नीचे आ गया है. इस तरह की हवा मनुष्यों के लिए बेहद लाभदायक है. अगर देखा जाये तो झारखंड के भी शहरों में इस लॉकडाउन का प्रभाव दिखा रहा है.

  • झारखण्ड की राजधानी रांची के कुछ जगहों में मोर देखे जाने की भी सूचना है. रूक रूक के बारिश भी हो रही है. लोग एयर कंडीशनर और कूलर का भी इस्तेमाल नहीं के बराबर कर रहे हैं जो की इस गर्मी के मौसम में एक आश्चर्य घटना है.
  • ध्वनि प्रदूषण भी अभूतपूर्व ढंग से कम हो गया है. तापमान ज्य़ादा होने पे भी उतनी गर्मी नहीं लग रही है जितनी पिछले साल थी.
  • बता दें कि कई महीनों से झारखंड में वाहन प्रदूषण के खिलाफ़ जांच अभियान चलाया जा रहा था. जगह-जगह दोपहिये एवं चार पहिये वाहन, मिनी बस और टेंपो समेत विभिन्न कॉमर्शियल वाहनों के प्रदूषण स्तर को चेक किया जा रहा था और निर्धारित मात्रा से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जा रही थी.
  • इसके बाद भी न तो वाहनों द्वारा छोड़े जा रहे प्रदूषणकारी गैसों की मात्रा कम हो रही थी और न ही वायु प्रदूषण में कमी आ रही थी. लेकिन, कोरोना के भय से सड़क पर चलने वाले वाहनों की संख्य़ा में आयी भारी गिरावट आने के कारण पिछले दो महीनों से से इसमें काफी सुधार दिखता है.
  • वाहनों की आवाजाही न होने से सड़कों से अब धूल के गुबार नहीं उठ रहे हैं. झारखंड का एयर क्वालिटी इंडेक्स वायु प्रदूषण के कम हो जाने से 50-40 के बीच आ गया है जो पिछले साल 150 से 250 तक रहता था.
  • ये हवा मनुष्य के स्वस्थ लिए फायदेमंद है. वायु और धूल प्रदूषण के काफी कम हो जाने से आसमन में रात को सारे तारे दिखा रहे हैं जो पहले नहीं दीखते थे. 
  • ध्वनि प्रदूषण तो इतना कम है की आपकी आवाज दूर तक सुनाई दे रही है. चिड़ियों का चहचहाना सुबह से ही शुरू हो जा रहा है.कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कहा की रात दो बजे भी चिड़ियों की आवाज़ सुनाई दे रही है ख़ासकर कोयल और बुलबुल की. कुछ ऐसी भी चिड़ियाँ नज़र आ रही हैं जो पहले कम दिखती थीं. 

Conclusion :

इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में, जहाँ हम सभी व्यस्त जीवन जी रहे है, हमें हमारी गतिविधियों के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में भी सोचना चाहिए  हालाँकि, अब लॉकडाउन के कारण हम घर पर रहने को मजबूर हैं, हमारे पास अपनी गतिविधियों के बारे में सोचने और सुधार करने के लिए पर्याप्त समय मिल चूका है। इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता कि कोरोनोवायरस का मानव जाति पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। हालांकि, इसने पर्यावरण पर निश्चित रूप से  सकारात्मक प्रभाव डाले है।

कोविड 19 वैक्सीन पर निबंध

Introduction :

भारत सरकार ने एस्ट्रा-ज़ेनेका और भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोविशिल्ड और कोवाक्सिन नाम के कोविड -19 टीकों को मंजूरी दे दी है। इसे देखते हुए हमारे पीएम मोदी जी ने 16 जनवरी, 2021 को कोविड -19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत की, जो हर साल लाखों लोगों की जान बचा सकता है। यह पूरे देश में लागू होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके लिए कुल 3006 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं । हालाँकि भारत में सम्पूर्ण रूप से टीकाकरण करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इसके लिए कम से कम 30 से 40% लोगों का टीकाकरण करने की आवस्यकता होगी ।

  • वैक्सीन हमारे शरीर को किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है. वैक्सीन में किसी जीव के कुछ कमज़ोर या निष्क्रिय अंश होते हैं जो बीमारी का कारण बनते हैं.
  • ये शरीर के ‘इम्यून सिस्टम’ यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण की पहचान करने के लिए प्रेरित करते हैं और उनके ख़िलाफ़ शरीर में एंटीबॉडी बनाते हैं जो बाहरी हमले से लड़ने में हमारे शरीर की मदद करती हैं.
  • वैक्सीन लगने का नकारात्मक असर कम ही लोगों पर होता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके साइड इफ़ेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है.
  • हल्का बुख़ार या ख़ारिश होना, इससे सामान्य दुष्प्रभाव हैं. वैक्सीन लगने के कुछ वक़्त बाद ही हम उस बीमारी से लड़ने की इम्यूनिटी विकसित कर लेते हैं.
  • अमेरिका के सेंटर ऑफ़ डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि वैक्सीन बहुत ज़्यादा शक्तिशाली होती हैं क्योंकि ये अधिकांश दवाओं के विपरीत, किसी बीमारी का इलाज नहीं करतीं, बल्कि उन्हें होने से रोकती हैं.
  • भारत में दो टीके तैयार किए गए हैं. एक का नाम है कोविशील्ड जिसे एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने इसका उत्पादन किया और दूसरा टीका है भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया कोवैक्सीन.

रूस ने अपनी ही कोरोना वैक्सीन तैयार की है जिसका नाम है ‘स्पूतनिक-V’ और इसे वायरस के वर्ज़न में थोड़ बदलाव लाकर तैयार किया गया. इस वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल की अनुमति मिल चुकी है. मॉडर्ना वैक्सीन को भी भारत में इस्तेमाल की मंज़ूरी मिल चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि संक्रमण को रोकने के लिए कम से कम 65-70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगानी होगी, जिसका मतलब है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करना होगा. कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में न सिर्फ करोड़ों लोगों की सेहत को प्रभाव किया है बल्कि समाज के सभी वर्गों में डिप्रेशन, तनाव का कारण भी बनी है. कोविड वैक्सीन लगवाने से एक स्पष्ट और आश्चर्यजनक फायदा मिलता है. ये आपको गंभीर रूप से बीमारी या वायरस की चपेट में आने पर मौत से बचाती है ये अपने आप में खुद हैरतअंगज फायदा है.

  • शोधकर्ताओं का कहना है कि टीकाकरण करानेवाले लोगों को मानसिक स्वास्थ्य मेंमहत्वपूर्ण सुधार का भी अनुभव हो सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि वैक्सीन संभावित तौर पर मानसिक स्वास्थ्य को फायदा पहुंचा सकती है.
  • प्लोस पत्रिका में प्रकाशित रिसर्च का मकसद ये मूल्यांकन करना था कि वैक्सीन का पहला डोज लगवाने से मानसिक परेशानी में कम समय के लिए क्या प्रभाव पड़ते हैं.
  • शोधकर्ताओं ने 8 हजार व्यस्को के मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण रिसर्च के तौर पर 1 मार्च 2020 और 31 मार्च 2021 के बीच किया. रिसर्च में टीकाकरण से संक्षिप्त समय के लिए सीधे प्रभाव का खुलासा हुआ.
  • महत्वपूर्ण बात ये है कि रिसर्च ने टीकाकरण कराने के सरकारात्मक प्रभाव में इजाफा किया. शोधकर्ताओं ने बताया कि हम प्रमाणित करते हैं कि कैसे दिमागी सेहत की परेशानी टीकाकरण करानेवाले और वैक्सीन नहीं लगवानेवालों के बीच अलग हो गई.
  • आर्थिक अनिश्चितता और कोविड-19 से जुड़ी सेहत के जोखिम के बीच तुलना करने पर हमें दिमागी सेहत पर टीकाकरण के कम समय के प्रभाव मालूम हुए. 
  • कोविड-19 वैक्सीन से स्वास्थ्य के जोखिम को कम करने, आर्थिक और सामाजिक नतीजे सुधारने की उम्मीद की जाती है, जिसके बाद दिमागी सेहत के लिए संभावित लाभ होंगे.  डॉक्टर एचके महाजन ने कहा, “कोरोना महामारी ने रोजगार, आय और सेहत समेत लोगों की जिंदगी के कई पहलुओं को प्रभावित किया है.
  • इस वायरल बीमारी के मानसिक पहलू मनोवैज्ञानिक तनाव, चिंता, डिप्रेशन, सामाजिक अलगाव और खुदकुशी के विचार तक सीमित नहीं हैं.” उन्होंने आगे बताया, “बड़े पैमाने पर टीकाकरण ने हर्ड इम्यूनिटी बढ़ाने, लोगों के बीच चिंता कम करने में बड़ा योगदान दिया.
  • उसने आजीविका गंवाने वालों की दोबारा रोजगार के पहलू को भी बढ़ाया. टीकाकरण के गंभीर संक्रमण से सुरक्षा पर जागरुकता फैलने से लोग कोरोना से पहले की स्थिति में धीरे-धीरे लौट रहे हैं. इस तरह ये दिमागी सेहत के मुद्दे जैसे चिंता, डिप्रेशन दूर करने में मदद कर रहा है.”

Conclusion :

वैक्सीन को चरणबद्ध तरीके से लोगो को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके पहले चरण में, सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों का टीकारण किया जाएगा। क्योंकि वे उन लोगों के निकट संपर्क में होते हैं जो कोविड -19 से संक्रमित हैं। फिर इसे पुलिस, सशस्त्र बलों, नगरपालिका कर्मचारियों और अन्य विभागीय कर्मचारियों को प्रदान किया जाएगा। तीसरे चरण में, 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग और वे लोग जिन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप है या जिन्होंने अंग प्रत्यारोपण कराया है, ऐसे लोगो का टीकाकरण किया जाएगा।

उसके बाद, स्वस्थ वयस्कों, किशोरों और बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। केंद्र सरकार स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम कर्मियों पर टीकाकरण का खर्च खुद से वहन करेगी । टीकाकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, सरकार ने CoWIN नामक एक एप्लिकेशन भी विकसित की है, जो कोविड -19 वैक्सीन लाभार्थियों के लिए  वैक्सीन स्टॉक, भंडारण और व्यक्तिगत ट्रैकिंग की सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करने में मददगार साबित हो रही है। कोविड -19 के लिए टीकाकरण भारत में स्वैच्छिक है। यह लोगों को इस बीमारी से बचाने का एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। टीके हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ काम करके बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं।

कोविड 19 वैक्सीन पर निबंध

Introduction :

भारत सरकार ने एस्ट्रा-ज़ेनेका और भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोविशिल्ड और कोवाक्सिन नाम के कोविड -19 टीकों को मंजूरी दे दी है। इसे देखते हुए हमारे पीएम मोदी जी ने 16 जनवरी, 2021 को कोविड -19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत की, जो हर साल लाखों लोगों की जान बचा सकता है। यह पूरे देश में लागू होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके लिए कुल 3006 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं । हालाँकि भारत में सम्पूर्ण रूप से टीकाकरण करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इसके लिए कम से कम 30 से 40% लोगों का टीकाकरण करने की आवस्यकता होगी ।

  • वैक्सीन हमारे शरीर को किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है. वैक्सीन में किसी जीव के कुछ कमज़ोर या निष्क्रिय अंश होते हैं जो बीमारी का कारण बनते हैं. 
  • ये शरीर के ‘इम्यून सिस्टम’ यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण की पहचान करने के लिए प्रेरित करते हैं और उनके ख़िलाफ़ शरीर में एंटीबॉडी बनाते हैं जो बाहरी हमले से लड़ने में हमारे शरीर की मदद करती हैं.
  • वैक्सीन लगने का नकारात्मक असर कम ही लोगों पर होता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके साइड इफ़ेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है. हल्का बुख़ार या ख़ारिश होना, इससे सामान्य दुष्प्रभाव हैं. वैक्सीन लगने के कुछ वक़्त बाद ही हम उस बीमारी से लड़ने की इम्यूनिटी विकसित कर लेते हैं.
  • अमेरिका के सेंटर ऑफ़ डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि वैक्सीन बहुत ज़्यादा शक्तिशाली होती हैं क्योंकि ये अधिकांश दवाओं के विपरीत, किसी बीमारी का इलाज नहीं करतीं, बल्कि उन्हें होने से रोकती हैं.
  • भारत में दो टीके तैयार किए गए हैं. एक का नाम है कोविशील्ड जिसे एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने इसका उत्पादन किया और दूसरा टीका है भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया कोवैक्सीन.
  • रूस ने अपनी ही कोरोना वैक्सीन तैयार की है जिसका नाम है ‘स्पूतनिक-V’ और इसे वायरस के वर्ज़न में थोड़ बदलाव लाकर तैयार किया गया. इस वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल की अनुमति मिल चुकी है. 
  • मॉडर्ना वैक्सीन को भी भारत में इस्तेमाल की मंज़ूरी मिल चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि संक्रमण को रोकने के लिए कम से कम 65-70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगानी होगी, जिसका मतलब है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करना होगा.

कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में न सिर्फ करोड़ों लोगों की सेहत को प्रभाव किया है बल्कि समाज के सभी वर्गों में डिप्रेशन, तनाव का कारण भी बनी है. कोविड वैक्सीन लगवाने से एक स्पष्ट और आश्चर्यजनक फायदा मिलता है. ये आपको गंभीर रूप से बीमारी या वायरस की चपेट में आने पर मौत से बचाती है ये अपने आप में खुद हैरतअंगज फायदा है. शोधकर्ताओं का कहना है कि टीकाकरण करानेवाले लोगों को मानसिक स्वास्थ्य मेंमहत्वपूर्ण सुधार का भी अनुभव हो सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि वैक्सीन संभावित तौर पर मानसिक स्वास्थ्य को फायदा पहुंचा सकती है.

  • प्लोस पत्रिका में प्रकाशित रिसर्च का मकसद ये मूल्यांकन करना था कि वैक्सीन का पहला डोज लगवाने से मानसिक परेशानी में कम समय के लिए क्या प्रभाव पड़ते हैं. 
  • शोधकर्ताओं ने 8 हजार व्यस्को के मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण रिसर्च के तौर पर 1 मार्च 2020 और 31 मार्च 2021 के बीच किया. रिसर्च में टीकाकरण से संक्षिप्त समय के लिए सीधे प्रभाव का खुलासा हुआ.
  • महत्वपूर्ण बात ये है कि रिसर्च ने टीकाकरण कराने के सरकारात्मक प्रभाव में इजाफा किया. शोधकर्ताओं ने बताया कि हम प्रमाणित करते हैं कि कैसे दिमागी सेहत की परेशानी टीकाकरण करानेवाले और वैक्सीन नहीं लगवानेवालों के बीच अलग हो गई. 
  • आर्थिक अनिश्चितता और कोविड-19 से जुड़ी सेहत के जोखिम के बीच तुलना करने पर हमें दिमागी सेहत पर टीकाकरण के कम समय के प्रभाव मालूम हुए. 
  • कोविड-19 वैक्सीन से स्वास्थ्य के जोखिम को कम करने, आर्थिक और सामाजिक नतीजे सुधारने की उम्मीद की जाती है, जिसके बाद दिमागी सेहत के लिए संभावित लाभ होंगे.  डॉक्टर एचके महाजन ने कहा, “कोरोना महामारी ने रोजगार, आय और सेहत समेत लोगों की जिंदगी के कई पहलुओं को प्रभावित किया है.
  • इस वायरल बीमारी के मानसिक पहलू मनोवैज्ञानिक तनाव, चिंता, डिप्रेशन, सामाजिक अलगाव और खुदकुशी के विचार तक सीमित नहीं हैं.” उन्होंने आगे बताया, “बड़े पैमाने पर टीकाकरण ने हर्ड इम्यूनिटी बढ़ाने, लोगों के बीच चिंता कम करने में बड़ा योगदान दिया.
  • उसने आजीविका गंवाने वालों की दोबारा रोजगार के पहलू को भी बढ़ाया. टीकाकरण के गंभीर संक्रमण से सुरक्षा पर जागरुकता फैलने से लोग कोरोना से पहले की स्थिति में धीरे-धीरे लौट रहे हैं. इस तरह ये दिमागी सेहत के मुद्दे जैसे चिंता, डिप्रेशन दूर करने में मदद कर रहा है.”

Conclusion :

वैक्सीन को चरणबद्ध तरीके से लोगो को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके पहले चरण में, सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों का टीकारण किया जाएगा। क्योंकि वे उन लोगों के निकट संपर्क में होते हैं जो कोविड -19 से संक्रमित हैं। फिर इसे पुलिस, सशस्त्र बलों, नगरपालिका कर्मचारियों और अन्य विभागीय कर्मचारियों को प्रदान किया जाएगा। तीसरे चरण में, 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग और वे लोग जिन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप है या जिन्होंने अंग प्रत्यारोपण कराया है, ऐसे लोगो का टीकाकरण किया जाएगा। 

उसके बाद, स्वस्थ वयस्कों, किशोरों और बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। केंद्र सरकार स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम कर्मियों पर टीकाकरण का खर्च खुद से वहन करेगी । टीकाकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, सरकार ने CoWIN नामक एक एप्लिकेशन भी विकसित की है, जो कोविड -19 वैक्सीन लाभार्थियों के लिए  वैक्सीन स्टॉक, भंडारण और व्यक्तिगत ट्रैकिंग की सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करने में मददगार साबित हो रही है। कोविड -19 के लिए टीकाकरण भारत में स्वैच्छिक है। यह लोगों को इस बीमारी से बचाने का एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। टीके हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ काम करके बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं।

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Essays

Essay on Omicron in english

Essay on Omicron : Covid-19 New Variant :

Introduction :

“Life is like riding a bicycle to keep your balance, you must keep moving.” The above line of Albert Einstien fully relates to the present situation of Covid-19. The second wave of Covid-19 has taught us many lessons and its impact cannot be forgotton. Recently a new variant of Covid-19 detected in Southern Africa and it is called Omicron. It has been categorized as “variant of concern” by the World Health Organization (WHO). Omicron is placed in the most-troubling category of Covid-19 variants, along with the globally-dominant Delta plus.

  • This variant has a large number of mutations. Some of them are cause for serious concern because they may allow the new variant to evade immunity obtained from a vaccine.
  • Current vaccines offer protection against Omicron variant, including Delta. Omicron is of great concern as it has a large number of mutations that has increased transmissibility of this varient.
  • In India, the immunisation campaign has gained momentum. More than 40 percent of Indian have been fully vaccinated and more than 80 percent have received at least one dose.
  • We should get vaccinated to protect ourself from this new variant. Vaccines also reduce virus circulation, reducing the chances for a new mutation that could hit us even harder.
  • Combining vaccination with other protective measures further reduce the risk of exposure and prevent ourselves from passing the virus on to others.
  • These protective measures can be wearing a well-fitting mask, maintaining physical distance, improving ventilation of indoor spaces, avoiding crowded, confined and closed places, regularly cleaning hands and sneezing into a tissue.

Conclusion :

Government is also taking various steps continuing to vaccinate, targeting those most at risk, including with booster doses for eligible groups. Apart from that putting in place social measures to prevent crowding and people gathering in confined places. We should also follow the Covid-19 norms which have been issued by WHO and our Government so that we can break the chain of this virus as early as possible because “Prevention is better than cure.”

Essay on Is India Ready For Covid 19 third Wave

Introduction :

“We think we are done with the pandemic, but the pandemic is not done with us.” Said by Gitanjali Pai which goes well with Covid-19 third wave. The way we are treating covid-19, it would not take long to spread covid-19 third wave. As it is much more than a health crisis, it is an economic, psychological and social crisis. The year of 2020 proved to be a nightmare for the entire world. The SARS-Cov-2 virus entered in our country in January, 2020 and in March 2020, the government has declared lockdown in India. Somehow, we managed to come out of the covid-19 first wave.

  • It again strike our nation in its mutant form and thus covid-19 second wave emerged. Now, epidemiologists and various scientist predicted that covid-19 third wave is going to hit our nation in October, 2021.
  • Our nation get shattered by Covid’s second wave. Lack of oxygen supply, hospital beds, medical care and medicines claimed lives of lakhs of people till now.
  • To tackle this deadly virus, we have to work on the following 5 sectors i.e. 1) Vaccination 2) Coordination with private health care sector 3) Inclusion of medical staff 4) Mass awareness and 5) Mass production of Vaccine.
  • In the budget 2021, the government allocated Rs 2.23 lakh crores to the health care sector, which was 137% increase in funds as compared to 2020, but still the second wave of the corona virus was seriously devastating.
  • The nation is however, no way prepared for the covid’s third wave. India lost 2.6 trillion USD from 2020 to 2021, and any longer lockdown or restrictions can be financially harsh for people and especially for the poor.
  • People may die of hunger and poverty instead of corona virus. In case, the nation decides not to impose any lockdown against the third wave, may be even more destructive.
  • It is because of the fact that the problems of oxygen cylinders, requirement of enough beds, side effects of the drugs etc.
  • have not been solved yet. Instead, in may 2021, we experienced a sudden surge in the cases of Black fungus which seriously affects the eye and the nervous system.
  • This disease was a side effect of being on ventilated beds for long or using oxygen concentrator in which tap water is used. There may be even more side effects if the covid’s third wave hits India any sooner.

Conclusion :

People should follow the covid-19 guidelines and government also need to take effective steps against the people breaking these guidelines. Hence, we can say that India is very less prepared for the covid-19 third wave. However, we must trust the technology and the doctors to fight against the upcoming wave. We should also use mark and sanitizer for avoiding covid-19 infection. With increased medical staff, vaccines and medical facilities like oxygen, medicines we can definitely handle the third wave of covid-19 efficiently and effectively.

Essay on Healthcare in India – Major Issues & Challenges

Introduction :

“Health is like money, we will never have a true idea of its value until we lost” is a very significant statement of Josh Billings. According to Webster dictionary, efforts made to maintain or restore physical, mental or emotional well-being especially by trained professionals are known as healthcare services. As per Lancet India ranked 145th among 195 countries in healthcare access & quality”. This index is a mirror that reflects the dire situation of India’s outdated healthcare services in India. The COVID-19 outbreak pushed the limits of the healthcare industry.

  • In an attempt to fill the gaps in the sector, Finance Minister Nirmala Sitharaman announced health and well-being to be one of the six pillars of Union Budget 2021 and also allocated Rs 2,83,846 lakh crore for the healthcare and wellness sector.
  • Marking the importance of Health, World Health Day is celebrated on April 7 every year by the World health organization (WHO) to create awareness among people about health and cleanliness Issues.
  • India’s healthcare scenario has seen both positive and negative achievements. The country has been successful in eradicating polio, reducing epidemics caused by tropical diseases and controlled HIV to a large extent.
  • However, it still faces a huge economic burden due to NCDs (Non Communicable Diseases), struggles to balance
    accessibility, affordability and quality of healthcare.
  • Expenditure on public health funding has been consistently low in India approximately 1.3% of GDP. Private healthcare is expensive and unavailable which leaves public healthcare facilities as the only available option but it has limited scope.
  • Recent news that reported deaths of COVID-19 patients due to lack of hospital beds and oxygen supplies indicate the worse situation of common people amid the pandemic.
  • The availability of government beds is abysmally low in India about 0.55 beds per 1000 population. No single authority responsible for public health that monitors and enforce compliance of the health standards.

Conclusion :

Government of India (GOI) created National Health Agency under NITI Aayog to act as nodal agency for surveillance, information gathering, enforcement of health statistics and maintain health database. The government has already launched Ayushman Bharat Yojna (PM-JAY) and National Medical commission Act, 2019 for poor people and economically weaker section of the society. To strengthen healthcare delivery, policy makers and pharma companies need to devise strategies that can change the present situation. Health is wealth and shouldn’t be treated as a destination. One should understand that preservation of health is better than the cure of a disease.

Healthcare in India – Major Issues & Challenges essay

Introduction :

“Health is like money, we will never have a true idea of its value until we lost” –Josh Billings. Health refers to the physical and mental state of a human being. To stay healthy is not an option but a necessity of life. Still, many people often take Health for granted. The COVID-19 outbreak pushed the limits of the healthcare industry in India. In an attempt to fill the gaps in the sector, Finance Minister Nirmala Sitharaman announced health and well-being to be one of the six pillars of Union Budget 2021 and also allocated Rs 2,83,846 lakh crore for the healthcare and wellness sector.

  • Marking the importance of Health, World Health Day is celebrated on April 7 every year by the World health organisation(WHO) to create awareness among people about health and cleanliness.
  • Issues India’s healthcare scenario has seen both positive and negative achievements. The country has been successful in eradicating polio, reducing epidemics caused by tropical diseases and controlled HIV to a large extent.
  • However, it still faces a huge economic burden due to NCDs (Non Communicable Diseases), struggles to balance
    accessibility, affordability and quality and is unable to hike public health budgets.
  • Expenditure on public health funding has been consistently low in India(approximately 1.3% of GDP). Massive rural healthcare availability gap despite the 71% of the country being predominantly rural.
  • Private healthcare is expensive and unavailable which leaves public healthcare facilities as the only available option but it has limited scope.
  • Therefore rural communities rely on untrained health workers who remain as the only option of medical support.
  • Our healthcare system evolved in a very disorganised manner, in a way that the private sector and the health systems have grown by default and not by design.

Issues and Challenges 

● The availability of government beds is abysmally low in India(0.55 beds per 1000 population), and an epidemic like coronavirus can very quickly complicate the problem even further.

● Sheer number of skilled doctors hinders efficacy of the desired quality of health services.

● No single authority responsible for public health that monitors and enforce compliance of the health standards.

Conclusion :

One of the clearest lessons the pandemic has taught us is the consequences of neglecting our health systems. Henceforth to strengthen healthcare delivery and improve business prospects, policy makers, and pharma companies need to devise
strategies that transform a spark into a sustainable fire. Health is Wealth and shouldn’t be treated as a destination. One should understand that preservation of health is easier than the cure of a disease

Healthcare in India – Major issues and challenges essay in english

Introduction :

According to Webster dictionary, efforts made to maintain or restore physical, mental, or emotional well-being especially by trained and licensed professionals are known as healthcare services. ”India ranked 145th among 195 countries in healthcare access, quality” : Lancet. This index is a mirror that reflects the dire situation of India’s outdated healthcare services.

Challenges before Nationa Healthcare System(NHS):

Lack of effective primary healthcare services (PHS) foremost need for any country that has villege population as a big share and these PHS are confined mainly to maternary and child care.

 Non- professionnal and semiskilled healthcare providers are becoming as avoidable gap to say that the people get adequate and complete services.

 Only 1.3% of GDP was allocated to Healthcare services which indicates inadiquate funding.

 There is no single authority that is empowered to authorize , survellience and information dissemation all over india.

 Recent poignant news articles that reported deaths of COVID-19 patients due to lack of hospital beds and oxygen supplies indicate the situation of common indian amidst a pandemic.

 Awareness about Non communicable diseases and preventive measures before any epidemic is nearly on the ground level for many of us.

What measures we can suggest to get out this peril?

 PHS needed to tranformed into health wellness centres to equip them with all first class service at affordable prices.
 Corporate social responsibility fund must be utilised to avail high-end medical care.
 Swasth bharath jan andolan in the lines of swatch bharath must be promoted.
 Without power and finance dissemation, co-operative federalism has no meaning, that is center and state government must work in tendom.
 India needs atleast 2.5% of GDP for healthcare : Nationa Health Policy , 2017.

Conclusion :

Government of India(GOI) created National Health Agency under NITI Aayog to act as nodal agency for survellience, information gathering , enforcement of health statastics and maintain health database. The passing of amendments to the Medical Termination of Pregnancy Act in India recently is a step forward in recogninizing the health rights of woman. The once in a century pandemic reminded us the need for robust Medical Infrastructural Network. GOI launched PM jan arogya yojana, National Medical commission act, 2019and PM janaushadhi Pariyojana in the hope that no one should be left behind on basis his economical standards because, “ Universal coverage, not medical technology , is the foundation of any health care system.” — Richard Lamm

Essay on Is India Ready For Covid 19 third Wave Vs Essay on Bioterrorism – A Threat To Global Security

Introduction :

Bioterrorism is a type of terrorism which involves intentional release of microorganisms such as viruses, bacteria, fungi, or other toxins to cause illness or death among humans, plants, and livestock and to terrorize the civilian population. These agents are generally found in nature and are altered or mutated in laboratory to be used as a weapon for mass destruction. This type of terrorism can easily be disseminated to cause widespread fear and panic beyond the actual damage. It can be spread through air, water or food.

  • During World War-I and II Japan and Germany embarked on a large scale programs to develop biological weapons using fatal mustard gas.
  • Bacillus Anthracis, the bacteria that causes anthrax, is one of the most likely agents to be used in a biological attack.
  • The Center for Disease Control and Prevention (CDC) ranks the biological agents and diseases that have the potential to be used as weapons into three categories.
  • These are (1) Category A: High-priority agents. Example: Plague, Ebola virus, Anthrax. (2) Category B : Moderate-priority agents having low mortality rate. Example: Brucellosis, Q fever (3) Category C : Low-priority agents.
  • These are emerging pathogens. Example: Hantavirus, Nipah Virus, SARS, Yellow fever virus. For restricting the development and use of biological weapons, a convention was signed at Geneva, popularly known as ‘Geneva Protocol 1925’.
  • But this convention was failed to address the production, storage, testing, and transfer of these weapons. After seeing the upcoming crisis, Biological Weapon Convention (BWC) came into force on March 26, 1975.
  • At present it has 183 member states. India is also a member state of this convention. BWC is formed to restrict the development, production, acquisition, transfer, stockpiling and use of biological weapons.
  • It was the first multilateral disarmament treaty which bans the entire categories of weapons of mass destruction. The UN Secretary General said he sees an increasing risk of bioterrorism attacks aimed at creating a pandemic similar to that of coronavirus.

Conclusion :

In India, National Disaster Response Force (NDRF) is a specialised force constituted under the Ministry of Home Affairs to deal with chemical, biological, radiological and nuclear attacks. Since bioterrorism attacks are unpredictable, early detection, containment, treatment and communication are crucial steps for appropriate response against it. Co-operation with friendly nations and the robust surveillance system have to maintain and construction of clinical labs should be done to fight against these issues in India.

Essay on Is India Ready For Covid 19 third Wave Vs Descriptive Essay on Bioterrorism – A Threat To Global Security

Introduction :

“Innovation is a good thing. The human condition – put aside bioterrorism and a few footnotes – is improving because of innovation.” — Bill Gates — Were you aware that intelligence agencies proclaimed that the Novel-coronavirus
might have begun from the Wuhan lab in China?. This was conspired when researchers couldn’t figure out how bat viruses could mutate to attack humans.

  • Bioterrorism is the release of microorganisms such as viruses, bacteria, fungi, or other toxins deliberately to cause illness or death among humans, plants, and livestock to terrorize the civilian population.
  • Deadly pathogens are the ‘next big thing’ in terror and it’s going to be a defense problem. Bioterrorism aims to create casualties, terror, societal disruption.
  • The goal of the terrorists,non-state actors is to make their civilian targets feel as if their government cannot protect them.
  • During World War-I,II Japan and Germany embarked on a large scale program to develop biological weapons using fatal mustard gas.
  • Bacillus anthracis, the bacteria that causes anthrax, is one of the most likely agents to be used in a biological attack.

Why are bioweapons considered as perfect weapons of terror ?

  • Can be spread through air, water,food,aerosol sprays or by mail on infected
    envelopes.
  • Lethal pathogens are readily accessible.
  • Highly difficult to detect.

Classification of Biological Agents :

The Center for Disease Control and Prevention(CDC) ranks the biological agents and diseases that have the potential to be used as weapons into three categories. These are:
● Category A: High-priority agents. Example: Plague, Ebola virus, Anthrax.
● Category B : Moderate-priority agents having low mortality rate. Example: Brucellosis, Q fever
● Category C : Low-priority agents. These are emerging pathogens. Example: Hantavirus, Nipah Virus, SARS, Yellow fever virus.

During the Shanghai Cooperation Organisation’s (SCO’s) first military medicine conference, Defence Minister of India Rajnath Singh said that bioterrorism is a real threat in today’s time and the Armed Forces medical services should be at the forefront of combating the menace.

The UN Secretary General said he sees an increasing risk of bioterrorism attacks aimed at creating a pandemic similar to that of coronavirus.

Conclusion :

In India, National Disaster Response Force(NDRF) is a specialised force constituted under the Ministry of Home Affairs(MHA) to deal with chemical, biological, radiological and nuclear(CBRN) attacks. As time goes, the weapons have been shifted from swords to malicious biological weapons. Since bioterrorism attacks are unpredictable, early detection, containment, treatment and communication are crucial for appropriate response against it. Strengthening the Biological and Toxin Weapons Convention (BTWC) of 1972 is a necessity of time to deal with bioterrorism firmly.

Essay on Is India Ready For Covid 19 third Wave Vs Internal Security of India in english

Introduction :

Internal security is the security that lies within the borders of a country. It ensures the maintenance of peace, law & order and protection of sovereignty within territory of a country. Internal security is different from external security. External security is considered as the security against aggression by a foreign country. Maintaining the external security is the responsibility of the armed forces of the country such as the Indian Army, Indian Navy and Indian Air Force in India.

  • While internal security comes under the purview of the police, which can also be supported by the Central Armed Police Forces (CAPF) as per the requirement.
  • In India, the internal security matters are governed by Ministry of Home Affairs (MHA). If we look at the past, India’s internal security problems have multiplied because of linguistic riots, inter-state disputes and ethnic tensions.
  • Our country was forced to redefine its inter state boundaries due to linguistic riots in 1956. After that, the rise of Naxalism was also seen as a threat to internal security in India.
  • At the time of independence, our country was under-developed. The country adopted the equitable and inclusive growth model for growth and development.
  • This situation was exploited by various people or groups to pose a very dangerous challenge to the country’s internal security in the form of Naxalism and Left-Wing Extremism.
  • Cyber security is the latest challenge that our country is facing these days. We could be the target of a cyberwar which can harm our security at any time.
  • The growth in the use of internet has also shown that social media could play a vital role in spreading fake news and violence and thus can become a threat to our internal security. 
  • Border management is also important in reducing the threats to our internal security. A weak border management can result in infiltration of terrorists, illegal immigrants and smuggling of items like arms, drugs and counterfeit currency.

Conclusion : 

In the Global Terrorism Index 2020, India has been ranked at 8th place in the list of countries most affected by terrorism. India continues to deal with terrorist activity on different fronts like terrorism related to territorial disputes in J&K and secessionist movement in Assam. India needs to implement all of its national powers in a coordinated manner to address its security issues and this will happen only when we give national level importance to internal security in India.

Essay on Covid 19 vaccine in english

Introduction :

The Government of India has approved the Covid-19 vaccines developed by Astra-Zeneca and Bharat Biotech named Covishield and Covaxin respectively. Seeing this our PM Modi has launched the COVID-19 vaccination drive on 16th January, 2021 which can save millions of lives every year. This is the world’s largest vaccination program covering the entire country. During the launch of this drive a total of 3006 sites in all States and UTs have been virtually connected.

  • Although India don’t need to vaccinate its entire population, it just have to vaccinate at least 30 to 40% of the people.
  • It is estimated that a minimum of 1 billion doses of Covid-19 vaccines will be required for full immunization.
  • The vaccine has introduced in phrased manner. In first phrase, the vaccine is provided to healthcare workers like doctors, nurses and other medical staff both in government and private sectors.
  • Because they treat and are in close contact with those who are infected with Covid-19. Then it will be provided to police, armed forces, municipal workers and other departmental staffs.
  • In third phase, people above 50 years of age and those patient who have diabetes, hypertension and organ transplant will get the vaccine. After that, the vaccine will be given to healthy adults, teenagers and children.

Conclusion :

The central government is incurring the cost for vaccinating the core healthcare and frontier workers. For further vaccination process, the government has also developed an application named CoWIN, which will help provide real time information of vaccine stocks, storage and individualized tracking of beneficiaries for COVID-19 vaccine. The Vaccination for Covid-19 is voluntary in India. It is a safe and effective way of protecting people against this disease. Vaccines reduce risks of getting diseases by working with our body’s immune system.

 

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COVID- 19 : Changing Social Norms in India :

Introduction :

The world is facing the biggest crisis in the form of coronavirus pandemic. Almost every country has been affected by the COVID-19. Over 115 million people had been affected by COVID-19 and about 2.54 million people had died worldwide.  And indirectly billions of people have been suffering from the impact of this pandemic. As vaccines are being available now but still, the emphasis is on taking extensive precautions such as regularly washing of hands, social distancing and wearing of masks.

  • India has successfully controlled the transmission of COVID-19 by its well coordinated efforts.
  • India’s progress in pharmaceuticals and mass public awareness with the help of digital systems indeed helped in controlling the spread of this disease.
  • There are still many ways by which the COVID-19 can affect our economy, of which the disruption of supply chains is the major challenge.
  • Job loss is on the rise along with the slowdown in manufacturing and services activities in India.  
  • Millions of agricultural workers, regularly facing high levels of uncertainty, poverty, malnutrition and poor health, and suffer from a lack of safety and labour protection.
  • With low and irregular incomes and lack of social support, many of them are forced to continue working, often in unsafe conditions.
  • Further, when experiencing income losses, they may resort to negative coping strategies, such as distress sale of assets, taking loans or child labour. The lockdown has also impacted migrant workers in many ways.
  • Several of whom lost their jobs due to shutting of industries and were outside their native places wanting to get back.
  • Since then, the government has announced relief measures for them, and made arrangements like running special trains and buses to help them to return to their native places.
  • At the same time, many countries undertake new reforms to strengthen the digital economy and e-commerce not only to manage the Covid-19 pandemic but also to facilitate trade & commence.

Conclusion :

COVID-19 crisis also opens the doors of opportunities in India as we witness better healthcare both in management and facilities. New social norms have been introduced like social distancing, wearing masks, maintaining hygiene for protecting us against the Covid-19. People who are ill with Covid-19 need doses of new vaccine, which save their lives and speed up recovery. Healthcare professional should be appreciated as instead of a lot of difficulties they do their best to maintain the quality of healthcare services.

 

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Essays

भ्रष्टाचार पर निबंध Essay on Curruption in hindi

भ्रष्टाचार पर निबंध (Essay on Curruption in hindi)

Introduction :

जब कोई व्यक्ति न्याय व्यवस्था के नियमों के विरूद्ध जाकर अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए सार्वजनिक संपत्ति, स्थिति, शक्ति और अधिकार का दुरुपयोग करने लगता है तो वह व्यक्ति भ्रष्टाचारी कहलाता है। आज भारत जैसे देश में भ्रष्टाचार अपनी जड़े तेज़ी से फैला रहा है।

भ्रष्टाचार अब समाज की गहराई में फैल गया है और इसकी बहुत सारी जड़ों के होने के कारण बहुत मजबूत हो गया है। यह एक कैंसर की तरह है जो एक बार उत्पन्न होने पर दवा के बिना समाप्त नहीं किया जा सकता। भ्रष्टाचार के कई रूप है जैसे रिश्वत, काला-बाजार, जान-बूझकर दाम बढ़ाना, पैसा लेकर काम करना, सस्ता सामान लाकर महंगा बेचना आदि।

भ्रष्टाचार विभिन्न प्रकार का हो सकता है जो शिक्षा, खेल, राजनीति जैसे हर क्षेत्र में फैला हुआ है। भ्रष्टाचार के कारण व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझ पाता है। भ्रष्टाचार कई तरह से हो सकता है जैसे चोरी, बेईमानी, सार्वजनिक संपत्ति का दुरूपयोग, अनावश्यक रूप से समय की बर्बादी, शोषण, घोटाला आदि।

  • इसने विकासशील और विकसित दोनों देशों में अपनी जड़ें जमा ली हैं। हमें गुलामी से वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए अपने समाज और देश से भ्रष्टाचार को दूर करने की आवश्यकता है।
  • हम पैसो के कारण अपनी असली ज़िम्मेदारी को भूल गए हैं। हमें यह समझने की जरूरत है कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता, हम इसे हमेशा के लिए नहीं रख सकते, यह हमें केवल लालच और भ्रष्टाचार दे सकता है। यह सच है कि जीवन जीने के लिए हमें धन की आवश्यकता होती है, लेकिन यह सच नहीं है कि सिर्फ अपने स्वार्थ और लालच के लिए हम किसी के जीवन से खेले और उसका दुरूपयोग करे।
  • भ्रष्टाचार का रोग सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में इस तरह से फैल गया है कि आम आदमी को अपना कार्य करवाने के लिए बड़े अफसर नेताओं को घूस देनी ही पड़ती है।
  • भारत अपने लोकतंत्र के लिए प्रसिद्ध है लेकिन यह भ्रष्टाचार है जो इसकी लोकतांत्रिक प्रणाली को बर्बाद कर रहा है। सरकार द्वारा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कोई सख्त नियम नहीं बनाए जाने के कारण भ्रष्ट लोगों के हौसले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं जिसके कारण वर्तमान में घोटालों की संख्या बढ़ गई है।

भ्रष्टाचार के कारण

  • देश का लचीला कानून – भ्रष्टाचार विकासशील देश की समस्या है, यहां भ्रष्टाचार होने का प्रमुख कारण देश का लचीला कानून है। पैसे के दम पर ज्यादातर भ्रष्टाचारी बाइज्जत बरी हो जाते हैं, अपराधी को दण्ड का भय नहीं होता है।
  • व्यक्ति का लोभी स्वभाव – लालच और असंतुष्टि एक ऐसा विकार है जो व्यक्ति को बहुत अधिक नीचे गिरने पर विवश कर देता है। व्यक्ति के मस्तिष्क में सदैव अपने धन को बढ़ाने की प्रबल इच्छा उत्पन्न होती है।
  • आदत – आदत व्यक्ति के व्यक्तित्व में बहुत गहरा प्रभाव डालता है। एक मिलिट्री रिटायर्ड ऑफिसर रिटायरमेंट के बाद भी अपने ट्रेनिंग के दौरान प्राप्त किए अनुशासन को जीवन भर वहन करता है। उसी प्रकार देश में व्याप्त भ्रष्टाचार की वजह से लोगों को भ्रष्टाचार की आदत पड़ गई है।
  • मनसा – व्यक्ति के दृढ़ निश्चय कर लेने पर कोई भी कार्य कर पाना असंभव नहीं होता वैसे ही भ्रष्टाचार होने का एक प्रमुख कारण व्यक्ति की मनसा (इच्छा) भी है।

भ्रष्टाचार के विभिन्न प्रकार

  • रिश्वत की लेन-देन –सरकारी काम करने के लिए कार्यालय में चपरासी (प्यून) से लेकर उच्च अधिकारी तक आपसे पैसे लेते हैं। इस काम के लिए उन्हें सरकार से वेतन प्राप्त होता है वह वहां हमारी मदद के लिए हैं। इसके साथ ही देश के नागरिक भी अपना काम जल्दी कराने के लिए उन्हे पैसे देते हैं अतः यह भ्रष्टाचार है।
  • चुनाव में धांधली –देश के राजनेताओं द्वारा चुनाव में सरेआम लोगों को पैसे, ज़मीन, अनेक उपहार तथा मादक पदार्थ बांटे जाते हैं। यह चुनावी धान्धली असल में भ्रष्टाचार है।
  • भाई-भतीजावाद –अपने पद और शक्ति का गलत उपयोग कर लोग भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देते हैं। वह अपने किसी प्रिय जन को उस पद का कार्यभार दे देते हैं जिसके वह लायक नहीं हैं। ऐसे में योग्य व्यक्ति का हक उससे छिन जाता है।
  • नागरिकों द्वारा टैक्स चोरी –नागरिकों द्वारा टैक्स भुगतान करने हेतु प्रत्येक देश में एक निर्धारित पैमाना तय किया गया है। पर कुछ व्यक्ति सरकार को अपने आय का सही विवरण नहीं देते और टैक्स की चोरी करते हैं। यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में अंकित है।
  • शिक्षा तथा खेल में घूसखोरी –शिक्षा तथा खेल के क्षेत्र में घूस लेकर लोग मेधावी व योग्य उम्मीदवार को सीटें नहीं देते बल्कि जो उन्हें घूस दे, उन्हें दे देते हैं।

भ्रष्टाचार के उपाय

  • भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कानून – हमारे संविधान के लचीलेपन के वजह से अपराधी में दण्ड का बहुत अधिक भय नहीं रह गया है। अतः भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून बनाने की आवश्यकता है।
  • कानून की प्रक्रिया में समय का सदुपयोग – कानूनी प्रक्रिया में बहुत अधिक समय नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। इससे भ्रष्टाचारी को बल मिलता है।
  • लोकपाल कानून की आवश्यकता – लोकपाल भ्रष्टाचार से जुड़े शिकायतों को सुनने का कार्य करता है। अतः देश में फैले भ्रष्टाचार को दूर करने हेतु लोकपाल कानून बनाना आवश्यक है।

Conclusion : 

इसके अतिरिक्त लोगों में जागरूकता फैला कर, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बना और लोगों का सरकार तथा न्याय व्यवस्था के प्रति मानसिकता में परिवर्तन कर व सही उम्मीदवार को चुनाव जिता कर भ्रष्टाचार रोका जा सकता है। भ्रष्टाचार का कैंसर हमारे देश के स्वास्थ्य को नष्ट कर रहा है। यह आतंकवाद से भी बड़ा खतरा बना हुआ है। देश के युवाओं को भ्रष्टाचार के सभी कारणों से अवगत होना चाहिए और इसे हल करने के लिए एकजुट होना चाहिए। अगर हमें भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करना है तो राजनेताओं, सरकारी तंत्र और जनता को साथ मिलकर इसके खिलाफ लड़ना होगा तभी हम अपने देश को भ्रष्टाचार से बचा सकते हैं।

भ्रष्टाचार पर निबंध – Short Essay on corruption in hindi for students :

Introduction :

जब कोई व्यक्ति न्याय व्यवस्था के नियमों के विरूद्ध जाकर अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए सार्वजनिक संपत्ति, स्थिति, शक्ति और अधिकार का दुरुपयोग करने लगता है तो वह व्यक्ति भ्रष्टाचारी कहलाता है। आज भारत जैसे देश में भ्रष्टाचार अपनी जड़े तेज़ी से फैला रहा है। भ्रष्टाचार अब समाज की गहराई में फैल गया है और इसकी बहुत सारी जड़ों के होने के कारण बहुत मजबूत हो गया है। यह एक कैंसर की तरह है जो एक बार उत्पन्न होने पर दवा के बिना समाप्त नहीं किया जा सकता।

भ्रष्टाचार के कई रूप है जैसे रिश्वत, काला-बाजार, जान-बूझकर दाम बढ़ाना, पैसा लेकर काम करना, सस्ता सामान लाकर महंगा बेचना आदि। भ्रष्टाचार विभिन्न प्रकार का हो सकता है जो शिक्षा, खेल, राजनीति जैसे हर क्षेत्र में फैला हुआ है। 

  • भ्रष्टाचार के कारण व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझ पाता है। भ्रष्टाचार कई तरह से हो सकता है जैसे चोरी, बेईमानी, सार्वजनिक संपत्ति का दुरूपयोग, अनावश्यक रूप से समय की बर्बादी, शोषण, घोटाला आदि। (भ्रष्टाचार पर निबंध)
  • इसने विकासशील और विकसित दोनों देशों में अपनी जड़ें जमा ली हैं। हमें गुलामी से वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए अपने समाज और देश से भ्रष्टाचार को दूर करने की आवश्यकता है। हम पैसो के कारण अपनी असली ज़िम्मेदारी को भूल गए हैं।
  • हमें यह समझने की जरूरत है कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता, हम इसे हमेशा के लिए नहीं रख सकते, यह हमें केवल लालच और भ्रष्टाचार दे सकता है। यह सच है कि जीवन जीने के लिए हमें धन की आवश्यकता होती है।
  • लेकिन यह सच नहीं है कि सिर्फ अपने स्वार्थ और लालच के लिए हम किसी के जीवन से खेले और उसका दुरूपयोग करे।
  • भ्रष्टाचार का रोग सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में इस तरह से फैल गया है कि आम आदमी को अपना कार्य करवाने के लिए बड़े अफसर नेताओं को घूस देनी ही पड़ती है। भारत अपने लोकतंत्र के लिए प्रसिद्ध है लेकिन यह भ्रष्टाचार है जो इसकी लोकतांत्रिक प्रणाली को बर्बाद कर रहा है। (Essay on corruption in hindi)

Conclusion :

सरकार द्वारा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कोई सख्त नियम नहीं बनाए जाने के कारण भ्रष्ट लोगों के हौसले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं जिसके कारण वर्तमान में घोटालों की संख्या बढ़ गई है। भ्रष्टाचार का कैंसर हमारे देश के स्वास्थ्य को नष्ट कर रहा है। यह आतंकवाद से भी बड़ा खतरा बना हुआ है। देश के युवाओं को भ्रष्टाचार के सभी कारणों से अवगत होना चाहिए और इसे हल करने के लिए एकजुट होना चाहिए।

अगर हमें भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करना है तो राजनेताओं, सरकारी तंत्र और जनता को साथ मिलकर इसके खिलाफ लड़ना होगा तभी हम अपने देश को भ्रष्टाचार से बचा सकते हैं।

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भ्रष्टाचार के कारण ( Causes of corruption in India)

  • देश का लचीला कानून 
  • व्यक्ति का लोभी स्वभाव 
  • आदत – आदत व्यक्ति के व्यक्तित्व में बहुत गहरा प्रभाव डालती है। उसी प्रकार देश में व्याप्त भ्रष्टाचार की वजह से लोगों को भ्रष्टाचार की आदत पड़ चुकी है।
  • मनसा -व्यक्ति के दृढ़ निश्चय कर लेने पर कोई भी कार्य कर पाना असंभव नहीं होता वैसे ही भ्रष्टाचार होने का एक प्रमुख कारण व्यक्ति की मनसा भी है।

भ्रष्टाचार के विभिन्न प्रकार (Types of corruption in India)

  • रिश्वत की लेन-देन 
  • चुनाव में धांधली 
  • भाई-भतीजावाद 
  • नागरिकों द्वारा टैक्स चोरी
  • शिक्षा तथा खेल में घूसखोरी 

भ्रष्टाचार के उपाय (How to curb corruption)

  • भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कानून
  • कानून की प्रक्रिया में समय का सदुपयोग 
  • लोकपाल कानून की आवश्यकता
  • सरकारी कर्मचारियों को अच्छा वेतन
  • दफ्तरों में लोगों की कमी न हो
  • सभी कार्यालय में कैमरा लगाया जाये
  • भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) बिल
  • भ्रष्टाचार का विरोध करें

भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकार द्वारा उठाए गए कदम (Steps taken by Government to remove corruption)

  • डिजिटलीकरण 
  • नौकरी से निष्कासित 
  • चुनाव में सुधार 
  • गैरकानूनी संस्थानों तथा दुकानों पर ताला 

भ्रष्टाचार : सतर्क भारत समृद्ध भारत पर निबंध – Satark bharat samridh bharat essay in hindi :

Introduction :

नए भारत का निर्माण तब तक लगभग असंभव है जब तक इसमें भ्रष्टाचार का कैंसर है। लोगों और सरकार की सामूहिक इच्छा के बिना भ्रष्टाचार को खत्म करना असंभव है। जब कोई व्यक्ति न्याय व्यवस्था के नियमों के विरूद्ध जाकर अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए सार्वजनिक संपत्ति, स्थिति, शक्ति और अधिकार का दुरुपयोग करने लगता है तो वह व्यक्ति भ्रष्टाचारी कहलाता है। यद्यपि भ्रष्टाचार को एक बार में शून्य स्तर तक नहीं लाया जा सकता है लेकिन हम इसे कम करने का प्रयास कर सकते हैं। यह निगरानी और सतर्कता से सुनिश्चित किया जा सकता है। सतर्कता हमारे समाज में प्रबंधन कार्यों का एकअभिन्न अंग है।

  • सतर्कता की भूमिका संगठन को आंतरिक खतरों से बचाने के लिए है जो बाहरी खतरों की तुलना में सबसे अधिक ख़तरनाक हैं।
  • शिक्षा की मदद से हम भ्रष्टाचार को कम कर सकते हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार, सबसे कम भ्रष्ट राज्य केरेल है, क्योंकि इसमें साक्षरता की दर सभी राज्यों से अधिक है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि शिक्षा लोगों को प्रभावित कर सकती है।
  • अगर हम अपने भारत को समृद्ध बनाना चाहते हैं तो सभी को अपने अधिकारों के लिए आगे आना होगा। जैसा कि हम जानते हैं कि अगर हम अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर हो जाएं तो हम जो कुछ भी चाहते हैं वह हासिल कर सकते हैं।

आज व्यवसाय के हज़ारो विकल्प मौजूद हैं ज़रूरत है तो केवल सतर्कता और समझदारी से लाभ उठाने की ।  इसके लिये आवशयक है कि मौजूद विकल्पो और नितियो को जनता खुद सतर्क रहकर अपने हक़ मे लाभ का आनंद ले । भारत को स्वस्थ और समृद्ध बनाने के लिए निवेश नहीं बल्कि नवाचार सबसे बड़ी ताकत बन सकती हैं। हमे ज़रूरत है अपनी ताकत का मह्त्व समझकर उसका सही तरीके से उपयोग करने की।

Essay on Impact of Rising prices on common man in hindi

Introduction :

“देश की जनता गरीबी से लड़ रही है, महंगाई और बेरोजगारी बढ़ रही है” उपरोक्त पंक्ति आम आदमी पर महंगाई से पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाती है। जरुरी वस्तुओं की कीमतों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी भारत के लोगों में चिंता का कारण बन रही है। महंगाई एक विश्वव्यापी घटना है और भारत भी इससे बच नहीं सका है। गैस, दाल, चीनी, तेल, चाय, पेट्रोल आदि जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी तेज़ी से बढ़ती जा रही हैं। जब कुल मांग वस्तुओं और सेवाओं की कुल आपूर्ति से अधिक हो जाती है, तब कीमतों में वृद्धि होने लगती है।

  • अर्थशास्त्रियों के अनुसार मांग में होने वाली वृद्धि के मुख्य कारण डिस्पोजेबल आय में वृद्धि, उपभोक्ता खर्च में वृद्धि, सार्वजनिक व्यय, काला धन आदि हैं।
  • मूल्य वृद्धि अलग-अलग लोगों को अलग तरह से प्रभावित करती है। हालांकि लचीले आय वर्ग पर इसका ज्यादा असर नहीं होता है।
  • हालांकि, निश्चित आय वर्ग के लोगों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनका वेतन और मजदूरी समान रहती है लेकिन वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि जारी रहती है।
  • बढ़ती कीमतों के कारण आम आदमी अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से परिवहन लागत में वृद्धि होती है।
  • ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 101वें स्थान पर है जो भारत में गरीब लोगों की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है। भारत में महिलाओं की स्थिति भी अच्छी नहीं है यहाँ 10 में से 7 महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। मूल्य वृद्धि की समस्या को रोकने के लिए
  • सरकार और जनता का संयुक्त प्रयास होना चाहिए ताकि इसे नियंत्रित किया जा सके। अधिक उचित मूल्य की दुकानें, केन्द्रीय भंडार खोले जाने चाहिए, जहां आम आदमी कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण सामान की खरीदारी कर सके।

Conclusion :

जमाखोरी और कालाबाजारी पर सरकार और बैंकों को नजर रखनी चाहिए। जहां तक आम जनता का सवाल है, उन्हें अनावश्यक खर्च कम करना चाहिए और बचत बढ़ानी चाहिए। इससे लोगों के पास खर्च करने योग्य आय कम हो जाएगी और उपभोग व्यय में भी कमी होगी। सरकार को निम्नतम आय वर्ग पर ध्यान देना चाहिए, स्टार्टअप को बढ़ावा देना चाहिए, युवाओं को कौशल प्रदान करना चाहिए ताकि अमीर और गरीब के बीच की खाई को जितना संभव हो उतना कम किया जा सके। इस सम्बन्ध में यह कहना गलत नहीं होगा की “सबके विकास से ही देश का विकास संभव है।”

गरीब कल्याण रोजगार अभियान पर निबंध

Introduction :

हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गरीब कल्याण रोज़गार अभियान की शुरुआत की, जो प्रवासी मजदूरों के लिए एक रोजगार योजना है, जिससे लॉकडाउन के दौरान शहरों से गांवों में लौटे मजदूरों की मदत होगी। इस अभियान को पांच राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में बिहार के तेलिहार गाँव से 20 जून, 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शुरू किया गया।

इस योजना के तहत, देश के ग्रामीण हिस्सों में ग्रामीण नागरिकों, विशेषकर प्रवासी श्रमिकों के लिए आजीविका सहायता प्रदान करके देश के ग्रामीण हिस्सों में होने वाले आर्थिक प्रभाव को कम करना ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। केंद्र सरकार ने गरीब कल्याण रोज़गार अभियान के तहत लगभग 25 योजनाओं को एक साथ देश भर के 116 जिलों में लागू किया है तथा इस योजना के लिए 125 दिनों का लक्ष्य रखा गया है।

पैकेजिंग और स्थानीय उत्पाद बनाने के लिए गांवों, कस्बों और छोटे शहरों के पास उद्योग समूह बनाए जाएंगे। फसलों को स्थानीय स्तर पर स्टोर करने के लिए 1 लाख करोड़ की लागत से कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

  • इस अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बिहार के खगड़िया ज़िले के ग्राम तेलिहार से की।
  • ‘गरीब कल्याण रोज़गार अभियान’ के अंतर्गत सरकार द्वारा लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपए का निवेश किया किया गया है।
  • यह 125 दिनों का अभियान होगा, जिसे मिशन मोड रूप में संचालित किया किया गया।
  • इस अभियान में छ: राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड तथा ओडिशा को शामिल किया गया है।
  • छ: ज़िलों के 25,000 से अधिक प्रवासी श्रमिकों के साथ कुल 116 ज़िलों को इस अभियान के लिये चुना गया है, जिसमें 27 आकांक्षी ज़िले (aspirational districts) भी शामिल हैं।
  • इस कार्यक्रम में शामिल छ: राज्यों के 116 ज़िलों के गाँव कॉमन सर्विस सेंटर (Common Service Centres) तथा ‘कृषि विज्ञान केंद्रों’ (Krishi Vigyan Kendras) के माध्यम से शामिल होंगे, जो कोरोना के कारण लागू शारीरिक दूरी के मानदंडों को भी ध्यान में रखा गया।
  • इस अभियान में 12 विभिन्न मंत्रालयों को समनवित किया जाएगा, जिसमें पंचायती राज, ग्रामीण विकास, सड़क परिवहन और राजमार्ग, खान, पेयजल और स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, नवीकरणीय ऊर्जा, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, सीमा सड़कें, दूरसंचार तथा कृषि मंत्रालय शामिल हैं।
  • इस अभियान को ऐसे समय में शुरू किया जा रहा है जब COVID-19 के प्रकोप के कारण लाखों प्रवासी मज़दूर गाँवों की तरफ लौट रहे हैं जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार की समस्या उत्पन्न हो रही है।
  • मनरेगा के तहत काम करने वाले परिवारों की संख्या भी मई 2020 में एक स्तर पर पहुँच गई है।
  • यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में ही प्रवासी श्रमिकों को रोज़गार प्रदान करने के साथ-साथ गाँवों के टिकाऊ बुनियादी ढाँचे का निर्माण करने में सहायक है।
  • यह अभियान प्रवासी श्रमिकों तथा ग्रामीण नागरिकों के सशक्तीकरण तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगा अर्थात् गाँवों में ही आजीविका के अवसरों को इस अभियान के माध्यम से विकसित किया है।
  • PMGKRA में 50000 करोड़ की लागत लगी है जिसकी उद्घोषणा भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सहाय पैकेज के दौरान की थी। इस अभियान के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा के 25,000 से अधिक अपने गाँव पलायन कर गए प्रवासी श्रमिकों के साथ कुल 116 जिलों को चुना गया है।

Conclusion :

इस अभियान के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी है। फाइबर केबल बिछाने और इंटरनेट के प्रावधान को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है। यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का निर्माण करते हुए प्रवासी श्रमिकों के परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करेगा। प्रवासी श्रमिकों की वर्तमान स्थिति के अनुसार गरीब कल्याण योजना जैसी योजना की बहुत आवश्यकता है। हालांकि, कार्यक्रम की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि क्या इसका लाभ प्रवासी श्रमिकों तक समय पर पहुंच पायेगा या नहीं। सरकार को सभी प्रवासी मजदूरों का एक डेटाबेस भी बनाना चाहिए जो भविष्य में उनके लिए एक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

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Essays

ssc chsl tier 2 expected essay topics

SSC CHSL 2021 Tier-2 Exam Pattern

SSC CHSL Tier -2 Paper Pattern
Topics Word – limit Maximum Marks Time Limit
Essay Writing 200 – 250 100 marks 60 Min
Application/Letter / Precis Writing 150 – 200

60 Min

SSC CHSL Tier 2 PYQ Paper (2019)

Essay Topic : 

“Freedom of Speech in India: Constitutional provisions and public debate“

Letter/Application Topic: 

“You are Suresh, House No. 323 Devnagar Delhi, a tribal activist living in Delhi. Write a letter to District Authority (SDM/Collector) Bastar, Chhattisgarh for the problems faced by the tribal community”.

SSC CHSL Tier 2 PYQ Paper (2018)

Essay Topic : 

“Population Control is the only solution to all our problems.”

Letter/Application Topic: 

“You are Shivani/ Shiv, resident of CGO Complex ,Lodhi Road, 110003. Write a letter to your younger brother Naman, apprising him of the harmful effects of the excessive use of cell phones.”.

SSC CHSL Tier 2 PYQ Paper (2015)

Essay Topic : 

“Write an essay on “Swacch Bharat Mission” in about 250 words.

Letter/Application Topic: 

“Write a letter in 200 words to Sports Secretary, Department of Sports, Government of India, giving your assessment about the performance of India in Rio Olympic games and suggestion on how can improve in next Olympic games.”

Essay Topics for SSC CHSL Tier 2 Descriptive Paper

  • Omicron Covid-19 variant in India
  • Role of the youth in Development of the Nation
  • New Education Policy – Prospects & Challenges
  • How to deal with natural disasters in India?
  • Importance of E – education in India
  • Silence is the best answer to anger
  • Importance of Science vs religion
  • Rise in crime rate in India
  • Universal basic income vs subsidy
  • Growing Stress Issues & Mental health 

List of next 10 topic

  • Healthcare in India – Issues & Challenges
  • Impact of Mobile Addiction on Youth
  • Work from Home – Pros & Cons
  • Social Media Good & Dark Side
  • Importance of Healthy Lifestyle
  • How Safe are girls in India?
  • Gender Equality in India
  • Unemployment Vs Underemployment
  • Usage of Artificial Intelligence in Today’s life
  • Role of Students in Eradication of Drugs

List of next 12 topic

  • Empowering Women Empowering India
  • Our Duties towards Senior Citizen
  • Man Vs Climate Change
  • Terrorism & its threats
  • Water Crisis in India
  • Education is the most powerful weapon which you can use to change the world
  • Air Pollution of Indian Cities Vs Urbanization
  • Abrogation of Article 370 & 35A
  • Impact of Black Money on Society
  • Technological Advancement in India
  • One Nation One Election
  • Corruption in India

Important Tips For Essay Writing : 

  • Choose the Topic you can describe easily
  • Use one or two quotations at proper places
  • Write in short paragraphs
  • Don’t repeat the same things
  • Stick to Word limit
  • Conclude as a whole

Essay Introduction : 

Introduce the topic precisely to grab attention of the reader

Dialogue, Quote, Summary in simple language of the topic

Essay Body : 

Describe in your topic –

  • Main Idea
  • Supportive Sentences
  • Pros & Cons
  • Challenges
  • Avoid biased Opinion

Essay Conclution : 

  • Sums up your overall idea
  • Provide final perspective
  • Try to be optimistic
  • Give Suggestions & Solutions

How to prepare Essay Writing for SSC CHSL Tier 2 Descriptive Exam ?

1) Essay Writing is nothing but how well you present your thoughts and ideas on a particular topic in a well-structured and good looking manner.

2) It requires imagination and good writing skills for writing an essay. Both these skills are essential as both these factors together will help you present a good essay in the best manner.

3) Gathering of thoughts on a particular topic will not help you if you are not able to present them effectively and efficienty.

4) Likewise, just good writing skills are no good if you are not able to think of innovative and relevant points for the given descriptive topic. Check out some important tips below to score well in the essay writing section of Descriptive Exam

Build a daily Reading Habit

Read any English Newspaper daily –

Reading the newspaper will not only strengthen your general knowledge but will give you ideas to be more specific and informative about the topic you asked.

Try to Grasp writing skills used in that Newspaper

** Start practicing by writing in small paragraphs Practice writing in essay or precis in your own words.
** Set a limit of words for yourself and write the essay within that word limit.

Use of Dictionary to look up the difficult words

** Note down Important Vocabulary
** Make use of the dictionary to check new words, its usage and meaning and also note down in your notebook separately.
** Always try 3-4 sentence making with the new word so that you do not forget to use the same in your exams as per the requirement.

Try writing at least one or two essays on daily basis

** You just need to pick at least one topic daily from the current news and Start practicing by writing in small paragraphs

** Try to write about the topic in your own words within the limit prescribed in your exam.
After writing the Essay, you can look for more essays on the topic you have chosen for yourself to get more ideas on the same and note down the important key points.

Tips to prepare Precis Writing for SSC CHSL Tier 2 Descriptive Exam

What is Precis Writing?

Precis writing is nothing but summarising a given passage in limited words, covering all the important aspects and details of the passage given.

“Precis denotes a brief, concise, clear and well connected abstract, summary of a given passage”.  Ability to produce a satisfactory precis is very important for many purposes in practical life. Government Officials & Businessman have no time to go through long and unnecessary details; thus a precis is a good tool for saving their valuable time.

So it is necessary for the officials working as secretary or as private secretary to have expertise in the art of precis writing. The candidates are required to write a precis of a given composition. Thus, the art of writing precis helps one to secure good marks in the examinations.

ESSENTIAL OF A GOOD PRECIS

One must keep the following points in mind while writing a precis

Conciseness

It is the soul of a good precis. The precis must not exceed onethird of the length of original passage.

Completeness

Precis must give a complete idea of the passage. The main idea of the original passage should be presented in the same order in precis writing.

Clarity

A precis should be clear and lucid, free from any ambiguity or obscurity. In an attempt to shorten the passage, you must take care that the sentences constructed by you are free from any error, like improper use of words.

Grammatical Accuracy

A precis must be free from grammatical errors, spelling and punctuation errors etc.

  • One-third of total paragraph
  • Own words
  • Clarity
  • Complete
  • Avoid mistakes
  • Single Paragraph
  • Rules for Good Precis Writing

For avoiding errors in writing a precis, follow a set of rules as given below

  • Read the passage carefully
  • Decide Theme of the Passage
  • Brevity and Clarity
  • Use Own Language
  • Accuracy of the Language
  • Avoid Direct Speech and Use Indirect Speech

Do’s and Don’ts

  • Start with basic idea
  • Include all the important keywords
  • Use easy vocabulary
  • Do not make assumptions
  • Avoid using abbreviations
  • Title can be underlined
  • Use Statistical data
  • Proper Tense usage

How to write Good Precis

There are many important components which make a good precis. For those who have just started their preparation for the upcoming exams, knowing the features of a good precis is extremely useful.

  • Should be a summary of the original paragraph
  • Covering all important keywords from the original paragraph
  • The details in the precis must match in that of paragraph
  • Use of linking words such as and, because, therefore, etc.
  • Should be precise and clear
  • Should be in your own words
  • Must be logically connected
  • Should have an appropriate title.
  • Don’t use any idiom of your own

Precis Writing (Example -1)

In today’s scenario, Mass media, specifically visual media, plays a pivotal role in creating an atmosphere of awareness in society. Media refers to different communication channels or ways through which knowledge and information is conveyed to the viewers or the readers. Visual media refers to the media that conveys knowledge and information to the viewers through their eyes; it includes television, cinema, posters etc. Whatever, is supplied through the visual media has instant and longer lasting effect on the minds of the viewers.

With rapid development of information and technology, the visual media, in the shape of cable TV, with multitudes of domestic and foreign channels has reached almost every house, playing a vital role in moulding public opinion in various ways. It plays a very crucial role in educating, and entertaining the masses. Cable TV has changed the means and modes of entertainment and education.

Sitting before a TV, one can pass and enjoy his free time listening to music, viewing movies, learning techniques of body building, hearing sermons of religious saints, learning about lives of wild animals, birds, water creatures, knowing about space and what not.

During the election period, one can know the electoral positions of political parties and their leaders, from all parts of the country and its impact on the election campaign and all facts of electioneering, just sitting before the TV.

Youngsters and teenage students are seen viewing the channels as per their likings; if some are viewing the music channels some are seen quenching their thirst for knowledge viewing channels like ‘Discovery’ or ‘National Geography’ or ‘History’ etc. The image on the small screen thus has a significant impression on all, more particularly on the gullible children and on the teens. The young mind takes the reel as real and thus is more often and more easily moulded and motivated by the visual media.

The present day fashion, hair dressing, sexual liberties, dating and awakening towards the right of youth, awareness among the women of their rights are because of the role visual media is playing in society. In a hysterical effort to excel others, some channels are showing such scenes and images which are of no importance or have an adverse effect on the minds of viewers.

Showing of sexual and rape cases, with minute details by the anchor and showing brutal scenes of murder, the channels have crossed the limit of ethics and morality. The TV coverage of massacre, creates feeling of hatred among communities and motivates others to wreak vengeance. Obsessed by the sole aim of making a fast buck the channels are competing with one another to stoop to any kind of absurdity, without considering even for a minute as to what effect such visuals have on society.  (460 Words)

Title:  Visual media Vs Indian Society

 

Precis :

Visual media plays an important role in creating awareness in society as it has a prolonged effect on the viewers. Advancement in technology has enabled visual media to penetrate in every house, so it can easily moulds public opinion. Cable TV has significantly affected the lifestyle of people. Methods of entertainment and passing leisure time have changed. During elections, one can know the latest status through TV. Youngsters and teenagers watch different channels as per their choices. They seem to be easily influenced by visual media. The present awareness towards fashion, sexual liberties, rights of youth and women are the result of the impact of visual media on society. Owing to unhealthy competition, TV channels are showing indecent and instigating scenes and programmes causing hatred and violence among the people, just for popularity and making money. They have no regard for ethics and morality and the effect of such visuals.

(150 words)

 

Precis Writing (Example-2)

When we survey our lives and efforts we soon observe that almost the whole of our actions and desires are bound up with the existence of other human beings. We notice that whole nature resembles that of the social animals. We eat food that others have produced, wear clothes that others have made, live in house knowledge and beliefs has been passed on to us by other people though the medium of a language which others have created. Without language and mental capacities, we would have been poor indeed comparable to higher animals.

We have, therefore, to admit that we owe our principal knowledge over the least to the fact of living in human society. The individual if left alone from birth would remain primitive and beast like in his thoughts and feelings to a degree that we can hardly imagine. The individual is what he is and has the significance that he has, not much in virtue of the individuality, but rather as a member of a great human community, which directs his material and spiritual existence from the cradle to grave.   (183 words)

Title:   Human being: A social animal

Precis :

Being a social animal, we are bound up with our actions and desires with others. Our food, clothes, residents and beliefs are interconnected. Without the use of languages created by others, we would have been mere an animal. If we had not been a social animal, we would have been primitive and beast like in thoughts and feelings. Thus, society plays a significant role in a person’s life.   (68 words)

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