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वोकल फॉर लोकल पर निबंध

वोकल फॉर लोकल पर निबंध – Essay on Vocal for Local in hindi

Introduction : 

वोकल फॉर लोकल भारत में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए एक पहल है। हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए और लोगों को इसके प्रति प्रोत्साहित करने के लिए ‘लोकल के लिए वोकल’ का मंत्र दिया। ‘वोकल फॉर लोकल’ के द्वारा लोगों को अपने स्वयं के उपयोग की वस्तुओ का उत्पादन शुरू करने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है जिससे, आयातित वस्तुओं के उपयोग को कम किया जा सकेगा। वोकल फॉर लोकल का सकारात्मक प्रभाव दिवाली और दशहरा जैसे त्योहारों के दौरान देखा गया।

देश के लोगों ने स्थानीय उत्पादों की सराहना की और चीनी उत्पादों के बजाय इन त्योहारों में उपयोग किए जाने वाले स्थानीय रूप से बने हुए दीए और कई अन्य चीजें खरीदीं। दीवाली के सीजन में अच्छी प्रतिक्रिया से, हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि इस नई पहल से अन्य त्योहारो में भी स्थानीय वस्तुओ को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय बाजार अधिक विकसित होंगे और भारतीय अर्थव्यवस्था में भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

जैसा कि दुनिया के प्रमुख बड़े ब्रांड भी कभी न कभी स्थानीय ब्रांड हुआ करते थे और वे वैश्विक ब्रांड तभी बन पाए, जब स्थानीय लोगों ने उन्हें खरीदना और उपयोग करना शुरू किया। स्थानीय लोगों ने उन्हें वैश्विक ब्रांड बनाया और फिर उन्हें बढ़ावा देना शुरू कर दिया। इस प्रकार, इन स्थानीय उत्पादों को स्थानीय ब्रांडों से वैश्विक ब्रांड बनाने में सफलता मिल सकी।

  • वोकल फॉर लोकल महज एक नारा नहीं है। यह देश के उद्योग-धंधों को आगे बढ़ाने, रोजगार छूटने की आशंकाओं से सहमे लोगों और अर्थव्यवस्था को संभालने का ऐसा मंत्र है, जिसकी सार्थकता पर संदेह नहीं किया सकता। स्वदेशी को प्रोत्साहन देकर देश को आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति में बापू के महान विचारों की महक भी समाहित है।  
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोकल फॉर लोकल का आह्वान करके देश को कोरोना के कारण अर्थव्यवस्था पर आए संकट से उबारने की जो राह दिखाई है, उस पर चलना उतना आसान नजर नहीं आता। कुछ उद्योगपतियों की बेईमानी इस सुनहरे सपने को पूरा करने में बड़ी बाधा बनकर सामने आने लगी है।
  • कई कारणों से स्थानीय उद्योगों को आगे बढ़ाने की राह कभी आसान नहीं रही। पहला तो यह कि विदेशी उत्पादों के प्रति लोगों में एक अलग किस्म का आकर्षण रहा है। इसके अलावा बाजार की सोच भी स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा नहीं देती। उपभोक्ता पहले से ही ब्रांडेड उत्पाद लेना पसंद करते हैं।
  • अक्सर व्यापारी भी उत्पादों की गुणवत्ता का उल्लेख करते हुए उत्पाद महंगे होने की उपभोक्ता की आपत्ति को यह कहकर खारिज कर देते हैं कि यह कम कीमत में मिलने वाला लोकल उत्पाद नहीं है। वर्षों से यही होता आ रहा है। स्थानीय उत्पाद भले ही बेहतर क्यों न हों, उपभोक्ता और बाजार उन्हें आसानी से मान्यता नहीं देते हैं।
  • प्रधानमंत्री ने कोरोना से उद्योग-धंधों, बाजार और अर्थव्यवस्था पर मंडराते खतरे को देखकर स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया है, लेकिन उन्होंने घटिया उत्पादों की पैरोकारी कतई नहीं की है।
  • स्थानीय उत्पाद बाजार में तभी पैर जमा सकते हैं, जब उनकी गुणवत्ता संदिग्ध न हो। उनका उपयोग करने के बाद उपभोक्ता पर उनकी छाप पड़नी ही चाहिए। किसी भी उत्पाद की छाप उसके प्रति मुखर लोगों की संख्या से नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता से ही पड़ सकती है।
  • उत्पाद की गुणवत्ता अच्छी है, तो उपभोक्ता कुछ अधिक कीमत चुकाकर भी उसे खरीदना पसंद करेगा। लेकिन गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हाल ही में उत्तराखंड के ऊधमसिंहनगर में स्थित आधा दर्जन कंपनियों के सैनिटाइजर के सैंपल फेल होना महज इसलिए चिंता का विषय नहीं है कि इन छह कारखानों ने घटिया सामग्री का उत्पादन करने का अपराध किया है, बल्कि यह मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि इसने वोकल फॉर लोकल के उद्देश्य पर चोट की है।
  • कोरोना से बचाव के लिए बाजारों में सैनिटाइजर की मांग बहुत बढ़ गई है, ऐसे दौर में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप उत्पादन करके उसे अपेक्षाकृत कम कीमत और ज्यादा गुणवत्ता के साथ बाजार में उतार कर भी मुनाफा कमाया जा सकता है।
  • तमाम उत्पादक ऐसा कर भी रहे हैं, लेकिन ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए बेईमानी का सहारा लेने वालों ने सैनिटाइजर में मानकों के अनुरूप एल्कोहल न मिलाकर स्थानीय उत्पादों की साख बनाने की कोशिशों को धक्का पहुंचाया है। पिछले दिनों ऐसे छह कारखानों के सैनिटाइजर के सैंपल जांच में फेल हो जाने से इस गंभीर मामले का खुलासा हुआ।
  • प्रधानमंत्री के स्वदेशी पर जोर देने के बाद देश की प्रमुख कंपनियों ने अपनी रणनीति और अभियानों में स्थानीयता को महत्व देना शुरू कर दिया है। अनेक कंपनियां यही कर रही हैं। लेकिन बाजार में अपनी जगह न बना पाने वाली कंपनियों के लिए प्रधानमंत्री का आह्वान जहां नई राहें खोलने वाला है, वहीं कुछ कंपनियों की बेईमानी उनकी राह को और कठिन बना सकती है।

Conclusion :

स्थानीय उत्पादों को महत्व देने के आह्वान के रूप में आत्मनिर्भरता का यह मंत्र उद्योग-धंधों और अर्थव्यवस्था के साथ ही पूरे देश को कोरोना से उपजे अंधकार और अनिश्चय की स्थिति से उबार सकता है। इसके लिए जरूरी है कि स्थानीय उत्पादों को स्थानीयता की महक से संवारा जाए और बेईमानी पर निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं में स्थानीय उत्पादों के प्रति भरोसा पैदा हो। स्थानीय वस्तुओ को बनाने वाले लोगों को समर्थन की आवश्यकता है और इन वस्तुओ को खरीदना प्रत्येक भारतीय की जिम्मेदारी भी बनती है। यदि सभी भारतीय ’वोकल फॉर लोकल’ मंत्र को अपनाते हैं तो हमारी कई भारतीय वस्तुए आसानी से वैश्विक ब्रांड बन सकती हैं। इसलिए, स्थानीय वस्तुओ को खरीदकर और बढ़ावा देकर हम सभी को अपने देश के प्रति ये जिम्मेदारी निभानी चाहिए ताकि हम अपने देश को आत्मनिर्भर बना सके।

पीएम स्वनिधि योजना पर निबंध

Introduction : 

हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना को शुरू करने का फैसला लिया गया | इस योजना के अंतर्गत  देश के रेहड़ी और सड़क विक्रेताओं को अपना खुद का काम नए सिरे से शुरू करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 10000 रूपये तक का लोन मुहैया कराया जायेगा | इस स्वनिधि योजना को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्म निर्भर निधि के नाम से भी जाना जाता है |इस लोन को समय पर चुकाने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को 7 फीसद का वार्षिक ब्याज सब्सिडी के तौर पर उनके अकाउंट में सरकार की ओर से ट्रांसफर किया जाएगा। 

देश के जो इच्छुक लाभार्थी इस योजना का लाभ उठाना चाहते है तो उन्हें इस योजना के तहत आवेदन करना होगा |  स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में वेंडर, हॉकर, ठेले वाले, रेहड़ी वाले, ठेली फलवाले आदि सहित 50 लाख से अधिक लोगों को योजना से लाभ प्रदान किया जायेगा | स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि के अंतर्गत रेहड़ी पटरी वालो को अपना काम दोबारा से शुरू करने के लिए सरकार द्वारा लोन मुहैया कराया गया है |

  • इस योजना के तहत छोटे दुकानदार 10,000 रुपए तक के ऋण के लिये आवेदन कर सकेंगे।
  • ऋण प्राप्त करने के लिये आवेदकों को किसी प्रकार की ज़मानत या कोलैट्रल (Collateral) की आवश्यकता नहीं होगी।
  • इस योजना के तहत प्राप्त हुई पूंजी को चुकाने के लिये एक वर्ष का समय दिया जाएगा, विक्रेता इस अवधि के दौरान मासिक किश्तों के माध्यम से ऋण का भुगतान कर सकेंगे।
  • साथ ही इस योजना के तहत यदि लाभार्थी लिये गए ऋण पर भुगतान समय से या निर्धारित तिथि से पहले ही करते हैं तो उन्हें 7% (वार्षिक) की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जो ‘प्रत्यक्ष लाभ अंतरण’ (Direct Benefit Transfer- DBT) के माध्यम से 6 माह के अंतराल पर सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाएगी।
  • पीएम स्वनिधि के तहत निर्धारित तिथि से पहले ऋण के पूर्ण भुगतान पर कोई ज़ुर्माना नहीं लागू होगा।
  • इस योजना के तहत ऋण जारी करने की प्रक्रिया जुलाई माह से शुरू की जाएगी।
  • इस योजना के लिये सरकार द्वारा 5,000 करोड़ रुपए की राशि मंज़ूर की गई है, यह योजना मार्च 2022 तक लागू रहेगी।
  • यह पहली बार है जब सूक्ष्म-वित्त संस्थानों (Micro finance Institutions(MFI), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (Non Banking Financial Company- (NBFC), स्वयं सहायता समूह (Self Help Group-SHG),  बैंकों को शहरी क्षेत्र की गरीब आबादी से जुड़ी किसी योजना में शामिल किया गया है।
  • इन संस्थानों को ज़मीनी स्तर पर उनकी उपस्थिति और छोटे व्यापारियों व शहरों की गरीब आबादी के साथ निकटता के कारण इस योजना में शामिल किया गया है।

तकनीकी का प्रयोग और पारदर्शिता –

  • इस योजना के प्रभावी वितरण और इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने के लियेवेब पोर्टल और मोबाइल एप युक्त एक डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकास किया जा रहा है।
  • यह प्लेटफॉर्म क्रेडिट प्रबंधन के लिये वेब पोर्टल और मोबाइल एप कोभारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के ‘उद्यम मित्र’ पोर्टल से तथा ब्याज सब्सिडी के स्वचालित प्रबंधन हेतु MoHUA के ‘पैसा पोर्टल’ (PAiSA Portal) से जोड़ेगा।  
  • इस योजना के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रो और पृष्ठभूमि के 50 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ प्राप्त होगा।
  • इस योजना को विशेष रूप से छोटे दुकानदारों (ठेले और रेहड़ी-पटरी वाले) के लिये तैयार किया गया है, इस योजना के माध्यम से छोटे व्यापारी COVID-19 के कारण प्रभावित हुए अपने व्यापार को पुनः शुरू कर सकेंगे।
  • इस योजना के माध्यम से सरकार द्वारा छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
  • इसके तहत ऋण चुकाने के लिये डिजिटल भुगतान करने वाले लाभार्थियों को हर माह कैश-बैक प्रदान कर उन्हें अधिक-से-अधिक डिजिटल बैंकिंग अपनाने के लिये प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • इस योजना के ज़रिये रेहड़ी पटरी वालो को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जायगा तथा गरीब लोगो की स्थिति में सुधार होगा |
  • इस योजना के तहत MoHUA द्वारा जून माह में पूरे देश में राज्य सरकारों, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के राज्य कार्यालय, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम, शहरी स्थानीय निकायों, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी निधि ट्रस्ट और अन्य हितधारकों के सहयोग से क्षमता विकास और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी।
  • COVID-19 महामारी के कारण देश की औद्योगिक इकाइयों और संगठित क्षेत्र के अन्य व्यवसायों के अतिरिक्त असंगठित क्षेत्र और छोटे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है।

Conclusion :

देश में बड़े पैमाने पर असंगठित क्षेत्र के प्रमाणिक आँकड़े उपलब्ध न होने से इससे जुड़े लोगों को सहायता पहुँचाना एक बड़ी चुनौती रही है। साथ ही इस क्षेत्र के लिये किसी विशेष आर्थिक तंत्र के अभाव में छोटे व्यापारियों को स्थानीय कर्ज़दारों से महँगी दरों पर ऋण लेना पड़ता है। पीएम स्वनिधियोजना के माध्यम से छोटे व्यापारियों को आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध करा कर ऐसे लोगों को COVID-19 के कारण हुए नुकसान से उबरने में सहायता प्रदान की जा सकेगी। इस योजना के अंतर्गत 2 जुलाई 2020 को ऋण देने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 1.54 लाख से अधिक सड़क विक्रेताओं ने ऋण के लिए आवेदन किया है जिनमे से, 48,000 से अधिक को इस योजना के तहत ऋण स्वीकृत किया जा चूका है। यह प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए लोगों की क्षमता को बढ़ाने और कोरोना संकट के समय कारोबार को नए सिरे से खड़ा कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देंगे।

आत्मनिर्भर भारत पर निबंध

Introduction : 

आपदा को अवसर में बदलने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की गयी। पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज देने की भी घोषणा की है जो कि भारत की जीडीपी का 10% है।  इस पैकेज का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में तरलता लाकर आत्मनिर्भर भारत मिशन के उद्देश्यों को पूरा करना है। इस योजना का उद्देश्य 130 करोड़ भारतवासियों को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि देश का हर नागरिक संकट की इस घड़ी में कदम से कदम मिलाकर चल सके और कोविड-19 की महामारी को हराने में अपना योगदान दे सके।

कोरोना वायरस के कारण पूरे देश के लॉक डाउन की स्थिति चल रही है जिसका सबसे ज्यादा बुरा असर देश के सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों , श्रमिकों ,मजदूरों और किसानो पर पड़ रहा है इन सभी नागरिको को लाभ पहुंचाने के लिए हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने देश के सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों, श्रमिकों ,मजदूरों और किसानो को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आर्थिक पैकेज का ऐलान कर दिया।

  • पूरे विश्व मे केवल भारत ही ऐसा देश है जहां सबसे अधिक प्राकृतिक संसाधन पाये जाते है, जो कि बिना किसी देश की मदद से जीवन से लेकर राष्ट्र निर्माण की वस्तुएं बना सकता है और आत्मनिर्भर के सपने को पूरा कर सकता है।
  • हालाकि भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सपना नया है। यह सपना महात्मा गांधी ने आजादी के बाद ही स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया था, पर गरीबी और भुखमरी के कारण उनका सपना साकार न हो सका।
  • करोना महामारी के कारण पिछले कई महीनों से सारा विश्व बन्द पड़ा है, जिसके कारण छोटे लोगों से लेकर पूंजीपतियों तक को भारी नुकसान और परेशानीयों का सामना करना पड रहा है।
  • खासतौर से हमारे छोटे और मध्यम वर्ग के परिवारों को कमाने खाने की समस्या काफी बढ़ गयी है। कोरोना महामारी के कारण किसी भी देश से सामानों का आदान-प्रदान बन्द है।
  • इसलिए मई के महीने मे तालाबन्दी के दौरान हमारे प्रधानमंत्री ने देश को आत्मनिर्भर बनने का आह्वाहन किया है। उन्होने “लोकल फॉर वोकल” का भी नारा दिया। जिसका अर्थ है कि लोकल मे बनी वस्तुओं का उपयोग और उनका प्रचार करना और एक पहचान के रुप मे आगे बढ़ना।
  • महामारी के दौरान ही चीन ने भारत के डोकलाम सीमा क्षेत्र मे कब्जा करने की कोशिश की, जिसमे भारत के लगभग 20 जवान शहीद हो गए। सीमा के इस विवाद मे भारत के सैनिकों की क्षति के कारण देश के हर कोने से चीनी सामान को बैन करने की माँग के साथ ही, चीनी सामानो को बन्द कर दिया गया और प्रधानमंत्री ने सारे देश को आत्मनिर्भर बनने का मंत्र दिया। उन्होने कहा कि आत्मनिर्भर बनकर घरेलु चीजों का इस्तेमाल करें ताकि हमारा राष्ट्र मजबूती के साथ खड़ा हो सके।
  • पिछले कुछ महीनों से विश्व कोरोना वायरस महामारी के कारण बन्द पड़ा है। इसके कारण सारे विश्व मे वित्तीय संकट के बादल छाएं है।
  • इसी कड़ी मे भारत ने खुद को आत्मनिर्भर बनाने और राष्ट्र को आगे ले जाने फैसला किया है। विश्व बन्दी के कारण सारे विश्व के उत्पादों पर भारी असर हुआ है, इसलिए भारत ने स्वयं को आत्मनिर्भर बनाकर देश की तरक्की पर अपना कदम आगे बढ़ाया है।

आत्मनिर्भर भारत फायदे –

  • आत्मनिर्भर भारत से हमारे देश मे उद्योगों की संख्या मे वृद्धि होगी।
  • हमारे देश को और देशो से सहायता कम लेनी होगी।
  • हमारे देश मे रोजगार के अधिक अवसर पैदा होगें।
  • इससे देश मे बेरोजगारी के साथ-साथ गरीबी से मुक्ति मे सहायता मिलेगी।
  • भारत की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हो सकेगी।
  • आत्मनिर्भर बनने के साथ भारत चीजों का भंड़ारण काफी अधिक कर सकता है।
  • देश आगे चलकर अन्य देशों से आयात कम और निर्यात ज्यादा कर सकेगा।
  • आपदा की स्थिति मे भारत बाहरी देशों से मदद की मांग कम होगी।
  • देश मे स्वदेशी वस्तुओं का निर्माण कर देश की तरक्की को शीर्ष तक ले जाने मे सहायता मिलेगी।

आत्मनिर्भर भारत की घोषणा के तहत भारत के प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता के लिए पांच महत्वपूर्ण चीजे बाताई है।

  1. इंटेंट यानी इरादा करना।
  2. इन्क्लूजन या समावेश करना।
  3. निवेश या इन्वेस्टमेन्ट करना।
  4. इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी सार्वजनिक ढ़ाचे को मजबूत करना।
  5. नयी चीजों का खोज करना।
  • इस महामारी के दौरान कुछ हद तक हमने आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया है और बिना अन्य देश की मदद से इस महामारी से लड़ने के लिए हमने देश मे ही चीजों का निर्माण करना शुरु कर दिया है।
  • जहां हमने पीपीई किट, वेन्टिलेटर, सेनेटाइजर और के.एन-95 मास्क का निर्माण अपने देश मे ही शुरु कर दिया है। पहले यही चीजे हमे विदेशों से मंगानी पड़ती थी। इन सभी चीजों का निर्माण भारत मे करना ही आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ने का पहला कदम है। इनके उत्पादन से हमे अन्य देशों की मदद भी नही लेनी पड़ रही है, और भारत आत्मनिर्भरता की ओर आगे कदम बढ़ा रहा है।
  • आत्मनिर्भरता की ओर भारत ने पीपीई किट, वैन्टिलेटर इत्यादि चीजों को बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर  अपना पहला कदम बढ़ा दिया है और हमे भी इसमे अपना योगदान देकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करना होगा।

Conclusion :

हमे ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने की आवश्यकता है। जिससे कि हम अपने देश को आत्मनिर्भर और अपने राष्ट्र को आगे बढ़ाने मे अपना योगदान कर सके। आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा देश के किसानों की आय को दोगुना करने और कोविड-19 की आपदा के मद्देनजर किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए एक बेहतर कदम है। यह मिशन हमारे देश को आयात निर्भरता में कमी करने एवं वैश्विक बाजारों में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के महत्व पर भी जोर देगा। इस अभियान के अंतर्गत देश के मजदूर श्रमिक किसान लघु उद्योग कुटीर उद्योग मध्यमवर्गीय उद्योग सभी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जो कि भारत के गरीब नागरिको की आजीविका का साधन है।

कोरोना वायरस का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

Introduction : 

कोरोनावायरस (COVID-19) एक संक्रामक रोग है जो कोरोनावायरस के कारण होता है। इसकी शुरुआत पहली बार दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से हुई। डब्ल्यूएचओ ने 30 जनवरी को कोरोनवायरस को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। कोरोनावायरस न केवल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है बल्कि दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर रहा है। विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, व्यापार के मामले में, चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। विश्व के निर्यात का 13% और आयात का 11% केवल चीन से होता है। 

दुनिया के कई उद्योग अपने कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। पुरे विश्व में खरीदी जाने वाली लगभग एक तिहाई मशीनरी चीन से आती है, इसलिए कोरोनवायरस ने वैश्विक आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। चीन में कई कारखाने अब बंद हो गए हैं, निर्भर कंपनियों के लिए उत्पादन भी बंद हो गया है। उत्पादन में मंदी के कारण खपत में भी गिरावट आई है और इस तरह से दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है। कोरोनोवायरस फैलने के कारण लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण पर्यटन उद्योग को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कोरोना वायरस का आयात पर प्रभाव –

  • इस वायरस से हवाई यात्रा, शेयर बाज़ार, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं सहित लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
  • यह वायरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है।
  • इन दो अर्थव्यवस्थाओं, जिन्हें वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में जाना जाता है, संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है।
  • निवेशकों के बाज़ारों से बाहर निकलने के कारण शेयर बाज़ार सूचकांक में लगातार गिरावट आई है। लोग बड़ी राशि को अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र यथा- ‘सरकारी बाॅण्ड’ में लगा रहे हैं जिससे कीमतों में तेज़ी तथा उत्पादकता में कमी देखी गई है।
  • अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे खराब अनुभव हाल ही में कोरोना वायरस के कारण महसूस किया गया, ध्यातव्य है कि अमेरिकी बाज़ार में 12% से अधिक की गिरावट आई है।
  • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि जो निवेशक ऐसे संकट के समय सामान्यत: स्वर्ण में निवेश करते हैं, इस संकट के समय उन्होंने इसका भी बहिष्कार कर दिया जिससे सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, तथा लोगों ने सरकारी गारंटी युक्त ‘ट्रेज़री बिल’ (Treasury Bills) में अधिक निवेश करना उचित समझा।
  • Apple, Nvidia, Adidas जैसी कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ये चीन के आपूर्तिकर्त्ताओं पर निर्भर हैं, इन्हें भविष्य में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव –

  • भारत जब अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में इस वायरस का केवल सतही प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा ऐसे कठिन समय में समस्या का समाधान मात्र ‘एयर लिफ्टिंग’ से संभव नहीं है।
  • यह समस्या न केवल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करेगी, अपितु यह भारत के फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।
  • निर्यात, जिसे अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है, इसमें वैश्विक मंदी की स्थिति में और गिरावट देखी जा सकती है, साथ ही निवेश में भी गिरावट आ सकती है।
  • भारतीय कंपनियाँ चीन आधारित ‘वैश्विक आपूर्ति शृंखला’ में शामिल प्रमुख भागीदार नहीं हैं, अत: भारतीय कंपनियाँ इससे अधिक प्रभावित नहीं होंगी।
  • दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जो कि वृहद् अर्थव्यवस्था और उच्च मुद्रास्फीति के चलते अच्छी खबर है।
  • भारत सरकार को लगातार विकास की गति का अवलोकन करने की आवश्यकता है, साथ ही चीन पर निर्भर भारतीय उद्योगों को आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करनी चाहिये।
  • कोरोना वायरस जैसी बीमारी की पहचान, प्रभाव, प्रसार एवं रोकथाम पर चर्चा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जानी चाहिये ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।

Conclusion :

वायरस जनित यह संकट किसी अन्य वित्तीय संकट से बिलकुल अलग है। अन्य वित्तीय संकटों का समाधान समय-परीक्षणित उपायों जैसे- दर में कटौती, बेल-आउट पैकेज (विशेष वित्तीय प्रोत्साहन) आदि से किया जा सकता है, परंतु वायरस जनित संकट का समाधान इन वित्तीय उपायों द्वारा किया जाना संभव नहीं है। ऑटोमोबाइल उद्योग पहले ही आर्थिक मंदी के कारण संकट में है और अब माल और सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन में कमी आ रही है। चीन से आपूर्ति में रुकावट के कारण वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है। यद्यपि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कोरोनोवायरस के सटीक प्रभाव को निर्धारित करना मुश्किल है, फिर भी यह स्पष्ट है कि यह प्रभाव लंबे समय तक रहेगा।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना पर निबंध

Introduction : 

किसान भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन उनका जीवन दिन ब दिन और अधिक कठिन होता जा रहा है। किसानो की बिगड़ती हालत को देखते हुए सरकार ने “प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना” की शुरूआत की। यह योजना 1 दिसंबर, 2018 से प्रभावी हो गई है। इस योजना के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को एक सुनिश्चित आय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत देश भर में सभी किसान परिवारों को हर चार महीने में रु 2000 की तीन समान किस्तों में रु 6,000 की आय सहायता प्रदान की जाती है।

फंड सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता है। यह योजना नियमित रूप से किसानो को सुनिश्चित आय प्रदान करेगी। इस आय का उपयोग बीज, उर्वरक, उपकरण, श्रम और अन्य उभरती जरूरतों के लिए किया जा सकता है। लेकिन इस योजना की कुछ सीमाएँ भी हैं। इस योजना का का लक्ष्य छोटे और सीमांत किसानों को कवर करना है, भूमिहीन मजदूर और किरायेदार किसान इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते। कुछ राज्यों को छोड़कर, अन्य राज्यों में अभी भी भूमि रिकॉर्ड के लिए डेटाबेस नहीं बन पाए हैं।

  • इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने पीएम-किसान मोबाइल एप भी लॉन्च किया है।
  • इस एप का उद्देश्य योजना की पहुँच को और अधिक व्यापक बनाना है। इस एप के माध्यम से किसान अपने भुगतान की स्थिति जान सकते हैं, साथ ही योजना से संबंधित अन्य मापदंडों के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

पीएम-किसान योजना की मौजूदा स्थिति –

  • मौजूदा वित्तीय वर्ष के केंद्रीय बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के लिये 75,000 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है, जिसमें से 50,850 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है।
  • आँकड़ों के अनुसार, अब तक 8.45 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को इस योजना का लाभ पहुँचाया जा चुका है, जबकि इस योजना के तहत कवर किये जाने वाले लाभार्थियों की कुल संख्या 14 करोड़ है।
  • केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने घोषणा की है कि पीएम-किसान योजना के सभी लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card-KCC) प्रदान किया जाएगा, ताकि वे आसानी से बैंक से ऋण प्राप्त कर सकें।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 फरवरी, 2019 को लघु एवं सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी।
  • इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपए की दर से प्रत्यक्ष आय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
  • यह आय सहायता 2,000 रुपए की तीन समान किस्तों में लाभान्वित किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित की जाती है, ताकि संपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
  • आरंभ में यह योजना केवल लघु एवं सीमांत किसानों (2 हेक्टेयर से कम जोत वाले) के लिये ही शुरू की गई थी, किंतु 31 मई, 2019 को कैबिनेट द्वारा लिये गए निर्णय के उपरांत यह योजना देश भर के सभी किसानों हेतु लागू कर दी गई।
  • इस योजना का वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है। इस योजना पर अनुमानतः 75 हज़ार करोड़ रुपए का वार्षिक व्यय आएगा।

योजना का उद्देश्य –

  • इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य देश के लघु एवं सीमांत किसानों को प्रत्यक्ष आय संबंधी सहायता प्रदान करना है।
  • यह योजना लघु एवं सीमांत किसानों को उनकी निवेश एवं अन्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिये आय का एक निश्चित माध्यम प्रदान करती है।
  • योजना के माध्यम से लघु एवं सीमांत किसानों को साहूकारों तथा अनौपचारिक ऋणदाता के चंगुल से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

Conclusion :

देश में किसानों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता की यह योजना किसानों को एक आर्थिक आधार प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। हालाँकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के तहत दी जा रही सहायता राशि अपेक्षाकृत काफी कम है, किंतु हमें यह समझना होगा कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी निवेश संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिये एक आर्थिक आधार प्रदान करना है, ताकि वे फसल उत्पादन में नवीन तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीजों का प्रयोग कर उत्पादन में बढ़ोतरी कर सकें।

आवश्यक है कि योजना के मार्ग में स्थित विभिन्न बाधाओं को समाप्त कर इसे अधिक-से-अधिक किसानों के लिये लाभदायी बनाया जा सके। केंद्र सरकार को सार्वजनिक और निजी संस्थानों और बाजार एजेंसियों को उचित मूल्य पर कृषि क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करने की अनुमति देनी चाहिए एवं उसका लक्ष्य गरीबी कम करना, स्थायी खाद्य सुरक्षा और समावेशी विकास और किसानों की भलाई सुनिश्चित करना होना चाहिए। यह योजना न केवल गरीब किसान परिवारों को सुनिश्चित आय प्रदान करेगी, बल्कि उनकी उभरती जरूरतों को भी पूरा करेगी।

आयुष्मान भारत योजना पर निबंध

Introduction : 

प्रधान मंत्री जन आरोग्य अभियान, जिसे आयुष्मान भारत या राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन के रूप में भी जाना जाता है, इसे 23 सितंबर, 2018 को शुरू किया गया। यह योजना केवल गरीब और आर्थिक रूप से वंचित लोगों के लिए है। आयुष्मान भारत योजना को दुनिया के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम के रूप में भी जाना जाता है, इसमें 50 करोड़ से अधिक लाभार्थी शामिल हैं। इस योजना की घोषणा पीएम मोदी जी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में की और इसे 445 जिलों में एक साथ लॉन्च किया गया। आयुष्मान भारत एक ऐसी योजना है, जिसका उद्देश्य 10 करोड़ परिवारों या लगभग 50 करोड़ भारतीयों को स्वास्थ्यसेवा प्रदान करना है, जिन्हें प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कवर दिया जाएगा। यह योजना गरीब, वंचित ग्रामीण परिवारों पर केंद्रित है।

यह योजना लाभार्थी को कैशलेस और पेपरलेस सेवा प्रदान करेगी। अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में, लाभार्थी परिवारों के सदस्यों को योजना के तहत कुछ भी भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है, अगर लाभार्थी किसी सरकारी या निजी अस्पताल में जाता है जो इस योजना से जुड़ा हो। यह मुहिम सिर्फ भारत सरकार या राज्य सरकारों की नहीं है |

  • आयुष्मान भारत योजना देश की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक दोहरे दृष्टिकोण वाली योजना है। इसका पहला घटक जनसंख्या की बुनियादी स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों (एचडब्ल्यूसी) का गठन करना है।
  • देश भर के उप-केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को अपग्रेड करके तक़रीबन 1,50,000 एचडब्ल्यूसी बनाए गए थे। एचडब्ल्यूसी किसी भी वित्तीय मानदंड के बावजूद कुल आबादी की प्राथमिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को संबोधित करती है।
  • प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) का एक अन्य घटक ये है कि यह योग्य व्यक्तियों को 5 लाख रुपये का वार्षिक कवर प्रदान करता है। हालाँकि इसके लिए बुनियादी पात्रता मानदंड, व्यक्ति की खराब वित्तीय स्थिति है। इस योजना के तहत व्यक्ति के स्वास्थ्य को कवर का लाभ पाने के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों में ही भर्ती होना शामिल है।

आयुष्मान भारत योजना के मुख्य तथ्य –

  • यह योजना 10 करोड़ भारतीय परिवारों को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करता है।
  • यह जाति और धर्म, आदि के अनुसार किसी तरह का भेदभाव नहीं करता है।
  • यह योजना लगभग 50 करोड़ व्यक्तियों को सीधे प्रभावित करती हैं।
  • राज्य द्वारा दुनिया की सबसे बड़ी वित्त पोषित स्वास्थ्य योजना।
  • 14 अप्रैल 2018 को अम्बेडकर जयंती के अवसर पर आयुष्मान भारत के पहले चरण का उद्घाटन किया गया।
  • पीएम-जेएवाई 23 सितंबर, 2013 को लॉन्च किया गया; दीन दयाल उपाध्याय की जयंती से दो दिन पहले।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई)-ग्रामीण –

  • भारत की लगभग 75 फीसदी आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है। आंकड़ों से पता चलता है कि 85 फीसदी ग्रामीण आबादी के पास स्वास्थ्य बीमा या आश्वासन योजनाओं में से किसी भी तरह के सुविधा की पहुँच नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले अधिकांश लोगों को अपनी चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करदाताओं और अन्य स्रोतों से उधार के पैसे पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • यह प्रक्रिया आगे चलकर उन्हें ऋण के खांई में धकेल देता है और उनकी वित्तीय स्थिति को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। इसे ध्यान में रखते हुए, पीएम-जेएवाई गरीब ग्रामीण परिवारों को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करता है।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) – शहरी –

  • बात जब स्वास्थ्य बीमा योजनाओं की आती है, तो शहरी क्षेत्रों में भी काफी चिंताजनक आंकड़े सामने आने लगते हैं। गांवों की तुलना में अधिक सुविधाएँ होने के बावजूद, तक़रीबन 82 फीसदी घरों में किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य बीमा योजना नहीं है।
  • इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में रहने वाले तक़रीबन 20 फीसदी गरीब, उधार के पैसे से अपने चिकित्सा खर्चों को पूरा करते हैं। योग्य शहरी व्यक्तियों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाएगा।
  • पूर्व में, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं (एनएचपीएस) के तत्वावधान में सरकार द्वारा वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कई प्रयास किए गए थे।
  • इनमें से कुछ योजनाएँ थीं – राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई), वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना (एससीएचआईएस), केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस), आदि।
  • हालाँकि, इन योजनाओं ने स्वतंत्र रूप से काम किया और इनमें से कोई भी प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल से नहीं जुड़ी थी, जो गरीबों को परेशान करता है। पहले से मौजूद स्वास्थ्य बीमा योजनाओं की खामियों को दूर करने के उद्देश्य से, भारत सरकार ने आयुष्मान भारत योजना शुरू की।
  • पीएम-जेएवाई के तहत आवंटित 5 लाख रुपये की राशि का उपयोग न केवल एक व्यक्ति बल्कि पूरे परिवार द्वारा किया जा सकता है। कवर में ह्रदय रोग, बाल रोग, हड्डी रोग, आदि सहित 25 विशिष्टताओं में चिकित्सा और सर्जिकल खर्च शामिल हैं। साथ ही 5 लाख की राशि वार्षिक रूप से प्रदान की जाती है और यह उन स्थितियों में भी लागू होती है जब बीमारी पहले से ही होती है।
  • यह व्यय केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा 3:2 के हिस्से में साझा किया जाता है, जो कि 60 से 40 फीसदी तक है।
  • पीएम-जेएवाई कई गंभीर बीमारियों और सर्जरी जैसे प्रोस्टेट कैंसर, डबल वाल्व रिप्लेसमेंट, बाईपास सर्जरी, पल्मोनरी वाल्व रिप्लेसमेंट, स्कल बेस सर्जरी, रीढ़ की सर्जरी और जलने की सर्जरी, समेत अन्य कई सर्जरी को कवर करता है।

Conclusion :

आयुष्मान भारत योजना एक महत्वाकांक्षी योजना है जो गरीब भारतीय ग्रामीण और शहरी परिवारों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने का प्रयास करती है। इससे तक़रीबन 10 करोड़ भारतीय परिवारों का वित्तीय बोझ और कर्ज बचता है जो वे अन्य माध्यम के जरिये अपने स्वास्थ्य खर्चों को पूरा करने में लगाते हैं। साथ ही, यह योजना 2030 तक भारत को सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) तक पहुंचाएगी। इसमें सबसे बड़ी भूमिका आम नागरिक के साथ साथ सभी अस्पतालों, डाक्टरों, नर्सों तथा पैरा मेडिकल स्टाफ की भी है जिनके सहयोग से गरीब जनता को उसका हक़ मिल पाएगा | सरकार को स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट को बढ़ाकर स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढाँचे पर काम करने की आवश्यकता है| लाभार्थियों को इस योजना का लाभ तभी मिल सकता है जब प्राथमिक उपचार केंद्र मज़बूत हों और सरकार सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करे |

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Abhilash Kumar

The author Abhilash Kumar

Abhilash Kumar is the founder of “Studyguru Pathshala” brand & its products, i.e. YouTube, Books, PDF eBooks etc. He is one of the most successful bloggers in India. He is the author of India’s the best seller “Descriptive Book”. As a social activist, he has distributed his books to millions of deprived and needy students.

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