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Abhilash Kumar

Essays

Essay/Nibandh topics in hindi for UPPSC Gic Lecturer

Essay/Nibandh topics in hindi for UPPSC Gic Lecturer

Format of the Essay :

  • Introduction / परिचय
  • Body / बॉडी
  • Conclusion / निष्कर्ष

Elements Of An Introduction :

  • Attention grabber, may begin with a quote / Quote के साथ शुरू करें
  • Provide Background Info / पृष्ठभूमि प्रदान करें
  • Outline the Structure /संरचना को रेखांकित करें
  • Limit the Scope / दायरा सीमित करें

Elements Of Body :

  • Evidence and support of the Topic /विषय का समर्थन
  • Least important to most important / कम महत्वपूर्ण से सबसे महत्वपूर्ण
  • Chronological order / कालानुक्रमिक
  • evidence to support your argument / तर्क का समर्थन
  • Example- relevant to your particular topic /उदाहरण- आपके विशेष विषय के प्रासंगिक

Elements Of Conclusion :

  • Wrap all of your arguments and points / सभी तर्कों को पूरा करें
  • Restate the main arguments in A simplified manner/सरलीकृत तरीके से Rewrite करें

Top 15 Most Imp Essay topics :

  1. भारत एवं सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान
  2. राष्ट्र के विकास में युवाओं की भूमिका
  3. नई शिक्षा नीति – संभावनाएँ और चुनौतियाँ
  4. भारत में प्राकृतिक आपदाओं से कैसे निपटें?
  5. भारत में ओमाइक्रोन कोविड -19 संस्करण
  6. मानव तस्करी: नैतिकता और मूल्यों की समस्या
  7. भारत में पश्चिमी संस्कृति का क्रेज
  8. ई-परिवहन – संभावनाएँ और चुनौतियाँ
  9. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और इंटरनेट
  10. भारत 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था संभावनाएं एवं चुनौतियां
  11. आज के समाज में सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण
  12. भारत में आरक्षण प्रणाली की संभावनाएं एवं समस्याएं
  13. यूनिवर्सल बेसिक इनकम बनाम सब्सिडी
  14. बढ़ते तनाव के मुद्दे और मानसिक स्वास्थ्य
  15. भारत में स्वास्थ्य सेवा – मुद्दे और चुनौतियाँ

Other Important Topics

  • प्रौढ़ शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन
  • विज्ञान बनाम धर्म का महत्व
  • कार्यस्थल पर लैंगिक भेदभाव
  • आज के जीवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग
  • नशीली दवाओं के उन्मूलन में छात्रों की भूमिका
  • महिला सशक्तिकरण- भारत को सशक्त बनाना
  • वरिष्ठ नागरिकों के प्रति हमारा कर्तव्य
  • मानव बनाम जलवायु परिवर्तन
  • आतंकवाद और उसके खतरे
  • भारत में अपराध दर में वृद्धि
  • बेरोजगारी बनाम अल्परोजगार
  • भारत में जल संकट
  • शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं

Other Important Topics

  • भारतीय शहरों का वायु प्रदूषण बनाम शहरीकरण
  • गोपनीयता का अधिकार और तकनीकी विकास
  • अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त करना
  • समाज पर काले धन का प्रभाव
  • भारत में तकनीकी प्रगति
  • एक देश एक चुनाव
  • भारत में भ्रष्टाचार
  • युवाओं पर मोबाइल की लत का प्रभाव
  • घर से काम – लाभ एवं हानि
  • सोशल मीडिया गुड एंड डार्क साइड
  • स्वस्थ जीवन शैली का महत्व
  • भारत में लड़कियां कितनी सुरक्षित हैं?
  • भारत में लैंगिक समानता
  • भारत में ई-शिक्षा का महत्व
  • मौन क्रोध का सर्वोत्तम उत्तर है
  • भारत में घरेलू पर्यटन के अवसर

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Essay On : भारत 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था: संभावनाएं एवं चुनौतियां

Introduction :

भारत ने 1991 में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये उदारीकरण की नीति को अपनाया, इसके अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिये खोल दिया गया और धीरे-धीरे भारत की अर्थव्यवस्था की गति तीव्र होती गई। भारत कुछ समय पूर्व ही विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। किंतु भारत के आकार और क्षमता के अनुपात को देखते हुए अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति की सराहना नहीं की जा सकती है। इस तथ्य को ध्यान में रखकर भारत के नीति निर्माताओं ने वर्ष 2024 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी अपने बजट भाषण के दौरान देश को साल 2024 तक ‘फाइव ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ की अर्थव्यवस्था बनाने की बात कही।

हालांकि बजट के पहले भी हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने कई कार्यक्रमों के दौरान इस लक्ष्य को हासिल करने की बात कही है। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत ने आज़ादी के बाद आर्थिक क्षेत्र में तीव्र वृद्धि नहीं की। इसका नतीजा यह रहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने में 55 सालों का समय लग गया, जबकि इसी दौरान चीन की अर्थव्यवस्था बड़ी तेज़ी से आगे बढ़ी। ऐसे में, आर्थिक क्षमता सीमित होने के चलते अक्सर देश के तमाम क्षेत्रों जैसे रेलवे, सामाजिक क्षेत्र, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर में ज़रूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हो पाए।

सरकार द्वारा उठाये गए मुख्य कदम

  • सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान देते हुए अकेले प्रधानमंत्री आवास योजना में ही 1.95 करोड़ आवासों के निर्माण का लक्ष्य तय किया। साथ ही,होम लोन के ब्याज भुगतान पर 1.5 लाख रुपए की अतिरिक्त कटौती को भी मंज़ूरी दी गई है। ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल के तहत निजी उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये कई एलान किए गए। इसके अलावा, विश्वस्तरीय संस्थानों के निर्माण और ‘खेलो भारत’ योजना के तहत खेल विश्वविद्यालयों की भीस्थापना की जा रही है। सरकार ने एक संप्रभु ऋण बाज़ार की स्थापना का भी ऐलान किया। इसके तहत सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार से कर्ज लेकर देश में निजी निवेश के लिए धन मुहैया करवाएगी। इस प्रकार ब्याज दर में कमी लाने में मदद मिलेगी।
  • इसके अलावा निजी पूंजी निर्माण में मदद करने के लिहाज से सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 70,000 करोड़ रुपए के नए पूंजी निवेश की योजना बनाई है। मौजूदा वक्त में निजी क्षेत्र कर्ज़ के दबाव और पूंजी की कमी की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में, पूंजी निर्माण के लिये सरकार को विदेशी पूंजी को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना होगा।
  • इसलिये सरकार कई क्षेत्रों खासकर बीमा, विमानन और एकल ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। एमएसएमई पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ सरकार ने श्रम सुधार की दिशा में भी कई कदम उठाए हैं। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बल देने के लिहाज से 44 श्रम कानूनों को मिलाकर चार संहिताओं के रूप में बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
  • 400 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले छोटे उद्यमों के लिये कॉर्पोरेट कर को घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार ने रेलवे के आधुनिकीकरण के लिये करीब 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश की ज़रूरत बताई है। इस तरह,रेलवे के संसाधनों में बढ़ोत्तरी के लिये सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) का प्रस्ताव किया गया है।

इस सम्बन्ध में मुख्य चुनौतियाँ

  • जलवायु परिवर्तन ने मॉनसून की रफ्तार को बिगाड़ रखा है जिसका असर भारतीय कृषि को भुगतान पड़ रहा है। साथ ही, भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले सेवा क्षेत्र में हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। भारत का ऊर्जा क्षेत्र मुश्किलों के दौर से गुज़र रहा है तथा इस क्षेत्र को संरचनात्मक स्तर पर सुधार की आवश्यकता है।
  • केंद्र को राज्य सरकारों के साथ मिलकर टैरिफ नीति में सुधार करने की ज़रूरत है ताकि उद्योगों एवं बड़े उपभोक्ताओं को इसका लाभ प्राप्त हो सके, साथ ही कृषि क्षेत्र एवं घरेलू उपभोक्ताओं के लिये टैरिफ की दरों में वृद्धि भी की जानी ज़रूरी है। कृषि क्षेत्र पहले से ही अधिक बिजली उपयोग के कारण सिंचाई संकट से जूझ रहा है। परिवहन के क्षेत्र में भारत में वैश्विक स्तर के इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है, साथ ही अभी भी ग्रामीण एवं दूरदराज़ के क्षेत्र कनेक्टिविटी से दूर हैं।
  • भारत का रेलवे विश्व के कुछ सबसे बड़े रेलवे मार्गों में शामिल है फिर भी इसमें सुधार की आवश्यकता है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि रेलवे के आधुनिकीकरण के लिये लगभग 50 लाख करोड़ रूपए के निवेश की आवश्यकता है। इसी प्रकार उच्च गुणवत्ता के सड़क मार्ग, बंदरगाहों की क्षमता में वृद्धि तथा इनको रेल एवं सड़क के ज़रिये देश के विभिन्न आर्थिक प्रतिष्ठानों से जोड़ना भी ज़रूरी है। इस प्रकार से भारत की परिवहन क्षमता में वृद्धि हो सकेगी जिससे अर्थव्यवस्था तीव्र गति से वृद्धि कर सकेगी।
  • भारत में टेलिकॉम सेक्टर भी कई समस्याओं से जूझ रह है। अन्य देश जहाँ 5G का उपयोग आरंभ कर चुके है भारत में अभी इसके लिये ज़रुरी प्रयास भी नहीं किये जा सके हैं। पहले ही TRAI एवं सरकार की स्पेक्ट्रम और इसकी बेस कीमतों की नीति के कारण टेलिकॉम सेक्टर संघर्ष कर रहा है। भारत नेट परियोजना जो भारत में स्थानीय स्तर तक इंटरनेट सेवा पहुँचाने के लिये आरंभ की गई थी, अभी भी पूर्ण नहीं हो सकी है।

Conclusion :

यह माना जा रहा है कि 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये भारत को GDP के लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि दर की आवश्यकता होगी। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था की गति धीमी हैं, साथ ही इस स्थिति में उच्च आर्थिक वृद्धि दर को प्राप्त करना एक कठिन लक्ष्य साबित हो सकता हैं। लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। लेकिन फिर भी 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना कोई असंभव बात नहीं है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, बेरोज़गारी, आर्थिक असमानता, महिलाओं की स्थिति, कुपोषण, जातिगत भेदभाव, गरीबी जैसे भी कई ज़रूरी मुद्दे हैं जिनको हल करना आवश्यक है। इन समस्याओं को दूर करके ही भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो सकेगा।

Essay On : भारत में धार्मिक सदभाव का महत्व

Introduction :

भारत एक बहु-धार्मिक, बहुभाषी और बहु-नस्लीय देश है और विविधताओं के बीच हमेशा संस्कृति की एकता से घिरा रहा है। यहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग साथ-साथ रहते हैं। भारत हमेशा से ही एकता का प्रतिक माना जाता रहा है एवं एकता ही मानव कल्याण का आधारभूत तत्व है, इसके बिना विश्व शांति का सपना साकार नहीं हो सकता।  भारत किसी धर्म की शिफारिश नहीं करता और न ही यहाँ का कोई राष्ट्रीय धर्म है। भारत उन नागरिकों का घर है जिनकी विभिन् धार्मिक मान्यताय हैं। धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत उन्हें बिना किसी प्रतिबंध के अपने धर्म का प्रचार और प्रसार करने की अनुमति देता है।

यहां धार्मिक विविधता एवं धार्मिक स्वतंत्रता को क़ानून तथा समाज दोनों द्वारा मान्यता प्रदान की गयी है। भारतीय सविधान के अनुच्छेद 25 से 28 में धार्मिक स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार के रूप में उल्लेखित किया गया है। भारत में प्रत्येक नागरिक को किसी भी धर्म को चुनने एवं उनका पालन करने की स्वतंत्रता है। भारत में विभिन्न धार्मिक संप्रदाय के लोग परस्पर मिलजुल कर रहते है जो हमारी सदभावना को दर्शाता है। भारत 1.3 अरब से अधिक लोगों का देश है, जिनमें से अधिकांश हिंदू हैं।  लेकिन हमारे देश में अल्पसंख्यकों की बड़ी आबादी भी है, जिसमें लगभग 21 करोड़ मुसलमान हैं, जो इसे इंडोनेशिया के बाद दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी बनाते वाला देश हैं।

  • यहां लाखों ईसाई, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोग भी हैं। हाल ही में, धार्मिक समुदायों के बीच संघर्ष काफी बढ़ गया है और इन धार्मिक संघर्षों में हजारों लोग मारे गए हैं। ऐसे में अगर आर्थिक स्थिति बिगड़ती है तो सांप्रदायिक मुद्दों का इस्तेमाल देश को बांटने के लिए किया जा सकता है।
  • कट्टरवाद से लड़ने में मीडिया ने सकारात्मक भूमिका निभाई है। लेकिन इस मुद्दे को शांत करने की प्रवृत्ति देखी जाती है। आजकल अखबारों पर ज्यादातर फोकस मनोरंजन, फैशन, व्यावसाय, फिल्मों, उपभोक्ता संस्कृति और खेल पर है।
  • राष्ट्रीय और स्थानीय समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनलों के प्रकाशकों और संपादकों के बीच एक रचनात्मक अभियान उन कहानियों को प्रकाशित करके उत्साह को बनाए रख सकता है जहां धार्मिक सदभाव और भाईचारे को दिखया गया हो। अंतर-धार्मिक आयोजनों की अधिक कवरेज कर के आपसी सहयोग की भावना का विकाश किया जा सकता है।
  • वर्तमान में प्रस्तावित कट्टरवाद विरोधी कानून को लागू करने की समस्याओं या स्कूलों और कॉलेजों के लिए एक अंतर-धार्मिक पाठ्यक्रम के निर्माण से संबंधित मुद्दों पर स्टोरी बनाई जा सकती हैं।
  • विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच प्रभावी संचार चैनलों के माध्यम से संघर्ष समाधान के सबसे महत्वपूर्ण तरीकों में से एक है ताकि अफवाहों को ख़त्म किया जा सके और समस्याओं को बड़ा होने से पहले हल किया जा सके। पुलिस, मीडिया, धार्मिक और सामुदायिक नेताओं के साथ संचार भी महत्वपूर्ण है।
  • स्कूलों और कॉलेजों में सक्रिय भूमिका निभाने और अंतर-धार्मिक शिक्षा शुरू करने का समय आ गया है जो पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देगा ।

Conclusion :

हम वैकल्पिक पाठ्यचर्या सामग्री बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, जो धार्मिक इतिहास के बारे में अधिक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सके, साथ ही सभी धार्मिक परंपराओं के सम्मान को बढ़ावा दे। प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के धर्म का पालन करने का अधिकार है और असहिष्णुता इस अधिकार के लिए खतरा है। समानता, स्वीकृति के साथ, सांप्रदायिक सद्भाव को शामिल करती है। हमें साम्प्रदायिक सद्भाव के महत्व को फैलाना चाहिए और सभी को जागरूक करना चाहिए। धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार हमारी रक्षा करता है, लेकिन साथ ही हमें विभिन्न धर्मों के प्रति सहिष्णुता और सम्मान का निर्माण करना चाहिए। हमारे देश के लिए सांप्रदायिक सद्भाव जरूरी है।

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Essays

Essay on importance of religious harmony

Essay on importance of religious harmony in Hindi

Introduction :

भारत एक बहु-धार्मिक, बहुभाषी और बहु-नस्लीय देश है और विविधताओं के बीच हमेशा संस्कृति की एकता से घिरा रहा है। यहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग साथ-साथ रहते हैं। भारत हमेशा से ही एकता का प्रतिक माना जाता रहा है एवं एकता ही मानव कल्याण का आधारभूत तत्व है, इसके बिना विश्व शांति का सपना साकार नहीं हो सकता। भारत किसी धर्म की शिफारिश नहीं करता और न ही यहाँ का कोई राष्ट्रीय धर्म है। भारत उन नागरिकों का घर है जिनकी विभिन् धार्मिक मान्यताय हैं। धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत उन्हें बिना किसी प्रतिबंध के अपने धर्म का प्रचार और प्रसार करने की अनुमति देता है। यहां धार्मिक विविधता एवं धार्मिक स्वतंत्रता को क़ानून तथा समाज दोनों द्वारा मान्यता प्रदान की गयी है।

  • भारतीय सविधान के अनुच्छेद 25 से 28 में धार्मिक स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार के रूप में उल्लेखित किया गया है। भारत में प्रत्येक नागरिक को किसी भी धर्म को चुनने एवं उनका पालन करने की स्वतंत्रता है।
  • भारत में विभिन्न धार्मिक संप्रदाय के लोग परस्पर मिलजुल कर रहते है जो हमारी सदभावना को दर्शाता है। भारत 1.3 अरब से अधिक लोगों का देश है, जिनमें से अधिकांश हिंदू हैं।
  • लेकिन हमारे देश में अल्पसंख्यकों की बड़ी आबादी भी है, जिसमें लगभग 21 करोड़ मुसलमान हैं, जो इसे इंडोनेशिया के बाद दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी बनाते वाला देश हैं।
  • यहां लाखों ईसाई, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोग भी हैं। हाल ही में, धार्मिक समुदायों के बीच संघर्ष काफी बढ़ गया है और इन धार्मिक संघर्षों में हजारों लोग मारे गए हैं। ऐसे में अगर आर्थिक स्थिति बिगड़ती है तो सांप्रदायिक मुद्दों का इस्तेमाल देश को बांटने के लिए किया जा सकता है।
  • कट्टरवाद से लड़ने में मीडिया ने सकारात्मक भूमिका निभाई है। लेकिन इस मुद्दे को शांत करने की प्रवृत्ति देखी जाती है। आजकल अखबारों पर ज्यादातर फोकस मनोरंजन, फैशन, व्यावसाय, फिल्मों, उपभोक्ता संस्कृति और खेल पर है।
  • राष्ट्रीय और स्थानीय समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनलों के प्रकाशकों और संपादकों के बीच एक रचनात्मक अभियान उन कहानियों को प्रकाशित करके उत्साह को बनाए रख सकता है जहां धार्मिक सदभाव और भाईचारे को दिखया गया हो। अंतर-धार्मिक आयोजनों की अधिक कवरेज कर के आपसी सहयोग की भावना का विकाश किया जा सकता है।
  • वर्तमान में प्रस्तावित कट्टरवाद विरोधी कानून को लागू करने की समस्याओं या स्कूलों और कॉलेजों के लिए एक अंतर-धार्मिक पाठ्यक्रम के निर्माण से संबंधित मुद्दों पर स्टोरी बनाई जा सकती हैं।
  • विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच प्रभावी संचार चैनलों के माध्यम से संघर्ष समाधान के सबसे महत्वपूर्ण तरीकों में से एक है ताकि अफवाहों को ख़त्म किया जा सके और समस्याओं को बड़ा होने से पहले हल किया जा सके। पुलिस, मीडिया, धार्मिक और सामुदायिक नेताओं के साथ संचार भी महत्वपूर्ण है।

Conclusion :

स्कूलों और कॉलेजों में सक्रिय भूमिका निभाने और अंतर-धार्मिक शिक्षा शुरू करने का समय आ गया है जो पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देगा । हम वैकल्पिक पाठ्यचर्या सामग्री बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, जो धार्मिक इतिहास के बारे में अधिक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सके, साथ ही सभी धार्मिक परंपराओं के सम्मान को बढ़ावा दे। प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के धर्म का पालन करने का अधिकार है और असहिष्णुता इस अधिकार के लिए खतरा है। समानता, स्वीकृति के साथ, सांप्रदायिक सद्भाव को शामिल करती है। हमें साम्प्रदायिक सद्भाव के महत्व को फैलाना चाहिए और सभी को जागरूक करना चाहिए। धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार हमारी रक्षा करता है, लेकिन साथ ही हमें विभिन्न धर्मों के प्रति सहिष्णुता और सम्मान का निर्माण करना चाहिए। हमारे देश के लिए सांप्रदायिक सद्भाव जरूरी है।

Essay on importance of religious harmony in Hindi

Introduction :

India is a multi-religious, multilingual and multi-racial country and always enjoyed the unity of culture among diversities. Here people of different religions and communities live side by side. भारत एक बहु-धार्मिक, बहुभाषी और बहु-नस्लीय देश है और विविधताओं के बीच हमेशा संस्कृति की एकता से घिरा रहा है। यहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग साथ-साथ रहते हैं।

India does not advocate any religion, nor does it have any national religion. India is home to citizens who have different religious affiliations. The principle of secularism allows them to practice and preach their religion without any restriction. भारत किसी धर्म की शिफारिश नहीं करता और न ही यहाँ का कोई राष्ट्रीय धर्म है। भारत उन नागरिकों का घर है जिनकी विभिन्न धार्मिक संबद्धताएँ हैं। धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत उन्हें बिना किसी प्रतिबंध के अपने धर्म का अभ्यास और प्रचार करने की अनुमति देता है।

  • India is a country of more than 1.3 billion people, the majority of whom are Hindus. But we also have large populations of minorities, with about 150 million Muslims, making this the second largest Muslim population in the world, after Indonesia. There are also many millions of Christians, Sikhs, Jains and Buddhists. भारत 1.3 अरब से अधिक लोगों का देश है, जिनमें से अधिकांश हिंदू हैं। लेकिन हमारे देश में अल्पसंख्यकों की बड़ी आबादी भी है, जिसमें लगभग 21 करोड़ मुसलमान हैं, जो इसे इंडोनेशिया के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी बनाते हैं। यहां लाखों ईसाई, सिख, जैन और बौद्ध भी हैं।
  • In recent decades, the conflict between religious communities have grown substantially and thousands of people have been killed in these religious conflicts. If the economic situation deteriorates, then communal issues can be used to divide the nation and divide the poor. हाल के दशकों में, धार्मिक समुदायों के बीच संघर्ष काफी बढ़ गया है और इन धार्मिक संघर्षों में हजारों लोग मारे गए हैं। अगर आर्थिक स्थिति बिगड़ती है तो ऐसे में सांप्रदायिक मुद्दों का इस्तेमाल देश को बांटने और गरीबों को बांटने के लिए किया जा सकता है।
  • The media has by and large played a positive role in fighting fundamentalism. But there is a tendency to put the issue on the backburner. Much of the focus on newspapers these days is on entertainment, fashion, commercial films, consumer culture, and sports. Even politics gets less coverage than any of these other issues. कट्टरवाद से लड़ने में मीडिया ने सकारात्मक भूमिका निभाई है। लेकिन इस मुद्दे को शांत करने की प्रवृत्ति देखी जाती है। आजकल अखबारों पर ज्यादातर फोकस मनोरंजन, फैशन, व्यावसायिक फिल्मों, उपभोक्ता संस्कृति और खेल पर है। इनमें से किसी भी अन्य मुद्दे की तुलना में राजनीति को भी कम कवरेज मिलता है।
  • A creative campaign among publishers and editors of national and local newspapers and television channels can keep the enthusiasm upbeat by publishing stories where Hindus have helped Muslims in times of dire need or vice-versa, or cases where Christians have helped Muslims and Hindus. There can be more coverage of inter-religious events. राष्ट्रीय और स्थानीय समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनलों के प्रकाशकों और संपादकों के बीच एक रचनात्मक अभियान उन कहानियों को प्रकाशित करके उत्साह को बनाए रख सकता है जहां हिंदुओं ने जरूरत के समय या इसके विपरीत, या ऐसे मामलों में जहां ईसाइयों ने मुसलमानों और हिंदुओं की मदद की है। अंतर-धार्मिक आयोजनों की अधिक कवरेज कर के आपसी सहयोग की भावना का विकाश किया जा सकता है।
  • Stories can be done on the problems of implementing anti-fundamentalist legislation that is now being proposed, or issues concerning the formulation of a inter-religious syllabus for schools and colleges. वर्तमान में प्रस्तावित कट्टरवाद विरोधी कानून को लागू करने की समस्याओं या स्कूलों और कॉलेजों के लिए एक अंतर-धार्मिक पाठ्यक्रम के निर्माण से संबंधित मुद्दों पर स्टोरी बनाई जा सकती हैं।
  • One of the most important methods of conflict resolution is through effective communication channels between different religious communities so that rumours can be squashed and problems solved before they become too big. Communication with police, the media, religious and community leaders is also vital. विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच प्रभावी संचार चैनलों के माध्यम से संघर्ष समाधान के सबसे महत्वपूर्ण तरीकों में से एक है ताकि अफवाहों को ख़त्म किया जा सके और समस्याओं को बड़ा होने से पहले हल किया जा सके। पुलिस, मीडिया, धार्मिक और सामुदायिक नेताओं के साथ संचार भी महत्वपूर्ण है।

Conclusion :

The time has come to play a pro-active role in schools and colleges and introduce inter-religious education that can promote communal harmony as part of the curriculum. स्कूलों और कॉलेजों में सक्रिय भूमिका निभाने और अंतर-धार्मिक शिक्षा शुरू करने का समय आ गया है जो पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देगा ।

We intend to work towards creating alternative curriculam material, which present a more balanced view of religious history, as well as promote respect for all religious traditions. हम वैकल्पिक पाठ्यचर्या सामग्री बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, जो धार्मिक इतिहास के बारे में अधिक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सके, साथ ही सभी धार्मिक परंपराओं के सम्मान को बढ़ावा दे।

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Letters

letter to your Uncle informing him about the advantages and need for crop insurance

You are Mansi/Ravi living at Sarthak Road, Delhi. Write a letter to your Uncle who lives in Tarapur village informing him/her about the advantages and need for crop insurance at present time.

Sarthak Road

Delhi

19th Jan, 2022

Dear Uncle,

  I’m good here and hope that you will also be fine. I was very disappointed to know that last month our crops were destroyed due to bad weather. This has been a great loss that cannot be compensated. Though, we can take some steps now to prevent such huge losses in the future. Agriculture in India is highly risky due to frequent droughts and floods in various parts of the country. It is necessary to protect the farmers from natural calamities and ensure their credit eligibility for the next season. For this purpose, the Government has introduced many agricultural schemes.

  I would recommend you to go for Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana. It incorporates the best features of all previous schemes and at the same time, all previous shortcomings have been removed. The premium rates to be paid by farmers are very low and balance premium will be paid by the Government to provide full insured amount to the farmers against crop loss on account of natural calamities. Smart phones will be used to capture and upload data of crop cutting to reduce the delays in claim payment to farmers. I am sure, with this scheme, we will not incur losses in the future.

  I hope, you understand the importance of crop insurance and do the needful as per the present situation. Give my regards to aunt and love to children.

Yours Sincerely

Mansi/Ravi

आप सार्थक रोड, दिल्ली में रहने वाले मानसी/रवि हैं। तारापुर गाँव में रहने वाले अपने चाचा जी को वर्तमान समय में फसल बीमा के लाभ और आवश्यकता की जानकारी देते हुए पत्र लिखिए।

सार्थक रोड

दिल्ली

19 जनवरी, 2022

प्रिय चाचा,

मैं यहाँ अच्छा हूँ और आशा करता हूँ कि आप भी ठीक होंगे। मुझे यह जानकर बहुत निराशा हुई कि पिछले महीने खराब मौसम के कारण हमारी फसलें नष्ट हो गईं। इस नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती है। हालांकि, भविष्य में इस तरह के बड़े नुकसान को रोकने के लिए हम अभी से कुछ जरुरी कदम उठा सकते हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार सूखे और बाढ़ के कारण भारत में कृषि अत्यधिक जोखिम भरा व्यवसाय बन गया है। किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाना और अगले सीजन के लिए उनकी ऋण पात्रता सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए सरकार ने कई कृषि योजनाएं शुरू की हैं।

  मैं आपको प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के लिए सलाह दूंगा। इसमें पिछली सभी योजनाओं की विशेषताओं को शामिल किया गया है और साथ ही, पिछली सभी कमियों को दूर किया गया है। किसानों द्वारा भुगतान की जाने वाली प्रीमियम दरें भी बहुत कम हैं और प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल के नुकसान के खिलाफ किसानों को पूरी बीमा राशि प्रदान करने के लिए शेष प्रीमियम का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है। किसानों को भुगतान में देरी को कम करने के लिए फसल कटाई के डेटा को अपलोड करने के लिए स्मार्ट फोन का उपयोग किया जाता है । मुझे विश्वास है कि इस योजना से हमें भविष्य में नुकसान नहीं होगा।

  आशा करता हु की आप फसल बीमा के महत्व को समझ गए होंगे और वर्तमान स्थिति के अनुसार फसल बीमा जरूर करा लेंगे। आंटी को मेरा प्रणाम और बच्चों को ढेर सारा प्यार।

सादर

मानसी/रवि

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Essays

Essay on domestic tourism opportunities and challenges

Essay on domestic tourism opportunities and challenges

Introduction :

Tourism is one of the most important socio-economic activities and is the world’s largest and fastest growing industry. Tourism in India has immense potential of developing into a high profit making industry. India is a popular tourist destination and has been successful in attracting domestic and international tourists. पर्यटन एक महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक गतिविधि है और यह दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ता उद्योग है। भारत में पर्यटन में उच्च लाभ कमाने वाले उद्योग के रूप में विकसित होने की अपार संभावनाएं हैं। भारत एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने में सफल रहा है।

In India, temple towns, historical monuments and sea beaches were traditionally sought out as tourist attractions. The hill stations, historical sites, architecture and monuments, beaches and places of religious interests make India a preferred destination for the tourists from all over the world. भारत में मंदिरों, ऐतिहासिक स्मारकों और समुद्री तटों को पारंपरिक रूप से पर्यटकों के आकर्षण के रूप में देखा जाता था। हिल स्टेशन, ऐतिहासिक स्थल, वास्तुकला और स्मारक, समुद्र तट और धार्मिक स्थल भारत को दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा स्थान बनाते हैं।

  • The root of tourism in India can be traced to pilgrimage. In the early stages, pilgrimage-based tourism was only of domestic nature but during recent years, a large number of foreign tourists have also started visiting places of pilgrimage. The World Travel and Tourism Council have identified India as one of the foremost growth centres in the world in the coming decade. भारत में पर्यटन की जड़ तीर्थयात्रा में पाई जा सकती है। प्रारंभिक दौर में तीर्थ-आधारित पर्यटन केवल घरेलू प्रकृति का था लेकिन हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों ने भी तीर्थ स्थलों का दौरा करना शुरू कर दिया है। विश्व यात्रा और पर्यटन परिषद ने आने वाले दशक में भारत को दुनिया के अग्रणी विकास केंद्रों में से एक के रूप में पहचाना है।
  • Domestic tourism is estimated to be much higher than international tourism and has also been rising rapidly. Better connectivity of transport and communication, improved standard of living and value for money to the foreign tourists has led to the increase in the domestic as well as international tourists. घरेलू पर्यटन अंतरराष्ट्रीय पर्यटन की तुलना में काफी अधिक होने का अनुमान है और यह तेजी से बढ़ भी रहा है। परिवहन और संचार की बेहतर कनेक्टिविटी, बेहतर जीवन स्तर और विदेशी पर्यटकों के कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों में वृद्धि हुई है।
  • The Government of India is taking keen interest in promoting different forms of tourism such as, ‘rural tourism’, ‘eco tourism’, ‘spiritual tourism’, ‘spa tourism’, and ‘adventure tourism’ etc. Medical tourism has formed an important source of revenue for the healthcare sector. भारत सरकार पर्यटन के विभिन्न रूपों जैसे ‘ग्रामीण पर्यटन’, ‘पारिस्थितिकी पर्यटन’, ‘आध्यात्मिक पर्यटन’, ‘स्पा पर्यटन’ और ‘साहसिक पर्यटन’ आदि को बढ़ावा देने में गहरी दिलचस्पी ले रही है। चिकित्सा पर्यटन ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यटन का गठन किया है।
  • Most of the foreigners from the Western countries such as US, UK, Canada, and neighbouring countries are turning towards India for the affordable world class health care services and treatment. पश्चिमी देशों जैसे यूएस, यूके, कनाडा और पड़ोसी देशों के अधिकांश विदेशी सस्ती विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं और उपचार के लिए भारत की ओर रुख कर रहे हैं।
  • The ‘Incredible India’ campaign by the Government of India is instrumental in promoting India as a holistic tourist destination in the domestic and international markets. There are specialised international media campaigns under’ ‘Incredible India’. Celebrities have been roped in to make ‘Incredible India’ a success even in foreign lands. भारत सरकार का ‘इनक्रेडिबल भारत’ अभियान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत को एक समग्र पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा देने में सहायक है। ‘अतुल्य भारत’ के तहत विशेष अंतरराष्ट्रीय मीडिया अभियान हैं। ‘इनक्रेडिबल भारत’ को विदेशों में भी सफल बनाने के लिए मशहूर हस्तियों को शामिल किया गया है।
  • Besides, the ministry has launched ‘Clean India’ campaign under which cleanliness has become an indispensible norm at all the tourist destinations. Regular studies are being undertaken to analyse the market, identify the key factors, income figures, holiday habits and psyche of people in order to identify the key drivers in the tourism industry. इसके अलावा, मंत्रालय ने ‘स्वच्छ भारत’ अभियान शुरू किया है जिसके तहत सभी पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता एक अनिवार्य मानदंड बन गया है। पर्यटन उद्योग में प्रमुख चालकों की पहचान करने के लिए बाजार का विश्लेषण करने, प्रमुख कारकों, आय के आंकड़ों, छुट्टियों की आदतों और लोगों के मानस की पहचान करने के लिए नियमित अध्ययन किए जा रहे हैं।
  • The government has made the facility of e-Tourist Visa available to the citizens of 150 countries arriving at 16 designated International airports in India. The visa has a validity of 60 days and the procedures are much easier. सरकार ने भारत में 16 नामित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर पहुंचने वाले 150 देशों के नागरिकों के लिए ई-पर्यटक वीजा की सुविधा उपलब्ध कराई है। वीजा की वैधता 60 दिनों की होती है और प्रक्रियाएं बहुत आसान होती हैं।
  • The concept of heritage hotels has gained popularity in India as the tourists get the experience of the exotic life style. Many historical havelis, castles, and forts built during the ancient times have been converted into heritage hotels. As expected, they have turned out to be major tourist attractions. हेरिटेज होटलों की अवधारणा ने भारत में लोकप्रियता हासिल की है क्योंकि पर्यटकों को विदेशी जीवन शैली का अनुभव मिलता है। प्राचीन काल में बनी कई ऐतिहासिक हवेलियों, महलों और किलों को हेरिटेज होटलों में तब्दील कर दिया गया है। जैसा कि अपेक्षित था, वे प्रमुख पर्यटक आकर्षण बन गए हैं।
  • The tourism industry has become one of the major contributors to the GDP of the country. It has the potential to generate mass employment and raise the income levels thereby contribute significantly to the economic development of the country. पर्यटन उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद में प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक बन गया है। इसमें बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने और आय के स्तर को बढ़ाने की क्षमता है जिससे देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है।
  • Tourism has played an important role in the revival of India’s art and culture. The foreigners are fascinated by the rich culture and heritage of India. Seeing the keen interest of tourists in the rich culture and heritage of India, the government is taking steps to preserve it.  पर्यटन ने भारत की कला और संस्कृति के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विदेशी भारत की समृद्ध संस्कृति और विरासत से मोहित हैं। भारत की समृद्ध संस्कृति और विरासत में पर्यटकों की गहरी दिलचस्पी को देखते हुए सरकार इसे संरक्षित करने के लिए कदम उठा रही है।

Conclusion :

Tourism is the largest service industry in our country and has the potential to stimulate economic growth of the country. To achieve its target, it is necessary to develop the tourism infrastructure, viz. the proper maintenance of the tourist destinations, railway stations, airports and rest houses are very necessary. पर्यटन हमारे देश का सबसे बड़ा सेवा उद्योग है और इसमें देश के आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने की क्षमता है। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, पर्यटन के बुनियादी ढांचे को विकसित करना आवश्यक है, अर्थात पर्यटन स्थलों, रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और विश्राम गृहों का उचित रखरखाव बहुत आवश्यक है।

Apart from that More and more efficient facilities for tourist in terms of accommodation, recreation, transport, shopping and development of new tourist spots is the need of the hour. इसके अलावा पर्यटकों के लिए आवास, मनोरंजन, परिवहन, खरीदारी और नए पर्यटन स्थलों के विकास के मामले में अधिक से अधिक कुशल सुविधाएं समय की मांग है।

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Essays

Essay on Prevention and Mitigation Of Natural Disasters

Essay on Prevention and Mitigation Of Natural Disasters

Introduction :

A disaster is a result of natural or man-made causes that leads to sudden disruption of normal life, causing severe damage to life and property to an extent that available social and economic protection mechanisms are inadequate to cope. /आपदा प्राकृतिक या मानव निर्मित कारणों का परिणाम है जो सामान्य जीवन में अचानक व्यवधान पैदा करता है, जिससे जीवन और संपत्ति को इस हद तक गंभीर नुकसान होता है कि उपलब्ध सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा तंत्र सामना करने के लिए अपर्याप्त हो जाते है । It is an undesirable occurrence resulting from forces that are largely outside human control. It strikes quickly with little or no warning and requires major efforts in providing statutory emergency service. / यह एक अवांछनीय घटना है जो उन ताकतों से उत्पन्न होती है जो काफी हद तक मानव नियंत्रण से बाहर हैं। यह बहुत कम या बिना किसी चेतावनी के हमला करता है और वैधानिक आपातकालीन सेवा प्रदान करने के लिए बड़े प्रयासों की आवश्यकता होती है।

Natural disasters can be broadly classified into categories including geophysical such as earthquakes and volcanic eruptions; hydrological such as floods; meteorological such as hurricanes; climatological such as heat and cold waves and droughts; and biological such as epidemics. / प्राकृतिक आपदाओं को व्यापक रूप से भू-भौतिकीय जैसे भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट सहित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है; हाइड्रोलॉजिकल जैसे बाढ़; मौसम संबंधी जैसे तूफान; जलवायु संबंधी जैसे गर्मी और ठंडी लहरें और सूखा; और जैविक जैसे महामारी ।

Causes for Occurrence of Disaster / आपदा के कारण –

  • Removal of trees and forest cover from a watershed area have caused, soil erosion, expansion of flood plain area in upper and middle course of rivers and groundwater depletion/ वाटरशेड क्षेत्र से पेड़ों और वनों को हटाने से मिट्टी का कटाव, नदियों के ऊपरी और मध्य मार्ग में बाढ़ के मैदान का विस्तार और भूजल की कमी हुई है।
  • Exploitation of land use, development of infrastructure, rapid urbanization and technological development have caused increasing pressure over the natural resources / भूमि उपयोग के दोहन, बुनियादी ढांचे के विकास, तेजी से शहरीकरण और तकनीकी विकास के कारण प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।
  • War, nuclear power aspirations, fight between countries to become super power and conquering land, sea and skies. These have resulted into wide range of disaster events such as Hiroshima nuclear explosion, growing militarisation of oceans and outer space. युद्ध, परमाणु ऊर्जा आकांक्षाएं, महाशक्ति बनने के लिए देशों के बीच लड़ाई और भूमि, समुद्र और आसमान पर विजय प्राप्त करना। इनके परिणामस्वरूप हिरोशिमा परमाणु विस्फोट, महासागरों के बढ़ते सैन्यीकरण और बाहरी अंतरिक्ष जैसी आपदा घटनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला हुई है।

Impacts of Disaster / आपदा के प्रभाव –

  • Disaster impacts individuals physically through loss of life, injury, health, disability as well as psychologically / आपदा व्यक्ति को जीवन की हानि, चोट, स्वास्थ्य, विकलांगता के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक रूप से, शारीरिक रूप से प्रभावित करती है।
  • Disaster results in huge economic loss due to destruction of property, human settlements and infrastructure etc / आपदा के परिणामस्वरूप संपत्ति, मानव बस्तियों और बुनियादी ढांचे आदि के विनाश के कारण भारी आर्थिक नुकसान होता है।
  • Disaster can alter the natural environment, loss of habitat to many plants and animals and cause ecological stress that can result in biodiversity loss / आपदा प्राकृतिक पर्यावरण को बदल सकती है, कई पौधों और जानवरों के आवास का नुकसान हो सकता है और पारिस्थितिक तनाव पैदा कर सकता है जिसके परिणामस्वरूप जैव विविधता का नुकसान हो सकता है।
  • After natural disasters, food and other natural resources like water often becomes scarce resulting into food and water scarcity / प्राकृतिक आपदाओं के बाद, भोजन और पानी जैसे अन्य प्राकृतिक संसाधन अक्सर दुर्लभ हो जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप भोजन और पानी की कमी हो जाती है।
  • The disaster results in displacement of people, and displaced population often face several challenges in new settlements, in this process poorer becomes more poor / आपदा के परिणामस्वरूप लोगों का विस्थापन होता है, और विस्थापित आबादी को अक्सर नई बस्तियों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इस प्रक्रिया में गरीब और अधिक गरीब हो जाता है।

Disaster Risk Management/ आपदा जोखिम प्रबंधन –

Disaster Risk Management implies the systematic process of using administrative decisions, organisation, operational skills, and capacities to implement policies, strategies and coping capacities of the society and communities to lessen the impact of natural hazards and related environmental and technological disasters. / आपदा जोखिम प्रबंधन का तात्पर्य प्राकृतिक खतरों और संबंधित पर्यावरणीय और तकनीकी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए समाज और समुदायों की नीतियों, रणनीतियों और मुकाबला करने की क्षमताओं को लागू करने के लिए प्रशासनिक निर्णयों, संगठन, परिचालन कौशल और क्षमताओं का उपयोग करने की व्यवस्थित प्रक्रिया से है।

1) Pre-Disaster risk reduction –

  • Mitigation – To eliminate or reduce the impacts and risks of hazards through proactive measures taken before an emergency or disaster occurs/ किसी आपात स्थिति या आपदा आने से पहले किए गए सक्रिय उपायों के माध्यम से खतरों के प्रभावों और जोखिमों को समाप्त करना या कम करना।
  • Preparedness –  To take steps to prepare and reduce the effects of disasters / आपदाओं के प्रभाव को तैयार करने और कम करने के लिए कदम उठाना।

2) Post-Disaster risk reduction –

  • Rescue: Providing warning, evacuation, search, rescue, providing immediate assistance / चेतावनी, निकासी, खोज, बचाव प्रदान करना, तत्काल सहायता प्रदान करना।
  • RelifeTo respond to communities who become victims of disaster, providing relief measures such as food packets, water, medicines, temporary accommodation, relief camps etc. / आपदा का शिकार होने वाले समुदायों को राहत के उपाय जैसे भोजन, पानी, दवाएं, अस्थायी आवास, राहत शिविर आदि उपलब्ध कराना।
  • Recovery: This stage emphasises upon recovery of victims of disaster, recovery of damaged infrastructure and repair of the damages caused / यह चरण आपदा के पीड़ितों, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे और नुकसान की मरम्मत पर जोर देता है।
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Essays

Essay on Mushrooming Old Age Home

Essay on Mushrooming Old Age Home

Introduction :

A man’s life is normally divided into five stages namely: infancy, childhood, adolescence, adulthood and old age. In each of these stages an individual’s finds himself in different situations and faces different problems. Old age is viewed as an unavoidable, undesirable and problem ridden phase of life. /मनुष्य के जीवन को सामान्य रूप से पाँच चरणों में विभाजित किया जाता है: शैशव, बचपन, किशोरावस्था, वयस्कता और बुढ़ापा। इनमें से प्रत्येक चरण में एक व्यक्ति खुद को विभिन्न स्थितियों में पाता है और विभिन्न समस्याओं का सामना करता है। वृद्धावस्था को जीवन के एक अपरिहार्य, अवांछनीय और समस्या ग्रस्त चरण के रूप में देखा जाता है।

  • Old age is a period of physical decline. The skin becomes rough and looses its elasticity. Wrinkles are formed and the veins show out prominently on the skin. Changes in the nervous system have a marked influence on the brain. / बुढ़ापा शारीरिक पतन का काल है। त्वचा खुरदरी हो जाती है और अपनी लोच खो देती है। झुर्रियां हो जाती हैं और नसें त्वचा पर दिखाई देने लगती हैं। तंत्रिका तंत्र में परिवर्तन का मस्तिष्क पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
  • The old are more accident prone because of their slow reaction to dangers resulting in malfunctioning of the sense organs and declining mental abilities, the capacity to work decreases / वृद्ध अधिक दुर्घटना प्रवण होते हैं क्योंकि खतरों के प्रति उनकी धीमी प्रतिक्रिया के कारण इंद्रिय अंगों के खराब होने और मानसिक क्षमताओं में गिरावट आती है, काम करने की क्षमता भी कम हो जाती है।
  • Older people suffer from senile dementia. They develop symptoms like poor memory, intolerance of change, disorientation, rest lessens, insomnia, failure of judgement, a gradual formation of delusion and hallucinations, extreme-mental depression and agitation / वृद्ध लोग मनोभ्रंश से पीड़ित हो जाते  हैं। उनमें याददाश्त कम होना, परिवर्तन के प्रति असहिष्णुता, भटकाव, आराम कम होना, अनिद्रा, निर्णय की विफलता, धीरे-धीरे भ्रम और मतिभ्रम, अत्यधिक मानसिक अवसाद जैसे लक्षण विकसित होते हैं।
  • This is also associated with symptoms such as weakness, fatigue, dizziness, headache, depression, memory defect. Due to urbanisation, modernisation the joint families have shattered. People are busy with their jobs, and they hardly have any time and interest to look after the older members of the family/ यह कमजोरी, थकान, चक्कर आना, सिरदर्द, अवसाद, स्मृति दोष जैसे लक्षणों का भी कारन है। शहरीकरण, आधुनिकीकरण के कारण संयुक्त परिवार बिखर गए हैं। लोग अपने काम में व्यस्त हैं, और परिवार के बड़े सदस्यों की देखभाल करने के लिए उनके पास शायद ही समय और रुचि है।
  • Therefore, they leave their parents in old age homes. Also, many insensitive people, abandon their parents, and as a result of which various NGOs and governmental organisations rescue them and admit them to old age homes ‘/ इसलिए, वे अपने माता-पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ देते हैं। साथ ही, कई असंवेदनशील लोग अपने माता-पिता को छोड़ देते हैं, और जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न गैर-सरकारी संगठन और सरकारी संगठन उन्हें बचाते हैं और उन्हें वृद्धाश्रम में भर्ती कर देते हैं।

Conclusion :

People are also adopting these new lifestyles and in a way, adjusting or compromising with life. However, it is important not to forget that we have to take care of the parents during their old age because they have taken care of us and raised us with a lot of love and affection since childhood. / लोग भी इन नई जीवनशैली को अपना रहे हैं और एक तरह से जीवन के साथ एडजस्ट या समझौता कर रहे हैं। हालांकि, यह नहीं भूलना महत्वपूर्ण है कि हमें माता-पिता के बुढ़ापे के दौरान उनका ख्याल रखना है क्योंकि उन्होंने बचपन से ही हमारा ख्याल रखा है और हमें बहुत प्यार और स्नेह से पाला है।

We should not be selfish and seek their blessings by providing them physical, social and emotional support. On the part of the parents, it is important to get prepared for the worst, in the case shortly and should not live with a lot of hopes, but make good savings to lead independent life during the old age, in case their children abandoned them, or any mishap occurs. /हमें स्वार्थी नहीं होना चाहिए और उन्हें शारीरिक, सामाजिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। माता-पिता की ओर से, जल्द ही सबसे खराब स्थिति के लिए तैयार होना महत्वपूर्ण है और बहुत उम्मीदों के साथ नहीं जीना चाहिए, बुढ़ापे के दौरान स्वतंत्र जीवन जीने के लिए अच्छी बचत करें, अगर उनके बच्चों ने उन्हें छोड़ दिया या कोई अनहोनी हो जाती है।

We should make sure there should be no old age home at all. People should get all love, care, attention and support from their own family. In this way, we can become good human beings and seek their blessings. /हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई वृद्धाश्रम न हो। लोगों को अपने ही परिवार से सारा प्यार, देखभाल, ध्यान और समर्थन मिलना चाहिए। इस तरह हम अच्छे इंसान बन सकते हैं और उनका आशीर्वाद ले सकते हैं।

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Letters

write a letter to your friend apologizing for having quarrel with him

write a letter to your friend apologizing for having quarrel with him

Questions –

You are Yash/Ranjana living at C-Block Coloni, Bihar. Write a letter of apology to your friend whom you have offended by saying unkind things in a fit of anger and offering a hand of friendship again.

C-Block Coloni

Bihar

12th Jan, 2022

Dear Friend,

   I hope you’re fine. I know you are angry with me. We argued about many things and said many hurtful things to each other. I am really sorry for what I told to you yesterday. But believe me, I could not control myself as I was already in a fit of anger.

 I was already not in a mood and because of that for a small thing I behaved as if you had done wrong. I am in a cool temper now and I have realized my mistake. You are very good at heart. I am feeling guilty at this time. I apologize for my mistake and I promise not to repeat it. 

  I am sure you will forgive me and also offer a hand for friendship again. We have done great things together as a friend. I hope you will forgive me and accept me as your friend.

Yours lovingly

Yash/Ranjana

 

Question in Hindi :

आप सी-ब्लॉक कॉलोनी, बिहार में रहने वाले यश/रंजना हैं। अपने मित्र को क्षमा माँगते हुए एक पत्र लिखिए जिसे आपने क्रोध में आकर झगडा कर लिया है और पुनः मित्रता करने का अनुरोध करे।

सी-ब्लॉक कॉलोनी

बिहार

12 जनवरी, 2022

प्रिय मित्र,

  मैं आशा करता हु की तुम ठीक हो। मुझे पता है कि तुम मुझसे नाराज़ हो। हमने कई बातों को लेकर बहस की और एक-दूसरे को कई आहत करने वाली बातें भी कही। कल जो मैंने तुमसे कहा था, उसके लिए मुझे वास्तव में खेद है। लेकिन मेरा विश्वास करो, मैं अपने आप को नियंत्रित नहीं कर सका क्योंकि मैं पहले से ही गुस्से में था।

मेरा पहले से ही मूड ठीक नहीं था और इस वजह से एक छोटी सी बात के लिए मैंने ऐसा व्यवहार किया जैसे तुमने कुछ गलत किया हो। लेकिन अब मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया है। तुम दिल के बहुत अच्छे हो। मैं इस समय अच्छा महसूस नहीं कर रहा हूं। मैं अपनी गलती के लिए माफी मांगता हूं और वादा करता हूं कि ऐसा दोबारा नहीं करूंगा।

  मुझे यकीन है कि तुम मुझे माफ कर देंगे और फिर से मेरी दोस्ती कबुल करोगे। हमने एक दोस्त के रूप में एक साथ बहुत अच्छे काम किए हैं। मुझे आशा है कि तुम मुझे क्षमा करेंगे और मुझे अपने मित्र के रूप में स्वीकार करेंगे।

तुम्हारा मित्र

यश/रंजना

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Essays

Complaint letter to shopkeeper against defected garments

Complaint letter to shopkeeper against defected garments

Question : You are Ravi/Meenakshi of Buxer Road, West Bengal- 208546. You have ordered some readymade garments from ‘Phenix Garments’ shop in your area and have found that they are unsatisfactory (for example: wrong colour or mis fit). Write a letter to the shopkeeper telling him what is wrong and asking him what he can do to put things right.

Buxer Road

West Bengal- 208546

8th Jan, 2022

The Shopkeeper

Phenix Garments

West Bengal

Subject: Complaint against the delivered garments which are not of fine quality.

Respected Sir,

This letter is with reference to the delivery of garments ordered to you dated Jan 3, 2022. I took the delivery of the garments yesterday from your warehouse.

I feel really sorry to say that the quality of the garments is not up to the mark. The quality of the fabric is low in comparison to the sample shown to us. Moreover, a few of the pieces are mis fit. I am highly worried about the garments delivered by you as most of them are not really well. Please acknowledge this letter as to what you can do to make the garments okay and put things right.

It would be my pleasure if you could provide me a fresh lot of garments in exchange of the delivered ones as we have not accepted that garments . Kindly take necessary actions in this regard and provide the fresh consignment as early as possible.

Thanking you

Yours faithfully

Ravi/Meenakshi

Hindi Question : आप बक्सर रोड, पश्चिम बंगाल- 208546 के रहने वाले रवि/मीनाक्षी हैं। आपने अपने क्षेत्र में ‘फीनिक्स गारमेंट्स’ की दुकान से कुछ रेडीमेड कपड़ों का ऑर्डर दिया है और पाया है कि वे असंतोषजनक हैं उदाहरण के लिए: गलत रंग या फिटिंग ठीक नहीं है। दुकानदार को एक पत्र लिखकर बताएं कि कपड़ों में क्या दिक्कत है और उससे पूछें कि वह इसको ठीक करने के लिए क्या कर सकते है।

बक्सर रोड

पश्चिम बंगाल- 208546

30 दिसंबर, 2021

दुकानदार महोदय

फेनिक्स गारमेंट्स

पश्चिम बंगाल

विषय: ख़राब गुणवत्ता वाले वस्त्रों के सम्बन्ध में शिकायत पत्र

आदरणीय महोदय,

यह पत्र 25 दिसंबर, 2021 को आपको ऑर्डर किए गए कपड़ों की डिलीवरी के संदर्भ में है। मुझे कल आपके गोदाम से कपड़ों की डिलीवरी मिली थी।

मुझे यह कहते हुए खेद हो रहा है कि आपके द्वारा भेजे गए कपड़ों की गुणवत्ता सही नहीं है। हमें दिखाए गए नमूने की तुलना में इन कपड़ों की गुणवत्ता में बहुत फर्क है। इसके अलावा, कुछ कपड़ो की फिटिंग भी सही नहीं हैं। मैं आपके द्वारा भेजे गए माल (कन्साइनमेंट) को लेकर बहुत चिंतित हूं क्योंकि उनमें से अधिकांश वास्तव में ठीक नहीं हैं।

कृपया इस पत्र को स्वीकार करें और इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करें और जल्द से जल्द नया कन्साइनमेंट उपलब्ध कराएं।

धन्यवाद

सादर

रवि/मीनाक्षी

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Essays

Essay on India in Tokyo Olympics 2021 in Hindi

Essay on India in Tokyo Olympics 2021 in Hindi

Introduction :

“ओलंपिक खेलों में सबसे महत्वपूर्ण चीज जीतना नहीं बल्कि भाग लेना है” यह कथन दर्शाता है कि जीवन में जीतना ही सबकुछ नहीं होता बल्कि पूरी ताकत से लड़ना है। ओलंपिक दुनिया के बेहतरीन खेल आयोजनों में से एक है जो चार साल में एक बार आयोजित किया जाता है। इस साल ओलंपिक का आयोजन जापान के टोक्यो में हुआ । ओलंपिक खेलो के आयोजन से खिलाड़ियों को पुरे विश्व मेंअपनी प्रतिभा दिखाने और अपने देश को गौरवान्वित करने का अवसर मिलता है। यह वह मंच है जो दुनिया के विभिन्न देशों के बीच एकता को प्रोत्साहित करता है और भाईचारे को बढ़ावा देता है।

  • टोक्यो ओलंपिक का आयोजन 23 जुलाई से हुआ और 8 अगस्त 2021 को समाप्त हो गया। टोक्यो ओलंपिक में, भारत ने पिछले रियो ओलंपिक की तुलना में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है।
  • टोक्यो ओलंपिक में भारत ने सात पदक जीते हैं और पदक तालिका में 48वां स्थान हासिल किया है जो पिछले चार दशकों में कहीं बेहतर है।
  • भारत ने सात पदकों में से एक स्वर्ण हासिल किया जो भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने हासिल किया इसके अलावा दो रजत और चार कांस्य पदक भी हासिल हुए है।
  • पैरालंपिक श्रेणी में भारतीय एथलीटों ने उल्लेखनीय काम किया है। इस श्रेणी में भारत ने 19 पदक हासिल किए हैं जिसमें पांच स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य पदक शामिल हैं।
  • वैसे तो टोक्यो ओलंपिक में हमारे देश का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा, लेकिन और भी बेहतर हो सकता है अगर हमारे देश के संबंधित अधिकारी और युवा खेल के प्रति अपना नजरिया बदलें।
  • हमारे देश में क्रिकेट के प्रति लोगो का जुनून देखने लायक हैं पर अन्य खेलो के प्रति भी हमें ध्यान देने की जरुरत हैं। हलाकि भारत के खिलाडीयो ने कम संसाधनो के बावजूद भी अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन अगर इनपर बजट और बढ़ा दिया जाये तो इनके प्रदर्शन में और निखार आएगा,
  • जिससे आगामी प्रतियोगिताओ में इससे वे इससे भी ज्यादा पदक जीत सकेंगे। इसके अलावा भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप भी इस दिशा में प्रमुख कारण हैं इसलिए अब तक हमारे पास केवल 35 पदक ही हैं।

Conclusion :

वर्तमान समय में, सरकार खेलो इंडिया प्रोग्राम, फिट इंडिया और कम एंड प्ले स्कीम आदि जैसी विभिन्न योजनाओ के माध्यम से इस क्षेत्र में सराहनीय प्रयास कर रही है। लेकिन भारत की वर्तमान स्थिति को देखते हुए ये पर्याप्त नहीं है। सबसे पहले हमें खेल के प्रति अपना नजरिया बदलना होगा और इस क्षेत्र में सफलता पाने के लिए सही उम्र में सही प्रतिभा की पहचान करनी होगी। लोगों को खेल के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए सरकार को और अधिक योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करना चाहिए। इस सम्बन्ध में यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि “विश्वास ही सफलता की कुंजी है।” अगर हमे विश्वास हैं, तो हम कुछ भी हासिल कर सकते हैं !

फिट इंडिया मूवमेंट पर निबंध

Introduction :

भारत के लोगों के में फिटनेस और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए, प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती और राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 29 अगस्त, 2019 को फिट इंडिया मूवमेंट का शुभारंभ किया। फिट इंडिया मूवमेंट का उद्देश्य भारतीयों को स्वस्थ और फिट जीवन शैली के लिए फिटनेस गतिविधियों और खेल को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रधानमंत्री ने फिट इंडिया पर अपने भाषण के दौरान कहा कि फिटनेस केवल एक शब्द नहीं है बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का एक तरीका है।

हमारा राष्ट्र केवल तभी फिट होगा जब इसके प्रत्येक नागरिक फिट होगे। उन्होंने कहा, “मैं आपको फिट देखना चाहता हूं और आपको फिटनेस के प्रति जागरूक करना चाहता हूं और हम एक साथ फिट इंडिया के लक्ष्य को पूरा करेंगे ।” इस आंदोलन का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ भविष्य के लिए अधिक सक्रिय जीवन शैली के लिए प्रोत्साहित करना है। लोगों को नियमित रूप से व्यायाम करने, मनोरंजक खेल खेलने और फिट रहने के लिए योग करने के लिए कहा गया।

  • बदलते समय के साथ-साथ भारत के लोगों के जीवन स्तर पर भी बड़ा बदलाव आया है।लोगों का रहन-सहन, खान-पान व जीवन जीने के तौर तरीके पहले जैसे नहीं रहे।
  • असमय भोजन,जंक फ़ूड,शाररिक व्यायाम न करना या अन्य वजहों से कई बीमारियें हो रही हैं।जिसने बड़े,बुजुर्गों व युवाओं को ही नहीं,यहां तक कि छोटे-छोटे बच्चों को भी अपनी की चपेट में ले लिया हैं।
  • आजकल छोटे-छोटे बच्चों को भी डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर,दिल की बीमारी व मोटापे आदि की शिकायत हो रही है।लेकिन इनमें से कई बीमारियों को हम अपने जीवन में छोटे-छोटे बदलाव कर दूर कर सकते हैं।

वैश्विक स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार

  • विकसित देशों में गैर-संक्रामक बीमारियां औसतन 55 वर्ष की उम्र में लोगों में देखी जा रही हैं।जबकि भारत में यह अधिकतर 45 वर्ष की उम्र में ही नागरिकों को अपनी चपेट में ले रही हैं।
  • भारत में दिल के रोगियों की संख्या लगभग 5.45 करोड़ हैं।जबकि 13.5 करोड़ लोग मोटापे का शिकार है।
  • भारत में हर 10 में से एक व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित है।जबकि हर पांचवें व्यक्ति को हाइपरटेंशन की समस्या है।इस वक्त देश में 24.5% पुरुष तथा 20% महिलाएं हाइपरटेंशन का शिकार हैं।और भारत में लगभग 1.63 करोड़  मौतों हाइपरटेंशन की वजह से होती है।
  • भारत में पिछले दो दशकों में दो तिहाई गैर-संक्रामक रोग के मरीज बढ़े हैं।1990 में देश में कुल मौतों से 37.09% गैर संक्रामक रोगों से हो रही थी।लेकिन आज यह 62% तक पहुंच गई है।
  • भारत में कुल आबादी का लगभग 10% आबादी मानसिक रोगी है।यानि किसी ने किसी मानसिक परेशानी की गिरिफ्त में है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने फिट इंडिया अभियान (Fit India Movement) को शुरू करते हुए लोगों को स्वस्थ व फिट रहने के कुछ मन्त्र दिये, जैसे

  • बॉडी फिट है तो माइंड हिट।
  • फिटनेस एक शब्द नहीं, बल्कि स्वस्थ और समृद्ध जीवन की एक जरूरी शर्त है।
  • इसमें जीरो इन्वेस्टमेंट(Investment) है।लेकिन Return असीमित है।
  • जो लोग सफल है उनका एक ही मंत्र है फिटनेस पर उनका फोकस।
  • सफलता और फिटनेस का रिश्ता भी एक दूसरे से जुड़ा है।खेल,फिल्म, हर क्षेत्र के हीरो फिट रहते हैं।
  • किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए मानसिक और शारीरिक फिटनेस का होना जरूरी है
  • शरीर के लिए लिफ्ट या एस्केलेटर्स के बजाय बल्कि सीढ़ी का उपयोग करना सही होता है।लेकिन यह तभी हो पाएगा जब आप फिट हैं।
  • किसी भी क्षेत्र के व्यक्ति को मेंटल और फिजिकल तौर पर फिट होना जरूरी है।चाहे बोर्डरूम हो या बॉलीवुड।जो फिट है वह आसमान छूता है।
  • आज Lifestyle Diseases, Lifestyle Disorder की वजह से हैं।लेकिन Lifestyle Disorder को हम Lifestyle में बदलाव करके ठीक कर सकते हैं।
  • कुछ दशक पहले तक एक सामान्य व्यक्ति 8-10 किलोमीटर तक पैदल चल ही लेता था।कुछ ना कुछ फिटनेस के लिए करता ही था।लेकिन आज नई टेक्नोलॉजी की वजह से नए साधन बाजार में आए और व्यक्ति का पैदल चलना काफी कम हो गया।
  • भारत सरकार Fit India Movement को सफल बनाने के लिए कई विभागों के साथ मिलकर काम करेंगी।इनमें खेल मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय आदि प्रमुख हैं। 
  • फिट इंडिया अभियान का मुख्य मकसद स्वास्थ्य के प्रति देश के लोगों को जागरूक करना है।इसीलिए इस अभियान को भी सरकार स्वच्छता अभियान की ही तरह आगे बढ़ाएगी। 

Conclusion :

अधिकांश रोगों का मूल कारण जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां हैं और ऐसी कई बीमारियां हैं जिन्हें हमारी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके दूर किया जा सकता है। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने पहले ही अपने अभियानों के साथ स्वस्थ और फिट राष्ट्र के लिए मार्ग प्रशस्त करने का लक्ष्य रखा है। फिट इंडिया मूवमेंट को देश के हर कोने तक पहुंचना चाहिए। हमें इस आंदोलन की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए और फिट इंडिया को सफल बनाने का प्रयास करना चाहिए।

समाज के प्रति युवाओं की भूमिका पर निबंध

Introduction :

युवाओं को प्रत्येक देश की सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति माना जाता है क्योंकि उनकी बुद्धिमता और कड़ी मेहनत देश को सफलता और समृद्धि की राह पर ले जाती है। जैसा कि प्रत्येक नागरिक का राष्ट्र के प्रति कुछ उत्तरदायित्व होता है, वैसे ही युवाओं का भी है। प्रत्येक राष्ट्र के निर्माण में इनका बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान होता हैं। युवा एक ऐसे व्यक्ति को कहते है जिसकी उम्र 15 से 30 वर्ष के बीच में होती है। चूंकि युवा हर समाज की रीढ़ होते हैं और इसलिए वे समाज के भविष्य का निर्धारण करते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अन्य सभी आयु वर्ग जैसे कि बच्चे, किशोर, मध्यम आयु वर्ग और वरिष्ठ नागरिक युवाओं पर भरोसा करते हैं और उनसे बहुत उम्मीदें रखते हैं।

समाज में युवाओं पर अत्यधिक निर्भरता के कारण, हम सभी युवाओं की हमारे परिवारों, समुदायों और देश के भविष्य के प्रति बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ है। युवा अपने नेतृत्व, नवाचार और विकास कौशल द्वारा समाज की वर्तमान स्थिति को नवीनीकृत कर सकते हैं। युवाओं से देश की वर्तमान तकनीक, शिक्षा प्रणाली और राजनीति में बदलाव लाने की उम्मीद की जाती है। उनपर समाज में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का भी उत्तरदायित्व है। यही कारण है कि देश के विकास के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी की अत्यधिक आवश्यकता होती है।

  • हमारे राष्ट्र के लिए कई परिवर्तन, विकास, समृद्धि और सम्मान लाने में युवा सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं। इस सबका मुख्य उद्देश्य उन्हें एक सकारात्मक दिशा में प्रशिक्षित करना है।
  • युवा पीढ़ी के उत्थान के लिए कई संगठन काम कर रहे हैं क्योंकि वे बड़े होकर राष्ट्र निर्माण में सहायक बनेंगे। गरीब और विकासशील देश अभी भी युवाओं के समुचित विकास और शिक्षण में पिछड़े हुए हैं।
  • एक बच्चे के रूप में प्रत्येक व्यक्ति, अपने जीवन में कुछ बनने का सपने देखता है, बच्चा अपनी शिक्षा पूरी करता है और कुछ हासिल करने के लिए कुछ कौशल प्राप्त करता है।
  • युवाओं में त्वरित शिक्षा, रचनात्मकता, कौशल होता है। वे हमारे समाज और राष्ट्र में परिवर्तन लाने की शक्ति रखते हैं।
  • युवा उस चिंगारी के साथ बड़ा होता है, जो कुछ भी कर सकता है।
  • समाज में कई नकारात्मक कुरीतियाँ और कार्य किए जाते हैं। युवाओं में समाज परिवर्तन और लिंग तथा सामाजिक समानता की अवधारणा को लाने की क्षमता है।
  • समाज में व्याप्त कई मुद्दों पर काम करके युवा दूसरों के लिए एक आदर्श बन सकते हैं।

युवा की भूमिका

  • युवाओं को राष्ट्र की आवाज माना जाता है। युवा राष्ट्र के लिए कच्चे माल या संसाधन की तरह होते हैं। जिस तरह के आकार में वे हैं, उनके उसी तरीके से उभरने की संभावना होती है।
  • राष्ट्र द्वारा विभिन्न अवसरों और सशक्त युवा प्रक्रियाओं को अपनाया जाना चाहिए, जो युवाओं को विभिन्न धाराओं और क्षेत्रों में करियर बनाने में सक्षम बनाएगा।
  • युवा लक्ष्यहीन, भ्रमित और दिशाहीन होते हैं और इसलिए वे मार्गदर्शन और समर्थन के अधीन होते हैं, ताकि वे सफल होने के लिए अपना सही मार्ग प्रशस्त कर सकें।
  • युवा हमेशा अपने जीवन में कई असफलताओं का सामना करते हैं और हर बार ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि एक पूर्ण अंत है, लेकिन वो फिर से कुछ नए लक्ष्य के साथ खोज करने के लिए एक नए दृष्टिकोण के साथ उठता है।
  • एक युवा मन प्रतिभा और रचनात्मकता से भरा हुआ है। यदि वे किसी मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते हैं, तो परिवर्तन लाने में सफल होते हैं।

भारत में युवाओं की प्रमुख समस्याएं

  • कई युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान नहीं की जाती है; यहां तक ​​कि कई लोग गरीबी और बेरोजगारी तथा अनपढ़ अभिभावकों के वजह से स्कूलों नहीं जा पाते हैं। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बच्चे को स्कूल जाने और उच्च शिक्षा हासिल करने का मौका मिले।
  • बालिका शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि देश में कई ऐसे हिस्से हैं जहां लड़कियां स्कूल जाने और पढ़ाई से वंचित है। लेकिन युवा, लड़के और लड़कियों दोनों का गठन करते हैं। जब समाज का एक वर्ग उपेक्षित हो, तो समग्र विकास कैसे हो सकता है?
  • अधिकांश युवाओं को गलत दिशा में खींच लिया गया है; उन्हें अपने जीवन और करियर को नष्ट करने से रोका जाना चाहिए।
  • कई युवाओं में कौशल की कमी देखी गयी है, और इसलिए सरकार को युवाओं के लिए कुछ कौशल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि वे आगे एक या उससे अधिक अवसरों से लाभान्वित हो सकें।
  • भारत में अधिकांश लोग गांवों में रहते हैं, इसलिए शिक्षा और अवसरों की सभी सुविधाओं तक उनकी उचित पहुंच नहीं है।
  • कुछ युवाओं द्वारा वित्तीय संकट और सामाजिक असमानता की समस्या होती है।
  • ऐसे कई बच्चे हैं जो प्रतिभा के साथ पैदा हुए हैं, लेकिन अपर्याप्त संसाधनों के चलते, वे अपनी प्रतिभा के साथ आगे नहीं बढ़ सके।
  • उनमें से कई को पारिवारिक आवश्यकताओं के कारण पैसा कमाने के लिए अपनी प्रतिभा से हटकर अन्य काम करना पड़ता है, लेकिन उन्हें उस काम से प्यार नहीं है जो वे कर रहे हैं।
  • बेरोजगारी की समस्या युवाओं की सबसे बड़ी समस्या है।
  • जन्मजात प्रतिभा वाले कुछ बच्चे होते हैं, लेकिन संसाधन की कमी या उचित प्रशिक्षण नहीं होने के कारण, वे अपनी आशा और प्रतिभा भी खो देते हैं।
  • इस प्रकार, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बच्चे को उचित शिक्षा की सुविधा प्रदान की जाए। प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए। युवाओं को कई अवसर प्रदान किया जाना चाहिए। उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और राजनीतिक मामलों में समान रूप से भाग लेना चाहिए।
  • कुशल समूहों को काम प्रदान करने के लिए कई रोजगार योजनाएं चलानी चाहिए।

Conclusion :

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किस क्षेत्र में प्रगति करना चाहते हैं क्योंकि हर जगह युवाओं की आवश्यकता है। हमारे युवाओं को अपनी आंतरिक शक्तियों और समाज में उनकी भूमिका के बारे में पता होना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर किसी को खुद को योग्य साबित करने के लिए समान मौका मिल सके। युवाओं के पास एक अलग दृष्टिकोण है जो पुरानी पीढ़ियों के पास नहीं था जिसके द्वारा वे हमारे देश में विकाश और समृद्धि ला सकते है।

आत्मनिर्भर भारत पर निबंध

Introduction :

आपदा को अवसर में बदलने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की गयी। पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज देने की भी घोषणा की है जो कि भारत की जीडीपी का 10% है।  इस पैकेज का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में तरलता लाकर आत्मनिर्भर भारत मिशन के उद्देश्यों को पूरा करना है। इस योजना का उद्देश्य 130 करोड़ भारतवासियों को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि देश का हर नागरिक संकट की इस घड़ी में कदम से कदम मिलाकर चल सके और कोविड-19 की महामारी को हराने में अपना योगदान दे सके।

कोरोना वायरस के कारण पूरे देश के लॉक डाउन की स्थिति चल रही है जिसका सबसे ज्यादा बुरा असर देश के सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों , श्रमिकों ,मजदूरों और किसानो पर पड़ रहा है इन सभी नागरिको को लाभ पहुंचाने के लिए हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने देश के सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों, श्रमिकों ,मजदूरों और किसानो को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आर्थिक पैकेज का ऐलान कर दिया।

  • पूरे विश्व मे केवल भारत ही ऐसा देश है जहां सबसे अधिक प्राकृतिक संसाधन पाये जाते है, जो कि बिना किसी देश की मदद से जीवन से लेकर राष्ट्र निर्माण की वस्तुएं बना सकता है और आत्मनिर्भर के सपने को पूरा कर सकता है।
  • हालाकि भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सपना नया है। यह सपना महात्मा गांधी ने आजादी के बाद ही स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया था, पर गरीबी और भुखमरी के कारण उनका सपना साकार न हो सका।
  • करोना महामारी के कारण पिछले कई महीनों से सारा विश्व बन्द पड़ा है, जिसके कारण छोटे लोगों से लेकर पूंजीपतियों तक को भारी नुकसान और परेशानीयों का सामना करना पड रहा है।
  • खासतौर से हमारे छोटे और मध्यम वर्ग के परिवारों को कमाने खाने की समस्या काफी बढ़ गयी है। कोरोना महामारी के कारण किसी भी देश से सामानों का आदान-प्रदान बन्द है।
  • इसलिए मई के महीने मे तालाबन्दी के दौरान हमारे प्रधानमंत्री ने देश को आत्मनिर्भर बनने का आह्वाहन किया है। उन्होने “लोकल फॉर वोकल” का भी नारा दिया। जिसका अर्थ है कि लोकल मे बनी वस्तुओं का उपयोग और उनका प्रचार करना और एक पहचान के रुप मे आगे बढ़ना।
  • महामारी के दौरान ही चीन ने भारत के डोकलाम सीमा क्षेत्र मे कब्जा करने की कोशिश की, जिसमे भारत के लगभग 20 जवान शहीद हो गए। सीमा के इस विवाद मे भारत के सैनिकों की क्षति के कारण देश के हर कोने से चीनी सामान को बैन करने की माँग के साथ ही, चीनी सामानो को बन्द कर दिया गया और प्रधानमंत्री ने सारे देश को आत्मनिर्भर बनने का मंत्र दिया। उन्होने कहा कि आत्मनिर्भर बनकर घरेलु चीजों का इस्तेमाल करें ताकि हमारा राष्ट्र मजबूती के साथ खड़ा हो सके।
  • पिछले कुछ महीनों से विश्व कोरोना वायरस महामारी के कारण बन्द पड़ा है। इसके कारण सारे विश्व मे वित्तीय संकट के बादल छाएं है।
  • इसी कड़ी मे भारत ने खुद को आत्मनिर्भर बनाने और राष्ट्र को आगे ले जाने फैसला किया है। विश्व बन्दी के कारण सारे विश्व के उत्पादों पर भारी असर हुआ है, इसलिए भारत ने स्वयं को आत्मनिर्भर बनाकर देश की तरक्की पर अपना कदम आगे बढ़ाया है।

आत्मनिर्भर भारत फायदे

  • आत्मनिर्भर भारत से हमारे देश मे उद्योगों की संख्या मे वृद्धि होगी।
  • हमारे देश को और देशो से सहायता कम लेनी होगी।
  • हमारे देश मे रोजगार के अधिक अवसर पैदा होगें।
  • इससे देश मे बेरोजगारी के साथ-साथ गरीबी से मुक्ति मे सहायता मिलेगी।
  • भारत की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हो सकेगी।
  • आत्मनिर्भर बनने के साथ भारत चीजों का भंड़ारण काफी अधिक कर सकता है।
  • देश आगे चलकर अन्य देशों से आयात कम और निर्यात ज्यादा कर सकेगा।
  • आपदा की स्थिति मे भारत बाहरी देशों से मदद की मांग कम होगी।
  • देश मे स्वदेशी वस्तुओं का निर्माण कर देश की तरक्की को शीर्ष तक ले जाने मे सहायता मिलेगी।

आत्मनिर्भर भारत की घोषणा के तहत भारत के प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता के लिए पांच महत्वपूर्ण चीजे बाताई है।

  1. इंटेंट यानी इरादा करना।
  2. इन्क्लूजन या समावेश करना।
  3. निवेश या इन्वेस्टमेन्ट करना।
  4. इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी सार्वजनिक ढ़ाचे को मजबूत करना।
  5. नयी चीजों का खोज करना।
  • इस महामारी के दौरान कुछ हद तक हमने आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया है और बिना अन्य देश की मदद से इस महामारी से लड़ने के लिए हमने देश मे ही चीजों का निर्माण करना शुरु कर दिया है।
  • जहां हमने पीपीई किट, वेन्टिलेटर, सेनेटाइजर और के.एन-95 मास्क का निर्माण अपने देश मे ही शुरु कर दिया है। पहले यही चीजे हमे विदेशों से मंगानी पड़ती थी। इन सभी चीजों का निर्माण भारत मे करना ही आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ने का पहला कदम है। इनके उत्पादन से हमे अन्य देशों की मदद भी नही लेनी पड़ रही है, और भारत आत्मनिर्भरता की ओर आगे कदम बढ़ा रहा है।
  • आत्मनिर्भरता की ओर भारत ने पीपीई किट, वैन्टिलेटर इत्यादि चीजों को बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर  अपना पहला कदम बढ़ा दिया है और हमे भी इसमे अपना योगदान देकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करना होगा।
  • हमे ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने की आवश्यकता है। जिससे कि हम अपने देश को आत्मनिर्भर और अपने राष्ट्र को आगे बढ़ाने मे अपना योगदान कर सके।

Conclusion :

आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा देश के किसानों की आय को दोगुना करने और कोविड-19 की आपदा के मद्देनजर किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए एक बेहतर कदम है। यह मिशन हमारे देश को आयात निर्भरता में कमी करने एवं वैश्विक बाजारों में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के महत्व पर भी जोर देगा। इस अभियान के अंतर्गत देश के मजदूर श्रमिक किसान लघु उद्योग कुटीर उद्योग मध्यमवर्गीय उद्योग सभी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जो कि भारत के गरीब नागरिको की आजीविका का साधन है।

भारत में बेरोजगारी की समस्या

Introduction :

बेरोजगारी भारत में एक अहम मुद्दा बनता जा रहा है  जब कोई व्यक्ति काम करने योग्य हो और काम करने की इच्छा भी रखे किन्तु उसे काम का अवसर प्राप्त न हो तो वह बेरोजगार कहलाता हैं। आज हमारे देश मे लाखो लोग बेरोजगार है। ऐसा इसलिए है क्योंकि नौकरियाँ सीमित हैं और नौकरी पाने वालो की संख्या असीमित। भारत में बेरोजगारी की स्थिति एक गंभीर सामाजिक समस्या है। शिक्षा का अभाव और रोजगार के अवसरों की कमी ऐसे कारक हैं जो बेरोज़गारी का प्रमुख कारण हैं। बेरोज़गारी न केवल देश के आर्थिक विकास में बाधा डालती है बल्कि व्यक्तिगत और पूरे समाज पर भी एक साथ कई तरह के नकारात्मक प्रभाव डालती है।

2011 की जनगणना के अनुसार युवा आबादी का 20 प्रतिशत जिसमें 4.7 करोड़ पुरूष और 2.6 करोड़ महिलाएं पूर्ण रूप से बेरोजागार हैं। यह युवा 25 से 29 वर्ष की आयु समूह से हैं। यही कारण है कि जब कोई सरकारी नौकरी निकलती है तो आवेदको की संख्या लाखों मे होती हैं। तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या भारत मे बेरोजगारी का प्रमुख कारण हैं। वर्तमान शिक्षा प्रणाली भी दोषपूर्ण है। बेरोजगारी को दूर करने में जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण आवश्यक है। जिस अनुपात में रोजगार से साधन बढ़ते है, उससे कई गुना जनसंख्या में वृद्धि हो  जाती है।

  • सबसे खराब स्थिति तो वह है जब पढ़े-लिखे युवकों को भी रोजगार नहीं मिलता शिक्षित युवकों की यह बेरोजगारी देश के लिए सर्वाधिक चिन्तनीय है, क्योंकि ऐसे युवक जिस तनाव और अवसाद से गुजरते हैं, उससे उनकी आशाएं टूट जाती हैं और वे गुमराह होकर उग्रवादी, आतंकवादी तक बन जाते हैं।
  • पंजाब, कश्मीर और असम के आतंकवादी संगठनों में कार्यरत उग्रवादियों में अधिकांश इसी प्रकार के शिक्षित बेरोजगार युवक हैं। बेरोजगारी देश की आर्थिक स्थिति को डाँवाडोल कर देती है। इससे राष्ट्रीय आय में कमी आती है, उत्पादन घट जाता है और देश में राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हो जाती है।
  • बेरोजगारी से क्रय शक्ति घट जाती है, जीवन स्तर गिर जाता है जिसका दुष्प्रभाव परिवार एवं बच्चों पर पड़ता है। बेरोजगारी मानसिक तनाव को जन्म देती है जिससे समाज एवं सरकार के प्रति कटुता के भाव जाग्रत होते हैं परिणामतः व्यक्ति का सोच नकारात्मक हो जाता है और वह समाज विरोधी एवं देश विरोधी कार्य करने में भी संकोच नहीं करता।

बेरोजगारी के कारण

  • भारत में बढ़ती हुई इस बेरोजगारी के प्रमुख कारणों में से एक है— तेजी से बढ़ती जनसंख्या। पिछले पाँच दशकों में देश की जनसंख्या लगभग चार गुनी हो गई है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 125 करोड को पार कर गई है।
  • यद्यपि सरकार ने विभिन्न योजनाओं के द्वारा रोजगार को अनेक नए अवसर सुलभ कराए हैं, तथापि जिस अनुपात में जनसंख्या वृद्धि हुई है उस अनुपात में रोजगार के अवसर सुलभ करा पाना सम्भव नहीं हो सका, परिणामतः बेरोजगारों की फौज बढ़ती गई।
  • प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में बेरोजगारों की वृद्धि हो रही है। बढ़ती हुई बेरोजगारी से प्रत्येक बुद्धि-सम्पन्न व्यक्ति चिन्तित है। हमारी शिक्षा पद्धति भी दोषपूर्ण है जो रोजगारपरक नहीं है।
  • कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से लाखों स्नातक प्रतिवर्ष निकलते हैं। किन्तु उनमें से कुछ ही रोजगार पाने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। उनकी डिग्री रोजी-रोटी को जुटा पाने में उनकी सहायता नहीं कर पाती।
  • वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति ने उद्योगों का मशीनीकरण कर दिया है परिणामतः आदमी के स्थान पर मशीन से काम लिया जाने लगा। मशीन आदमी की तुलना में अधिक कुशलता से एवं अधिक गुणवत्ता से कम कीमत पर कार्य सम्पन्न कर देती है, अतः स्वाभाविक रूप से आदमी को हटाकर मशीन से काम लिया जाने लगा।
  • फिर एक मशीन सैकड़ों श्रमिकों का काम अकेले ही कर देती है। परिणामतः औद्योगिक क्षेत्रों में बेकारी पनप गई। लघु उद्योग एवं कुटीर उद्योगों की खस्ता हालत ने भी बेरोजगारी में वृद्धि की है।

बेरोजगारी दूर करने के उपाय

भारत एक विकासशील राष्ट्र है, किन्तु आर्थिक संकट से घिरा हुआ है। उसके पास इतनी क्षमता भी नहीं है कि वह अपने संसाधनों से प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार सुलभ करा सके। ऐसी स्थिति में न तो यह कल्पना की जा सकती है है कि वह प्रत्येक व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता दे सकता है और न ही यह सम्भव है, किन्तु सरकार का यह कर्तव्य अवश्य है कि वह बेरोजगारी को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए। यद्यपि बेरोजगारी की समस्या भारत में सुरसा के मुख की तरह बढ़ती जा रही है फिर भी हर समस्या का निदान तो होता ही है।

  • भारत में वर्तमान में जनसंख्या वृद्धि 2.1% वार्षिक है जिसे रोकना अत्यावश्यक है। अब ‘हम दो हमारे दो’ का युग भी बीत चुका, अब तो ‘एक दम्पति एक सन्तान’ का नारा ही महत्वपूर्ण होगा, इसके लिए यदि सरकार को कड़ाई भी करनी पड़े तो वोट बैंक की चिन्ता किए बिना उसे इस ओर सख्ती करनी होगी। यह कठोरता भले ही किसी भी प्रकार की हो।
  • देश में आधारभूत उद्योगों के पर्याप्त विनियोग के पश्चात् उपभोग वस्तुओं से सम्बन्धित उद्योगों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इन उद्योगों में उत्पादन के साथ ही वितरण परिवहन, आदि में रोजगार उपलब्ध होंगे।
  • शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाना आवश्यक है। हमारी शिक्षा पद्धति भी दोषपूर्ण है जो रोजगारपरक नहीं है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से लाखों स्नातक प्रतिवर्ष निकलते हैं। किन्तु उनमें से कुछ ही रोजगार पाने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। उनकी डिग्री रोजी-रोटी को जुटा पाने में उनकी सहायता नहीं कर पाती।
  • धन्धों का विकास गांवों में कृषि सहायक उद्योग-धन्धों का विकास किया जाना आवश्यक है। इससे क्रषक खाली समय में अनेक कार्य कर सकेंगे। बागवानी, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य अथवा मुर्गी पालन, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, आदि ऐसे ही धन्धे है।
  • कुटीरोद्योग एवं लघु उद्योगों के विकास से ग्रामीण एवं शहरी दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सुलभ कराए जा सकते हैं।
  • आज स्थिति यह है कि एक ओर विशिष्ट प्रकार के दक्ष श्रमिक नहीं मिल रहे हैं तो दूसरे प्रकार के दक्ष श्रमिकों को कार्य नहीं मिल रहा है।

Conclusion :

बेरोजगारी की दूर करने के सरकार द्वारा अनेक प्रयास किए गए है जिनमे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम, ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना आदि कार्यक्रम शामिल है। लेकिन अभी भी कुछ सख्त कदम उठाने बाकि है। बेरोजगारी को दूर करना देश का सबसे प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। नागरिकों को अधिक नौकरियों के निर्माण के साथ ही रोजगार के लिए सही कौशल प्राप्त करने के लिए प्रयास करना चाहिए।

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Essays

Essay on India in Tokyo Olympics 2021

Essay on India in Tokyo Olympics 2021

Introduction :

“The most important thing in the Olympic Games is not winning but taking part”. This statement signifies that the essential thing in life is not conquering but fighting well. Olympic is one of the finest sport events in the world which  is organize once in four years. This year the Olympic held in Tokyo in Japan. Every Olympic event provides opportunities to the players to show their talent to the world and make their nation proud. It is the platform which encourage unity and promote brotherhood among different nations of the world.

  • Tokyo Olympic began from 23rd July and ended on 8th August 2021. In Tokyo Olympic, India has performed quite well as compare to the previous Rio Olympic.
  • In Tokyo Olympic India has grabbed seven medals and secured 48th rank in medal tally which is far better in last four decades.
  • In seven medals there is one gold which is secured by Javelin thrower Neeraj Chopra. Two silver medals and four bronze medals.
  • In Paralympic category Indian athletes have done remarkable job. In this category India has secured 19 medal which consist of five Gold, eight Silver and six Bronze medals.
  • Although, the performance of our country in Tokyo Olympics is quite well but it can be much better if the concerned authorities and the youth of our country change their outlook towards sports.
  • We are fully obsessed with the cricket and don’t  give attention to any other sports.
  • Apart from that there is a lack of proper infrastructure, funds are not sufficient to meet the expenses, food and nutrition are key problems faced by our athletes in these days.
  • Corruption and political interference play a major role towards India’s low medal count that’s why till now we only have 35 medals.

Conclusion :

Presently, the government is doing well in this field by taking various initiatives like Khelo India Programme, Fit India and Come & Play Scheme etc. But it is not enough as compared to the present situation in India. First of all we need to change our attitude towards sports and identify the right talent at the right age to get success in this field. Government should implement more schemes and programmes to aware and realize the people about its importance. It is true that “ Belief is the key to success.” If we believe, we can achieve!

Essay on Fit India Movement – A step towards healthiness

Introduction :

To promote fitness and health among the people of India, Prime Minister Narnedra Modi, launched Fit India Movement on August 29, 2019, which is also the National Sports Day and marks the birth anniversary of famous Indian hockey legend, Major Dhyan Chand. The Fit India Movement aims to encourage Indians to include fitness activities and sports in their daily lives to pave way for a healthy and fit lifestyle. India is a country full of youth, so if the youth here takes right direction, then something constructive can be done, to be successful in life, it is very important that all those young people of our country both from body and mind Be healthy.

  • It is clear from the reports of the World Health Organization and the Ministry of Health of the Government of India that the number of diseases in the country is increasing at a rapid pace.
  • The Prime Minister during his speech on Fit India said that fitness is not just a word but a way to lead a healthy life. A nation will only become fit when each citizen becomes fit.
  • He also said, “I want to see you fit and make you fitness conscious and we will together set the goals for Fit India and the country as a whole.”
  • The movement aims at encouraging people towards a more active lifestyle for a healthy future. People were asked to exercise regularly, play recreational sports and perform yoga to stay fit.
  • The root cause of most lifestyle diseases are lifestyle disorders and there are many diseases that can be overcome by making small changes in our lifestyle.
  • Lifestyle diseases like diabetes and hypertension are increasing in India. Foreign nations such as the US, UK, Germany, China and Australia have already set targets to pave way for healthier and fitter nations with their own campaigns. 

Conclusion :

Through the Fit India Movement, there is an effort to take this country to a new side, as people remain fit, their ability to work will increase even more and eventually our country will grow faster. Hence, Fit India should be seen as a household movement, a daily routine. Fit India Movement should reach each and every corner of the country. We should take the responsibility of the movement.

Essay on Strategy For New India at 75

Introduction :

New India @ 75 is a path breaking initiative which envisions how India should be in her 75th year of Independence and seeks to bring together all stakeholders including the industry, government, institutions, community groups and individuals to translate the vision into a reality. ‘Strategy for New India’ by NITI Aayog replaced five year plans with an aim to accelerate economic growth to 9 to 10% and to achieve UN sustainable development goals. The 41 Chapters under the documents have been merged under four sessions – Drivers, infrastructure, inclusion and governance.

  • India is on its way to celebrate its 75th independence day on 15th August 2022. The past 75 years took India from a poverty stricken, uneducated country to become one of the greatest pioneers in space technology & pharmaceuticals.
  • However, even after 75 years some issues are left out of fixing or are being handled in a careless manner. India is set to become a 5 trillion dollar economy by 2025 but its per capita income is among world’s lowest.
  • Half of the population is working in agriculture and allied activities but the income of farmers is extremely low to a point that they are forced to commit suicides.
  • India is 3rd largest economy in the world but its tax to GDP ratio is just half of the OECD countries. In addition to that, Infrastructure will play a huge role.
  • We are in dire need of private railways, Buses with IT enabled services to make our country a truly digital India. Also, India needs to include all its citizens into healthcare services via Ayushman Bharat Scheme, educating them via Sarv Shiksha Abhiyan, and provide them shelter via PM Awas Yojna.
  • Moreover, to make the above targets, we need strong and effective governance. The focus is to improve the policy environment so that the contribution of private investors and stakeholders can be diverted to mainstream to achieve the goals set out for new India 2022.
  • Alarming features such as Mining, River valley projects, infrastructure projects, tourism and agriculture are included in this strategy.
  • With all this we have to limit environmental damage, there is an urgent need to conserve non-forest ecosystems such as grassland, wetlands, mountains and deserts.
  • We need to learn from the many alternatives initiatives for food, water, energy etc, which shows the ways to more just and sustainable livelihoods and ways of living.

Conclusion :

Being one of the most populous country of the world, it is a little bit tough but not impossible to change. We need proper utilization of human capital in the direction of all round development of our country. Jan Bhagidari, balanced development, public private partnership lies at the core of the strategy for New India initiative. If the above problems are addressed and vision of ‘strategy for new India @ 75’ is fulfilled, India can truly evolve as a superpower.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs development at the cost of environment degradetion

Introduction :

“Environment is no one’s property to destroy, it is everyone’s responsibility to protect.” These words of Mohith Agadi reflects the irrational utilization of resources for development  activities without considering the environment. Development is a process that leads to positive change in physical, environmental, economic and social aspects of our life. Day by day the issue of environment is increasing as we are degrading our environment in the name of economic growth.

  • As a result we are facing serious repercussions like climate change, global warming, flood, cyclones and ozone layer depletion etc.
  • According to the world bank report higher level of economic growth imposed Rs 3.75 trillion worth of environment damage cost.
  • Rapid industrialization and urbanization are inevitable to bring economic development, to increase the per capita income and ease of living.
  • But these activities have caused negative environmental consequences such as pollution, disasters, forced migration, imbalanced weather phenomena etc.
  • More urbanization and higher industrial setups are being encroached on the forest land. Now-a-days micro plastics are contaminating the water resources very badly.
  • Subsequent use of private vehicle by each family member had supplemented their contribution to pollution.
  • According to environment performance index released by world economic forum, India ranks 168th out of 180 countries, which was the worst in the south Asian countries.
  • Water scarcity and extreme weather phenomena and the regular occurrence of floods and droughts could further strain the economy which is already reeling under pressure due to Covid-19.
  • Government has taken many initiatives to conserve the environment such as Biological diversity Act, 2002, Project Tiger 1972, World summit on sustainable development, Rio de janerio summit 1992, Project elephant 1992 etc.
  • At ground level, efforts made by people can further succeed these programmes. Moreover there should be the maximum recycling and reuse of water, improvement in energy efficient machines is the most effective measure in industries.

Conclusion :

Balancing economic development and environmental sustainable is the need of the hour, to bring this sustainable development in mainstream, united nations launched the 2030 Agenda for Sustainable Development Goals (SDGs). Countries must switch their development plans to the sustainable plans. Thus balancing economic development and environment protection requires a refocusing of economic activity not towards producing less but producing differently.

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Essay on Strategy For New India at 75 Vs Positive Effects of Coronavirus on Environment

Introduction :

Covid-19 virus has become worldwide disease and almost all nations of the world are facing it. Due to which population of the world is forced to live inside their home. Business activities in the country also affected due to corona virus. As we all know coronavirus has taken life of a lot of people all across the globe. To prevent the spread of COVD-19, governments of different nations are taking multiple steps to control the spread of this virus. As far as our environment is concerned, it is enjoying the positive impact of this virus.

  • Today, when the production of almost everything is slowed down and factories are not as active as they used to be, the emission of smoke is also reduced which has resulted in clear sky.
  • Not only this, the use of vehicles on road is reduced. All this have contributed towards lowered CO2-emissions. The emission of nitrogen dioxide has also reduced.
  • This indicates that air has become more pure and we can breathe in pure air. With the increase in number of flights, not only the air traffic increases but the quality of air also getting worse, but now the scenario is changed.
  • To reduce the risk of coronavirus, companies have asked workers to work from home. This has reduced vehicles on road. In addition to this, the consumption of plastic has also reduced as people no longer have tea or coffee in disposable glasses.

Conclusion :

In this competitive era where we have to follow a hectic schedule, we have never had thought about the way we are treating the environment. However, now due to lockdown we are forced to stay at home, we have ample time to think on our actions. The coronavirus has had catastrophic impacts on mankind however, it has surely given the environment a chance to self-heal and restore its beauty again.

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Essay on Strategy For New India at 75 Vs Positive Impact of Coronavirus (covid-19) on Environment :

Introduction :

Corona virus has become worldwide disease and all nations of the world are facing it. Due to which population of the world is forced to live inside their home. Business activities in the country also affected due to corona virus. As we all know coronavirus has taken life of a lot of people all across the globe. To prevent the spread of COVD-19, governments of different nations are taking multiple steps to control the spread of this virus.

  • As far as our environment is concerned, it is enjoying the positive impact of this virus.
  • Before the start of the COVID-19 pandemic, the air around us had been deemed very toxic to breathe in due to the amount of greenhouse gases that had been emitted over the centuries.
  • The Earth faced rising temperatures, which in turn led to the melting of glaciers and rising of sea levels. Environmental degradation was happening fast due to the depletion of resources such as air, water and soil. But after the coronavirus lockdown commenced, there have been slight changes in the environment. 
  • After the lockdown was put in place in many countries, there was lesser travelling done by people, whether it be by their own cars, or by trains and flights.
  • Even industries were closed down and not allowed to function. This in turn led to the pollution in the air dropping significantly, as there was a marked decline in nitrous oxide emission.
  • Again where fish is concerned, the lockdown has seen a decline in fishing, which means that the fish biomass will increase after over-fishing almost depleted it.
  • Apart from that, animals have been spotted moving about freely where once they would not dare to go. Even sea turtles have been spotted returning to areas they once avoided to lay their eggs, all due to the lack human interference.
  • Today, when the production of almost everything is on halt and factories are no longer as active as they used to be, the emission of smoke has lessened which has resulted in clear sky.
  • Not only this, the use of vehicles on road is reduced. All this have contributed towards lowered CO2-emissions. The emission of nitrogen dioxide has also reduced.
  • Plants are growing better because there is cleaner air and water, and because yet again there is no human interference.
  • With everything at a standstill, plants are allowed to thrive and grow and produce more coverage and oxygen.
  • Less litter also means lesser clogging of river systems, which is good in the long run for the environment.
  • To combat coronavirus, companies have asked workers to work from home.
  • This has reduced vehicles on road. In addition to this, the consumption of plastic has also reduced as people no longer have tea or coffee in disposable glasses. 

Conclusion :

In this competitive era where we have to follow a hectic schedule, we have never had thought about the way we are treating the environment. However, now due to lockdown we are forced to stay at home, we have ample time to think on our actions. There is no denying the fact that coronavirus has had catastrophic impacts on mankind. However, it has surely given the environment a chance to self-heal and restore its beauty.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Save Water – Saving the future generations

Introduction :

Water is the primary requirement for all the living beings. Human beings and all other animals cannot survive for a day without water. Plants also need water in order to grow and survive as well. Water is used in cleaning our clothes and utensils, wash, cultivating crops, cooking food items, and many other activities. We know that almost three-fourths part of the earth is water but all this water is not suitable for use, only 2% of those water is usable and so it is very necessary to save water. 

  • With the increasing population the water available is inadequate to meet the needs of the people. When summer is quite severe a large reservoir of water shrinks to a pool.
  • Both human beings and animals suffer for want of water. If it rains it rains and rains and there is a flood. The cultivated crops under deep water rot and perish.
  • There are two extremes in India. The nation goes without water or there is heavy rain resulting in flood. Wastage of water needs to be controlled. 
  • We should identify the water wastage facts and try to save water as much as possible. Currently, the biggest problem related to global warming is a huge water depreciation on Earth.
  • This is mainly caused due to misuse of water happening at various places. In the current scenario, it is important to understand the formula for the conversation of water and thereby save water.
  • Because pure water resources are the primary sources for all our necessities. And when it becomes depreciated, it can lead to huge catastrophic conditions for human beings. 
  • There are many regions in the world that are facing extreme water scarcity due to decline of groundwater and scanty rainfalls. Also, in some areas, the groundwater is contaminated or it has been overused.
  • Thus, these factors have to lead to drought situations and in these areas it has lead to water scarcity. Furthermore, urbanization and industrialization have added to the problems where groundwater has been overused to fulfill the increasing demands of the population.
  • According to the WHO report, 1 out of people does not have access to safe drinking water. Seeing this, the water crisis in the future does seem inevitable.

Conclusion :

Also, it calls for an immediate action plan in order to conserve water so that precious resource can be saved for today as well for future generations. The ground water tables in most cities are falling at alarming rate. Another factor is water leakage. Delhi loses at least 30 per cent of its water due to leakages and Mumbai loses about 20 per cent of its water due to leakage. People who live in those areas where there is plenty of water available should understand the value of water and thus save water. People should understand the importance of water and thus wastage of water should be controlled.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Short Essay on Plastic ban in english for students :

Introduction :

Plastic, polymeric material that has the capability of being molded or shaped by the application of heat and pressure. Plastic Bags are used for various purposes. The most common use of these bags is to carry grocery items. These are easily available in the market and thus used extensively. However, disposing these bags is a big issue as these are non-biodegradable.

  • They have become a major cause of land pollution. Used plastic bags stay in the environment for years and contribute to land and water pollution.
  • Many countries have replaced plastic bags with paper bags or reusable cloth bags. The government of India has also banned the use of plastic bags in many states however the same has never been implemented properly.
  • We must understand that these have been banned for our good. Plastic bags cause health problems in human beings as well as animals.
  • Waste food and vegetable and fruit peels are usually thrown away in plastic bags. Animals often gulp pieces of plastic while having food. This causes various diseases in them.
  • The chemicals present in plastic bags contaminate the soil. They make the soil infertile and hinder the growth of plants.

Conclusion :

The government has put a ban on the use of plastic bags in many states of India but people continue to use these as these are still available in the market. The government must take strict measures to ensure these are not used. Thus, plastic bags are ruining our beautiful environment and have become a threat to our health. It is high time we must stop the use of plastic bags. This will go a long way in keeping our environment clean.

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Essay on Strategy For New India at 75 Vs Long essay on Plastic Ban for students

Introduction :

Plastic, polymeric material that has the capability of being molded or shaped by the application of heat and pressure. Plastic Bags are used for various purposes. The most common use of these bags is to carry grocery items. These are easily available in the market and thus used extensively. However, disposing these bags is a big issue as these are non-biodegradable. They have become a major cause of land pollution. Used plastic bags stay in the environment for years and contribute to land and water pollution.

  • Many countries have replaced plastic bags with paper bags or reusable cloth bags. The government of India has also banned the use of plastic bags in many states however the same has never been implemented properly.
  • We must understand that these have been banned for our good. Plastic bags cause health problems in human beings as well as animals.
  • Waste food and vegetable and fruit peels are usually thrown away in plastic bags. Animals often gulp pieces of plastic while having food. This causes various diseases in them.
  • The chemicals present in plastic bags contaminate the soil. They make the soil infertile and hinder the growth of plants. Plastic bags have become the main cause of land pollution today.
  • The plastic bags entering into the water bodies are a major cause of water pollution. Hence we can conclude that these are deteriorating our environment in every possible way.
  • The production of plastic bags releases toxic chemicals. These are the main cause of serious illness. The polluted environment is a major reason for various diseases which are spreading easily in human beings.
  • Waste plastic bags are the main reason for trapping the drains and sewers, especially during rains. This can result in a flood-like situation and disrupt the normal life of people.
  • The government has put a ban on the use of plastic bags in many states of India but people continue to use these as these are still available in the market.
  • The government must take strict measures to ensure these are not used. Thus, plastic bags are ruining our beautiful environment and have become a threat to our health.
  • Although the Indian government has imposed a ban on the usage of plastic bags in many states. But people are still carrying these bags.

Conclusion :

Shopkeepers stop providing plastic bags for few days only in the beginning. It is time when we all must contribute our bit to make this ban a success. Thus we the educated lot of society must take it as our responsibility to stop using plastic bags. In this way, we can support the government in this campaign. It is high time we must stop the use of plastic bags. This will go a long way in keeping our environment clean.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Short Essay on Plastic pollution in english 250 words : 

Introduction :

Plastic is used for various purposes. The most common use of it is to carry grocery items in the form of bags. These are easily available in the market and thus used extensively. However, disposing these bags is a big issue as these are non-biodegradable. Plastic stay in the environment for years and contribute to land and water pollution. This is the reason why many countries have banned the use of plastic in the form of bags. These countries have replaced plastic bags with paper bags or reusable cloth bags.

  • The government of India has also banned the use of plastic bags in many states. We must understand that these have been banned for our good.
  • Every individual must take it has his responsibility to stop the use of plastic to make our environment cleaner. Plastic cause health problems in human beings as well as animals.
  • Waste food and vegetable and fruit peels are usually thrown away in plastic bags. Animals often gulp pieces of plastic while having food. This causes various diseases and illnesses in them.
  • Likewise, the marine creatures also tend to mistake the plastic pieces for food and eat them. People who have sea food can get infected if they have fishes suffering from illness.
  • The chemicals present in plastic bags contaminate the soil. They make the soil infertile and hinder the growth of plants. Plastic bags are mostly made of polypropylene which is produced from petroleum and natural gas.
  • These are both non-renewable fossil fuels and their extraction creates greenhouse gases that are the leading cause of global warming.

Conclusion :

The government has put a ban on the use of plastic bags in many states of India but people continue to use these as these are still available in the market. The government must take strict measures to ensure these are not used. Plastic is ruining our beautiful environment and have become a threat to our health. It is high time we must stop the use of plastic. It is not that difficult to keep a cloth bag with us while going the market. This will go a long way in keeping our environment clean.

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Essay on Strategy For New India at 75 Vs Long Essay on Plastic pollution in english in 400 words

Introduction :

Plastic pollution has become a major threat to our environment in today’s times and it is likely to make things worse in future.  Plastic pollution is damaging our environment rapidly. Waste plastic material is hard to dispose and contributes to major pollution on earth. This has become a cause of global concern. The increasing use of plastic bags, utensils and furniture, the amount of plastic waste has also gone up and so has the plastic pollution.

  • Plastic waste is entering the water bodies such as rivers, seas and even oceans and is polluting our water drastically. This water is then supplied at our places.
  • No matter how much we filter this water it can never get back to its pure form. The government of India has also banned the use of plastic bags in many states however the same has never been implemented properly.
  • Plastic bags cause health problems in human beings as well as animals. Waste food and vegetable and fruit peels are usually thrown away in plastic bags.
  • Animals often gulp pieces of plastic while having food. This causes various diseases in them. The government has put a ban on the use of plastic bags in many states of India but people continue to use these as these are still available in the market.
  • Plastic Pollution is affecting the whole earth, including mankind, wildlife and aquatic life. It is spreading like a disease. We all must realize the harmful impact it has on our lives so as to avoid it as soon as possible.
  • Plastic pollutes our water. Each year, tonnes of plastic are dumped into the ocean. As plastic does not dissolve, it remains in the water thereby hampering its purity. This means we won’t be left with clean water in the coming years.
  • We must take major steps to prevent it. We must use alternatives like cloth bags and paper bags instead of using plastic bags. If we are purchasing plastic, we must reuse it.

Conclusion :

We must avoid drinking bottled water which contributes largely to plastic pollution these days. The government must also take strict measures to ensure these are not used. It is of utmost importance to spread awareness about the harmful effects of plastic waste on our environment.  This can be done by way of television and radio and social media. This should help people understand the seriousness of the issue.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Disaster Management – Best Way The Protect Ourselves

Introduction :

Disaster refers to any occurrence that can cause damage, ecological disruption, loss of human life or deterioration of health & health services. Disaster management is a constant phenomenon of mitigating the impact of the disaster. Disaster management requires collected and coordinated efforts. A number of activities need to be undertaken in the event of disaster to reduce its intensity at the certain extent. The process of disaster management include coordination, command and control, arrangement for drinking water and food material, sanitation and maintenance of law and order.

  • The most vulnerable section in these disasters are the poor. Disaster management occupies an important place in this country’s policy framework as it is the poor and the under-privileged who are worst affected on account of calamities or disasters.
  • It is the need of the hour that it is necessary to mobilize them towards preparedness for any emergency. Quick and timely response is essential in providing immediate relief and rescue operations, to save human lives as soon as possible.
  • Each year, India faces a number of disasters like floods, earthquakes, tsunami, landslides, cyclones, droughts and more. When we look at the man-made disasters, India suffered the Bhopal Gas Tragedy as well as the plague in Gujarat.
  • To stop these incidents from happening again, we need to strengthen our disaster management techniques to prevent destructive damage.
  • Most importantly, one must understand that disaster management does not necessarily eliminate the threat completely but it decreases the impact of the disaster. It focuses on formulating specific plans to do so.
  • The National Disaster Management Authority (NDMA) in India is responsible for monitoring the disasters of the country. This organization runs a number of programs to mitigate the risks and increase the responsiveness.
  • Proper disaster management can be done when we make the citizens aware of the precautionary measures to take when they face emergency situations.
  • For instance, everyone must know we should hide under a bed or table whenever there is an earthquake. Thus, the NDMA needs to take more organized efforts to decrease the damage that disasters are causing.

Conclusion :

If all the citizens learn the basic ways to save themselves and if the government takes more responsive measures, we can surely save a lot of life and vegetation. India has set up many departments and organizations for disaster management. These Include National Disaster Management Authority, National Remote Sensing Centre, Central Water Commission, etc. Disaster management has great importance in recent times. To handle any unforeseen situation efficiently, we need to be well-equipped with latest technologies. It cannot avoid the outbreak of disaster, but can mitigate its impact to a large extent.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Clean India Movement – A step towards cleanliness

Introduction :

The father of the nation, Mahatma Gandhi had said that, “Sanitation is more important than Independence” during his time before the independence of India. He was well aware of the bad and unclean situation of the India. He had emphasized the people of India a lot about the cleanliness and sanitation as well as its implementation in the daily lives. After many years of independence of India, a most effective campaign of cleanliness is launched to call people for their active participation and complete the mission of cleanliness. For ensuring hygiene, waste management and sanitation across the nation a Swachh Bharat Mission is launched.

  • In order to fulfill the vision of Mahatma Gandhi and make India an ideal country all over the world, the Prime Minister of India has initiated a campaign called Swachh Bharat Abhiyan on the birthday of Mahatma Gandhi (2nd of October 2014).
  • People can make India clean in a number of ways. First of all, carrying a small poly-bag is a must. Most noteworthy, a recycled paper bag is the best.
  • Indians must certainly use it to throw trash in dustbins. Indians probably throw trash on the street because they dislike carrying it.
  • However, a recycled paper bag makes it easier to carry waste. Hence, Indians can carry this bag to the dustbin for waste disposal.
  • Segregating wastes is also very important. It is something which many Indians ignore. Most noteworthy, the segregation of waste at home should be in 3 separate bins.
  • These 3 bins are Biodegradable, Recyclable and Others. The waste management department should help in implementing this system.
  • Another notable way to clean India is the compost pit. Compost pit helps in the preparation of compost. To create compost pit at home, some items are required.
  • These items are kitchen wastes, leaves, grass, etc. Consequently, the microorganisms convert this organic matter into compost. Through this campaign the government of India would solve the sanitation problems by enhancing the waste management techniques.
  • Clean India movement is completely associated with the economic strength of the country. Community cleanliness drive is yet another brilliant way of making India clean.
  • It has a psychological benefit. This is because it is easier to do a thing when others are doing it. The birth date of the Mahatma Gandhi is targeted in both, the launch and completion of the mission.

Conclusion :

The basic goals behind launching the Swachh Bharat Mission are to make the country full of sanitation facilities as well as eliminate all the unhealthy practices of people in daily routines. Clean India would bring more tourists and enhance its economic condition. The Prime Minister of India has requested to every Indian to devote their 100 hours per year for the cleanliness in India which is very sufficient to make this country a clean country by 2019.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Swachh Bharat Abhiyan – Making India Clean & Healthy

Introduction :

Mahatma Gandhi had said before the independence of India that, “Sanitation is more important than Independence”. He was well aware of the bad and unclean situation of the India. He had emphasized the people a lot about the cleanliness. To fulfil his dream Swachh Bharat Abhiyan initiated by the Prime Minister, Narendra Modi on 2nd of October in 2014 on the 145th birth anniversary of the Mahatma Gandhi. Its primary goal is to make India open defecation-free by October 2, 2019, through the construction of at least 12 crore toilets across rural and urban households.

  • As of February 1, 2019, the government claims 9.2 crore toilets built in rural areas. Based on toilet construction, the govt has declared 28 states and UTs as Open Defecation Free.
  • But independent surveys show open defecation continues even in areas that the government has declared Open Defecation Free.
  • It is also found that 23% of people who own a toilet continue to defecate in the open, including people in Rajasthan and Madhya Pradesh, which have been declared open defecation- free states. 
  • The Mission’s objectives also include creating sustainable solid and liquid waste management systems, promoting social inclusion by improving sanitation for women and marginalized communities, and eradicating manual scavenging.
  • Side by side of the main Swachh Bharat Mission, the Indian government also launched the Clean India: Clean Schools campaign.
  • The aim of the campaign was to ensure separate toilets for boys and girls in schools, appropriate sanitary facilities for menstruating students, hand washing station that can cater to at least 10 students at the same time, availability of soaps etc.
  • Our school has all the sanitation equipment necessary to facilitate Clean India, Clean Schools campaign. We have hygienically secure toilets with handwashing facilities.
  • Our female classmates feel comfortable coming to school because of the measures taken to make the girls’ toilet modern and friendly. Our teachers make it a point to emphasise the benefits of personal hygiene.

Conclusion :

In its National Annual Rural Sanitation Survey 2017-18 (NARSS), the government claimed 77% rural households had access to toilets, of which 93.4% used them regularly. It also claimed 95.6% of the surveyed villages that had been declared ODF were indeed free of open defecation. In urban areas, the government’s target was to build 67 lakh urban toilets by October 2019. It claims it has already built 60 lakh household toilets by October 2018.

Essay on Strategy For New India at 75 Vs Delhi Pollution – Growing Issue In India

Introduction : 

Pollution is one of the major issues causing concern not only in India but across the world. Delhi, the national capital of the country, is being tagged as one of the most heavily polluted capital cities in the world. It is the world’s worst city in terms of air pollution, with an unhealthy air quality index for the majority of the year. Thus, today, one of the biggest threats to the welfare of the people of Delhi. There has been a huge rise in the vehicular population, in spite of the metro railways, aggravating traffic congestion and increasing air and noise pollution. 

  • There has also been a number of diesel vehicles plying on the roads, which are largely responsible for the air pollution. Citizens need to start the public transport more and more to reduce the pollution level in the city.
  • Government has ensured to increase the no. of buses and auto-rickshaws in the capital as well. Stubble burning in Punjab and Haryana in northwest India has been cited as a major cause of air pollution in Delhi
  • Particulate matter (PM) is basically a mixture of extremely small particles and liquid droplets like acids, chemicals, gas, water, metals, soil dust particles, etc. the measurement of which gives an idea of the pollution of a city.
  • There are mobile enforcement teams deployed at various locations for monitoring polluting vehicles. Citizens need to avoid all kinds of contact near construction sites.
  • These sites release gases which makes the air very harmful for eyes and for the respiratory system. The above measures are known by many of us yet the level of national capital remains at 11th in the ranking of WHO for the most polluted cities.
  • The practicing of the above measures is the need for hour and to live happier days with our loved one is we all demand. I whole heartedly appeal to every citizen to take steps to make pollution free capital, a pollution free India.

Conclusion :

 With a view to reducing vehicular pollution, there has been a ban imposed on the plying of more than 15 years old commercial or transport vehicles. Steps are taken to transform garbage into compost by developing new sanitary land-fill sites. It’s not that the Government is not taking steps to control pollution in Delhi, But we need proper and efficient implementation of plans and programmes and policies launched by the Government to make it successful.

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